⚡ सीधी काम की बात (Quick Answer)
पासपोर्ट में जन्मतिथि (DOB) सुधार के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के संशोधित सर्कुलर के अनुसार 5 वर्ष की पुरानी समय-सीमा समाप्त कर दी गई है। अब 5 साल बाद भी यदि आपके पास जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के तहत सक्षम प्राधिकारी (नगर निगम/पंचायत) द्वारा जारी वैध डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र है, तो बिना सिविल कोर्ट गए जन्मतिथि सुधारी जा सकती है। केवल टाइपिंग त्रुटि (Clerical Error) होने पर सामान्य री-इश्यू (₹1,500) होता है, परंतु जानबूझकर उम्र घटाने या बढ़ाने पर कड़ी जांच और अनिवार्य फ्रेश पुलिस वेरिफिकेशन (Pre-PV) होता है।
पासपोर्ट में जन्मतिथि (DOB) विसंगति की कानूनी स्थिति व समस्याएं
भारतीय पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि (Date of Birth) केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी नागरिक के कानूनी अस्तित्व (Legal Existence) और संप्रभु पहचान का मूल आधार होती है। जब कोई भारतीय नागरिक उच्च शिक्षा के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों में आवेदन करता है, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया में स्थायी निवास (PR) फाइल करता है, या अमेरिका का वर्क वीज़ा लेता है, तो विदेशी दूतावासों द्वारा आवेदक के जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की अंकसूची और पासपोर्ट की जन्मतिथि का अक्षरशः व अंकशः मिलान किया जाता है।
यदि पासपोर्ट में जन्मतिथि अन्य मूल दस्तावेजों से भिन्न पाई जाती है (जैसे स्कूल प्रमाण पत्र में 12/05/1994 और पासपोर्ट में 12/05/1992), तो अंतरराष्ट्रीय आप्रवासन अधिकारी इसे 'Misrepresentation of Identity' (पहचान छुपाने का अपराध) मानकर वीज़ा आवेदन को तुरंत अस्वीकार कर सकते हैं और कई मामलों में 5 से 10 वर्ष का यात्रा प्रतिबंध (Travel Ban) लगा देते हैं। इसलिए यदि आपके पासपोर्ट में जन्मतिथि गलत दर्ज हो गई है, तो पहली विदेश यात्रा से पूर्व ही इसे विधिवत सुधारना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
विदेश मंत्रालय का ऐतिहासिक सर्कुलर: 5-वर्षीय समय-सीमा की समाप्ति
पूर्व में विदेश मंत्रालय की नीति अत्यंत कठोर थी। पुराने नियमों के तहत यदि किसी व्यक्ति के पासपोर्ट जारी हुए 5 वर्ष से अधिक समय बीत चुका होता था, तो क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) जन्मतिथि में किसी भी सुधार से सीधा इनकार कर देता था। नागरिक को सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता था और सक्षम न्यायालय से 'Declaratory Decree' (घोषणात्मक सिविल आदेश) प्राप्त करने में 3 से 5 वर्ष और लाखों रुपये बर्बाद हो जाते थे।
नागरिकों की इस गंभीर कानूनी समस्या को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने ऐतिहासिक परिपत्र (Policy Circular) जारी किया, जिसके मुख्य कानूनी बिंदु निम्नलिखित हैं:
- 5-वर्षीय पाबंदी का उन्मूलन: विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट जारी करने वाले सक्षम अधिकारियों (Passport Issuing Authorities - PIA) को यह पूर्ण प्रशासनिक अधिकार दिया है कि वे 5 वर्ष की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी जन्मतिथि सुधार के आवेदनों पर विचार कर सकते हैं।
- सक्षम प्राधिकारी का जन्म प्रमाण पत्र सबसे जरूरी: यदि आवेदक के पास Registration of Births and Deaths Act, 1969 के तहत संबंधित नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत के जन्म-मृत्यु पंजीयक द्वारा जारी मूल जन्म प्रमाण पत्र है, तो उसे अकाट्य कानूनी साक्ष्य माना जाएगा।
- कोर्ट आर्डर की अनिवार्यता समाप्त: वास्तविक और प्रमाणित मामलों में नागरिकों को अब सिविल कोर्ट जाकर डिक्लेरेटरी सूट फाइल करने की आवश्यकता नहीं है; पासपोर्ट कार्यालय सीधे रिकॉर्ड के आधार पर नया पासपोर्ट जारी करेगा।
क्लैरिकल त्रुटि बनाम उम्र में बड़ा बदलाव (Substantive Alteration)
पासपोर्ट सेवा केंद्र में काउंटर अधिकारी आपके आवेदन को दो श्रेणियों में वर्गीकृत करते हैं:
- श्रेणी 1: लिपिकीय त्रुटि (Clerical / Typographical Error):
इस श्रेणी में वे मामले आते हैं जहाँ आवेदक ने ऑनलाइन फॉर्म भरते समय सही जन्मतिथि लिखी थी, या मूल 10वीं मार्कशीट में सही तारीख थी, लेकिन पीएसके के डाटा एंट्री ऑपरेटर की गलती से अंक पलट गए (जैसे 04/07/1993 के स्थान पर 07/04/1993 छप गया, या 1995 के स्थान पर 1996 छप गया)। इस प्रकार की त्रुटियों में चूंकि कोई दुर्भावना नहीं होती, अतः पुराने आवेदन फॉर्म और मूल जन्म प्रमाण पत्र की जांच कर इसे बिना किसी झंझट के तुरंत री-इश्यू कर दिया जाता है। - श्रेणी 2: उम्र में बड़ा परिवर्तन (Substantive Age Change):
इस श्रेणी में वे मामले आते हैं जहाँ जन्मतिथि में 2 वर्ष, 3 वर्ष या उससे अधिक का अंतर होता है (जैसे 1988 को बदलकर 1992 कराया जा रहा हो)। ऐसे मामलों में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय अत्यंत सतर्क हो जाता है। अधिकारी यह जांचते हैं कि कहीं आवेदक ने खाड़ी देशों में मजदूरी वीज़ा पाने, किसी सरकारी नौकरी की अधिकतम आयु सीमा पार करने से बचने, या विदेश में रिटायरमेंट लाभ लेने के लिए उम्र में हेराफेरी तो नहीं की थी? ऐसे मामलों में गहन सतर्कता जांच और शपथ पत्र आवश्यक होता है।
अनिवार्य कानूनी दस्तावेज: जन्म प्रमाण पत्र व 10वीं अंकसूची की शर्तें
पासपोर्ट में जन्मतिथि सुधारने के लिए पीएसके काउंटर पर निम्नलिखित मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने अनिवार्य होते हैं:
- डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र (Municipal Birth Certificate):
जन्म एवं मृत्यु पंजीयक द्वारा जारी डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र। इसमें नगर निगम/परिषद के मुख्य रजिस्ट्रार की मुहर, हस्ताक्षर या ऑनलाइन सत्यापित क्यूआर कोड होना अनिवार्य है। हस्तलिखित (Handwritten) पर्चियां या गैर-पंजीकृत प्रमाण पत्र स्वीकार नहीं किए जाते। - 10वीं कक्षा की बोर्ड अंकसूची या उत्तीर्ण प्रमाण पत्र:
सीबीएसई, आईसीएसई या किसी मान्यता प्राप्त राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी 10वीं की मूल अंकसूची, जिसमें जन्मतिथि स्पष्ट रूप से अंकों और शब्दों में लिखी हो। (नोट: 10वीं की अंकसूची और जन्म प्रमाण पत्र में जन्मतिथि बिल्कुल एक समान होनी चाहिए)। - वर्तमान मूल पासपोर्ट: आपका मौजूदा पासपोर्ट जिसमें गलत जन्मतिथि छपी हुई है, तथा उसके पहले दो और अंतिम दो पन्नों की स्व-प्रमाणित फोटोकॉपी।
- अद्यतन आधार कार्ड व पैन कार्ड: जिनमें सही जन्मतिथि अपडेट हो चुकी हो।
- विलंब व स्पष्टीकरण का नोटरी शपथ पत्र: यह स्पष्ट करते हुए कि पासपोर्ट बनवाते समय गलत जन्मतिथि दर्ज होने का वास्तविक कारण क्या था।
यदि जन्म प्रमाण पत्र न बना हो: NABC व SDM कोर्ट 13(3) का आदेश
भारत में ग्रामीण क्षेत्रों या 1980-1990 के दशक में जन्मे लाखों नागरिकों का जन्म उस समय नगर निगम या ग्राम पंचायत में पंजीकृत नहीं कराया गया था। जब ऐसे नागरिक पासपोर्ट में अपनी जन्मतिथि सुधारने का प्रयास करते हैं, तो नगर निगम का रजिस्ट्रार यह कहकर मना कर देता है कि पुराने रजिस्टरों में उनका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
इस कानूनी समस्या के समाधान के लिए Registration of Births and Deaths Act, 1969 की धारा 13(3) के तहत निम्नलिखित 3-चरणीय कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है:
- कदम 1: जन्म अनुपलब्धता प्रमाण पत्र (Non-Availability of Birth Certificate - NABC):
आवेदक सबसे पहले संबंधित स्थानीय निकाय (नगर पालिका या ब्लॉक कार्यालय) में जन्म रिकॉर्ड की खोज हेतु निर्धारित शुल्क के साथ आवेदन करता है। रजिस्ट्रार पुराने रिकॉर्ड की जांच के बाद विधिवत 'फॉर्म 10' पर यह प्रमाणित करता है कि अमुक व्यक्ति के जन्म का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसे NABC कहा जाता है। - कदम 2: उप-जिलाधिकारी (SDM / First Class Magistrate) कोर्ट में याचिका:
NABC मिलने के बाद आवेदक अपने जिले के एसडीएम न्यायालय में धारा 13(3) के तहत 'विलंबित जन्म पंजीकरण आदेश' (Delayed Registration Order) की याचिका दायर करता है। इसके साथ स्कूल रिकॉर्ड, परिवार रजिस्टर की नकल, माता-पिता का हलफनामा और दो प्रतिष्ठित पड़ोसियों के बयान संलग्न किए जाते हैं। - कदम 3: एसडीएम आदेश व नया डिजिटल बर्थ सर्टिफिकेट:
एसडीएम तहसीलदार या पटवारी से जांच रिपोर्ट मंगाने के बाद नगर पालिका/रजिस्ट्रार को आदेश (Court Order) जारी करता है कि आवेदक के जन्म का रिकॉर्ड दर्ज कर उसे डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाए। इस आदेश के आधार पर जारी हुआ नगर निगम का प्रमाण पत्र पासपोर्ट सेवा केंद्र में 100% कानूनी रूप से मान्य होता है और विदेश मंत्रालय इसे स्वीकार करने के लिए बाध्य है।
विलंब का कारण व शपथ पत्र: ड्राफ्टिंग का आधिकारिक प्रारूप
यदि पासपोर्ट जारी हुए लंबा समय बीत चुका है, तो आवेदक को ₹100 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट या नोटरी पब्लिक के समक्ष शपथ पत्र निष्पादित करना होता है। इसका कानूनी ड्राफ्ट निम्नलिखित है:
(On Non-Judicial Stamp Paper of ₹100 duly attested by Notary Public)
I, .................................... (Applicant's Name), S/o / D/o / W/o Shri ...................................., residing at ...................................................................., do hereby solemnly affirm and state on oath as under:
1. That I am a citizen of India and holder of Indian Passport No. .................... issued at .................... on date ....................
2. That in my aforesaid passport, my date of birth has been erroneously recorded as .................... instead of my correct date of birth which is ....................
3. That my correct date of birth is .................... as certified by the competent statutory authority vide Birth Certificate Registration No. .................... issued by the Municipal Corporation / Registrar of Births and Deaths, ....................
4. That the error occurred due to .................................................................... (State reason: inadvertent clerical error / miscommunication during previous application).
5. That I have not derived any undue benefit or advantage (educational, employment, or immigration) by virtue of the previously recorded incorrect date of birth.
6. That I undertake to indemnify the Regional Passport Office against any legal consequences that may arise out of this correction.
Date: ................
Place: ................ DEPONENT (हस्ताक्षर)
(Notary Public Seal and Attestation)
पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर री-इश्यू फॉर्म भरने की ऑनलाइन स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
जन्मतिथि सुधार के लिए आधिकारिक पोर्टल passportindia.gov.in पर ऑनलाइन फॉर्म भरने की मानक प्रक्रिया निम्नलिखित है:
- पोर्टल पर लॉगिन: अपनी मौजूदा यूजर आईडी से लॉगिन करें और 'Apply for Fresh Passport/Re-issue of Passport' पर क्लिक करें।
- री-इश्यू विकल्प का चयन:
- Applying for: Re-issue of Passport चुनें।
- Reason for Re-issue: 'Change in Existing Personal Particulars' चुनें।
- उप-विकल्प में 'Date of Birth' के चेकबॉक्स पर सही का निशान लगाएं।
- Type of Application: Normal चुनें। (नोट: जन्मतिथि सुधार में तत्काल सेवा अनुमत नहीं होती)।
- Booklet Type: 36 Pages (₹1,500) या 60 Pages (₹2,000)।
- सही जन्मतिथि प्रविष्ट करना: 'Applicant Details' पृष्ठ पर कैलेंडर से अपनी **सही जन्मतिथि** (DD/MM/YYYY) चुनें जो आपके नगर निगम जन्म प्रमाण पत्र में अंकित है।
- फीस भुगतान व अपॉइंटमेंट: ₹1,500 की निर्धारित फीस का ऑनलाइन भुगतान करें और अपने क्षेत्रीय पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) में स्लॉट बुक करें।
जन्मतिथि सुधार श्रेणी, आवश्यक साक्ष्य, फीस व सत्यापन सारणी (5-कॉलम)
नीचे दी गई 5-कॉलम तालिका में जन्मतिथि सुधार के विभिन्न मामलों, आवश्यक कानूनी प्रमाण, सरकारी शुल्क और पुलिस वेरिफिकेशन की स्थिति का तुलनात्मक विवरण दिया गया है:
| जन्मतिथि सुधार की स्थिति | प्राथमिक कानूनी साक्ष्य | सरकारी फीस (36 पेज) | पुलिस वेरिफिकेशन स्थिति | अनुमानित निस्तारण समय |
|---|---|---|---|---|
| लिपिकीय त्रुटि (Clerical / Typing Error) | मूल जन्म प्रमाण पत्र / 10वीं मार्कशीट | ₹1,500 | Post-PV / No-PV (विवेक पर) | 7 से 10 कार्यदिवस |
| 5 वर्ष के भीतर सुधार (Within 5 years) | नगर निगम बर्थ सर्टिफिकेट + आधार | ₹1,500 | अनिवार्य Pre-PV | 15 से 20 कार्यदिवस |
| 5 वर्ष के बाद सुधार (MEA Circular लाभ) | बर्थ सर्टिफिकेट + 10वीं + नोटरी हलफनामा | ₹1,500 | अनिवार्य Fresh Pre-PV | 20 से 30 कार्यदिवस |
| 26 जनवरी 1989 से पूर्व जन्मे आवेदक | 10वीं अंकसूची / पैन कार्ड / वोटर आईडी | ₹1,500 | अनिवार्य Pre-PV | 15 से 20 कार्यदिवस |
| विवादित जन्मतिथि (संदिग्ध दस्तावेज) | सिविल कोर्ट का आदेश (Declaratory Decree) | ₹1,500 | विशेष सीआईडी/पुलिस जांच | न्यायालय व आरपीओ आदेशानुसार |
पीएसके में काउंटर A, B और C पर क्या होता है? अधिकारी की जांच
अपॉइंटमेंट के दिन अपने सभी मूल दस्तावेजों के साथ पासपोर्ट सेवा केंद्र में जाने पर प्रक्रिया इस प्रकार आगे बढ़ती है:
- काउंटर A (स्कैनिंग व डिजिटल बायोमेट्रिक्स): टीसीएस ऑपरेटर आपके मूल जन्म प्रमाण पत्र को हाई-रेजोल्यूशन में स्कैन करता है और सिस्टम में जन्मतिथि फील्ड को संशोधित करता है। बायोमेट्रिक और फोटो अपडेट होते हैं।
- काउंटर B (सत्यापन अधिकारी - Verifying Officer): सरकारी अधिकारी जन्म प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन नंबर और जारी होने की तिथि का सूक्ष्म परीक्षण करता है। अधिकारी जन्म-मृत्यु पोर्टल पर ऑनलाइन लॉग इन कर प्रमाण पत्र की प्रमाणिकता जांच सकता है।
- काउंटर C (स्वीकृति अधिकारी - Granting Officer): अंतिम निर्णय काउंटर C पर होता है। अधिकारी आपसे पूछ सकता है कि पहले गलत जन्मतिथि कैसे दर्ज हो गई थी? यदि अधिकारी संतुष्ट होता है, तो वह फाइल को 'Pre-Police Verification' के लिए स्वीकृति देता है। संबंधित जनपद के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय को रिपोर्ट प्रेषित की जाती है।
धारा 12 के तहत पेनाल्टी व अवैध उम्र कटौती पर सतर्कता नियम
नागरिकों को इस कानूनी पहलू के प्रति पूर्ण रूप से सचेत रहना चाहिए कि भारतीय पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12(1)(b) के अंतर्गत पासपोर्ट प्राधिकारी के समक्ष जानबूझकर गलत जानकारी देना या तथ्यों को छिपाना गंभीर अपराध (Cognizable Offence) है।
यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी से उम्र घटाकर नया पासपोर्ट बनवाने का प्रयास करता है, और सतर्कता जांच में यह तथ्य उजागर होता है कि उसके पुराने पासपोर्ट में वास्तविक जन्मतिथि थी जिसे छिपाया गया, तो आरपीओ निम्नलिखित दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है:
- आर्थिक दंड (Financial Penalty): पासपोर्ट अधिकारी ₹5,000 तक का प्रशासनिक जुर्माना लगा सकता है।
- पासपोर्ट जब्ती व रद्द कराना (Quashing) (Impounding under Section 10): धारा 10(3)(b) के तहत पासपोर्ट को तत्काल प्रभाव से जब्त या निरस्त किया जा सकता है।
- कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice): आवेदक को आरपीओ में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का कानूनी नोटिस दिया जाता है। अतः हमेशा वैध, प्रामाणिक और डिजिटल रूप से सत्यापित जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर ही सुधार कराएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
Q1: क्या पासपोर्ट जारी होने के 5 साल बाद भी जन्मतिथि बदली जा सकती है?
हाँ, विदेश मंत्रालय (MEA) के संशोधित सर्कुलर के अनुसार 5 वर्ष की ऐतिहासिक कानूनी पाबंदी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। अब पासपोर्ट जारी होने के 5, 10 या 15 वर्ष बाद भी यदि आपके पास नगर निगम द्वारा जारी वैध जन्म प्रमाण पत्र है, तो आप बिना कोर्ट जाए जन्मतिथि सुधरवा सकते हैं।
Q2: क्या पासपोर्ट में जन्मतिथि बदलने के लिए सिविल कोर्ट की डिक्री (Court Order) चाहिए?
सामान्य मामलों में यदि जन्म प्रमाण पत्र वैध है तो कोर्ट आर्डर की बिल्कुल जरूरत नहीं होती। केवल तभी कोर्ट की डिक्री मांगी जाती है जब नगर निगम जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल सर्टिफिकेट में गहरा विरोधाभास हो या दस्तावेज की सत्यता संदिग्ध लगे।
Q3: क्या 10वीं की अंकसूची (Marksheet) से जन्मतिथि सुधारी जा सकती है?
हाँ, यदि आवेदक का जन्म 26 जनवरी 1989 से पूर्व हुआ था तो 10वीं की मार्कशीट या पैन कार्ड मान्य है। परंतु 26 जनवरी 1989 के बाद जन्मे नागरिकों के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मूल जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) प्राथमिक कानूनी साक्ष्य होता है।
Q4: अगर आधार कार्ड और पासपोर्ट की जन्मतिथि अलग-अलग हो तो क्या विदेश यात्रा में दिक्कत होगी?
अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए केवल पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि ही वीज़ा और इमिग्रेशन में जांची जाती है। परंतु कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका या यूके के पीआर अथवा वर्क वीज़ा आवेदन में यदि पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र में अंतर हो तो वीज़ा सीधा रिजेक्ट हो सकता है, इसलिए इसे सुधारना आवश्यक है।
Q5: जन्मतिथि बदलने पर पासपोर्ट की सरकारी फीस कितनी लगती है?
जन्मतिथि सुधार के लिए सामान्य पासपोर्ट री-इश्यू शुल्क 36 पेज की बुकलेट के लिए ₹1,500 और 60 पेज की जंबो बुकलेट के लिए ₹2,000 देय होता है।
Q6: क्या जन्मतिथि बदलने के बाद पुराना पासपोर्ट नंबर बदल जाता है?
हाँ, चूंकि जन्मतिथि व्यक्ति के बुनियादी बायोडाटा का अंग है, इसलिए री-इश्यू आवेदन के तहत एक नया पासपोर्ट बुकलेट नए पासपोर्ट नंबर और सही जन्मतिथि के साथ मुद्रित किया जाता है।
Q7: जन्मतिथि सुधारने पर क्या पुलिस वेरिफिकेशन दोबारा होता है?
हाँ, जन्मतिथि में संशोधन नागरिक की मूल कानूनी पहचान में परिवर्तन माना जाता है, इसलिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) अनिवार्य रूप से फ्रेश प्री-पुलिस वेरिफिकेशन (Pre-PV) आदेशित करता है।
Q8: यदि किसी ने पहले गलत जन्मतिथि लिखवाकर उम्र कम कराई थी, तो क्या जुर्माना लगेगा?
हाँ, यदि आरपीओ की सतर्कता जांच में पाया जाता है कि आवेदक ने जानबूझकर उम्र कम कराई थी तो The Passports Act 1967 की धारा 12 के तहत ₹5,000 तक की पेनाल्टी लगाई जा सकती है और कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी हो सकता है।
आधिकारिक पोर्टल व क्लस्टर गाइड्स
- Passport Seva Official Portal (विदेश मंत्रालय)
- तत्काल पासपोर्ट नियम 2026: 3 दिन में नया पासपोर्ट कैसे पाएं
- पासपोर्ट में नाम व सरनेम बदलना: शादी के बाद व गजट नोटिफिकेशन SOP
- पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन: mPassport ऐप व 5 दिन में सत्यापन प्रक्रिया
- पासपोर्ट स्टेटस ट्रैकिंग: 'Under Review at RPO' का हल व स्पीड पोस्ट डिलीवरी