वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (H2) के लिए केंद्र सरकार की उधारी योजना
भारत सरकार के आर्थिक प्रबंधन और राजकोषीय विवेक (Fiscal Prudence) के तहत बाज़ार उधारी कार्यक्रम (Market Borrowing Programme) केंद्रीय बजट के लक्ष्यों को पूरा करने का सबसे महत्वपूर्ण साधन होता है। 26 सितंबर 2026 को पत्र सूचना कार्यालय (PIB Release ID: 2315024) के माध्यम से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (H2 - Second Half) के लिए अपने बाज़ार ऋण कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा की है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में केंद्र सरकार ने सकल बाज़ार उधारी (Gross Market Borrowing) का वार्षिक लक्ष्य ₹14.01 लाख करोड़ निर्धारित किया था। वित्तीय वर्ष की पहली छमाही (H1: अप्रैल से सितंबर 2026) में सरकार ने बाज़ार से ₹6.15 लाख करोड़ सफलतापूर्वक जुटाए हैं। अब दूसरी छमाही (H2: अक्टूबर 2026 से मार्च 2027) में शेष ₹7.86 लाख करोड़ (लगभग 56.1%) बाज़ार से जुटाए जाएंगे।
यह उधारी कार्यक्रम देश के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.9% से नीचे रखने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। भारतीय अर्थव्यवस्था की तीव्र विकास दर और मजबूत कर संग्रह (GST व प्रत्यक्ष कर) के कारण सरकार को बाजार से अप्रत्याशित अतिरिक्त उधारी लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी है, जिससे घरेलू ऋण बाज़ार में ब्याज दरों में स्थिरता का एक सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है।
₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs) और 23 साप्ताहिक नीलामियों का शेड्यूल
सरकार के H2 उधारी कैलेंडर की सबसे बड़ी रणनीतिक विशेषता पर्यावरण अनुकूल पहलों और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए धन जुटाना है। इस चरण में ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs - Sovereign Green Bonds) जारी किए जाएंगे।
23 साप्ताहिक नीलामियों का संगठित ढांचा:
अक्टूबर 2026 के पहले सप्ताह से लेकर मार्च 2027 के अंतिम सप्ताह तक कुल 23 साप्ताहिक नीलामियां (Weekly Auctions) आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक नीलामी में औसतन ₹31,000 करोड़ से ₹35,000 करोड़ के बांड्स बाज़ार में पेश किए जाएंगे, ताकि बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी (तरलता) पर कोई अचानक नकारात्मक दबाव न पड़े।
परिपक्वता अवधि (Tenor-Wise Distribution) और बॉन्ड्स का आवंटन:
सरकार ने अपने ऋण प्रोफाइल को लंबी अवधि के लिए फैलाया है ताकि अल्पावधि में पुनर्भुगतान का बोझ न बढ़े:
- 3-वर्षीय और 5-वर्षीय प्रतिभूतियां: कुल उधारी का लगभग 18% (अल्पकालिक तरलता प्रबंधन)।
- 7-वर्षीय और 10-वर्षीय बेंचमार्क प्रतिभूतियां: कुल उधारी का 36% (संस्थागत निवेशकों व बैंकों की सर्वाधिक पसंदीदा श्रेणी)।
- 15-वर्षीय, 30-वर्षीय और 40-वर्षीय दीर्घकालिक बॉन्ड्स: कुल उधारी का 46% (पेंशन फंड्स, ईपीएफओ और जीवन बीमा कंपनियों के लिए आदर्श)।
H2 FY 2026-27 उधारी कार्यक्रम का विस्तृत विश्लेषण
| प्रतिभूति की श्रेणी / प्रकार | परिपक्वता अवधि (Tenor) | कुल आवंटित राशि | प्रमुख निवेशक समूह |
|---|---|---|---|
| सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs) | 10 वर्ष व 30 वर्ष | ₹15,000 करोड़ | ग्लोबल ESG फंड्स, बीमा कंपनियां |
| बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड्स (G-Secs) | 10-वर्षीय बेंचमार्क | ₹2,10,000 करोड़ | कमर्शियल बैंक, म्यूचुअल फंड्स, FIIs |
| अल्पकालिक डेटेड सिक्योरिटीज | 3 से 7 वर्ष | ₹1,75,000 करोड़ | कॉर्पोरेट ट्रेजरी, रिटेल निवेशक |
| अल्ट्रा-लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स | 30 वर्ष, 40 वर्ष व 50 वर्ष | ₹3,86,000 करोड़ | LIC, ईपीएफओ, सॉवरेन वेल्थ फंड्स |
| कुल H2 सकल उधारी | मिश्रित (23 नीलामियां) | ₹7,86,000 करोड़ | घरेलू व अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशक |
सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs) की ग्रीन टैक्सोनॉमी और वित्त पोषण के पात्र क्षेत्र
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क (Sovereign Green Bond Framework) के अंतर्गत जुटाई गई ₹15,000 करोड़ की पूंजी का उपयोग सख्त अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण मानकों (ICMA ग्रीन बॉन्ड प्रिंसिपल्स) के अनुसार केवल निम्नलिखित 8 प्रमाणित क्षेत्रों में किया जा सकता है:
- अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy): विशाल सौर पार्क (Solar Parks), पवन चक्की ग्रिड, और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्रों की स्थापना।
- स्वच्छ परिवहन (Clean Transportation): भारतीय रेल का 100% विद्युतीकरण, नए फ्रेट कॉरिडोर और देश के टियर-1 व टियर-2 शहरों में मेट्रो रेल का विस्तार।
- जलवायु लचीलापन एवं जल प्रबंधन: नमामि गंगे 2.0 के तहत आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) और वर्षा जल संचयन परियोजनाएं।
- ऊर्जा दक्षता सुधार: औद्योगिक क्लस्टरों में ऊर्जा खपत कम करने वाली प्रौद्योगिकियों और स्मार्ट मीटरिंग का राष्ट्रव्यापी प्रसार।
- प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण: खतरनाक ई-कचरे और प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण (Recycling) के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना।
- वनीकरण और जैव विविधता संरक्षण: तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव संरक्षण (मिष्टी योजना) और हिमालयी वनों का वैज्ञानिक संवर्धन।
ट्रेजरी बिल (T-Bills) और Ways and Means Advances (WMA ₹50,000 करोड़) का विवरण
सरकार की दैनिक और मासिक नकदी प्रवाह (Cash Flow) में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अल्पावधि के वित्तीय उपकरण संचालित करता है:
1. ट्रेजरी बिल (Treasury Bills - T-Bills):
दूसरी छमाही में सरकार प्रत्येक सप्ताह ₹19,000 करोड़ के टी-बिल्स जारी करेगी। इनमें निम्नलिखित तीन श्रेणियां शामिल हैं:
- 91-दिवसीय T-Bills: तत्काल तरलता समायोजन।
- 182-दिवसीय T-Bills: मध्यम अल्पकालिक निधि आवश्यकता।
- 364-दिवसीय T-Bills: एक वर्ष के भीतर नकदी प्रवाह संतुलन।
2. Ways and Means Advances (WMA) सीमा: ₹50,000 करोड़
रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 17(5) के तहत केंद्र सरकार को कर प्राप्तियों और व्यय के अस्थायी असंतुलन को पाटने के लिए दी जाने वाली अल्पकालिक अग्रिम सुविधा को WMA कहा जाता है:
- H2 FY 2026-27 के लिए WMA सीमा: ₹50,000 करोड़ तय की गई है।
- ओवरड्राफ्ट (Overdraft) नियम: यदि सरकार द्वारा WMA सीमा का 75% से अधिक उपयोग किया जाता है, तो आरबीआई सरकार की सहमति से अतिरिक्त ट्रेजरी बिल जारी करके नकदी की आपूर्ति को सामान्य करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सरकार को किसी भी दिन आपातकालीन वित्तीय तंगी का सामना न करना पड़े।
आम निवेशकों, म्यूचुअल फंड्स और बॉन्ड मार्केट पर उधारी योजना का प्रभाव
उधारी कैलेंडर की संतुलित प्रकृति का देश के वित्तीय बाजारों पर व्यापक और सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है:
[सुलभ व व्यवस्थित उधारी कैलेंडर]
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[बॉन्ड यील्ड्स (Yields) में स्थिरता: 10-Yr G-Sec 6.75% - 6.85% पर स्थिर]
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[बैंकों के पास पर्याप्त तरलता (Liquidity): निजी कंपनियों को लोन की कमी नहीं]
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[म्यूचुअल फंड डेट स्कीम्स और FD दरों में आकर्षक और सुरक्षित रिटर्न]
1. होम लोन और कॉरपोरेट लोन ब्याज दरों पर राहत:
जब सरकार अपनी उधारी सीमा को नियंत्रित रखती है और अत्यधिक ऋण नहीं उठाती, तो निजी कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने की गुंजाइश बनी रहती है (Crowding-out effect नहीं होता)। इसके परिणामस्वरूप बैंकों पर लोन की ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव नहीं बनेगा, जिसका सीधा फायदा होम लोन, ऑटो लोन और एमएसएमई लोन लेने वाले आम ग्राहकों को होगा।
2. डेट म्यूचुअल फंड्स (Debt Mutual Funds) के लिए सुनहरा अवसर:
गिल्ट फंड्स (Gilt Funds), कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड्स और बैंकिंग एंड पीएसयू डेट फंड्स में निवेश करने वाले आम नागरिकों को स्थिर और सुरक्षित रिटर्न मिलेगा। 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.8% के आसपास स्थिर रहने से पूंजीगत नुकसान का जोखिम लगभग समाप्त हो जाता है।
3. सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स से जलवायु निवेश को प्रोत्साहन:
₹15,000 करोड़ के ग्रीन बॉन्ड्स से जुटाई गई राशि का उपयोग केवल हरित ऊर्जा (सौर, पवन ऊर्जा), इलेक्ट्रिक वाहन इंफ्रास्ट्रक्चर और वन संरक्षण परियोजनाओं में किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के हरित विकास में सीधे निवेश करने के लिए उत्साहित हैं।
4. वैश्विक बॉन्ड सूचकांक समावेशन (JPMorgan Bond Index Inclusion):
भारतीय सरकारी बॉन्ड्स के वैश्विक सूचकांकों में शामिल होने के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की ओर से निरंतर $25 से $30 बिलियन का डॉलर अंतर्प्रवाह (Inflow) जारी है। इससे भारतीय रुपये (INR) को मजबूती मिली है और आयातित मुद्रास्फीति का दबाव काफी कम हुआ है।
आरबीआई (RBI) के ई-कुबेर पोर्टल द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में रिटेल निवेशकों की भागीदारी
पूर्व में सरकारी प्रतिभूतियों (Government Bonds) की खरीद-फरोख्त केवल बड़े बैंकों, जीवन बीमा निगम (LIC) और म्यूचुअल फंड हाउस तक ही सीमित थी। लेकिन अब भारतीय रिजर्व बैंक की 'RBI Retail Direct' योजना के माध्यम से देश का कोई भी सामान्य नागरिक सीधे केंद्र और राज्य सरकारों के बॉन्ड्स में 100% सुरक्षा के साथ पैसा लगा सकता है।
सरकारी प्रतिभूतियों बनाम पारंपरिक बैंक FD का तुलनात्मक चार्ट
| तुलना का आधार | सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs / SGrB) | कमर्शियल बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) |
|---|---|---|
| सुरक्षा का स्तर | 100% सॉवरेन गारंटी (असीमित सुरक्षा) | DICGC के तहत केवल ₹5 लाख तक बीमा |
| अवधि विकल्प | 91 दिन से लेकर 40 या 50 वर्ष तक | 7 दिन से अधिकतम 10 वर्ष तक |
| टीडीएस (TDS) कटौती | कोई टीडीएस नहीं कटता (शून्य TDS) | ₹40,000 (वरिष्ठों हेतु ₹50K) से अधिक पर 10% TDS |
| तरलता / लिक्विडिटी | NDS-OM बाज़ार में कभी भी बिक्री संभव | समय पूर्व तोड़ने पर 0.5% से 1% पेनल्टी |
| न्यूनतम निवेश | मात्र ₹10,000 (Non-Competitive Bid) | ₹1,000 से ₹10,000 |
रिटेल डायरेक्ट गिल्ट (RDG) खाता खोलने की 5-चरणीय ऑनलाइन प्रक्रिया:
- आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: आरबीआई की अधिकृत वेबसाइट rbiretaildirect.org.in खोलें।
- 'Open RDG Account' चुनें: अपना पैन कार्ड, आधार नंबर और सक्रिय बैंक खाता विवरण दर्ज करें।
- ऑनलाइन वीडियो KYC (V-KYC): आधार-आधारित ओटीपी और वेबकैम के जरिए 2 मिनट में अपनी पहचान सत्यापित करें।
- ई-कुबेर (e-Kuber) नीलामी में बिड लगाएं: खाता सक्रिय होते ही आप प्राथमिक नीलामी (Primary Auctions) में गैर-प्रतिस्पर्धी बोली (Non-Competitive Bidding) लगा सकते हैं।
- न्यूनतम निवेश मात्र ₹10,000: किसी ब्रोकर या कमीशन एजेंट के बिना आप न्यूनतम ₹10,000 से सरकारी बॉन्ड्स, ट्रेजरी बिल्स और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स में निवेश शुरू कर सकते हैं। ब्याज (कूपन पेमेंट) हर 6 महीने में सीधे आपके बैंक खाते में जमा होता है।
बॉन्ड निवेशकों के लिए टैक्स नियम और पोर्टफोलियो आवंटन रणनीति
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक समझदार निवेशक को अपनी कुल बचत का 20% से 30% हिस्सा जोखिम-मुक्त सरकारी डेट सिक्योरिटीज में अवश्य रखना चाहिए:
- कूपन आय पर कर (Interest Taxation): सरकारी प्रतिभूतियों से प्राप्त होने वाला अर्धवार्षिक ब्याज निवेशक की कुल वार्षिक आय में जुड़ता है और उसके संबंधित आयकर स्लैब (Slab Rate) के अनुसार कर योग्य होता है। हालांकि, बैंक एफडी के विपरीत इसमें स्रोत पर कर कटौती (TDS) नहीं होती, जिससे निवेशक के पास पूरे वर्ष नकदी उपलब्ध रहती है।
- पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains): यदि आप बॉन्ड को 1 वर्ष (लिस्टेड सिक्योरिटीज) के बाद द्वितीयक बाज़ार में लाभ पर बेचते हैं, तो उस पर धारा 112 के तहत 12.5% की रियायती दर से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) कर लागू होता है।
- सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स में निवेश का दोहरा लाभ: यह न केवल सुरक्षित आय देता है, बल्कि देश की सौर ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल पहलों में नागरिक की सीधी भागीदारी भी सुनिश्चित करता है।
आरबीआई रिटेल डायरेक्ट निवेशकों के लिए NDS-OM सेकेंडरी ट्रेडिंग व ट्रबलशूटिंग गाइड
यदि आप परिपक्वता अवधि (Maturity Date) से पहले अपने बॉन्ड्स बेचना चाहते हैं, या नीलामी छूट जाने के बाद बाज़ार से बॉन्ड खरीदना चाहते हैं, तो आरबीआई का NDS-OM (Negotiated Dealing System-Order Matching) प्लेटफॉर्म सबसे विश्वसनीय माध्यम है:
1. द्वितीयक बाज़ार (Secondary Market) में खरीद-फरोख्त कैसे करें?
- लॉगिन प्रक्रिया: अपने आरडीजी पोर्टल पर लॉगिन करें और 'Secondary Market' टैब पर जाएं।
- लाइव ऑर्डर बुक (Live Order Book): स्क्रीन पर विभिन्न सरकारी प्रतिभूतियों और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स के मौजूदा भाव (Yield and Clean Price) प्रदर्शित होते हैं।
- ऑर्डर प्लेसमेंट: आप अपनी पसंद का कूपन रेट (उदा. 7.18% GS 2033 या 7.23% Green Bond 2034) चुनकर लिमिट ऑर्डर या मार्केट ऑर्डर लगा सकते हैं।
- T+1 सेटलमेंट चक्र: लेन-देन पूरा होते ही अगले कार्यदिवस (T+1) पर राशि सीधे आपके बैंक खाते में और बॉन्ड आपके आरडीजी डिमैट खाते में क्रेडिट हो जाते हैं।
2. सामान्य तकनीकी समस्याएं और उनका समाधान:
- समस्या: V-KYC के दौरान कैमरा या माइक्रोफोन एरर:
समाधान: सुनिश्चित करें कि आपके ब्राउज़र (Google Chrome / Mozilla Firefox) में कैमरा और लोकेशन की अनुमति सक्षम (Allow) है; वी-केवाईसी केवल सोमवार से शुक्रवार कार्य समय (सुबह 9 से शाम 7 बजे) में ही की जा सकती है। - समस्या: बिड सबमिट होने के बाद बैंक खाते से पैसा न कटना:
समाधान: प्राथमिक नीलामी में पैसा तुरंत नहीं कटता; यह नीलामी आवंटन तिथि (Allotment Date) को यूपीआई मैंडेट या नेटबैंकिंग एस्क्रो से स्वतः डेबिट होता है। - समस्या: अर्धवार्षिक ब्याज बैंक में प्राप्त न होना:
समाधान: अपने बैंक खाते का एनएसीएच (NACH) मैंडेट और आईएफएससी (IFSC) कोड पोर्टल प्रोफाइल में सत्यापित करें; यदि बैंक विलय हुआ है तो नया आईएफएससी अपडेट करना अनिवार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: क्या सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGrBs) में निवेश करना बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से ज्यादा सुरक्षित है?
उत्तर: हां, सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स भारत सरकार की 'सॉवरेन गारंटी' (Sovereign Guarantee) द्वारा समर्थित होते हैं, इसलिए इनमें शून्य डिफ़ॉल्ट जोखिम होता है और यह बैंक एफडी से अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।
प्रश्न 2: आरबीआई रिटेल डायरेक्ट पोर्टल पर खाता खोलने के लिए क्या कोई वार्षिक रखरखाव शुल्क (AMC) लगता है?
उत्तर: नहीं, आरबीआई रिटेल डायरेक्ट पोर्टल पर खाता खोलना और सरकारी बॉन्ड्स खरीदना पूरी तरह निःशुल्क (Zero Fee & Zero Brokerage) है।
प्रश्न 3: क्या आम नागरिक खरीदे गए सरकारी बॉन्ड्स को परिपक्वता (Maturity) से पहले बेच सकते हैं?
उत्तर: हां, निवेशक आरबीआई रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म की 'सेकेंडरी मार्केट ट्रेडिंग विंडो' (NDS-OM) के माध्यम से किसी भी कार्यदिवस पर अपने बॉन्ड्स को बाज़ार मूल्य पर आसानी से बेच सकते हैं।