digital ⏱️ 17 मिनट पढ़ें 📅 2026-10-18 08:00:00

Digital Arrest क्या है? कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं — फर्जी CBI व पुलिस वीडियो कॉल से कैसे बचें और 1930 पर तुरंत शिकायत कैसे करें

VS
एडवोकेट विक्रम प्रताप सिंह
वरिष्ठ साइबर विधि एवं डिजिटल अपराध सलाहकार

साइबर कानून, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन प्रक्रियाओं पर 16 वर्षों का कानूनी अनुभव।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

गृह मंत्रालय (MHA) और सीबीआई (CBI) ने बार-बार स्पष्ट किया है कि भारत के कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई चीज नहीं है। कोई भी पुलिस, कस्टम या जांच एजेंसी किसी को WhatsApp या Skype वीडियो कॉल पर कैमरा चालू रखकर बंधक नहीं बना सकती और न ही 'वेरिफिकेशन' के नाम पर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। ऐसा कोई भी कॉल आए तो बिना डरे फोन काटें और तुरंत 1930 पर कॉल करें।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • कानून में डिजिटल अरेस्ट का शून्य वजूद: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) या पुलिस एक्ट में वीडियो कॉल पर अरेस्ट का कोई नियम नहीं
  • फर्जी पुलिस यूनिफॉर्म और जाली सुप्रीम कोर्ट आदेश: ठग फर्जी बैकग्राउंड, नकली मुहरें और जाली वारंट दिखाकर मनोवैज्ञानिक डर पैदा करते हैं
  • पैसे ट्रांसफर करने का दबाव: 'RBI सीक्रेट वेरिफिकेशन अकाउंट' या 'सिक्योरिटी डिपॉजिट' के नाम पर पैसे मांगना 100% साइबर फ्रॉड है
  • गोल्डन ऑवर में 1930 पर शिकायत: पैसे कटने के 2 घंटे के भीतर 1930 डायल करने से फ्रॉड अकाउंट तुरंत ब्लॉक होकर पैसे सुरक्षित हो सकते हैं
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हाल के महीनों में पूरे देश में एक नए प्रकार के संगठित साइबर अपराध ने हड़कंप मचा रखा है, जिसे 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) का नाम दिया गया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों और आम नागरिकों को वीडियो कॉल पर यह कहकर डराया जाता है कि उनके आधार कार्ड या फोन नंबर से करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या मानव तस्करी की गई है। इसके बाद उन्हें घंटों या दिनों तक वीडियो कॉल पर 'कैमरा चालू रखकर कमरे में कैद' रहने को मजबूर किया जाता है और उनकी गाढ़ी कमाई के लाखों-करोड़ों रुपये 'जांच' के नाम पर ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं। भारत सरकार ने इस पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

⚡ कानूनी सच (Legal Fact)

भारत के किसी भी कानून में वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार करने या 'डिजिटल अरेस्ट' करने का कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी जांच एजेंसी (CBI, ED, NIA, कस्टम्स या राज्य पुलिस) कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करती। ऐसा कोई भी कॉल आए तो वह 100% धोखाधड़ी है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन: 1930 | शिकायत पोर्टल: cybercrime.gov.in

1. डिजिटल अरेस्ट क्या है और स्कैमर्स कैसे फंसाते हैं?

डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह साइबर अपराधियों द्वारा तैयार किया गया एक परिष्कृत मनोवैज्ञानिक षड्यंत्र है। इसमें ठग निम्नलिखित 3 चरणों में शिकार को फंसाते हैं:

  1. प्रारंभिक झटका (The Initial Shock): आपको किसी कूरियर कंपनी (FedEx, DHL) या टेलीकॉम विभाग (DoT) के नाम से रोबोटिक कॉल आता है कि आपके नाम पर ताइवान या कंबोडिया जा रहे पार्सल में 5 पासपोर्ट और 140 ग्राम एमडीएमए (ड्रग्स) पकड़े गए हैं।
  2. फर्जी पुलिस/CBI ट्रांसफर: कॉल को तुरंत 'मुंबई क्राइम ब्रांच' या 'सीबीआई हेडक्वार्टर' ट्रांसफर करने का नाटक किया जाता है। स्क्रीन पर पुलिस यूनिफॉर्म पहने, कंधे पर स्टार लगाए और पीछे पुलिस स्टेशन के बैरिकेड व वायरलेस सेट वाला दृश्य दिखाया जाता है।
  3. गोपनीयता और कैमरे का दबाव: पीड़ित से कहा जाता है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। यदि आपने फोन काटा या किसी परिजन को बताया, तो आपके खिलाफ तत्काल गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी होगा। इसके बाद उन्हें कैमरे के सामने घंटों बिठाकर सारा बैंक बैलेंस 'आरबीआई सत्यापन खाते' में ट्रांसफर करने को कहा जाता है।

2. 5-कॉलम तुलना तालिका: असली पुलिस कार्रवाई vs फर्जी डिजिटल अरेस्ट

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मापदंड असली कानून (CrPC / BNSS) फर्जी डिजिटल अरेस्ट (स्कैम) कानूनी अधिकार तुरंत क्या करें?
समन / नोटिस लिखित समन धारा 41A के तहत घर आता है WhatsApp पर फर्जी PDF और नोटिस भेजा जाता है बिना लिखित नोटिस गिरफ्तारी अवैध फर्जी लेटरहेड पर भरोसा न करें
पूछताछ का माध्यम संबंधित थाने या दफ्तर में शारीरिक रूप से Skype, WhatsApp या Zoom वीडियो कॉल पर वीडियो कॉल पर बंधक नहीं बनाया जा सकता कॉल तुरंत डिस्कनेक्ट करें
पैसे की मांग सरकारी एजेंसी कभी पैसे ट्रांसफर नहीं करवाती "सिक्योरिटी डिपॉजिट" या RBI खाते में ट्रांसफर सरकारी खातों में ऑनलाइन पैसा नहीं मांगा जाता एक भी रुपया किसी खाते में न भेजें
वारंट की वैधता सक्षम न्यायालय द्वारा भौतिक मुहर व हस्ताक्षर Supreme Court व ED के जाली लोगो वाला PDF ऑनलाइन वारंट दिखाकर पैसे मांगना गैरकानूनी स्थानीय थाने में पुष्टि करें

3. 'ड्रग पार्सल' और 'सिम कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग' की फर्जी कहानी की पहचान

ठग आम तौर पर यह दावा करते हैं कि नरेश गोयल (जेट एयरवेज) या किसी बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आपके आधार कार्ड से 24 बैंक खाते खोले गए हैं। ध्यान रखें कि किसी भी वित्तीय अपराध में पुलिस कभी भी व्हाट्सएप पर एफआईआर की कॉपी नहीं भेजती।

4. गृह मंत्रालय (MHA) व CBI की आधिकारिक एडवाइजरी और कानूनी अधिकार

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गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नागरिकों को किसी भी ऐसे कॉल से डरने की जरूरत नहीं है। पुलिस किसी भी नागरिक को अपने ही घर में डिजिटल तरीके से नजरबंद नहीं कर सकती।

5. फर्जी वीडियो कॉल आने पर तुरंत क्या करें? (5 इमरजेंसी स्टेप्स)

  1. Step 1: बिना डरे तुरंत कॉल काटें: किसी भी धमकी की परवाह किए बिना तुरंत रेड बटन दबाकर कॉल डिस्कनेक्ट करें।
  2. Step 2: परिवार से बात करें: कमरे का दरवाजा खोलें और अपने परिजनों या किसी कानूनी जानकार को पूरी बात बताएं।
  3. Step 3: कोई भी ऐप इंस्टॉल न करें: ठग अक्सर स्क्रीन शेयरिंग ऐप (AnyDesk, TeamViewer) डाउनलोड करने को कहते हैं, इसे तुरंत अनइंस्टॉल करें।
  4. Step 4: 1930 पर सूचना दें: तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करके नंबर नोट करवाएं।
  5. Step 5: स्थानीय थाने जाएं: अपने नजदीकी थाने जाकर लिखित शिकायत या सनहा दर्ज कराएं।

6. यदि पैसे ट्रांसफर हो गए हों तो 'गोल्डन ऑवर' में 1930 पर कैसे रिपोर्ट करें?

साइबर अपराध में पहले 2 घंटे 'गोल्डन ऑवर' कहलाते हैं। 1930 पर कॉल करते ही नोडल अधिकारी बैंकों के सेंट्रलाइज्ड पोर्टल के जरिए ठगों के खाते में गए पैसों को फ्रीज करने का आदेश देते हैं।

7. संचार साथी पोर्टल के 'चक्षु' (Chakshu) पर फर्जी नंबर ब्लॉक कराने का तरीका

दूरसंचार विभाग के sancharsaathi.gov.in पर जाकर 'Chakshu' विकल्प चुनें और फ्रॉड कॉल का नंबर दर्ज करें ताकि उस सिम कार्ड को पैन-इंडिया स्तर पर बंद किया जा सके।

8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: क्या भारतीय कानून में पुलिस वीडियो कॉल पर अरेस्ट कर सकती है?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में 'डिजिटल अरेस्ट' का कोई प्रावधान नहीं है। यह पूरी तरह जाली है।

Q2: क्या मुझे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पैसे जमा करने होंगे?

उत्तर: कभी नहीं। भारत की कोई भी सरकारी एजेंसी या अदालत बेगुनाही जांचने के लिए किसी खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं करवाती।

यह भी पढ़ें: अपने बैंक खाते को सेफ रखने के लिए देखें RBI रिकवरी एजेंट के कड़े नियम व कानूनी बचाव और साथ ही पढ़ें निष्क्रिय पैन कार्ड चालू करने के नियम।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या भारतीय कानून में पुलिस वीडियो कॉल पर अरेस्ट कर सकती है?

A. बिल्कुल नहीं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में 'डिजिटल अरेस्ट' का कोई प्रावधान नहीं है। यह पूरी तरह जाली है।

Q. क्या मुझे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पैसे जमा करने होंगे?

A. कभी नहीं। भारत की कोई भी सरकारी एजेंसी या अदालत बेगुनाही जांचने के लिए किसी खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं करवाती।

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