⚡ सीधी काम की बात (Quick Answer)
सुप्रीम कोर्ट (विंग कमांडर आरिफुर रहमान खान बनाम डीएलएफ केस) और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) के ऐतिहासिक फैसलों के अनुसार, बिल्डर स्थानीय विकास प्राधिकरण से वैध ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंपलीशन सर्टिफिकेट (CC) प्राप्त किए बिना फ्लैट खरीदारों से मेंटेनेंस शुल्क या एडवांस मेंटेनेंस नहीं वसूल सकता। बिना OC के दिया गया पजेशन (Fit-out Possession) कानूनन अवैध होता है। जब तक वैध पजेशन नहीं सौंपा जाता, प्रोजेक्ट के सभी मेंटेनेंस खर्च व नागरिक टैक्स RERA धारा 11(4)(d) के तहत प्रमोटर को स्वयं वहन करने होंगे।
OC/CC क्या हैं और बिना इनके मेंटेनेंस वसूली की कानूनी स्थिति
भारत के बड़े मेट्रो शहरों—जैसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई, ठाणे, बेंगलुरु और कोलकाता में लाखों फ्लैट खरीदार एक भयानक कानूनी दुष्चक्र में फंसे हुए हैं। बिल्डर प्रोजेक्ट का निर्माण 80-90% पूरा करके खरीदारों को ईमेल भेजता है: "बधाई हो! आपका फ्लैट तैयार है, आप बकाया पैसा जमा करें और इंटीरियर कराने के लिए चाबी ले लें।" जब खरीदार पूछता है कि क्या विकास प्राधिकरण का ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) आ गया है, तो बिल्डर टालमटोल करता है।
इसके बाद बिल्डर खरीदार के सामने एक भारी-भरकम मांग पत्र थमाता है: "2 साल का एडवांस मेंटेनेंस ₹1.5 लाख, आईएफएमएस (IFMS) डिपॉजिट ₹1 लाख, और मासिक मेंटेनेंस ₹4.50 प्रति स्क्वायर फीट।" जो खरीदार सवाल उठाता है कि बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के मेंटेनेंस कैसा, बिल्डर उसके फ्लैट का बिजली कनेक्शन काटने, लिफ्ट का एक्सेस कार्ड ब्लॉक करने और गार्ड रूम से कूरियर रोकने की धमकियां देने लगता है।
कानून की नजर में यह पूरी प्रक्रिया पूर्णतः आपराधिक और गैरकानूनी है। स्थानीय विकास प्राधिकरण द्वारा जारी कंपलीशन सर्टिफिकेट (CC) यह प्रमाणित करता है कि इमारत स्वीकृत नक्शे के अनुसार बनी है; और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) यह प्रमाणित करता है कि इमारत में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety), संरचनात्मक स्थिरता (Structural Stability), लिफ्ट सुरक्षा और पीने के पानी की सीवर व्यवस्था इंसानों के रहने योग्य पूरी तरह सुरक्षित है। बिना OC के किसी इमारत में रहना अपनी जान को जोखिम में डालना है।
सुप्रीम कोर्ट नजीर: विंग कमांडर आरिफुर रहमान खान बनाम DLF ऐतिहासिक फैसला
इस विषय पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने विंग कमांडर आरिफुर रहमान खान और अलेया सुल्ताना बनाम डीएलएफ सदर्न होम्स प्राइवेट लिमिटेड [(2020) 16 SCC 512] में ऐतिहासिक निर्णय सुनाकर देश भर के बिल्डरों की मनमानी पर ताला लगा दिया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुख्य निष्कर्ष:
- बिना OC मेंटेनेंस की मांग अवैध: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने फैसला दिया कि जब तक प्रमोटर संबंधित कानूनी प्राधिकरण से वैध ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं कर लेता, तब तक वह फ्लैट खरीदारों (बायर्स) से किसी भी प्रकार का मेंटेनेंस शुल्क (Maintenance Charges) वसूलने का कानूनी हकदार नहीं है।
- अवैध पजेशन का बचाव नहीं ले सकता बिल्डर: कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि बिल्डर ने खरीदार को समय से पहले 'फिट-आउट' या अनौपचारिक रूप से कब्जा दे दिया है, तो यह कानून का उल्लंघन है। बिल्डर अपने ही अवैध कृत्य का लाभ उठाकर खरीदार पर मेंटेनेंस का वित्तीय बोझ नहीं डाल सकता।
- एडवांस मेंटेनेंस की वसूली पर रोक: नेशनल कंज्यूमर कमीशन (NCDRC) ने भी कमल किशोर बनाम सुपरटेक लिमिटेड केस में आदेश दिया कि बिना OC के 1 या 2 साल का एडवांस मेंटेनेंस मांगना 'अनुचित व्यापार व्यवहार' है और खरीदार को ऐसा कोई भी भुगतान करने से मना करने का पूर्ण कानूनी हक है।
बिल्डरों का "Fit-out Possession" छल: कच्चा कब्जा व 2 साल का एडवांस मेंटेनेंस
बिल्डरों द्वारा कानूनी पेनाल्टी से बचने के लिए 'फिट-आउट पजेशन' (Fit-out Possession) का हथकंडा अपनाया जाता है। खरीदार को इसका कानूनी सच समझना चाहिए:
- फिट-आउट पजेशन क्या है: बिल्डर खरीदार को पत्र लिखता है कि प्रोजेक्ट का निर्माण लगभग पूरा है और आप अपने फर्नीचर, किचन कैबिनेट और फॉल्स सीलिंग का काम कराने के लिए चाबी ले सकते हैं। इसे 'कच्चा कब्जा' कहा जाता है।
- बिल्डर का असली मकसद: बिल्डर ऐसा दो कारणों से करता है:
- पहला, ताकि RERA कोर्ट में वह कह सके कि "मैंने तो खरीदार को कब्जा दे दिया था, इसलिए अब पजेशन में देरी का ब्याज नहीं बनता।" (अदालतें इस दलील को खारिज कर चुकी हैं)।
- दूसरा, ताकि पूरे टॉवर के भारी बिजली बिल (डीजल जनरेटर का खर्च) और सफाई का खर्च खरीदारों के सिर मढ़ दिया जाए और लाखों रुपये एडवांस मेंटेनेंस के नाम पर झटक लिए जाएं।
- सुरक्षा का भयानक जोखिम: बिना OC वाले टॉवर में यदि आग लग जाए या लिफ्ट बीच में अटक जाए, तो पुलिस जांच में सबसे पहले खरीदार को अवैध रूप से रहने का जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके अलावा किसी भी दुर्घटना पर होम इंश्योरेंस कंपनी एक रुपये का भी बीमा क्लेम पास नहीं करती।
RERA धारा 11(4)(d): हैंडओवर तक सभी आउटगोइंग्स प्रमोटर की जिम्मेदारी
The Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 की धारा 11(4)(d) स्पष्ट और अनिवार्य (कंपलसरी) भाषा में आदेश देती है:
"The promoter shall be responsible for providing and maintaining the essential services, on reasonable charges, till the taking over of the maintenance of the project by the association of the allottees, and pay all outgoings until he transfers the physical possession of the real estate project to the allottee or the association of allottees which he has collected from the allottees."
इस कानूनी नियम का सीधा अर्थ यह है कि जब तक प्रमोटर वैध OC के साथ भौतिक कब्जा विधिवत गठित रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को ट्रांसफर नहीं कर देता, तब तक संपत्ति पर लगने वाले सभी स्थानीय टैक्स, नगर निगम का वाटर चार्ज, बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और मेंटेनेंस की पूरी कानूनी जिम्मेदारी स्वयं प्रमोटर की होती है।
IFMS (Interest Free Maintenance Security) फंड RWA को हैंडओवर करने के नियम
फ्लैट बुक करते समय प्रत्येक खरीदार से ₹50,000 से लेकर ₹2,00,000 तक का भारी फंड "Interest Free Maintenance Security (IFMS)" या 'सिंकिंग फंड' (Sinking Fund) के नाम पर वसूला जाता है। 500 फ्लैटों की एक सामान्य आवासीय सोसाइटी में यह फंड ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ तक बैठता है।
बिल्डर इस विशाल फंड को अपने बैंक खातों में रखकर उस पर भारी ब्याज कमाते हैं और वर्षों तक नवगठित आरडब्ल्यूए को ट्रांसफर नहीं करते:
- RERA धारा 17 का कानूनी नियम: ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी होने के बाद जैसे ही सोसाइटी में RWA का विधिवत पंजीकरण हो जाता है, प्रमोटर को फ्लैट खरीदारों (बायर्स) से एकत्रित की गई आईएफएमएस की 100% राशि, उसके पूरे बैंक ब्याज और विस्तृत ऑडिटेड वित्तीय ब्योरे के साथ RWA के आधिकारिक बैंक खाते में हस्तांतरित करनी अनिवार्य है।
- दुरुपयोग पर आपराधिक कार्रवाई: यदि बिल्डर आईएफएमएस फंड को ट्रांसफर करने से मना करता है या उसमें से अपने मनमाने खर्चे काट लेता है, तो आरडब्ल्यूए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात - Criminal Breach of Trust) के तहत पुलिस एफआईआर और RERA में धारा 40 के तहत कुर्की की कार्रवाई करा सकती है।
यदि बिल्डर बिजली-पानी काटने की धमकी दे तो तत्काल क्या कानूनी कदम उठाएं?
जब कोई जागरूक खरीदार बिना OC के मेंटेनेंस देने से इनकार करता है, तो बिल्डरों के बाउंसर और मेंटेनेंस कर्मचारी बिजली का प्रीपेड मीटर रिचार्ज करने से मना कर देते हैं या पानी का वाल्व बंद कर देते हैं। इस परिस्थिति में तुरंत निम्नलिखित 3-चरणीय कानूनी कार्रवाई करें:
- कदम 1: स्थानीय पुलिस स्टेशन में आपातकालीन शिकायत:
पानी और बिजली संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीने के मूल अधिकार (Right to Life)' का हिस्सा हैं। किसी भी नागरिक की बिजली-पानी बंद करना गंभीर अपराध (Cognizable Offence) है। तुरंत 112 पर कॉल करें और नजदीकी थाने में लिखित तहरीर दें कि बिल्डर गैरकानूनी वसूली के लिए जीवन रक्षक आवश्यक सेवाएं बाधित कर रहा है। पुलिस मौके पर आकर कनेक्शन बहाल कराने के लिए बाध्य है। - कदम 2: राज्य रेरा में तत्काल अंतरिम अर्जी (Interim Application):
अपने राज्य रेरा पोर्टल पर 'Urgent Interim Relief' की अर्जी लगाएं। रेरा बेंच 24 से 48 घंटों के भीतर अंतरिम आदेश (Injunction Order) जारी करती है कि जब तक मूल विवाद का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक बिल्डर खरीदार की किसी भी आवश्यक सेवा को नहीं रोकेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर बिल्डर के डायरेक्टरों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो सकता है। - कदम 3: लीगल नोटिस और मेंटेनेंस का एस्क्रो डिपॉजिट:
अपने वकील के माध्यम से बिल्डर को नोटिस भेजें कि सुप्रीम कोर्ट के विंग कमांडर आरिफुर रहमान खान फैसले के आलोक में बिना OC मेंटेनेंस की मांग गैरकानूनी है। यदि कोई विवाद है, तो उचित मेंटेनेंस राशि किसी अलग एस्क्रो खाते या कोर्ट में जमा कराने की पेशकश करें, लेकिन बिल्डर के अवैध खाते में सीधे पैसे न दें।
सर्टिफिकेट स्थिति, पजेशन वैधता, मेंटेनेंस देयता व कानूनी सुरक्षा सारणी (5-कॉलम)
नीचे दी गई 5-कॉलम तालिका में पजेशन के विभिन्न प्रकारों, उनकी कानूनी वैधता, मेंटेनेंस देयता, सुरक्षा जोखिम और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का संपूर्ण तुलनात्मक विवरण दिया गया है:
| पजेशन / सर्टिफिकेट की स्थिति | कानूनी वैधता | क्या मेंटेनेंस देना अनिवार्य है? | वित्तीय जिम्मेदारी किसकी है? | सुप्रीम कोर्ट / कानूनी स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| वैध OC व CC प्राप्त पजेशन | 100% कानूनी व सुरक्षित | हाँ, वास्तविक लागत के आधार पर | फ्लैट खरीदार (होमबायर) / RWA | कानूनी पजेशन पूर्ण |
| फिट-आउट पजेशन (Fit-out Key) | अवैध व गैर-मान्यता प्राप्त | कदापि नहीं (पूरी तरह छूट) | 100% बिल्डर की जेब से | DLF केस: वसूली अवैध |
| बिना किसी कागज के कब्जा | पूर्णतः अनाधिकृत व खतरनाक | कोई मेंटेनेंस देय नहीं | बिल्डर स्वयं वहन करेगा | फायर व बीमा सुरक्षा शून्य |
| 2 साल का एडवांस मेंटेनेंस मांग | OC के बिना प्रतिबंधित | देने से मना करने का अधिकार | बिल्डर की अवैध मांग | NCDRC: Unfair Practice |
| IFMS फंड ट्रांसफर | RWA का कानूनी हक | बिल्डर द्वारा RWA को देय | बिल्डर + पूरा संचित ब्याज | RERA धारा 17 आदेश |
RERA व कंज्यूमर कोर्ट में अंतरिम रोक (Stay Order) याचिका दाखिल करने की SOP
यदि बिल्डर अवैध मेंटेनेंस न देने पर आपके फ्लैट पर दबाव बना रहा है या चाबी रोक रहा है, तो कानूनी प्रक्रिया निम्नलिखित है:
- राज्य रेरा पोर्टल पर 'Form M' शिकायत के साथ एक अंतरिम आवेदन (Interim Application under Section 36) दाखिल करें।
- अर्जी में स्पष्ट प्रार्थना करें: "प्रमोटर को आदेशित किया जाए कि वह शिकायत के लंबित रहने तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के अभाव में किसी भी मेंटेनेंस की मांग न करे और बिजली, पानी व लिफ्ट जैसी आवश्यक सेवाओं में कोई व्यवधान न डाले।"
- अर्जी के साथ सुप्रीम कोर्ट के विंग कमांडर आरिफुर रहमान खान (2020) फैसले की प्रति संलग्न करें।
- रेरा प्राधिकरण सामान्यतः पहली ही तारीख पर बिल्डर को चेतावनी जारी करता है कि आवश्यक सेवा बाधित करने पर ₹10,000 प्रतिदिन का अर्थदंड लगाया जाएगा।
बिल्डर को भेजा जाने वाला कानूनी आपत्ति प्रारूप (Draft Legal Objection Notice)
यदि बिल्डर आपको बिना OC के मेंटेनेंस का बिल भेजता है, तो तुरंत अपने ईमेल व रजिस्टर्ड डाक से निम्नलिखित कानूनी आपत्ति पत्र प्रेषित करें:
प्रति,
मेसर्स [प्रमोटर/बिल्डर कंपनी का नाम व पंजीकृत पता]
विषय: बिना वैध ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) के अवैध मेंटेनेंस मांग व नोटिस का कानूनी प्रतिवाद।
महोदय,
मैं [फ्लैट खरीदार (बायर) का नाम], आपके प्रोजेक्ट [प्रोजेक्ट का नाम], टावर [नंबर], फ्लैट संख्या [नंबर] का पंजीकृत फ्लैट खरीदार (होमबायर) हूँ। आपके कार्यालय द्वारा दिनांक [तारीख] को प्रेषित पत्र के माध्यम से मुझसे ₹[राशि] के मेंटेनेंस शुल्क अथवा एडवांस मेंटेनेंस की मांग की गई है। इस संबंध में मैं आपको निम्नलिखित कानूनी तथ्यों से अवगत कराना चाहता हूँ:
1. सर्वोच्च न्यायालय ने Wing Cdr Arifur Rahman Khan vs DLF Southern Homes Pvt Ltd (2020) के ऐतिहासिक निर्णय में सुस्पष्ट रूप से यह सिद्धांत प्रतिपादित किया है कि जब तक सक्षम स्थानीय विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना को कानूनी पूर्णता व ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) (OC/CC) जारी नहीं किया जाता, तब तक खरीदारों से रखरखाव शुल्क वसूलना विधि विरुद्ध और अनुचित व्यापार व्यवहार है।
2. RERA अधिनियम 2016 की धारा 11(4)(d) के अंतर्गत जब तक परियोजना का भौतिक व कानूनी हस्तांतरण नवगठित फ्लैट खरीदारों (बायर्स) की संस्था (RWA) को पूर्णतः संपन्न नहीं हो जाता, तब तक परिसर के सभी बुनियादी आउटगोइंग्स और रखरखाव की वित्तीय देयता कानूनन प्रमोटर की स्वयं की होती है।
अतः आपसे आग्रह है कि उक्त अवैध मांग पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त करें और सक्षम प्राधिकारी से वैध OC प्राप्त होने के उपरांत ही कानूनी नियमों के अनुरूप पजेशन की पेशकश करें। यदि मेरे फ्लैट की बिजली, पानी अथवा लिफ्ट जैसी किसी भी अनिवार्य नागरिक सुविधा में कोई बाधा उत्पन्न की गई, तो मैं रेरा की धारा 36 के तहत अंतरिम स्थगनादेश तथा भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत गंभीर अपराध (Cognizable Offence) की एफआईआर (FIR) दर्ज कराने हेतु बाध्य होऊंगा।
भवदीय,
[फ्लैट खरीदार (बायर) का हस्ताक्षर व संपर्क विवरण]
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) का गठन और मेंटेनेंस का स्वतंत्र प्रबंधन
बिल्डरों की मेंटेनेंस लूट का स्थायी समाधान यही है कि सभी खरीदार एकजुट होकर अपनी स्वतंत्र रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) पंजीकृत कराएं:
- 51% अलॉटमेंट पर RWA गठन: राज्य अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट (जैसे UP Apartment Act 2010 धारा 14, Maharashtra Apartment Ownership Act 1970 धारा 10, और Haryana Apartment Ownership Act 1983) के तहत जैसे ही प्रोजेक्ट के 51% फ्लैट बिक जाते हैं अथवा पहली रजिस्ट्री हो जाती है, खरीदार अपनी आम सभा (General Body Meeting - GBM) बुलाकर स्वतंत्र एसोसिएशन ऑफ ऑलॉटीज का पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए बिल्डर की सहमति की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं होती।
- बिल्डर एजेंसी की विदाई: RWA बनने के बाद बिल्डर की चहेती मेंटेनेंस एजेंसी को 3 माह का नोटिस देकर तत्काल प्रभाव से हटाया जा सकता है। RWA जब स्वयं खुली निविदा (Open Tender) आमंत्रित करके हाउसकीपिंग, लिफ्ट एएमसी, फायर सेफ्टी व सिक्योरिटी का टेंडर निकालती है, तो मेंटेनेंस का प्रति वर्ग फुट खर्च सीधे 40% से 50% तक घट जाता है और सेवा की जवाबदेही सीधे निवासियों के प्रति सुनिश्चित होती है।
- खातों का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट: RWA हैंडओवर लेते समय बिल्डर द्वारा वसूले गए IFMS फंड, डीजी सेट बैकअप डीजल चार्ज, प्रीपेड इलेक्ट्रिसिटी मीटर के ब्याज और कॉमन एरिया रेवेन्यू (जैसे मोबाइल टावर व क्लब हाउस रेंट) का एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से अनिवार्य फोरेंसिक ऑडिट कराती है। किसी भी वित्तीय विसंगति पाए जाने पर धारा 40 के अंतर्गत बिल्डर की व्यक्तिगत संपत्तियों से वसूली का दावा दायर किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
Q1: क्या बिल्डर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिले बिना मेंटेनेंस चार्ज मांग सकता है?
बिल्कुल नहीं! सुप्रीम कोर्ट और RERA के स्पष्ट नियमों के अनुसार, जब तक सक्षम विकास प्राधिकरण इमारत का भौतिक निरीक्षण करके वैध ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी नहीं कर देता, तब तक खरीदारों से किसी भी प्रकार का मेंटेनेंस वसूलना पूर्णतः गैरकानूनी है।
Q2: बिल्डर कहता है कि आप फ्लैट में रह रहे हैं इसलिए मेंटेनेंस देना पड़ेगा, कानून क्या कहता है?
सुप्रीम कोर्ट (डीएलएफ केस) ने कहा है कि बिना OC के खरीदार को कब्जा देना ही अपने आप में एक अवैध कृत्य है। जब तक इमारत को कानूनी पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं मिलता, तब तक वहां दी जाने वाली बुनियादी सुविधाओं (लिफ्ट, जनरेटर, सफाई) का पूरा वित्तीय खर्च बिल्डर को अपनी जेब से उठाना होगा।
Q3: क्या बिल्डर पजेशन के समय 1 या 2 साल का एडवांस मेंटेनेंस मांग सकता है?
RERA के तहत बिल्डर एडवांस मेंटेनेंस तभी ले सकता है जब उसके पास वैध OC/CC हो और वह विधिवत पंजीकृत RWA के गठन तक की सीमित अवधि के लिए हो। बिना OC के एडवांस मेंटेनेंस की मांग करना अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) है।
Q4: यदि मैं मेंटेनेंस न दूँ और बिल्डर बिजली या लिफ्ट का एक्सेस बंद कर दे तो क्या करें?
बिजली और पानी 'आवश्यक सेवाएं (Essential Services)' हैं। बिल्डर इन्हें किसी भी विवाद के चलते नहीं काट सकता। ऐसा होने पर तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में धारा 324/430 के तहत शिकायत दर्ज कराएं और RERA में 24 घंटे के भीतर बहाली की अंतरिम अर्जी लगाएं।
Q5: IFMS (Interest Free Maintenance Security) का जमा पैसा खरीदार को वापस मिलता है क्या?
IFMS का पैसा खरीदार के व्यक्तिगत खाते में वापस नहीं होता, बल्कि RERA धारा 17 के तहत जब सोसाइटी का प्रबंधन नवगठित RWA को सौंपा जाता है, तो बिल्डर को पूरी सोसाइटी का संचित IFMS फंड पूरे बैंक ब्याज के साथ RWA के बैंक खाते में ट्रांसफर करना अनिवार्य (कंपलसरी) होता है।
Q6: फिट-आउट पजेशन (Fit-out Possession) क्या होता है और इसमें क्या जोखिम है?
फिट-आउट पजेशन वह स्थिति है जहाँ बिल्डर बिना OC के खरीदार को इंटीरियर कराने के नाम पर चाबी सौंप देता है। इसका सबसे बड़ा जोखिम यह है कि इमारत में फायर एनओसी नहीं होती और यदि कोई दुर्घटना या आग लग जाए तो बीमा कंपनी कोई क्लेम पास नहीं करती।
Q7: क्या OC न होने पर नगर निगम हमसे हाउस टैक्स वसूल सकता है?
स्थानीय नगर निगम वास्तविक कब्जे के आधार पर हाउस टैक्स का नोटिस भेज सकता है। परंतु आप RERA में बिल्डर के विरुद्ध याचिका दायर करके इस टैक्स की क्षतिपूर्ति बिल्डर से वसूल सकते हैं क्योंकि डिले का कारण बिल्डर था।
Q8: RWA का गठन होने के बाद क्या बिल्डर की मेंटेनेंस एजेंसी को हटाया जा सकता है?
हाँ, RERA की धारा 11(4)(e) के अनुसार जैसे ही 51% से अधिक फ्लैट बिक जाते हैं और RWA पंजीकृत हो जाती है, RWA को अधिकार होता है कि वह बिल्डर की मनमानी मेंटेनेंस एजेंसी को 3 महीने का नोटिस देकर हटा दे और किसी स्वतंत्र पेशेवर एजेंसी को नियुक्त करे।