digital ⏱️ 22 मिनट पढ़ें 📅 27 सितंबर 2026

Govt Borrowing Plan H2 FY 2026-27: ₹7.86 लाख करोड़ की सरकारी उधारी योजना और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs) की जानकारी

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राजेश कुमार मीना
वरिष्ठ नीति एवं ग्रामीण विकास विश्लेषक

विगत 8 वर्षों से केंद्र व राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), ग्रामीण विकास एवं डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर निरंतर शोधपरक विश्लेषण।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (H2) के लिए केंद्र सरकार ने ₹7.86 लाख करोड़ की बाजार उधारी योजना अधिसूचित की है। यह उधारी 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड्स में पूरी की जाएगी, जिसमें ₹15,000 करोड़ के पर्यावरण-अनुकूल सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स शामिल हैं।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • कुल उधारी लक्ष्य ₹7.86 लाख करोड़: वित्त वर्ष 2026-27 के कुल ₹14.01 लाख करोड़ के सकल उधारी लक्ष्य का 56.1% हिस्सा दूसरी छमाही में जुटाया जाएगा।
  • 23 साप्ताहिक नीलामियों का कैलेंडर: 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर फरवरी 2027 के अंतिम सप्ताह तक प्रत्येक सप्ताह ₹30,000 से ₹35,000 करोड़ की व्यवस्थित नीलामी।
  • ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs): सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु 10 और 30 वर्षीय ग्रीन बॉन्ड्स जारी होंगे।
  • WMA सीमा ₹50,000 करोड़: अस्थायी नकदी बेमेल को संभालने के लिए आरबीआई के साथ वेज एंड मीन्स एडवांसेज (WMA) की सीमा ₹50,000 करोड़ तय की गई।
  • RBI Retail Direct Portal: आम नागरिक बिना किसी ब्रोकरेज या कमीशन के सीधे आरबीआई से 7.10% से 7.35% की आकर्षक ब्याज दरों पर सरकारी बॉन्ड खरीद सकेंगे।
मापदंड / वित्तीय पैमाना (Metric) H2 FY 2026-27 आधिकारिक उधारी आंकड़े बाजार, बैंकों और आम निवेशकों पर प्रभाव
सकल उधारी राशि (Gross Borrowing) ₹7.86 लाख करोड़ (कुल वार्षिक लक्ष्य का 56.1%) राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन और विकास कार्यों के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्धता
नीलामियों का प्रारूप (Auctions) 23 साप्ताहिक नीलामियां (अक्टूबर 2026 से मार्च 2027) तरलता (Liquidity) में अचानक गिरावट नहीं, बॉन्ड यील्ड्स पूरी तरह स्थिर
सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs) ₹15,000 करोड़ (दो किस्तों में 10 व 30 वर्ष अवधि) नवीकरणीय ऊर्जा व ई-मोबिलिटी प्रोजेक्ट्स को सस्ता और दीर्घकालिक फंड
ट्रेजरी बिल्स (T-Bills) प्रत्येक सप्ताह ₹19,000 करोड़ (91, 182 व 364 दिन) अल्पकालिक नकदी प्रबंधन और कॉर्पोरेट्स को सुरक्षित लिक्विड निवेश विकल्प
WMA नकदी सीमा (Ways & Means) ₹50,000 करोड़ (आवश्यकता पड़ने पर ट्रिगर) सरकारी राजस्व आवक में देरी होने पर आरबीआई से तात्कालिक वित्तीय सुरक्षा
खुदरा निवेशकों के लिए प्लेटफॉर्म RBI Retail Direct (rbiretaildirect.org.in) जीरो ब्रोकरेज, 100% सॉवरेन सुरक्षा और सावधि जमा (FD) से बेहतर रिटर्न

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (H2) के लिए केंद्र सरकार की उधारी योजना

त्वरित उत्तर (Direct Answer): केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के H2 कालखंड में कुल ₹7.86 लाख करोड़ की उधारी जुटाने का रोडमैप जारी किया है। यह राशि राजमार्गों, रेलवे, रक्षा आधुनिकीकरण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी पूंजीगत व्यय (Capex) को पूरा करने हेतु डेटेड सिक्योरिटीज की 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिए जुटाई जाएगी।

किसी भी संप्रभु राष्ट्र के आर्थिक विकास और वित्तीय प्रबंधन में सरकार का उधारी कार्यक्रम (Government Borrowing Programme) केंद्रीय भूमिका निभाता है। बजट 2026-27 में केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड 11.11 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का लक्ष्य रखा था। इस विशाल विकास बजट को पूरा करने और वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.5% के दायरे में बनाए रखने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आपसी सहमति से दूसरी छमाही (H2) का उधारी कैलेंडर तैयार किया है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1) में सरकार ने ₹6.15 लाख करोड़ की उधारी सफलतापूर्वक पूरी कर ली थी, जो कुल लक्ष्य का लगभग 43.9% थी। दूसरी छमाही (H2) में सरकार शेष ₹7.86 लाख करोड़ जुटाएगी। इस उधारी कैलेंडर की सबसे बड़ी खासियत इसका अत्यंत संतुलित परिपक्वता ढांचा (Maturity Bucket) है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में तरलता का संकट नहीं होगा और निजी क्षेत्र के लिए बैंक ऋण की दरों (Interest Rates) पर कोई प्रतिकूल दबाव नहीं पड़ेगा। भारत की राजकोषीय नीति में उधारी का मुख्य उद्देश्य उपभोग खर्चों की पूर्ति करना नहीं, बल्कि ऐसी परिसंपत्तियां (Assets) तैयार करना है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए आर्थिक उत्पादकता को कई गुना बढ़ा सकें।

जब सरकार नए एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, नए सेमीकंडक्टर फैब पार्क और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का निर्माण करती है, तो उससे सीमेंट, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स जैसे दर्जनों उद्योगों में मांग पैदा होती है। इससे देश के युवाओं के लिए लाखों नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। इसलिए सरकारी उधारी को केवल एक देनदारी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सबसे बड़े वित्तीय इंजन के रूप में देखा जाना चाहिए।

परिपक्वता अवधि (Maturity Buckets) के अनुसार उधारी का विभाजन

बाजार के विभिन्न निवेशकों—जैसे बीमा कंपनियों, पेंशन फंडों और बैंकों की मांग को ध्यान में रखते हुए उधारी को 8 अलग-अलग अवधियों में विभाजित किया गया है:

  • अल्पकालिक बॉन्ड्स (3 से 5 वर्ष): कुल उधारी का लगभग 18% हिस्सा, जिसे मुख्य रूप से वाणिज्यिक बैंक अपनी सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) आवश्यकताओं के लिए खरीदते हैं। यह बैंकों को स्थिर प्रतिफल और उच्च तरलता प्रदान करता है।
  • मध्यम अवधि बॉन्ड्स (7 से 10 वर्ष): कुल उधारी का 36% हिस्सा, जिसमें भारत का बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड (Benchmark 10Y G-Sec) शामिल है। यह पूरी अर्थव्यवस्था की ब्याज दरों का पैमाना तय करता है और कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के लिए मार्गदर्शक होता है।
  • दीर्घकालिक बॉन्ड्स (15 से 30 वर्ष): कुल उधारी का 28% हिस्सा, जिसे जीवन बीमा निगम (LIC), ईपीएफओ (EPFO) और पेंशन फंड सुरक्षित दीर्घकालिक रिटर्न के लिए खरीदते हैं ताकि वे अपने पॉलिसीधारकों और पेंशनरों के दावों का समय पर भुगतान कर सकें।
  • अति-दीर्घकालिक बॉन्ड्स (40 से 50 वर्ष): कुल उधारी का 18% हिस्सा, जो देश में दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण के लिए अल्ट्रा-लॉन्ग अवधि की पूंजी सुनिश्चित करता है। भारत वैश्विक स्तर पर उन चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जहां 50-वर्षीय सरकारी बॉन्ड सफलता से ट्रेड होते हैं।

₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs) और 23 साप्ताहिक नीलामियों का शेड्यूल

भारत ने पेरिस जलवायु समझौते और 2070 तक 'नेट जीरो' (Net Zero Carbon Emissions) बनने के अपने राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने के लिए हरित परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश शुरू किया है। इसी दिशा में वित्त मंत्रालय ने H2 कैलेंडर में ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (Sovereign Green Bonds - SGrBs) जारी करने की घोषणा की है। यह हरित वित्तपोषण भारत को पर्यावरण के प्रति सजग वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करता है।

ग्रीन बॉन्ड्स से मिलने वाले पैसे का उपयोग केवल उन्हीं सार्वजनिक परियोजनाओं में किया जा सकता है जो कार्बन उत्सर्जन को घटाने में सीधी मदद करती हैं। उदाहरण के तौर पर पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर ग्रिड, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission), भारतीय रेलवे का 100% विद्युतीकरण और सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों (PM-eBus Sewa) का विस्तार। इन बॉन्डों से प्राप्त निधियों की निगरानी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा विशेष ऑडिट के माध्यम से की जाती है ताकि एक भी रुपये का दुरुपयोग न हो।

H2 FY 2026-27 साप्ताहिक नीलामी और ग्रीन बॉन्ड कैलेंडर

नीलामी सप्ताह / माह साप्ताहिक उधारी राशि प्रमुख बॉन्ड परिपक्वता (Tenor) विशेष श्रेणी (Special Tranche)
अक्टूबर 2026 (सप्ताह 1 से 4) ₹34,000 करोड़ प्रति सप्ताह 5 वर्ष, 10 वर्ष, 30 वर्ष और 50 वर्ष सामान्य डेटेड सिक्योरिटीज
नवंबर 2026 (सप्ताह 1 व 2) ₹35,000 करोड़ प्रति सप्ताह 3 वर्ष, 10 वर्ष और 15 वर्ष प्रथम ग्रीन बॉन्ड किश्त: ₹7,500 करोड़ (10-वर्षीय SGrB)
नवंबर 2026 (सप्ताह 3 व 4) ₹32,000 करोड़ प्रति सप्ताह 7 वर्ष, 10 वर्ष और 40 वर्ष सामान्य डेटेड सिक्योरिटीज
दिसंबर 2026 (सप्ताह 1 से 4) ₹33,000 करोड़ प्रति सप्ताह 5 वर्ष, 10 वर्ष, 15 वर्ष और 30 वर्ष सामान्य डेटेड सिक्योरिटीज
जनवरी 2027 (सप्ताह 1 व 2) ₹35,000 करोड़ प्रति सप्ताह 10 वर्ष, 30 वर्ष और 50 वर्ष द्वितीय ग्रीन बॉन्ड किश्त: ₹7,500 करोड़ (30-वर्षीय SGrB)
जनवरी-फरवरी 2027 (अंतिम चरण) ₹30,000 करोड़ प्रति सप्ताह 3 वर्ष, 7 वर्ष और 15 वर्ष उधारी कार्यक्रम का औपचारिक समापन

यह 23 नीलामियों का पारदर्शी शेड्यूल पहले से घोषित होने से देश-विदेश के संस्थागत निवेशकों को अग्रिम योजना बनाने में आसानी होती है। इससे बाजार में किसी प्रकार का सट्टा या अफवाह नहीं फैलती और बॉन्ड्स की ब्याज दरें अत्यंत स्थिर बनी रहती हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों को जेपी मॉर्गन (JP Morgan Emerging Markets Bond Index) और ब्लूमबर्ग इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में शामिल किए जाने के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की मांग में अभूतपूर्व उछाल आया है, जिससे सरकार को कम लागत पर वैश्विक पूंजी मिल रही है।

ट्रेजरी बिल (T-Bills) और Ways and Means Advances (WMA ₹50,000 करोड़) का विवरण

लंबी अवधि की उधारी के अलावा केंद्र सरकार अपने दैनिक और अल्पकालिक नकदी प्रवाह (Short-term Cash Flow) को प्रबंधित करने के लिए दो महत्वपूर्ण वित्तीय साधनों का उपयोग करती है: ट्रेजरी बिल्स (T-Bills) और वेज एंड मीन्स एडवांसेज (Ways and Means Advances - WMA)। यह अल्पकालिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली देश में बैंकिंग तरलता को एकदम सुचारू बनाए रखने में मदद करती है।

ट्रेजरी बिल मूल रूप से शून्य जोखिम वाले अल्पावधि सरकारी निवेश पत्र होते हैं, जो 1 वर्ष से कम अवधि के लिए जारी किए जाते हैं। H2 FY 2026-27 के दौरान सरकार प्रत्येक बुधवार को ₹19,000 करोड़ के ट्रेजरी बिलों की नीलामी करेगी, जिसमें तीन अलग-अलग श्रेणियां शामिल हैं:

  • 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल: ₹7,000 करोड़ प्रति सप्ताह (अत्यधिक तरल, 3 माह की अवधि)। यह मुख्य रूप से कॉर्पोरेट ट्रेजरी और लिक्विड म्यूचुअल फंड्स द्वारा अपनी अतिरिक्त नकदी को सुरक्षित रूप से पार्क करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • 182-दिवसीय ट्रेजरी बिल: ₹6,000 करोड़ प्रति सप्ताह (अर्ध-वार्षिक तरलता प्रबंधन)। यह बैंकों और प्राथमिक डीलरों को 6 महीने की अवधि के लिए निश्चित यील्ड प्रदान करता है।
  • 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल: ₹6,000 करोड़ प्रति सप्ताह (1 वर्ष की अवधि वाले सुरक्षित पत्र)। यह 1 वर्ष की समय सीमा में जोखिम-मुक्त ब्याज दर का आधिकारिक बेंचमार्क है।

WMA सीमा ₹50,000 करोड़ का महत्व और संचालन नियम

आरबीआई अधिनियम की धारा 17(5) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक केंद्र सरकार को अस्थायी नकदी कमी से निपटने के लिए एक विशेष ओवरड्राफ्ट जैसी सुविधा देता है, जिसे WMA कहा जाता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने सर्वसम्मति से WMA सीमा ₹50,000 करोड़ निर्धारित की है।

जब सरकार का कर राजस्व (GST और प्रत्यक्ष कर) तिमाही के अंत में आता है लेकिन दैनिक विकास खर्च और वेतन भुगतान निरंतर जारी रहते हैं, तो इस अस्थायी अंतर को पाटने के लिए WMA का उपयोग किया जाता है। यदि सरकार इस निर्धारित सीमा का 75% उपयोग कर लेती है, तो आरबीआई बाजार में नए ट्रेजरी बिल जारी करके तरलता वापस सोख लेता है। इससे देश में मुद्रास्फीति (Inflation) पूरी तरह नियंत्रण में रहती है। WMA पर ब्याज दर वर्तमान रेपो दर (Repo Rate) के बराबर होती है, जबकि ओवरड्राफ्ट की स्थिति में रेपो दर से 2% अधिक ब्याज देय होता है, जिसे सरकार लगातार 10 कार्यदिवसों से अधिक नहीं रख सकती।

आम निवेशकों, म्यूचुअल फंड्स और बॉन्ड मार्केट पर उधारी योजना का प्रभाव

कई लोग यह मानते हैं कि सरकारी उधारी केवल बड़े बैंकों या अर्थशास्त्रियों का विषय है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसका सीधा प्रभाव हर आम भारतीय की जेब, उसके होम लोन की ईएमआई, बैंक एफडी की ब्याज दरों और म्यूचुअल फंड के रिटर्न पर पड़ता है। वित्तीय बाजार आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, और सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड सीधे तौर पर वाणिज्यिक बैंकों की ब्याज दर संरचना को निर्धारित करती है।

1. बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और लोन की ब्याज दरों पर असर

जब सरकार भारी मात्रा में उधारी लेती है और बाजार में तरलता संतुलित रहती है, तो 10-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड 7.15% से 7.30% के दायरे में स्थिर रहती है। इसका अर्थ यह है कि बैंकों को अपनी जमा दरों (FD Rates) को घटाने की जल्दबाजी नहीं होगी। वरिष्ठ नागरिकों और आम बचतकर्ताओं को बैंकों में 7.5% से 8.0% तक के सुरक्षित एफडी रिटर्न मिलते रहेंगे। साथ ही, होम लोन और ऑटो लोन की ब्याज दरें भी स्थिर और वहनीय बनी रहेंगी, जिससे रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में उपभोक्ता मांग मजबूत रहेगी।

2. डेट म्यूचुअल फंड्स (Debt Mutual Funds) के निवेशकों को लाभ

यदि आप गिल्ट फंड्स (Gilt Funds), कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड्स या बैंकिंग एंड पीएसयू डेट फंड्स में एसआईपी (SIP) करते हैं, तो सरकार का यह पारदर्शी और अनुमानित उधारी कैलेंडर आपके लिए बहुत सुखद समाचार है। बाजार में बॉन्ड की कीमतों में अचानक भारी उतार-चढ़ाव नहीं होगा, जिससे डेट फंड्स में स्थिर और जोखिम-मुक्त 7% से 8.5% तक का वार्षिक रिटर्न मिलने की प्रबल संभावना बनी रहेगी। निवेशकों को पूंजीगत हानि (Capital Loss) का कोई भय नहीं रहेगा।

3. सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स में विदेशी ईएसजी (ESG) फंडों का प्रवाह

वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और सामाजिक उत्तरदायित्व (ESG) पर आधारित निवेश फंडों के पास खरबों डॉलर की पूंजी है। भारत के ₹15,000 करोड़ के नए ग्रीन बॉन्ड्स में वैश्विक संस्थागत निवेशकों की भारी मांग देखी जा रही है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को मजबूती मिलती है और भारतीय रुपये (INR) की विनिमय दर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत और स्थिर बनी रहती है। यह आयातित मुद्रास्फीति, विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव को कम करने में सहायक सिद्ध होता है।

4. निजी क्षेत्र के लिए 'क्राउडिंग आउट' (Crowding Out) से बचाव

अर्थशास्त्र में जब सरकार अत्यधिक कर्ज ले लेती है, तो निजी उद्योगपतियों के लिए बैंकों में कर्ज का पैसा नहीं बचता, जिसे 'क्राउडिंग आउट' कहा जाता है। चूंकि सरकार ने अपनी उधारी को 23 हफ्तों में बहुत छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा है, इसलिए निजी कॉरपोरेट्स को अपनी नई फैक्ट्रियां लगाने और विस्तार करने के लिए बाजार से सस्ता कर्ज आसानी से मिलता रहेगा।

आरबीआई (RBI) के ई-कुबेर पोर्टल द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में रिटेल निवेशकों की भागीदारी

अतीत में सरकारी बॉन्ड बाजार केवल बड़े वाणिज्यिक बैंकों, बीमा कंपनियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का एकाधिकार था। एक सामान्य नागरिक के लिए सरकारी बॉन्ड में सीधे निवेश करना लगभग असंभव था। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी क्रांतिकारी योजना 'RBI Retail Direct Scheme' और कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म e-Kuber के जरिए इस व्यवस्था को पूरी तरह लोकतांत्रिक बना दिया है।

अब देश का कोई भी आम नागरिक अपने घर बैठे सीधे भारतीय रिजर्व बैंक के साथ अपना व्यक्तिगत गिल्ट खाता (Retail Direct Gilt Account - RDG) खोल सकता है और केंद्र सरकार के बॉन्ड, ट्रेजरी बिल और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बिना किसी बिचौलिए या दलाली के खरीद सकता है। यह दुनिया के सबसे सुरक्षित वित्तीय उत्पाद में आम जनता की सीधी भागीदारी का स्वर्णिम अवसर है।

RBI Retail Direct खाते के प्रमुख लाभ

  • शत-प्रतिशत संप्रभु गारंटी (Zero Default Risk): आपका पूरा मूलधन और ब्याज सीधे भारत सरकार द्वारा गारंटीकृत होता है। किसी भी वाणिज्यिक बैंक में 5 लाख रुपये से अधिक की जमा राशि पर जो जोखिम होता है, वह सरकारी बॉन्ड में 0% है। यहां आपका 100% धन सुरक्षित है।
  • आकर्षक अर्धवार्षिक ब्याज: सरकारी डेटेड बॉन्ड्स पर साल में दो बार सीधे आपके बैंक खाते में ब्याज (Coupon Payment) जमा होता है, जो नियमित पेंशन की तरह काम करता है।
  • आजीवन निश्चित आय: यदि आप 30 या 40 वर्ष के सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं, तो अगले 40 वर्षों तक आपको बिना किसी कटौती के निश्चित 7.2% से 7.4% का वार्षिक रिटर्न मिलता रहेगा, जो रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए सर्वोत्तम है।
  • शून्य शुल्क और ब्रोकरेज: खाता खोलने, बॉन्ड खरीदने, रखने या बेचने पर आरबीआई ₹1 का भी कमीशन या मेंटेनेंस चार्ज नहीं लेता। पूरा लाभ सीधे निवेशक को मिलता है।
  • सेकेंडरी मार्केट में बेचने की सुविधा: यदि आपको परिपक्वता से पहले अचानक पैसे की जरूरत पड़ती है, तो आप आरबीआई के NDS-OM प्लेटफॉर्म पर अपने बॉन्ड को अन्य निवेशकों को तुरंत बेचकर नकदी प्राप्त कर सकते हैं।

RBI Retail Direct पर ऑनलाइन खाता कैसे खोलें? (Step-by-Step Guide)

चरण 1: आधिकारिक पोर्टल पर जाएं

अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप पर आरबीआई के आधिकारिक पोर्टल rbiretaildirect.org.in पर जाएं और 'Open RDG Account' पर क्लिक करें।

चरण 2: पैन और आधार विवरण दर्ज करें

अपना पैन नंबर (PAN) और आधार नंबर दर्ज करें। आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा, जिससे आपकी डिजिटल पहचान सत्यापित होगी।

चरण 3: बचत बैंक खाते की जानकारी

अपना बैंक खाता नंबर और आईएफएससी कोड भरें। आरबीआई आपके खाते में 1 रुपये भेजकर (Penny Drop Verification) खाते की सक्रियता की तुरंत पुष्टि करेगा।

चरण 4: वीडियो ई-केवाईसी (Video KYC)

स्क्रीन पर दिए गए विकल्प से 2 मिनट की वीडियो कॉल पूरी करें, जिसमें आपको अपना मूल पैन कार्ड दिखाना होगा और एक सादे कागज पर हस्ताक्षर करने होंगे।

चरण 5: नीलामी में बोली लगाएं (Place Bid)

खाता सक्रिय होते ही आपको लॉगिन आईडी और पासवर्ड मिल जाएगा। हर हफ्ते जब सरकार नई डेटेड सिक्योरिटीज या ग्रीन बॉन्ड की नीलामी करेगी, तो आप न्यूनतम ₹10,000 से अपनी बोली लगा सकते हैं और यूपीआई या नेटबैंकिंग से तुरंत भुगतान कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (H2) में कुल कितने रुपये की बाजार उधारी जुटाएगी?

उत्तर: केंद्र सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से H2 कालखंड में 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिए कुल ₹7.86 लाख करोड़ की डेटेड सिक्योरिटीज जारी करेगी।

Q2: सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs) सामान्य सरकारी बॉन्ड्स से किस प्रकार भिन्न होते हैं?

उत्तर: ग्रीन बॉन्ड्स से मिलने वाला पूरा पैसा केवल सौर ऊर्जा, पवन चक्कियों और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी पर्यावरण-अनुकूल हरित परियोजनाओं में निवेश करने के लिए कानूनन आरक्षित होता है।

Q3: क्या एक आम नागरिक आरबीआई से सीधे सरकारी बॉन्ड में न्यूनतम कितने रुपये का निवेश कर सकता है?

उत्तर: आम नागरिक 'RBI Retail Direct' पोर्टल पर बिल्कुल मुफ्त खाता खोलकर न्यूनतम ₹10,000 की राशि से बिना किसी ब्रोकरेज के सीधे सरकारी बॉन्ड खरीद सकते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (H2) में कुल कितने रुपये की बाजार उधारी जुटाएगी?

A. केंद्र सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से H2 कालखंड में 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिए कुल ₹7.86 लाख करोड़ की डेटेड सिक्योरिटीज जारी करेगी।

Q. सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs) सामान्य सरकारी बॉन्ड्स से किस प्रकार भिन्न होते हैं?

A. ग्रीन बॉन्ड्स से मिलने वाला पूरा पैसा केवल सौर ऊर्जा, पवन चक्कियों और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी पर्यावरण-अनुकूल हरित परियोजनाओं में निवेश करने के लिए कानूनन आरक्षित होता है।

Q. क्या एक आम नागरिक आरबीआई से सीधे सरकारी बॉन्ड में न्यूनतम कितने रुपये का निवेश कर सकता है?

A. आम नागरिक 'RBI Retail Direct' पोर्टल पर बिल्कुल मुफ्त खाता खोलकर न्यूनतम ₹10,000 की राशि से बिना किसी ब्रोकरेज के सीधे सरकारी बॉन्ड खरीद सकते हैं।

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