आजकल ऑनलाइन शॉपिंग, हवाई टिकट बुकिंग, होटल रिजर्वेशन और अंतरराष्ट्रीय सब्सक्रिप्शन के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल हर भारतीय के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी परेशानी भी तेजी से बढ़ी है — कभी किसी अनजान मर्चेंट द्वारा कार्ड से बिना इजाजत पैसे कट जाते हैं, कभी एयरलाइन टिकट कैंसिल होने के बाद भी महीनों तक ट्रेवल पोर्टल पैसा नहीं लौटाता, तो कभी किसी ऑनलाइन वेबसाइट से मंगाया गया महंगा सामान नकली या टूटा-फूटा निकलता है और सेलर फोन उठाना बंद कर देता है। ऐसे में आम लोग मर्चेंट के कस्टमर केयर पर गिड़गिड़ाते रहते हैं और हताश होकर मान लेते हैं कि उनका पैसा डूब गया। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि क्रेडिट कार्ड उपभोक्ताओं के पास दुनिया का सबसे ताकतवर वित्तीय हथियार होता है जिसे चार्जबैक (Chargeback) कहा जाता है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्कों (Visa, Mastercard, RuPay, Amex) के नियमों के अनुसार यदि मर्चेंट आपके साथ धोखाधड़ी करता है या सेवा नहीं देता, तो आप अपने बैंक से मर्चेंट का कॉलर पकड़कर जबरन अपना पूरा पैसा वापस करवा सकते हैं।
🛡️ क्रेडिट कार्ड चार्जबैक: मुख्य कानूनी अधिकार (2026)
- कानूनी शक्ति: आरबीआई मास्टर डायरेक्शन ऑन क्रेडिट कार्ड्स 2022 (संशोधित 2026) और वीजा/मास्टरकार्ड ग्लोबल डिस्प्यूट रूल्स।
- जीरो लायबिलिटी (Zero Liability): अनाधिकृत साइबर फ्रॉड की सूचना 3 दिन में देने पर ग्राहक की देनदारी शून्य रुपये।
- 120 दिनों का समय: लेन-देन की तिथि या सेवा न मिलने की निर्धारित तिथि से 120 दिनों तक चार्जबैक का कानूनी अधिकार।
- प्रोविजनल रिलीफ: जांच चलने के दौरान बैंक विवादित रकम पर ब्याज या पेनाल्टी नहीं लगा सकता।
1. चार्जबैक (Chargeback) क्या है और यह सामान्य रिफंड से अलग क्यों है?
अधिकांश उपभोक्ता 'रिफंड' और 'चार्जबैक' को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में जमीन-आसमान का फर्क होता है:
| मापदंड / विशेषता | मर्चेंट रिफंड (Normal Refund) | बैंक चार्जबैक (Chargeback Dispute) | ग्राहक के लिए कानूनी सुरक्षा |
|---|---|---|---|
| शुरुआत कौन करता है? | मर्चेंट या दुकानदार खुद अपनी मर्जी से | ग्राहक का कार्ड जारीकर्ता बैंक (Issuing Bank) | मर्चेंट की मर्जी पर निर्भरता शून्य |
| प्रक्रिया का स्वरूप | व्यावसायिक शिष्टाचार या सद्भावना | अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क का कानूनी आदेश | आरबीआई व वीजा/मास्टरकार्ड नियमों से बाध्य |
| पैसा कहाँ से कटता है? | मर्चेंट जब अपने खाते से जारी करे | मर्चेंट के एक्वायरर बैंक से जबरन काटा जाता है | मर्चेंट द्वारा मना करने पर भी वसूली संभव |
| मर्चेंट पर असर | कोई पेनल्टी या रिकॉर्ड खराब नहीं होता | मर्चेंट पर भारी चार्जबैक फीस ($15 से $25) और रेटिंग खराब | मर्चेंट का पेमेंट गेटवे ब्लैकलिस्ट होने का डर |
सीधी बात यह है कि रिफंड के लिए आप मर्चेंट के सामने हाथ फैलाते हैं, जबकि चार्जबैक में आपका बैंक कार्ड नेटवर्क के नियमों का डंडा चलाकर मर्चेंट के खाते से वह पैसा छीनकर आपके कार्ड में वापस जमा कर देता है!
2. किन 5 प्रमुख परिस्थितियों में आप कानूनी चार्जबैक मांग सकते हैं?
वीजा, मास्टरकार्ड और रूपे नेटवर्क ने चार्जबैक के लिए बाकायदा विशिष्ट 'रीजन कोड' (Reason Codes) तय किए हैं। यदि आपका मामला निम्नलिखित 5 श्रेणियों में आता है, तो आपका क्लेम 100% मजबूत है:
- सामग्री या सेवा प्राप्त न होना (Goods or Services Not Received): आपने किसी वेबसाइट से कपड़े या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदा, पैसे कट गए लेकिन पार्सल कभी डिलीवर नहीं हुआ। या आपने फ्लाइट, ट्रेन या होटल बुक किया और कंपनी ने सर्विस रद्द कर दी और पैसे नहीं लौटाए।
- दोषपूर्ण या नकली सामान (Defective, Damaged or Counterfeit Goods): आपको जो उत्पाद मिला वह टूटा हुआ था, काम नहीं कर रहा था या वेबसाइट पर दिखाई गई फोटो से बिल्कुल अलग था और सेलर ने रिटर्न लेने से मना कर दिया।
- अनधिकृत या धोखाधड़ी भरा लेन-देन: यदि साइबर फ्रॉड या फर्जी सिम से ओटीपी लीक हुआ हो, तो तुरंत संचार साथी व TAFCOP से अनजान सिम ब्लॉक करने का तरीका अपनाएं। (Unauthorized / Fraudulent Transaction): आपके कार्ड का क्लोन बनाकर या डार्क वेब पर डाटा लीक होने से आपके सोए रहने के दौरान किसी विदेशी वेबसाइट पर चार्ज कट गया।
- दोहरी बिलिंग या गलत रकम (Duplicate Processing / Incorrect Amount): स्वाइप मशीन या ऑनलाइन गेटवे में गड़बड़ी से एक ही बिल के पैसे दो बार कट गए, या ₹1,000 की जगह ₹10,000 कट गए।
- कैंसिल करने के बाद भी सब्सक्रिप्शन कटना (Recurring Billing After Cancellation): आपने नेटफ्लिक्स, सॉफ्टवेयर या किसी जिम की मेंबरशिप लिखित में ईमेल भेजकर रद्द कर दी थी, फिर भी अगले महीने आपके कार्ड से ऑटो-डेबिट काट लिया गया।
3. RBI का जीरो लायबिलिटी सर्कुलर और 120-दिन की समयसीमा
आरबीआई का मास्टर सर्कुलर 'Limiting Liability of Customers in Unauthorised Electronic Banking Transactions' कार्डधारकों को पूर्ण सुरक्षा कवच देता है:
⏱️ समयसीमा और ग्राहक की देनदारी का गणित (RBI Matrix):
- 3 कार्यदिवसों के भीतर सूचना: यदि आपके कार्ड से कोई अनधिकृत लेन-देन हुआ और आपने 3 वर्किंग डेज के भीतर बैंक को ईमेल/हेल्पलाइन पर बता दिया, तो आपकी वित्तीय देनदारी शून्य रुपये (Zero Liability) होगी। पूरा नुकसान बैंक को वहन करना होगा।
- 4 से 7 कार्यदिवसों के भीतर सूचना: यदि देरी आपकी तरफ से हुई और आपने 4 से 7 दिनों में बताया, तो आपकी अधिकतम देनदारी केवल ₹5,000 से ₹10,000 (कार्ड लिमिट के अनुसार) तक सीमित रहेगी; बाकी पूरी रकम बैंक लौटाएगा।
- 120-दिन का चार्जबैक नियम: मर्चेंट विवादों (जैसे फ्लाइट कैंसिल या डिलीवरी न होना) के मामले में अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत आपके पास लेन-देन की तारीख या सामान मिलने की तय तारीख से पूरे 120 दिन का समय होता है। इसलिए 2 महीने बाद भी यदि सेलर रिफंड न दे, तो आप चार्जबैक लगा सकते हैं।
4. बैंक में चार्जबैक फॉर्म भरने और ईमेल करने के 5 सटीक चरण
चार्जबैक पाने के लिए मौखिक रूप से कस्टमर केयर से बात करना काफी नहीं होता। आपको एक ठोस लिखित रिकॉर्ड तैयार करना होता है:
चार्जबैक प्रक्रिया के 5 व्यावहारिक चरण:
- मर्चेंट के साथ लिखित संचार का सबूत रखें: सबसे पहले मर्चेंट को ईमेल भेजकर रिफंड मांगें। यदि 48 घंटे में मर्चेंट रिफंड देने से मना कर दे या जवाब न दे, तो उस ईमेल थ्रेड का पीडीएफ या स्क्रीनशॉट सुरक्षित कर लें। यह चार्जबैक का सबसे बड़ा सबूत बनता है।
- बैंक की वेबसाइट से 'Cardholder Dispute Form' (CDF) डाउनलोड करें: हर बैंक (HDFC, SBI Card, ICICI, Axis, Kotak आदि) के पोर्टल पर 'Dispute Form' उपलब्ध होता है। इसे डाउनलोड करें।
- फॉर्म में सही रीजन कोड और विवरण भरें: अपना कार्ड नंबर (सिर्फ अंतिम 4 अंक), लेन-देन की तारीख, मर्चेंट का नाम, ट्रांजेक्शन रेफरेंस नंबर (ARN / RRN) और सही कारण (जैसे Services Not Provided / Fraud) पर टिक करें।
- संलग्न दस्तावेज (Evidence Packet): डिस्प्यूट फॉर्म के साथ इनवॉइस/बिल, मर्चेंट को भेजा गया ईमेल, कैंसिलेशन कन्फर्मेशन और बैंक स्टेटमेंट की कॉपी अटैच करें।
- कार्ड डिस्प्यूट सेल को ईमेल भेजें: अपने बैंक के आधिकारिक चार्जबैक ईमेल पर भेजें:
- HDFC:
chargeback@hdfcbank.com - SBI Card:
chargeback@sbicard.com - ICICI Bank:
dispute@icicibank.com - Axis Bank:
creditcards@axisbank.com
- HDFC:
5. प्रोविजनल क्रेडिट और जांच के दौरान ब्याज से छूट का नियम
अक्सर लोग डरते हैं कि अगर ₹50,000 के विवादित बिल को उन्होंने नहीं भरा, तो बैंक 42% का भारी ब्याज और लेट पेमेंट चार्ज लगा देगा और सिबिल स्कोर खराब हो जाएगा। आरबीआई के नियम इस पर बिल्कुल स्पष्ट हैं:
- जैसे ही आप औपचारिक डिस्प्यूट फॉर्म जमा करते हैं, बैंक को अधिकतम 48 से 72 घंटों के भीतर आपके कार्ड खाते में विवादित रकम के बराबर 'प्रोविजनल क्रेडिट' (Provisional Credit) देना अनिवार्य होता है।
- यह प्रोविजनल क्रेडिट आपके बिलिंग आउटस्टैंडिंग को कम कर देता है, जिससे आपको अपनी जेब से उस विवादित रकम का भुगतान नहीं करना पड़ता।
- आरबीआई सर्कुलर के तहत जांच लंबित रहने के दौरान बैंक उस राशि पर न तो कोई ब्याज लगा सकता है, न कोई लेट फीस जोड़ सकता है, और न ही क्रेडिट ब्यूरो (CIBIL) में इसे डिफ़ॉल्ट के रूप में भेज सकता है।
6. चार्जबैक प्रक्रिया 2026: मास्टर तुलनात्मक तालिका
| विवाद का कारण | कार्ड नेटवर्क रीजन कोड | अनिवार्य प्राथमिक प्रमाण | निपटारा समयसीमा | सफलता की संभावना |
|---|---|---|---|---|
| सामान कभी नहीं पहुंचा | Visa 13.1 / MC 4853 | ऑर्डर कन्फर्मेशन, सेलर को भेजा रिफंड ईमेल | 30 से 45 दिन | 95% से अधिक (यदि ट्रैकिंग न हो) |
| सर्विस/फ्लाइट रद्द, रिफंड नहीं | Visa 13.1 / MC 4853 | कैंसिलेशन मैसेज/ईमेल, ट्रेवल वाउचर रिजेक्शन | 30 से 60 दिन | 98% सुनिश्चित |
| कार्ड क्लोनिंग / अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड | Visa 10.4 / MC 4837 | पुलिस एनसीआर रसीद, पासपोर्ट एंट्री (भारत में मौजूदगी) | 15 से 30 दिन | 100% (आरबीआई जीरो लायबिलिटी) |
| नकली या टूटा हुआ सामान | Visa 13.3 / MC 4853 | पार्सल अनबॉक्सिंग वीडियो, फोटो, सेलर रिटर्न चैट | 45 से 60 दिन | 85% से 90% |
| दोहरा ट्रांजेक्शन कटना | Visa 12.6 / MC 4834 | क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में दोनों कटौतियों का ब्योरा | 7 से 15 दिन | 100% स्वतः स्वीकृत |
📌 यह भी पढ़ें: बैंक सुरक्षा और नुकसान की स्थिति में मुआवजे के लिए RBI बैंक लॉकर 100 गुना मुआवजा व एग्रीमेंट गाइड देखें।
7. बैंक आनाकानी करे तो RBI लोकपाल में शिकायत कैसे करें?
यदि आपका बैंक चार्जबैक फॉर्म लेने से मना करता है, यह कहता है कि 'मर्चेंट से खुद बात करो', या 30 दिनों के भीतर संतोषजनक समाधान नहीं देता, तो आपको समय बर्बाद नहीं करना चाहिए:
- प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर (PNO) को लिखें: बैंक के कस्टमर केयर से आगे बढ़कर बैंक के मुख्य नोडल अधिकारी को ईमेल भेजें (हर बैंक की वेबसाइट के 'Grievance Redressal' पेज पर PNO का ईमेल होता है)।
- आरबीआई कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS Portal): यदि 30 दिनों में बैंक पैसा नहीं लौटाता, तो सीधे भारतीय रिज़र्व बैंक के आधिकारिक शिकायत पोर्टल
cms.rbi.org.inपर लॉगिन करें। - वहां 'File a Complaint against Bank' चुनें, अपना डिस्प्यूट फॉर्म, बैंक को भेजे गए ईमेल की प्रति और बैंक का टालमटोल वाला जवाब अपलोड करें।
- आरबीआई का लोकपाल (Banking Ombudsman) बैंक के शीर्ष प्रबंधन को नोटिस जारी करता है। लोकपाल के सख्त नियमों के तहत बैंक को न केवल ग्राहक का पूरा पैसा ब्याज सहित वापस करना पड़ता है, बल्कि ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के लिए ₹1 लाख तक का मुआवजा भी देना पड़ सकता है।
8. चार्जबैक फाइल करते समय कभी न करें ये 5 गलतियां
🚫 चार्जबैक रिजेक्शन से बचने के महत्वपूर्ण नियम:
- गलत या झूठा दावा न करें (Friendly Fraud): यदि आपके परिवार के किसी सदस्य ने गेमिंग या शॉपिंग में कार्ड इस्तेमाल किया है और आप उसे 'अनधिकृत फ्रॉड' बताकर चार्जबैक लगा देते हैं, तो मर्चेंट द्वारा आईपी एड्रेस और डिवाइस फिंगरप्रिंट पेश करने पर क्लेम खारिज हो जाएगा और बैंक आप पर पेनल्टी लगा सकता है।
- मर्चेंट को बिना बताए सीधे बैंक न जाएं: यदि आप किसी डिलीवरी विवाद में चार्जबैक लगा रहे हैं, तो हमेशा पहले मर्चेंट को एक ईमेल जरूर भेजें। वीजा/मास्टरकार्ड नियम यह देखते हैं कि ग्राहक ने पहले मर्चेंट के साथ मसला सुलझाने की वाजिब कोशिश की थी या नहीं।
- 120 दिन की डेडलाइन न चूकें: कई लोग 5-6 महीने तक सेलर के झूठे वादों पर भरोसा करते रहते हैं और जब 120 दिन का समय निकल जाता है, तब बैंक जाते हैं। समय सीमा बीत जाने के बाद कार्ड नेटवर्क कानूनी रूप से लाचार हो जाते हैं।
- कार्ड तुरंत ब्लॉक करवाएं: फ्रॉड होने पर तुरंत कार्ड ब्लॉक कराएं और साइबर सेल में शिकायत हेतु जीरो एफआईआर और ई-एफआईआर दर्ज करने के नए नियम देखें। यदि मामला साइबर फ्रॉड का है, तो डिस्प्यूट फॉर्म भरने से पहले बैंक ऐप में जाकर कार्ड को तुरंत 'Permanent Block' करें और नया कार्ड री-इश्यू कराएं ताकि कार्ड का सीवीवी या टोकन दोबारा इस्तेमाल न हो सके।
क्रेडिट कार्ड केवल खर्च करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कंज्यूमर प्रोटेक्शन का सबसे बड़ा ढाल है। जब भी कोई ऑनलाइन मर्चेंट या कंपनी आपके साथ बेईमानी करे, तो असहाय महसूस करने के बजाय अपने बैंक से चार्जबैक का कानूनी अधिकार मांगें और अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा सुरक्षित रखें।
9. एटीएम कैश न निकलने पर चार्जबैक और ₹100 प्रतिदिन हर्जाने का RBI नियम
क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से जुड़ा एक और सबसे बड़ा विवाद यह होता है कि आप एटीएम मशीन से नकदी निकालने गए, मशीन से गड़गड़ाहट की आवाज आई, आपके मोबाइल पर पैसे कटने का एसएमएस आ गया लेकिन एटीएम से एक भी नोट बाहर नहीं निकला। ऐसे मामलों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक का एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक सर्कुलर 'Turnaround Time (TAT) and Customer Compensation' लागू है:
एटीएम फेल ट्रांजेक्शन और हर्जाने की समयसीमा:
- टी+5 दिन का ऑटो-रिवर्सल नियम: बैंक को लेन-देन की तारीख से अधिकतम 5 कार्यदिवसों (T+5 Working Days) के भीतर वह राशि स्वतः आपके खाते में वापस क्रेडिट करना अनिवार्य है। इसके लिए ग्राहक को कोई शिकायत भी नहीं करनी पड़ती।
- ₹100 प्रतिदिन का अनिवार्य हर्जाना: यदि बैंक 5 कार्यदिवसों के भीतर पैसा वापस नहीं लौटाता है, तो छठे दिन से बैंक को बिना किसी अदालती आदेश के ग्राहक को ₹100 प्रतिदिन (Per Day) का हर्जाना सीधे खाते में देना होगा।
- उदाहरण से समझें: यदि आपका ₹10,000 कटा और बैंक ने उसे 20 दिन बाद लौटाया, तो 5 दिन की छूट के बाद बचे 15 दिनों के लिए बैंक को मूल राशि के साथ ₹1,500 का अतिरिक्त हर्जाना आपको देना होगा। यदि बैंक हर्जाना देने से मना करे, तो तुरंत आरबीआई लोकपाल में शिकायत दर्ज कराएं।
10. गूगल, एप्पल, अमेज़न व नेटफ्लिक्स पर अनधिकृत चार्ज पर त्वरित रिफंड
कई बार बच्चों द्वारा मोबाइल में गेम खेलते समय इन-ऐप परचेज (In-app purchases) हो जाते हैं या किसी अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट पर कार्ड का अनधिकृत ऑटो-डेबिट चालू हो जाता है। ऐसी विदेशी कंपनियों के साथ विवाद सुलझाने का सबसे तेज तरीका निम्नलिखित है:
- Google Play Store:
play.google.com/store/account/orderhistoryपर जाकर 'Report a Problem' चुनें और 'Purchase made by a friend or family member without consent' पर क्लिक करें। गूगल 48 घंटों में रिफंड स्वीकृत कर देता है। - Apple App Store:
reportaproblem.apple.comपर एप्पल आईडी से लॉगिन करके 'Request a Refund' चुनें। - यदि मर्चेंट 48 घंटे में रिजेक्ट करे: तो बिना एक पल गंवाए सीधे अपने क्रेडिट कार्ड बैंक की नेट बैंकिंग में जाकर 'Card Controls' में 'International Transactions' को OFF करें और बैंक को चार्जबैक फॉर्म ईमेल कर दें। अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में बिना ओटीपी वाले मामलों में वीजा और मास्टरकार्ड 100% मामलों में ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हैं।
11. बैंक को भेजने के लिए चार्जबैक ईमेल का तैयार कानूनी प्रारूप (Template)
✉️ इस ड्राफ्ट को कॉपी करके अपने बैंक को ईमेल करें:
Subject: URGENT: Chargeback Dispute Request for Transaction of INR [रकम] on Card ending [अंतिम 4 अंक]
To: Credit Card Dispute / Chargeback Department, [बैंक का नाम]
महोदय / महोदया,
मेरा नाम [आपका पूरा नाम] है और मैं आपके बैंक के क्रेडिट कार्ड नंबर [XXXX-XXXX-XXXX-अंतिम 4 अंक] का प्राथमिक धारक हूँ।
दिनांक [लेन-देन की तारीख] को मेरे कार्ड से मर्चेंट [मर्चेंट/वेबसाइट का नाम] पर [₹ रकम] का एक लेन-देन दर्ज हुआ है (ट्रांजेक्शन रेफरेंस नंबर / ARN: [रेफरेंस नंबर])।
मैं यह औपचारिक चार्जबैक विवाद निम्नलिखित आधार पर दर्ज करा रहा हूँ:
कारण: [सामान डिलीवर नहीं हुआ / सेवा रद्द हो गई और मर्चेंट ने रिफंड से मना कर दिया / अनधिकृत अन-ओटीपी लेन-देन] (Visa/Mastercard Reason Code: [रीजन कोड])।
मैंने दिनांक [तारीख] को मर्चेंट को ईमेल भेजकर समाधान की मांग की थी लेकिन मर्चेंट ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया (ईमेल प्रति संलग्न है)।
अतः आरबीआई मास्टर डायरेक्शन 2022 (संशोधित 2026) और कार्ड नेटवर्क नियमों के तहत निवेदन है कि इस लेन-देन पर तत्काल चार्जबैक की कार्रवाई शुरू की जाए और मेरे खाते में 48 घंटे के भीतर अनंतिम क्रेडिट (Provisional Credit) जारी किया जाए तथा जांच चलने तक इस पर कोई ब्याज या विलंब शुल्क न लगाया जाए।
संलग्नक: 1. हस्ताक्षरित कार्डहोल्डर डिस्प्यूट फॉर्म (CDF), 2. मर्चेंट इनवॉइस व संचार प्रति, 3. बैंक स्टेटमेंट प्रति।
भवदीय,
[आपका नाम]
[मोबाइल नंबर]
[ईमेल आईडी]
12. आर्बिट्रेशन (Arbitration): जब मर्चेंट और बैंक के बीच विवाद गहरा जाए
यदि आपने चार्जबैक फाइल किया और मर्चेंट ने झूठे डिलीवरी कागजात देकर आपके दावे को चुनौती (Re-presentment) दे दी, तो मामला तीसरे स्तर पर जाता है जिसे आर्बिट्रेशन (Arbitration) कहा जाता है। इसमें वीजा या मास्टरकार्ड की अंतरराष्ट्रीय कानूनी समिति सीधे दोनों पक्षों के साक्ष्यों का परीक्षण करती है।
आर्बिट्रेशन में जो पक्ष हारता है, उस पर लगभग $500 (लगभग ₹42,000) का भारी हर्जाना लगाया जाता है। यही कारण है कि यदि आपके पास वैध साक्ष्य (जैसे अनबॉक्सिंग वीडियो, मर्चेंट को भेजा गया ईमेल या पुलिस शिकायत) हैं, तो 99% मामलों में मर्चेंट आर्बिट्रेशन में जाने की हिम्मत नहीं करता और पहली ही स्टेज में पैसे वापस करने पर सहमत हो जाता है। हमेशा अपने अधिकारों पर डटे रहें और बैंक को समय पर सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएं।