विषय सूची (Table of Contents)
- 1. PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना क्या है? योजना की रूपरेखा व 300 यूनिट फ्री बिजली का गणित
- 2. आधिकारिक सब्सिडी स्लैब्स 2026: 1kW, 2kW और 3kW सिस्टम की कुल लागत व बैंक सब्सिडी
- 3. आपके घर के लिए कितने किलोवाट का सोलर सही है? छत का क्षेत्रफल व बिजली बिल गणना
- 4. 7% सस्ता बैंक लोन: जन समर्थ पोर्टल से बिना गारंटी ₹2 लाख तक ऋण पाने की प्रक्रिया
- 5. pmsuryaghar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करने की 6-चरणीय सम्पूर्ण SOP
- 6. इम्पैनल्ड वेंडर का चयन व DCR सोलर पैनलों की जांच कैसे करें?
- 7. डिस्कॉम इंस्पेक्शन, नेट मीटरिंग व 30 दिन में सीधे बैंक खाते में DBT सब्सिडी
- 8. सिस्टम क्षमता, पैनल वाट, आवश्यक छत एरिया, कुल लागत व सब्सिडी तुलना सारणी (5-कॉलम)
- 9. ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (GHS) व RWA के लिए विशेष सब्सिडी नियम (₹18,000 प्रति kW)
- 10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
- 11. आधिकारिक सरकारी पोर्टल व क्लस्टर गाइड्स
PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना क्या है? योजना की रूपरेखा व 300 यूनिट फ्री बिजली का गणित
भारत के मध्यमवर्गीय और निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू बजट में हर महीने गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनर (AC), कूलर, फ्रिज और पंखों के कारण बिजली का बिल ₹3,000 से लेकर ₹8,000 तक पहुंच जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा फरवरी 2024 में ₹75,021 करोड़ के ऐतिहासिक बजट के साथ "पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना" (PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana) को मंजूरी दी गई।
इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश के 1 करोड़ आवासीय घरों की छतों पर ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना है। सरकार का गणित बिल्कुल सीधा और पारदर्शी है:
- एक सामान्य भारतीय परिवार में पंखे, टीवी, फ्रिज और लाइट चलाने पर प्रतिमाह औसतन 200 से 250 यूनिट बिजली खर्च होती है।
- यदि छत पर 2 से 3 किलोवाट (kW) का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगा दिया जाए, तो वह रोजाना औसतन 8 से 12 यूनिट (महीने में 250 से 360 यूनिट) स्वच्छ सौर बिजली उत्पन्न करता है।
- यह बिजली सीधे घर के उपकरणों को चलाती है और फालतू बिजली सरकारी ग्रिड में नेट मीटर के जरिए रिकॉर्ड हो जाती है।
- परिणामस्वरूप, उपभोक्ता का शुद्ध ग्रिड उपभोग शून्य हो जाता है और उसे हर महीने 300 यूनिट तक की बिजली शत-प्रतिशत मुफ्त मिलती है, जिससे सालभर में ₹25,000 से ₹40,000 की नकद बचत होती है।
आधिकारिक सब्सिडी स्लैब्स 2026: 1kW, 2kW और 3kW सिस्टम की कुल लागत व बैंक सब्सिडी
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने पुरानी जटिल प्रतिशत-आधारित सब्सिडी को समाप्त करके प्रत्येक किलोवाट के लिए एक फिक्स डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (Fixed DBT Subsidy) निर्धारित कर दी है, जिससे बिचौलियों की भूमिका शून्य हो गई है:
आधिकारिक केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA Subsidy Slabs):
- 1 किलोवाट (1 kW) सिस्टम: केंद्र सरकार की फिक्स सब्सिडी ₹33,000। (औसत लागत: ₹60,000 से ₹65,000; उपभोक्ता को अपनी जेब से मात्र ₹27,000 से ₹32,000 देने होते हैं)।
- 2 किलोवाट (2 kW) सिस्टम: केंद्र सरकार की फिक्स सब्सिडी ₹66,000। (औसत लागत: ₹1,20,000 से ₹1,30,000; उपभोक्ता को अपनी जेब से लगभग ₹54,000 से ₹64,000 वहन करने होते हैं)।
- 3 किलोवाट (3 kW) या उससे अधिक क्षमता: केंद्र सरकार की अधिकतम सब्सिडी ₹78,000। (औसत लागत: ₹1,75,000 से ₹1,90,000; उपभोक्ता को अपनी जेब से लगभग ₹97,000 से ₹1,12,000 देने होते हैं)।
- 3kW से ऊपर (उदा. 4kW, 5kW, 10kW): 3kW से अधिक क्षमता लगाने पर भी आवासीय उपभोक्ताओं के लिए अधिकतम केंद्रीय सब्सिडी ₹78,000 पर ही कैप रहती है, अतिरिक्त क्षमता का खर्च उपभोक्ता को स्वयं उठाना होता है।
इसके अतिरिक्त, कई राज्य सरकारें (जैसे उत्तर प्रदेश सरकार ₹30,000 तक, गुजरात सरकार ₹20,000 तक) अपने राज्य बजट से अतिरिक्त राज्य सब्सिडी (State Top-up Subsidy) भी प्रदान कर रही हैं, जिससे 3kW के सिस्टम पर कुल अनुदान ₹1 लाख से भी अधिक हो जाता है।
आपके घर के लिए कितने किलोवाट का सोलर सही है? छत का क्षेत्रफल व बिजली बिल गणना
घर में सोलर लगाने से पहले अपनी वास्तविक बिजली खपत और छत के उपलब्ध खाली क्षेत्रफल का आकलन करना अनिवार्य है:
- मासिक बिजली बिल के आधार पर क्षमता चयन:
- यदि बिल ₹1,000 से ₹1,800 प्रतिमाह है (100-150 यूनिट): आपके लिए 1 kW का सिस्टम पर्याप्त है। यह रोजाना 4 से 4.5 यूनिट बिजली बनाएगा।
- यदि बिल ₹2,000 से ₹3,500 प्रतिमाह है (200-300 यूनिट): आपके लिए 2 kW का सिस्टम सबसे आदर्श है। यह रोजाना 8 से 9 यूनिट बिजली बनाएगा और आपके पूरे बिल को शून्य कर देगा।
- यदि बिल ₹4,000 से ₹7,000 प्रतिमाह है (350-500 यूनिट - 1 या 2 एसी): आपके लिए 3 kW का सिस्टम आवश्यक है। यह रोजाना 12 से 14 यूनिट बिजली बनाएगा।
- छत के क्षेत्रफल की आवश्यकता (Shadow-Free Roof Area):
- प्रत्येक 1 किलोवाट सोलर सिस्टम के लिए लगभग 100 वर्ग फीट (लगभग 10 वर्ग मीटर) खुली, समतल और छाया-मुक्त (Shadow-Free) छत की आवश्यकता होती है।
- 2 kW के लिए 200 वर्ग फीट और 3 kW के लिए 300 वर्ग फीट जगह चाहिए। छत पर पानी की टंकी, सीढ़ी के कमरे या पड़ोस के ऊंचे मकान की छाया पैनलों पर नहीं पड़नी चाहिए।
7% सस्ता बैंक लोन: जन समर्थ पोर्टल से बिना गारंटी ₹2 लाख तक ऋण पाने की प्रक्रिया
यदि आपके पास सोलर लगाने के लिए ₹60,000 से ₹1 लाख की एकमुश्त नकद राशि नहीं है, तो केंद्र सरकार ने वित्त मंत्रालय के अधीन सरकारी बैंकों के साथ मिलकर एक अत्यंत सुगम कोलैटरल-फ्री लोन फ्रेमवर्क तैयार किया है:
- रियायती ब्याज दर (Concessional Interest Rate): भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 3kW तक के सोलर सिस्टम के लिए रेपो रेट + 0.5% (प्रभावी दर मात्र 7.00% प्रति वर्ष) पर ऋण उपलब्ध करा रहे हैं।
- बिना किसी गारंटी या गिरवी (Zero Collateral): आपको अपने मकान के कागजात या कोई सोना गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं है। छत पर लगने वाला सोलर उपकरण ही बैंक के लिए हाइपोथेकेशन के रूप में मान्य होता है।
- जन समर्थ पोर्टल (jansamarth.in) पर आवेदन: जब आप राष्ट्रीय सोलर पोर्टल पर आवेदन करते हैं, तो वहां सीधे "Apply for Loan" का विकल्प आता है। जन समर्थ पोर्टल के जरिए मात्र 10 मिनट में इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल जाता है।
- किस्त बनाम बिजली बचत का गणित: ₹1 लाख के लोन पर 7 साल (84 महीने) की मासिक ईएमआई लगभग ₹1,500 आती है, जबकि उसी महीने आपका बिजली बिल ₹2,500 से ₹3,500 बच जाता है। यानी आपकी जेब से अतिरिक्त एक रुपया भी नहीं लगता!
pmsuryaghar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करने की 6-चरणीय सम्पूर्ण SOP
पीएम सूर्य घर योजना में पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया 100% डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस है। आवेदन निम्नलिखित 6 चरणों में पूरा होता है:
- चरण 1: राष्ट्रीय पोर्टल पर उपभोक्ता पंजीकरण:
आधिकारिक पोर्टलpmsuryaghar.gov.inपर जाएं या मोबाइल में 'PM-Surya Ghar' ऐप डाउनलोड करें। "Apply for Rooftop Solar" पर क्लिक करें। अपना राज्य, बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) का नाम, बिजली बिल पर दर्ज उपभोक्ता खाता संख्या (CA / Consumer Number) और मोबाइल नंबर दर्ज करके ओटीपी से पंजीकरण पूरा करें। - चरण 2: रूफटॉप सोलर आवेदन फॉर्म भरना:
पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉग इन करें। अपनी छत का प्रकार (आरसीसी पक्की छत, टिन शेड आदि), आवश्यक सोलर क्षमता (1kW, 2kW या 3kW) और बैंक खाते का विवरण (जिसमें सब्सिडी चाहिए) भरें। बिजली बिल की नवीनतम प्रति अपलोड करके सबमिट करें। - चरण 3: डिस्कॉम तकनीकी व्यवहार्यता स्वीकृति (Feasibility Approval):
आपकी बिजली कंपनी (DISCOM) ऑनलाइन आवेदन की जांच करती है कि आपके क्षेत्र के ट्रांसफॉर्मर पर लोड उपलब्ध है या नहीं। 7 से 15 दिनों के भीतर पोर्टल पर स्वतः "Technical Feasibility Approved" का स्टेटस आ जाता है। - चरण 4: अधिकृत वेंडर का चयन व अनुबंध:
स्वीकृति मिलते ही आपके जिले के सभी एमएनआरई-पंजीकृत वेंडरों की सूची स्क्रीन पर आ जाएगी। अपनी पसंद का वेंडर चुनें और उसके साथ ऑनलाइन कोटेशन व इंस्टॉलेशन एग्रीमेंट निष्पादित करें। - चरण 5: छत पर इंस्टॉलेशन व नेट-मीटरिंग आवेदन:
वेंडर आपके घर आकर डीसीआर-अनुमोदित सोलर पैनल, इन्वर्टर और अर्थिंग स्थापित करता है। कार्य पूरा होने पर वेंडर 'वर्क कंप्लीशन रिपोर्ट' और सिस्टम की तस्वीर पोर्टल पर अपलोड करता है। इसके बाद डिस्कॉम आपके घर आकर बाई-डायरेक्शनल नेट मीटर लगाती है। - चरण 6: कमीशनिंग सर्टिफिकेट व 30 दिन में DBT सब्सिडी:
नेट मीटर लगते ही डिस्कॉम पोर्टल पर "Commissioning Certificate" जारी करती है। इसके बाद पोर्टल पर जाकर अपने बैंक खाते का कैंसिल चेक या पासबुक अपलोड करें। सर्टिफिकेट जारी होने के 30 कार्यदिवसों के भीतर ₹78,000 तक की सब्सिडी सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट हो जाती है।
इम्पैनल्ड वेंडर का चयन व DCR सोलर पैनलों की जांच कैसे करें?
बाजार में कई अनधिकृत ठेकेदार सस्ते गैर-ब्रांडेड या चीनी पैनल लगाकर उपभोक्ताओं को धोखा देने की कोशिश करते हैं। सब्सिडी पाने के लिए निम्नलिखित तीन सावधानियां अनिवार्य हैं:
- केवल पोर्टल पर सूचीबद्ध वेंडर से ही काम कराएं: राष्ट्रीय पोर्टल पर प्रत्येक जिले के लिए अधिकृत वेंडर्स की रेटिंग, पूरे किए गए प्रोजेक्ट्स और फोन नंबर दिए गए हैं। कभी भी किसी असत्यापित स्थानीय इलेक्ट्रीशियन से काम न कराएं।
- DCR (Domestic Content Requirement) प्रमाणपत्र: सब्सिडी केवल उन्हीं पैनलों पर मिलती है जिनके सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल दोनों भारत में बने हों। वेंडर से अनिवार्य रूप से MNRE DCR Undertaking Certificate और निर्माता कंपनी का टेस्ट सर्टिफिकेट मांगें।
- RFID चिप स्कैनिंग: प्रत्येक असली सोलर पैनल के अंदर कांच के नीचे एक छोटी RFID चिप सीलबंद होती है। इसे स्कैनर से स्कैन करने पर पैनल का सीरियल नंबर, निर्माण की तारीख और वाट क्षमता प्रदर्शित होती है। यदि चिप गायब है, तो वह पैनल अवैध हो सकता है।
डिस्कॉम इंस्पेक्शन, नेट मीटरिंग व 30 दिन में सीधे बैंक खाते में DBT सब्सिडी
रूफटॉप सोलर लगने के बाद बिजली कंपनी के अधिकारी साइट इंस्पेक्शन करते हैं:
- अर्थिंग और लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester): इंस्पेक्शन के दौरान जेई देखता है कि सोलर स्ट्रक्चर के लिए 2 अलग-अलग कॉपर/जीआई अर्थिंग पिट बने हैं या नहीं, ताकि आकाशीय बिजली गिरने पर घर के टीवी-फ्रिज न फुंकें।
- एंटी-आइसलैंडिंग टेस्ट (Anti-Islanding Protection): इनवर्टर को चालू रखकर मेन ग्रिड की एमसीबी गिराई जाती है। इनवर्टर को 2 सेकंड के भीतर ग्रिड में करंट भेजना बंद कर देना चाहिए ताकि बाहर खंभे पर काम कर रहे लाइनमैन को करंट न लगे।
- डीबीटी सब्सिडी का प्रत्यक्ष अंतरण: सभी टेस्ट पास होने पर डिस्कॉम की हरी झंडी मिलते ही केंद्र सरकार का PFMS (Public Financial Management System) सीधे आपके खाते में ₹33,000, ₹66,000 या ₹78,000 की राशि एनईएफटी कर देता है। आपके मोबाइल पर बैंक क्रेडिट का एसएमएस आ जाता है।
सिस्टम क्षमता, पैनल वाट, आवश्यक छत एरिया, कुल लागत व सब्सिडी तुलना सारणी (5-कॉलम)
नीचे दी गई 5-कॉलम तुलनात्मक सारणी में विभिन्न घरेलू सोलर सिस्टम क्षमताओं, दैनिक उत्पादन, छत की आवश्यकता, कुल बाजार लागत और सरकारी सब्सिडी का संपूर्ण विवरण दिया गया है:
| सिस्टम क्षमता (kW) | दैनिक व मासिक बिजली उत्पादन | आवश्यक छाया-मुक्त छत | कुल अनुमानित लागत | केंद्र सरकार DBT सब्सिडी (CFA) |
|---|---|---|---|---|
| 1 kW रूफटॉप सोलर | 4 से 4.5 यूनिट/दिन (120-135 यूनिट/माह) | 100 वर्ग फीट | ₹60,000 से ₹65,000 | ₹33,000 (उपभोक्ता देय: ~₹30,000) |
| 2 kW रूफटॉप सोलर | 8 से 9.5 यूनिट/दिन (240-280 यूनिट/माह) | 200 वर्ग फीट | ₹1,25,000 से ₹1,35,000 | ₹66,000 (उपभोक्ता देय: ~₹60,000) |
| 3 kW रूफटॉप सोलर | 12 से 14.5 यूनिट/दिन (360-430 यूनिट/माह) | 300 वर्ग फीट | ₹1,80,000 से ₹1,95,000 | ₹78,000 (उपभोक्ता देय: ~₹1,05,000) |
| 5 kW रूफटॉप सोलर | 20 से 24 यूनिट/दिन (600-720 यूनिट/माह) | 500 वर्ग फीट | ₹2,90,000 से ₹3,20,000 | ₹78,000 (अधिकतम सब्सिडी कैप) |
| 10 kW रूफटॉप सोलर | 40 से 48 यूनिट/दिन (1200-1400 यूनिट/माह) | 1000 वर्ग फीट | ₹5,50,000 से ₹6,00,000 | ₹78,000 (आवासीय कैप) |
ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (GHS) व RWA के लिए विशेष सब्सिडी नियम (₹18,000 प्रति kW)
मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों (GHS/RWA) के लिए जहां व्यक्तिगत छतों के बजाय साझा छतें होती हैं, योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं:
- कॉमन फैसिलिटी के लिए सोलर (Common Facilities): लिफ्ट, पानी की मोटर, सीढ़ियों व पार्क की लाइटों और क्लब हाउस की बिजली खपत के लिए सोसाइटी की छत पर सोलर प्लांट लगाया जा सकता है।
- सब्सिडी दर: ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के लिए ₹18,000 प्रति किलोवाट की सीधी केंद्रीय सब्सिडी दी जाती है।
- अधिकतम सीमा (Capacity Cap): प्रत्येक रेजिडेंट हेतु अधिकतम 3kW की सीमा के अधीन, प्रति सोसाइटी अधिकतम 500 किलोवाट (500 kW) तक की क्षमता पर कुल ₹90 लाख तक की भारी सरकारी सब्सिडी स्वीकृत की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
Q1: क्या सब्सिडी का पैसा वेंडर को मिलता है या सीधे मेरे बैंक खाते में आता है?
PM सूर्य घर योजना में सब्सिडी का पैसा किसी वेंडर या बिचौलिए को नहीं जाता। पूरा सिस्टम चालू होने और डिस्कॉम द्वारा कमीशनिंग सर्टिफिकेट जारी होने के 30 दिनों के भीतर पूरी सब्सिडी राशि सीधे उपभोक्ता के आधार-लिंक बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) द्वारा जमा होती है।
Q2: क्या किरायेदार भी अपने मकान मालिक की छत पर योजना का लाभ ले सकते हैं?
आवेदन बिजली बिल के उपभोक्ता नंबर (Consumer Account) के आधार पर होता है। यदि बिजली का मीटर मकान मालिक के नाम पर है, तो आवेदन मकान मालिक के नाम से ही होगा और सब्सिडी भी उनके खाते में आएगी। किरायेदार मकान मालिक की लिखित सहमति से आपसी समझौते पर इसका लाभ ले सकते हैं।
Q3: क्या बादल छाए रहने या बारिश के दिनों में भी सोलर बिजली बनेगी?
हाँ, आधुनिक मोनो-पर्क (Mono-PERC) और टॉपकॉन (TOPCon) सोलर पैनल्स डिफ्यूज्ड सनलाइट (हल्की रोशनी) में भी काम करते हैं। हालांकि घने बादलों या बारिश में उत्पादन सामान्य दिनों की तुलना में 40% से 60% घट जाता है। ग्रिड कनेक्टेड होने के कारण बाकी आवश्यक बिजली ग्रिड से स्वतः मिलती रहती है।
Q4: क्या ग्रिड पावर कट होने पर मेरे घर की लाइट जलेगी?
सब्सिडी वाले मानक 'ऑन-ग्रिड' सिस्टम में बैटरी नहीं होती और सुरक्षा कारणों (एंटी-आइसलैंडिंग) से ग्रिड कटने पर यह बंद हो जाता है। यदि आप पावर कट में भी बैकअप चाहते हैं, तो आप 'हाइब्रिड सोलर इनवर्टर' और लिथियम बैटरी बैंक लगा सकते हैं। हालांकि सरकारी सब्सिडी केवल सोलर पैनल और ग्रिड कंपोनेंट पर ही मिलती है, बैटरी का खर्च स्वयं उठाना होता है।
Q5: सोलर पैनलों की वारंटी कितने साल की होती है?
MNRE नियमों के तहत सभी टियर-1 सोलर पैनल्स पर 25 वर्ष की लीनियर परफॉर्मेंस वारंटी और इनवर्टर पर 5 से 8 वर्ष की रिप्लेसमेंट वारंटी मिलती है। इसके अतिरिक्त अधिकृत वेंडर को 5 साल तक पूरे सिस्टम की मुफ्त सर्विस और मेंटेनेंस (Comprehensive Maintenance) देना अनिवार्य होता है।
Q6: क्या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों या दुकानों को भी यह सब्सिडी मिलती है?
नहीं। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की डायरेक्ट सब्सिडी केवल घरेलू/आवासीय (Domestic Tariff Category) बिजली कनेक्शनों के लिए ही मान्य है। व्यावसायिक दुकानों, फैक्ट्रियों, स्कूलों या अस्पतालों को नेट-मीटरिंग की अनुमति मिलती है और वे इनकम टैक्स में 40% त्वरित मूल्यह्रास (Accelerated Depreciation) का लाभ ले सकते हैं, लेकिन नकद सब्सिडी नहीं मिलती।
Q7: क्या सोलर पैनल लगाने से छत टपकने या छत को नुकसान होने का खतरा होता है?
बिल्कुल नहीं। पेशेवर वेंडर छत पर ड्रिलिंग करते समय वाटरप्रूफिंग केमिकल (सिलिकॉन सीलेंट / एपॉक्सी ग्राउटिंग) का उपयोग करते हैं। कई आधुनिक स्ट्रक्चर बिना किसी ड्रिलिंग के कंक्रीट ब्लॉक (Ballast Mounts) के वजन पर टिके होते हैं, जिससे छत को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। बल्कि पैनलों की छाया से नीचे का कमरा गर्मियों में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस ठंडा रहता है।
Q8: यदि डिस्कॉम 30 दिन में नेट मीटर न लगाए तो कहाँ शिकायत करें?
विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम 2020 के तहत डिस्कॉम को 15 दिनों के भीतर नेट मीटर लगाना अनिवार्य है। यदि वे देरी करते हैं, तो pmsuryaghar.gov.in के 'Grievance' पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और डिस्कॉम के कंज्यूमर फोरम (CGRF) में हर्जाना क्लेम दाखिल करें।
आधिकारिक सरकारी पोर्टल व क्लस्टर गाइड्स
- PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana Official National Portal
- Jan Samarth National Portal for Collateral-Free Solar Loan
- PM-KUSUM कंपोनेंट-B: 3HP, 5HP व 7.5HP सोलर कृषि पंप पर 90% सब्सिडी गाइड
- PM-KUSUM कंपोनेंट-C: ग्रिड कनेक्टेड पंप सोलराइजेशन व बिजली बिक्री से कमाई
- PM-KUSUM कंपोनेंट-A: बंजर जमीन पर सोलर प्लांट, ₹50,000 प्रति एकड़ लीज रेंट
- सोलर नेट-मीटरिंग vs ग्रॉस-मीटरिंग: डिस्कॉम बाई-डायरेक्शनल मीटर स्थापना SOP
- DCR vs Non-DCR सोलर पैनल: ALMM लिस्ट व सब्सिडी पात्रता नियम
- फर्जी कुसुम सोलर वेबसाइट एडवाइजरी: MNRE चेतावनी व साइबर फ्रॉड बचाव
- सोलर पंप मेंटेनेंस, VFD एरर कोड्स व 5-साल फ्री वारंटी क्लेम SOP