बिजनेस & AI ⏱️ 14 मिनट 📅 1 अक्टूबर 2026

New vs Old Tax Regime: ₹7.75 लाख पर शून्य टैक्स का पूरा गणित और आपके लिए सही रिजीम

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CA विनित अग्रवाल
वरिष्ठ डिजिटल संपादक

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) के तहत ₹7 लाख तक की आय पर धारा 87A के तहत पूरी टैक्स छूट (Rebate) और ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर ₹7.75 लाख तक की कुल आय पर वेतनभोगियों के लिए टैक्स देनदारी शून्य हो जाती है। यदि आपके पास होम लोन ब्याज (24b), HRA और 80C के तहत ₹3.75 लाख से अधिक की कटौतियां नहीं हैं, तो न्यू टैक्स रिजीम अधिकांश करदाताओं के लिए अधिक फायदेमंद है।

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1. आयकर का नया ढांचा: न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट क्यों है?

भारत सरकार ने देश की कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को डिफ़ॉल्ट कर व्यवस्था घोषित किया है। पहले की ओल्ड टैक्स रिजीम में करदाताओं को टैक्स बचाने के लिए तमाम तरह के निवेश प्रमाण पत्र, जीवन बीमा रसीदें, पीपीएफ पासबुक और मकान किराए की रसीदें (HRA) जुटाने के लिए परेशान होना पड़ता था।

न्यू टैक्स रिजीम का मूल दर्शन है: "कम टैक्स स्लैब दरें और बिना किसी कागजी तामझाम के सीधी छूट"। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सरकार ने न्यू रिजीम को इतना आकर्षक बना दिया है कि ₹7.75 लाख सालाना कमाने वाले कर्मचारी को सरकार को एक भी रुपया टैक्स नहीं देना पड़ता।

2. वित्तीय वर्ष के नए टैक्स स्लैब और दरें

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दोनों टैक्स व्यवस्थाओं की स्लैब दरों में जमीन-आसमान का अंतर है:

आय सीमा (Income Slab) न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime)
₹0 से ₹3,00,000 शून्य (Nil) शून्य (Nil - ₹2.5 लाख तक)
₹3,00,001 से ₹7,00,000 5% (धारा 87A में पूरी छूट) 5% (₹2.5L से ₹5L) / 20% (₹5L+)
₹7,00,001 से ₹10,00,000 10% 20%
₹10,00,001 से ₹12,00,000 15% 30%
₹12,00,001 से ₹15,00,000 20% 30%
₹15,00,000 से अधिक 30% 30%

(नोट: सभी टैक्स देनदारियों पर 4% हेल्थ एवं एजुकेशन सेस अलग से देय होता है)।

3. ₹7.75 लाख तक जीरो टैक्स कैसे बनता है? (Standard Deduction ₹75,000 + 87A Rebate)

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ₹7.75 लाख पर जीरो टैक्स का गणित इस प्रकार काम करता है:

  1. मान लीजिए आपकी कुल ग्रॉस सैलरी = ₹7,75,000
  2. वेतनभोगी के लिए न्यू रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन = ₹75,000 घटाएं।
  3. आपकी नेट टैक्सेबल इनकम बची = ₹7,00,000
  4. अब स्लैब अनुसार टैक्स गणना:
    • ₹3 लाख तक = ₹0
    • ₹3 लाख से ₹7 लाख तक (₹4 लाख पर 5%) = ₹20,000 टैक्स
  5. आयकर अधिनियम की धारा 87A कहती है कि यदि नेट टैक्सेबल इनकम ₹7 लाख से अधिक नहीं है, तो अधिकतम ₹25,000 तक का पूरा टैक्स माफ (100% Rebate) हो जाएगा।
  6. अतः ₹20,000 टैक्स - ₹20,000 रिबेट = शून्य (ZERO TAX)!

4. ओल्ड टैक्स रिजीम कब चुनना चाहिए? (Breakeven Point एनालिसिस)

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ओल्ड टैक्स रिजीम केवल उन करदाताओं के लिए फायदेमंद है जिनके पास बहुत भारी कटौतियां (Deductions) हैं। नीचे दी गई तालिका से समझें कि किस आय पर कितनी कटौती होने पर ओल्ड रिजीम चुनना चाहिए:

वार्षिक ग्रॉस आय न्यू रिजीम में कुल टैक्स ओल्ड रिजीम चुनने के लिए न्यूनतम आवश्यक कटौतियां (Breakeven)
₹9,00,000 ₹36,400 कम से कम ₹2,62,500 की कटौतियां
₹10,50,000 ₹62,400 कम से कम ₹3,12,500 की कटौतियां
₹12,50,000 ₹98,800 कम से कम ₹3,62,500 की कटौतियां
₹15,00,000 ₹1,45,600 कम से कम ₹3,75,000 की कटौतियां

सरल निष्कर्ष: यदि आपके पास होम लोन का ब्याज (₹2 लाख) और धारा 80C (₹1.5 लाख) दोनों हैं, तभी ओल्ड रिजीम की गणना करें। यदि आप होम लोन नहीं भर रहे हैं, तो आंख बंद करके न्यू टैक्स रिजीम आपके लिए हमेशा अधिक फायदेमंद रहेगी।

5. न्यू रिजीम में मिलने वाली एकमात्र स्वीकृत कटौतियां

हालांकि न्यू रिजीम में 80C, 80D और HRA बंद हैं, लेकिन कुछ बहुत महत्वपूर्ण कटौतियां अभी भी मान्य हैं:

  • मानक कटौती (Standard Deduction): वेतनभोगियों को ₹75,000 और पारिवारिक पेंशनरों को ₹25,000 की फ्लैट छूट।
  • धारा 80CCD(2) - नियोक्ता का एनपीएस अंशदान: आपके बेसिक वेतन का 14% तक कंपनी द्वारा एनपीएस में जमा किया गया पैसा पूरी तरह टैक्स फ्री है।
  • ग्रेच्युटी (Gratuity Exemption): गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए ₹20 लाख तक की ग्रेच्युटी टैक्स फ्री है।
  • दिव्यांग कर्मचारियों के लिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस: वास्तविक खर्च के अनुसार छूट।

6. स्विचिंग रूल्स: क्या नौकरीपेशा हर साल अपनी टैक्स रिजीम बदल सकते हैं?

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नियमों के अनुसार:

  • वेतनभोगी करदाता (Salaried Individuals): जिनके पास कोई व्यावसायिक आय (No Business Income) नहीं है, वे हर साल अपनी सुविधा अनुसार न्यू या ओल्ड रिजीम में स्विच कर सकते हैं। आप फॉर्म 16 मिलने के बाद आईटीआर फाइल करते समय भी मनचाही रिजीम चुन सकते हैं।
  • व्यापारी एवं प्रोफेशनल्स (Business Income वाले): वे जीवन में केवल एक बार ओल्ड रिजीम चुन सकते हैं। यदि वे एक बार न्यू रिजीम में लौट आते हैं, तो वे दोबारा कभी ओल्ड रिजीम में नहीं जा सकते।

7. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या न्यू टैक्स रिजीम में पीएफ (EPF) और जीवन बीमा पर कोई टैक्स छूट मिलती है?

A. नहीं। न्यू टैक्स रिजीम में धारा 80C (पीएफ, एलआईसी, पीपीएफ, ईएलएसएस) के तहत मिलने वाली ₹1.5 लाख की छूट पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।

Q. होम लोन की ईएमआई भरने वालों के लिए कौन सी रिजीम सबसे सस्ती पड़ेगी?

A. यदि आप सेल्फ-ऑक्यूपाइड मकान के होम लोन ब्याज पर धारा 24(b) के तहत ₹2,00,000 की छूट और मूलधन पर 80C की ₹1,50,000 की छूट क्लेम कर रहे हैं, तो अधिकांश मामलों में ओल्ड टैक्स रिजीम अधिक टैक्स बचाती है।

Q. आईटीआर भरते समय रिजीम का चयन कैसे किया जाता है?

A. आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर न्यू टैक्स रिजीम स्वतः चुनी हुई (Default) आती है। यदि आप ओल्ड रिजीम चुनना चाहते हैं, तो आपको 'Opting out of New Tax Regime' के विकल्प पर 'Yes' चुनना होता है।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या न्यू टैक्स रिजीम में 80C छूट मिलती है?

A. नहीं, न्यू रिजीम में 80C, 80D और HRA जैसी छूट समाप्त कर दी गई हैं।

Q. होम लोन वालों के लिए कौन सी रिजीम बेहतर है?

A. यदि होम लोन ब्याज ₹2 लाख और 80C दोनों हैं, तो ओल्ड रिजीम में ज्यादा बचत हो सकती है।

Q. क्या नौकरीपेशा हर साल रिजीम बदल सकते हैं?

A. हां, वेतनभोगी कर्मचारी हर साल अपनी सुविधानुसार रिजीम बदल सकते हैं।

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