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Builder Insolvency Rules 2026: बिल्डर दिवालिया हो जाए तो खरीदार क्या करें? NCLT में Form-CA व RERA में सुरक्षा के नियम

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Jagmohan Kurmi
विधिक सलाहकार व कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी विश्लेषक

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

यदि आपकी बिल्डर कंपनी के खिलाफ NCLT में इनसॉल्वेंसी (CIRP) स्वीकार हो चुकी है, तो घबराएं नहीं। सर्वोच्च न्यायालय के पायनियर अर्बन निर्णय के तहत फ्लैट खरीदार बैंक की तरह सुरक्षित वित्तीय लेनदार (Financial Creditor) हैं। पब्लिक नोटिस जारी होने के ठीक 14 दिनों के भीतर Form CA भरकर अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) को सभी अलॉटमेंट लेटर, रसीदों व ब्याज गणना सहित ईमेल करें। दिवालिया प्रक्रिया का लक्ष्य प्रोजेक्ट को लिक्विडेट करना नहीं, बल्कि नए प्रमोटर या आरडब्ल्यूए के जरिए निर्माण पूरा कराकर आपको घर की चाबी सौंपना है।

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📑 विषय सूची (Table of Contents)

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नियामक ट्रिब्यूनल: राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT / NCLAT) | कानूनी धारा व नियम: Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) 2016 [Section 5(8)(f), 7 & 14] | सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ: Pioneer Urban Land and Infrastructure Ltd vs Union of India (2019) 8 SCC 416 | प्रमाणन: कानूनी कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी प्रभाग

⚡ सीधी काम की बात (Quick Answer)

यदि आपकी बिल्डर कंपनी के खिलाफ NCLT में इनसॉल्वेंसी (CIRP) स्वीकार हो चुकी है, तो घबराएं नहीं। सर्वोच्च न्यायालय के पायनियर अर्बन निर्णय के तहत फ्लैट खरीदार बैंक की तरह सुरक्षित "वित्तीय लेनदार (Financial Creditor)" हैं। पब्लिक नोटिस जारी होने के ठीक 14 दिनों के भीतर Form CA भरकर अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) को सभी अलॉटमेंट लेटर, रसीदों व ब्याज गणना सहित ईमेल करें। दिवालिया प्रक्रिया का लक्ष्य प्रोजेक्ट को लिक्विडेट करना नहीं, बल्कि नए प्रमोटर या आरडब्ल्यूए के जरिए निर्माण पूरा कराकर आपको घर की चाबी सौंपना है।

बिल्डर के दिवालिया होने का संकट: होमबायर्स के मन का भय व कानूनी हकीकत

भारत में घर खरीदने वाले किसी भी आम नागरिक के लिए जीवन का सबसे बड़ा डरावना सपना वह दिन होता है जब अखबार में खबर छपती है कि जिस बिल्डर से उसने अपने खून-पसीने की कमाई से फ्लैट बुक किया था, वह कंपनी राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (National Company Law Tribunal - NCLT) में चली गई है और कोर्ट ने कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (Corporate Insolvency Resolution Process - CIRP) शुरू करने का आदेश दे दिया है।

खबर सुनते ही खरीदार के दिमाग में कई भयानक सवाल कौंधने लगते हैं: क्या मेरी गाढ़ी कमाई डूब गई? क्या बैंक मेरे अधूरे फ्लैट की नीलामी कर देगा? क्या अब मुझे कभी चाबी नहीं मिलेगी? और जो लाखों रुपये का होम लोन चल रहा है, क्या उसकी ईएमआई मुझे जिंदगी भर बिना घर मिले ही भरनी पड़ेगी? कानूनी यथार्थ यह है कि 2018 से पहले दिवाला कानून में होमबायर्स की स्थिति बेहद कमजोर थी। वे अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स की कतार में सबसे पीछे खड़े होते थे, जहाँ बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के कर्ज चुकाने के बाद उनके हाथ में शून्य बचता था।

परंतु भारतीय संसद द्वारा किए गए ऐतिहासिक विधायी संशोधनों और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों ने इस शक्ति-संतुलन को पूरी तरह पलट दिया है। आज दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC 2016) के अंतर्गत फ्लैट खरीदार कोई असहाय पीड़ित नहीं हैं, बल्कि वे निर्णय लेने वाली सबसे शक्तिशाली संस्था 'कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC)' के अग्रिम पंक्ति के वोटिंग सदस्य हैं।

IBC 2016 धारा 5(8)(f) व सुप्रीम कोर्ट: होमबायर्स को वित्तीय लेनदार का दर्जा

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दिवाला संहिता में सबसे युगांतकारी परिवर्तन 2018 के अध्यादेश और तदुपरांत संसद द्वारा पारित संशोधन के माध्यम से आया, जिसने Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 की धारा 5(8)(f) के स्पष्टीकरण (Explanation) में एक युगांतकारी कानूनी नियम जोड़ा:

"Any amount raised from an allottee under a real estate project shall be deemed to be an amount having the commercial effect of a borrowing, and therefore, allottees are Financial Creditors."

इस कानूनी नियम का सीधा कानूनी अर्थ यह है कि जब कोई खरीदार किसी बिल्डर को फ्लैट की बुकिंग राशि या किस्तों का भुगतान करता है, तो कानून की नजर में वह केवल एक उपभोक्ता नहीं होता, बल्कि वह बिल्डर को प्रोजेक्ट निर्माण के लिए धन उधार देने वाला वित्तीय लेनदार (Financial Creditor) बन जाता है। ठीक उसी तरह जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या पंजाब नेशनल बैंक किसी कंपनी को 500 करोड़ रुपये का कर्ज देते हैं।

बिल्डरों के एक बड़े सिंडिकेट ने इस कानून को असंकानूनी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की संविधान पीठ ने Pioneer Urban Land and Infrastructure Ltd & Anr vs Union of India (2019) 8 SCC 416 के ऐतिहासिक फैसले में बिल्डरों की सभी दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए इस कानून पर अंतिम मुहर लगा दी। अदालत ने फैसला सुनाया कि:

  • खरीदारों द्वारा दिया गया अग्रिम धन बिल्डर के लिए व्यावसायिक पूंजी है, इसलिए वे बैंकों के समान दर्जे के वित्तीय लेनदार हैं।
  • खरीदारों को दिवाला प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने, कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स में मतदान करने और प्रोजेक्ट पूरा करने वाली नई एजेंसी का चयन करने का पूर्ण संकानूनी व कानूनी अधिकार है।
  • यदि 100 खरीदार या कुल फ्लैट खरीदारों (बायर्स) के 10% सदस्य एक साथ आ जाएं, तो वे स्वयं धारा 7 के तहत डिफ़ॉल्ट करने वाले भ्रष्ट बिल्डर को NCLT में घसीट सकते हैं।

Form CA फाइल करने की संपूर्ण SOP: 14 दिनों की डेडलाइन व जरूरी दस्तावेज

जैसे ही NCLT किसी बिल्डर के विरुद्ध CIRP याचिका स्वीकार करता है, वह कंपनी के मौजूदा मैनेजमेंट और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को तुरंत बर्खास्त कर देता है और पूरे प्रोजेक्ट का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए एक स्वतंत्र अंतरिम समाधान पेशेवर (Interim Resolution Professional - IRP) की नियुक्ति करता है।

IRP की नियुक्ति के 3 दिनों के भीतर दो प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्रों में 'पब्लिक अनाउंसमेंट (Public Announcement)' प्रकाशित होती है। यहीं से खरीदार की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी घड़ी टिक-टिक करना शुरू कर देती है।

कदम-दर-कदम Form CA भरने की मानक कानूनी प्रक्रिया (SOP)

  1. Form CA डाउनलोड व पहचान: दिवाला नियमावली (Insolvency and Bankruptcy Board of India Regulations, 2016) के अंतर्गत रियल एस्टेट फ्लैट खरीदारों (बायर्स) के लिए विशेष प्रपत्र 'Form CA' (Submission of Claim by Financial Creditors in a Class) निर्धारित किया गया है। इसे आईआरपी की वेबसाइट अथवा IBBI पोर्टल से डाउनलोड करें।
  2. 14-दिवसीय अनिवार्य समय-सीमा: सार्वजनिक घोषणा की तारीख से ठीक 14 दिनों के भीतर Form CA भरकर आवश्यक साक्ष्यों के साथ आईआरपी को ईमेल व रजिस्टर्ड डाक से प्रेषित करना अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश 14 दिन की सीमा चूक जाए, तो समाधान योजना पर मतदान से पूर्व (अधिकतम 90 दिनों तक) हलफनामे के साथ दावा प्रस्तुत किया जा सकता है।
  3. दावे की राशि की सटीक गणना: फॉर्म में दो प्रकार के वित्तीय दावे दर्ज करें:
    • मूल राशि (Principal Amount): बिल्डर को बैंक चेक, नेट बैंकिंग अथवा डीडी के माध्यम से चुकाई गई कुल रकम (सभी टैक्स सहित)।
    • ब्याज की रकम (Interest Claim): अलॉटमेंट एग्रीमेंट में दर्ज पजेशन की तिथि से लेकर NCLT द्वारा CIRP आदेश पारित होने की तिथि तक भारतीय स्टेट बैंक के MCLR + 2% अथवा एग्रीमेंट में तय दर से संचित ब्याज।
  4. अनिवार्य संलग्नक दस्तावेज (Checklist):
    • बिल्डर-बायर एग्रीमेंट (BBA) अथवा मूल अलॉटमेंट लेटर की स्व-साइन की हुई कॉपी।
    • बिल्डर द्वारा जारी की गई सभी आधिकारिक भुगतान रसीदें (Payment Receipts)।
    • बैंक खाते का स्टेटमेंट जिसमें बिल्डर को किए गए भुगतान स्पष्ट हाइलाइटेड हों।
    • यदि होम लोन है, तो बैंक का लोन सैंक्शन लेटर व त्रिपक्षीय समझौता (Tripartite Agreement)।
    • खरीदार का आधार कार्ड, पैन कार्ड व संपर्क विवरण।
    • ₹100 अथवा ₹50 के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर सत्यापित शपथ पत्र (Affidavit confirming claim truthfulness)।
  5. IRP द्वारा दावे का सत्यापन व लिस्टिंग: दावा प्राप्त होने पर आईआरपी बिल्डर के खाता-बही से इसका मिलान करता है और 7 दिनों के भीतर स्वीकृत दावों की सूची (List of Creditors) सार्वजनिक रूप से जारी करता है। यदि आपका नाम सूची में 'Admitted' के साथ दर्ज है, तो आपकी सदस्यता सुरक्षित हो गई।

कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) में बायर्स की वोटिंग पावर व अधिकृत प्रतिनिधि (AR)

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कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) दिवाला प्रक्रिया की वह सर्वोच्च संसद है जो तय करती है कि कंपनी का भविष्य क्या होगा। कॉर्पोरेट कंपनियों में जहाँ केवल बैंक बैठते थे, वहीं रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में फ्लैट खरीदारों का सामूहिक वोटिंग शेयर अक्सर 60% से 80% तक बैठता है। इसका अर्थ यह है कि बैंक अकेले अपनी मर्जी से प्रोजेक्ट की नीलामी नहीं कर सकते; उन्हें हर फैसले पर खरीदारों का अनुमोदन लेना पड़ता है।

हजारों खरीदारों के लिए व्यक्तिगत रूप से हर मीटिंग में बैठना संभव नहीं होता, इसलिए कानून ने अधिकृत प्रतिनिधि (Authorized Representative - AR) की व्यवस्था की है:

  • AR का चुनाव: Form CA भरते समय फॉर्म के अंत में आईआरपी द्वारा सुझाए गए तीन स्वतंत्र इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स में से किसी एक को वोट देने का विकल्प होता है। जिस पेशेवर को फ्लैट खरीदारों (बायर्स) के सर्वाधिक वोट मिलते हैं, उसे NCLT द्वारा बायर्स का AR नियुक्त कर दिया जाता है।
  • ऑनलाइन ई-वोटिंग की पारदर्शिता: जब भी कोई नया बिल्डर प्रोजेक्ट पूरा करने का प्लान पेश करता है, तो AR सभी खरीदारों के साथ ऑनलाइन मीटिंग करता है। इसके बाद एक सुरक्षित वेब पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक खरीदार को अपने पंजीकृत ईमेल और मोबाइल ओटीपी के जरिए सीधे 'हाँ' या 'ना' में ई-वोटिंग करने का अधिकार मिलता है।
  • बहुमत का नियम (Section 25A): यदि मतदान करने वाले 51% से अधिक खरीदार किसी समाधान योजना के पक्ष में वोट करते हैं, तो AR मुख्य CoC मीटिंग में संपूर्ण बायर्स क्लास का 100% वोट उसी पक्ष में दर्ज कराता है। इस प्रकार खरीदारों की सामूहिक शक्ति पूरी तरह सुरक्षित रहती है।

रिवर्स सीआईआरपी (Reverse CIRP) नया सिद्धांत: पूरे ग्रुप के बजाय सिर्फ प्रोजेक्ट का समाधान

सामान्य कॉर्पोरेट दिवालियापन में यदि कंपनी दिवालिया होती है, तो उसके सारे कारखाने और कार्यालय सील कर दिए जाते हैं। परंतु यदि किसी रियल एस्टेट डेवलपर के 10 अलग-अलग शहरों में 25 प्रोजेक्ट चल रहे हैं और केवल एक प्रोजेक्ट में फंड की कमी से काम रुका है, तो पूरी कंपनी को बंद कर देने से बाकी 24 प्रोजेक्ट्स के निर्दोष खरीदार सड़क पर आ जाएंगे।

इस संकट को हल करने के लिए नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने Flat Buyers Association Winter Hills vs Umang Realtech Pvt Ltd (2020) के ऐतिहासिक मामले में "रिवर्स सीआईआरपी (Reverse CIRP)" के सिद्धांत का आविष्कार किया:

रिवर्स इनसॉल्वेंसी के मूलभूत नियम:
1. दिवाला प्रक्रिया केवल उसी विशिष्ट प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी जिसमें विवाद हुआ है। प्रमोटर के अन्य सभी प्रोजेक्ट सामान्य रूप से चलते रहेंगे।
2. मूल प्रमोटर को बाहर से वित्तीय संसाधन जुटाकर एक 'बाहरी ऋणदाता' के रूप में केवल उस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य आईआरपी की सीधी निगरानी में पूरा कराने की सशर्त अनुमति दी जा सकती है, परंतु उसे प्रबंधन का अधिकार नहीं होगा।
3. प्रोजेक्ट से एकत्रित होने वाला प्रत्येक रुपया केवल उसी प्रोजेक्ट के निर्माण में खर्च होगा; उसे किसी पुराने बैंक कर्ज को चुकाने में डायवर्ट नहीं किया जा सकता।

RERA रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) बनाम NCLT मोरेटोरियम (Section 14) का टकराव

कई खरीदार यह सवाल पूछते हैं: "सर, हमने तो RERA में केस जीतकर बिल्डर के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) हासिल कर लिया था और डीएम साहब बिल्डर की जमीन नीलाम करने वाले थे। लेकिन अचानक बिल्डर NCLT चला गया और डीएम साहब ने फाइल बंद कर दी। अब हमारे पैसे का क्या होगा?"

यहाँ कानून के दो दिग्गजों का टकराव होता है: RERA बनाम IBC। भारत के संविधान के अनुच्छेद 254 और IBC की धारा 238 (Non-obstante Clause) के अनुसार, किसी भी अन्य कानून के प्रावधानों पर IBC को सर्वोच्च प्राथमिकता (Overriding Effect) प्राप्त है।

जैसे ही NCLT याचिका स्वीकार करता है, IBC की धारा 14 के तहत 'मोरेटोरियम' (कार्यवाही पर पूर्ण स्थगन) लागू हो जाता है। इसका कानूनी प्रभाव यह होता है कि:

  • बिल्डर के खिलाफ देश की किसी भी दीवानी अदालत, कंज्यूमर फोरम या RERA कोर्ट में चल रहे मुकदमों और रिकवरी आदेशों पर स्वतः रोक लग जाती है।
  • डीएम या पुलिस बिल्डर के बैंक खातों या संपत्तियों को नीलाम करके किसी एक व्यक्तिगत खरीदार को पैसा नहीं सौंप सकती।
  • खरीदार को क्या करना चाहिए? अपनी RERA आरसी को व्यर्थ न समझें। आरसी यह सिद्ध करने का निर्विवाद न्यायिक साक्ष्य है कि आपका ऋण बिल्डर पर कानूनी रूप से सिद्ध हो चुका है। Form CA में अपनी मूल राशि के साथ RERA द्वारा स्वीकृत संपूर्ण ब्याज को क्लेम करें। CoC में समाधान योजना बनते समय आपके दावे को निर्विवाद वित्तीय ऋण माना जाएगा।

यदि प्रोजेक्ट NCLT में चला गया तो बैंक होम लोन EMI का क्या होगा?

यह हर मध्यमवर्गीय परिवार का सबसे पीड़ादायक व्यावहारिक प्रश्न है। सच्चाई यह है कि कानूनी दृष्टि से फ्लैट खरीदार और बैंक के बीच का 'लोन एग्रीमेंट' एक स्वतंत्र अनुबंध होता है। बैंक यह तर्क देता है कि "हमने तो आपको पैसे दिए थे, बिल्डर डिफ़ॉल्ट करे तो यह आपका और बिल्डर का झगड़ा है, हमें अपनी मासिक किस्त चाहिए।"

यदि खरीदार सीधे ईएमआई देना बंद कर देता है, तो बैंक उसका सिबिल (CIBIL) स्कोर खराब कर देता है और सरफेसी एक्ट (SARFAESI Act) के तहत डिमांड नोटिस भेज देता है। इस दुष्चक्र से बचने के लिए कानूनी रास्ता निम्नलिखित हैं:

  1. सबवेंशन स्कीम (10:90 या 20:80 स्कीम) में अदालती राहत: यदि आपने त्रिपक्षीय समझौते (Tripartite Agreement) के तहत बुकिंग की थी जिसमें पजेशन मिलने तक ईएमआई बिल्डर को देनी थी, तो दिल्ली हाईकोर्ट (सुपरटेक मामले) और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि ऐसे मामलों में बैंक खरीदार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता और न ही सिबिल खराब कर सकता है।
  2. NCLT में आवेदन: खरीदारों का समूह आईआरपी और NCLT बेंच के समक्ष सामूहिक याचिका दाखिल कर सकता है कि जब तक प्रोजेक्ट का समाधान नहीं हो जाता, तब तक होम लोन पर 'ऋण स्थगन (EMI Moratorium)' का आदेश बैंकों को दिया जाए।
  3. बैंक से लोन पुनर्गठन (Restructuring): व्यक्तिगत रूप से बैंक के नोडल अधिकारी को लिखित में NCLT ऑर्डर की प्रति सौंपें और लोन को 'Under-construction Stalled Asset' श्रेणी में पुनर्गठित कराकर केवल साधारण ब्याज (Simple Interest) का विकल्प चुनें।

NCLT इनसॉल्वेंसी के विभिन्न चरण, खरीदार के कर्तव्य व समय-सीमा सारणी (5-कॉलम)

नीचे दी गई 5-कॉलम कानूनी सारणी में कॉर्पोरेट दिवाला प्रक्रिया के समस्त महत्वपूर्ण चरणों, कानूनी समय-सीमा (Limitation Period), खरीदार के अनिवार्य कर्तव्यों और कानूनी परिणामों का संपूर्ण ब्योरा प्रस्तुत किया गया है:

इनसॉल्वेंसी का चरण कानूनी समय-सीमा (Limitation Period) फ्लैट खरीदार (होमबायर)/खरीदार का अनिवार्य कर्तव्य आवश्यक कानूनी साक्ष्य कानूनी परिणाम व सुरक्षा
1. NCLT याचिका स्वीकृति व IRP नियुक्ति दिन 0 से दिन 3 पब्लिक अनाउंसमेंट देखना व बायर्स एसोसिएशन से जुड़ना NCLT ऑर्डर कॉपी बिल्डर मैनेजमेंट बर्खास्त
2. Form CA दावा प्रस्तुति घोषणा से 14 दिन IRP को मूल राशि + ब्याज गणना सहित फॉर्म ईमेल करना BBA, बैंक रसीदें, शपथ पत्र वित्तीय लेनदार का कानूनी दर्जा
3. क्रेडिटर्स लिस्ट व CoC गठन दावे के 7 दिन के भीतर लिस्ट में अपना नाम व दावा राशि का सत्यापन IRP क्लेम एक्सेप्टेंस ईमेल CoC में वोटिंग प्रतिशत तय
4. एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रण दिन 75 तक नए बिल्डरों/निवेशकों के प्रस्तावों की शर्तों की समीक्षा इन्फॉर्मेशन मेमोरेंडम प्रोजेक्ट पूरा करने वाली कंपनियां सामने आती हैं
5. रेजोल्यूशन प्लान पर ई-वोटिंग दिन 105 से 135 ऑनलाइन पोर्टल पर नए बिल्डर के प्लान के पक्ष/विपक्ष में वोट देना ई-वोटिंग पोर्टल क्रेडेंशियल 66% वोट पर प्लान को कानूनी मंजूरी
6. NCLT फाइनल अप्रूवल व निर्माण दिन 180 से 330 मॉनिटरिंग कमेटी में साइट निर्माण की निगरानी करना NCLT सेक्शन 31 अप्रूवल ऑर्डर नया बिल्डर निर्माण शुरू कर पजेशन देता है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)

Q1: यदि मेरा बिल्डर NCLT में दिवालिया घोषित हो गया, तो क्या मेरा फ्लैट छिन जाएगा?

बिल्कुल नहीं! सुप्रीम कोर्ट के पायनियर अर्बन फैसले के तहत फ्लैट खरीदार वित्तीय लेनदार (Financial Creditor) हैं। इनसॉल्वेंसी का उद्देश्य कंपनी बंद करना नहीं बल्कि नए बिल्डर को सौंपकर अटके प्रोजेक्ट को पूरा करवाकर फ्लैट की चाबी दिलवाना है।

Q2: Form CA क्या है और इसे कितने दिनों के भीतर भरना अनिवार्य होता है?

Form CA वह कानूनी दावा प्रपत्र है जिसके माध्यम से खरीदार इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) के समक्ष अपने भुगतान का ब्योरा दर्ज कराता है। NCLT द्वारा पब्लिक अनाउंसमेंट जारी होने के 14 दिनों के भीतर इसे ऑनलाइन या ईमेल से भरना अनिवार्य होता है।

Q3: क्या 14 दिन की डेडलाइन छूट जाने के बाद भी Form CA दाखिल किया जा सकता है?

हाँ, इनसॉल्वेंसी रेगुलेशन के अनुसार समाधान योजना (Resolution Plan) को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) द्वारा मंजूरी मिलने से पहले तक (अधिकतम 90 दिन) विलंब माफी के हलफनामे के साथ दावा स्वीकार किया जा सकता है।

Q4: क्या NCLT शुरू होने पर बैंक की होम लोन EMI रुक जाती है?

कानूनन बैंक लोन अनुबंध अलग होता है, इसलिए ईएमआई स्वतः नहीं रुकती। यदि आपने बैंक के साथ सबवेंशन स्कीम (Subvention Scheme) ली थी, तो आप NCLT और हाईकोर्ट में याचिका दायर करके ईएमआई पर स्टे ले सकते हैं।

Q5: रिवर्स सीआईआरपी (Reverse CIRP) क्या होता है?

रिवर्स इनसॉल्वेंसी एनसीएलएटी (NCLAT) द्वारा प्रतिपादित वह सिद्धांत है जिसमें संपूर्ण रियल एस्टेट कंपनी के दिवालियापन के बजाय केवल उसी अटके हुए प्रोजेक्ट की इनसॉल्वेंसी चलाई जाती है, ताकि अन्य पूरे हो चुके प्रोजेक्ट प्रभावित न हों।

Q6: क्रेडिटर्स कमेटी (CoC) में होमबायर्स की वोटिंग कैसे होती है?

होमबायर्स वर्ग के लिए NCLT एक अधिकृत प्रतिनिधि (Authorized Representative - AR) नियुक्त करता है। सभी खरीदार अपने पोर्टल पर ऑनलाइन वोट करते हैं और एआर उनकी बहुमत राय के आधार पर मुख्य कमेटी में मतदान करता है।

Q7: यदि मेरे पास पहले से RERA का रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) है, तो NCLT में क्या होगा?

IBC की धारा 14 के तहत मोरेटोरियम (रोक) लगने के कारण डीएम द्वारा आरसी पर की जा रही जब्ती रुक जाती है। आपको अपनी आरसी और स्वीकृत ब्याज की पूरी रकम को Form CA में वित्तीय ऋण के रूप में क्लेम करना होता है।

Q8: क्या हम खरीदार मिलकर खुद प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिए रेजोल्यूशन प्लान दे सकते हैं?

हाँ! आरडब्ल्यूए (RWA) अथवा खरीदारों का पंजीकृत कंसोर्टियम स्वयं रेजोल्यूशन आवेदक (Resolution Applicant) बनकर NCLT में प्रोजेक्ट टेकओवर करने का प्लान प्रस्तुत कर सकता है और इसे प्राथमिकता दी जाती है।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. यदि मेरा बिल्डर NCLT में दिवालिया घोषित हो गया, तो क्या मेरा फ्लैट छिन जाएगा?

A. बिल्कुल नहीं! सुप्रीम कोर्ट के पायनियर अर्बन फैसले के तहत फ्लैट खरीदार वित्तीय लेनदार (Financial Creditor) हैं। इनसॉल्वेंसी का उद्देश्य कंपनी बंद करना नहीं बल्कि नए बिल्डर को सौंपकर अटके प्रोजेक्ट को पूरा करवाकर फ्लैट की चाबी दिलवाना है।

Q. Form CA क्या है और इसे कितने दिनों के भीतर भरना अनिवार्य होता है?

A. Form CA वह कानूनी दावा प्रपत्र है जिसके माध्यम से खरीदार इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) के समक्ष अपने भुगतान का ब्योरा दर्ज कराता है। NCLT द्वारा पब्लिक अनाउंसमेंट जारी होने के 14 दिनों के भीतर इसे ऑनलाइन या ईमेल से भरना अनिवार्य होता है।

Q. क्या 14 दिन की डेडलाइन छूट जाने के बाद भी Form CA दाखिल किया जा सकता है?

A. हाँ, इनसॉल्वेंसी रेगुलेशन के अनुसार समाधान योजना (Resolution Plan) को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) द्वारा मंजूरी मिलने से पहले तक (अधिकतम 90 दिन) विलंब माफी के हलफनामे के साथ दावा स्वीकार किया जा सकता है।

Q. क्या NCLT शुरू होने पर बैंक की होम लोन EMI रुक जाती है?

A. कानूनन बैंक लोन अनुबंध अलग होता है, इसलिए ईएमआई स्वतः नहीं रुकती। यदि आपने बैंक के साथ सबवेंशन स्कीम (Subvention Scheme) ली थी, तो आप NCLT और हाईकोर्ट में याचिका दायर करके ईएमआई पर स्टे ले सकते हैं।

Q. रिवर्स सीआईआरपी (Reverse CIRP) क्या होता है?

A. रिवर्स इनसॉल्वेंसी एनसीएलएटी (NCLAT) द्वारा प्रतिपादित वह सिद्धांत है जिसमें संपूर्ण रियल एस्टेट कंपनी के दिवालियापन के बजाय केवल उसी अटके हुए प्रोजेक्ट की इनसॉल्वेंसी चलाई जाती है, ताकि अन्य पूरे हो चुके प्रोजेक्ट प्रभावित न हों।

Q. क्रेडिटर्स कमेटी (CoC) में होमबायर्स की वोटिंग कैसे होती है?

A. होमबायर्स वर्ग के लिए NCLT एक अधिकृत प्रतिनिधि (Authorized Representative - AR) नियुक्त करता है। सभी खरीदार अपने पोर्टल पर ऑनलाइन वोट करते हैं और एआर उनकी बहुमत राय के आधार पर मुख्य कमेटी में मतदान करता है।

Q. यदि मेरे पास पहले से RERA का रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) है, तो NCLT में क्या होगा?

A. IBC की धारा 14 के तहत मोरेटोरियम (रोक) लगने के कारण डीएम द्वारा आरसी पर की जा रही जब्ती रुक जाती है। आपको अपनी आरसी और स्वीकृत ब्याज की पूरी रकम को Form CA में वित्तीय ऋण के रूप में क्लेम करना होता है।

Q. क्या हम खरीदार मिलकर खुद प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिए रेजोल्यूशन प्लान दे सकते हैं?

A. हाँ! आरडब्ल्यूए (RWA) अथवा खरीदारों का पंजीकृत कंसोर्टियम स्वयं रेजोल्यूशन आवेदक (Resolution Applicant) बनकर NCLT में प्रोजेक्ट टेकओवर करने का प्लान प्रस्तुत कर सकता है और इसे प्राथमिकता दी जाती है।

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