⚡ सीधी काम की बात (Quick Answer)
विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने 2026 में देश भर में mPassport Police App अनिवार्य कर दिया है, जिससे पुलिस सत्यापन का समय 21 दिन से घटकर अधिकतम 5 दिन हो गया है। बीट कांस्टेबल अब आवेदक के घर पर टैबलेट द्वारा जियो-टैग्ड जीपीएस लोकेशन और लाइव फोटो लेकर सत्यापन करता है। यदि आवेदक वर्तमान पते पर कम से कम 1 वर्ष से रह रहा है और कोई आपराधिक मुकदमा नहीं है, तो रिपोर्ट सीधे Clear दर्ज होती है।
mPassport Police App क्या है और इसने 2026 में क्या बदला?
पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया में नागरिकों के लिए सबसे अधिक तनावपूर्ण और समय लेने वाला चरण हमेशा से 'पुलिस वेरिफिकेशन' रहा है। पुरानी व्यवस्था में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) से आवेदक की व्यक्तिगत विवरण वाली कागजी फाइल (Personal Particulars Form) डाक या विशेष वाहक द्वारा जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस आयुक्त कार्यालय भेजी जाती थी। वहाँ से फाइल स्थानीय थाने के दीवान जी के पास जाती थी और फिर बीट कांस्टेबल के बस्ते में कई दिनों तक पड़ी रहती थी। इस कागजी चक्रव्यूह में औसतन 21 से 35 दिन का समय व्यर्थ होता था और कई बार अवैध वसूली की शिकायतें सामने आती थीं।
इस पूरी विसंगति को समाप्त करने के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) ने संयुक्त रूप से mPassport Police App को राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य कर दिया है। यह ऐप केंद्र सरकार के Crime and Criminal Tracking Network and Systems (CCTNS) के राष्ट्रीय डेटाबेस से सीधे जुड़ा हुआ है। अब जैसे ही आप पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) पर अपने बायोमेट्रिक्स जमा करते हैं, आपकी फाइल कुछ ही सेकंड में इलेक्ट्रॉनिक रूप से संबंधित थाने के बीट कांस्टेबल के सरकारी टैबलेट की स्क्रीन पर फ्लैश होने लगती है।
इस डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा नियम यह है कि बीट अधिकारी को आवेदक के पंजीकृत आवासीय पते पर स्वयं उपस्थित होकर ऐप के जरिए जियो-टैग्ड (Geo-tagged) जीपीएस लोकेशन दर्ज करनी होती है और आवेदक की मौके पर लाइव फोटो खींचनी होती है। अधिकारी को अधिकतम 5 कार्यदिवसों के भीतर अपनी ऑनलाइन रिपोर्ट सबमिट करनी होती है। ऐसा न करने पर पोर्टल पर स्वचालित रूप से 'Escalation Alert' जनरेट हो जाता है जो सीधे जिले के पुलिस कप्तान की स्क्रीन पर दिखाई देता है।
पुलिस सत्यापन के 3 आधिकारिक प्रकार (Pre, Post व No-PV)
पासपोर्ट नियमावली के अनुसार पुलिस सत्यापन हमेशा एक ही तरीके से नहीं होता। आवेदन की श्रेणी और आवेदक के प्रोफाइल के आधार पर इसे 3 कानूनी ड्राफ्टों में बांटा गया है:
- Pre-Police Verification (पूर्व सत्यापन - सबसे सामान्य):
सामान्य पासपोर्ट (Normal Category) के सभी नए आवेदनों में यह व्यवस्था लागू होती है। इसका सीधा नियम है: पहले पुलिस की क्लीन चिट, फिर पासपोर्ट की प्रिंटिंग। जब तक स्थानीय पुलिस थाने और जिला विशेष शाखा (Special Branch) से रिपोर्ट 'Clear' होकर आरपीओ के सिस्टम में नहीं पहुंचती, तब तक पासपोर्ट प्रिंटिंग मशीन में नहीं जाता। इसमें सामान्यतः 7 से 12 दिन का समय लगता है। - Post-Police Verification (पश्चात सत्यापन):
तत्काल पासपोर्ट योजना (Tatkaal Scheme) के तहत यह नियम लागू होता है। इसमें सरकार आवेदक के 3 पुख्ता पहचान प्रमाणों पर भरोसा करके पासपोर्ट तुरंत प्रिंट कर स्पीड पोस्ट से 1 से 3 दिन में आवेदक के घर भेज देती है। पासपोर्ट डिलीवर होने के बाद पुलिस सत्यापन की फाइल थाने को भेजी जाती है। कांस्टेबल पासपोर्ट मिलने के 15 दिनों के भीतर घर आकर जांच करता है। यदि इस जांच में कोई फर्जीवाड़ा पकड़ा जाता है, तो पासपोर्ट तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है। - No Police Verification (शून्य सत्यापन):
निम्नलिखित नागरिकों को किसी भी प्रकार के पुलिस सत्यापन की आवश्यकता नहीं होती और उनका पासपोर्ट बिना किसी पुलिस जांच के 48 घंटों में जारी हो जाता है:- 18 वर्ष से कम उम्र के वे नाबालिग बच्चे जिनके माता-पिता दोनों के पास वैध पासपोर्ट हैं और पते में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
- केंद्र या राज्य सरकार के नियमित कर्मचारी, जिन्होंने अपने विभागाध्यक्ष से 'Identity Certificate' (Annexure A) संलग्न किया है।
- पासपोर्ट रिन्यू कराने वाले वे नागरिक जिनका पुराना पासपोर्ट समाप्त हुए 3 वर्ष से कम समय हुआ है और उनके नाम, पते या व्यक्तिगत विवरण में शून्य बदलाव है।
सत्यापन के लिए अनिवार्य दस्तावेजों की चेकलिस्ट (1 वर्ष का नियम)
जब बीट कांस्टेबल आपके घर भौतिक सत्यापन के लिए आए, तो आपके पास निम्नलिखित मूल दस्तावेज और उनकी स्व-प्रमाणित (Self-Attested) फोटोकॉपी तैयार होनी चाहिए:
- वर्तमान पते का ठोस प्रमाण (Address Proof): आधार कार्ड (जिसमें वही वर्तमान पता हो), पिछले 3 महीने का बिजली का बिल, पानी का बिल, पीएसयू बैंक की फोटोयुक्त पासबुक, या गैस कनेक्शन की उपभोक्ता डायरी।
- 1 वर्ष का निरंतर निवास नियम (The 1-Year Continuous Stay Rule): पासपोर्ट अधिनियम के तहत यह अनिवार्य शर्त है कि आवेदक आवेदन की तारीख से ठीक पहले के 1 वर्ष के निवास का पूरा हिसाब दे। यदि आप वर्तमान पते पर केवल 4 महीने से रह रहे हैं, तो आपको फॉर्म में अपने पिछले पते का भी उल्लेख करना होगा। इस स्थिति में आपके वर्तमान और पूर्व दोनों पुलिस थानों में समानांतर वेरिफिकेशन होगा। दोनों थानों से रिपोर्ट Clear आने पर ही पासपोर्ट जारी होगा।
- 2 स्थानीय पड़ोसियों के गवाह (Two Neighbour References):** आपके मोहल्ले, गली या अपार्टमेंट में रहने वाले ऐसे दो व्यक्तियों के नाम, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड की फोटोकॉपी जो यह प्रमाणित कर सकें कि वे आपको जानते हैं और आप इसी पते पर रहते हैं।
- पहचान व जन्मतिथि प्रमाण: मूल पैन कार्ड, 10वीं की अंकसूची (Non-ECR हेतु), और वोटर आईडी कार्ड।
बीट कांस्टेबल घर आकर क्या सवाल पूछता है और क्या जांचता है?
फील्ड में बीट कांस्टेबल द्वारा मुख्य रूप से 4 बिंदुओं की कानूनी जांच की जाती है:
1. निवास की सत्यता (Physical Residence Check): क्या आवेदक वास्तव में दिए गए पते पर सपरिवार या व्यक्तिगत रूप से निवास कर रहा है? कांस्टेबल आपके घर के मुख्य द्वार और आपके साथ एक लाइव सेल्फी/फोटो अपने टैबलेट ऐप से खींचता है जिसमें बैकग्राउंड का जीपीएस कोऑर्डिनेट अपने आप रिकॉर्ड हो जाता है।
2. भारतीय नागरिकता की पुष्टि (Citizenship Verification): क्या आवेदक जन्म से या पंजीकरण से भारत का नागरिक है? क्या उसके माता-पिता भारतीय हैं? किसी विदेशी शरणार्थी या अवैध घुसपैठिए की पहचान के लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा का बुनियादी नियम है।
3. आपराधिक इतिहास की पड़ताल (Criminal Antecedents Check): बीट कांस्टेबल अपने थाने के अपराध रजिस्टर और टैबलेट में CCTNS डेटाबेस में आवेदक का नाम और पिता का नाम डालकर सर्च करता है। वह यह जांचता है कि क्या आवेदक के खिलाफ कोई गैर-जमानती वारंट (NBW), कुर्की (Section 82/83 CrPC / 84 BNSS), या किसी गंभीर अपराध (Cognizable Offence) की एफआईआर तो दर्ज नहीं है?
4. पड़ोसियों के बयान: कांस्टेबल आपके द्वारा दिए गए दोनों पड़ोसियों से मौखिक रूप से पूछता है कि क्या आवेदक का चाल-चलन सामान्य है और क्या वह किसी असामाजिक गतिविधि में लिप्त तो नहीं रहा है।
वेरिफिकेशन स्टेटस कोड, अर्थ व समाधान सारणी (5-कॉलम)
पासपोर्ट सेवा पोर्टल के ट्रैकर पर पुलिस वेरिफिकेशन के विभिन्न स्टेटस कोड दिखाई देते हैं। नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक कोड का आधिकारिक अर्थ, कारण और समाधान प्रस्तुत है:
| वेरिफिकेशन स्टेटस कोड | पोर्टल पर वास्तविक अर्थ | संभावित कारण | नागरिक के लिए आवश्यक कानूनी कदम | औसत निस्तारण समय |
|---|---|---|---|---|
| Clear (Recommended) | सत्यापन 100% सफल | सभी दस्तावेज व आपराधिक रिकॉर्ड साफ हैं | कुछ नहीं करना; फाइल सीधे प्रिंटिंग क्यू में जाती है | 24 - 48 घंटे |
| Adverse (Address) | निवास असत्यापित | आवेदक घर पर नहीं मिला या ताला लगा था | एसपी ऑफिस पासपोर्ट सेल जाकर री-वेरिफिकेशन अर्जी दें | 7 - 15 दिन |
| Adverse (Criminal) | आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज | एफआईआर, चार्जशीट या पुराना लंबित केस | संबंधित कोर्ट से बरी आदेश (Acquittal) या Court NOC लाएं | 30 - 45 दिन |
| Incomplete Docs | दस्तावेज अपूर्ण | पड़ोसियों की आईडी या रेंट एग्रीमेंट छूट गया | बीट अधिकारी को 48 घंटे में शेष दस्तावेज सौंपें | 3 - 5 दिन |
| Pending at Police | थाने में प्रक्रियाधीन | बीट कांस्टेबल ने रिपोर्ट अपलोड नहीं की | संबंधित थाने के एसएचओ (SHO) या जांच अधिकारी से मिलें | 5 - 7 दिन |
Adverse या Negative रिपोर्ट आने पर क्या करें? (30-दिवसीय SOP)
यदि पुलिस सत्यापन में किसी कारणवश 'Adverse' (प्रतिकूल) रिपोर्ट चली जाती है, तो पासपोर्ट स्वतः रद्द नहीं होता। पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 12 के तहत क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) आवेदक को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर अपनी बात रखने का पूरा अवसर देता है।
स्टेप 1: कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) की प्रतीक्षा करें:
जैसे ही नेगेटिव रिपोर्ट आरपीओ पहुंचती है, सिस्टम से एक आधिकारिक नोटिस आवेदक के पते पर स्पीड पोस्ट और ईमेल द्वारा भेजा जाता है। इस नोटिस में फाइल नंबर और Adverse होने का विशिष्ट कारण (जैसे 'Adverse PVR received from SP Office') दर्ज होता है।
स्टेप 2: 30 दिन की सख्त समय-सीमा:
आवेदक को नोटिस जारी होने की तारीख से ठीक 30 दिनों के भीतर अपना औपचारिक लिखित स्पष्टीकरण (Written Explanation) आरपीओ को सौंपना होता है। यदि आप 30 दिन में जवाब नहीं देते हैं, तो पासपोर्ट आवेदन को स्थायी रूप से निरस्त कर फाइल बंद कर दी जाती है और नई फीस लग सकती है।
स्टेप 3: व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing Appointment):
पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर अपने खाते में लॉगिन करें और 'Schedule Appointment for Enquiry / Clarification' के तहत आरपीओ में व्यक्तिगत सुनवाई का स्लॉट बुक करें।
स्टेप 4: आवश्यक दस्तावेजों के साथ आरपीओ में उपस्थिति:
सुनवाई के दिन अपने साथ कारण बताओ नोटिस की मूल प्रति, अपना विस्तृत लिखित उत्तर, और वे सभी कागजात लेकर जाएं जो पुलिस की आपत्ति को गलत साबित करते हों (उदा. यदि पुलिस ने कहा कि आप पते पर नहीं रहते, तो मकान मालिक का नोटरी बयान, बिजली का बिल और पड़ोसियों का नया घोषणा पत्र लेकर जाएं)। आरपीओ अधिकारी संतुष्ट होने पर सिस्टम से उसी समय 'Clear' का आदेश जारी कर देता है।
आपराधिक केस व कोर्ट एनओसी (Court NOC) से पासपोर्ट पाने का नियम
यदि किसी नागरिक के खिलाफ पुलिस में कोई एफआईआर दर्ज है या अदालत में कोई आपराधिक मुकदमा (Criminal Trial) विचाराधीन है, तो पुलिस कांस्टेबल अपनी रिपोर्ट में 'Adverse' ही लिखेगा क्योंकि उसके पास केस दबाने का अधिकार नहीं होता। लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि उस नागरिक को जीवन भर पासपोर्ट नहीं मिल सकता।
विदेश मंत्रालय की अधिसूचना संख्या GSR 570(E):
केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति पर अदालत में आपराधिक मुकदमा चल रहा है, तो वह उस ट्रायल कोर्ट (मजिस्ट्रेट या सत्र न्यायालय) में 'Application for Permission to Travel Abroad / Issue of Passport' की अर्जी लगा सकता है।
यदि माननीय अदालत यह पाती है कि आरोपी नियमित रूप से तारीखों पर पेश हो रहा है और उसके देश छोड़कर भागने का कोई खतरा नहीं है, तो अदालत पासपोर्ट जारी करने की **Court NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र)** जारी कर देती है। अदालत के इस आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) आरपीओ में जमा करने पर पासपोर्ट अधिकारी पासपोर्ट जारी करने के लिए कानूनन बाध्य होता है। न्यायालय के आदेश के आधार पर सामान्यतः 1 वर्ष की सीमित वैधता वाला पासपोर्ट जारी किया जाता है जिसे बाद में रिन्यू कराया जा सकता है।
किराएदारों, हॉस्टल छात्रों व नौकरीपेशा लोगों के लिए विशेष नियम
भारत में लाखों युवा अपने गृह राज्य से दूर दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे जैसे शहरों में किराए पर रहकर पढ़ाई या नौकरी कर रहे हैं। उनके मन में यह बड़ा संशय होता है कि क्या वे अपने वर्तमान किराए के पते पर पासपोर्ट बनवा सकते हैं?
किराएदारों के लिए नियम:
आप 100% अपने वर्तमान किराए के मकान के पते पर पासपोर्ट बनवा सकते हैं। इसके लिए आपको अपने मूल गांव या गृह जनपद जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। आवश्यक दस्तावेज: कम से कम 1 वर्ष पुराना **रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट (Registered Rent Agreement)** या नोटरीकृत रेंट एग्रीमेंट के साथ आपके नाम का बैंक खाता जिसमें किराए का पता दर्ज हो। बीट कांस्टेबल जब वेरिफिकेशन के लिए आएगा तो वह मकान मालिक से भी मौखिक पुष्टि कर सकता है।
कॉलेज व यूनिवर्सिटी हॉस्टल के छात्रों के लिए नियम:
यदि छात्र कॉलेज हॉस्टल या अधिकृत पीजी (Paying Guest) में रहता है, तो उसे अपने कॉलेज के डीन, रजिस्ट्रार, या हॉस्टल वार्डन से कॉलेज के आधिकारिक लेटरहेड पर एक **'Bonafide Certificate'** प्राप्त करना होता है जिसमें यह प्रमाणित हो कि छात्र पिछले 1 वर्ष से इसी हॉस्टल में निवास कर रहा है। यह प्रमाण पत्र पुलिस वेरिफिकेशन के लिए पूर्णतः मान्य होता है।
पुलिस टालमटोल या पैसे मांगे तो कहाँ और कैसे शिकायत करें?
पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन भारत सरकार द्वारा नागरिक को दी जाने वाली एक निःशुल्क सार्वजनिक सेवा है (इसकी फीस आपके ₹1,500 के मूल चालान में शामिल होती है)। बीट कांस्टेबल या थाने के किसी भी कर्मचारी को एक भी रुपया नकद या चाय-पानी के नाम पर मांगने का कोई कानूनी हक नहीं है।
यदि कोई पुलिसकर्मी रिपोर्ट Clear लगाने के नाम पर रिश्वत की मांग करता है या आपके वैध दस्तावेज होने के बावजूद जानबूझकर वेरिफिकेशन लटकाता है, तो निम्नलिखित 3 स्तरों पर सीधी कानूनी कार्रवाई करें:
- एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB / Vigilance) हेल्पलाइन 1064: अपने राज्य के सतर्कता विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1064 पर कॉल करें। यह कॉल सीधे मुख्यालय में रिकॉर्ड होती है और स्थानीय पुलिस इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
- एसपी / पुलिस कमिश्नर के पासपोर्ट सेल में लिखित शिकायत: अपने जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या डीसीपी कार्यालय के पासपोर्ट सेल में जाकर एक सादे कागज पर बीट कांस्टेबल का नाम और थाने का नाम लिखकर शिकायत दें कि सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद रिपोर्ट रोकी जा रही है। एसपी ऑफिस से तुरंत बीट अधिकारी को स्पष्टीकरण का निर्देश जाता है।
- CPGRAMS व MEA पोर्टल पर शिकायत: केंद्र सरकार के शिकायत पोर्टल
pgportal.gov.inपर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। चूंकि यह विदेश मंत्रालय और पीएमओ (PMO) द्वारा मॉनिटर होता है, इसलिए संबंधित जिले के पुलिस विभाग को 7 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करनी पड़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask FAQs)
1. क्या पुलिस वेरिफिकेशन के लिए थाने जाना जरूरी होता है?
विदेश मंत्रालय के नियमों के अनुसार बीट कांस्टेबल को आवेदक के घर जाकर भौतिक सत्यापन करना होता है; आवेदक को जबरन थाने बुलाना नियमसंगत नहीं है, जब तक कोई गंभीर दस्तावेज विवाद न हो।
2. अगर मेरा किसी से पारिवारिक विवाद या सिविल केस चल रहा हो, तो क्या रिपोर्ट Adverse होगी?
नहीं, केवल संज्ञेय आपराधिक मामले (FIR या Charge Sheet) ही रिपोर्ट में दर्ज होते हैं; दीवानी (Civil) मुकदमे, चेक बाउंस, या पारिवारिक विवाद से पासपोर्ट नहीं रुकता।
3. क्या ट्रैफिक चालान लंबित होने से पुलिस वेरिफिकेशन रुक सकता है?
सामान्य ई-चालान से कोई फर्क नहीं पड़ता जब तक कि अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी न किया गया हो।
4. अगर पुलिसकर्मी रिपोर्ट लगाने के लिए पैसे मांगे तो क्या करें?
कदापि पैसे न दें। राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) हेल्पलाइन 1064 पर शिकायत करें या एसपी/कमिश्नर कार्यालय के पासपोर्ट सेल में लिखित शिकायत दें।
5. पुलिस रिपोर्ट Adverse हो जाने पर क्या नया पासपोर्ट आवेदन करना पड़ेगा?
नहीं, उसी ARN नंबर पर RPO से कारण बताओ नोटिस आता है। नोटिस का वैध जवाब और सही दस्तावेज देने पर वही पासपोर्ट क्लियर हो जाता है।
6. क्या 1 वर्ष में दो जगह रहने पर दोनों थानों से वेरिफिकेशन होता है?
हाँ, यदि आप पिछले 1 वर्ष में दो अलग-अलग पतों पर रहे हैं, तो दोनों संबंधित पुलिस थानों में समानांतर डिजिटल वेरिफिकेशन होता है।
7. पुलिस वेरिफिकेशन का ऑनलाइन स्टेटस कैसे चेक करें?
Passport Seva पोर्टल पर लॉग इन करके Track Application Status में जाएं और Passport चुनकर अपना 15 अंकों का फाइल नंबर दर्ज करें।
8. नाबालिग बच्चों का पुलिस वेरिफिकेशन कैसे होता है?
यदि माता-पिता के पास वैध पासपोर्ट हैं और पता समान है, तो नाबालिगों का कोई पुलिस सत्यापन नहीं होता (No-PV नियम लागू होता है)।
आधिकारिक ट्रैकर व क्लस्टर गाइड्स
पासपोर्ट प्रक्रिया को संपूर्ण रूप से समझने के लिए हमारे इन संबंधित गाइड्स का अध्ययन करें:
- तत्काल पासपोर्ट 2026: 3 दिन में पासपोर्ट पाने के नियम, फीस व 13 दस्तावेज
- ECR vs Non-ECR पासपोर्ट नियम: 18 गल्फ देश व 10वीं मार्कशीट से स्टेटस बदलने की SOP
- फटा, खोया या एक्सपायर्ड पासपोर्ट री-इश्यू: Annexure L हलफनामा व पुलिस NCR नियम
- पासपोर्ट स्टेटस ट्रैकिंग व स्पीड पोस्ट डिलीवरी: Under Review at RPO का समाधान
- Police Clearance Certificate (PCC) ऑनलाइन अप्लाई व विदेशी वीजा नियम
आधिकारिक पासपोर्ट स्टेटस ट्रैकर: passportindia.gov.in/AppOnlineProject/statusTracker/trackStatusInpNew | राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 1800-258-1800