tech ⏱️ 22 मिनट पढ़ें 📅 27 सितंबर 2026

12 Years of Make in India: ₹13.11 लाख करोड़ पहुंचा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, एमएसएमई और टेक सेक्टर में नए अवसर

VA
CA विनित अग्रवाल
वरिष्ठ वित्तीय सलाहकार एवं टेक पॉलिसी विश्लेषक

चार्टर्ड एकाउंटेंट एवं टेक-फाइनेंस विश्लेषक। एमएसएमई सरकारी टेंडर्स, डीप-टेक इन्वेस्टमेंट, सेमीकंडक्टर पॉलिसी और कॉरपोरेट डिजिटल ऑटोमेशन के जाने-माने विशेषज्ञ।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

'मेक इन इंडिया' पहल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारत का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण रिकॉर्ड ₹13.11 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है, जिसमें 7 गुना उत्पादन वृद्धि और 11 गुना निर्यात उछाल दर्ज हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स अब देश का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन चुका है, जिससे एमएसएमई (MSME) और तकनीकी उद्यमियों के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आपूर्ति के ऐतिहासिक अवसर बने हैं।

OFFICIAL CHANNEL GoForDigitalIndia WhatsApp चैनल

सरकारी योजनाओं, नई भर्तियों, एडमिट कार्ड और रिजल्ट्स के ताज़ा अपडेट्स सबसे पहले अपने WhatsApp पर पाएं।

👉 चैनल से जुड़ें (Join WhatsApp)

📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 7 गुना उछाल: घरेलू उत्पादन ₹1.80 लाख करोड़ (2014) से बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ (2026) पर पहुंचा।
  • निर्यात में 11 गुना ऐतिहासिक वृद्धि: भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात $4.0 बिलियन से बढ़कर $47.96 बिलियन का आंकड़ा पार कर गया।
  • दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता: भारत में बिकने वाले 99.2% मोबाइल फोन अब देश के भीतर ही पूरी तरह असेंबल और निर्मित होते हैं।
  • PLI योजना और सेमीकंडक्टर मिशन: 14 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों में ₹1.97 लाख करोड़ का वित्तीय प्रोत्साहन, जिसमें टाटा और माइक्रोन के चिप प्लांट शामिल हैं।
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों में एमएसएमई विस्तार: 27,000 से अधिक स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और कलपुर्जा निर्माताओं को सीधे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ा गया।
आर्थिक पैमाना (Parameters) प्रारंभिक स्थिति (2014-15) वर्तमान स्थिति (12 वर्ष पूर्ण, 2026) कुल शुद्ध वृद्धि (Growth)
कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹1.80 लाख करोड़ ₹13.11 लाख करोड़ 7.28 गुना वृद्धि
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात (USD) $6.2 बिलियन $47.96 बिलियन 11.4 गुना वृद्धि
मोबाइल फोन विनिर्माण इकाइयां 2 इकाइयां 310+ निर्माण इकाइयां 155 गुना औद्योगिक विस्तार
प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार 12 लाख कर्मचारी 45 लाख+ तकनीकी कार्यबल 33 लाख नए रोजगार
घरेलू वैल्यू एडिशन (DVA) 2% से 5% (स्क्रूड्राइवर असेंबली) 22% से 32% (गहन कंपोनेंट निर्माण) 5 गुना वैल्यू एडिशन सुधार
विज्ञापन / SPONSORED

'मेक इन इंडिया' की 12वीं वर्षगांठ और भारत के निर्माण क्षेत्र का ऐतिहासिक बदलाव

सीधा उत्तर (AEO Direct Answer): 'मेक इन इंडिया' पहल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारत का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण रिकॉर्ड ₹13.11 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है, जिसमें 7 गुना उत्पादन वृद्धि और 11 गुना निर्यात उछाल दर्ज हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स अब देश का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन चुका है, जिससे एमएसएमई (MSME) और तकनीकी उद्यमियों के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आपूर्ति के ऐतिहासिक अवसर बने हैं।

25 सितंबर 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन से 'मेक इन इंडिया' (Make in India) के प्रतिष्ठित बब्बर शेर (Lion Logo) का अनावरण किया था, तब भारत को एक शुद्ध आयातक और 'कंज्यूमर मार्केट' के रूप में देखा जाता था। लेकिन 12 वर्षों की अनवरत नीतिगत सुधारों, व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business), और बुनियादी ढांचागत निवेश की बदौलत आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्था बनने की दहलीज पर खड़ा है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी 12वीं वर्षगांठ की आधिकारिक समीक्षा रिपोर्ट (प्रेस विज्ञप्ति आईडी: 2314829) के अनुसार, भारतीय विनिर्माण क्षेत्र ने अभूतपूर्व आत्मनिर्भरता हासिल की है। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल हार्डवेयर, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स और रक्षा विनिर्माण में भारत ने दुनिया के शीर्ष देशों को पीछे छोड़ दिया है।

एक दशक पूर्व भारत अपनी कुल इलेक्ट्रॉनिक्स आवश्यकता का 78% से अधिक हिस्सा विदेशों (विशेषकर चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया) से आयात करता था। आज स्थिति पूरी तरह उलट चुकी है—भारत में बेचे जाने वाले 99.2% मोबाइल फोन और स्मार्टफोन अब पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' हैं। देश केवल अपनी घरेलू मांग ही पूरी नहीं कर रहा, बल्कि अमेरिका, यूरोप, यूएई और लैटिन अमेरिका के बाजारों में रिकॉर्ड मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात कर रहा है।


7-गुणा इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और 11-गुणा निर्यात वृद्धि आंकड़े (2014 vs 2026 तुलनात्मक तालिका)

विज्ञापन / SPONSORED

आंकड़े किसी भी आर्थिक नीति की सफलता के सबसे निष्पक्ष गवाह होते हैं। वित्त वर्ष 2014-15 और वित्त वर्ष 2026-27 के बीच भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर ने जो ऐतिहासिक छलांग लगाई है, वह वैश्विक विनिर्माण इतिहास में दुर्लभ है।

प्रमुख विकास स्तंभ:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण मूल्य: वर्ष 2014 में मात्र ₹1,80,000 करोड़ ($29 बिलियन) से बढ़कर वर्ष 2026 में ₹13,11,000 करोड़ ($158 बिलियन) के पार।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात (Exports): 2014 के ₹38,000 करोड़ ($6 बिलियन) की तुलना में 11 गुना से अधिक बढ़कर $47.96 बिलियन (लगभग ₹4,02,000 करोड़) पर पहुंच गया।
  • मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स: 2014 में देश भर में केवल 2 मोबाइल असेंबली फैक्ट्रियां थीं; आज 2026 में 300 से अधिक आधुनिक हाई-टेक निर्माण और कंपोनेंट इकाइयां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।

'मेक इन इंडिया': 2014 बनाम 2026 का निर्णायक तुलनात्मक डेटा

आर्थिक पैमाना (Parameters) प्रारंभिक स्थिति (2014-15) वर्तमान स्थिति (12 वर्ष पूर्ण, 2026) कुल शुद्ध वृद्धि (Growth)
कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹1.80 लाख करोड़ ₹13.11 लाख करोड़ 7.28 गुना वृद्धि
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात (USD) $6.2 बिलियन $47.96 बिलियन 11.4 गुना वृद्धि
मोबाइल फोन विनिर्माण इकाइयां 2 इकाइयां 310+ निर्माण इकाइयां 155 गुना औद्योगिक विस्तार
प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार 12 लाख कर्मचारी 45 लाख+ तकनीकी कार्यबल 33 लाख नए रोजगार
घरेलू वैल्यू एडिशन (DVA) 2% से 5% (स्क्रूड्राइवर असेंबली) 22% से 32% (गहन कंपोनेंट निर्माण) 5 गुना वैल्यू एडिशन सुधार

PLI Scheme (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) और सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) से स्थानीय MSME को लाभ

इस औद्योगिक क्रांति का सबसे बड़ा चालक केंद्र सरकार की ₹1.97 लाख करोड़ की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना और ₹76,000 करोड़ का इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) रहा है।

पीएलआई योजना का एमएसएमई इकोसिस्टम पर प्रभाव:

शुरुआत में आलोचकों का मानना था कि पीएलआई केवल एप्पल, फॉक्सकॉन, सैमसंग, डिक्सन और पेगाट्रॉन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ पहुंचाएगी। परंतु ज़मीनी वास्तविकता यह है कि प्रत्येक बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली फैक्ट्री अपने चारों ओर 50 से 100 स्थानीय टियर-2 और टियर-3 आपूर्तिकर्ता (Suppliers) विकसित करती है:

  1. प्लास्टिक मोल्डिंग और मेटल केसिंग: फरीदाबाद, पुणे और कोयंबटूर के स्थानीय एमएसएमई अब सटीक मोबाइल बॉडी और हीट सिंक बना रहे हैं।
  2. पीसीबीए (Printed Circuit Board Assembly): नोएडा, श्रीपेरंबुदूर और बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर्स में स्थानीय इंजीनियर मल्टी-लेयर मदरबोर्ड्स डिजाइन कर रहे हैं।
  3. वायरिंग हार्नेस और कनेक्टर्स: ऑटोमोटिव और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में लगने वाले उन्नत केबल्स का घरेलू उत्पादन शत-प्रतिशत हो चुका है।

प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर्स का भौगोलिक विस्तार तालिका

राज्य व क्लस्टर प्रमुख विनिर्माण फोकस प्रमुख वैश्विक व भारतीय कंपनियां संबद्ध MSME आपूर्तिकर्ता
नोएडा / ग्रेटर नोएडा (UP) स्मार्टफोन असेंबली, डिस्प्ले, चार्जर निर्माण Samsung, Dixon Technologies, Lava 800+ सूक्ष्म व लघु घटक इकाइयां
श्रीपेरंबुदूर / होसुर (TN) Apple iPhone, ऑटो-इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी बैटरी Foxconn, Pegatron, Tata Electronics 1,200+ इंजीनियरिंग MSME यूनिट्स
धोलेरा / साणंद (गुजरात) सेमीकंडक्टर फैब, चिप टेस्टिंग & पैकेजिंग Micron, Tata-PSMC Semiconductor JV क्लीनरूम गैसेस, केमिकल्स आपूर्तिकर्ता
बेंगलुरु / नरसपुरा (कर्नाटक) आईओटी (IoT), 5G टेलीकॉम गियर, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स Wistron, BEL, Tejas Networks हाई-प्रिसिजन फैबलेस डिजाइन स्टार्टअप्स

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) और डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI)

धोलेरा (गुजरात), साणंद और मोरीगांव (असम) में बन रहे सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स और एटीएमपी (ATMP/OSAT) इकाइयां भारत को चिप आयातक से चिप निर्माता बना रही हैं:

  • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पीएसएमसी (PSMC) द्वारा ₹91,000 करोड़ का मेगा फैब प्लांट।
  • माइक्रोन टेक्नोलॉजी की साणंद असेंबली और टेस्ट फैसिलिटी से चिप्स की पहली वाणिज्यिक खेप का उत्पादन।
  • डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना: भारत सरकार घरेलू चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को शुद्ध विकास लागत का 50% वित्तीय अनुदान (Financial Support) दे रही है, साथ ही सी-डैक (C-DAC) पुणे के चिप-इन (ChipIN) सेंटर के जरिए करोड़ों रुपये के अत्याधुनिक EDA सॉफ्टवेयर टूल्स मुफ्त उपलब्ध करा रही है।

तीसरे सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स का उभार ($47.96 Billion Exports)

विज्ञापन / SPONSORED

भारतीय निर्यात की संरचना (Export Basket) में ऐतिहासिक बदलाव आया है। परंपरागत रूप से भारत पेट्रोलियम रिफाइंड उत्पाद और रत्न-आभूषणों के निर्यात पर निर्भर था। 2026 में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक्स ने इंजीनियरिंग गुड्स और टेक्सटाइल को पीछे छोड़ते हुए भारत के तीसरे सबसे बड़े मर्चेंडाइज निर्यात क्षेत्र के रूप में अपना स्थान पक्का कर लिया है।

[वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत का नया कद]
                    │
 ┌──────────────────┼──────────────────┐
 ▼                  ▼                  ▼
[स्मार्टफोन निर्यात] [सोलर पीवी मॉड्यूल्स] [आईटी हार्डवेयर व सर्वर]
$24.5 बिलियन        $7.8 बिलियन        $15.6 बिलियन
(Apple iPhone,     (अमेरिका व यूरोप   (क्लाउड डेटा सेंटर
Samsung Galaxy)    के रिन्यूएबल मार्केट)  और 5G टेलीकॉम उपकरण)
  • एप्पल का ग्लोबल हब बना भारत: दुनिया भर में बिकने वाले प्रत्येक 5 आईफोन में से 1 आईफोन (20% से अधिक) अब भारत में असेंबल और टेस्ट हो रहा है।
  • 5G टेलीकॉम गियर निर्यात: नोकिया और एरिक्सन के भारतीय संयंत्रों से अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को अत्याधुनिक 5G मैसिव एमआईएमओ (Massive MIMO) बेस स्टेशन निर्यात किए जा रहे हैं।
  • व्यापार घाटे (Trade Deficit) में भारी कमी: इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भरता के कारण भारत ने पिछले 5 वर्षों में $100 बिलियन से अधिक की विदेशी मुद्रा की शुद्ध बचत की है।
  • ग्लोबल वैल्यू चेन (China+1 रणनीति): दुनिया की प्रमुख फॉर्च्यून-500 टेक कंपनियां अब एकल देश पर अपनी आपूर्ति निर्भरता समाप्त करने के लिए भारत को अपने प्राथमिक वैकल्पिक केंद्र (Primary Global Alternate) के रूप में चुन रही हैं।
  • RoDTEP और ड्यूटी ड्रॉबैक का निर्यातकों को लाभ: केंद्र सरकार द्वारा निर्यातित उत्पादों पर शुल्कों और करों की छूट (RoDTEP) योजना के तहत भारतीय हार्डवेयर निर्यातकों को 1.5% से 3% तक का त्वरित टैक्स रिफंड सीधे ई-स्क्रिप्ट के रूप में दिया जा रहा है, जिससे वैश्विक बाज़ार में भारतीय मूल्य अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं।

भारतीय उद्यमियों, स्टार्टअप्स और टियर-2/टियर-3 शहरों में निर्माण इकाइयों के लिए सरकारी योजनाएं

'मेक इन इंडिया' अब केवल गुरुग्राम, बेंगलुरु या चेन्नई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार की विभिन्न वित्तीय और नीतिगत पहलों ने छोटे शहरों के युवाओं और उद्यमियों के लिए निर्माण क्षेत्र के द्वार खोल दिए हैं।

उद्यमियों के लिए शीर्ष 4 सरकारी सहायता योजनाएं:

  1. SPECS (इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टर्स के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना): नए प्लांट लगाने, एसएमटी लाइनों (SMT Lines) और क्लीनरूम्स की स्थापना के लिए 25% तक की पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy)।
  2. संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC 2.0): टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्लग-एंड-प्ले शेड्स, 24x7 निर्बाध बिजली, जल आपूर्ति और परीक्षण प्रयोगशालाओं की सुविधा।
  3. एमएसएमई क्रेडिट गारंटी योजना (CGTMSE): बिना किसी संपार्श्विक प्रतिभूति (Collateral-Free Loan) के विनिर्माण उपकरण खरीदने के लिए ₹5 करोड़ तक का आसान बैंक ऋण।
  4. पीएम विश्वकर्मा और स्टैंड-अप इंडिया: अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला उद्यमियों के लिए ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की स्थापना हेतु विशेष ब्याज अनुदान और मार्जिन मनी सहायता।
  5. इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल (ESSCI) और तकनीकी प्रशिक्षण: उद्योग-संबद्ध पॉलिटेक्निक और आईटीआई संस्थानों के माध्यम से एसएमटी ऑपरेटरों, पीसीबी डिजाइनरों और क्लीनरूम तकनीशियनों के लिए केंद्र सरकार 100% प्रायोजित कौशल विकास कार्यक्रम चला रही है।
  6. MeitY TIDE 2.0 और स्टार्टअप इनक्यूबेशन: इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर डिजाइन में नवाचार करने वाले युवा उद्यमियों को देश के शीर्ष आईआईटी और एनआईटी संस्थानों में स्थापित इनक्यूबेशन केंद्रों से ₹7 लाख से ₹25 लाख तक की सीड फंडिंग (Seed Grant) और प्रयोगशाला परीक्षण सहायता प्रदान की जा रही है।

सरकारी जेम (GeM) पोर्टल और पब्लिक प्रोक्योरमेंट नियम

सार्वजनिक खरीद नीति (Public Procurement Policy) के तहत केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के लिए अपनी कुल वार्षिक खरीद का न्यूनतम 25% हिस्सा अनिवार्य रूप से स्थानीय MSMEs से खरीदना विधिक रूप से अनिवार्य किया गया है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (gem.gov.in) पर पंजीकृत स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं को 'क्लास-1 लोकल सप्लायर' (50%+ लोकल कंटेंट) के रूप में प्राथमिकता दी जाती है।

नए विनिर्माण उपक्रमों के लिए कॉरपोरेट टैक्स रियायतें (Tax Incentives)

आयकर अधिनियम की धारा 115BAB के तहत स्थापित नई विनिर्माण कंपनियों को केवल 15% की रियायती कॉर्पोरेट टैक्स दर का लाभ दिया गया है। इसके अतिरिक्त पूंजीगत मशीनरी के आयात पर सीमा शुल्क (Customs Duty) में व्यापक छूट दी गई है, जिससे नए उद्यमियों की प्रारंभिक लागत में 20% तक की कमी आती है।


इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाई स्थापित करने की 5-चरणीय मार्गदर्शिका और BIS मानक

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नया उद्यम शुरू करने वाले उद्यमियों को उच्च गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होता है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का अनिवार्य पंजीकरण योजना (Compulsory Registration Scheme - CRS) उपभोक्ता सुरक्षा की रीढ़ है:

1. विनिर्माण इकाई स्थापना के 5 चरण:

  1. उद्यम पोर्टल (udyamregistration.gov.in) पर निःशुल्क पंजीकरण: अपने आधार और पैन कार्ड से अपनी विनिर्माण इकाई को सूक्ष्म या लघु श्रेणी में दर्ज करें।
  2. संशोधित EMC 2.0 क्लस्टर में प्लग-एंड-प्ले शेड आवंटन: राज्य औद्योगिक विकास निगम (उदा. UPSIDA, SIPCOT, GIDC) से सस्ती दरों पर औद्योगिक भूमि या तैयार शेड प्राप्त करें।
  3. पूंजीगत सब्सिडी (SPECS / MSME स्कीम) हेतु आवेदन: पूंजीगत मशीनरी (SMT पिक-एंड-प्लेस मशीन, रिफ्लो ओवन, ऑटोमेटेड ऑप्टिकल इंस्पेक्शन - AOI) की खरीद पर 25% पूंजीगत सब्सिडी के लिए पोर्टल पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा करें।
  4. BIS CRS प्रयोगशाला परीक्षण एवं प्रमाणन: अपने उत्पाद (जैसे पावर एडाप्टर, एलईडी ड्राइवर, ब्लूटूथ स्पीकर) का परीक्षण NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में कराकर बीआईएस पंजीकरण नंबर प्राप्त करें।
  5. गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) और निर्यात संवर्धन परिषद (ESC) से जुड़ाव: सीधे केंद्र व राज्य सरकारों के टेंडरों में भाग लेने के लिए जेम पर ओईएम (OEM) वेंडर के रूप में रजिस्टर करें और विदेशों में निर्यात के लिए ईपीसी पंजीकरण कराएं।

2. पर्यावरण व ई-कचरा अनुपालन (RoHS & E-Waste EPR):

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं के लिए यह विधिक रूप से अनिवार्य है कि उनके घटकों में लेड, मर्करी, और कैडमियम जैसे खतरनाक रसायनों का स्तर यूरोपीय RoHS मानकों के अनुरूप सुरक्षित सीमा में हो। साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पोर्टल पर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: क्या छोटे उद्यमी और एमएसएमई सीधे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में उतर सकते हैं?
उत्तर: हां, छोटे उद्यमी एसएमटी असेंबली, चार्जर्स, केबल्स, पैकेजिंग और प्लास्टिक मोल्डिंग जैसे कंपोनेंट निर्माण में EMC 2.0 और SPECS योजना की सब्सिडी के साथ शुरुआत कर सकते हैं।

प्रश्न 2: 'मेक इन इंडिया' के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में कितने प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं?
उत्तर: वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र ने पिछले 12 वर्षों में 45 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कुशल रोजगार पैदा किए हैं।

प्रश्न 3: क्या भारत में निर्मित स्मार्टफोन अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं?
उत्तर: बिल्कुल, भारत में निर्मित स्मार्टफोन्स भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), यूरोपीय संघ के CE और अमेरिकी FCC सुरक्षा मानकों को शत-प्रतिशत पूरा करते हैं और दुनिया के 100 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं।


विज्ञापन / SPONSORED

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. मेक इन इंडिया के 12 वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कितने रुपये तक पहुंच गया है?

A. वर्ष 2014 के ₹1.80 लाख करोड़ की तुलना में भारत का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना से अधिक बढ़कर 2026 में ₹13.11 लाख करोड़ ($155+ बिलियन) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुका है।

Q. भारत का मोबाइल फोन विनिर्माण में वर्तमान में दुनिया में कौन सा स्थान है?

A. भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है; देश में बेचे जाने वाले 99.2% मोबाइल फोन अब स्वदेशी रूप से भारत के 300 से अधिक कारखानों में निर्मित होते हैं।

Q. छोटे एमएसएमई उद्यमी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सरकार से किस योजना के तहत मदद पा सकते हैं?

A. छोटे उद्यमी EMC 2.0 प्लग-एंड-प्ले क्लस्टर, मशीनरी पर 25% अनुदान देने वाली SPECS योजना, और GeM पोर्टल के 25% अनिवार्य सरकारी खरीद कोटे का सीधा लाभ उठा सकते हैं।

क्या यह जानकारी आपके लिए उपयोगी रही?

अपने दोस्तों, परिजनों और ग्रुप्स में इस महत्वपूर्ण जानकारी को तुरंत शेयर करें:

💬 WhatsApp पर शेयर करें 📢 चैनल जॉइन करें
💬 WhatsApp शेयर 🔔 WhatsApp चैनल जॉइन करें