📝 11-महीने का रेंट एग्रीमेंट (किरायानामा) AI ड्राफ्ट जनरेटर
मकान मालिक व किराएदार दोनों के अधिकारों को सुरक्षित करने वाला कानूनी ड्राफ्ट तैयार करें
11 महीने का रेंट एग्रीमेंट ही क्यों बनाया जाता है? जानिए कानूनी कारण
भारतीय संपत्ति बाजार में किराए पर मकान, दुकान या फ्लैट देते समय हमेशा 11 महीने का ही रेंट एग्रीमेंट (Lease & License Agreement) तैयार किया जाता है। इसके पीछे दो मुख्य कानूनी कारण हैं: भारतीय पंजीकरण अधिनियम (Registration Act, 1908) की धारा 17 और रेंट कंट्रोल एक्ट (Rent Control Act)।
पंजीकरण अधिनियम की धारा 17 के तहत, यदि कोई लीज डीड 12 महीने (1 वर्ष) या उससे अधिक अवधि के लिए बनाई जाती है, तो उसका सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर अनिवार्य पंजीकरण (Compulsory Registration) कराना होता है, जिस पर 1% से 2% स्टाम्प शुल्क और कोर्ट फीस चुकानी पड़ती है। 11 महीने का एग्रीमेंट बनाकर पक्षकार भारी स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री ऑफिस के चक्कर लगाने से बच जाते हैं।
💡 मकान मालिक व किराएदार के लिए जरूरी नियम (Model Tenancy Act 2026)
मॉडल टेनेंसी एक्ट के तहत आवासीय परिसरों के लिए अधिकतम 2 महीने का किराया ही सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में लिया जा सकता है। मकान मालिक बिना 24 घंटे के पूर्व नोटिस के किराएदार के परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता है।
11 महीने के रेंट एग्रीमेंट में जरूरी 7 मुख्य शर्तें
| शर्त का प्रकार | आवासीय मानक | व्यावसायिक मानक | मकान मालिक का अधिकार | किराएदार का संरक्षण |
|---|---|---|---|---|
| सिक्योरिटी डिपॉजिट | 1 से 2 माह का किराया | 3 से 6 माह का किराया | बकाया बिल समायोजन | मकान खाली करने पर पूर्ण वापसी |
| नोटिस पीरियड | 30 दिन (1 माह) | 60 से 90 दिन | परिसर खाली कराने की सूचना | अचानक बेदखली से सुरक्षा |
| वार्षिक किराया वृद्धि | 5% से 10% | 10% से 15% | मुद्रास्फीति अनुसार किराया बढ़ना | अनुचित बढ़ोतरी पर रोक |
| बिजली-पानी भुगतान | सब-मीटर रीडिंग अनुसार | अलग कमर्शियल मीटर | समय पर बिल जमा की रसीद मांगना | सरकारी यूनिट रेट पर देय |
| ताला-बंद (Lock-in) | 3 से 6 माह | 1 से 3 वर्ष | निश्चित अवधि का किराया सुरक्षित | अचानक मकान खाली न कराना |
कितने रुपये के स्टाम्प पेपर पर प्रिंट कराना चाहिए?
11 महीने के रेंट एग्रीमेंट के लिए राज्यवार गैर-न्यायिक (Non-Judicial) ई-स्टाम्प पेपर का उपयोग किया जाता है:
- उत्तर प्रदेश व बिहार: ₹100 का ई-स्टाम्प पेपर (किराया ₹10,000 से अधिक होने पर ₹500 का स्टाम्प बेहतर माना जाता है)।
- दिल्ली व हरियाणा: ₹100 या ₹500 का ई-स्टाम्प पेपर।
- महाराष्ट्र व कर्नाटक: महाराष्ट्र में ऑनलाइन ई-रजिस्ट्रेशन प्रणाली अनिवार्य है, जहाँ 0.25% स्टाम्प ड्यूटी लगती है।
स्टाम्प पेपर पर प्रथम पेज का प्रिंट लेने के पश्चात शेष पृष्ठ सादे A4 एग्जीक्यूटिव पेपर पर प्रिंट किए जाते हैं और अंत में नोटरी पब्लिक (Notary Advocate) से तस्दीक (Attestation) करा ली जाती है।