नवंबर का महीना आते ही देशभर के लाखों प्राइवेट और सरकारी कर्मचारियों के इनबॉक्स में कंपनी के एचआर और पेरोल विभाग से एक सख्त ईमेल आने लगती है — 'Submit Your Investment Proofs / Form 12BB Immediately'। बहुत से कर्मचारी काम की व्यस्तता में इसे नजरअंदाज कर देते हैं या सोचते हैं कि इसे मार्च में देखेंगे। लेकिन जैसे ही जनवरी की सैलरी आती है, उनके होश उड़ जाते हैं क्योंकि खाते में आने वाली रकम 20% से 40% तक कट चुकी होती है। इनकम टैक्स नियमों के तहत नियोक्ता की यह कानूनी बाध्यता है कि यदि कर्मचारी समय पर अपने वास्तविक निवेश के पक्के सबूत जमा नहीं करता, तो कंपनी को उपलब्ध सैलरी पर अधिकतम स्लैब के हिसाब से टीडीएस काटना पड़ता है। आइए समझते हैं कि फॉर्म 12BB क्या है, HRA रेंट रसीद और मकान मालिक के पैन कार्ड के क्या कड़े नियम हैं, और कैसे आप अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई से एक-एक रुपये का टैक्स बचा सकते हैं।
📋 फॉर्म 12BB: मुख्य नियम संक्षेप में (2026)
- कानूनी ढांचा: आयकर नियम 1962 का नियम 26C और आयकर अधिनियम की धारा 192।
- सालाना किराया सीमा: यदि कुल किराया ₹1,00,000 (यानी ₹8,333 प्रतिमाह) से अधिक है, तो मकान मालिक का पैन कार्ड अनिवार्य।
- रेवेन्यू स्टांप: ₹5,000 से ऊपर के नकद किराया भुगतान की हर रसीद पर ₹1 का लाल रेवेन्यू स्टांप जरूरी।
- पुरानी बनाम नई रिजीम: फॉर्म 12BB में HRA, 80C व होम लोन छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) में ही मिलती है।
1. फॉर्म 12BB क्या है और नवंबर-दिसंबर में यह क्यों जरूरी है?
वित्तीय वर्ष की शुरुआत (अप्रैल-मई) में आप कंपनी को केवल एक अनुमानित निवेश घोषणा (Provisional Declaration) देते हैं कि आप सालभर में कितना पीपीएफ, एलआईसी या रेंट देंगे। उस अनुमान के आधार पर कंपनी हर महीने थोड़ा-थोड़ा टीडीएस काटती है।
लेकिन वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही (नवंबर से जनवरी) में कंपनी को आयकर विभाग को यह साबित करना होता है कि कर्मचारी ने वास्तव में वह निवेश किया है या सिर्फ कागजों पर घोषणा की थी। फॉर्म 12BB वही वैधानिक घोषणा पत्र है जिसके साथ आप अपने बैंक स्टेटमेंट, रेंट रसीदें, होम लोन सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस प्रीमियम की मूल रसीदें संलग्न करके कंपनी के फाइनेंस पोर्टल पर अपलोड करते हैं।
2. HRA छूट के कड़े नियम: लैंडलॉर्ड पैन व रेवेन्यू स्टांप की शर्तें
वेतनभोगी वर्ग में सबसे ज्यादा टैक्स छूट हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के जरिए ली जाती है। धारा 10(13A) के तहत मिलने वाली इस छूट पर आयकर विभाग ने फर्जी रसीदों को पकड़ने के लिए कड़े फिल्टर लगा रखे हैं:
मकान मालिक का पैन कार्ड कब अनिवार्य है?
आयकर विभाग के सर्कुलर के अनुसार:
- यदि आपका सालाना किराया ₹1,00,000 से कम (यानी ₹8,333 प्रतिमाह तक) है, तो केवल रेंट रसीद और रेंट एग्रीमेंट काफी है; मकान मालिक का पैन नंबर देना अनिवार्य नहीं है।
- यदि आपका सालाना किराया ₹1,00,000 से अधिक है, तो फॉर्म 12BB में मकान मालिक का 10 अंकों का पैन (PAN) दर्ज करना 100% अनिवार्य है। आयकर विभाग का सिस्टम इस पैन से मकान मालिक के एआईएस (AIS) में रेंटल इनकम को स्वतः मैच करता है।
- यदि मकान मालिक पैन न दे: यदि मकान मालिक के पास पैन नहीं है, तो उनसे घोषणा पत्र (फॉर्म 60) भरवाकर उनकी आईडी प्रूफ कॉपी जमा करनी होगी।
रेंट रसीद पर रेवेन्यू स्टांप का नियम
यदि आप मकान मालिक को नेट बैंकिंग, यूपीआई या चेक से किराया दे रहे हैं, तो बैंक पासबुक का विवरण काफी होता है। लेकिन यदि आप नकद (Cash) किराया दे रहे हैं और एक महीने की रसीद ₹5,000 से अधिक की है, तो भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत रसीद पर ₹1 का रेवेन्यू स्टांप लगाकर उस पर मकान मालिक के क्रॉस साइन होने जरूरी हैं। बिना रेवेन्यू स्टांप वाली नकद रसीदें पेरोल ऑडिट में तुरंत अमान्य कर दी जाती हैं।
3. होम लोन पर धारा 24(b) और 80EEA का दोहरा टैक्स लाभ
यदि आपने रहने के लिए खुद का मकान खरीदा है और उस पर होम लोन चल रहा है, तो फॉर्म 12BB के जरिए आपको दो बड़ी धाराओं में छूट मिलती है:
होम लोन टैक्स डिडक्शन की पूरी रूपरेखा:
- धारा 24(b) - ब्याज पर छूट: खुद रहने वाले मकान (Self-occupied Property) के होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹2,00,000 तक की सीधी टैक्स कटौती मिलती है।
- धारा 80C - मूलधन (Principal Repayment): होम लोन की ईएमआई में मूलधन (Principal) का जो हिस्सा कटता है, उस पर धारा 80C के ₹1.5 लाख के कोटे के तहत छूट मिलती है। इसके अलावा रजिस्ट्री के साल में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज भी 80C में क्लेम किए जा सकते हैं।
- बैंक का प्रोविजनल सर्टिफिकेट: अपने होम लोन बैंक (जैसे SBI, HDFC, ICICI) के नेट बैंकिंग पोर्टल से चालू वर्ष का 'Provisional Interest Certificate' डाउनलोड करके फॉर्म 12BB के साथ अपलोड करें। इसमें वित्तीय वर्ष के अंत तक देय कुल मूलधन और ब्याज का प्रमाणित ब्योरा होता है।
📌 यह भी पढ़ें: 80C के तहत सुरक्षित सरकारी निवेश और बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) 8.2% ब्याज दर व नए नियम देखें।
4. धारा 80C, 80D व 80CCD(1B) के मान्य दस्तावेजों की सूची
फॉर्म 12BB भरते समय निम्नलिखित स्वीकृत निवेशों के वैध प्रमाण पत्र ही कंपनी पोर्टल पर अपलोड करें:
| आयकर धारा | अधिकतम कटौती सीमा | पात्र निवेश साधन | आवश्यक वैध प्रमाण पत्र |
|---|---|---|---|
| धारा 80C | ₹1,50,000 | EPF, PPF, ELSS म्यूचुअल फंड, LIC, सुकन्या, बच्चों की ट्यूशन फीस | प्रीमियम रसीद, पासबुक एंट्री, म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट, स्कूल रसीद |
| धारा 80D | ₹25,000 से ₹1,00,000 | खुद, परिवार व माता-पिता का हेल्थ इंश्योरेंस व प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप | 80D टैक्स सर्टिफिकेट (बीमा कंपनी द्वारा जारी), कैश पेमेंट अमान्य |
| धारा 80CCD(1B) (देखें: NPS निवेश गाइड) | ₹50,000 (अतिरिक्त) | नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS Tier 1) स्वैच्छिक निवेश | CRA पोर्टल (Protean / KFintech) से डाउनलोड NPS ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट |
| धारा 80E | कोई ऊपरी सीमा नहीं | उच्च शिक्षा हेतु लिए गए एजुकेशन लोन का ब्याज | बैंक द्वारा जारी एजुकेशन लोन इंटरेस्ट सर्टिफिकेट |
| धारा 80G | 50% या 100% | पीएम केयर्स, राष्ट्रीय राहत कोष या मान्यता प्राप्त चैरिटी दान | संस्था की 80G रसीद जिसमें संस्था का पैन और फॉर्म 10BE दर्ज हो |
📌 काम की सलाह: टैक्स सेवर म्यूचुअल फंड्स में निवेश से पहले अपना स्टेटस जांचने के लिए Mutual Fund KYC On Hold या Rejected ठीक करने का तरीका जरूर पढ़ें।
5. यदि कंपनी की डेडलाइन छूट जाए तो क्या कटा हुआ TDS वापस मिलेगा?
यदि किसी कारणवश आप कंपनी की तय डेडलाइन (आमतौर पर 15 दिसंबर से 10 जनवरी के बीच) तक फॉर्म 12BB और सबूत जमा नहीं कर पाए, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है:
- कंपनी के पास आपकी सैलरी से टैक्स काटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, क्योंकि कंपनी को आयकर कानूनों का पालन करना होता है।
- लेकिन जब आप अगले साल जुलाई के महीने में अपनी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) ऑनलाइन दाखिल करेंगे, तो आप इन सभी कटौतियों (HRA, 80C, 80D, होम लोन) की वास्तविक रकम ITR फॉर्म में दोबारा दर्ज कर सकते हैं।
- आयकर विभाग का केंद्रीय प्रसंस्करण केंद्र (CPC) आपके भरे गए डेटा और बैंक ब्याज का मिलान करेगा। जो अतिरिक्त टीडीएस आपकी कंपनी ने काटा था, वह पूरा का पूरा रिफंड बनकर 6% सालाना ब्याज के साथ सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट कर दिया जाएगा।
6. फॉर्म 12BB डिडक्शन 2026: मास्टर तुलनात्मक तालिका
| कटौती का प्रकार | वार्षिक सीमा | अनिवार्य दस्तावेज | अक्सर होने वाली गलतियां | बचने का सही तरीका |
|---|---|---|---|---|
| HRA रेंट एग्जम्पशन | फॉर्मूले अनुसार (न्यूनतम) | रेंट रसीद, एग्रीमेंट, मकान मालिक का पैन (>₹1 लाख पर) | फर्जी रसीदें लगाना, बैंक ट्रांसफर का रिकॉर्ड न होना | हर महीने ऑनलाइन रेंट ट्रांसफर करें, बैंक प्रूफ रखें |
| होम लोन ब्याज 24(b) | ₹2,00,000 तक | बैंक का अनंतिम ब्याज प्रमाण पत्र | निर्माणाधीन मकान का पूरा ब्याज क्लेम करना | कब्जा मिलने के बाद ही 5 किस्तों में प्री-ईएमआई ब्याज लें |
| हेल्थ इंश्योरेंस 80D | ₹25,000 (स्वयं) + ₹50,000 (वरिष्ठ माता-पिता) | प्रीमियम रसीद (ऑनलाइन/चेक भुगतान) | नकद में प्रीमियम भरना (आयकर में अमान्य) | हमेशा डिजिटल पेमेंट से प्रीमियम भरें |
| स्कूल ट्यूशन फीस 80C | ₹1.5 लाख के कुल कोटे में | स्कूल की मूल फीस रसीद | ट्रांसपोर्ट व एनुअल चार्ज को ट्यूशन फीस में जोड़ना | सिर्फ 'Tuition Fee' वाले कॉलम की रकम ही दर्ज करें |
| एनपीएस 80CCD(1B) | ₹50,000 अतिरिक्त | PRAN स्टेटमेंट (टियर-1 खाता) | टियर-2 के निवेश को इस धारा में दिखाना | केवल टियर-1 का स्वैच्छिक योगदान ही छूट के योग्य है |
फॉर्म 12BB केवल एक औपचारिक कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह आपकी सालभर की मेहनत से कमाए गए पैसों को सुरक्षित रखने का कानूनी रक्षा कवच है। अपनी कंपनी की पेरोल डेडलाइन से कम से कम 5 दिन पहले सभी कागजात सही प्रारूप में अपलोड करें ताकि ऐन वक्त पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण आपकी सैलरी से भारी टीडीएस न कट सके।
7. HRA टैक्स छूट का विस्तृत गणित और सैलरी कैलकुलेटर
आयकर अधिनियम की धारा 10(13A) और नियम 2A के तहत HRA टैक्स छूट की गणना निम्नलिखित तीन राशियों में से जो सबसे कम हो (Least of the Three), उसके आधार पर की जाती है:
📐 HRA छूट का त्रि-स्तरीय फॉर्मूला:
- कंपनी से वास्तव में प्राप्त हुआ कुल HRA (Actual HRA Received)।
- मूल वेतन + महंगाई भत्ता (Basic Salary + DA) का 50% (यदि आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या चेन्नई में किराए पर रहते हैं) अथवा 40% (अन्य सभी शहरों के लिए)।
- सालाना चुकाए गए कुल किराए में से मूल वेतन + डीए के 10% को घटाने के बाद बची राशि (Rent Paid minus 10% of Basic Salary)।
वास्तविक उदाहरण से समझें (Real-World Case Study):
मान लीजिए राहुल का बेसिक वेतन ₹50,000 प्रतिमाह (वार्षिक ₹6,00,000) है और उन्हें कंपनी से ₹20,000 प्रतिमाह (वार्षिक ₹2,40,000) HRA मिलता है। राहुल दिल्ली में ₹18,000 प्रतिमाह (वार्षिक ₹2,16,000) किराए के फ्लैट में रहते हैं।
- शर्त 1: वास्तव में मिला HRA = ₹2,40,000
- शर्त 2: बेसिक का 50% (दिल्ली मेट्रो) = ₹3,00,000
- शर्त 3: कुल किराया माइनस बेसिक का 10% = ₹2,16,000 - ₹60,000 = ₹1,56,000
इन तीनों में सबसे कम राशि ₹1,56,000 है। इसलिए राहुल को सालभर में ₹1,56,000 की आय पर 100% टैक्स छूट मिलेगी और शेष ₹84,000 उनकी करयोग्य सैलरी में जुड़ जाएगा। इस छूट से राहुल को सीधे ₹31,200 (20% टैक्स ब्रैकेट में) की नकद बचत होगी!
8. माता-पिता को किराया देकर HRA क्लेम करने के कानूनी नियम
कई कर्मचारी अपने पुश्तैनी मकान में माता-पिता के साथ रहते हैं और उन्हें किराया देकर HRA टैक्स छूट का कानूनी लाभ उठाते हैं। आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) के फैसलों के अनुसार यह पूरी तरह वैध है बशर्ते निम्नलिखित 5 शर्तें पूरी हों:
- संपत्ति का मालिकाना हक: मकान केवल और केवल माता-पिता (या दोनों में से किसी एक) के नाम पर होना चाहिए। कर्मचारी उस मकान में सह-मालिक (Co-owner) नहीं होना चाहिए।
- रेंट एग्रीमेंट और बैंक ट्रांसफर: माता-पिता के साथ एक औपचारिक रेंट एग्रीमेंट निष्पादित करें और हर महीने का किराया उनके बैंक खाते में सीधे ऑनलाइन (NEFT/UPI/Cheque) ट्रांसफर करें। नकद लेन-देन से बचें।
- माता-पिता की ITR में रेंटल इनकम: माता-पिता को अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में 'Income from House Property' के तहत यह रेंटल इनकम दिखानी होगी। अच्छी बात यह है कि आयकर कानून के तहत माता-पिता को इस रेंट पर 30% का स्टैंडर्ड डिडक्शन (धारा 24a) स्वतः मिलता है और यदि उनकी कुल आय कर-मुक्त सीमा (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹3 लाख) से कम है, तो उन्हें कोई टैक्स भी नहीं देना पड़ता।
- पति/पत्नी को किराया देने पर पाबंदी: आप अपनी पत्नी या पति को किराया देकर HRA का दावा नहीं कर सकते, क्योंकि आयकर अधिनियम की धारा 64 (क्लबिंग प्रावधान) और वैवाहिक रिश्ते की कानूनी प्रकृति के तहत इसे टैक्स टालने की कृत्रिम व्यवस्था माना जाता है।
9. यदि कंपनी HRA नहीं देती तो धारा 80GG से छूट कैसे लें?
कई छोटी कंपनियों या कंसल्टेंसी फर्मों में सैलरी स्ट्रक्चर में HRA का घटक अलग से नहीं होता, बल्कि पूरी सैलरी 'कंसोलिडेटेड पे' या स्पेशल अलाउंस के रूप में मिलती है। ऐसे कर्मचारियों को आयकर अधिनियम की धारा 80GG के तहत टैक्स छूट मिलती है:
- इसके लिए कर्मचारी को आयकर पोर्टल पर फॉर्म 10BA (Form 10BA) ऑनलाइन भरना होता है।
- धारा 80GG के तहत अधिकतम ₹5,000 प्रतिमाह (सालाना ₹60,000) तक की सीधी टैक्स कटौती का लाभ मिलता है।
- शर्त यह है कि उस शहर में कर्मचारी, उनके जीवनसाथी या नाबालिग बच्चे के नाम पर कोई दूसरा रिहायशी मकान नहीं होना चाहिए।
10. फर्जी रेंट रसीद और धारा 133(6) इनकम टैक्स स्क्रूटनी नोटिस से कैसे बचें
हाल के वर्षों में आयकर विभाग का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स सिस्टम (Project Insight) अत्यधिक सटीक हो चुका है। अब विभाग को सैलरी से क्लेम किए गए HRA और मकान मालिक द्वारा दाखिल ITR के बीच किसी भी विसंगति (Mismatch) की तुरंत भनक लग जाती है।
🚨 इन 5 गलतियों से तुरंत बचें वरना आएगा इनकम टैक्स नोटिस:
- बिना बैंक ट्रांसफर के सिर्फ कागजी रसीदें: यदि आप हर महीने ₹40,000 या ₹50,000 की रेंट रसीद लगा रहे हैं लेकिन आपके बैंक स्टेटमेंट से कभी रेंट का कोई डेबिट नहीं हुआ, तो आयकर विभाग धारा 133(6) के तहत नोटिस भेजकर बैंक पासबुक मांग सकता है।
- मकान मालिक का फर्जी पैन कार्ड लगाना: किसी भी अनजान व्यक्ति या मृत रिश्तेदार का पैन कार्ड लगाना गंभीर आपराधिक धोखाधड़ी (Section 277) है। सिस्टम में पैन डालते ही मकान मालिक का नाम स्क्रीन पर आ जाता है। यदि मकान मालिक ने अपनी ITR में वह रेंटल इनकम नहीं दिखाई, तो कंप्यूटर अपने आप नोटिस जारी कर देता है।
- कंपनी के शहर से सैकड़ों किमी दूर का HRA क्लेम करना: यदि आपका ऑफिस गुड़गांव या बेंगलुरु में है और आप वर्क-फ्रॉम-ऑफिस मोड में हैं, लेकिन आप अपने पैतृक गांव या दूसरे शहर की रेंट रसीद लगाकर HRA क्लेम कर रहे हैं, तो कंपनी का पेरोल सॉफ्टवेयर और इनकम टैक्स सिस्टम इसे तुरंत रिजेक्ट कर देता है।
- सहमति के बिना माता-पिता का पैन देना: यदि आप अपने माता-पिता के नाम पर रेंट दिखा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वे अपनी ITR भरते हों या उनकी कुल आय करयोग्य सीमा के भीतर हो। उनके खाते में वास्तविक पैसा ट्रांसफर होना अनिवार्य है।
11. नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था: किस वेतन पर कौन सी व्यवस्था फायदेमंद?
फॉर्म 12BB भरने से पहले हर वेतनभोगी कर्मचारी को यह गणित जरूर समझ लेना चाहिए कि उसके लिए चालू वर्ष में नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनना बेहतर है या पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime)। नई व्यवस्था में ₹7.75 लाख तक की आय (स्टैंडर्ड डिडक्शन सहित) पर शून्य टैक्स लगता है, लेकिन कोई कटौती नहीं मिलती।
| सालाना सकल वेतन (Gross Salary) | यदि कुल डिडक्शन (80C+HRA+होम लोन) कम है | यदि कुल डिडक्शन ₹3.75 लाख से अधिक है | सर्वश्रेष्ठ अनुशंसित टैक्स व्यवस्था |
|---|---|---|---|
| ₹8,00,000 तक | नई व्यवस्था में ₹0 टैक्स | पुरानी व्यवस्था में शून्य टैक्स | नई टैक्स व्यवस्था (New Regime) सबसे आसान |
| ₹10,00,000 (10 लाख) | नई व्यवस्था में ₹54,600 टैक्स | पुरानी में ₹2.5 लाख छूट पर ₹44,200 टैक्स | पुरानी व्यवस्था (Old Regime) यदि बड़ा HRA है |
| ₹15,00,000 (15 लाख) | नई व्यवस्था में ₹1,45,600 टैक्स | पुरानी में ₹4 लाख छूट पर ₹1,35,200 टैक्स | पुरानी व्यवस्था (Old Regime) भारी होम लोन पर |
| ₹20,00,000 (20 लाख) | नई व्यवस्था में ₹2,96,400 टैक्स | पुरानी में ₹4.5 लाख छूट पर ₹3,01,600 टैक्स | नई टैक्स व्यवस्था (New Regime) यदि निवेश कम है |
सीधा निष्कर्ष: यदि आपके पास HRA, होम लोन ब्याज (धारा 24b) और 80C मिलाकर कुल छूट ₹3,75,000 से अधिक बनती है, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था में फॉर्म 12BB भरकर टैक्स बचाना सबसे बड़ा लाभ देता है।
12. धारा 80D: बिना बीमा वाले वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के इलाज पर ₹50,000 छूट
बहुत से बुजुर्ग माता-पिता (उम्र 60 वर्ष से अधिक) को पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों (जैसे हृदय रोग या कैंसर) के कारण कोई भी स्वास्थ्य बीमा कंपनी हेल्थ पॉलिसी नहीं देती है। ऐसे कर्मचारियों को आयकर अधिनियम की धारा 80D(2)(c) के तहत विशेष राहत दी गई है। यदि वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के पास कोई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी नहीं है, तो सालभर में उनके इलाज, डॉक्टर की कंसल्टेशन फीस, अस्पताल में भर्ती होने और जरूरी दवाओं पर खर्च हुए वास्तविक मेडिकल बिलों (Medical Treatment Bills) पर अधिकतम ₹50,000 तक की सीधी टैक्स कटौती ली जा सकती है। फॉर्म 12BB भरते समय डॉक्टर की पर्ची और केमिस्ट के पक्के बिल की प्रतियां संलग्न करके आप आसानी से यह छूट हासिल कर सकते हैं।
ध्यान रखें कि इन मेडिकल बिलों का भुगतान केवल चेक, नेट बैंकिंग, यूपीआई या क्रेडिट/डेबिट कार्ड से होना चाहिए; नकद में भुगतान किए गए बिल आयकर में मान्य नहीं होते हैं। इसके अलावा, धारा 80D(2)(b) के तहत आप अपने, जीवनसाथी और बच्चों के लिए सालाना ₹5,000 तक के 'प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप' (Preventive Health Checkup) का भी दावा कर सकते हैं, और यह एकमात्र ऐसा खर्च है जिसे नकद भुगतान करने पर भी 100% टैक्स छूट की मान्यता मिलती है।