pmkusum.mnre.gov.in)। यदि आपने अनजाने में किसी फर्जी वेबसाइट पर पैसे भेज दिए हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करके म्यूल बैंक खाते में फंड फ्रीज (Lien Hold) करवाएं।
विषय सूची (Table of Contents)
- 1. फर्जी पीएम-कुसुम वेबसाइट रैकेट क्या है और ठग किसानों को कैसे जाल में फंसाते हैं?
- 2. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की आधिकारिक राष्ट्रीय एडवाइजरी
- 3. असली सरकारी पोर्टल बनाम फर्जी वेबसाइट पहचानने के 5 अकाट्य नियम
- 4. ब्लैकलिस्टेड फर्जी डोमेन, जाली अलॉटमेंट लेटर व क्यूआर कोड पेमेंट का भंडाफोड़
- 5. भारत के सभी राज्यों के अधिकृत नोडल पोर्टल (SNA Verified Directory)
- 6. यदि पैसे कट गए हैं तो क्या करें? गोल्डन आवर में 1930 रिपोर्टिंग व बैंक फ्रीज SOP
- 7. ठगों के खिलाफ कानूनी नियम: BNS धारा 319, 318 व IT Act धारा 66D
- 8. असली PM-KUSUM प्रक्रिया बनाम फर्जी वेबसाइट स्कैम तुलना सारणी (5-कॉलम)
- 9. स्थानीय थाने की साइबर सेल हेतु औपचारिक पुलिस शिकायत (FIR) प्रारूप
- 10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
- 11. आधिकारिक सरकारी पोर्टल व क्लस्टर गाइड्स
फर्जी पीएम-कुसुम वेबसाइट रैकेट क्या है और ठग किसानों को कैसे जाल में फंसाते हैं?
भारत में सौर ऊर्जा क्रांति का लाभ उठाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों किसान सोलर पंप लगाने के लिए अत्यधिक उत्सुक हैं। साइबर अपराधियों के संगठित सिंडिकेट्स (विशेष रूप से जामताड़ा, नूंह-मेवात और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय गिरोह) किसानों की इस उत्सुकता का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं।
इस पूरे घोटाले की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) इस प्रकार होती है:
- फर्जी सरकारी वेबसाइटों का निर्माण: ठग हूबहू नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) जैसी दिखने वाली वेबसाइटें तैयार करते हैं। वे इन साइटों पर प्रधानमंत्री की तस्वीर, भारत सरकार का राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ), 'डिजिटल इंडिया' का लोगो और PM-KUSUM का आधिकारिक बैनर लगा देते हैं।
- गूगल सर्च विज्ञापनों (Google Ads) के जरिए टॉप रैंकिंग: ठग 'Google Search Ads' खरीदते हैं। जब कोई किसान गूगल पर सर्च करता है "Kusum solar pump online apply", तो सबसे ऊपर सरकारी वेबसाइट के बजाय ठगों की स्पॉन्सर्ड वेबसाइट दिखाई देती है।
- नाममात्र का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म: किसान उस फर्जी लिंक पर क्लिक करता है जहाँ एक सरल फॉर्म आता है—नाम, आधार नंबर, जमीन का रकबा और पंप की क्षमता।
- पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) की मांग: फॉर्म सबमिट करते ही स्क्रीन पर एक यूपीआई क्यूआर कोड (PhonePe / Google Pay) आता है जिसमें लिखा होता है: "आवेदन शुल्क मात्र ₹2,499 या ₹5,500 जमा करें; अन्यथा आपका आवेदन निरस्त हो जाएगा।"
- फर्जी अलॉटमेंट लेटर व लाखों की मांग: ₹2,500 कटने के 2 दिन बाद किसान के व्हाट्सएप पर एक जाली सरकारी दस्तावेज भेजा जाता है जिस पर मुहर लगी होती है: "Sanction Order for 5HP Solar Pump"। इसके बाद ठग फोन करके कहते हैं: "सर, आपका पंप पास हो गया है, 2 दिन में गाड़ी आपके खेत पर पहुंचेगी। किसान अंशदान के ₹58,000 हमारे बताए बैंक खाते में तत्काल आरटीजीएस करें।" घबराहट और खुशी में किसान अपनी जमा पूंजी ठगों के हवाले कर देता है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की आधिकारिक राष्ट्रीय एडवाइजरी
किसानों के साथ हो रही इस व्यापक धोखाधड़ी को देखते हुए भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने राष्ट्रीय समाचार पत्रों और आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट सार्वजनिक एडवाइजरी (Public Advisory) जारी की है:
- कोई सीधा पंजीकरण शुल्क नहीं: MNRE ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार PM-KUSUM योजना के तहत किसी भी वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर किसानों से कोई सीधा पंजीकरण शुल्क या ऑनलाइन बुकिंग राशि नहीं लेती है।
- योजना का केंद्रीय पोर्टल केवल सूचनात्मक है: केंद्रीय पोर्टल
pmkusum.mnre.gov.inकेवल नीतिगत दिशानिर्देशों के लिए है। वास्तविक सोलर पंप का आवेदन केवल और केवल संबंधित राज्य सरकार के अधिकृत कृषि या ऊर्जा विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर ही स्वीकार किया जाता है। - निजी खातों में भुगतान प्रतिबंधित: सरकार कभी भी किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत बैंक खाते, चालू खाते, या गूगल पे/फोनपे क्यूआर कोड पर किसान अंशदान जमा नहीं करवाती। किसान अंशदान केवल अधिकृत ट्रेजरी चालान या संबंधित राज्य नोडल एजेंसी के सीलबंद खाते में ही जमा होता है।
असली सरकारी पोर्टल बनाम फर्जी वेबसाइट पहचानने के 5 अकाट्य नियम
किसी भी वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी या पैसे डालने से पहले निम्नलिखित 5 अकाट्य नियमों की जांच अवश्य करें:
- डोमेन एक्सटेंशन की जांच (.gov.in बनाम .org/.com):
भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों की सभी आधिकारिक वेबसाइटें अनिवार्य रूप से '.gov.in' या '.nic.in' पर समाप्त होती हैं (जैसे:pmkusum.mnre.gov.in,saralharyana.gov.in)। यदि किसी वेबसाइट के पते में.org,.com,.in,.co.in,.site,.onlineया.xyzलगा है, तो वह 100% अनधिकृत और फर्जी वेबसाइट है। भारत सरकार कभी भी व्यावसायिक डोमेन पर सरकारी योजनाएं नहीं चलाती। - ब्राउज़र एड्रेस बार में लॉक सिंबल (SSL Certificate):
वेबसाइट का यूआरएल हमेशाhttps://से शुरू होना चाहिए। हालांकि ठग भी मुफ्त एसएसएल लगा लेते हैं, अतः केवल लॉक देखकर भरोसा न करें; डोमेन का नाम अक्षरशः पढ़ें। - सीधे क्यूआर कोड या व्यक्तिगत यूपीआई आईडी की अनुपस्थिति:
सरकारी पोर्टल पर चालान भुगतान के लिए हमेशा अधिकृत पेमेंट गेटवे (जैसे SBI e-Pay, Bharatkosh, या सरकारी साइबर ट्रेजरी) का सुरक्षित इंटरफेस खुलता है। किसी भी सरकारी वेबसाइट पर कभी भी किसी व्यक्ति का नाम (जैसे:ramesh_solar@ybl) या व्हाट्सएप पर क्यूआर कोड नहीं भेजा जाता। - दूरसंचार विभाग (DoT) के 'चक्षु' पोर्टल पर जांच:
यदि आपको किसी नंबर से व्हाट्सएप पर कुसुम योजना का लिंक मिला है, तो संचार साथी के Chakshu (sancharsaathi.gov.in) पोर्टल पर जाकर उस लिंक और नंबर की प्रामाणिकता जांचें। - स्थानीय कृषि अधिकारी (Agriculture Officer) से भौतिक सत्यापन:
कोई भी बड़ा भुगतान करने से पहले अपने ब्लॉक या तहसील के कृषि उप-निदेशक (DDA), सहायक कृषि अभियंता (AAE), या बिजली विभाग के कार्यालय जाकर सीधे पूछें कि क्या वर्तमान में सोलर पंप के आवेदन खुले हैं या नहीं।
ब्लैकलिस्टेड फर्जी डोमेन, जाली अलॉटमेंट लेटर व क्यूआर कोड पेमेंट का भंडाफोड़
दूरसंचार विभाग और गृह मंत्रालय के I4C प्रभाग ने जांच के दौरान सैकड़ों फर्जी वेबसाइटों और डोमेन को ब्लॉक किया है। आम तौर पर ठग इस प्रकार के भ्रामक नामों का उपयोग करते हैं:
सावधान! इस प्रकार के जाली डोमेन नामों से बचें (Scam Domain Patterns):
pmkusumyojana.org/pmkusum.org(फर्जी - .org डोमेन)kusumscheme.co.in/kusum-yojana.online(फर्जी)mnre-gov.in/mnre-solarpump.com(फर्जी - सरकारी नाम की नकल)suryaghar-yojana.site/pm-surya.in(फर्जी)
याद रखें: भारत सरकार के सभी असली पोर्टल केवल .gov.in पर होते हैं!
फर्जी अलॉटमेंट लेटर की पहचान कैसे करें?
ठगों द्वारा भेजे गए जाली अलॉटमेंट लेटर में कई तकनीकी और कानूनी खामियां होती हैं:
- दस्तावेज पर 'Ministry of New & Renewable Energy' का लोगो होता है, लेकिन नीचे हस्ताक्षर किसी फर्जी 'डायरेक्टर जनरल सोलर मिशन' के होते हैं।
- दस्तावेज में पैसे जमा कराने के लिए किसी निजी व्यक्ति (जैसे ICICI बैंक का व्यक्तिगत खाता या यस बैंक की यूपीआई आईडी) का विवरण दिया होता है।
- दस्तावेज में लिखा होता है: "24 घंटे में भुगतान न करने पर आपका नाम हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।" कोई भी सरकारी एजेंसी 24 घंटे में ब्लैकलिस्ट करने की धमकी नहीं देती।
भारत के सभी राज्यों के अधिकृत नोडल पोर्टल (SNA Verified Directory)
सोलर पंप और रूफटॉप सोलर हेतु केवल निम्नलिखित सत्यापित सरकारी पोर्टलों का ही उपयोग करें:
असली व सत्यापित राज्य नोडल पोर्टल निर्देशिका:
- केंद्रीय राष्ट्रीय पोर्टल:
pmkusum.mnre.gov.inएवंpmsuryaghar.gov.in - हरियाणा: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग (HAREDA) —
saralharyana.gov.in/hareda.gov.in - राजस्थान: राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम —
rajkisan.rajasthan.gov.in/energy.rajasthan.gov.in - उत्तर प्रदेश: यूपीनेडा (UPNEDA) —
upneda.org.in/agriculture.up.gov.in - मध्य प्रदेश: मप्र ऊर्जा विकास निगम —
cmsolarpump.mp.gov.in/mpuvnl.com - महाराष्ट्र: महाऊर्जा (MEDA) —
kusum.mahadiscom.in/mahaurja.com - गुजरात: GUVNL / GEDA —
geda.gujarat.gov.in - पंजाब: पेडा (PEDA) —
peda.gov.in
यदि पैसे कट गए हैं तो क्या करें? गोल्डन आवर में 1930 रिपोर्टिंग व बैंक फ्रीज SOP
यदि आपने या आपके किसी परिचित किसान ने गलती से किसी फर्जी वेबसाइट पर पैसे ट्रांसफर कर दिए हैं, तो तुरंत निम्नलिखित आपातकालीन कदम उठाएं:
- गोल्डन आवर (पहले 2 घंटे) में हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें:
पैसा कटते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर वित्तीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। अपने बैंक का नाम, खाता नंबर, लेन-देन का यूटीआर (UTR/RRN) नंबर और जिस यूपीआई आईडी या खाते में पैसा गया है, उसका विवरण नोट कराएं। 1930 का सिस्टम तत्काल उस म्यूल खाते पर Lien Hold (फ्रीज) लगा देगा ताकि ठग पैसा निकाल न सके। - cybercrime.gov.in पर औपचारिक ई-एफआईआर:
1930 पर कॉल के बाद 24 घंटे के भीतरcybercrime.gov.inपोर्टल पर जाएं। फर्जी वेबसाइट का यूआरएल, प्राप्त फर्जी रसीद या अलॉटमेंट लेटर की पीडीएफ, और बैंक स्टेटमेंट को साक्ष्य के रूप में अपलोड करें। - बैंक में लिखित विवाद पत्र (Chargeback Request):
अपनी बैंक शाखा में जाकर शाखा प्रबंधक को लिखित सूचना दें कि संबंधित ट्रांजैक्शन साइबर फ्रॉड का परिणाम है और इसके रिवर्सल (Chargeback) की प्रक्रिया शुरू की जाए। - BNSS 2023 की धारा 503 के तहत कोर्ट से रिफंड:
जब पुलिस ठग के खाते में पैसा फ्रीज कर दे, तो अपने स्थानीय न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 503 के तहत आवेदन लगाकर अपना फंसा हुआ पैसा अपने खाते में वापस प्राप्त करें।
ठगों के खिलाफ कानूनी नियम: BNS धारा 319, 318 व IT Act धारा 66D
सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर किसानों को ठगने वाले अपराधियों के खिलाफ भारतीय कानून में अत्यंत कठोर दंडात्मक धाराएं लागू होती हैं:
- भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 319 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी - Cheating by Personation): सरकारी विभाग या अधिकृत अधिकारी का फर्जी रूप धारण करके छल करने पर 5 वर्ष तक का कठोर कारावास।
- BNS 2023 की धारा 318(4) (धोखाधड़ी व संपत्ति की बेईमानी से सौंपना / देना): किसी व्यक्ति को छलपूर्वक पैसे ट्रांसफर करने पर मजबूर करने पर 7 वर्ष तक की जेल और भारी जुर्माना।
- BNS 2023 की धारा 336 व 340 (कूट रचना व जाली दस्तावेज बनाना - Forgery): भारत सरकार के फर्जी लेटरहेड, मुहर और जाली अलॉटमेंट लेटर बनाने पर 7 वर्ष तक का कारावास।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act 2000) की धारा 66D: कंप्यूटर संसाधन या इंटरनेट के जरिए फर्जी वेबसाइट बनाकर प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी करने पर 3 वर्ष की जेल और ₹1 लाख तक का जुर्माना।
असली PM-KUSUM प्रक्रिया बनाम फर्जी वेबसाइट स्कैम तुलना सारणी (5-कॉलम)
नीचे दी गई 5-कॉलम तुलनात्मक सारणी में वास्तविक सरकारी प्रक्रिया और साइबर अपराधियों द्वारा चलाए जा रहे फर्जी वेबसाइट स्कैम का स्पष्ट भेद प्रस्तुत किया गया है:
| तुलना का मानक | असली सरकारी प्रक्रिया (Official) | फर्जी वेबसाइट स्कैम (Fake Scam) | कानूनी / सुरक्षा नियम | किसान का रक्षात्मक कदम |
|---|---|---|---|---|
| वेबसाइट का डोमेन | अनिवार्य रूप से .gov.in या .nic.in | .org, .com, .in, .site, .online | भारत सरकार डोमेन नीति | गैर-gov.in साइट तुरंत बंद करें |
| पंजीकरण शुल्क (Registration) | ₹0 (पूर्णतः निःशुल्क ऑनलाइन फॉर्म) | ₹2,499 या ₹5,500 की तत्काल मांग | MNRE पब्लिक एडवाइजरी | रजिस्ट्रेशन के लिए ₹1 भी न दें |
| भुगतान का माध्यम | ई-चालान / सरकारी साइबर ट्रेजरी / बैंक डीडी | व्यक्तिगत यूपीआई क्यूआर कोड / चालू खाता | ट्रेजरी नियम व वित्तीय ऑडिट | यूपीआई या क्यूआर पर पैसे न भेजें |
| आवंटन पत्र (Allotment) | पोर्टल लॉगिन पर आधिकारिक डिजिटल पत्र | व्हाट्सएप पर फर्जी पीडीएफ दस्तावेज | BNS धारा 336 (जालसाजी अपराध) | व्हाट्सएप लेटर को फर्जी समझें |
| सत्यापन की प्रक्रिया | पटवारी / कृषि अधिकारी द्वारा भौतिक जांच | कोई भौतिक जांच नहीं, केवल फोन पर दबाव | SNA फील्ड इंस्पेक्शन नियम | कृषि अधिकारी से मिलकर ही भुगतान करें |
स्थानीय थाने की साइबर सेल हेतु औपचारिक पुलिस शिकायत (FIR) प्रारूप
यदि आप फर्जी वेबसाइट के झांसे में आकर वित्तीय ठगी के शिकार हो गए हैं, तो अपने जिले की साइबर क्राइम पुलिस थाना में निम्नलिखित प्रारूप में लिखित शिकायत प्रस्तुत करें:
सेवा में, थानाधिकारी महोदय / प्रभारी अधिकारी, साइबर अपराध पुलिस थाना, जिला: [जिले का नाम] विषय: पीएम-कुसुम सोलर पंप योजना के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर साइबर धोखाधड़ी करने तथा ₹[रकम] की ठगी किए जाने बाबत एफआईआर (FIR) (FIR) दर्ज करने हेतु प्रार्थना पत्र। महोदय, सविनय निवेदन है कि प्रार्थी [आपका नाम], पुत्र श्री [पिता का नाम], निवासी [गांव/कस्बा, तहसील व जिला], एक साधारण किसान है। 1. यह कि प्रार्थी अपने खेत में सिंचाई हेतु सोलर पंप लगवाना चाहता था। दिनांक [तारीख] को प्रार्थी ने इंटरनेट पर सर्च किया तो एक वेबसाइट [फर्जी वेबसाइट का यूआरएल, उदा. www.pmkusumyojana-gov.org] प्रदर्शित हुई। 2. यह कि उक्त वेबसाइट पर भारत सरकार का अशोक स्तंभ, प्रधानमंत्री जी का चित्र एवं नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का लोगो लगा हुआ था, जिससे प्रार्थी को पूर्ण विश्वास हो गया कि यह भारत सरकार का आधिकारिक पोर्टल है। 3. यह कि प्रार्थी ने उस वेबसाइट पर दिए गए ऑनलाइन फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरी। फॉर्म सबमिट होते ही स्क्रीन पर एक यूपीआई क्यूआर कोड प्रदर्शित हुआ और पंजीकरण शुल्क के नाम पर ₹[रकम] का भुगतान करने को कहा गया। प्रार्थी ने अपने बैंक खाते से उक्त राशि का भुगतान कर दिया (ट्रांजैक्शन संदर्भ/UTR संख्या: [संख्या दर्ज करें])। 4. यह कि दिनांक [तारीख] को अज्ञात कॉलर (मोबाइल नंबर: [कॉलर का नंबर]) ने प्रार्थी को व्हाट्सएप पर एक जाली अलॉटमेंट लेटर भेजा और कहा कि आपके खेत में 5HP का सोलर पंप स्वीकृत हो गया है, शेष किसान अंशदान के ₹[रकम] बैंक खाते [ठग का बैंक खाता नंबर, बैंक का नाम व आईएफएससी] में तत्काल जमा करवाएं। 5. यह कि प्रार्थी ने सरकारी योजना समझकर उक्त राशि भी अंतरित कर दी। इसके बाद उक्त मोबाइल नंबर बंद आने लगा और वेबसाइट भी इंटरनेट से गायब हो गई। प्रार्थी को तब ज्ञात हुआ कि अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा भारत सरकार के नाम की फर्जी वेबसाइट बनाकर प्रार्थी के साथ धोखाधड़ी व जालसाजी की गई है। 6. यह कि प्रार्थी ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत दर्ज कराई है, जिसका एकनॉलेजमेंट नंबर [1930 Ack Number] है। अतः श्रीमान से सादर प्रार्थना है कि उक्त अज्ञात साइबर अपराधियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 319, 336 एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66D के अंतर्गत गंभीर अपराध (Cognizable Offence) की एफआईआर (FIR) दर्ज कर ठगी गई राशि ₹[रकम] वापस दिलाने व अपराधियों को गिरफ्तार करने की कृपा करें। संलग्नक: 1. फर्जी वेबसाइट के स्क्रीनशॉट्स व यूआरएल विवरण। 2. बैंक खाता विवरण (स्टेटमेंट) जिसमें अवैध डेबिट एंट्री लाल घेरे में है। 3. व्हाट्सएप चैट, कॉलर का मोबाइल नंबर व जाली अलॉटमेंट लेटर की प्रति। 4. 1930 साइबर हेल्पलाइन शिकायत रसीद की प्रति। 5. आधार कार्ड की स्वप्रमाणित प्रति। भवदीय, हस्ताक्षर प्रार्थी: ____________________ नाम: [आपका पूरा नाम] मोबाइल नंबर: [पंजीकृत नंबर] दिनांक: [स्थान एवं तारीख]
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
Q1: क्या सरकार व्हाट्सएप या फोन करके सोलर पंप आवंटन की सूचना देती है?
नहीं। सरकार या MNRE कभी भी किसी व्यक्तिगत मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप पर आवंटन पत्र नहीं भेजती। चयन की आधिकारिक सूचना केवल राज्य के अधिकृत पोर्टल के लॉगिन डैशबोर्ड पर दिखाई देती है और किसान के पंजीकृत मोबाइल पर आधिकारिक सरकारी एसएमएस हेडर (जैसे: HP-GOV, RJ-GOV, UP-AGRI) से सूचना आती है।
Q2: यदि मैंने फर्जी वेबसाइट पर केवल अपना आधार और खतौनी अपलोड की है, तो क्या कोई खतरा है?
हाँ, ठग आपके आधार कार्ड का उपयोग करके फर्जी सिम कार्ड निकाल सकते हैं या म्यूल बैंक खाता खोल सकते हैं। इससे बचने के लिए तुरंत UIDAI की आधिकारिक mAadhaar ऐप डाउनलोड करके अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करें और संचार साथी के TAFCOP पोर्टल पर जाकर चेक करें कि आपके आधार पर कोई नया सिम तो जारी नहीं हुआ है।
Q3: क्या फर्जी वेबसाइट पर ट्रांसफर हुआ पैसा वापस मिल सकता है?
हाँ, यदि आपने पैसा कटने के तुरंत बाद (गोल्डन आवर - पहले 2 घंटे में) हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर दिया है, तो पुलिस उस पैसे को ठग के बैंक खाते में फ्रीज कर देती है। इसके बाद स्थानीय मजिस्ट्रेट कोर्ट में BNSS धारा 503 के तहत आवेदन लगाकर आप अपना पूरा पैसा सुरक्षित वापस पा सकते हैं।
Q4: फेसबुक या यूट्यूब पर दिखने वाले कुसुम योजना के विज्ञापनों का क्या सच है?
सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब) पर दिखने वाले 99% सोलर पंप विज्ञापन फर्जी साइबर ठगों द्वारा प्रायोजित होते हैं। सरकार कभी भी सोशल मीडिया पर पैसे ट्रांसफर करने के लिंक नहीं देती। किसी भी विज्ञापन पर क्लिक करके पैसे न भेजें।
Q5: क्या कोई प्राइवेट कंपनी खुद को कुसुम योजना की अधिकृत एजेंसी बता सकती है?
नहीं। केवल राज्य सरकार द्वारा टेंडर के माध्यम से चुनी गई अधिकृत इम्पैनल्ड कंपनियां (जैसे Tata Power, Shakti Pumps आदि) ही काम करती हैं, लेकिन वे भी सीधे किसान से नकद पैसे नहीं लेतीं। किसान का अंशदान हमेशा राज्य नोडल एजेंसी के सरकारी खाते में ही जमा होता है।
Q6: असली पोर्टल पर आवेदन करने का सही समय कैसे पता चलता है?
राज्य सरकारें जब भी सोलर पंप की नई विंडो खोलती हैं, तो प्रमुख राज्य स्तरीय हिंदी समाचार पत्रों में आधिकारिक सरकारी विज्ञप्ति प्रकाशित होती है और राज्य के कृषि विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर सूचना दी जाती है।
Q7: क्या साइबर कैफे वाले से आवेदन करवाना सुरक्षित है?
यदि आप किसी सीएससी (CSC) या साइबर कैफे से आवेदन करवा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह केवल राज्य सरकार के अधिकृत .gov.in पोर्टल पर ही फॉर्म भर रहा हो। स्क्रीन पर स्वयं देखें और अपने बैंक खाते या डेबिट कार्ड का पिन/ओटीपी कभी ऑपरेटर को न बताएं।
Q8: फर्जी वेबसाइट की सूचना केंद्र सरकार को सीधे कहाँ दें?
आप किसी भी संदिग्ध या फर्जी वेबसाइट का लिंक और स्क्रीनशॉट सीधे MNRE के आधिकारिक ईमेल pmkusum-mnre@gov.in पर भेज सकते हैं या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in पर 'Report Cyber Crime' के अंतर्गत रिपोर्ट कर सकते हैं।
आधिकारिक सरकारी पोर्टल व क्लस्टर गाइड्स
- MNRE Official PM-KUSUM National Portal
- National Cyber Crime Reporting Portal (MHA)
- 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन: गोल्डन आवर बैंक फ्रीज व BNSS 503 कोर्ट रिफंड SOP
- TAFCOP पोर्टल: आधार पर एक्टिव सिम चेक व फर्जी नंबर ब्लॉक SOP
- AePS बायोमेट्रिक फ्रॉड बचाव व mAadhaar आधार लॉक SOP
- PM-KUSUM कंपोनेंट-B: 3HP, 5HP व 7.5HP सोलर कृषि पंप पर 90% सब्सिडी गाइड
- पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: 300 यूनिट फ्री बिजली व ₹78,000 सब्सिडी
- सोलर पंप मेंटेनेंस, VFD एरर कोड्स व 5-साल फ्री वारंटी क्लेम SOP