कृषि एवं सौर ऊर्जा योजनाएं ⏱️ 5 मिनट 📅 2026-10-07

PM-KUSUM Component-A 2026: बंजर जमीन पर सोलर पावर प्लांट, ₹50,000 प्रति एकड़ लीज रेंट व PPA नियम

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इंजीनियर मयंक शर्मा
वरिष्ठ सौर ऊर्जा तकनीकी सलाहकार एवं एमएनआरई शोधार्थी

मयंक शर्मा पीएम कुसुम, पीएम सूर्य घर एवं सौर नेट-मीटरिंग विनियमों के विशेषज्ञ तकनीकी सलाहकार हैं।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

PM-KUSUM योजना के कंपोनेंट-A (Component-A) के तहत किसान, किसानों के समूह या पंचायतें अपनी अनुपजाऊ, बंजर, चरागाह या परती जमीन पर 500kW से 2MW क्षमता तक के ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट लगा सकते हैं। किसान अपनी जमीन किसी सोलर डेवलपर को देकर ₹25,000 से ₹50,000 प्रति एकड़ वार्षिक लीज किराया (5% वार्षिक वृद्धि के साथ) पा सकते हैं, अथवा स्वयं बैंक लोन लेकर प्लांट लगाकर राज्य डिस्कॉम को 25 साल तक निश्चित टैरिफ पर बिजली बेचकर लाखों रुपये की मासिक आय कमा सकते हैं।

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📑 विषय सूची (Table of Contents)

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योजना नोडल मंत्रालय: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार | योजना श्रेणी: PM-KUSUM कंपोनेंट-A (500 kW से 2 MW विकेंद्रीकृत ग्रिड सोलर प्लांट) | पात्र भूमि प्रकार: बंजर, अनुपजाऊ, पथरीली, चरागाह अथवा परती कृषि भूमि | संविदा अवधि: राज्य विद्युत वितरण निगम (DISCOM) के साथ 25 वर्षीय कानूनी PPA
⚡ तुरंत समाधान (Quick Answer): यदि आपके या आपके परिवार के पास गांव में 2 से 10 एकड़ ऐसी जमीन है जो बंजर, रेतीली या पथरीली है और जिस पर फसल नहीं उगती, तो PM-KUSUM कंपोनेंट-A उस बेकार जमीन को 25 साल के लिए पक्की कमाई की मशीन बना सकता है। शर्त केवल यह है कि वह जमीन नजदीकी 33/11kV बिजली सब-स्टेशन से 5 किलोमीटर के दायरे में होनी चाहिए। आपके पास दो विकल्प हैं: पहला, बिना एक रुपया लगाए अपनी जमीन किसी सोलर डेवलपर को 25 साल के लिए पट्टे पर दें और हर साल ₹25,000 से ₹50,000 प्रति एकड़ का पक्का किराया बैंक खाते में पाएं। दूसरा, स्वयं 30% इक्विटी और 70% बैंक लोन लेकर प्लांट लगाएं और डिस्कॉम को ₹3.14 से ₹3.50 प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचकर हर महीने ₹1.5 लाख से ₹4 लाख तक का मुनाफा कमाएं।

विषय सूची (Table of Contents)

PM-KUSUM कंपोनेंट-A क्या है? बंजर जमीन से 25 साल की पक्की पेंशन जैसी आय

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भारत के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में लाखों एकड़ ऐसी जमीन बेकार पड़ी है जो उबड़-खाबड़, पथरीली, क्षारीय या पानी की कमी के कारण खेती के सर्वथा अयोग्य है। ऐसी जमीनों से किसानों को शून्य आय होती है, जबकि उन पर मालगुजारी या लगान चुकाना पड़ता है। दूसरी ओर, भारत की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को लंबी ट्रांसमिशन लाइनों से दूरदराज के गांवों में बिजली भेजने पर 20% से 30% का भारी लाइन लॉस (AT&C Loss) उठाना पड़ता है।

इन दोनों समस्याओं को एक साथ हल करने के लिए भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने PM-KUSUM कंपोनेंट-A बनाया है। इसका लक्ष्य देश के ग्रामीण सब-स्टेशनों के पास 10,000 मेगावाट (10 GW) के विकेंद्रीकृत ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्लांट स्थापित करना है।

इस योजना में 500 किलोवाट (0.5 MW) से लेकर 2 मेगावाट (2 MW) तक के छोटे-मध्यम सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जाते हैं। इन प्लांटों से बनने वाली 11kV की उच्च-गुणवत्ता वाली सौर बिजली सीधे पास के 33/11kV ग्रामीण सब-स्टेशन में फीड कर दी जाती है। डिस्कॉम उस बिजली को अपने नजदीकी कृषि और ग्रामीण उपभोक्ताओं को तुरंत वितरित कर देती है, जिससे ट्रांसमिशन लॉस नगण्य हो जाता है और किसान को 25 साल तक हर महीने पक्की वित्तीय आय मिलती है।

दो व्यावसायिक मॉडल: डेवलपर को लीज रेंट पर देना बनाम खुद सोलर प्लांट लगाना

PM-KUSUM कंपोनेंट-A के अंतर्गत किसान अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार दो में से किसी एक मॉडल का चयन कर सकते हैं:

मॉडल 1: भूमि लीज मॉडल (Zero-Investment Lease Model - सबसे सुरक्षित)

यह मॉडल उन किसानों के लिए सबसे बेहतरीन है जिनके पास जमीन तो है, लेकिन करोड़ों रुपये का बैंक लोन लेने या तकनीकी जोखिम उठाने की क्षमता नहीं है:

  • प्रक्रिया: किसान अपनी 4 से 8 एकड़ बंजर जमीन किसी अधिकृत सोलर पावर डेवलपर (SPD) को 25 वर्ष के पंजीकृत पट्टे (Registered Lease) पर दे देता है।
  • पूंजीगत खर्च: किसान को ₹0 खर्च करना होता है। प्लांट लगाने, बैंक लोन लेने, ट्रांसमिशन लाइन बिछाने और सोलर पैनलों के रखरखाव का 100% खर्च डेवलपर उठाता है।
  • किसान को लाभ: डेवलपर किसान को प्रति वर्ष ₹25,000 से ₹50,000 प्रति एकड़ का पक्का लीज रेंट सीधे बैंक खाते में देता है। इस रेंट में हर साल या हर तीन साल में 5% की अनिवार्य वृद्धि (Annual Escalation) का कानूनी नियम होता है।

मॉडल 2: स्वयं का सोलर पावर प्लांट (Owner / Entrepreneur Model - अत्यधिक मुनाफा)

यह मॉडल उन सक्षम किसानों, किसान समूहों (FPO), सहकारी समितियों या ग्रामीण उद्यमियों के लिए है जो स्वयं बिजली उत्पादक बनकर भारी मुनाफा कमाना चाहते हैं:

  • प्रक्रिया: किसान स्वयं डिस्कॉम की ई-बिडिंग में भाग लेकर 500kW या 1MW का टेंडर लेता है। 30% मार्जिन मनी किसान लगाता है और 70% लोन बैंक से लेता है।
  • डिस्कॉम से PPA: डिस्कॉम राज्य विद्युत विनियामक आयोग द्वारा निर्धारित स्थिर दर (प्रायः ₹3.14 से ₹3.50 प्रति यूनिट) पर 25 साल तक बिजली खरीदने का कानूनी अनुबंध करती है।
  • किसान को लाभ: 1MW का सोलर प्लांट सालाना लगभग ₹45 लाख से ₹50 लाख की बिजली बेचता है। बैंक किस्त और संचालन खर्च काटकर किसान को प्रति वर्ष ₹15 लाख से ₹22 लाख का शुद्ध मुनाफा प्राप्त होता है।

जमीन की शर्तें व 33/11kV सब-स्टेशन से 5 किमी की अनिवार्य दूरी का नियम

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कंपोनेंट-A के तहत आवेदन करने से पहले आपकी भूमि को तकनीकी रूप से निम्नलिखित कड़े मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य है:

  1. सब-स्टेशन से अधिकतम 5 किलोमीटर की दूरी:
    आपकी जमीन संबंधित राज्य डिस्कॉम के किसी क्रियाशील 33/11kV सब-स्टेशन से सड़क या हवाई दूरी में अधिकतम 5 किमी के दायरे में होनी चाहिए। यदि दूरी 5 किमी से अधिक होगी, तो 11kV बिजली लाइन खींचने का खर्च बहुत बढ़ जाएगा और वोल्टेज ड्रॉप के कारण डिस्कॉम तकनीकी अनापत्ति (Connectivity Feasibility) नहीं देगी।
  2. सब-स्टेशन की खाली क्षमता (Sub-station Spare Capacity):
    डिस्कॉम अपनी वेबसाइट पर जिलेवार उन सभी 33/11kV सब-स्टेशनों की सूची प्रकाशित करती है जहाँ सोलर पावर को ग्रिड में लेने की खाली क्षमता (Spare Margin) उपलब्ध है। यदि सब-स्टेशन का पावर ट्रांसफॉर्मर पहले से ओवरलोडेड है, तो वहां नया प्लांट स्वीकृत नहीं हो सकता।
  3. भूमि का क्षेत्रफल और रूपरेखा:
    ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट के लिए सामान्यतः प्रति मेगावाट 3.5 से 4 एकड़ समतल या हल्की ढलान वाली जमीन की आवश्यकता होती है। जमीन पर बड़े घने पेड़ या ऊंची पहाड़ियां नहीं होनी चाहिए जो दिनभर में पैनलों पर छाया (Shadow) डालें।
  4. रास्ते और पानी की सुविधा:
    खेत तक भारी ट्रेलरों और ट्रांसफॉर्मर ले जाने के लिए कम से कम 12 से 15 फीट का पक्का या कच्चा रास्ता होना चाहिए, और पैनलों की समय-समय पर धुलाई के लिए पानी का बोरवेल या व्यवस्था होनी चाहिए।

वित्तीय विश्लेषण व कमाई का गणित: 1 मेगावाट (1 MW) प्लांट की लागत, उत्पादन व मुनाफा

यदि कोई किसान या किसान समूह स्वयं 1 मेगावाट (1,000 kW) का सोलर पावर प्लांट लगाने की योजना बना रहा है, तो 2026 के बाजार दरों के अनुसार उसका विस्तृत वित्तीय ब्योरा इस प्रकार है:

  • 1 मेगावाट प्लांट की कुल पूंजीगत लागत (Project Cost): लगभग ₹3.80 करोड़ से ₹4.20 करोड़ (इसमें टियर-1 DCR सोलर पैनल, स्ट्रिंग इनवर्टर, 11kV वैक्यूम सर्किट ब्रेकर, अर्थिंग और 2 किमी की 11kV ट्रांसमिशन लाइन शामिल है)।
  • इक्विटी व ऋण अनुपात (Debt-Equity 70:30):
    • किसान/प्रमोटर की अपनी हिस्सेदारी (30% Margin Money): ₹1.20 करोड़।
    • बैंक टर्म लोन (70% Bank Debt): ₹2.80 करोड़ (9% से 10% ब्याज दर पर 12 वर्ष की अवधि)।
  • वार्षिक बिजली उत्पादन: भारत के मध्य और पश्चिमी राज्यों में 1MW का प्लांट प्रति वर्ष औसतन 15,50,000 यूनिट (15.5 लाख यूनिट) बिजली उत्पन्न करता है।
  • वार्षिक सकल राजस्व (Gross Revenue @ ₹3.20/यूनिट): 15,50,000 × ₹3.20 = ₹49,60,000 (लगभग ₹49.6 लाख प्रति वर्ष)।
  • वार्षिक खर्च (Loan EMI + O&M Maintenance):
    • बैंक ऋण किस्त (EMI - 12 साल हेतु): लगभग ₹38,00,000 प्रति वर्ष।
    • ऑपरेशन व मेंटेनेंस खर्च (सुरक्षा गार्ड, सफाई, बीमा): लगभग ₹4,00,000 प्रति वर्ष।
    • कुल वार्षिक व्यय: लगभग ₹42,00,000।
  • शुरुआती 12 वर्षों में शुद्ध लाभ: ₹49.6 लाख - ₹42 लाख = ₹7.6 लाख प्रति वर्ष (लगभग ₹63,000 प्रति माह)।
  • 12 वर्ष बाद (लोन चुकता होने के बाद 13वें से 25वें वर्ष तक): वार्षिक शुद्ध लाभ = ₹40 लाख से ₹44 लाख प्रति वर्ष (लगभग ₹3.5 लाख प्रति माह शुद्ध नकद)।

बैंक फाइनेंसिंग, IREDA / PFC लोन व 25 साल का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA)

किसानों के मन में सबसे बड़ी शंका यह होती है कि "बैंक हमें ₹3 करोड़ का भारी लोन क्यों देगा?"

सौर ऊर्जा परियोजनाओं में बैंक लोन किसान की व्यक्तिगत संपत्ति के आधार पर नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग (Project Cash-Flow Financing) के आधार पर स्वीकृत होता है:

  • PPA की संप्रभु गारंटी (Sovereign Quality of PPA): जब राज्य डिस्कॉम किसान के साथ 25 साल तक बिजली खरीदने का आधिकारिक PPA साइन करती है, तो बैंक के लिए यह 100% पक्की गारंटी होती है कि प्लांट से बनने वाली बिजली का पैसा सीधे डिस्कॉम से आना ही है।
  • एस्क्रो अकाउंट मैकेनिज्म (Trust & Retention Account - TRA): डिस्कॉम बिजली का भुगतान किसान के व्यक्तिगत चालू खाते में नहीं करती, बल्कि बैंक में खोले गए विशेष एस्क्रो खाते में जमा करती है। बैंक हर महीने पहले अपनी लोन ईएमआई काटता है और बचा हुआ पूरा मुनाफा किसान के बचत खाते में ट्रांसफर कर देता है।
  • प्रमुख वित्तपोषक संस्थान: भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA), पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC), आरईसी लिमिटेड (REC), भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और नाबार्ड कंपोनेंट-A परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता से ऋण स्वीकृत करते हैं।

लीज एग्रीमेंट के महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा क्लॉज: किसान की जमीन की सुरक्षा कैसे होगी?

यदि किसान अपनी जमीन डेवलपर को 25 साल के पट्टे पर दे रहा है, तो जमीन पर कब्जे या धोखाधड़ी से बचने के लिए पंजीकृत लीज डीड में निम्नलिखित 5 कानूनी शर्तें अनिवार्य रूप से दर्ज करानी चाहिए:

लीज एग्रीमेंट में अनिवार्य किसान सुरक्षा शर्तें:

  1. स्वामित्व का अक्षुण्ण अधिकार (No Transfer of Ownership): स्पष्ट लिखा जाए कि यह केवल सौर ऊर्जा उत्पादन हेतु सीमित लीज है। डेवलपर या बैंक को जमीन बेचने, गिरवी रखने (Mortgage), या किसी तीसरे पक्ष को सब-लीज करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होगा।
  2. समय पर लीज रेंट का अग्रिम भुगतान (Advance Rent Payment): प्रत्येक वर्ष का लीज रेंट वित्तीय वर्ष शुरू होने के 30 दिनों के भीतर अग्रिम रूप से सीधे किसान के बैंक खाते में जमा होना अनिवार्य होगा।
  3. डिफ़ॉल्ट पर लीज रद्दीकरण (Termination on Default): यदि डेवलपर लगातार 3 महीने तक लीज रेंट चुकाने में विफल रहता है, तो लीज स्वतः रद्द मानी जाएगी और किसान को प्लांट पर कानूनी धारणाधिकार (Lien) मिल जाएगा।
  4. वार्षिक रेंट वृद्धि क्लॉज (Escalation Clause): अनुबंध में साफ लिखा हो कि लीज रेंट में प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 5% (या प्रत्येक 3 वर्ष में 15%) की चक्रवृद्धि वृद्धि अनिवार्य रूप से लागू होगी।
  5. 25 वर्ष बाद भूमि का मूल स्वरूप में प्रत्यावर्तन: 25 साल की अवधि पूर्ण होने पर सोलर डेवलपर को अपने खर्च पर सभी ढांचे, कंक्रीट फाउंडेशन और सोलर पैनल हटाकर जमीन को साफ-सुथरी स्थिति में किसान को वापस सौंपना होगा।

डिस्कॉम टेंडर व ई-बिडिंग में भाग लेने की स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन SOP

PM-KUSUM कंपोनेंट-A के अंतर्गत सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया राज्य डिस्कॉम द्वारा जारी किए जाने वाले रुचि की अभिव्यक्ति (Expression of Interest - EOI) या टेंडर के माध्यम से पूरी होती है:

  1. चरण 1: डिस्कॉम सब-स्टेशन सूची व क्षमता की जांच:
    अपनी राज्य डिस्कॉम (जैसे JVVNL, UHBVN, MSEDCL आदि) के रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टल पर जाएं और "KUSUM Component-A Substation List" डाउनलोड करें। जांचें कि आपकी जमीन के 5 किमी के दायरे वाले सब-स्टेशन पर खाली क्षमता मौजूद है या नहीं।
  2. चरण 2: ई-टेंडरिंग पोर्टल पर पंजीकरण:
    राज्य के आधिकारिक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल (e-Tendering Portal) पर एक 'सोलर पावर जनरेटर (SPG)' या 'भूमि मालिक' के रूप में पंजीकरण करें। इसके लिए डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC Class-3) की आवश्यकता होती है।
  3. चरण 3: तकनीकी बिड (Technical Bid) दस्तावेज अपलोड करना:
    जमीन की खतौनी/जमाबंदी, पटवारी द्वारा प्रमाणित दूरी प्रमाण पत्र (Distance Certificate from Sub-station), खसरा नक्शा (Geo-coordinates KML file), और आवेदक का आधार व पैन कार्ड अपलोड करें।
  4. चरण 4: वित्तीय बिड (Financial Price Bid) प्रस्तुत करना:
    यदि आप स्वयं प्लांट लगा रहे हैं, तो डिस्कॉम द्वारा निर्धारित सीलिंग टैरिफ (उदा. ₹3.14/यूनिट) के दायरे में अपनी दर कोट करें। यदि आप केवल जमीन लीज पर दे रहे हैं, तो डेवलपर आपके साथ भूमि टाई-अप एग्रीमेंट लगाकर बिड में शामिल होता है।
  5. चरण 5: लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) व PPA निष्पादन:
    चयन होने पर डिस्कॉम सफल बोलीदाता को LoA जारी करती है। इसके बाद 2 महीने के भीतर 25 वर्षीय PPA साइन होता है और प्लांट को ग्रिड से जोड़ने के लिए 12 से 15 महीने का समय दिया जाता है।

लीज मॉडल बनाम स्वयं का प्लांट (Owner Model) तुलनात्मक सारणी (5-कॉलम)

नीचे दी गई 5-कॉलम तुलनात्मक सारणी में दोनों व्यावसायिक मॉडलों के जोखिम, निवेश, रिटर्न और कानूनी जिम्मेदारियों का संपूर्ण तुलनात्मक विश्लेषण दिया गया है:

तुलना का मानक भूमि लीज मॉडल (Lease Model) स्वयं का प्लांट (Developer Model) सर्वश्रेष्ठ किसके लिए? दीर्घकालिक लाभ (25 वर्ष)
प्रारंभिक पूंजी निवेश ₹0 (शून्य निवेश) ₹1.20 करोड़ इक्विटी (प्रति MW) सामान्य व गरीब किसान (लीज) बिना किसी वित्तीय जोखिम के सुरक्षा
वार्षिक अनुमानित आय ₹1.5 लाख से ₹3 लाख (4-6 एकड़ पर) ₹15 लाख से ₹40 लाख (प्रति MW) सक्षम किसान / FPO (स्वयं प्लांट) 10 गुना अधिक शुद्ध मुनाफा
वित्तीय व ऋण जोखिम शून्य (कोई बैंक देनदारी नहीं) उच्च (₹2.8 करोड़ बैंक लोन किस्त) जोखिम से बचने वाले परिवार सुखद और चिंतामुक्त जीवन
तकनीकी संचालन व खराबी डेवलपर का 100% उत्तरदायित्व किसान को O&M टीम रखनी होगी स्थानीय निवासी भूमि मालिक डेवलपर आधुनिक तकनीक लगाता है
25 वर्ष बाद स्थिति जमीन मूल रूप में वापस किसान की पूरा प्लांट व स्क्रैप मूल्य किसान का भावी पीढ़ी की संपत्ति निर्माण करोड़ों रुपये की स्थायी संपत्ति

सोलर पैनलों के नीचे खेती (Agri-Photovoltaics): एक ही जमीन से सौर ऊर्जा और नकदी फसलें

कई किसानों को यह चिंता होती है कि सोलर प्लांट लगाने से उनकी जमीन हमेशा के लिए खेती से हाथ से निकल जाएगी। भारत सरकार अब कंपोनेंट-A में एग्री-फोटोवोल्टिक्स (Agri-PV) को बढ़ावा दे रही है:

  • ऊंचे ढांचे (Stilt Mounting Structures): सोलर पैनलों को जमीन से 2 मीटर (लगभग 6.5 से 8 फीट) की ऊंचाई पर स्थापित किया जाता है, जिससे उनके नीचे किसान और छोटे ट्रैक्टर आसानी से घूम सकें।
  • छाया-सहनशील फसलें (Shade-Tolerant Crops): सोलर पैनलों के नीचे की जमीन पर सूर्य की आंशिक धूप आती है और मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसी जमीन पर एलोवेरा, हल्दी, अदरक, अश्वगंधा, पालक, धनिया, शिमला मिर्च और विभिन्न औषधीय पौधे बंपर पैदावार देते हैं।
  • दोहरी आय (Dual Income): किसान को ऊपर की धूप से बिजली बिक्री या लीज रेंट का पैसा मिलता है, और नीचे की जमीन से नकदी फसलों की सालाना ₹50,000 से ₹1,00,000 प्रति एकड़ की अतिरिक्त कृषि उपज मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)

Q1: क्या 1 एकड़ जमीन पर कंपोनेंट-A का सोलर प्लांट लगाया जा सकता है?

कंपोनेंट-A के तहत न्यूनतम अनुमेय प्लांट क्षमता 500 किलोवाट (0.5 MW) है। 500kW के प्लांट के लिए न्यूनतम 2 से 2.5 एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है। यदि आपके पास केवल 1 एकड़ जमीन है, तो आप अपने पड़ोस के किसानों के साथ मिलकर एक समूह या क्लस्टर बनाकर 500kW हेतु सामूहिक आवेदन कर सकते हैं।

Q2: क्या जमीन 33/11kV सब-स्टेशन से 5 किमी से अधिक दूर होने पर आवेदन स्वीकार होगा?

सामान्यतः डिस्कॉम 5 किमी के दायरे को प्राथमिकता देती हैं। यदि जमीन 5 से 7 किमी दूर है, तो तकनीकी फिजिबिलिटी तभी मिल सकती है जब डेवलपर या किसान अपने खर्च पर 11kV की समर्पित लाइन सब-स्टेशन तक खींचने को तैयार हों और सब-स्टेशन पर खाली क्षमता बची हो।

Q3: क्या ग्राम पंचायत की बंजर या गोचर (चरागाह) जमीन पर प्लांट लग सकता है?

हाँ। ग्राम पंचायतें अपनी बंजर या पंचायती जमीन को राज्य सरकार के पंचायती राज नियमों के तहत 25 साल की लीज पर देकर पंचायत के लिए लाखों रुपये की स्थायी वार्षिक आमदनी सुनिश्चित कर सकती हैं। इसके लिए ग्राम सभा का विधिवत प्रस्ताव पास होना आवश्यक होता है।

Q4: क्या 25 साल बाद डेवलपर मेरी जमीन पर कब्जा कर सकता है?

कदापि नहीं। लीज एग्रीमेंट भारतीय पंजीकरण अधिनियम के तहत उप-पंजीयक कार्यालय में स्पष्ट शर्तों के साथ पंजीकृत होता है। इसमें जमीन का मालिकाना हक कभी ट्रांसफर नहीं होता; केवल सौर ऊर्जा उत्पादन का सीमित लाइसेंस मिलता है। 25 साल पूरे होते ही डेवलपर को अपनी लागत से प्लांट हटाकर जमीन मूल स्थिति में लौटानी होती है।

Q5: डिस्कॉम किसान को बिजली का भुगतान किस दर से करती है?

डिस्कॉम द्वारा भुगतान राज्य विद्युत विनियामक आयोग (SERC) द्वारा निर्धारित 25 वर्षीय स्थिर पीपीए टैरिफ पर किया जाता है। आमतौर पर यह दर ₹3.14 से ₹3.50 प्रति यूनिट (kWh) के बीच होती है। यह दर पूरे 25 साल तक अपरिवर्तित रहती है।

Q6: क्या जमीन का लैंड यूज चेंज (NA / 143 कन्वर्जन) कराना पड़ता है?

PM-KUSUM योजना को बढ़ावा देने के लिए अधिकांश राज्य सरकारों (जैसे राजस्थान, हरियाणा, एमपी, गुजरात) ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं को गैर-कृषि (NA) संपरिवर्तन शुल्क से 100% छूट प्रदान की है। किसान को कोई भारी कन्वर्जन टैक्स नहीं देना पड़ता।

Q7: यदि डिस्कॉम बिजली का भुगतान करने में देरी करे तो क्या सुरक्षा है?

मानक PPA नियमों के अनुसार, यदि डिस्कॉम बिल प्रस्तुत होने के 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करती, तो उसे भारतीय रिज़र्व बैंक के बैंक रेट से 1.25% से 1.5% प्रति माह की दर से विलंबित भुगतान अधिभार (Late Payment Surcharge - LPS) देना होता है। इसके अलावा PPA में लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की गारंटी होती है।

Q8: आवेदन करने के लिए कौन-कौन से प्राथमिक दस्तावेज तैयार रखने चाहिए?

1. जमीन की अद्यतन खतौनी/जमाबंदी (कम से कम 2 एकड़), 2. पटवारी द्वारा प्रमाणित दूरी व नक्शा प्रमाण पत्र, 3. आवेदक का आधार व पैन कार्ड, 4. बैंक पासबुक व कैंसिल चेक, और 5. यदि जमीन संयुक्त है तो सभी सह-खातेदारों का रजिस्टर्ड सहमति पत्र।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या 1 एकड़ जमीन पर कंपोनेंट-A का सोलर प्लांट लगाया जा सकता है?

A. कंपोनेंट-A के तहत न्यूनतम अनुमेय प्लांट क्षमता 500 किलोवाट (0.5 MW) है। 500kW के प्लांट के लिए न्यूनतम 2 से 2.5 एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है। यदि आपके पास केवल 1 एकड़ जमीन है, तो आप अपने पड़ोस के किसानों के साथ मिलकर एक समूह या क्लस्टर बनाकर 500kW हेतु सामूहिक आवेदन कर सकते हैं।

Q. क्या जमीन 33/11kV सब-स्टेशन से 5 किमी से अधिक दूर होने पर आवेदन स्वीकार होगा?

A. सामान्यतः डिस्कॉम 5 किमी के दायरे को प्राथमिकता देती हैं। यदि जमीन 5 से 7 किमी दूर है, तो तकनीकी फिजिबिलिटी तभी मिल सकती है जब डेवलपर या किसान अपने खर्च पर 11kV की समर्पित लाइन सब-स्टेशन तक खींचने को तैयार हों और सब-स्टेशन पर खाली क्षमता बची हो।

Q. क्या ग्राम पंचायत की बंजर या गोचर (चरागाह) जमीन पर प्लांट लग सकता है?

A. हाँ। ग्राम पंचायतें अपनी बंजर या पंचायती जमीन को राज्य सरकार के पंचायती राज नियमों के तहत 25 साल की लीज पर देकर पंचायत के लिए लाखों रुपये की स्थायी वार्षिक आमदनी सुनिश्चित कर सकती हैं। इसके लिए ग्राम सभा का विधिवत प्रस्ताव पास होना आवश्यक होता है।

Q. क्या 25 साल बाद डेवलपर मेरी जमीन पर कब्जा कर सकता है?

A. कदापि नहीं। लीज एग्रीमेंट भारतीय पंजीकरण अधिनियम के तहत उप-पंजीयक कार्यालय में स्पष्ट शर्तों के साथ पंजीकृत होता है। इसमें जमीन का मालिकाना हक कभी ट्रांसफर नहीं होता; केवल सौर ऊर्जा उत्पादन का सीमित लाइसेंस मिलता है। 25 साल पूरे होते ही डेवलपर को अपनी लागत से प्लांट हटाकर जमीन मूल स्थिति में लौटानी होती है।

Q. डिस्कॉम किसान को बिजली का भुगतान किस दर से करती है?

A. डिस्कॉम द्वारा भुगतान राज्य विद्युत विनियामक आयोग (SERC) द्वारा निर्धारित 25 वर्षीय स्थिर पीपीए टैरिफ पर किया जाता है। आमतौर पर यह दर ₹3.14 से ₹3.50 प्रति यूनिट (kWh) के बीच होती है। यह दर पूरे 25 साल तक अपरिवर्तित रहती है।

Q. क्या जमीन का लैंड यूज चेंज (NA / 143 कन्वर्जन) कराना पड़ता है?

A. PM-KUSUM योजना को बढ़ावा देने के लिए अधिकांश राज्य सरकारों (जैसे राजस्थान, हरियाणा, एमपी, गुजरात) ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं को गैर-कृषि (NA) संपरिवर्तन शुल्क से 100% छूट प्रदान की है। किसान को कोई भारी कन्वर्जन टैक्स नहीं देना पड़ता।

Q. यदि डिस्कॉम बिजली का भुगतान करने में देरी करे तो क्या सुरक्षा है?

A. मानक PPA नियमों के अनुसार, यदि डिस्कॉम बिल प्रस्तुत होने के 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करती, तो उसे भारतीय रिज़र्व बैंक के बैंक रेट से 1.25% से 1.5% प्रति माह की दर से विलंबित भुगतान अधिभार (Late Payment Surcharge - LPS) देना होता है। इसके अलावा PPA में लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की गारंटी होती है।

Q. आवेदन करने के लिए कौन-कौन से प्राथमिक दस्तावेज तैयार रखने चाहिए?

A. 1. जमीन की अद्यतन खतौनी/जमाबंदी (कम से कम 2 एकड़), 2. पटवारी द्वारा प्रमाणित दूरी व नक्शा प्रमाण पत्र, 3. आवेदक का आधार व पैन कार्ड, 4. बैंक पासबुक व कैंसिल चेक, और 5. यदि जमीन संयुक्त है तो सभी सह-खातेदारों का रजिस्टर्ड सहमति पत्र।

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