विषय सूची (Table of Contents)
- 1. AePS क्या है और बिना OTP व डेबिट कार्ड के पैसे कैसे कट जाते हैं?
- 2. फिंगरप्रिंट क्लोनिंग का सच: जमीन रजिस्ट्री ऑफिस, सेल डीड और सिलिकॉन रबर स्कैम
- 3. आधार बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक करने की संपूर्ण SOP (mAadhaar ऐप व UIDAI पोर्टल)
- 4. NPCI का नया सुरक्षा फ्रेमवर्क 2026: लाइव बायोमेट्रिक 2FA और मर्चेंट जियो-फेंसिंग
- 5. बैंक और सीएसपी (Customer Service Point) की जवाबदेही: RBI शून्य देयता सर्कुलर
- 6. ठगी होने पर क्या करें? 1930 रिपोर्टिंग, पुलिस एफआईआर (FIR) (FIR) व बैंक चार्जकबैक SOP
- 7. आधार फ्रॉड पर कानूनी नियम: आधार एक्ट 2016 धारा 42/43 व BNS धारा 318
- 8. सामान्य बैंकिंग बनाम AePS बायोमेट्रिक निकासी सुरक्षा सारणी (5-कॉलम)
- 9. बैंक में जमा करने हेतु अनधिकृत AePS ट्रांजैक्शन रिफंड आवेदन प्रारूप
- 10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
- 11. आधिकारिक सरकारी पोर्टल व क्लस्टर गाइड्स
AePS क्या है और बिना OTP व डेबिट कार्ड के पैसे कैसे कट जाते हैं?
भारत सरकार और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए AePS (Aadhaar Enabled Payment System) की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य यह था कि एक गरीब किसान या ग्रामीण नागरिक बिना किसी प्लास्टिक एटीएम कार्ड, स्मार्टफोन या बैंक शाखा गए, केवल अपने गांव के ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) या बैंक मित्र की बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर ₹100 से लेकर ₹10,000 तक नकद निकाल सके।
AePS लेनदेन को पूरा करने के लिए केवल 3 जानकारियों की आवश्यकता होती है:
- ग्राहक का बैंक नाम (उदा. State Bank of India, Bank of Baroda)।
- ग्राहक का 12 अंकों का आधार नंबर (या वर्चुअल आईडी)।
- ग्राहक का लाइव फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक (POS मशीन या माइक्रो-एटीएम स्कैनर पर)।
इस प्रणाली में सबसे बड़ा सुरक्षा लूपहोल यह है कि इसमें कोई ओटीपी (One Time Password) या 4-अंकों का एटीएम पिन नहीं मांगा जाता। प्रमाणीकरण केवल बायोमेट्रिक्स पर आधारित होता है। जब तक पीड़ित के मोबाइल पर बैंक से पैसे कटने का एसएमएस आता है, तब तक ठग पैसा लेकर रफूचक्कर हो चुका होता है।
फिंगरप्रिंट क्लोनिंग का सच: जमीन रजिस्ट्री ऑफिस, सेल डीड और सिलिकॉन रबर स्कैम
नागरिक अक्सर आश्चर्यचकित होकर पूछते हैं: "मैंने कभी किसी अजनबी को अपना अंगूठा नहीं दिया, न ही मैं किसी साइबर कैफे गया, फिर ठग के पास मेरा फिंगरप्रिंट कहाँ से आया?"
साइबर अपराध अनुसंधान से यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि ठग आपका फिंगरप्रिंट आपके हाथ से नहीं, बल्कि सरकारी उप-पंजीयक कार्यालयों (Sub-Registrar / Land Registry Offices) के सार्वजनिक रिकॉर्ड से चुराते हैं। इसकी कार्यप्रणाली इस प्रकार है:
- सेल डीड (Sale Deed) से फिंगरप्रिंट की चोरी: जब आप कोई मकान, फ्लैट, या जमीन खरीदते या बेचते हैं, तो रजिस्ट्री ऑफिस में निष्पादित सेल डीड के प्रत्येक पृष्ठ पर क्रेता और विक्रेता के अंगूठे का निशान काले स्याही वाले पैड से लगाया जाता है। इसके अलावा रजिस्ट्री दस्तावेजों पर आधार नंबर भी साफ-साफ दर्ज होता है।
- सार्वजनिक भू-अभिलेख पोर्टल (Public Land Records): कई राज्यों के राजस्व विभागों (जैसे बिहार का भूमि निबंधन, यूपी का आईजीआरएस पोर्टल आदि) पर रजिस्टर्ड सेल डीड की प्रतियां पीडीएफ के रूप में सार्वजनिक रूप से डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध होती हैं। ठग इन पोर्टलों से हजारों सेल डीड डाउनलोड करते हैं।
- सिलिकॉन रबर से क्लोनिंग (Artificial Fingerprint Creation): ठग फोटोशॉप का उपयोग करके दस्तावेज पर लगे अंगूठे के निशान को हाई-रेज़ोल्यूशन में स्कैन करते हैं, उसका कंट्रास्ट बढ़ाते हैं और एक निगेटिव फिल्म प्रिंट करते हैं। इसके बाद वे पॉलीमर लिक्विड, सिलिकॉन रबर या मोम (M-Seal / Wax) का उपयोग करके एक कृत्रिम अंगूठा बना लेते हैं। इस कृत्रिम अंगूठे को अपनी उंगली पर चिपकाकर वे किसी दूरदराज के सीएसपी पॉइंट या माइक्रो-एटीएम पर जाकर पैसे निकाल लेते हैं।
आधार बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक करने की संपूर्ण SOP (mAadhaar ऐप व UIDAI पोर्टल)
यदि आप चाहते हैं कि आपके बैंक खाते से बिना आपकी अनुमति के एक रुपया भी न निकले, तो आज ही अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करें। जब बायोमेट्रिक्स लॉक होता है, तो UIDAI का सर्वर किसी भी फिंगरप्रिंट या आईरिस अनुरोध को तुरंत खारिज कर देता है, भले ही ठग के पास आपका असली फिंगरप्रिंट ही क्यों न हो।
विधि 1: myaadhaar.uidai.gov.in पोर्टल के माध्यम से लॉक करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:
- आधिकारिक यूआईडीएआई पोर्टल
myaadhaar.uidai.gov.inपर जाएं। - "Login" बटन पर क्लिक करें। अपना 12 अंकों का आधार नंबर और कैप्चा दर्ज करें।
- आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त 6 अंकों का ओटीपी दर्ज करके लॉग इन करें।
- डैशबोर्ड पर "Lock/Unlock Biometrics" टाइल पर क्लिक करें।
- दिशानिर्देश पढ़ें और "Next" पर क्लिक करें। चेकबॉक्स "I understand that after locking my biometrics, I will not be able to perform biometric authentication" को टिक करें।
- "Next" दबाएं। स्क्रीन पर तुरंत हरा टिक दिखाई देगा: "Your Biometrics have been locked successfully"।
विधि 2: आधिकारिक mAadhaar मोबाइल ऐप के जरिए लॉक/अनलॉक SOP:
- गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से आधिकारिक mAadhaar ऐप (UIDAI द्वारा विकसित) डाउनलोड करें।
- अपना मोबाइल नंबर दर्ज करके 4 अंकों का सुरक्षा पिन (App PIN) सेट करें।
- "Register My Aadhaar" पर जाकर अपना आधार नंबर दर्ज करें और ओटीपी दर्ज करके प्रोफाइल जोड़ें।
- होम स्क्रीन पर अपनी प्रोफाइल पर टैप करें। ऊपर दाईं ओर दिए गए तीन डॉट्स (मेनू) पर क्लिक करें।
- "Biometric Settings" चुनें और "Enable Biometric Lock" पर टॉगल ऑन करें। ओटीपी दर्ज कर पुष्टि करें। आपका बायोमेट्रिक्स स्थायी रूप से लॉक हो जाएगा।
बायोमेट्रिक अनलॉक कैसे करें (जब जरूरत हो)?
यदि आपको कभी राशन लेने, नया सिम कार्ड खरीदने या बैंक में केवाईसी कराने के लिए फिंगरप्रिंट लगाने की आवश्यकता हो, तो mAadhaar ऐप खोलें और "Unlock Biometrics" पर क्लिक करें। यूआईडीएआई आपको 10 मिनट का अस्थायी अनलॉक (Temporary Unlock) देता है। 10 मिनट बाद आपका बायोमेट्रिक्स अपने आप पुनः लॉक हो जाता है, जिससे आपकी सुरक्षा कभी कमजोर नहीं होती।
NPCI का नया सुरक्षा फ्रेमवर्क 2026: लाइव बायोमेट्रिक 2FA और मर्चेंट जियो-फेंसिंग
सिलिकॉन क्लोनिंग के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने 2024 से 2026 के बीच AePS इकोसिस्टम में कई कड़े तकनीकी सुरक्षा नियम अनिवार्य कर दिए हैं:
- मर्चेंट के लिए लाइव बायोमेट्रिक 2FA (Two-Factor Authentication): अब कोई भी AePS बीसी (बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट) या सीएसपी ऑपरेटर सुबह मशीन ऑन करते समय और प्रत्येक लेन-देन से पहले अपना स्वयं का लाइव बायोमेट्रिक स्कैन किए बिना किसी ग्राहक का ट्रांजैक्शन नहीं कर सकता।
- लाइवनेस डिटेक्शन (Liveness Detection - L1 Scanners): NPCI ने पुराने L0 बायोमेट्रिक स्कैनर्स को चरणबद्ध तरीके से हटाकर नए L1 बायोमेट्रिक स्कैनर्स अनिवार्य किए हैं। ये L1 स्कैनर्स उंगली के तापमान, पल्स रेट और रक्त प्रवाह (Blood Flow) की जांच करते हैं, जिससे मृत सिलिकॉन या रबर के कृत्रिम अंगूठे पूरी तरह रिजेक्ट हो जाते हैं।
- जियो-फेंसिंग (Geo-Fencing) और ट्रांजैक्शन कैप: AePS सीएसपी मशीनों को उनके अधिकृत पते के 500 मीटर के दायरे में जियो-फेंस कर दिया गया है। इसके अलावा एक दिन में एक आधार कार्ड से अधिकतम 1 AePS वित्तीय लेन-देन (₹10,000 की सीमा) का नियम कई बैंकों ने लागू किया है।
बैंक और सीएसपी (Customer Service Point) की जवाबदेही: RBI शून्य देयता सर्कुलर
जब किसी नागरिक के साथ AePS फ्रॉड होता है, तो बैंक अक्सर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि "लेन-देन आपके बायोमेट्रिक से हुआ है, इसलिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।" यह बैंक का पूरी तरह से गैर-कानूनी और भ्रामक बहाना है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सर्कुलर संख्या DBR.No.Leg.BC.78/09.07.005/2017-18 (Customer Protection – Limiting Liability of Customers in Unauthorised Electronic Banking Transactions) के तहत:
- तृतीय-पक्ष धोखाधड़ी (Third-Party Breach): यदि धोखाधड़ी में न तो ग्राहक की लापरवाही है और न ही बैंक की, बल्कि सिस्टम में किसी तीसरे पक्ष (जैसे फर्जी सीएसपी या सिलिकॉन क्लोनिंग) द्वारा अनधिकृत लेन-देन हुआ है, और ग्राहक बैंक को 3 कार्यदिवसों (72 घंटे) के भीतर सूचित कर देता है, तो ग्राहक की देयता शून्य (Zero Liability) होगी।
- 10 दिनों के भीतर शैडो क्रेडिट (Shadow Credit): सूचना मिलने के 10 कार्यदिवसों के भीतर बैंक को पीड़ित के खाते में वह पूरी राशि अस्थायी रूप से क्रेडिट (Shadow Credit) करनी होती है।
- सबूत का भार बैंक पर (Burden of Proof): यह सिद्ध करने की कानूनी जिम्मेदारी बैंक की है कि ग्राहक ने लापरवाही की थी या ओटीपी साझा किया था। चूंकि AePS में कोई ओटीपी होता ही नहीं, इसलिए बैंक ग्राहक पर लापरवाही का आरोप नहीं लगा सकता।
ठगी होने पर क्या करें? 1930 रिपोर्टिंग, पुलिस एफआईआर (FIR) (FIR) व बैंक चार्जकबैक SOP
यदि आपके बैंक खाते से बिना आपकी जानकारी के AePS से पैसे कट गए हैं, तो तत्काल निम्नलिखित कदम उठाएं:
AePS फ्रॉड रिकवरी इमरजेंसी चेकलिस्ट:
- 1. तुरंत 1930 पर कॉल करें: बैंक एसएमएस मिलते ही तुरंत 1930 पर डायल करें और ट्रांजैक्शन का RRN / UTR नंबर दर्ज कराएं ताकि जिस सीएसपी या मर्चेंट वॉलेट में पैसा गया है, उसे तुरंत फ्रीज कराया जा सके।
- 2. आधार बायोमेट्रिक्स को उसी क्षण लॉक करें: तुरंत mAadhaar ऐप या
myaadhaar.uidai.gov.inखोलकर अपने बायोमेट्रिक्स को लॉक करें ताकि ठग दोबारा पैसे न निकाल सके। - 3. बैंक शाखा में लिखित विवाद (Disputed Transaction) पत्र दें: अपने बैंक की शाखा में जाएं और बैंक प्रबंधक को लिखित आवेदन दें (प्रारूप नीचे दिया गया है)। आवेदन पर बैंक की मुहर और तारीख सहित पावती (Receiving) अवश्य लें।
- 4. cybercrime.gov.in पर औपचारिक FIR दर्ज करें: राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर उसकी पीडीएफ कॉपी डाउनलोड करें।
- 5. बैंकिंग लोकपाल में शिकायत: यदि बैंक 30 दिनों के भीतर आपका पैसा वापस नहीं लौटाता, तो भारतीय रिज़र्व बैंक के पोर्टल
cms.rbi.org.inपर बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) के समक्ष बैंक के खिलाफ क्षतिपूर्ति का वाद दायर करें।
आधार फ्रॉड पर कानूनी नियम: आधार एक्ट 2016 धारा 42/43 व BNS धारा 318
AePS के माध्यम से फर्जीवाड़ा करने वाले अपराधियों, अवैध सीएसपी संचालकों और गिरोहों पर निम्नलिखित कठोर कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है:
- आधार अधिनियम 2016 की धारा 42: केंद्रीय पहचान डेटा भंडार (CIDR) में अनधिकृत पहुंच या बायोमेट्रिक डेटा की चोरी करने पर 3 वर्ष तक का कारावास और ₹10,000 तक का जुर्माना।
- आधार अधिनियम 2016 की धारा 43: आधार पहचान जानकारी को बदलने या प्रतिरूपण द्वारा प्रमाणीकरण का प्रयास करने पर 3 वर्ष की जेल और ₹10,000 का जुर्माना। यदि यह अपराध किसी कंपनी या संस्था द्वारा किया गया है तो जुर्माना ₹1 लाख तक हो सकता है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी - Cheating): किसी व्यक्ति के साथ छल करके संपत्ति या धन की चोरी करने पर 7 वर्ष तक का कठोर कारावास और जुर्माना।
- BNS 2023 की धारा 336 (जालसाजी - Forgery): इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या पहचान चिन्हों की कूट रचना करने पर कठोर दंडात्मक सजा।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act 2000) की धारा 66C व 66D: किसी व्यक्ति की पहचान चोरी (Identity Theft) और कंप्यूटर साधन द्वारा छल करने पर 3 वर्ष का कारावास।
सामान्य बैंकिंग बनाम AePS बायोमेट्रिक निकासी सुरक्षा सारणी (5-कॉलम)
नीचे दी गई 5-कॉलम तुलनात्मक सारणी में पारंपरिक बैंकिंग और AePS बायोमेट्रिक लेनदेन के सुरक्षा मानकों, जोखिमों और कानूनी बचाव का संपूर्ण विश्लेषण दिया गया है:
| बैंकिंग माध्यम | प्रमाणीकरण कारक (Auth Factors) | प्रमुख सुरक्षा जोखिम | धोखाधड़ी की संभावना | सर्वश्रेष्ठ बचाव उपाय |
|---|---|---|---|---|
| एटीएम कार्ड (ATM Card) | कार्ड चिप + 4-अंकीय पिन | एटीएम कार्ड क्लोनिंग व हिडन कैमरा | मध्यम (पिन जरूरी) | पिन छुपाकर दर्ज करें; कार्ड लॉक रखें |
| नेटबैंकिंग / यूपीआई (UPI) | पासवर्ड + एसएमएस ओटीपी / यूपीआई पिन | फिशिंग लिंक व स्क्रीन शेयरिंग ऐप | मध्यम (ओटीपी/पिन शेयरिंग पर) | ओटीपी कभी किसी को न बताएं |
| खुला AePS (Unprotected) | केवल आधार नंबर + फिंगरप्रिंट | रजिस्ट्री सेल डीड से सिलिकॉन फिंगरप्रिंट क्लोनिंग | अत्यधिक उच्च (बिना ओटीपी निकासी) | गंभीर जोखिम में बैंक खाता |
| बायोमेट्रिक लॉक्ड आधार | यूआईडीएआई सर्वर पर बायोमेट्रिक्स फ्रोजन | शून्य (सर्वर फिंगरप्रिंट अनुरोध रिजेक्ट करता है) | 0% (असंभव) | mAadhaar ऐप से बायोमेट्रिक लॉक रखें |
| L1 स्कैनर आधारित CSP (2026) | लाइवनेस डिटेक्शन (पल्स + रक्त प्रवाह) + ऑपरेटर 2FA | ऑपरेटर की मिलीभगत | न्यूनतम (सिलिकॉन रिजेक्ट) | केवल अधिकृत बैंक शाखा/सीएसपी पर जाएं |
बैंक में जमा करने हेतु अनधिकृत AePS ट्रांजैक्शन रिफंड आवेदन प्रारूप
यदि आपके खाते से AePS द्वारा फर्जी निकासी हुई है, तो अपने बैंक की शाखा में निम्नलिखित प्रारूप में आवेदन तुरंत प्रस्तुत करें:
सेवा में, शाखा प्रबंधक महोदय, [बैंक का नाम], [शाखा का नाम व शहर] विषय: आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) द्वारा अनधिकृत निकासी की शिकायत एवं RBI सर्कुलर 2017 के तहत शून्य देयता (Zero Liability) रिफंड बाबत। महोदय, सविनय निवेदन है कि प्रार्थी [आपका नाम], आपकी शाखा में बचत खाता संख्या [खाता संख्या] का खाताधारक है। 1. यह कि दिनांक [तारीख] को समय लगभग [समय] बजे प्रार्थी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर बैंक से एक एसएमएस प्राप्त हुआ कि प्रार्थी के उक्त खाते से AePS के माध्यम से ₹[रकम] की राशि काट ली गई है (ट्रांजैक्शन संदर्भ/RRN संख्या: [RRN Number])। 2. यह कि प्रार्थी ने उक्त तिथि व समय पर न तो किसी ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) या बैंक मित्र का दौरा किया, न ही किसी बायोमेट्रिक मशीन पर अपनी उंगली लगाई और न ही किसी व्यक्ति के साथ कोई ओटीपी अथवा पासवर्ड साझा किया। 3. यह कि प्रार्थी उस समय [अपने कार्यस्थल/घर का पता] पर उपस्थित था, जो कि लेन-देन वाले सीएसपी स्थान से कोसों दूर है। यह लेन-देन किसी अज्ञात साइबर अपराधी द्वारा प्रार्थी के फिंगरप्रिंट की सिलिकॉन क्लोनिंग करके अवैध रूप से किया गया है। 4. यह कि प्रार्थी ने घटना के तुरंत बाद राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई है, जिसका एक्नॉलेजमेंट नंबर [1930 Ack Number] है। साथ ही प्रार्थी ने अपने आधार बायोमेट्रिक्स को भी तत्काल लॉक कर दिया है। 5. यह कि भारतीय रिज़र्व बैंक के मास्टर सर्कुलर DBR.No.Leg.BC.78/09.07.005/2017-18 दिनांक 6 जुलाई 2017 की कंडिका 6 के अनुसार, ग्राहक द्वारा अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन की सूचना 3 कार्यदिवसों के भीतर दिए जाने पर ग्राहक की देयता शून्य (Zero Liability) होती है तथा बैंक 10 कार्यदिवसों में राशि का शैडो क्रेडिट प्रदान करने को बाध्य है। अतः श्रीमान से सादर प्रार्थना है कि उक्त विवादित लेन-देन का चार्जकबैक रेज कर एनपीसीआई एवं संबंधित अधिग्रहणकर्ता बैंक (Acquirer Bank) से जांच कराई जाए तथा कटी हुई राशि ₹[रकम] प्रार्थी के बचत खाते में अविलंब वापस क्रेडिट करने की कृपा करें। संलग्नक: 1. बैंक पासबुक/स्टेटमेंट की प्रति (विवादित लेन-देन हाइलाइटेड)। 2. 1930 साइबर कंप्लेंट रसीद की प्रति। 3. आधार कार्ड एवं पैन कार्ड की स्वप्रमाणित प्रति। भवदीय, हस्ताक्षर: ____________________ नाम: [आपका पूरा नाम] मोबाइल नंबर: [पंजीकृत मोबाइल नंबर] दिनांक: [आवेदन की तारीख]
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
Q1: बिना ओटीपी और बिना एटीएम कार्ड के आधार से पैसे कैसे निकल सकते हैं?
AePS (Aadhaar Enabled Payment System) को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें किसी ओटीपी या पिन की जरूरत नहीं होती; केवल बैंक का नाम, आधार नंबर और फिंगरप्रिंट की जरूरत होती है। जब साइबर ठग रजिस्ट्री दस्तावेजों से आपके फिंगरप्रिंट का सिलिकॉन क्लोन बना लेते हैं, तो वे बायोमेट्रिक मशीन पर क्लोन अंगूठा लगाकर आपके खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
Q2: क्या आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करने से मेरा बैंक खाता बंद हो जाएगा?
बिल्कुल नहीं। बायोमेट्रिक्स लॉक करने से केवल फिंगरप्रिंट और आईरिस ऑथेंटिकेशन बंद होता है। आपका बैंक खाता पूरी तरह सामान्य रहेगा। आप एटीएम कार्ड, चेकबुक, यूपीआई (Google Pay, PhonePe), नेटबैंकिंग और बैंक शाखा में जाकर सामान्य रूप से पैसे निकाल और जमा कर सकते हैं।
Q3: क्या मैं अपने बैंक खाते से AePS सुविधा को स्थायी रूप से बंद (Disable) करवा सकता हूँ?
हाँ। भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देशों के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा और कई अन्य बैंकों ने अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप या शाखा में जाकर "AePS Transaction Disable" करने का विकल्प दिया है। यदि आप कभी अंगूठे से पैसे नहीं निकालते, तो बैंक में जाकर AePS सुविधा को स्थायी रूप से निष्क्रिय करवा सकते हैं।
Q4: क्या रजिस्ट्री ऑफिस में सेल डीड पर अंगूठा लगाना बंद किया जा सकता है?
भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 के तहत संपत्ति पंजीकरण के समय निष्पादक का भौतिक अंगूठे का निशान लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसे बंद नहीं किया जा सकता, लेकिन रजिस्ट्री कराने के तुरंत बाद अपने mAadhaar ऐप से बायोमेट्रिक्स को लॉक कर देने से उस क्लोन फिंगरप्रिंट का कोई दुरुपयोग नहीं हो सकता।
Q5: यदि मुझे नया सिम कार्ड या राशन लेना हो तो लॉक बायोमेट्रिक्स कैसे काम करेगा?
जब भी आपको फिंगरप्रिंट की आवश्यकता हो, अपने फोन में mAadhaar ऐप खोलें और "Unlock Biometrics" पर क्लिक करें। आपका बायोमेट्रिक्स 10 मिनट के लिए अस्थायी रूप से अनलॉक हो जाएगा। अपना काम पूरा करें; 10 मिनट बाद सिस्टम अपने आप उसे वापस लॉक कर देगा।
Q6: AePS फ्रॉड होने पर क्या बैंक मेरा पूरा पैसा वापस लौटाएगा?
हाँ। यदि आपने अनधिकृत लेन-देन का एसएमएस मिलते ही 3 कार्यदिवसों (72 घंटे) के भीतर बैंक को लिखित रूप में सूचित कर दिया है, तो RBI के 2017 के नियमों के तहत ग्राहक की देयता शून्य होती है और बैंक को पूरा पैसा वापस लौटाना होता है।
Q7: क्या केवल आधार नंबर जानने से कोई मेरे बैंक खाते से पैसे निकाल सकता है?
नहीं। केवल 12 अंकों का आधार नंबर जानने से कोई भी व्यक्ति आपके खाते से पैसे नहीं निकाल सकता। पैसे निकालने के लिए लाइव बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट या आईरिस) का मैच होना अनिवार्य है। इसीलिए जब आप बायोमेट्रिक्स लॉक कर देते हैं, तो केवल आधार नंबर किसी काम का नहीं रहता।
Q8: क्या AePS फ्रॉड की शिकायत के लिए पुलिस थाने जाना जरूरी है?
शुरुआत में आपको थाने जाने की आवश्यकता नहीं है। आप सीधे हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। वहां से जनरेट हुई एक्नॉलेजमेंट कॉपी लेकर अपने बैंक में जमा कराएं। यदि बैंक आनाकानी करे, तब स्थानीय थाने की साइबर सेल में लिखित शिकायत दर्ज कराएं।
आधिकारिक सरकारी पोर्टल व क्लस्टर गाइड्स
- UIDAI MyAadhaar Portal (Biometric Lock Service)
- NPCI Official AePS Security Guidelines
- 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन: गोल्डन आवर बैंक फ्रीज व BNSS 503 कोर्ट रिफंड SOP
- डिजिटल अरेस्ट कानूनी सच व MHA एडवाइजरी बचाव SOP
- TAFCOP पोर्टल: आधार पर एक्टिव सिम चेक व फर्जी नंबर ब्लॉक SOP
- e-SIM स्वैप फ्रॉड सुरक्षा व DoT 24-घंटे SMS फ्रीज नियम गाइड
- CEIR पोर्टल खोया/चोरी मोबाइल ब्लॉक व IMEI ट्रैकिंग SOP