digital ⏱️ 16 मिनट पढ़ें 📅 2026-10-13 14:00:00

इनकम टैक्स AIS vs Form 26AS मिसमैच नोटिस: SFT हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन, ₹10 लाख कैश डिपॉजिट व ऑनलाइन सुधार

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सीए विनीत अग्रवाल
वरिष्ठ कर एवं व्यक्तिगत वित्त सलाहकार

आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल, ई-वेरिफिकेशन नोटिस, धारा 133(6), एसएफटी रिपोर्टिंग और टैक्स ऑडिट अनुपालन पर 14 वर्षों का विशेषज्ञ अनुभव।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

यदि आपके दाखिल किए गए ITR और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में शेयर बिक्री, डिविडेंड या ₹10 लाख से अधिक के बैंक डिपॉजिट में अंतर होता है, तो आयकर विभाग धारा 133(6) या 143(1) का ई-वेरिफिकेशन नोटिस भेजता है। eportal.incometax.gov.in पर AIS टैब में जाकर प्रत्येक एंट्री पर ऑनलाइन फीडबैक सबमिट करके इस नोटिस का निपटारा बिना किसी पेनल्टी के किया जा सकता है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • AIS बनाम 26AS का अंतर: 26AS केवल कटे हुए टीडीएस/टीसीएस को दिखाता है, जबकि AIS आपकी सभी संपत्तियों, शेयरों, क्रेडिट कार्ड खर्चों और बैंक ब्याज का 360-डिग्री ब्योरा रखता है
  • SFT रिपोर्टिंग नियम 114E: बचत खाते में सालभर में ₹10 लाख या चालू खाते में ₹50 लाख नकद जमा होते ही बैंक अनिवार्य रूप से आयकर विभाग को रिपोर्ट करता है
  • ऑनलाइन फीडबैक सुविधा: यदि AIS में कोई गलत, डुप्लीकेट या किसी अन्य व्यक्ति का ट्रांजैक्शन दिख रहा है, तो विभाग के पोर्टल पर 'Information is denied' दर्ज किया जा सकता है
  • संशोधित रिटर्न (Revised Return): यदि कोई आय दिखाना भूल गए हैं, तो धारा 139(5) के तहत 31 दिसंबर से पहले बिना किसी जुर्माने के रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं
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इनकम टैक्स ई-वेरिफिकेशन नोटिस का अलर्ट: ITR फाइलिंग के बाद यदि आपको आयकर विभाग से एसएमएस या ईमेल आया है कि "There is a mismatch in your ITR and AIS information", तो इसे नजरअंदाज करने की भूल न करें। विभाग का ऑटोमेटेड एआई सिस्टम अब बैंक खातों, शेयर ब्रोकरों और क्रेडिट कार्ड कंपनियों से सीधे डेटा मिलाता है। सही समय पर जवाब न देने पर धारा 270A के तहत 200% तक पेनल्टी लग सकती है।

1. AIS और Form 26AS में क्या अंतर है? मिसमैच क्यों होता है?

अधिकांश करदाता केवल Form 26AS देखकर अपना रिटर्न भर देते हैं और यहीं सबसे बड़ी चूक होती है:

  • Form 26AS (टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट): यह केवल वही जानकारी दिखाता है जहां वास्तव में TDS (स्रोत पर कर कटौती) या TCS कटा है, जैसे कंपनी से मिली सैलरी पर टीडीएस या बैंक एफडी पर कटा टैक्स।
  • AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट): यह आपका संपूर्ण वित्तीय खाता-बही है। इसमें वे सभी वित्तीय गतिविधियां दर्ज होती हैं जिन पर भले ही ₹1 का भी टीडीएस न कटा हो—जैसे बचत खाते का ₹5,000 का ब्याज, शेयर बाजार में इंट्राडे ट्रेडिंग का टर्नओवर, म्यूचुअल फंड स्विच, क्रेडिट कार्ड का ₹2 लाख का बिल या प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री।
  • मिसमैच का कारण: जब कोई करदाता अपने ITR में बचत खाते का ब्याज या म्यूचुअल फंड का कैपिटल गेन्स दिखाना भूल जाता है, लेकिन वह AIS में दर्ज होता है, तो सिस्टम स्वतः मिसमैच नोटिस ट्रिगर कर देता है।

2. SFT रिपोर्टिंग की 6 प्रमुख सीमाएं: बैंक क्या-क्या जानकारी विभाग को देते हैं?

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आयकर नियम, 1962 के नियम 114E (धारा 285BA) के तहत बैंकों, डाकघरों, रजिस्ट्रारों और कंपनियों के लिए हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन्स को 'Statement of Financial Transactions' (SFT) के रूप में रिपोर्ट करना अनिवार्य है:

  • 1. बचत खाते में नकद जमा (SFT-005): वित्तीय वर्ष में एक या अधिक बचत खातों में कुल ₹10 लाख या उससे अधिक नकद जमा।
  • 2. चालू खाते में नकद लेन-देन (SFT-004): चालू खाते में सालभर में ₹50 लाख या उससे अधिक नकद जमा या निकासी।
  • 3. बैंक एफडी में नकद/ड्राफ्ट (SFT-006): एक या अधिक फिक्स्ड डिपॉजिट में कुल ₹10 लाख या उससे अधिक का निवेश।
  • 4. क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान (SFT-007): क्रेडिट कार्ड बिल का ₹1 लाख से अधिक नकद में भुगतान या नेट बैंकिंग/चेक से कुल ₹10 लाख से अधिक का सालाना भुगतान।
  • 5. अचल संपत्ति की रजिस्ट्री (SFT-012): ₹30 लाख या उससे अधिक मूल्य की जमीन, मकान या फ्लैट की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्रार द्वारा सीधे रिपोर्ट)।
  • 6. शेयर, डिबेंचर व म्यूचुअल फंड (SFT-010/011): साल में ₹10 लाख से अधिक के शेयर या म्यूचुअल फंड यूनिट्स की खरीद या रिडेम्पशन।

3. 5-कॉलम तालिका: सामान्य SFT ट्रांजैक्शन, ट्रिगर लिमिट और समाधान

लेन-देन का प्रकार (SFT Code) रिपोर्टिंग सीमा (Threshold) रिपोर्टिंग संस्था मिसमैच का सामान्य कारण समाधान व कानूनी बचाव
बचत खाते में नकद जमा (SFT-005) साल में ₹10,00,000+ नकद बैंक एवं डाकघर पुरानी नकदी बचत, जमीन की नकद बिक्री या रिश्तेदारों से ली गई रकम बैंक विड्रॉल की रसीद या कृषि आय का वैध प्रमाण पेश करें
क्रेडिट कार्ड बिल (SFT-007) साल में ₹10,00,000+ ऑनलाइन या ₹1 लाख कैश क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता बैंक दोस्तों या ऑफिस के खर्चों के लिए अपना पर्सनल कार्ड स्वाइप करना प्रतिपूर्ति (Reimbursement) के वाउचर और बैंक एंट्री मिलान रखें
शेयर व म्यूचुअल फंड (SFT-010) साल में ₹10,00,000+ खरीद/बिक्री डीमैट डिपॉजिटरी (CDSL/NSDL) / AMC ITR में केवल मुनाफा दिखाना, कुल बिक्री टर्नओवर न दिखाना कैपिटल गेन्स शेड्यूल (Schedule CG) में सही ग्रॉस सेल वैल्यू दर्ज करें
प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री (SFT-012) रजिस्ट्री मूल्य ₹30,00,000+ सब-रजिस्ट्रार कार्यालय (Inspector of Stamps) सर्किल रेट और एग्रीमेंट वैल्यू में अंतर या संयुक्त खरीद सेल डीड, बैंक स्टेटमेंट और गृह ऋण (Home Loan) के दस्तावेज रखें
बचत खाता ब्याज (SFT-BINT) कोई सीमा नहीं (प्रत्येक ₹1 रिपोर्ट) सभी बैंक एवं कोऑपरेटिव बैंक आईटीआर में धारा 80TTA की ₹10,000 छूट सोचकर ब्याज जोड़ना ही भूलना पहले ग्रॉस आय में पूरा ब्याज जोड़ें, फिर 80TTA में छूट क्लेम करें

4. मिसमैच नोटिस आने पर घबराएं नहीं: विभाग के ई-वेरिफिकेशन नियम

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जब विभाग को अंतर दिखता है, तो वे सीधे छापा नहीं मारते बल्कि एक साधारण ई-वेरिफिकेशन प्रश्न पूछते हैं:

  • यह कोई आपराधिक समन नहीं है: पहले चरण में यह केवल एक 'सॉफ्ट इंटिमेशन' या 'प्रस्तावित समायोजन' (Proposed Adjustment under Section 143(1)(a)) होता है।
  • समय-सीमा: नोटिस मिलने की तारीख से 15 से 30 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पक्ष रखना होता है।
  • यदि गलती आपकी है: यदि आप सचमुच कोई शेयर बिक्री या बैंक ब्याज दिखाना भूल गए थे, तो घबराएं नहीं। 31 दिसंबर से पहले धारा 139(5) के तहत 'रिवाइज्ड रिटर्न' भरें। अतिरिक्त टैक्स और साधारण ब्याज जमा करके मामला पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
  • यदि बैंक ने गलत रिपोर्ट किया है: कई बार बैंक किसी अन्य व्यक्ति का पैन दर्ज कर देते हैं या एक ही एफडी को दो बार जोड़ देते हैं। इसके लिए AIS पोर्टल पर 'फीडबैक' देने का सीधा विकल्प मौजूद है।

5. ई-फाइलिंग पोर्टल पर AIS फीडबैक सबमिट करने के 5 स्टेप्स

  1. स्टेप 1: ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें: आधिकारिक पोर्टल eportal.incometax.gov.in पर जाएं। अपना पैन और पासवर्ड डालकर लॉगिन करें।
  2. स्टेप 2: 'AIS' टैब खोलें: ऊपर दिए गए मुख्य मेनू में 'Services' पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन से 'Annual Information Statement (AIS)' चुनें। एक नई सुरक्षित विंडो खुलेगी।
  3. स्टेप 3: वित्तीय वर्ष चुनें और TIS/AIS देखें: संबंधित असेसमेंट ईयर चुनें। 'AIS' टाइल पर क्लिक करें और 'Part B - SFT Information' या 'Taxes Paid' में जाएं।
  4. स्टेप 4: विवादित ट्रांजैक्शन पर 'Feedback' दर्ज करें: जिस एंट्री में मिसमैच है, उसके सामने दिए गए तीर के निशान पर क्लिक करें। दाईं ओर 'Optional Feedback' बटन दबाएं। वहां 7 विकल्प मिलेंगे:
    • Information is correct (जानकारी सही है)
    • Information is not fully correct (आंशिक रूप से सही है)
    • Information relates to other PAN/Year (अन्य व्यक्ति या वर्ष से संबंधित है)
    • Information is duplicate (जानकारी दोहरी जुड़ी है)
    • Information is denied (जानकारी पूरी तरह गलत/अस्वीकृत है)
  5. स्टेप 5: सबमिट करें और संशोधित TIS डाउनलोड करें: उपयुक्त कारण चुनकर रिमार्क्स लिखें और सबमिट करें। 24 घंटे के भीतर आपका 'Taxpayer Information Summary' (TIS) अपडेट हो जाएगा और विभाग का मिसमैच अलर्ट बंद हो जाएगा।

6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या बचत खाते में ₹10 लाख नकद जमा करने पर टैक्स लगेगा?

जवाब: केवल नकद जमा करने पर कोई टैक्स नहीं लगता, बशर्ते आपके पास उस नकदी का वैध कानूनी स्रोत (Source of Cash) हो—जैसे पहले बैंक से निकाला गया पैसा, कृषि आय, या दुकान की घोषित बिक्री। लेकिन यदि आप पैसे का स्रोत साबित नहीं कर पाते, तो धारा 69A के तहत इसे 'Unexplained Money' मानकर 60% टैक्स + 25% सरचार्ज (कुल 83.7%) वसूला जा सकता है।

Q2. क्या दोस्तों के लिए क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करने पर नोटिस आ सकता है?

जवाब: हाँ! यदि सालभर में क्रेडिट कार्ड का बिल ₹10 लाख से अधिक हो जाता है, तो बैंक सीधे SFT रिपोर्ट करता है। आयकर विभाग आपके आईटीआर की आय से इस खर्च का मिलान करता है। यदि आपकी घोषित आय ₹5 लाख है और क्रेडिट कार्ड बिल ₹12 लाख, तो विभाग आय का स्रोत पूछ सकता है। इसलिए दूसरों के लिए बार-बार भारी स्वाइप करने से बचें।

Q3. क्या AIS में फीडबैक देने के लिए सीए की आवश्यकता होती है?

जवाब: साधारण मिसमैच (जैसे बैंक ब्याज का अंतर, डुप्लीकेट एंट्री या गलत पैन) के लिए कोई भी नागरिक खुद ऊपर बताए गए 5 स्टेप्स से ऑनलाइन फीडबैक दे सकता है। लेकिन यदि मामला बड़ी जमीन की बिक्री, अनलिस्टेड शेयर या धारा 148 के पुराने री-असेसमेंट नोटिस का हो, तो योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की सलाह लेना समझदारी है।

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