yojana ⏱️ 19 मिनट पढ़ें 📅 23 सितंबर 2026

PM Kusum Yojana 2026: सोलर कृषि पंप पर 90% तक वित्तीय सहायता, कंपोनेंट A, B, C पात्रता, लागत व pmkusum.mnre.gov.in आवेदन गाइड

RM
राजेश कुमार मीना
वरिष्ठ कृषि नीति एवं नवीकरणीय ऊर्जा विश्लेषक

विगत 8 वर्षों से केंद्रीय कृषि योजनाओं, सोलर सिंचाई तंत्र और ग्रामीण डीबीटी पहलों पर ग्राउंड रिपोर्टिंग व शोध।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM 2026) नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की प्रमुख योजना है, जिसके तहत किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने पर कुल लागत का 60% तक प्रत्यक्ष सरकारी अनुदान (30% केंद्र सरकार + 30% राज्य सरकार) मिलता है। शेष 40% में से 30% राशि बैंक ऋण के रूप में मिल जाती है और किसान को अपनी जेब से केवल 10% पूंजी लगानी होती है। योजना के तीन मुख्य कंपोनेंट हैं: कंपोनेंट A (बंजर जमीन पर 2 MW तक के सोलर प्लांट), कंपोनेंट B (स्टैंडअलोन सोलर पंप) और कंपोनेंट C (मौजूदा ग्रिड पंपों का सोलराइजेशन)। किसान आधिकारिक पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in और राज्य अक्षय ऊर्जा निगम के पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • लागत का केवल 10% किसान अंशदान: 60% सरकारी सब्सिडी (30% केंद्र + 30% राज्य) और 30% बैंक ऋण की सुविधा, जिससे किसान को सिर्फ 10% खर्च वहन करना होता है।
  • डीजल पंपों के भारी खर्च से मुक्ति: 3HP, 5HP और 7.5HP के सोलर पंप लगाकर किसान सिंचाई के महंगे डीजल बिलों से पूरी तरह मुक्त हो जाते हैं।
  • अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई: ग्रिड से जुड़े सोलर पंपों (कंपोनेंट C) से बची हुई बिजली स्थानीय डिस्कॉम (बिजली कंपनी) को बेचकर किसान हर साल नियमित आय प्राप्त कर सकते हैं।
  • बंजर ज़मीन का सदुपयोग: कंपोनेंट A के तहत किसान अपनी अनुपजाऊ या पथरीली ज़मीन पर 500 kW से 2 MW तक का सोलर पावर प्लांट लगाकर 25 साल तक निश्चित किराया कमा सकते हैं।
मापदंड / विवरणआधिकारिक प्रावधान (Official Guidelines)सत्यापन माध्यम / संदर्भ
योजना का नामप्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM 2026)नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)
सब्सिडी ढांचा60% प्रत्यक्ष सब्सिडी (30% केंद्रीय वित्तीय सहायता + 30% राज्य अनुदान)MNRE मास्टर गाइडलाइंस 2026
किसान का अंशदानमात्र 10% (शेष 30% नाबार्ड/बैंक ऋण से वित्तपोषित)राज्य अक्षय ऊर्जा विकास निगम
पंप की क्षमता श्रेणियां3 HP, 5 HP और 7.5 HP (सरफेस एवं सबमर्सिबल सोलर पंप)BIS मानक एवं MNRE स्पेसिफिकेशन्स
योजना के 3 मुख्य कंपोनेंटA: 10,000 MW ग्रिड प्लांट, B: 20 लाख स्टैंडअलोन पंप, C: 15 लाख ग्रिड पंप सोलराइजेशनआधिकारिक योजना ड्राफ्ट
वारंटी एवं मेंटेनेंससोलर पैनल पर 25 साल की परफॉर्मेंस वारंटी एवं 5 साल का व्यापक मेंटेनेंसवेंडर अनुबंध एवं SLA शर्तें
पात्र आवेदकव्यक्तिगत किसान, किसान समूह, FPO, जल उपभोक्ता एसोसिएशन व पंचायतेंखतौनी / जमाबंदी भू-अभिलेख
आधिकारिक पोर्टलpmkusum.mnre.gov.in एवं राज्य अक्षय ऊर्जा एजेंसी के वेब पोर्टलभारत सरकार राष्ट्रीय पोर्टल

भारतीय किसानों के लिए खेती में सबसे बड़ी लागत सिंचाई की आती है। देश के लाखों ग्रामीण इलाकों में या तो बिजली के ट्रांसफार्मर बार-बार जल जाते हैं या फिर बिजली रात के समय केवल कुछ घंटों के लिए मिलती है। मजबूरन किसानों को फसलों को पानी देने के लिए महंगे डीजल पंपों पर निर्भर रहना पड़ता है। वर्तमान में डीजल के बढ़ते दामों के कारण एक एकड़ फसल की सिंचाई में हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। किसानों को इसी भारी वित्तीय बोझ से उबारने और उन्हें ऊर्जा उत्पादक बनाने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना एक गेम-चेंजर साबित हो रही है।

वर्ष 2026 में केंद्र सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने पीएम कुसुम योजना के नियमों को और अधिक सरल बनाया है ताकि अधिक से अधिक लघु और सीमांत किसान इसका लाभ उठा सकें। अब न केवल पंपों पर 60% से 90% तक की वित्तीय मदद उपलब्ध कराई जा रही है, बल्कि किसान अपनी खाली पड़ी ज़मीन पर सोलर पैनल लगाकर बिजली कंपनियों (DISCOMs) को बिजली बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर रहे हैं। यदि आप सरकार की अन्य कृषि वित्तीय योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, तो हमारी विस्तृत गाइड किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) 2026 और PM Kisan सम्मान निधि योजना संपूर्ण गाइड का भी संदर्भ ले सकते हैं।

1. पीएम कुसुम योजना 2026 क्या है? पृष्ठभूमि और उद्देश्य

पीएम कुसुम योजना का शुभारंभ भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 में किया गया था और इसे निरंतर विस्तारित किया गया है। योजना का मुख्य लक्ष्य देश भर में लगभग 35 लाख से अधिक किसानों को स्वच्छ और विश्वसनीय सौर ऊर्जा उपलब्ध कराना है। इसके तहत दिन के उजाले में फसलों की सुचारु सिंचाई संभव होती है, जिससे किसानों को रात के अंधेरे में खेतों में पानी लगाने की परेशानी और सांप-बिच्छू के खतरे से मुक्ति मिलती है।

इस योजना का पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा असर पड़ता है। जब किसान डीजल पंप की जगह सोलर पंप लगाता है, तो प्रति पंप प्रति वर्ष औसतन 500 से 1,000 लीटर डीजल की बचत होती है और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आती है। साथ ही भूजल का अंधाधुंध दोहन रोकने के लिए सोलर पंपों में आधुनिक ऑटोमेटिक कट-ऑफ सेंसर लगाए जाते हैं।

2. योजना के 3 कंपोनेंट: A, B और C का संपूर्ण तुलनात्मक विश्लेषण

पीएम कुसुम योजना को तीन अलग-अलग श्रेणियों (Components) में बांटा गया है ताकि हर किसान अपनी जरूरत के अनुसार सही विकल्प चुन सके:

कंपोनेंट (Component)उद्देश्य व कार्यक्षेत्रलक्ष्य व पैमानासब्सिडी संरचना
कंपोनेंट A (Component-A)बंजर, पथरीली या कृषि योग्य ज़मीन पर ग्राउंड माउंटेड ग्रिड कनेक्टेड सोलर प्लांट500 kW से 2 MW क्षमतापावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर 25 साल तक बिजली खरीद गारंटी
कंपोनेंट B (Component-B)गैर-विद्युतीकृत ग्रामीण क्षेत्रों में स्टैंडअलोन ऑफ-ग्रिड सोलर पंप स्थापना17.5 लाख से अधिक पंप (3HP, 5HP, 7.5HP)60% सरकारी सब्सिडी (30% केंद्र + 30% राज्य) + 30% बैंक लोन
कंपोनेंट C (Component-C)पहले से लगे हुए ग्रिड-कनेक्टेड बिजली कृषि पंपों का सौर ऊर्जाकरण (Individual & Feeder)15 लाख ग्रिड पंपों का सोलराइजेशन60% सब्सिडी, अतिरिक्त बिजली ग्रिड में बेचकर मीटर क्रेडिट

कंपोनेंट B: सामान्य किसानों के लिए सबसे उपयोगी

अधिकांश छोटे और मध्यम किसानों के लिए कंपोनेंट B सबसे अधिक प्रासंगिक है। यदि आपके खेत में बिजली का कनेक्शन नहीं है और आप बोरवेल या कुएं से डीजल इंजन चलाकर पानी निकालते हैं, तो कंपोनेंट B के तहत आपको नया 3HP, 5HP या 7.5HP का सोलर पंप दिया जाता है। इसमें दिन में धूप निकलते ही पंप अपने आप पानी देना शुरू कर देता है।

कंपोनेंट C (फीडर लेवल सोलराइजेशन)

कंपोनेंट C उन इलाकों के लिए है जहां किसानों के पास पहले से बिजली कनेक्शन वाला पंप है। इसमें सरकार कृषि फीडर को ही सोलर प्लांट से जोड़ देती है या फिर किसान के खेत पर पैनल लगाकर पंप को ग्रिड से जोड़ती है। जब किसान सिंचाई नहीं कर रहा होता, तो बनी हुई पूरी बिजली सरकारी बिजली ग्रिड में जाती है और किसान के खाते में पैसे जुड़ते हैं। यदि आप घरेलू सोलर रूफटॉप के बारे में जानना चाहते हैं, तो PM Surya Ghar मुफ़्त बिजली योजना पढ़ें।

3. सब्सिडी और लागत का गणित: 3HP, 5HP और 7.5HP सोलर पंप पर कितना खर्च?

सोलर पंप की लागत इस बात पर निर्भर करती है कि आप सरफेस पंप (खुले कुएं या तालाब के लिए) ले रहे हैं या सबमर्सिबल पंप (गहरे बोरवेल के लिए)। नीचे 2026 के मानक मूल्य और किसान अंशदान का विवरण दिया गया है:

पंप क्षमताअनुमानित कुल लागतकेंद्रीय सब्सिडी (30%)राज्य सब्सिडी (30%)किसान का अंशदान (10%)
3 HP डीसी सबमर्सिबल₹1,80,000 - ₹2,10,000लगभग ₹60,000लगभग ₹60,000लगभग ₹18,000 - ₹22,000
5 HP डीसी सबमर्सिबल₹2,60,000 - ₹3,00,000लगभग ₹85,000लगभग ₹85,000लगभग ₹26,000 - ₹30,000
7.5 HP डीसी सबमर्सिबल₹3,70,000 - ₹4,20,000लगभग ₹1,15,000लगभग ₹1,15,000लगभग ₹37,000 - ₹42,000

नोट: पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों (हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर) और राजस्थान व लद्दाख के रेगिस्तानी क्षेत्रों में केंद्रीय वित्तीय सहायता 50% तक होती है, जिससे कुल सब्सिडी 80% से 90% तक पहुंच जाती है। शेष राशि के लिए नाबार्ड (NABARD) और राष्ट्रीयकृत बैंकों से सस्ता ऋण मिल जाता है।

4. पात्रता शर्तें और आवश्यक दस्तावेज़ चेकलिस्ट

पीएम कुसुम योजना में आवेदन करने हेतु आवेदक किसान को निम्नलिखित मानकों को पूरा करना आवश्यक है:

  • भूमि का स्वामित्व: आवेदक के नाम पर या संयुक्त परिवार के हिस्से के रूप में वैध कृषि भूमि होनी चाहिए। भूमि का खसरा/खतौनी रिकॉर्ड ऑनलाइन सत्यापित होना चाहिए।
  • जल स्रोत की उपलब्धता: खेत में पानी का स्थायी स्रोत — जैसे बोरवेल, खुला कुआं, फार्म पॉन्ड (खेत तालाब) या पक्की नहर — होना अनिवार्य है। पंप का ड्राई रन टेस्ट नहीं किया जाता।
  • विद्युत कनेक्शन की स्थिति: कंपोनेंट B के लिए उस भूमि पर पहले से कोई सक्रिय ग्रिड बिजली कृषि कनेक्शन नहीं होना चाहिए।
  • आधार लिंक्ड बैंक खाता: सब्सिडी और किसान अंशदान की प्रोसेसिंग डीबीटी माध्यम से सीधे बैंक खाते में होती है।

अनिवार्य दस्तावेज़:

  1. आधार कार्ड और पैन कार्ड (पहचान व पते के सत्यापन हेतु)।
  2. नवीनतम खसरा, खतौनी या बी-1 नकल (भू-अभिलेख)।
  3. बैंक पासबुक की प्रति या कैंसिल्ड चेक (जिसमें IFSC कोड स्पष्ट हो)।
  4. खेत में मौजूद बोरवेल या जल स्रोत का स्व-घोषणा पत्र व फोटो।
  5. पासपोर्ट साइज फोटो और आधार से लिंक मोबाइल नंबर।

5. pmkusum.mnre.gov.in और राज्य पोर्टल्स पर स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन आवेदन

कुसुम योजना का क्रियान्वयन राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसियों (SDA) जैसे UPNEDA (उत्तर प्रदेश), RREC (राजस्थान), MPUVNL (मध्य प्रदेश), MEDA (महाराष्ट्र), HAREDA (हरियाणा) आदि के माध्यम से किया जाता है। आवेदन की मानक प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. केंद्रीय पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in पर जाएं और अपने संबंधित राज्य के आधिकारिक लिंक का चयन करें।
  2. 'किसान पंजीकरण (Farmer Registration)' विकल्प पर क्लिक करें और अपना आधार नंबर व मोबाइल नंबर दर्ज करें।
  3. मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी दर्ज कर ई-केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण करें।
  4. अपनी भूमि का विवरण (जिला, तहसील, गांव, खसरा नंबर व कुल रकबा) भरें।
  5. आपको किस क्षमता का सोलर पंप (3HP, 5HP या 7.5HP) चाहिए और सरफेस या सबमर्सिबल, उसका चयन करें।
  6. पोर्टल पर सूचीबद्ध अधिकृत सोलर वेंडर्स (Empaneled Vendors) की सूची में से अपनी पसंद की प्रमाणित कंपनी चुनें।
  7. मांगे गए दस्तावेज़ (खतौनी, आधार, बैंक पासबुक) की स्पष्ट पीडीएफ अपलोड करें।
  8. अपने हिस्से की 10% अग्रिम टोकन राशि का भुगतान ऑनलाइन नेट बैंकिंग या चालान के माध्यम से करें।
  9. आवेदन सबमिट करने पर आपको एक विशिष्ट Application Reference Number प्राप्त होगा, जिससे आप सोलर पंप की आपूर्ति और इंस्टॉलेशन की स्थिति ट्रैक कर सकेंगे।

6. डिस्कॉम को अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई कैसे करें?

कंपोनेंट A और C के अंतर्गत किसानों के खेतों पर बायो-डायरेक्शनल नेट मीटर (Net Meter) लगाया जाता है। सामान्यतः एक किसान साल में 120 से 150 दिन ही पंप का उपयोग करता है। शेष दिनों में सोलर पैनल लगातार बिजली बनाते रहते हैं। यह बिजली स्थानीय 33/11 kV सब-स्टेशन में प्रवाहित हो जाती है। राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) द्वारा तय की गई टैरिफ दर (औसतन ₹3.10 से ₹3.60 प्रति यूनिट) के आधार पर बिजली कंपनी हर महीने किसान के बैंक खाते में सीधा भुगतान करती है।

7. फर्जी वेबसाइटों से सावधान: साइबर ठगी से बचने के जरूरी नियम

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने बार-बार सार्वजनिक चेतावनी जारी की है कि इंटरनेट पर कई फर्जी वेबसाइटें (जैसे kusumyojana.online, solar-kusum.org) चल रही हैं जो किसानों से रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर ₹5,000 से ₹20,000 की ठगी कर रही हैं। किसान भाइयों को ध्यान रखना चाहिए कि:

  • भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट का डोमेन हमेशा .gov.in या .nic.in पर ही समाप्त होता है।
  • किसी भी अज्ञात व्हाट्सएप लिंक या फोन कॉल पर सोलर पंप के लिए सीधे बैंक ट्रांसफर न करें।
  • यदि आपके साथ कोई साइबर धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत हमारी गाइड साइबर फ्रॉड 1930 हेल्पलाइन व खाता फ्रीज गाइड के अनुसार शिकायत दर्ज कराएं।

8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

आधिकारिक संदर्भ व संपर्क: पीएम कुसुम योजना की अधिकृत जानकारी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राष्ट्रीय पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in पर उपलब्ध है। किसान किसी भी समस्या के समाधान हेतु टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-3333 पर संपर्क कर सकते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या पीएम कुसुम योजना में सोलर पंप लगाने पर किसान को कोई अलग से बिजली का बिल देना पड़ता है?

A. नहीं, स्टैंडअलोन सोलर पंप (कंपोनेंट B) पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर चलता है और इसमें किसी ग्रिड बिजली की जरूरत नहीं होती, इसलिए बिजली का कोई बिल नहीं आता।

Q. सोलर पैनल और पंप की वारंटी कितने साल की होती है?

A. अधिकृत कंपनियों द्वारा सोलर पीवी मॉड्यूल पर 25 साल की परफॉर्मेंस वारंटी और पूरे सोलर पंपिंग सिस्टम पर 5 साल की व्यापक मेंटेनेंस वारंटी दी जाती है।

Q. क्या 2 एकड़ से कम ज़मीन वाले छोटे किसान भी कुसुम योजना में आवेदन कर सकते हैं?

A. हां, छोटे और सीमांत किसान 3 HP क्षमता के सोलर पंप के लिए प्राथमिकता से पात्र हैं। इसके लिए बस बोरवेल या कुएं का वैध जल स्रोत होना चाहिए।

Q. कुसुम योजना के तहत सोलर पंप कितने दिनों में खेत में लग जाता है?

A. किसान अंशदान जमा होने और विभागीय भौतिक सत्यापन (Physical Inspection) पूरा होने के सामान्यतः 30 से 60 दिनों के भीतर अधिकृत वेंडर खेत पर सोलर पंप स्थापित कर देता है।

Q. क्या पहले से बिजली कनेक्शन वाले किसान नया सोलर पंप ले सकते हैं?

A. जिन किसानों के पास पहले से कृषि बिजली कनेक्शन है, वे कंपोनेंट C (ग्रिड कनेक्टेड पंप सोलराइजेशन) के तहत सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं, कंपोनेंट B नए ऑफ-ग्रिड पंपों के लिए है।

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