इनकम टैक्स कैलकुलेटर 2026-27 (New vs Old Tax Regime)
बजट 2026-27 के नए स्लैब, ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन व 87A रिबेट के साथ सटीक टैक्स बचत तुलना
📌 मुख्य बातें (Key Takeaways):
- ₹7.75 लाख तक शून्य टैक्स: नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत वेतनभोगियों के लिए ₹75,000 की मानक कटौती (Standard Deduction) और धारा 87A की ₹25,000 रिबेट के कारण ₹7,75,000 की वार्षिक आय पर ₹1 भी टैक्स नहीं लगता।
- मानक कटौती में बढ़ोतरी: बजट द्वारा वेतनभोगियों और पेंशनभोगियों के लिए नई कर व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है।
- New vs Old चयन नियम: यदि आपकी कुल कटौतियां (80C, 80D, HRA, होम लोन ब्याज) ₹3,75,000 से कम हैं, तो नई कर व्यवस्था (New Regime) आपके लिए 99% मामलों में अधिक फायदेमंद होती है।
- डिफ़ॉल्ट व्यवस्था: आयकर विभाग द्वारा New Tax Regime को डिफ़ॉल्ट व्यवस्था बनाया गया है। यदि आप Old Regime चुनना चाहते हैं, तो ITR फाइल करते समय फॉर्म 10-IEA या स्पष्ट विकल्प टिक करना होता है।
1. FY 2025-26 और AY 2026-27 के लिए New vs Old Regime में कौन बेहतर है? (AEO Direct Answer)
उत्तर: ₹10 लाख तक की वार्षिक सैलरी वाले अधिकांश मध्यमवर्गीय वेतनभोगियों के लिए नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) सबसे अधिक फायदेमंद है। इसमें बिना किसी बिल या निवेश दस्तावेज़ के सीधे ₹75,000 की मानक कटौती मिलती है और ₹7.75 लाख तक शून्य टैक्स लगता है। पुरानी व्यवस्था केवल उन्हीं करदाताओं के लिए लाभदायक है जो भारी होम लोन ब्याज (धारा 24b में ₹2 लाख), भारी HRA और धारा 80C/80D में कुल ₹4 लाख से अधिक की कटौतियां क्लेम करते हैं।
2. नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के संशोधित टैक्स स्लैब
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा लागू संशोधित टैक्स स्लैब के अनुसार अब टैक्स की गणना इस प्रकार होती है:
- ₹0 से ₹3,00,000: शून्य (0%)
- ₹3,00,001 से ₹7,00,000: 5% (धारा 87A के तहत ₹7 लाख तक की कुल करदेयता पर पूर्ण छूट)
- ₹7,00,001 से ₹10,00,000: 10%
- ₹10,00,001 से ₹12,00,000: 15%
- ₹12,00,001 से ₹15,00,000: 20%
- ₹15,00,000 से अधिक: 30%
📊 New vs Old Regime सैलरी टैक्स तुलना तालिका (AY 2026-27)
| वार्षिक ग्रॉस वेतन | New Regime टैक्स (Std Ded ₹75K) | Old Regime टैक्स (बिना 80C) | Old Regime (₹2.5L कटौती के साथ) | सर्वश्रेष्ठ विकल्प |
|---|---|---|---|---|
| ₹7,50,000 | ₹0 (शून्य) | ₹54,600 | ₹0 (87A छूट) | New Regime |
| ₹7,75,000 | ₹0 (शून्य) | ₹59,800 | ₹5,200 | New Regime |
| ₹10,00,000 | ₹44,200 | ₹1,06,600 | ₹54,600 | New Regime (₹10,400 बचत) |
| ₹12,00,000 | ₹71,500 | ₹1,63,800 | ₹96,200 | New Regime (₹24,700 बचत) |
| ₹15,00,000 | ₹1,32,600 | ₹2,57,400 | ₹1,74,200 | New Regime (₹41,600 बचत) |
⚠️ टैक्स फाइलिंग के समय महत्वपूर्ण सावधानियां:
- AIS और 26AS मिलान: रिटर्न फाइल करने से पहले अपने फॉर्म 26AS और Annual Information Statement (AIS) में दर्ज बैंक ब्याज व डिविडेंड की आय अवश्य जोड़ें।
- मार्जिनल रिलीफ (Marginal Relief): यदि आपकी सैलरी ₹7,75,000 से थोड़ी ही अधिक है (जैसे ₹7,80,000), तो अतिरिक्त ₹5,000 की आय पर लगने वाला टैक्स कुल अतिरिक्त आय से अधिक नहीं हो सकता (मार्जिनल रिलीफ का लाभ मिलता है)।
- फॉर्म 16 सत्यापन: अपनी कंपनी से मिले फॉर्म 16 पार्ट A और पार्ट B के टीडीएस विवरण को ई-फाइलिंग पोर्टल से सत्यापित करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs & PAA)
1. क्या ₹7.75 लाख तक की सैलरी पर सच में ₹0 टैक्स लगता है?
हाँ, बिल्कुल सच है। नई कर व्यवस्था में वेतनभोगियों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, जिससे ₹7,75,000 की ग्रॉस सैलरी पर नेट टैक्स योग्य आय ₹7,00,000 रह जाती है। धारा 87A के तहत ₹7 लाख तक की आय पर ₹25,000 की पूरी टैक्स छूट (Rebate) मिल जाती है, जिससे देय टैक्स शून्य (₹0) हो जाता है।
2. क्या नई कर व्यवस्था में धारा 80C और HRA की छूट मिलती है?
नहीं, नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) में धारा 80C (PPF/LIC/ELSS), धारा 80D (स्वास्थ्य बीमा), HRA और होम लोन ब्याज (धारा 24b) की छूट नहीं मिलती है। इसके बदले सरकार ने टैक्स स्लैब को काफी कम रखा है और फ्लैट ₹75,000 की मानक कटौती दी है।
3. क्या सैलरीड कर्मचारी हर साल Old और New Regime बदल सकते हैं?
हाँ, जिन व्यक्तियों की आय केवल सैलरी (वेतन), पेंशन, बैंक ब्याज या अन्य स्रोतों से है (बिजनेस आय नहीं है), वे हर वित्तीय वर्ष में अपनी सुविधानुसार Old और New Regime में से किसी का भी चयन कर सकते हैं।
4. पुरानी व्यवस्था (Old Regime) कब चुननी चाहिए?
पुरानी व्यवस्था केवल तभी चुनें जब आपकी कुल कटौतियां (80C में ₹1.5 लाख + 80D में ₹25,000-₹50,000 + HRA या होम लोन ब्याज में ₹2 लाख) मिलाकर ₹3.75 लाख से अधिक हो रही हों। अन्यथा नई व्यवस्था में ज्यादा इन-हैंड पैसा बचता है।
5. नई कर व्यवस्था में हेल्थ एंड एजुकेशन सेस कितना लगता है?
गणना किए गए कुल आयकर पर 4% की दर से स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (Health and Education Cess) लगाया जाता है। यह दोनों व्यवस्थाओं (New व Old) में अनिवार्य रूप से लागू होता है।