📌 मुख्य बातें (Key Takeaways - Cashless Everywhere)
- पैनल की बाध्यता समाप्त: भारत के किसी भी पंजीकृत अस्पताल में, चाहे वह बीमा कंपनी के नेटवर्क में हो या न हो, मरीज कैशलेस इलाज का हकदार है।
- 48 घंटे का सूचना नियम: पूर्व-निर्धारित (Planned) इलाज के लिए भर्ती से 48 घंटे पहले और आपातकालीन (Emergency) स्थिति में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचना देना अनिवार्य है।
- 1 घंटे में प्री-ऑथराइजेशन: अस्पताल से अनुरोध प्राप्त होने के ठीक 60 मिनट के भीतर बीमा कंपनी या TPA को प्राथमिक अप्रूवल जारी करना होगा।
- 3 घंटे में फाइनल डिस्चार्ज: अस्पताल द्वारा अंतिम डिस्चार्ज समरी और बिल भेजने के 3 घंटे के भीतर क्लेम सेटलमेंट अप्रूवल देना अनिवार्य है।
- देरी पर पेनाल्टी: यदि बीमा कंपनी 3 घंटे की समय सीमा पार करती है, तो अस्पताल द्वारा अतिरिक्त घंटे के कमरे के किराए या विलंब शुल्क का भुगतान बीमा कंपनी को अपनी जेब से करना होगा।
🌐 आधिकारिक नियामक स्रोत: भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI Portal) | National Health Claims Exchange (NHCX)
IRDAI का 'Cashless Everywhere' नियम क्या है और यह कैसे काम करता है? (AEO Direct Answer)
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) के समन्वय से 'Cashless Everywhere' पहल को संपूर्ण देश में अनिवार्य किया है। पारंपरिक रूप से बीमा धारक केवल उन्हीं अस्पतालों में कैशलेस सुविधा प्राप्त कर सकते थे, जो उनकी संबंधित बीमा कंपनी के पैनल (Network Hospitals) में सूचीबद्ध थे। यदि कोई मरीज किसी गैर-नेटवर्क अस्पताल में इलाज करवाता था, तो उसे अपनी जेब से संपूर्ण बिल का भुगतान करना पड़ता था और बाद में महीनों तक रीइंबर्समेंट (Reimbursement) के लिए बिल, डिस्चार्ज समरी और जांच रिपोर्ट जमा करनी पड़ती थी। नए नियम के तहत, यदि किसी अस्पताल में कम से कम 15 इन-पेशेंट बेड हैं और वह संबंधित राज्य के क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (Clinical Establishments Act) अथवा रोहिणी (ROHINI - Registry of Hospitals in Network of Insurance) पोर्टल पर पंजीकृत है, तो वह गैर-नेटवर्क होने के बावजूद कैशलेस इलाज प्रदान करने के लिए बाध्य है।
इस व्यवस्था को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए सरकार और आईआरडीएआई ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय (National Health Claims Exchange - NHCX) प्लेटफॉर्म तैयार किया है। NHCX के जरिए अस्पताल, बीमा कंपनी और थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) एक साझा डिजिटल नेटवर्क से जुड़ जाते हैं। जैसे ही अस्पताल मरीज का ई-कार्ड और आईडी प्रूफ अपलोड करता है, क्लेम की प्रक्रिया रियल टाइम में शुरू हो जाती है। यह व्यवस्था आम नागरिक को उस भीषण मानसिक और आर्थिक तनाव से बचाती है, जब आपातकाल में पैसे की कमी के कारण इलाज में देरी होती थी।
नियम की कानूनी पृष्ठभूमि और IRDAI का मास्टर सर्कुलर (29 मई 2024)
IRDAI ने 29 मई 2024 को जारी अपने व्यापक मास्टर सर्कुलर में स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र के नियमों को पूरी तरह उपभोक्ता-हितैषी बनाया है। नियामक ने स्पष्ट आदेश दिया है कि बीमा कंपनियां नेटवर्क के नाम पर मरीजों को कैशलेस से वंचित नहीं कर सकतीं। यदि कोई अस्पताल बुनियादी स्वास्थ्य मानकों को पूरा करता है और मरीज की पॉलिसी सक्रिय है, तो कैशलेस क्लेम को प्राथमिक विकल्प के रूप में प्रोसेस करना होगा। यदि कोई बीमा कंपनी अनावश्यक तकनीकी कारणों का हवाला देकर गैर-नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस क्लेम से इनकार करती है, तो ग्राहक सीधे आईआरडीएआई के बीमा भरोसा पोर्टल (Bima Bharosa) और बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास शिकायत दर्ज करा सकता है, जहां कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
5-कॉलम तुलना तालिका: नेटवर्क अस्पताल vs गैर-नेटवर्क 'Cashless Everywhere' व्यवस्था (2026)
नीचे दी गई तालिका में पारंपरिक नेटवर्क अस्पताल और नए 'कैशलेस एवरीवेयर' गैर-नेटवर्क अस्पताल के बीच के सभी नियमों, समय-सीमाओं और व्यावहारिक प्रावधानों की विस्तृत तुलना दी गई है:
| मापदंड / विषय | पारंपरिक नेटवर्क अस्पताल (Network) | गैर-नेटवर्क (Cashless Everywhere) | IRDAI विनियामक समय-सीमा | काम की ज़मीनी टिप |
|---|---|---|---|---|
| अस्पताल में बेड की बाध्यता | कंपनी के पैनल अनुसार अलग-अलग | न्यूनतम 15 इन-पेशेंट बेड पंजीकृत | क्लिनिकल एक्ट/रोहिणी पंजीकृत | भर्ती से पहले अस्पताल का ROHINI ID जरूर पूछें। |
| सूचना देने की समय-सीमा | भर्ती के 24 घंटे के भीतर | प्लांड: 48 घंटे पूर्व, इमरजेंसी: 48 घंटे में | लिखित/ई-मेल द्वारा ट्रैकेबल | बीमा कंपनी के टोल-फ्री व ऐप दोनों पर टिकट जेनरेट करें। |
| प्री-ऑथराइजेशन निर्णय | 2 से 4 घंटे का औसत समय | ठीक 60 मिनट (1 घंटा) अनिवार्य | 1 घंटा (IRDAI Master SOP) | यदि 1 घंटे में जवाब न आए तो TPA डेस्क पर शिकायत संख्या दें। |
| फाइनल डिस्चार्ज सेटलमेंट | 3 से 6 घंटे तक की देरी आम | अधिकतम 3 घंटे के भीतर पूर्ण सेटलमेंट | 3 घंटे की सख्त डेडलाइन | अस्पताल द्वारा फाइनल बिल भेजने का टाइम-स्टैम्प पर्ची पर दर्ज कराएं। |
| अतिरिक्त विलंब शुल्क का भुगतान | मरीज की जेब से वसूला जाता था | बीमा कंपनी वहन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य | IRDAI Circular 2024 | अस्पताल यदि एक्स्ट्रा डे चार्ज मांगे, तो IRDAI नियम उद्धृत करें। |
🚨 नागरिक सावधानी: गैर-नेटवर्क अस्पताल में इन 3 कारणों से अटक सकता है कैशलेस क्लेम
ध्यान रखें कि 'Cashless Everywhere' का अर्थ यह नहीं है कि आप किसी भी अनरजिस्टर्ड क्लिनिक या नर्सिंग होम में चले जाएं। यदि अस्पताल स्थानीय निकाय या स्टेट क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में 15 बेड के साथ पंजीकृत नहीं है, यदि अस्पताल स्वयं बीमा कंपनियों के साथ धोखाधड़ी के कारण 'Excluded Hospital List' (काली सूची) में डाला गया है, अथवा यदि आपने भर्ती होने के 48 घंटे बाद सूचना दी—तो बीमा कंपनी कैशलेस अनुरोध अस्वीकार कर सकती है। ऐसे मामलों में आपको रीइंबर्समेंट के रास्ते जाना पड़ेगा। हमेशा भर्ती से पहले अपनी बीमा कंपनी की ब्लैकलिस्टेड अस्पतालों की सूची ऑनलाइन जांच लें।
1-घंटे का प्री-ऑथराइजेशन और 3-घंटे का डिस्चार्ज नियम: कानूनी अधिकार
अस्पताल में भर्ती होने और विशेष रूप से छुट्टी (Discharge) के समय मरीजों और उनके परिजनों को सबसे ज्यादा प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था। डॉक्टर सुबह 10 बजे मरीज को छुट्टी दे देते थे, लेकिन टीपीए और बीमा कंपनी की लेटलतीफी के चलते रात 8 बजे तक फाइनल बिल अप्रूव नहीं होता था। इस दौरान अस्पताल उस दिन का भी पूरा कमरा किराया मरीज के खाते में जोड़ देता था। इस अमानवीय प्रथा को समाप्त करने के लिए आईआरडीएआई ने कड़े समय-सीमा नियम बनाए हैं:
1. प्री-ऑथराइजेशन पर 60 मिनट की घड़ी
जैसे ही गैर-नेटवर्क या नेटवर्क अस्पताल मरीज का प्री-ऑथराइजेशन फॉर्म, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन, अनुमानित खर्च (Estimate) और प्रारंभिक मेडिकल हिस्ट्री बीमा कंपनी या उसके टीपीए पोर्टल पर सबमिट करता है, 60 मिनट का काउंटडाउन शुरू हो जाता है। बीमा कंपनी को एक घंटे के अंदर या तो प्रारंभिक स्वीकृति (Initial Approval) देनी होगी या यदि किसी अतिरिक्त जांच रिपोर्ट की आवश्यकता है, तो उसकी सटीक मांग दर्ज करनी होगी। बिना ठोस चिकित्सीय कारण के अनुरोध को लंबित रखना गैर-कानूनी है।
2. डिस्चार्ज समरी और फाइनल अप्रूवल पर 3 घंटे की अंतिम सीमा
उपचार पूरा होने के बाद जब अस्पताल का बिलिंग विभाग अंतिम मेडिकल समरी, दवाइयों के वाउचर और डिस्चार्ज फॉर्म बीमा कंपनी को ऑनलाइन भेजता है, तो बीमा कंपनी के पास क्लेम सेटलमेंट लेटर जारी करने के लिए अधिकतम 3 घंटे का समय होता है। यदि बीमा कंपनी 3 घंटे के भीतर निर्णय नहीं देती, तो मरीज को अस्पताल में बंधक बनाकर नहीं रखा जा सकता। IRDAI के स्पष्ट निर्देश हैं कि समय सीमा बीतने के बाद अस्पताल द्वारा वसूला गया कोई भी अतिरिक्त बेड चार्ज या विलंब शुल्क बीमा कंपनी को अपने प्रशासनिक खाते से भरना होगा, इसे मरीज के क्लेम से नहीं काटा जा सकता।
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: गैर-नेटवर्क अस्पताल में 'Cashless Everywhere' क्लेम कैसे लें?
यदि आपके नजदीकी अस्पताल में आपकी बीमा कंपनी का सीधा टाई-अप नहीं है, तो कैशलेस इलाज प्राप्त करने के लिए इन 6 व्यावहारिक चरणों का पालन करें:
- कदम 1: अस्पताल की पात्रता सत्यापित करें: जांचें कि अस्पताल में कम से कम 15 इन-पेशेंट बेड, योग्य मेडिकल स्टाफ, चौबीसों घंटे चालू ऑपरेशन थिएटर (यदि सर्जरी हो) और वैध सरकारी पंजीकरण संख्या है।
- कदम 2: बीमा कंपनी को समय पर पूर्व-सूचना (Intimation) दें:
- प्लांड सर्जरी (Planned Hospitalization): अस्पताल में भर्ती होने की तारीख से कम से कम 48 घंटे पहले अपनी बीमा कंपनी के मोबाइल ऐप, वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके 'Cashless Request at Non-Network Hospital' का टिकट नंबर लें।
- आपातकाल (Emergency Hospitalization): अचानक दुर्घटना या गंभीर बीमारी में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर इंटिमेशन दर्ज कराएं।
- कदम 3: टीपीए हेल्पडेस्क पर दस्तावेज जमा करें: अस्पताल के TPA/Insurance Desk पर जाकर बताएं कि आप IRDAI के 'Cashless Everywhere' नियम के तहत भर्ती हो रहे हैं। वहां अपना हेल्थ इंश्योरेंस ई-कार्ड, पॉलिसी नंबर, आधार कार्ड और डॉक्टर की भर्ती पर्ची जमा करें।
- कदम 4: अस्पताल द्वारा कैशलेस रिक्वेस्ट सबमिट कराना: अस्पताल का बिलिंग डेस्क बीमा कंपनी के डेडिकेटेड पोर्टल या National Health Claims Exchange (NHCX) पर प्री-ऑथ फॉर्म अपलोड करेगा। अपने मोबाइल पर आए एसएमएस ट्रैकिंग लिंक पर नजर रखें।
- कदम 5: 1 घंटे में प्रारंभिक स्वीकृति प्राप्त करें: बीमा कंपनी 60 मिनट के भीतर इलाज की अनुमानित राशि के आधार पर प्रारंभिक अप्रूवल (जैसे ₹50,000 या ₹1,00,000) जारी करेगी। इसके बाद अस्पताल आपसे कोई बड़ा कैश डिपॉजिट नहीं मांग सकता।
- कदम 6: डिस्चार्ज के समय 3-घंटे में अंतिम सेटलमेंट: डिस्चार्ज वाले दिन अस्पताल अंतिम बिल अपलोड करेगा। 3 घंटे के भीतर बीमा कंपनी फाइनल क्लेम सेटलमेंट लेटर भेजेगी। नॉन-मेडिकल आइटम्स (जैसे ग्लव्स, सैनिटाइजर) को छोड़कर बाकी सारा बिल सीधे बीमा कंपनी द्वारा अस्पताल को चुका दिया जाएगा।
अगर गैर-नेटवर्क अस्पताल कैशलेस देने से मना कर दे तो क्या कानूनी उपाय हैं?
यद्यपि आईआरडीएआई ने बीमा कंपनियों को कैशलेस देना अनिवार्य किया है, परंतु कुछ गैर-नेटवर्क निजी अस्पताल बीमा कंपनियों से सीधे भुगतान में देरी के डर से मरीज को कैशलेस सुविधा देने में आनाकानी करते हैं। ऐसे मामलों में नागरिक के पास निम्नलिखित वैधानिक अधिकार हैं:
सर्वप्रथम, अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (MS) या बिलिंग हेड से लिखित में बात करें और उन्हें बताएं कि वे क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और उपभोक्ता संरक्षण कानून (Consumer Protection Act 2019) के तहत आपातकालीन अथवा वैध पॉलिसीधारक को मनमाने ढंग से परेशान नहीं कर सकते। यदि अस्पताल बिल्कुल भी सहमत न हो, तो बीमा कंपनी के नोडल अधिकारी को तत्काल ई-मेल भेजें कि अस्पताल सहयोग नहीं कर रहा है। ऐसे में अपनी जेब से भुगतान करके सभी मूल बिल, डॉक्टर के हस्ताक्षर वाली डिस्चार्ज समरी, पेमेंट रसीदें और इंडोर केस पेपर (ICP) की प्रमाणित प्रति प्राप्त करें। इसके बाद बीमा कंपनी के पास 15 दिनों के भीतर रीइंबर्समेंट क्लेम फाइल करें। बीमा कंपनी आपको 30 दिनों के भीतर पूरा पैसा ब्याज सहित वापस करने के लिए बाध्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs - Cashless Everywhere Rules)
Q1. क्या भारत के सभी अस्पतालों में 'Cashless Everywhere' नियम लागू होता है?
हाँ, बशर्ते वह अस्पताल संबंधित राज्य के क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट कानून में पंजीकृत हो, उसमें कम से कम 15 इन-पेशेंट बेड हों, और वह बीमा कंपनी की धोखाधड़ी वाली 'काली सूची' (Blacklisted / Excluded Hospital List) में न हो। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 15 बेड से कम वाले छोटे क्लीनिकों पर यह नियम लागू नहीं होता।
Q2. अगर किसी इमरजेंसी में 48 घंटे पहले सूचना नहीं दे पाए तो क्या क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा?
बिल्कुल नहीं। आपातकालीन स्थिति में मरीज को तुरंत भर्ती कराया जा सकता है। आईआरडीएआई नियमों के अनुसार इमरजेंसी के मामलों में अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचना देनी होती है। सूचना मिलते ही टीपीए 1 घंटे के भीतर कैशलेस प्रक्रिया प्रारंभ कर देता है।
Q3. अस्पताल यदि अंतिम बिल भेजने के बाद 3 घंटे से ज्यादा इंतजार करवाए तो मरीज क्या करे?
अस्पताल बिलिंग डेस्क से लिखित टाइम-स्टैम्प पर्ची लें जिस पर लिखा हो कि उन्होंने बीमा कंपनी को फाइनल बिल किस समय भेजा था। यदि 3 घंटे बीत चुके हैं, तो बीमा कंपनी के कस्टमर केयर पर तत्काल कॉल करके अपनी क्लेम आईडी के साथ आईआरडीएआई मास्टर सर्कुलर का हवाला दें। उस अतिरिक्त समय का कमरा किराया बीमा कंपनी को भरना होगा।
Q4. क्या गैर-नेटवर्क अस्पताल में इलाज कराने पर रूम रेंट कैपिंग के नियम अलग होते हैं?
नहीं। रूम रेंट कैपिंग और कमरे के किराए के नियम अस्पताल के नेटवर्क या गैर-नेटवर्क होने से नहीं बदलते, बल्कि यह आपकी पॉलिसी के नियमों पर निर्भर करता है। यदि आपकी पॉलिसी में सम इंश्योर्ड का 1% रूम रेंट कैप है, तो वह दोनों प्रकार के अस्पतालों पर समान रूप से लागू होगा।
Q5. क्या कैशलेस क्लेम में मरीज को अपनी जेब से बिल्कुल भी पैसा नहीं देना होता?
कैशलेस क्लेम में इलाज, सर्जरी, डॉक्टर फीस, जांच और दवाओं का खर्च बीमा कंपनी सीधे अस्पताल को देती है। परंतु 'नॉन-मेडिकल एक्सपेंसेस' (Consumables जैसे ग्लव्स, मास्क, कॉटन, सिरिंज, थर्मामीटर) का खर्च पॉलिसी में जब तक 'Consumables Rider' न जुड़ा हो, मरीज को खुद चुकाना पड़ता है।
Q6. अगर बीमा कंपनी गैर-नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस देने से मना कर दे तो शिकायत कहां करें?
सबसे पहले बीमा कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी (GRO) को ई-मेल करें। यदि 15 दिनों में संतोषजनक समाधान न मिले, तो सीधे आईआरडीएआई के 'Bima Bharosa' पोर्टल (bimabharosa.irdai.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें या अपने क्षेत्र के बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास निःशुल्क आवेदन दें।
वास्तविक केस स्टडी: गैर-नेटवर्क अस्पताल में ₹3,50,000 के बिल पर 'Cashless Everywhere' का प्रभाव
कैशलेस एवरीवेयर की वास्तविक उपयोगिता को समझने के लिए आइए एक वास्तविक स्थिति का संख्यात्मक विश्लेषण करते हैं। मान लीजिए लखनऊ के निवासी श्री राजेश कुमार की अचानक तबीयत खराब होती है और उन्हें पास के एक प्रतिष्ठित सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। यह अस्पताल उनकी बीमा कंपनी के नेटवर्क में नहीं है। उनके पास ₹5,00,000 का बेस फ्लोटर स्वास्थ्य बीमा कवर है।
| बिल मद (Hospital Billing Head) | अस्पताल का कुल बिल | पुरानी व्यवस्था (Reimbursement) | नई व्यवस्था (Cashless Everywhere) | मरीज की वास्तविक बचत व राहत |
|---|---|---|---|---|
| रूम रेंट (3 दिन ICU + 2 दिन प्राइवेट) | ₹65,000 | मरीज ने क्रेडिट कार्ड/उधार से चुकाया | बीमा कंपनी ने सीधे अस्पताल को अप्रूव किया | तत्काल नकदी की व्यवस्था नहीं करनी पड़ी |
| ऑपरेशन थियेटर व सर्जन फीस | ₹1,40,000 | मरीज ने बैंक FD तोड़कर भुगतान किया | प्री-ऑथराइजेशन में 100% स्वीकृत हुआ | ब्याज का नुकसान और आर्थिक संकट टला |
| जांच व दवाइयां (Pharmacy & Labs) | ₹95,000 | बिल जमा करने के 60 दिन बाद रीइंबर्स हुआ | अस्पताल बिलिंग काउंटर पर शून्य भुगतान | दस्तावेजी भागदौड़ और टीपीए फॉलो-अप समाप्त |
| नॉन-मेडिकल खर्चे (Consumables) | ₹22,000 | मरीज की जेब से काटा गया | कंज्यूमेबल्स राइडर होने पर शून्य भुगतान | राइडर होने पर यह खर्च भी कवर हुआ |
| कुल योग (Total Settlement) | ₹3,22,000 | मरीज ने पूरा ₹3.22 लाख जेब से भरा | मरीज को मात्र ₹0 (या नॉन-मेडिकल) देना पड़ा | 3 घंटे में डिस्चार्ज होकर घर पहुंचे |
अस्पताल बिलिंग डेस्क पर आने वाली 5 व्यावहारिक चुनौतियां और उनके समाधान
जब आप किसी गैर-नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस एवरीवेयर नियम का उपयोग करने जाते हैं, तो अस्पताल का बिलिंग स्टाफ कई बार तकनीकी या प्रक्रियात्मक बहाने बनाकर आपको हतोत्साहित करने का प्रयास करता है। ऐसे समय में आपको इन 5 प्रमुख बाधाओं से निपटने का सटीक तरीका पता होना चाहिए:
1. "हमारी कंपनी से कोई टाई-अप नहीं है, आपको कैश में ही बिल भरना पड़ेगा"
यह सबसे आम प्रतिक्रिया है। इसके जवाब में शांत स्वर में टीपीए डेस्क को आईआरडीएआई के मास्टर सर्कुलर (संदर्भ: IRDAI/HLT/REG/CIR/093/05/2024) की प्रति दिखाएं। उन्हें स्पष्ट करें कि यह पहल भारत सरकार और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) द्वारा अधिकृत है। उनसे कहें कि वे एनएचसीएक्स (NHCX) पोर्टल या बीमा कंपनी के डेडिकेटेड ई-मेल पर प्री-ऑथ फॉर्म अपलोड करें। यदि वे मना करें, तो सीधे अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से शिकायत करने की बात कहें।
2. "प्री-ऑथ अप्रूवल आने तक आपको ₹50,000 सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा"
अस्पताल अक्सर सुरक्षा के तौर पर बड़ी राशि एडवांस मांगते हैं। कानूनन, यदि आपने 48 घंटे पहले सूचना दे दी है और बीमा कंपनी से 1 घंटे के भीतर प्राथमिक अप्रूवल आ जाता है, तो अस्पताल को केवल उस राशि का अनुमानित अंतर ही मांगना चाहिए जो पॉलिसी में कवर नहीं है (जैसे नॉन-मेडिकल खर्चे)। उनसे लिखित रसीद लें जिस पर 'Refundable Security Deposit Subject to Cashless Approval' दर्ज हो, ताकि डिस्चार्ज के समय यह राशि आपके खाते में तुरंत वापस आ जाए।
3. "डॉक्टर ने डिस्चार्ज कर दिया है, लेकिन टीपीए से अप्रूवल नहीं आ रहा"
यह वह स्थिति है जहां आईआरडीएआई का 3-घंटे का नियम सीधे लागू होता है। जैसे ही डॉक्टर अपनी अंतिम डिस्चार्ज समरी पर हस्ताक्षर करें, बिलिंग डेस्क से तुरंत पावती (Time-Stamped Submission Receipt) लें कि उन्होंने बीमा कंपनी को किस समय अंतिम बिल भेजा। यदि 3 घंटे बीत जाते हैं, तो अपनी बीमा कंपनी के नोडल डेस्क पर फोन लगाकर कहें कि 3 घंटे की सीमा समाप्त हो चुकी है, अतः अतिरिक्त समय का कोई भी कमरा किराया मरीज पर नहीं डाला जा सकता। बीमा कंपनियां इस स्थिति में तत्काल इमरजेंसी प्रायोरिटी पर अप्रूवल जारी करती हैं।
4. "जांच रिपोर्ट अधूरी हैं, इसलिए कैशलेस होल्ड पर है"
टीपीए कई बार अनावश्यक पुरानी जांच रिपोर्ट (जैसे 3 साल पुरानी शुगर की पर्ची) मांगकर कैशलेस को होल्ड पर डाल देते हैं। ऐसी स्थिति में अपने ट्रीटिंग डॉक्टर से तुरंत एक 'Certificate of Medical Necessity' पर हस्ताक्षर कराएं जिसमें स्पष्ट लिखा हो कि मरीज को किस तात्कालिक लक्षण के कारण भर्ती किया गया था और वर्तमान उपचार का पिछली किसी अनसंबंधित स्थिति से कोई संबंध नहीं है। इसे तत्काल पोर्टल पर अपलोड कराएं।
5. डिस्चार्ज के समय नॉन-मेडिकल बिलों का अचानक बड़ा पहाड़
अस्पताल कई बार दस्ताने, कॉटन, थर्मामीटर और पीपीई किट के नाम पर ₹30,000 से ₹50,000 का अतिरिक्त बिल बना देते हैं। डिस्चार्ज से पहले आइटम-वार बिल (Detailed Itemized Bill) मांगें। यदि आपकी पॉलिसी में 'Consumables Rider' जुड़ा है, तो अस्पताल बिलिंग डेस्क को बताएं कि आपकी पॉलिसी में नॉन-मेडिकल खर्चे भी 100% कवर्ड हैं, अतः वे इसे टीपीए बिल में ही शामिल करें।