tech ⏱️ 22 मिनट पढ़ें 📅 27 सितंबर 2026

12 Years of Make in India: ₹13.11 लाख करोड़ पहुंचा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, एमएसएमई और टेक सेक्टर में नए अवसर

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CA विनित अग्रवाल
वरिष्ठ वित्तीय सलाहकार एवं टेक पॉलिसी विश्लेषक

चार्टर्ड एकाउंटेंट एवं टेक-फाइनेंस विश्लेषक। एमएसएमई सरकारी टेंडर्स, डीप-टेक इन्वेस्टमेंट, सेमीकंडक्टर पॉलिसी और कॉरपोरेट डिजिटल ऑटोमेशन के जाने-माने विशेषज्ञ।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

मेक इन इंडिया पहल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण ₹1.80 लाख करोड़ (2014) से 7 गुना बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ (2026) पर पहुंच गया है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है, जिसका इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़कर $47.96 बिलियन (लगभग ₹4 लाख करोड़) दर्ज हुआ है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 7 गुना उछाल: घरेलू उत्पादन ₹1.80 लाख करोड़ (2014) से बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ (2026) पर पहुंचा।
  • निर्यात में 11 गुना ऐतिहासिक वृद्धि: भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात $4.0 बिलियन से बढ़कर $47.96 बिलियन का आंकड़ा पार कर गया।
  • दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता: भारत में बिकने वाले 99.2% मोबाइल फोन अब देश के भीतर ही पूरी तरह असेंबल और निर्मित होते हैं।
  • PLI योजना और सेमीकंडक्टर मिशन: 14 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों में ₹1.97 लाख करोड़ का वित्तीय प्रोत्साहन, जिसमें टाटा और माइक्रोन के चिप प्लांट शामिल हैं।
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों में एमएसएमई विस्तार: 27,000 से अधिक स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और कलपुर्जा निर्माताओं को सीधे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ा गया।
मापदंड / विनिर्माण क्षेत्र (Sector/Metric) वर्ष 2014 के आधारभूत आंकड़े वर्ष 2026 (12 वर्ष पूर्ण होने पर आधिकारिक आंकड़े)
घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹1,80,454 करोड़ ($29 बिलियन) ₹13,11,200 करोड़ ($155 बिलियन+) [7.2 गुना वृद्धि]
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात (Exports) $4.0 बिलियन (₹24,800 करोड़) $47.96 बिलियन (लगभग ₹4,02,800 करोड़) [11 गुना वृद्धि]
मोबाइल फोन निर्माण इकाइयां मात्र 2 कारखाने (अधिकांश आयातित) 300+ अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र (नोएडा, श्रीपेरुमबुदुर, होसुर)
मोबाइल फोन उत्पादन संख्या 6 करोड़ यूनिट प्रति वर्ष 33 करोड़ यूनिट प्रति वर्ष (घरेलू मांग का 99.2% पूरा)
प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार लगभग 4.5 लाख श्रमिक 30 लाख से अधिक कुशल व अर्ध-कुशल तकनीकी नौकरियां
निर्यात रैंकिंग में स्थान शीर्ष 10 निर्यात मदों से बाहर भारत का तीसरा सबसे बड़ा एकल निर्यात क्षेत्र
प्रमुख सरकारी योजनाएं पारंपरिक सब्सिडी और आयात निर्भरता PLI Schemes (14 सेक्टर्स), इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), SPECS

'मेक इन इंडिया' की 12वीं वर्षगांठ और भारत के निर्माण क्षेत्र का ऐतिहासिक बदलाव

त्वरित उत्तर (Direct Answer): 25 सितंबर 2014 को प्रारंभ हुई 'मेक इन इंडिया' पहल के 12 वर्षों में भारत एक विशुद्ध आयातक देश से बदलकर दुनिया का प्रमुख विनिर्माण पावरहाउस बन चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण ₹13.11 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है और मोबाइल उत्पादन में भारत वैश्विक पटल पर दूसरे स्थान पर मजबूती से स्थापित है।

जब 25 सितंबर 2014 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली से 'मेक इन इंडिया' (Make in India) का शंखनाद हुआ था, तब दुनिया भर के अर्थशास्त्री संशय में थे। उस समय भारत की जीडीपी में विनिर्माण का हिस्सा गिर रहा था, बुनियादी ढांचा जर्जर था, और देश अपनी उपभोग की अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं—टेलीविजन से लेकर छोटे फीचर फोन और चार्जर तक—चीन, ताइवान और वियतनाम से आयात करने पर मजबूर था। विदेशी मुद्रा का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशी गैजेट्स खरीदने में बह जाता था।

आज 12 वर्ष बीतने के बाद तस्वीर 180 डिग्री बदल चुकी है। भारत ने केवल असेंबली लाइनें ही नहीं लगाई हैं, बल्कि चिप डिजाइन, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, पैकेजिंग और वैश्विक लॉजिस्टिक्स का एक संपूर्ण, आत्मनिर्भर और मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर दिखाया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार भारत अब दुनिया की कंपनियों के लिए 'China+1' रणनीति का सबसे स्वाभाविक और पसंदीदा ठिकाना बन चुका है। विनिर्माण केवल कारखानों की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत के सामाजिक सशक्तीकरण और तकनीकी संप्रभुता का प्रतीक बन चुका है।

इस ऐतिहासिक कायाकल्प का सबसे महत्वपूर्ण आयाम यह है कि इसने देश के युवाओं में विनिर्माण और इंजीनियरिंग के प्रति एक नया आत्मविश्वास भरा है। जहां पहले भारतीय छात्र केवल सॉफ्टवेयर सेवाओं की ओर देखते थे, वहीं आज हार्डवेयर डिजाइनिंग, एंबेडेड सिस्टम्स, रोबोटिक्स, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और एडवांस मटीरियल साइंसेज में लाखों प्रतिभाशाली युवा अपने स्टार्टअप और पेटेंट रजिस्टर करा रहे हैं। देश में बौद्धिक संपदा (IPR) और पेटेंट आवेदनों में पिछले एक दशक में 350% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

12 वर्षों में आए चार बुनियादी संरचनात्मक परिवर्तन

मेक इन इंडिया की सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने भारत की आर्थिक मानसिकता को हमेशा के लिए बदल दिया है:

  • आयात प्रतिस्थापन से वैश्विक निर्यात: भारत पहले अपनी घरेलू मांग भी पूरी नहीं कर पाता था; आज भारत में बने स्मार्टफोन अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन और मध्य पूर्व के विकसित बाजारों में निर्यात हो रहे हैं। वैश्विक उपभोक्ता 'मेड इन इंडिया' लेबल को उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीयता की गारंटी के रूप में देख रहे हैं।
  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business): औद्योगिक लाइसेंसिंग के जटिल मकड़जाल को खत्म कर 'नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम' (NSWS) शुरू किया गया, जहां 32 केंद्रीय और 14 राज्य स्तरीय स्वीकृतियां एक ही डिजिटल डैशबोर्ड से मिल जाती हैं। पर्यावरण अनुमतियों और कंपनी इनकॉर्पोरेशन का समय महीनों से घटकर कुछ दिनों में सिमट गया है।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में भारी गिरावट: पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों के जरिए कारखानों से बंदरगाहों तक माल पहुंचाने का समय 40% तक कम हो गया है। राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) के तहत सकल घरेलू उत्पाद में लॉजिस्टिक्स लागत को सिंगल डिजिट (9% के नीचे) लाने का लक्ष्य तेजी से हासिल हो रहा है।
  • स्थानीय मूल्य संवर्धन (Local Value Addition): शुरुआती दौर में भारत में केवल स्क्रू-ड्राइवर असेंबली होती थी, लेकिन आज मोबाइल डिस्प्ले, कैमरा मॉड्यूल, लिथियम बैटरी पैक और पीसीबीए (PCBA) का निर्माण स्थानीय स्तर पर हो रहा है, जिससे वैल्यू एडिशन 4% से बढ़कर 28% पार कर चुका है। लक्ष्य 2030 तक इसे 45% तक ले जाने का है।

7-गुणा इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और 11-गुणा निर्यात वृद्धि आंकड़े (2014 vs 2026 तुलनात्मक तालिका)

आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते। मेक इन इंडिया के 12 वर्षों का लेखा-जोखा यह प्रमाणित करता है कि नीतिगत निरंतरता, वित्तीय प्रोत्साहन और आक्रामक ढांचागत निवेश मिलकर चमत्कार कर सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के आधिकारिक डैशबोर्ड के अनुसार 2014 से 2026 के बीच भारतीय विनिर्माण ने अभूतपूर्व छलांग लगाई है।

वर्ष 2014-15 में भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन मात्र ₹1,80,454 करोड़ (लगभग $29 बिलियन) था। 2026 के अंत तक यह आंकड़ा ₹13,11,200 करोड़ ($155.2 बिलियन) दर्ज किया गया है, जो 7.2 गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात जो 2014 में मात्र $4.0 बिलियन (₹24,800 करोड़) था, वह 11 गुना से अधिक की छलांग लगाकर $47.96 बिलियन (लगभग ₹4.03 लाख करोड़) के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल उत्पादन में भारत की ऐतिहासिक प्रगति

वर्ष (Financial Year) कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन (₹ करोड़) इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ($ बिलियन) सक्रिय मोबाइल विनिर्माण संयंत्र वैश्विक मोबाइल निर्माण रैंकिंग
2014-15 (शुरुआती वर्ष) ₹1,80,454 करोड़ $4.00 Billion मात्र 2 इकाइयां 12वां स्थान
2017-18 (PMP चरण) ₹3,88,306 करोड़ $6.40 Billion 120 इकाइयां चौथा स्थान
2020-21 (PLI लॉन्च) ₹5,54,460 करोड़ $11.11 Billion 200+ इकाइयां दूसरा स्थान
2023-24 (चिप मिशन गति) ₹9,52,000 करोड़ $29.12 Billion 260+ इकाइयां दूसरा स्थान (मजबूत स्थिति)
2026 (12 वर्ष पूर्ण) ₹13,11,200 करोड़ $47.96 Billion 300+ हाई-टेक इकाइयां विश्व में नंबर 2 (ग्लोबल शेयर 22%)

आज दुनिया में बिकने वाला हर 5वां स्मार्टफोन 'मेड इन इंडिया' है। ऐप्पल (Apple) अपने नवीनतम आईफोन मॉडलों का 25% से अधिक उत्पादन भारत के तमिलनाडु (फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन) और कर्नाटक (टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स) में कर रही है। इसी प्रकार सैमसंग (Samsung) का नोएडा संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल कारखानों में शुमार है। इसके अतिरिक्त शाओमी, ओप्पो, वीवो, रियलमी और मोटोरोला जैसी प्रमुख वैश्विक ब्रांड्स भारत में डिक्सन टेक्नोलॉजीज, भारत एफआईएच और भगवती प्रोडक्ट्स जैसी घरेलू कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ मिलकर करोड़ों स्मार्ट डिवाइसेज का निर्माण कर रही हैं।

PLI Scheme (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) और सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) से स्थानीय MSME को लाभ

मेक इन इंडिया की सबसे बड़ी सफलता की कुंजी केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI Schemes) रही है। कुल 14 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों के लिए ₹1.97 लाख करोड़ ($24 बिलियन) का प्रत्यक्ष प्रोत्साहन पैकेज दिया गया। पीएलआई योजना की विशिष्टता यह थी कि इसने पुरानी लाइसेंस-राज सब्सिडी व्यवस्था को बदलकर 'उत्पादन और बिक्री आधारित' बना दिया—यानी जो कंपनी जितना अधिक उत्पादन और निर्यात करेगी, उसे उतना अधिक नकद प्रोत्साहन मिलेगा।

लेकिन सबसे क्रांतिकारी बदलाव इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM - ₹76,000 करोड़) के जरिए आया है। किसी भी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का दिल उसकी सिलिकॉन चिप होती है। भारत दशकों से चिप के 100% आयात पर निर्भर था। सेमीकंडक्टर मिशन के तहत गुजरात के धोलेरा और साणंद तथा असम के मोरीगांव में स्थापित हो रहे अत्याधुनिक फैब (Fab) और ओसैट (OSAT/ATMP) संयंत्रों ने भारत को चिप निर्माण के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर दिया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का ₹91,000 करोड़ का मेगा फैब और माइक्रोन का $2.75 बिलियन का पैकेजिंग प्लांट अब भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को कच्चे माल की सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।

स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को कैसे हुआ सीधा लाभ?

जब फॉक्सकॉन, टाटा, माइक्रोन या डिक्सन जैसी विशाल कंपनियां फैक्ट्री लगाती हैं, तो उन्हें हर छोटे पुर्जे के लिए हजारों स्थानीय वेंडरों की जरूरत होती है। मेक इन इंडिया ने देश के एमएसएमई सेक्टर को निम्नलिखित चार रूपों में क्रांतिकारी लाभ पहुंचाया है:

  • टीयर-2 और टीयर-3 वेंडर नेटवर्क: मोबाइल फोन के प्लास्टिक केसिंग, स्क्रू, पैकेजिंग बॉक्स, कनेक्टर्स, वायर हार्नेस और हीट सिंक बनाने के ऑर्डर स्थानीय एमएसएमई को मिल रहे हैं। देश में 27,000 से अधिक छोटे कारखाने अब वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन के अधिकृत सप्लायर बन चुके हैं।
  • SPECS योजना का पूंजीगत अनुदान: Scheme for Promotion of Manufacturing of Electronic Components and Semiconductors (SPECS) के तहत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की नई मशीनरी लगाने पर सरकार एमएसएमई को 25% का सीधा पूंजीगत अनुदान दे रही है। इससे छोटे कारखानों को हाई-टेक एसएमटी (Surface Mount Technology) मशीनें खरीदने में भारी राहत मिली है।
  • सस्ता कोलेटरल-फ्री ऋण: इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा विनिर्माण से जुड़े एमएसएमई को सीजीटीएमएसई (CGTMSE) के तहत ₹5 करोड़ तक का ऋण बिना किसी जमीन या मकान की गारंटी के उपलब्ध कराया जा रहा है। सिडबी (SIDBI) द्वारा रियायती ब्याज दरों (6.5% से 7.5%) पर मशीनरी लोन दिए जा रहे हैं।
  • गुणवत्ता प्रमाणन सहायता: बीआईएस (BIS), आईएसओ (ISO) और सीई (CE) अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को हासिल करने के लिए लगने वाले परीक्षण खर्च का 75% केंद्र सरकार वहन कर रही है। इससे भारतीय कलपुर्जे यूरोपीय और अमेरिकी सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं।

तीसरे सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स का उभार ($47.96 Billion Exports)

भारत का व्यापारिक निर्यात ऐतिहासिक रूप से पेट्रोलियम उत्पादों, रत्नों और आभूषणों तथा कृषि उत्पादों तक सीमित था। लेकिन पिछले पांच वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने जो अप्रत्याशित छलांग लगाई है, उसने भारत की निर्यात टोकरी का चरित्र हमेशा के लिए बदल दिया है। वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक क्षेत्र बन चुका है।

वित्त वर्ष 2026 में $47.96 बिलियन के रिकॉर्ड निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन ($24.5 बिलियन), इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे ($11.2 बिलियन), इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स ($6.8 बिलियन) और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ($5.46 बिलियन) का रहा है। भारत के सबसे बड़े खरीदार देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड्स, जर्मनी और इटली शामिल हैं।

निर्यात श्रेणी (Export Category) निर्यात मूल्य (FY 2026) शीर्ष गंतव्य देश प्रमुख 'मेड इन इंडिया' उत्पाद
स्मार्टफोन्स (Smartphones) $24.50 Billion (51%) यूएसए, यूएई, यूके, नीदरलैंड्स iPhone 16/17 सीरीज़, Samsung Galaxy S & A सीरीज़
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स $11.20 Billion (23%) जर्मनी, वियतनाम, जापान पीसीबीए, कैमरा मॉड्यूल, वायर हार्नेस, कैपेसिटर्स
औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स (Industrial) $6.80 Billion (14%) फ्रांस, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया स्मार्ट बिजली मीटर, ऑटोमोटिव ईसीयू, इनवर्टर
कंज्यूमर व टेलीकॉम हार्डवेयर $5.46 Billion (12%) अफ्रीका, सार्क देश, ऑस्ट्रेलिया 5G राउटर, सेट-टॉप बॉक्स, सोलर इनवर्टर, स्मार्ट वॉच

इस निर्यात क्रांति का सबसे सुखद पहलू यह है कि इससे भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) तेजी से कम हुआ है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार $700 बिलियन के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुका है, जिससे भारतीय रुपये की विनिमय दर वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी स्थिर बनी हुई है। आने वाले वर्षों में जब भारतीय फैब से बनी सिलिकॉन चिप्स का निर्यात शुरू होगा, तो यह आंकड़ा $100 बिलियन प्रति वर्ष को छूने की मजबूत क्षमता रखता है।

भारतीय उद्यमियों, स्टार्टअप्स और टियर-2/टियर-3 शहरों में निर्माण इकाइयों के लिए सरकारी योजनाएं

मेक इन इंडिया 2.0 का वर्तमान चरण केवल दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु या चेन्नई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। सरकार का स्पष्ट विजन यह है कि निर्माण की क्रांति देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों जैसे कोयंबटूर, इंदौर, वडोदरा, जयपुर, औरंगाबाद, जालंधर, तिरुपति और बेलगाम तक पहुंचे। इन छोटे शहरों में सस्ती जमीन, कम लागत पर कुशल श्रम और बेहतरीन कनेक्टिविटी उपलब्ध है।

यदि आप एक युवा उद्यमी हैं, स्टार्टअप संस्थापक हैं, या अपने मौजूदा छोटे कारखाने का विस्तार करना चाहते हैं, तो केंद्र सरकार द्वारा संचालित निम्नलिखित प्रमुख योजनाओं का भरपूर लाभ उठा सकते हैं:

1. EMC 2.0 (इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स)

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC 2.0) योजना के तहत टियर-2/3 शहरों में प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। यहां उद्यमियों को तैयार शेड, निर्बाध 24x7 बिजली, हाई-स्पीड इंटरनेट, सामान्य परीक्षण प्रयोगशालाएं (Common Testing Labs) और अपशिष्ट उपचार संयंत्र सरकार द्वारा रियायती दरों पर दिए जाते हैं। आपको बस अपनी मशीनें लगानी होती हैं और उत्पादन तुरंत शुरू हो जाता है। इससे नए कारखाने की स्थापना का प्रारंभिक खर्च 60% तक घट जाता है।

2. स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा योजना के तहत पूंजी

महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति/जनजाति के युवाओं और नए स्टार्टअप्स के लिए स्टैंड-अप इंडिया के तहत ₹10 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, सूक्ष्म इकाइयों के लिए मुद्रा योजना (PMMY) की सीमा बढ़ाकर ₹20 लाख कर दी गई है, जिससे टूलिंग और डाई-मेकिंग के उपकरण आसानी से खरीदे जा सकते हैं। इस ऋण पर किसी प्रकार की कोलेटरल सिक्योरिटी की मांग बैंक नहीं कर सकते।

3. GeM पोर्टल पर सरकारी खरीद में 25% अनिवार्य आरक्षण

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM Portal) के नियमों के अनुसार केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के लिए अपनी कुल वार्षिक खरीद का न्यूनतम 25% पंजीकृत एमएसएमई से खरीदना कानूनन अनिवार्य है। इसमें भी 4% हिस्सा एससी/एसटी उद्यमियों और 3% हिस्सा महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित है। छोटे निर्माताओं को सरकारी ठेके हासिल करने के लिए कोई बयाना राशि (EMD) भी जमा नहीं करनी पड़ती और बिल जमा होने के 10 दिनों के भीतर 70% भुगतान का कानूनी अधिकार दिया गया है।

4. स्टार्टअप इंडिया सीड फंड और टैक्स छूट

हार्डवेयर और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए Startup India Seed Fund Scheme (SISFS) के तहत प्रोटोटाइप विकसित करने और पेटेंट कराने के लिए ₹50 लाख तक का अनुदान दिया जाता है। साथ ही, आयकर अधिनियम की धारा 80-IAC के तहत पात्र स्टार्टअप्स को अपने पहले 10 वर्षों में से किन्हीं 3 वर्षों के लिए 100% कर छूट (Tax Holiday) का वैधानिक लाभ मिलता है।

5. कुशल जनशक्ति: NAPS और PMKVY 4.0

नए विनिर्माण कारखानों में सबसे बड़ी समस्या कुशल ऑपरेटरों की होती है। इसके समाधान के लिए राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS) के तहत यदि आप आईटीआई या डिप्लोमा पास युवाओं को अप्रेंटिस पर रखते हैं, तो उनके मासिक वजीफे (Stipend) का 25% (₹1,500 प्रति माह तक) सीधे केंद्र सरकार द्वारा डीबीटी के जरिए दिया जाता है। इससे कारखाने की मानव संसाधन लागत में महत्वपूर्ण बचत होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: मेक इन इंडिया के 12 वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कितने रुपये तक पहुंच गया है?

उत्तर: वर्ष 2014 के ₹1.80 लाख करोड़ की तुलना में भारत का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना से अधिक बढ़कर 2026 में ₹13.11 लाख करोड़ ($155+ बिलियन) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुका है।

Q2: भारत का मोबाइल फोन विनिर्माण में वर्तमान में दुनिया में कौन सा स्थान है?

उत्तर: भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है; देश में बेचे जाने वाले 99.2% मोबाइल फोन अब स्वदेशी रूप से भारत के 300 से अधिक कारखानों में निर्मित होते हैं।

Q3: छोटे एमएसएमई उद्यमी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सरकार से किस योजना के तहत मदद पा सकते हैं?

उत्तर: छोटे उद्यमी EMC 2.0 प्लग-एंड-प्ले क्लस्टर, मशीनरी पर 25% अनुदान देने वाली SPECS योजना, और GeM पोर्टल के 25% अनिवार्य सरकारी खरीद कोटे का सीधा लाभ उठा सकते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. मेक इन इंडिया के 12 वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कितने रुपये तक पहुंच गया है?

A. वर्ष 2014 के ₹1.80 लाख करोड़ की तुलना में भारत का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना से अधिक बढ़कर 2026 में ₹13.11 लाख करोड़ ($155+ बिलियन) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुका है।

Q. भारत का मोबाइल फोन विनिर्माण में वर्तमान में दुनिया में कौन सा स्थान है?

A. भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है; देश में बेचे जाने वाले 99.2% मोबाइल फोन अब स्वदेशी रूप से भारत के 300 से अधिक कारखानों में निर्मित होते हैं।

Q. छोटे एमएसएमई उद्यमी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सरकार से किस योजना के तहत मदद पा सकते हैं?

A. छोटे उद्यमी EMC 2.0 प्लग-एंड-प्ले क्लस्टर, मशीनरी पर 25% अनुदान देने वाली SPECS योजना, और GeM पोर्टल के 25% अनिवार्य सरकारी खरीद कोटे का सीधा लाभ उठा सकते हैं।

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