नया मकान, दुकान या फ्लैट खरीदना हर भारतीय के जीवन की सबसे बड़ी पूंजीगत उपलब्धियों में से एक होता है। रजिस्ट्री कराने और नगर निगम में नाम चढ़वाने के बाद ज्यादातर लोग एक बड़ी गलती कर बैठते हैं — वे बिजली बिल में नाम बदलना भूल जाते हैं और सालों तक पुराने मालिक या बिल्डर के नाम पर ही बिजली का बिल भरते रहते हैं। लेकिन आज के समय में यह भारी कानूनी और वित्तीय जोखिम बन चुका है। यदि आप पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत ₹78,000 की रूफटॉप सोलर सब्सिडी लेना चाहते हैं, बैंक से होम लोन का टॉप-अप लेना चाहते हैं या पासपोर्ट और आधार में पते का पुख्ता प्रमाण चाहते हैं, तो बिजली के बिल पर आपका खुद का नाम दर्ज होना पहली अनिवार्य शर्त है। भारत सरकार के कंज्यूमर राइट्स रूल्स 2020 और स्टेट इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड के तहत अब बिजली बिल में नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और समयबद्ध हो चुकी है।
⚡ मीटर ओनरशिप ट्रांसफर: मुख्य बातें (2026)
- समयसीमा: आवेदन और दस्तावेज अपलोड होने के अधिकतम 30 दिनों (2 बिलिंग चक्र) में नया नाम जारी होना अनिवार्य।
- सोलर सब्सिडी लाभ: पीएम सूर्य घर योजना में डीबीटी सब्सिडी सीधे उसी बैंक खाते में आती है जिसका नाम बिजली बिल से मेल खाता है।
- बिना एनओसी ट्रांसफर: यदि पुराना मालिक गायब है या मना करता है, तो रजिस्टर्ड सेल डीड और इंडेम्निटी बॉन्ड से नाम बदला जा सकता है।
- ऑनलाइन ट्रैकिंग: यूपीपीसीएल, टाटा पावर, बीएसईएस, महावितरण और डिस्कॉम पोर्टल्स पर एप्लीकेशन नंबर से लाइव स्टेटस ट्रैक करें।
1. बिजली बिल में नाम बदलना क्यों जरूरी है?
कई लोग सोचते हैं कि जब बिजली का बिल समय पर जमा हो ही रहा है, तो नाम बदलने की क्या जल्दी है? लेकिन बिजली विभाग के कानूनों के तहत पुराने नाम पर मीटर चलाना कई गंभीर पेचीदगियां पैदा करता है:
- धारा 126 व 135 का जोखिम: यदि पुराना कनेक्शन किसी व्यावसायिक दर पर था या पिछले मालिक पर कोई बिजली चोरी या लोड पेनल्टी का केस था, तो बिजली विभाग बिना पूर्व सूचना के आपकी लाइन काट सकता है या आप पर पेनाल्टी थोप सकता है।
- रूफटॉप सोलर सब्सिडी रुकना: केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर योजना के तहत ₹78,000 की सब्सिडी पाने के लिए मीटर और बैंक खाता समान नाम पर होना चाहिए (विस्तृत जानकारी के लिए सोलर नेट-मीटरिंग vs ग्रॉस-मीटरिंग बिलिंग SOP देखें)। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर योजना के तहत 3kW तक के सोलर सिस्टम पर ₹78,000 की सब्सिडी मिलती है। नेशनल पोर्टल पर नियम है कि बिजली बिल का कंज्यूमर नंबर, आधार कार्ड और बैंक खाता एक ही व्यक्ति के नाम होना चाहिए। नाम भिन्न होने पर आवेदन स्वतः खारिज हो जाता है।
- प्रॉपर्टी के मालिकाना हक का कानूनी साक्ष्य: नगर निगम के रिकॉर्ड और कोर्ट में बिजली का बिल संपत्ति पर वास्तविक कब्जे (Physical Possession) का सबसे मजबूत द्वितीयक प्रमाण माना जाता है।
- मीटर जलने या लोड बढ़ाने में रुकावट: यदि आपका पुराना मीटर खराब हो जाए, जल जाए या आपको 2 किलोवाट से 5 किलोवाट लोड बढ़ाना हो, तो विभाग केवल पंजीकृत उपभोक्ता के हस्ताक्षर स्वीकार करता है।
2. आवश्यक दस्तावेजों की पूरी चेकलिस्ट (Checklist)
डिस्कॉम पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने से पहले निम्नलिखित सभी दस्तावेजों की साफ-सुथरी पीडीएफ या जेपीजी फाइल (फाइल साइज 200 KB से 2 MB के बीच) तैयार रख लें:
| दस्तावेज का नाम | किस स्थिति में जरूरी है | सत्यापन का उद्देश्य | स्वीकार्य प्रारूप |
|---|---|---|---|
| रजिस्टर्ड सेल डीड / बैनामा | मकान या दुकान खरीद के मामलों में | संपत्ति के पूर्ण मालिकाना हक का प्राथमिक प्रमाण | रजिस्ट्रार ऑफिस की मुहर सहित स्कैन प्रति |
| दाखिल-खारिज / खतौनी / हाउस टैक्स रसीद | पैतृक संपत्ति या कृषि भूमि | राजस्व या नगर निगम रिकॉर्ड में स्वामित्व पुष्टि | नवीनतम डिजिटल नामांतरण नकल |
| मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) | पूर्वज (माता/पिता/पति) की मृत्यु होने पर | पुराने खाताधारक के निधन की वैधानिक पुष्टि | जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार द्वारा जारी डिजिटल कॉपी |
| अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) | पुराने मालिक या अन्य सह-वारिसों से | भविष्य में किसी पारिवारिक विवाद से डिस्कॉम का बचाव | हस्ताक्षरित सहमति पत्र या नोटरी शपथ पत्र |
| इंडेम्निटी बॉन्ड (क्षतिपूर्ति बंधपत्र) | सभी मामलों में अनिवार्य | बिजली विभाग को किसी तीसरे पक्ष के दावे से सुरक्षित करना | ₹100 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर नोटरीकृत |
| आवेदक का आधार कार्ड व पैन कार्ड | नया कनेक्शन धारक | पहचान और पते का वैधानिक सत्यापन (KYC) | स्व-हस्ताक्षरित डिजिटल प्रति |
3. ₹100 स्टांप पेपर इंडेम्निटी बॉन्ड (क्षतिपूर्ति बंधपत्र) का नियम
बिजली विभाग किसी भी मीटर का नाम बदलने से पहले उपभोक्ता से एक कानूनी घोषणा लेता है जिसे इंडेम्निटी बॉन्ड कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि यदि भविष्य में संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर कोई विवाद होता है या पुराना मालिक कोई आपत्ति दर्ज कराता है, तो बिजली विभाग पर कोई मुकदमा नहीं होगा और सारी जिम्मेदारी नए आवेदक की होगी।
📝 इंडेम्निटी बॉन्ड का सरल प्रारूप (मुख्य बिंदु)
यह बॉन्ड ₹100 के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर टाइप कराकर किसी नोटरी पब्लिक से अटेस्ट कराया जाता है। इसमें साफ तौर पर लिखा होता है:
- आवेदक का नाम, पिता का नाम और संपत्ति का पूरा पता।
- वर्तमान बिजली कनेक्शन खाता संख्या (Account / Consumer ID) और मीटर नंबर।
- घोषणा कि संपत्ति को वैध तरीके से खरीदा गया है (रजिस्ट्री संख्या व दिनांक दर्ज करें)।
- वचनबद्धता कि यदि पुराने मालिक का कोई बकाया बिजली बिल सामने आता है, तो नया आवेदक उसे भरने के लिए उत्तरदायी होगा।
4. राज्यवार डिस्कॉम पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के 6 चरण
आजकल लगभग सभी राज्यों ने मीटर ट्रांसफर की प्रक्रिया को अपने ऑनलाइन कंज्यूमर सर्विस पोर्टल से जोड़ दिया है:
चरणबद्ध ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (Step-by-Step Guide):
- डिस्कॉम पोर्टल पर लॉगिन करें:
- उत्तर प्रदेश:
uppclonline.com(झटपट पोर्टल -> नाम परिवर्तन सेवा) - दिल्ली:
tatapower-ddl.comयाbsesdelhi.com(Change of Name Services) - महाराष्ट्र:
mahadiscom.in(महावितरण कंज्यूमर पोर्टल) - हरियाणा:
dhbvn.org.in/uhbvn.org.in - बिहार:
nbpdcl.co.in/sbpdcl.co.in(सुविधा ऐप या वेब पोर्टल)
- उत्तर प्रदेश:
- कंज्यूमर नंबर दर्ज करें: अपने 10 या 12 अंकों का बिजली बिल खाता नंबर (CA Number / Account ID) दर्ज करें। सिस्टम पर पुराने मालिक का नाम और पता अपने आप दिखने लगेगा।
- 'नाम परिवर्तन' (Change of Name / Ownership Transfer) चुनें: सर्विस रिक्वेस्ट मेन्यू में जाकर 'Name Transfer' का विकल्प चुनें।
- नया नाम और विवरण भरें: नए मालिक का नाम, पिता/पति का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और आधार संख्या भरें।
- कागजात अपलोड करें: रजिस्ट्री की प्रति, म्यूटेशन रसीद, आधार कार्ड और नोटरीकृत इंडेम्निटी बॉन्ड को निर्धारित साइज में अपलोड करें।
- प्रोसेसिंग फीस का भुगतान करें: ऑनलाइन नेट बैंकिंग, यूपीआई या डेबिट कार्ड से ₹50 से ₹250 की नाम परिवर्तन फीस जमा करें और डिजिटल रसीद व एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें।
📌 कानूनी सलाह: नया फ्लैट खरीदते समय बिल्डर से बिजली कनेक्शन और पजेशन में देरी पर मुआवजे के लिए RERA डिलेड पजेशन पेनल्टी व रिफंड गाइड जरूर पढ़ें।
5. सिक्योरिटी डिपॉजिट और लोड ट्रांसफर का वित्तीय नियम
जब मीटर किसी नए व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर होता है, तो पहले से जमा सुरक्षा राशि (Security Deposit) के दो नियम लागू होते हैं:
- पुराने मालिक की सहमति से ट्रांसफर: यदि पुराने मालिक ने एनओसी में यह लिख दिया है कि उनकी जमा सिक्योरिटी नए मालिक को ट्रांसफर कर दी जाए, तो आपको अतिरिक्त सिक्योरिटी नहीं देनी पड़ती। वह राशि नए बिल में क्रेडिट के रूप में ट्रांसफर हो जाती है।
- नया सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना: यदि पुराना मालिक अनुपलब्ध है या उसने अपनी सिक्योरिटी रिफंड ले ली है, तो बिजली विभाग आपके स्वीकृत लोड (Sanctioned Load) के आधार पर नई सुरक्षा राशि मांगता है। यह आमतौर पर घरेलू कनेक्शन के लिए ₹300 से ₹600 प्रति किलोवाट होती है। यह राशि पूरी तरह सुरक्षित और ब्याज सहित रिफंडेबल होती है जब भी आप कनेक्शन सरेंडर करेंगे।
📌 यह भी पढ़ें: स्मार्ट मीटर में बैलेंस कटने और रात में लाइट न कटने के नियमों के लिए बिजली स्मार्ट मीटर नेगेटिव बैलेंस व कंज्यूमर राइट्स देखें।
6. मीटर ट्रांसफर 2026: मास्टर तुलनात्मक तालिका
| श्रेणी / परिस्थिति | प्राथमिक दस्तावेज | एनओसी (NOC) की जरूरत? | अनुमानित समयसीमा | सरकारी प्रोसेसिंग शुल्क |
|---|---|---|---|---|
| मकान की सीधी खरीद (Registry Case) | रजिस्टर्ड सेल डीड + हाउस टैक्स म्यूटेशन | पुराने मालिक की एनओसी (या इंडेम्निटी बॉन्ड) | 15 से 30 कार्यदिवस | ₹50 से ₹250 + स्टैंप खर्च |
| पूर्वज की मृत्यु (Inheritance Case) | डेथ सर्टिफिकेट + लीगल हेयर एफिडेविट | अन्य सभी कानूनी वारिसों की एनओसी | 15 से 25 कार्यदिवस | ₹50 से ₹150 + स्टैंप खर्च |
| परिवार में गिफ्ट डीड (Gift Deed) | रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड + म्यूटेशन कॉपी | गिफ्ट देने वाले के मूल हस्ताक्षर | 10 से 20 कार्यदिवस | ₹50 से ₹100 |
| फ्लैट आवंटन (Builder to Buyer) | बिल्डर सब-लीज डीड + पजेशन लेटर | बिल्डर / आरडब्ल्यूए की नो ड्यूज एनओसी | 15 से 30 कार्यदिवस | सोसायटी नियमानुसार मानक शुल्क |
| अदालती आदेश या नीलामी (Court Auction) | सेल सर्टिफिकेट + कोर्ट ऑर्डर की कॉपी | किसी एनओसी की आवश्यकता नहीं | 20 से 40 कार्यदिवस | विभाग के मानक ट्रांसफर नियम |
यदि आपका आवेदन 30 दिनों के भीतर प्रोसेस नहीं होता है या बिजली विभाग का कोई कर्मचारी आपसे अनधिकृत पैसों की मांग करता है, तो आप अपने राज्य के विद्युत लोकपाल या कंज्यूमर ग्रीवेंस रिड्रेसल फोरम (CGRF) में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और अपनी संपत्ति के सभी यूटिलिटी बिल अपने नाम पर रखें।
7. प्रमुख राज्यों के डिस्कॉम पोर्टल पर स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
हर राज्य का बिजली बोर्ड अपने नियमों और सॉफ्टवेयर के अनुसार काम करता है। आइए देश के 5 बड़े राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन का सटीक तरीका समझें:
1. उत्तर प्रदेश (UPPCL झटपट पोर्टल)
यूपी में uppclonline.com पर जाएं और 'झटपट कनेक्शन व उपभोक्ता सेवाएं' पर क्लिक करें। वहां 'नाम परिवर्तन' (Name Transfer) चुनें। 10 अंकों का अकाउंट नंबर डालें। पुराने मालिक का विवरण दिखेगा। 'Apply for Name Change' पर क्लिक करके सेल डीड की स्कैन कॉपी और ₹100 का इंडेम्निटी बॉन्ड अपलोड करें। ₹118 का ऑनलाइन चालान भरें। संबंधित सब-डिवीजन के एसडीओ (SDO) 7 कार्यदिवसों में इसे अप्रूव कर देते हैं।
2. दिल्ली (Tata Power DDL व BSES Rajdhani/Yamuna)
दिल्ली में प्रक्रिया पूरी तरह फेसलेस है। tatapower-ddl.com या bsesdelhi.com पर 'Change of Name' टैब में जाएं। सीए नंबर (CA Number) दर्ज करें। दिल्ली सरकार के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल या आधार ई-केवाईसी से सत्यापन करें। म्यूटेशन रसीद या रजिस्टर्ड सेल डीड अपलोड करें। कोई अतिरिक्त सुरक्षा जमा नहीं देनी होती यदि पुरानी सुरक्षा राशि नए उपभोक्ता को हस्तांतरित कर दी जाए।
3. महाराष्ट्र (महावितरण - Mahadiscom)
mahadiscom.in के कंज्यूमर पोर्टल पर 12 अंकों का कंज्यूमर नंबर और 4 अंकों का बिलिंग यूनिट (BU) दर्ज करके लॉगिन करें। 'Apply for Change of Name' चुनें। फॉर्म U और फॉर्म W डाउनलोड करके साइन करें। प्रॉपर्टी टैक्स असेसमेंट (घरपट्टी) और इंडेम्निटी बॉन्ड अपलोड करें। 15 दिनों में मीटर का नाम बदल जाता है।
4. हरियाणा (DHBVN व UHBVN)
दक्षिण हरियाणा और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के पोर्टल dhbvn.org.in पर 'Apply Online -> Change of Name' विकल्प चुनें। परिवार पहचान पत्र (Family ID / PPP) नंबर दर्ज करके ओटीपी से वेरीफाई करें। म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) और नवीनतम खतौनी अपलोड करें।
8. घरेलू बनाम व्यावसायिक मीटर ट्रांसफर और लोड का नियम
यदि आपने कोई ऐसी संपत्ति खरीदी है जहां पहले दुकान, क्लिनिक या छोटा वर्कशॉप चलता था और अब आप वहां खुद रहने जा रहे हैं, तो केवल नाम बदलना काफी नहीं है। आपको टैरिफ श्रेणी परिवर्तन (Category Conversion from Commercial to Domestic) के लिए भी साथ ही आवेदन करना चाहिए।
⚠️ गलत टैरिफ पर मीटर चलाने का भारी नुकसान
व्यावसायिक बिजली की दर ₹8.50 से ₹11.00 प्रति यूनिट और फिक्स चार्ज ₹250 से ₹350 प्रति किलोवाट होता है। यदि आप रहने वाले घर में कमर्शियल मीटर चलाते रहेंगे तो आपका बिजली का बिल हर महीने दोगुना आएगा। नाम बदलने के साथ ही फॉर्म में 'Change of Category to LMVI (Domestic)' का विकल्प जरूर चुनें ताकि आपका बिल सस्ती घरेलू दरों (₹3.50 से ₹6.50 प्रति यूनिट) पर आने लगे।
9. स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बैलेंस और मोबाइल नंबर अपडेट
देशभर में तेजी से लग रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मामले में नाम बदलने के बाद डिस्कॉम ऐप (जैसे UPPCL Consumer App, Smart Bijli App, Suvidha App) में अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर तुरंत अपडेट कराएं। जब तक आपका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नहीं होगा, तब तक आपको दैनिक बिजली खपत, बैलेंस अलर्ट और माइनस बैलेंस (Negative Balance) की चेतावनी के एसएमएस नहीं मिलेंगे, जिससे रात में अचानक बिजली कटने का खतरा रहता है।
10. मीटर ट्रांसफर में देरी या रिश्वत मांगने पर CGRF में शिकायत कैसे करें?
कई बार सब-डिवीजन के लाइनमैन या बाबू पुराने बिल के झूठे बहाने बनाकर नए उपभोक्ता को परेशान करते हैं या नाम ट्रांसफर के लिए अवैध पैसों की मांग करते हैं। ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं के पास विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF) का मजबूत कानूनी अधिकार है:
शिकायत और हर्जाना पाने का कानूनी तरीका:
- टोल-फ्री हेल्पलाइन 1912 पर शिकायत दर्ज करें: सबसे पहले बिजली विभाग की 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन
1912पर कॉल करके अपनी नाम ट्रांसफर एप्लीकेशन का संदर्भ देते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं और कंप्लेंट नंबर लें। - कार्यकारी अभियंता (XEN / Executive Engineer) को पत्र: यदि 7 दिनों में समाधान न हो, तो अपने डिवीजन के अधिशासी अभियंता को एक लिखित पत्र दें जिसमें स्पष्ट लिखें कि इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड के तहत 30 दिनों में सेवा न मिलने पर डिस्कॉम पर रोजाना हर्जाना लागू होगा।
- CGRF (Consumer Forum) में याचिका: हर जिले में डिस्कॉम का एक स्वतंत्र उपभोक्ता फोरम (CGRF) होता है जिसमें एक न्यायिक सदस्य बैठता है। वहां आप सादे कागज पर आवेदन देकर नाम ट्रांसफर में देरी के लिए बिजली विभाग से ₹50 से ₹100 प्रति दिन का हर्जाना मांग सकते हैं।
- विद्युत लोकपाल (Electricity Ombudsman): यदि CGRF के आदेश के बाद भी 30 दिनों में मीटर ट्रांसफर नहीं होता, तो आप राज्य विद्युत नियामक आयोग के लोकपाल के समक्ष अपील कर सकते हैं। लोकपाल के आदेश पर लापरवाह एसडीओ या कर्मचारियों पर विभागीय जांच और जुर्माना ठोका जाता है।
11. जन सेवा केंद्र (CSC / VLE) से मीटर ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया
यदि आपके पास कंप्यूटर, स्कैनर या ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा नहीं है या आप ग्रामीण/कस्बाई क्षेत्र में रहते हैं, तो आपको बिजली विभाग के दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC / जन सेवा केंद्र) के जरिए भी मीटर नाम परिवर्तन की पूरी सुविधा उपलब्ध है:
सीएससी केंद्र पर आवेदन के सरल चरण:
- कागजात लेकर नजदीकी सीएससी जाएं: अपने साथ मूल रजिस्ट्री/बैनामा, हाउस टैक्स रसीद या खतौनी, आधार कार्ड, पैन कार्ड और नवीनतम बिजली बिल की कॉपी लेकर जाएं।
- डिजिटल पोर्टल एंट्री: सीएससी संचालक (VLE) अपने डिजिटल सेवा पोर्टल पर बिजली बोर्ड की सीएससी-कनेक्ट सेवा में लॉगिन करता है और आपका कंज्यूमर नंबर दर्ज करता है।
- दस्तावेज स्कैनिंग व अपलोड: संचालक आपके सभी मूल दस्तावेजों को 200 डीपीआई पर रंगीन स्कैन करके पोर्टल पर सीधे अपलोड करता है।
- सरकारी रसीद व फीस: नाम परिवर्तन की निर्धारित सरकारी फीस (लगभग ₹100 से ₹150) और सीएससी सेवा शुल्क (अधिकतम ₹30 से ₹50) का भुगतान नकद या यूपीआई से करें।
- कंप्यूटर जनरेटेड एक्नॉलेजमेंट स्लिप: संचालक से सिस्टम द्वारा जारी आधिकारिक रसीद (Acknowledgement Receipt) प्राप्त करें जिस पर आपका एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर (Application No.) और सब-डिवीजन का नाम छपा होता है। इस नंबर से आप कभी भी अपने मोबाइल पर स्टेटस देख सकते हैं।
12. बहुमंजिला सोसायटियों में बिल्डर सब-मीटर से सीधे डिस्कॉम मीटर कैसे लें?
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और मुंबई जैसे शहरों में लाखों परिवार बिल्डर द्वारा लगाए गए सिंगल प्वाइंट सब-मीटर से महंगी बिजली खरीदने को मजबूर हैं। राज्य विद्युत नियामक आयोग के नए नियमों के तहत यदि किसी हाउसिंग सोसायटी के 51% से अधिक निवासी प्रस्ताव पास करते हैं, तो डिस्कॉम को पूरी सोसायटी को 'मल्टी-पॉइंट इंडिविजुअल कनेक्शन' (Individual Multi-point Connection) में बदलना अनिवार्य होता है। इसके बाद हर फ्लैट मालिक को सीधे राज्य बिजली बोर्ड का आधिकारिक मीटर और नया कंज्यूमर नंबर मिल जाता है, जिससे बिल्डर द्वारा बिजली बिल में अतिरिक्त मेंटेनेंस चार्ज जोड़ने की मनमानी पर पूरी तरह रोक लग जाती है।
इसके लिए आरडब्ल्यूए (RWA) या फ्लैट मालिकों की समिति को संबंधित डिस्कॉम के चीफ इंजीनियर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होता है। डिस्कॉम के तकनीकी सर्वे के बाद सभी पुराने सब-मीटरों को हटाकर स्मार्ट प्रीपेड या पोस्टपेड डिस्कॉम मीटर लगा दिए जाते हैं। प्रत्येक फ्लैट ओनर को अपनी सेल डीड और पजेशन लेटर के आधार पर स्वतंत्र उपभोक्ता का वैधानिक दर्जा मिल जाता है, जिससे वे सभी सरकारी बिजली सब्सिडी योजनाओं और टैरिफ छूट का सीधा फायदा उठाने के पात्र बन जाते हैं।