यदि आपके पास 10 साल पुरानी डीजल कार या 15 साल पुरानी पेट्रोल कार है जिसे आपने सालों तक बड़े प्यार से सहेजकर रखा है, तो दिल्ली-एनसीआर और बड़े शहरों में लागू एनजीटी (NGT) के सख्त नियमों ने आपके सामने एक बड़ी मजबूरी खड़ी कर दी है — या तो अपनी चलती-फिरती कार को कबाड़ के भाव स्क्रैप यार्ड में बेच दें या फिर पुलिस द्वारा जब्त होने का डर झेलें। लेकिन अब एक तीसरा और बेहद समझदारी भरा विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है — कार रेट्रोफिटिंग (EV Retrofitting)। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा अधिसूचित नियमों के तहत अब आप अपनी पुरानी कार के धुंआ फेंकने वाले इंजन, साइलेंसर और पेट्रोल टंकी को बाहर निकालकर उसमें आधुनिक इलेक्ट्रिक मोटर और लिथियम बैटरी किट लगवा सकते हैं। इससे न केवल आपकी कार कबाड़ होने से बच जाती है, बल्कि आरटीओ से आधिकारिक 'ग्रीन नंबर प्लेट' पाकर वह अगले 5 से 10 सालों तक प्रदूषण-मुक्त होकर सड़कों पर शान से दौड़ सकती है।
🚗 कार EV रेट्रोफिटिंग: मुख्य बातें (2026)
- कानूनी मान्यता: MoRTH अधिसूचना G.S.R. 167(E) और AIS-123 सुरक्षा मानकों के तहत पूरी तरह कानूनी।
- लागत व बचत: ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक का एकमुश्त खर्च, रनिंग कॉस्ट ₹7.50/किमी से घटकर मात्र ₹1.10/किमी।
- रेंज व परफॉर्मेंस: शहर में दैनिक आवागमन के लिए सिंगल चार्ज पर 90 से 160 किलोमीटर की शानदार रेंज।
- ग्रीन आरसी: आरटीओ द्वारा ईंधन प्रकार 'Electric' दर्ज कर 100% वैध ग्रीन नंबर प्लेट जारी की जाती है।
1. पुरानी कार को EV में बदलना क्यों फायदेमंद है?
नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर आज भी ₹10 लाख से ₹20 लाख तक का भारी बजट चाहिए। इसके विपरीत अपनी पुरानी कार को रेट्रोफिट कराने के कई ठोस फायदे हैं:
- स्क्रैपिंग पॉलिसी की मार से बचाव: दिल्ली-एनसीआर में 10 साल डीजल व 15 साल पेट्रोल गाड़ियों पर कड़ा प्रतिबंध है (विस्तृत जानकारी के लिए दिल्ली-NCR GRAP-3 वाहन बैन व ₹20,000 चालान नियम देखें)। दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर पूर्ण प्रतिबंध है। रेट्रोफिटिंग के बाद गाड़ी को जीरो एमिशन ईवी का दर्जा मिल जाता है और आरटीओ से नई फिटनेस मिल जाती है।
- ईंधन खर्च में 80% से ज्यादा की सीधी बचत: यदि आप शहर में रोजाना 40 से 50 किमी गाड़ी चलाते हैं, तो पेट्रोल पर हर महीने ₹9,000 से ₹12,000 का खर्च आता है। इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट होने के बाद वही मासिक सफर मात्र ₹1,200 से ₹1,500 के बिजली बिल में पूरा हो जाता है। यानी किट की पूरी लागत 2 से 3 साल में पेट्रोल की बचत से वसूल हो जाती है।
- जीरो मेंटेनेंस: पारंपरिक इंजन में मोबिल ऑयल, ऑयल फिल्टर, स्पार्क प्लग, क्लच प्लेट, टाइमिंग बेल्ट और रेडिएटर कूलेंट जैसे दर्जनों पुर्जे होते हैं जो बार-बार खराब होते हैं। इलेक्ट्रिक मोटर में सिर्फ एक घूमने वाला रोटर होता है, जिससे इंजन सर्विसिंग का झंझट हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
- पर्यावरण संरक्षण: आपकी गाड़ी से टेलपाइप एमिशन (धुआं) शून्य हो जाता है, जिससे शहर की हवा को जहरीले धुएं से बचाने में आपका सीधा योगदान होता है।
2. MoRTH और ARAI/ICAT के कड़े कानूनी मानक (AIS-123)
सड़क पर सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। इसलिए सरकार ने किसी भी लोकल मैकेनिक द्वारा अनधिकृत रूप से कार कन्वर्ट करने पर सख्त रोक लगाई है:
⚠️ केवल प्रमाणित किट ही कानूनी रूप से मान्य
मोटर वाहन नियमों के तहत केवल वही रेट्रोफिट किट आरटीओ में पंजीकृत हो सकती है जिसे ARAI (Automotive Research Association of India, पुणे) या ICAT (International Centre for Automotive Technology, मानेसर) द्वारा कड़े क्रैश टेस्ट, थर्मल रनअवे टेस्ट और वाटरप्रूफ टेस्ट के बाद स्वीकृति मिली हो।
प्रत्येक किट को ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड AIS-123 (Part 1, 2, and 3) और बैटरी पैक को AIS-156 के सुरक्षा मानकों को पूरा करना अनिवार्य होता है। इसमें आपातकालीन स्थिति में हाई-वोल्टेज बिजली स्वतः कट जाने (Automatic Inertia Cut-off) और आग से बचाव के विशेष प्रबंध होते हैं।
3. ईवी रेट्रोफिट किट के मुख्य पार्ट्स और खर्च का ब्रेकडाउन
जब आपकी पुरानी कार को रेट्रोफिट वर्कशॉप में ले जाया जाता है, तो उसमें से इंजन, ट्रांसमिशन/गियरबॉक्स, एग्जॉस्ट पाइप और फ्यूल टैंक को हटा दिया जाता है। उनकी जगह निम्नलिखित उन्नत पार्ट्स लगाए जाते हैं:
- इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन मोटर: आमतौर पर 15 kW से 30 kW पीक पावर वाली हाई-टॉर्क एसी इंडक्शन या परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (PMSM)।
- लिथियम बैटरी पैक (LFP / NMC): 10 kWh से 20 kWh क्षमता का IP67 वाटरप्रूफ बैटरी पैक, जो बूट स्पेस (डिक्की) या कार के नीचे चेसिस पर संतुलित तरीके से लगाया जाता है।
- स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS): हर बैटरी सेल के तापमान और वोल्टेज पर नजर रखने वाला कंप्यूटर सिस्टम जो ओवरचार्जिंग और हीटिंग से बचाता है।
- मोटर कंट्रोलर व इन्वर्टर: एक्सीलेटर पैडल से मिलने वाले सिग्नल को मोटर की रफ्तार में बदलने वाला मुख्य दिमाग।
- ऑन-बोर्ड एसी चार्जर (3.3 kW): जो आम घरेलू 15A पावर सॉकेट से गाड़ी को चार्ज करने में सक्षम बनाता है।
- डीसी-डीसी कनवर्टर व वैक्यूम पंप: कार की हेडलाइट, हॉर्न, पावर विंडो और पावर ब्रेक के लिए 12 वोल्ट बिजली और ब्रेक वैक्यूम प्रदान करने वाले उपकरण।
खर्च और माइलेज का यथार्थवादी गणित (Cost vs Range Table):
| कार का प्रकार व मॉडल | बैटरी पैक क्षमता | सिंगल चार्ज वास्तविक रेंज | अनुमानित कुल किट खर्च | चार्जिंग समय (घर पर) |
|---|---|---|---|---|
| छोटी हैचबैक (Maruti 800, Alto, Zen) | 10 kWh LFP | 75 से 90 किलोमीटर | ₹2,40,000 से ₹3,00,000 | 3.5 से 4 घंटे |
| पॉपुलर हैचबैक (WagonR, Santro, i10) | 14 kWh LFP | 100 से 120 किलोमीटर | ₹3,20,000 से ₹3,80,000 | 4 से 5 घंटे |
| कॉम्पैक्ट सेडान (Dzire, Etios, Amaze) | 18 kWh LFP | 130 से 150 किलोमीटर | ₹4,00,000 से ₹4,80,000 | 5 से 6 घंटे |
| कॉम्पैक्ट एसयूवी / जिप्सी (Gypsy, Brezza, EcoSport) | 22 kWh LFP | 140 से 170 किलोमीटर | ₹4,80,000 से ₹5,80,000 | 6 से 7 घंटे |
4. वर्कशॉप से आरटीओ तक: कार को EV बनाने के 5 चरण
गाड़ी को कानूनी रूप से कन्वर्ट कराने के 5 चरण:
- अधिकृत रेट्रोफिट सेंटर का चुनाव: राज्य परिवहन विभाग द्वारा सूचीबद्ध किसी MoRTH अधिकृत रेट्रोफिट सेंटर पर जाएं और अपनी कार के चेसिस नंबर के लिए उपलब्ध ARAI अप्रूव्ड किट का चयन करें।
- चेसिस व सस्पेंशन की तकनीकी जांच: वर्कशॉप के इंजीनियर कार के सस्पेंशन, चेसिस जंग और बॉडी स्ट्रक्चर की जांच करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि गाड़ी बैटरी के वजन को सुरक्षित रूप से संभाल सकती है।
- इंजन निष्कासन व किट फिटमेंट: मूल इंजन और फ्यूल सिस्टम को हटाकर मोटर, बैटरी पैक, वायरिंग हार्नेस और कंट्रोलर को मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ फिट किया जाता है।
- इंस्टॉलेशन सर्टिफिकेट व फॉर्म 22A/22C: किट लगाने के बाद वर्कशॉप आपको ARAI टेस्ट रिपोर्ट, किट का सीरियल नंबर, और नियम 125 के तहत विधिवत भरा हुआ फॉर्म 22A तथा फॉर्म 22C जारी करता है।
- आरटीओ में वाहन निरीक्षण (MVI Inspection): वाहन को संबंधित आरटीओ ले जाया जाता है जहां मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) गाड़ी की वायरिंग, ब्रेक, मोटर पंचिंग और सुरक्षा उपकरणों की भौतिक जांच करता है।
📌 काम की सलाह: नई ग्रीन नंबर प्लेट लगने के बाद टोल प्लाजा पर ब्लैकलिस्टिंग से बचने के लिए FASTag Annual KYC और वन व्हीकल वन फास्टैग नियम अपडेट करें।
5. RTO में ग्रीन नंबर प्लेट और फिटनेस रिन्यूअल की प्रक्रिया
निरीक्षण पास होने के बाद आरटीओ के वाहन पोर्टल (vahan.parivahan.gov.in) पर निम्नलिखित बदलाव दर्ज किए जाते हैं:
- ईंधन प्रकार का परिवर्तन: आपकी पंजीकरण पुस्तिका (RC) में 'Fuel Type' को Petrol/Diesel से बदलकर 'Electric' कर दिया जाता है।
- नया अनलोडेड वजन: बैटरी और मोटर के वास्तविक वजन के अनुसार आरसी में गाड़ी का नया कर्ब वेट (Curb Weight) दर्ज होता है।
- फिटनेस की नई अवधि: वाहन को अगले 5 वर्षों के लिए नया फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।
- ग्रीन नंबर प्लेट: आरटीओ द्वारा आधिकारिक तौर पर हरी पृष्ठभूमि वाली हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट आवंटित की जाती है (सामान्य नंबर प्लेट हेतु HSRP ऑनलाइन बुकिंग गाइड देखें)। आरटीओ द्वारा आधिकारिक तौर पर हरी पृष्ठभूमि वाली हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP Green Plate) आवंटित की जाती है, जो यह प्रमाणित करती है कि यह 100% वैध इलेक्ट्रिक वाहन है।
6. पेट्रोल/डीजल बनाम रेट्रोफिटेड EV: मास्टर तुलनात्मक तालिका
| मापदंड / बिंदु | पुरानी पेट्रोल/डीजल कार | ARAI रेट्रोफिटेड इलेक्ट्रिक कार | बचत व प्रभाव (Impact) | कानूनी व वित्तीय स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| प्रति किमी रनिंग कॉस्ट | ₹7.00 से ₹8.50 प्रति किमी | ₹1.00 से ₹1.25 प्रति किमी | 85% से अधिक ईंधन खर्च में सीधी कमी | मासिक हजारों रुपये की शुद्ध बचत |
| दिल्ली-एनसीआर में वैधता | 10/15 वर्ष बाद स्क्रैपिंग का नोटिस | 5 से 10 वर्ष की अतिरिक्त कानूनी मान्यता | अपनी पसंदीदा कार को कबाड़ होने से बचाना | वैध आरसी व ग्रीन नंबर प्लेट अधिकार |
| वार्षिक मेंटेनेंस खर्च | ₹8,000 से ₹15,000 (ऑयल, बेल्ट, फिल्टर) | ₹1,500 से ₹2,500 (सिर्फ ब्रेक पैड व कूलेंट) | इंजन खराबी और सर्विसिंग से हमेशा की मुक्ति | न्यूनतम सर्विसिंग झंझट |
| सवारी आराम व शोर | इंजन का कंपन (Vibration) और आवाज | 100% साइलेंट ड्राइव, गियर बदलने की जरूरत नहीं | शहर के ट्रैफिक में ऑटोमैटिक कार जैसा आराम | थकान-मुक्त ड्राइविंग अनुभव |
| रीसेल वैल्यू व स्क्रैप मूल्य | मात्र ₹25,000 से ₹50,000 स्क्रैप वैल्यू | ₹2.5 लाख से ₹4 लाख तक रीसेल मूल्य | संपत्ति का मूल्य दोबारा बहाल होना | बाजार में इलेक्ट्रिक कार के रूप में मांग |
पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में बदलना न केवल पुरानी यादों और पसंदीदा वाहन को बचाने का सबसे भावुक और व्यावहारिक फैसला है, बल्कि यह आर्थिक समझदारी का भी बड़ा प्रमाण है। हमेशा ध्यान रखें कि सस्ते के लालच में किसी गैर-प्रमाणित लोकल किट का इस्तेमाल न करें। केवल ARAI/ICAT अप्रूव्ड किट और अधिकृत वर्कशॉप से ही रेट्रोफिटिंग कराएं ताकि आपकी यात्रा हमेशा सुरक्षित और कानूनी रूप से निश्चिंत रहे।
7. मोटर व बैटरी टेक्नोलॉजी का तकनीकी विश्लेषण (LFP vs NMC)
पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में बदलते समय सबसे महत्वपूर्ण निर्णय सही बैटरी केमिस्ट्री और मोटर का चुनाव करना होता है। भारतीय मौसम में गर्मियों में तापमान 45°C से 48°C तक पहुँच जाता है, इसलिए गलत बैटरी पैक चुनना खतरनाक हो सकता है:
| तकनीकी मापदंड | लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) | निकल मैंगनीज कोबाल्ट (NMC) | भारतीय परिस्थितियों के लिए सर्वश्रेष्ठ |
|---|---|---|---|
| थर्मल स्थिरता (गर्मी सहनशीलता) | 270°C तक सुरक्षित, आग का जोखिम शून्य | 210°C पर थर्मल रनअवे का जोखिम | LFP 100% सुरक्षित भारतीय गर्मियों में |
| साइकिल लाइफ (Life Span) | 2,500 से 3,500 फुल चार्ज साइकिल (8-10 वर्ष) | 1,200 से 1,800 चार्ज साइकिल (4-6 वर्ष) | LFP 2 गुना ज्यादा टिकाऊ |
| ऊर्जा घनत्व (Energy Density) | मध्यम (बैटरी थोड़ी भारी होती है) | उच्च (हल्की बैटरी, अधिक रेंज) | हल्की सेडान कारों में NMC उपयोग |
| कीमत व मेंटेनेंस | किफायती व कम लागत प्रति kWh | कोबाल्ट के कारण महंगी | LFP बजट रेट्रोफिटिंग के लिए मानक |
यही कारण है कि भारत में ARAI द्वारा स्वीकृत 90% से अधिक रेट्रोफिट किट में LFP प्रिज़मैटिक सेल (Prismatic Cells) का ही उपयोग किया जाता है। ये बैटरियां गड्ढों और धक्कों को आसानी से झेल लेती हैं और इनमें आग लगने की संभावना न के बराबर होती है।
8. भारत में प्रमुख ARAI/ICAT प्रमाणित रेट्रोफिट ब्रांड्स
सड़क परिवहन मंत्रालय के वाहन पोर्टल पर पंजीकृत कुछ प्रमुख और विश्वसनीय रेट्रोफिटिंग कंपनियां निम्नलिखित हैं:
- Loop Moto (लूप मोटो): मारुति सुजुकी वैगनआर, ऑल्टो, स्विफ्ट और डिजायर के लिए प्रमाणित किट प्रदाता। इनके पास 12 kWh से 18 kWh तक के बैटरी विकल्प उपलब्ध हैं।
- BharatMobi (भारत मोबी): कमर्शियल फ्लीट और पैसेंजर कारों के लिए मॉड्यूलर ईवी रेट्रोफिट किट बनाने वाली अग्रणी कंपनी।
- E-Trio (ई-ट्रियो): भारत की पहली कंपनी जिसे पुरानी मारुति कारों और टाटा एस के लिए ARAI से आधिकारिक रेट्रोफिटिंग सर्टिफिकेशन मिला था।
- Starya Mobility: दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए उन्नत PMSM मोटर और स्मार्ट रीजेनरेटिव ब्रेकिंग किट।
9. 5 साल का संपूर्ण वित्तीय विश्लेषण (TCO & ROI Calculator)
आइए गणित के जरिए समझें कि पुरानी कार को स्क्रैप करने के बजाय ₹3.2 लाख खर्च करके EV बनाना कितना बड़ा समझदारी भरा कदम है:
5 साल और 50,000 किमी चलने पर तुलनात्मक खर्च:
- पेट्रोल कार का खर्च: 50,000 किमी ÷ 14 किमी/लीटर माइलेज = 3,571 लीटर पेट्रोल। ₹100 प्रति लीटर के हिसाब से पेट्रोल खर्च = ₹3,57,100। इसके अलावा 5 साल में 10 बार इंजन सर्विसिंग = ₹60,000। कुल खर्च = ₹4,17,100।
- रेट्रोफिटेड EV का खर्च: 50,000 किमी के लिए कुल बिजली खपत (10 यूनिट प्रति 100 किमी) = 5,000 यूनिट बिजली। ₹7.50 प्रति घरेलू यूनिट के हिसाब से बिजली खर्च = ₹37,500। 5 साल में मेंटेनेंस = ₹12,000। कुल ऑपरेटिंग खर्च = ₹49,500।
- 5 साल में शुद्ध बचत: ₹4,17,100 - ₹49,500 = ₹3,67,600 की सीधी नकद बचत!
यानी किट लगाने में जो ₹3.2 लाख खर्च हुए, वह 50,000 किमी चलने से पहले ही पूरी तरह वापस वसूल हो गए और आपके पास एक शानदार ग्रीन नंबर प्लेट वाली इलेक्ट्रिक कार हमेशा के लिए बची रह गई!
10. मानसून में जलभराव, हाई-वोल्टेज सुरक्षा और इंश्योरेंस क्लेम
भारतीय मानसून में सड़कों पर 1 से 2 फीट तक पानी भर जाना आम बात है। कई लोगों को डर होता है कि अगर पुरानी कार में इलेक्ट्रिक किट लगवा ली, तो क्या पानी में गाड़ी ले जाने पर करंट लग जाएगा या बैटरी खराब हो जाएगी?
⚡ मानसून और वाटर-वेडिंग सुरक्षा प्रोटोकॉल:
- IP67 और IP68 वाटरप्रूफ शील्डिंग: सरकार द्वारा स्वीकृत सभी ARAI किट में बैटरी पैक, ट्रैक्शन मोटर और सभी हाई-वोल्टेज ओरेंज केबल्स पूरी तरह सीलबंद और वाटरप्रूफ (IP67 सर्टिफाइड) होते हैं। इसका मतलब है कि गाड़ी 1 मीटर गहरे पानी में 30 मिनट तक बिना किसी शॉर्ट सर्किट या करंट रिसाव के सुरक्षित रह सकती है।
- ऑटोमैटिक आइसोलेशन मॉनिटरिंग: कार के कंट्रोलर में एक विशेष 'इंसुलेशन मॉनिटरिंग रिले' (IMD) लगा होता है। यदि गाड़ी के किसी भी हिस्से में पानी घुसने से बिजली का रिसाव 1 मिली-एम्पीयर भी होता है, तो सिस्टम 10 मिलीसेकंड के भीतर मुख्य बैटरी कॉन्टैक्टर को काटकर बिजली प्रवाह पूरी तरह बंद कर देता है, जिससे अंदर बैठे यात्रियों को करंट लगने का कोई खतरा नहीं रहता।
- इमरजेंसी मैनुअल कट-ऑफ स्विच: हर रेट्रोफिटेड कार में ड्राइवर की सीट के पास या बोनट में एक लाल रंग का 'Emergency Battery Disconnect' बटन दिया जाता है। किसी भी अप्रिय स्थिति या दुर्घटना में इसे दबाते ही बैटरी का संपर्क गाड़ी की बॉडी से पूरी तरह कट जाता है।
- बीमा क्लेम का विशेष नियम: कार कन्वर्ट होने के बाद पॉलिसी में 'Hydrostatic Lock / EV Battery Protection Add-on' जरूर शामिल करवाएं ताकि भारी बाढ़ में गाड़ी डूबने पर भी बैटरी रिप्लेसमेंट का पूरा क्लेम बीमा कंपनी से आसानी से मिल सके।
11. रेट्रोफिटेड EV की बैटरी लाइफ 10 साल तक चलाने के 5 प्रैक्टिकल टिप्स
इलेक्ट्रिक कार में सबसे महंगा और महत्वपूर्ण घटक उसकी लिथियम बैटरी होती है। यदि आप सही चार्जिंग आदतों का पालन करेंगे, तो आपकी रेट्रोफिटेड बैटरी बिना किसी गिरावट के 8 से 10 साल तक बेहतरीन बैकअप देगी:
बैटरी स्वास्थ्य और लाइफ बढ़ाने के नियम:
- 20% से 80% का सुनहरा नियम (Golden Rule): दैनिक ड्राइविंग में बैटरी को कभी भी 10% से नीचे डिस्चार्ज न होने दें और सामान्यतः 85% से 90% तक ही चार्ज करें। बैटरी को हफ्ते में सिर्फ एक बार 100% तक चार्ज करें ताकि सभी सेल का ऑटोमैटिक बैलेंसिंग (Cell Balancing) पूरा हो सके।
- धूप में खड़ी करने के तुरंत बाद चार्जिंग न लगाएं: गर्मियों में लंबी ड्राइव के तुरंत बाद जब बैटरी का तापमान अधिक हो, तो तुरंत चार्जिंग प्लग न लगाएं। गाड़ी को 20 से 30 मिनट छांव में ठंडी होने दें, उसके बाद ही चार्जर ऑन करें।
- हमेशा ग्राउंडेड (Earth Protected) सॉकेट का प्रयोग करें: घर में 15 एम्पीयर के सॉकेट में अर्थिंग (Earthing) मजबूत होनी चाहिए। खराब अर्थिंग से चार्जर के आंतरिक घटकों को नुकसान पहुँच सकता है।
- सॉफ्ट ड्राइविंग और रीजेनरेटिव ब्रेकिंग: ट्रैफिक में अचानक तेज एक्सीलेटर दबाने से बचें। स्मूथ ड्राइविंग करने से कंट्रोलर का तापमान नियंत्रित रहता है और रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से ब्रेक लगाते ही 10% से 15% बिजली वापस बैटरी में स्टोर हो जाती है।
- महीने में एक बार बीएमएस डायग्नोस्टिक्स: अपनी अधिकृत वर्कशॉप से साल में दो बार बीएमएस का कंप्यूटर डायग्नोस्टिक स्कैन करवाएं ताकि किसी भी कमजोर सेल का समय रहते पता लगाकर उसे रिपेयर किया जा सके।