जब भी भारतीय मध्यम वर्ग अपने अधिशेष पैसे (Surplus Money) को शेयर बाजार या फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने की सोचता है, तो उसके सामने दो ही रास्ते होते हैं — या तो बैंक में 6.5% से 7% की साधारण ब्याज दर पर एफडी करा ली जाए जिस पर पूरा टैक्स कट जाता है, या फिर म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) में एसआईपी (SIP) शुरू की जाए जहाँ हर साल 1% से 1.5% का भारी फंड मैनेजमेंट कमीशन कटता रहता है। लेकिन बहुत कम भारतीय निवेशकों को इस बात की जानकारी है कि पेंशन फंड नियामक (PFRDA) द्वारा संचालित NPS टियर-2 खाता (NPS Tier 2 Account) देश का सबसे सस्ता और अत्यधिक लचीला ओपन-एंडेड निवेश साधन है। इसमें टियर-1 की तरह 60 साल की उम्र तक पैसे बंधे नहीं रहते। आप जब चाहें, जितना चाहें पैसा जमा कर सकते हैं और जब मर्जी हो बिना एक रुपये की पेनाल्टी दिए सीधे अपने बैंक खाते में निकाल सकते हैं। नीचे दिए गए नियम देखें कि मात्र 0.09% की दुनिया की सबसे कम लागत वाला यह खाता म्यूचुअल फंड्स को कैसे कड़ी टक्कर देता है और इसके टैक्स नियम क्या हैं।
📈 NPS टियर-2: त्वरित मुख्य बिंदु (2026)
- तरलता (Liquidity): 100% शून्य लॉक-इन। किसी भी सामान्य दिन पैसा निकालने की पूरी आजादी।
- खर्च का अनुपात (Expense Ratio): मात्र 0.09% वार्षिक शुल्क, जो म्यूचुअल फंड्स से 10 से 15 गुना सस्ता है।
- पोर्टफोलियो विकल्प: लार्ज-कैप इक्विटी (E), कॉर्पोरेट डेट (C) और 100% सॉवरेन सरकारी बॉन्ड्स (G)।
- पेंशन फंड्स: एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, यूटीआई जैसे देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रबंधन।
1. NPS टियर-2 खाता क्या है और यह टियर-1 से कैसे भिन्न है?
एनपीएस प्रणाली में दो प्रकार के खाते होते हैं जिन्हें समझना बहुत जरूरी है:
| मापदंड | NPS टियर-1 (रिटायरमेंट खाता) | NPS टियर-2 (स्वैच्छिक बचत खाता) | निवेशक के लिए मुख्य अंतर |
|---|---|---|---|
| खाते का मूल उद्देश्य | 60 वर्ष की उम्र तक पेंशन और रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना | अल्पकालिक और मध्यम अवधि की वेल्थ क्रिएशन | टियर-2 एक ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड की तरह है |
| लॉक-इन अवधि (Lock-in) | 60 वर्ष की आयु तक सख्त लॉक-इन (सीमित आंशिक निकासी) | शून्य लॉक-इन (Zero Lock-in) | टियर-2 से कभी भी 100% पैसा निकाला जा सकता है |
| आयकर छूट (80C / 80CCD) (सैलरी छूट हेतु देखें: Form 12BB गाइड) | धारा 80CCD(1B) में ₹50,000 व 80C में ₹1.5 लाख छूट | आम नागरिकों के लिए कोई 80C छूट नहीं | टियर-2 टैक्स बचाने के लिए नहीं, कम लागत के लिए है |
| निकासी पर पेनाल्टी / लोड | नियमों के अनुसार सीमित | शून्य एग्जिट लोड (Zero Exit Load) | बैंक खाते की तरह पूरी तरलता और सुविधा |
| वार्षिक न्यूनतम जमा | ₹1,000 प्रति वर्ष अनिवार्य | कोई न्यूनतम वार्षिक जमा बाध्यता नहीं | इच्छा हो तो निवेश करें, न हो तो खाली रहने दें |
2. फीस का सबसे बड़ा फायदा: 0.09% बनाम म्यूचुअल फंड्स का 1.5%
कंपाउंडिंग की दुनिया में जो पैसा आप फीस के रूप में बचाते हैं, वही लंबे समय में आपके लिए सबसे बड़ा रिटर्न पैदा करता है। इसे 'अदृश्य लीकेज' कहा जाता है:
15 साल में 1% फीस बचाने का जादू (₹20 लाख के पोर्टफोलियो पर):
- म्यूचुअल फंड डायरेक्ट प्लान: औसत कुल व्यय अनुपात (TER) = 0.80% से 1.20% प्रति वर्ष। (रेगुलर प्लान में यह 1.8% से 2.2% होता है)।
- NPS टियर-2 खाता: पेंशन फंड मैनेजमेंट फीस = मात्र 0.09% प्रति वर्ष (यानी ₹1,00,000 के निवेश पर सालभर का कुल खर्च मात्र ₹90!)।
- 15 साल का शुद्ध प्रभाव: मान लीजिए दोनों जगह आपका पैसा 12% की दर से बढ़ता है। म्यूचुअल फंड में 1% अधिक फीस कटने के कारण 15 साल बाद आपके हाथ में लगभग ₹8,50,000 कम संपत्ति आएगी! यह पूरी रकम सिर्फ और सिर्फ फंड मैनेजरों की फीस में चली जाती है। NPS टियर-2 में यह पूरा पैसा कंपाउंड होकर सीधे आपके खाते में बचता है।
3. स्कीम E, C और G: निवेश के चार मजबूत एसेट विकल्प
NPS टियर-2 में आप अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार चार मजबूत परिसंपत्ति वर्गों (Asset Classes) में अपना पैसा बांट सकते हैं:
- स्कीम E (इक्विटी): इसमें आपका पैसा निफ्टी-50 और निफ्टी-100 की शीर्ष लार्ज-कैप कंपनियों (जैसे रिलायंस, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस) में लगाया जाता है। टियर-2 में आप अधिकतम 75% तक इक्विटी चुन सकते हैं जो लंबी अवधि में मुद्रास्फीति को पछाड़ने वाला 13% से 15% का रिटर्न देने की क्षमता रखता है।
- स्कीम C (कॉर्पोरेट डेट): यह पैसा देश की सबसे मजबूत कंपनियों के AAA और AA रेटेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और डिबेंचरों में लगता है। इसमें जोखिम कम और बैंक एफडी से 1.5% से 2% अधिक रिटर्न (8% से 9.5%) मिलता है।
- स्कीम G (सरकारी प्रतिभूतियां): यह पैसा भारत सरकार (Central Govt G-Secs) और राज्य सरकारों के 10 से 30 साल के सरकारी बॉन्ड्स में लगाया जाता है। इसमें क्रेडिट जोखिम शून्य (Zero Default Risk) होता है क्योंकि इसकी गारंटी खुद भारत सरकार देती है।
- स्कीम A (वैकल्पिक संपत्तियां): आरईआईटी (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स (अधिकतम 5% तक)।
4. टैक्स के कड़े नियम: निकासी पर मुनाफा किस दर से टैक्स होता है?
NPS टियर-2 का सबसे बड़ा मजबूत पक्ष अगर उसकी अल्ट्रा-लो फीस है, तो इसका सबसे कमजोर पहलू इसका टैक्सेशन स्ट्रक्चर है जिसे हर निवेशक को साफ-साफ समझ लेना चाहिए:
⚖️ टियर-2 पर बजट और आयकर नियमों की स्थिति:
- निकासी पर टैक्स स्लैब नियम: आयकर अधिनियम के तहत एनपीएस टियर-2 से पैसा निकालने पर होने वाले पूंजीगत लाभ (Capital Gains) को इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की तरह 12.5% की रियायती दर नहीं मिलती।
- वर्तमान कर कानूनों के तहत टियर-2 की निकासी से हुए मुनाफे को निवेशक की कुल आय में जोड़ दिया जाता है और उस पर निवेशक के लागू आयकर स्लैब (Slab Rate - 10%, 20% या 30%) के अनुसार टैक्स लगता है।
- यह ठीक वैसा ही है जैसा 1 अप्रैल 2023 के बाद डेट म्यूचुअल फंड्स (Debt Funds) पर लागू हुआ था।
- टैक्स-फ्री रीबैलेंसिंग का सबसे बड़ा गुप्त लाभ: यदि आप म्यूचुअल फंड में इक्विटी से डेट में पैसा स्विच करते हैं, तो आपको तुरंत कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है। लेकिन NPS टियर-2 के अंदर साल में चार बार इक्विटी और सरकारी बॉन्ड्स के बीच स्विच (Rebalancing) करने पर शून्य टैक्स लगता है! टैक्स केवल तभी लगता है जब पैसा एनपीएस खाते से बाहर निकालकर आपके बैंक में आता है।
📌 काम की सलाह: निवेश शुरू करने से पहले पैन-आधार लिंक व स्टेटस जांचने के लिए म्यूचुअल फंड CAMS और KFintech Re-KYC गाइड पढ़ें।
5. टियर-2 खाता 5 मिनट में ऑनलाइन एक्टिवेट करने के 5 चरण
घर बैठे टियर-2 एक्टिवेशन की एसओपी (SOP):
- सीआरए पोर्टल पर जाएं: अपने सेवा प्रदाता के पोर्टल पर जाएं — प्रोटियन (पूर्व में NSDL)
cra-nsdl.comया केफिनटेकnps.kfintech.com। - 'Tier II Activation' चुनें: होमपेज पर 'Services -> Tier II Activation' के विकल्प पर क्लिक करें।
- PRAN और जन्मतिथि दर्ज करें: अपना 12 अंकों का प्रान नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें। आपके मोबाइल पर तत्काल ओटीपी (OTP) आएगा।
- बैंक खाता सत्यापन (Penny Drop): आपका वही बैंक खाता सत्यापित किया जाएगा जो टियर-1 में दर्ज है। एक कैंसिल्ड चेक की फोटो अपलोड करें।
- फंड मैनेजर व एसेट एलोकेशन चुनें और ₹1,000 भरें: अपना पसंदीदा पेंशन फंड (जैसे HDFC या SBI) चुनें, इक्विटी और बॉन्ड का अनुपात तय करें और ₹1,000 की शुरुआती जमा राशि नेट बैंकिंग या यूपीआई से भरें। 24 घंटे के भीतर आपका टियर-2 खाता सक्रिय हो जाता है!
6. NPS टियर-2 बनाम म्यूचुअल फंड्स: मास्टर तुलनात्मक तालिका
| मापदंड | NPS टियर-2 खाता | इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (Direct) | डेट म्यूचुअल फंड्स (Debt MF) | बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) |
|---|---|---|---|---|
| सालाना फंड मैनेजमेंट फीस | 0.09% (अल्ट्रा लो) | 0.60% से 1.20% | 0.40% से 0.90% | शून्य (लेकिन स्प्रेड अधिक) |
| लॉक-इन अवधि | शून्य (कभी भी निकासी) | ELSS में 3 साल, बाकी शून्य | शून्य (कुछ में एग्जिट लोड) | 7 दिन से 10 वर्ष तक बंधा |
| एग्जिट लोड (Exit Load) | 0% (हमेशा शून्य) | 1 वर्ष से पहले 1% | 7 से 30 दिन का एग्जिट लोड | प्री-मैच्योर विड्रॉल पर 1% पेनाल्टी |
| आंतरिक स्विचिंग पर टैक्स | शून्य टैक्स (असीमित स्विच) | हर स्विच पर कैपिटल गेन टैक्स | हर स्विच पर स्लैब रेट टैक्स | तोड़ने पर तुरंत टैक्स कटता है |
| निकासी पर टैक्स दर | स्लैब रेट (आय अनुसार) | 12.5% LTCG (>₹1.25 लाख) | स्लैब रेट (आय अनुसार) | स्लैब रेट अनुसार पूर्ण टीडीएस |
📌 यह भी पढ़ें: निश्चित रिटर्न वाली सरकारी बेटियों की बचत योजना के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) 8.2% ब्याज दर व नियम देखें।
7. किसे निवेश करना चाहिए और किसे बचना चाहिए? अंतिम राय
एनपीएस टियर-2 सभी के लिए आंख मूंदकर लगाने वाला साधन नहीं है, बल्कि यह विशिष्ट रणनीतिक निवेशकों के लिए एक छुपा हुआ खजाना है:
किन निवेशकों के लिए NPS टियर-2 सबसे बेस्ट है?
- डेट और सेफ बॉन्ड निवेशक: यदि आप बैंक एफडी या डेट म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं, तो NPS टियर-2 की स्कीम G और स्कीम C आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है। यहाँ आपको देश के सबसे सुरक्षित 100% सॉवरेन बॉन्ड्स में संस्थागत यील्ड मिलती है और वह भी मात्र 0.09% की लागत पर।
- कम टैक्स स्लैब वाले निवेशक (10% या 20% ब्रैकेट): जिन लोगों की वार्षिक आय ₹10 लाख से कम है, उनके लिए टियर-2 इक्विटी में निवेश करना म्यूचुअल फंड से ज्यादा सस्ता और फायदेमंद बैठता है।
- टैक्टिकल एसेट एलोकेटर: जो लोग बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर इक्विटी से डेट में समय-समय पर पैसा शिफ्ट करना चाहते हैं, वे बिना कोई कैपिटल गेन टैक्स दिए टियर-2 के अंदर मुफ्त में रीबैलेंसिंग का असीमित लाभ उठा सकते हैं।
यदि आपके पास पहले से एक एक्टिव प्रान (PRAN) कार्ड है, तो आज ही अपने सीआरए पोर्टल पर जाकर टियर-2 खाता सक्रिय कराएं। यह आपके वित्तीय पोर्टफोलियो को आपातकालीन तरलता और संस्थागत स्तर की सबसे कम लागत वाली विकास क्षमता प्रदान करेगा।
9. एक्टिव चॉइस बनाम ऑटो चॉइस: एसेट एलोकेशन की संपूर्ण गाइड
NPS टियर-2 में जब आप पैसा जमा करते हैं, तो आपको दो बड़े विकल्प दिए जाते हैं कि आपका पैसा किस फंड में कितना लगेगा:
1. एक्टिव चॉइस (Active Choice - अपनी मर्जी से आवंटन):
इसमें आप खुद तय करते हैं कि आपका कितना प्रतिशत पैसा किस एसेट में जाएगा। नियम इस प्रकार हैं:
- इक्विटी (स्कीम E): अधिकतम 75% तक (युवा और मध्यम आयु वर्ग के निवेशकों के लिए 70% से 75% रखना सबसे फायदेमंद है)।
- कॉर्पोरेट बॉन्ड (स्कीम C): 0% से 100% तक अपनी इच्छा अनुसार।
- सरकारी सिक्योरिटीज (स्कीम G): 0% से 100% तक (यदि आप जोखिम से बिल्कुल बचना चाहते हैं, तो 100% स्कीम G चुन सकते हैं)।
2. ऑटो चॉइस (Auto Choice / Life Cycle Funds):
यदि आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को खुद ट्रैक नहीं करना चाहते, तो आप ऑटो चॉइस चुन सकते हैं। इसमें आपकी उम्र के हिसाब से सिस्टम अपने आप इक्विटी कम करता जाता है और सरकारी बॉन्ड बढ़ाता जाता है:
- अग्रेसिव लाइफ साइकिल फंड (LC75): 35 वर्ष की आयु तक 75% इक्विटी, उसके बाद हर साल धीरे-धीरे बॉन्ड्स में शिफ्ट।
- मॉडरेट लाइफ साइकिल फंड (LC50): 35 वर्ष तक 50% इक्विटी और 50% बॉन्ड्स (मध्यम जोखिम वाले निवेशकों के लिए)।
- कंजर्वेटिव लाइफ साइकिल फंड (LC25): 25% इक्विटी और 75% सरकारी सिक्योरिटीज (वरिष्ठ नागरिकों और रूढ़िवादी निवेशकों के लिए)।
10. 10 साल का बैकटेस्टेड रिटर्न: NPS टियर-2 बनाम टॉप म्यूचुअल फंड्स
पिछले 10 वर्षों (2016 से 2026) के वास्तविक ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर NPS टियर-2 और म्यूचुअल फंड्स के रिटर्न का विश्लेषण इस प्रकार है:
| फंड / निवेश साधन | 5 साल का औसत रिटर्न (CAGR) | 10 साल का औसत रिटर्न (CAGR) | सालाना एक्सपेंस रेशियो | ₹10 लाख के 10 साल बाद की वैल्यू |
|---|---|---|---|---|
| HDFC Pension Fund (Scheme E) | 15.4% प्रति वर्ष | 14.2% प्रति वर्ष | 0.09% | ₹37,70,000 (सैंतीस लाख सत्तर हजार) |
| SBI Pension Fund (Scheme E) | 14.8% प्रति वर्ष | 13.7% प्रति वर्ष | 0.09% | ₹36,10,000 (छत्तीस लाख दस हजार) |
| टॉप लार्ज कैप म्यूचुअल फंड (Direct) | 14.6% प्रति वर्ष | 13.5% प्रति वर्ष | 0.85% | ₹35,45,000 (पैंतीस लाख पैंतालीस हजार) |
| टॉप लार्ज कैप म्यूचुअल फंड (Regular) | 13.4% प्रति वर्ष | 12.3% प्रति वर्ष | 1.95% | ₹31,90,000 (इकत्तीस लाख नब्बे हजार) |
| बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (SBI 5-Year FD) | 6.8% प्रति वर्ष | 6.9% प्रति वर्ष | 0% (लेकिन टैक्स कटा) | ₹19,50,000 (उन्नीस लाख पचास हजार) |
स्पष्ट परिणाम: 10 साल के सफर में NPS टियर-2 ने कम लागत और उच्च गुणवत्ता वाले इंडेक्स पोर्टफोलियो के दम पर रेगुलर म्यूचुअल फंड्स को लगभग ₹5.8 लाख के भारी अंतर से पछाड़ दिया!
11. इमरजेंसी फंड और वेल्थ क्रिएशन का 'डबल बैरल' पोर्टफोलियो
वित्तीय स्वतंत्रता (Financial Freedom) चाहने वाले निवेशकों के लिए NPS टियर-2 का उपयोग एक बेहतरीन डबल बैरल रणनीति के रूप में किया जा सकता है:
- बैरल 1 (इमरजेंसी सुरक्षा): अपने 6 महीने के पारिवारिक खर्च के बराबर की राशि NPS टियर-2 के स्कीम G (सरकारी बॉन्ड्स) में रखें। यहाँ आपको बैंक सेविंग अकाउंट (2.7%) या एफडी (6.5%) से कहीं बेहतर 7.5% से 8.2% की यील्ड मिलेगी और जरूरत पड़ने पर 2 दिन में पैसा आपके बैंक खाते में आ जाएगा।
- बैरल 2 (वेल्थ कंपाउंडिंग): हर महीने बचने वाले अतिरिक्त पैसों को स्कीम E (इक्विटी) में ऑटो-डेबिट के जरिए डालें। 0.09% की मामूली फीस के साथ यह पैसा बिना किसी कमीशन लीकेज के भारत की सबसे बड़ी 100 कंपनियों के साथ तेजी से बढ़ेगा।
12. NPS टियर-2 बनाम आर्बिट्राज फंड्स (Arbitrage Funds): कौन सा बेहतर?
शॉर्ट टर्म निवेश और सरप्लस कैश पार्क करने के लिए कई निवेशक आर्बिट्राज फंड्स और NPS टियर-2 के बीच असमंजस में रहते हैं। दोनों का तुलनात्मक विश्लेषण समझें:
| मापदंड | NPS टियर-2 (स्कीम C + G) | म्यूचुअल फंड आर्बिट्राज फंड्स | निवेशक के लिए सर्वश्रेष्ठ रणनीति |
|---|---|---|---|
| अनुमानित वार्षिक यील्ड | 7.8% से 8.6% (सॉवरेन बॉन्ड यील्ड) | 6.5% से 7.2% (कैश-फ्यूचर स्प्रेड) | NPS टियर-2 में 1% से 1.5% अधिक रिटर्न |
| सालाना फंड मैनेजमेंट खर्च | 0.09% | 0.35% से 0.75% | NPS टियर-2 में फीस 4 से 8 गुना कम |
| टैक्सेशन नियम | आयकर स्लैब अनुसार (Slab Rate) | इक्विटी टैक्सेशन (12.5% LTCG, 20% STCG) | 30% स्लैब वालों के लिए आर्बिट्राज फंड्स बेहतर |
| क्रेडिट जोखिम (Default Risk) | शून्य (भारत सरकार की प्रतिभूतियां) | न्यूनतम (डेरिवेटिव हैजिंग) | दोनों में पूंजी पूरी तरह सुरक्षित |
सीधा फॉर्मूला: यदि आप 10% या 20% के इनकम टैक्स स्लैब में आते हैं, तो NPS टियर-2 आपके लिए आर्बिट्राज फंड्स और एफडी दोनों से अधिक शुद्ध रिटर्न (Net Post-Tax Return) देता है। केवल 30% और उससे अधिक के उच्च टैक्स ब्रैकेट वाले निवेशकों के लिए ही आर्बिट्राज फंड्स टैक्स के लिहाज से अधिक अनुकूल बैठते हैं।
13. देश के टॉप 5 पेंशन फंड मैनेजर्स (PFMs) का संपूर्ण प्रदर्शन कार्ड
NPS टियर-2 में खाता खोलते समय आपको अपना पेंशन फंड मैनेजर (PFM) चुनना होता है। पीएफआरडीए द्वारा विनियमित सभी फंड मैनेजर्स देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थान हैं। इनमें से शीर्ष 5 फंड मैनेजर्स का प्रदर्शन विश्लेषण इस प्रकार है:
| पेंशन फंड मैनेजर (PFM) | स्कीम E (इक्विटी) 5-वर्षीय रिटर्न | स्कीम G (सरकारी बॉन्ड) रिटर्न | कुल प्रबंधनाधीन संपत्ति (AUM) | निवेशकों के लिए मुख्य यूएसपी |
|---|---|---|---|---|
| HDFC Pension Management | 15.4% प्रति वर्ष | 8.6% प्रति वर्ष | ₹75,000+ करोड़ | लार्ज कैप में लगातार कंसिस्टेंट अल्फा जनरेशन |
| SBI Pension Funds | 14.8% प्रति वर्ष | 8.4% प्रति वर्ष | ₹4,00,000+ करोड़ | देश का सबसे बड़ा और सुरक्षित सॉवरेन फंड मैनेजर |
| ICICI Prudential Pension | 15.1% प्रति वर्ष | 8.5% प्रति वर्ष | ₹60,000+ करोड़ | एक्टिव डेट पोर्टफोलियो और डायनामिक ड्यूरेशन मैनेजमेंट |
| UTI Retirement Solutions | 14.5% प्रति वर्ष | 8.3% प्रति वर्ष | ₹2,50,000+ करोड़ | रूढ़िवादी और सुरक्षित एसेट एलोकेशन |
| Kotak Mahindra Pension | 14.9% प्रति वर्ष | 8.5% प्रति वर्ष | ₹25,000+ करोड़ | अल्ट्रा-लो ट्रैकिंग एरर और बेहतरीन इंडेक्स रिप्लिका |
अच्छी बात यह है कि आप अपनी जरूरत के अनुसार बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के साल में दो बार अपना फंड मैनेजर बदल सकते हैं!
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि NPS टियर-2 में जब आप पैसे जमा करते हैं, तो कोई भी बैंक या एजेंट आपसे किसी प्रकार का एंट्री लोड (Entry Load) या डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं काटता। आपका 100% पैसा पहले ही दिन से यूनिटों में बदल जाता है और नेट एसेट वैल्यू (NAV) के आधार पर सीधे मार्केट से जुड़ जाता है। यह शुद्ध और पारदर्शी प्रणाली इसे भारत के सबसे ईमानदार और लागत-कुशल निवेश विकल्पों में शीर्ष स्थान पर रखती है।