त्वरित उत्तर (Quick Summary): वैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 29 अक्टूबर 2026 को पूरे दिन व्यापिनी रहेगी, इसलिए धनतेरस और भगवान धन्वंतरि की जयंती 29 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी। सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, नई झाड़ू और साबुत धनिया खरीदने का सबसे शुभ समय सुबह 10:41 से दोपहर 12:05 (चर व लाभ) और शाम 06:31 से रात 08:13 (प्रदोष काल व स्थिर वृषभ लग्न) है। शाम को सूर्यास्त के बाद घर के बाहर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का चार मुखी दीपक जलाकर यम दीपदान करना अनिवार्य है।
धनतेरस 2026: तिथि, महत्व और धनवंतरी जयंती का पावन संयोग
सनातन परंपरा में पांच दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ धनतेरस (धनत्रयोदशी) के साथ होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत का स्वर्ण कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन को भगवान धन्वंतरि की जयंती के साथ-साथ आरोग्य और समृद्धि के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा इस दिन धन के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर और मां लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है।
कहा जाता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई किसी भी शुभ वस्तु में 13 गुना वृद्धि होती है। लेकिन सही तिथि और शुभ चौघड़िया मुहूर्त की सटीक जानकारी न होने के कारण कई बार लोग राहुकाल या अशुभ समय में खरीदारी कर बैठते हैं। आइए पंचांग के अनुसार खरीदारी के श्रेष्ठ चौघड़िया मुहूर्त, यम दीपदान के कठोर नियम और पूजा विधि को बहुत ही सरल, काम की भाषा में समझें।
29 अक्टूबर 2026: खरीदारी व पूजा के 4 शुभ मुहूर्त (चौघड़िया तालिका)
नीचे दी गई तालिका में धनतेरस के दिन खरीदारी और पूजन के सभी श्रेष्ठ मुहूर्तों का ब्यौरा दिया गया है:
| मुहूर्त का प्रकार | सटीक समय सीमा (IST) | लग्न / चौघड़िया | किस कार्य के लिए सर्वोत्तम | महत्वपूर्ण निर्देश |
|---|---|---|---|---|
| सुबह का शुभ मुहूर्त | सुबह 10:41 से दोपहर 12:05 तक | लाभ व अमृत चौघड़िया | सोना, चांदी के सिक्के, आभूषण व बहीखाता | दुकान पर पक्का GST बिल अवश्य लें |
| दोपहर का शुभ मुहूर्त | दोपहर 01:28 से दोपहर 02:52 तक | शुभ चौघड़िया | पीतल के बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स व नई झाड़ू | बर्तन को कभी खाली घर न लाएं, चावल भरें |
| शाम का महामुहूर्त (प्रदोष काल) | शाम 06:31 से रात 08:13 तक | स्थिर वृषभ लग्न (स्थिर संपत्ति) | धनवंतरी-कुबेर पूजा व लक्ष्मी पूजन सामग्री | स्थिर लग्न में की गई पूजा से घर में धन टिकता है |
| यम दीपदान मुहूर्त | शाम 05:48 से शाम 07:05 तक | गोधूलि वेला / सूर्यास्त के बाद | घर के बाहर दक्षिण दिशा में चौमुखा दिया | परिवार के सभी सदस्यों के हाथ धुलवाकर करवाएं |
धनतेरस पर क्या खरीदना सबसे शुभ माना जाता है? (13 गुना बरकत की वस्तुएं)
धनतेरस पर केवल सोना या चांदी खरीदना ही अनिवार्य नहीं है। यदि आपका बजट कम है, तो आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार नीचे दी गई शुभ वस्तुएं खरीदकर भी मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का आशीर्वाद पा सकते हैं:
- पीतल के बर्तन: भगवान धन्वंतरि पीतल के कलश के साथ प्रकट हुए थे। इसलिए पीतल को उनका सबसे प्रिय धातु माना जाता है। इस दिन पीतल का दीपक, लोटा या थाली खरीदना अत्यंत मंगलकारी होता है।
- नई झाड़ू: मत्स्य पुराण के अनुसार झाड़ू को मां लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है। धनतेरस के दिन सींक वाली या फूल झाड़ू खरीदकर घर लाने से दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- साबुत धनिया (धनिया के बीज): ₹10 से ₹20 का साबुत धनिया खरीदना इस दिन का सबसे अचूक और शक्तिशाली टोटका है। दिवाली पूजन के समय इस धनिए को मां लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें और अगले दिन इसे अपनी तिजोरी या गमले में बो दें।
- गोमती चक्र व कौड़ियां: 11 गोमती चक्र या पीली कौड़ियां खरीदकर दिवाली की रात पूजन में रखने से कारोबार में निरंतर वृद्धि होती है।
- सोने या चांदी के सिक्के: जिस पर लक्ष्मी-गणेश जी का अंकन हो और पीछे 6-अंक HUID हॉलमार्क लगा हो।
भूलकर भी न खरीदें ये 4 चीजें: दरिद्रता और वास्तु दोष से बचाव
कई बार लोग अनजाने में धनतेरस के दिन ऐसी चीजें घर ले आते हैं जो वास्तु और शास्त्रों के अनुसार भारी नुकसानदेह मानी जाती हैं:
- लोहा या लोहे से बने औजार: लोहा शनिदेव का कारक माना जाता है। धनतेरस पर लोहे के बर्तन, सरिया या भारी वाहन खरीदना शुभ नहीं होता।
- नुकीली चीजें (चाकू, कैंची, ब्लेड): धारदार वस्तुएं घर में क्लेश और नकारात्मक ऊर्जा लाती हैं।
- कांच और प्लास्टिक का सामान: कांच का संबंध राहु से है। धनतेरस पर कांच के बर्तन या प्लास्टिक की क्रॉकरी खरीदने से घर में आर्थिक अस्थिरता आती है।
- एल्युमिनियम के बर्तन: एल्युमिनियम भी राहु का प्रतीक है और आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। पूजा या रसोई के लिए हमेशा पीतल, तांबा या कांस्य चुनें।
सावधानी (Never Bring Empty Utensils): धनतेरस के दिन जब भी आप दुकान से नया लोटा, थाली या पतीला खरीदें, तो उसे खाली घर न लाएं। घर में प्रवेश करते समय उसमें थोड़ा सा साबुत अक्षत (चावल), बताशा या सिक्का डाल लें। खाली बर्तन घर लाना अशुभ माना जाता है।
यम दीपदान 2026: चौमुखा दिया कब, कहाँ और कैसे जलाएं? (नियम व मंत्र)
धनतेरस की शाम को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए यमराज के निमित्त दीपदान करने का विधान है। यह पूरे वर्ष में एकमात्र ऐसा दिन होता है जब मृत्यु के देवता यमराज की दीप जलाकर पूजा की जाती है:
यम दीपदान की सही विधि:
- दीपक तैयार करें: एक बड़ा चौमुखा मिट्टी का या आटे से बना दीपक लें। उसमें चार रुई की बत्तियां लगाएं।
- तेल और सामग्री: दीपक में शुद्ध सरसों का या तिल का तेल भरें। उसमें एक कौड़ी, थोड़ा सा काला तिल और एक सिक्का डाल दें।
- स्थान और दिशा: सूर्यास्त के बाद घर के सभी कोनों में सामान्य दीये जलाने के बाद सबसे अंत में यम का दीपक जलाएं। इसे घर के मुख्य द्वार की दहलीज के बाहर **दक्षिण दिशा (South Direction)** की ओर मुख करके रखें।
- प्रणाम का नियम: दिया रखने के बाद हाथ जोड़कर यमराज से परिवार के सदस्यों की दीर्घायु और आरोग्य की प्रार्थना करें। दिया रखने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए और सीधे घर के अंदर आ जाएं।
सरल यम दीपदान मंत्र:
"मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥"
(अर्थात्: त्रयोदशी के दीपदान से सूर्यपुत्र यमराज अपने दूतों और काल सहित मुझ पर प्रसन्न हों और अकाल मृत्यु का निवारण करें।)
प्रदोष काल धन्वंतरि व कुबेर पूजा विधि: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
शाम 06:31 से 08:13 के बीच स्थिर वृषभ लग्न में पूजा करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:
- चौकी स्थापना: उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके लकड़ी की एक चौकी पर लाल या पीला नया वस्त्र बिछाएं।
- प्रतिमा स्थापना: चौकी पर भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर यंत्र/मूर्ति स्थापित करें।
- कलश स्थापना: तांबे या पीतल के कलश में जल, गंगाजल, सुपारी और सिक्का डालकर उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें।
- रोली, चंदन व अक्षत: सभी देवों को तिलक लगाएं। भगवान धन्वंतरि को पीले पुष्प और कुबेर जी को सफेद मिष्ठान या खीर का भोग लगाएं।
- औषधि अर्पण: भगवान धन्वंतरि आरोग्य के देवता हैं, इसलिए उनके चरणों में तुलसी दल और घर में इस्तेमाल होने वाली कोई भी आयुर्वेदिक औषधि (जैसे गिलोय, अश्वगंधा या हल्दी की गांठ) अवश्य अर्पित करें।
- आरती व संकल्प: धूप-दीप जलाकर कुबेर चालीसा और लक्ष्मी जी की आरती करें और घर के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
1. क्या धनतेरस 2026 में 28 अक्टूबर को है या 29 अक्टूबर को?
पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 28 अक्टूबर की देर रात शुरू होगी और 29 अक्टूबर को पूरे दिन रहेगी। शास्त्रों के अनुसार जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि व्याप्त होती है, उसी दिन धनतेरस का पर्व मान्य होता है। इसलिए पूरे देश में 29 अक्टूबर 2026 को ही धनतेरस मनाई जाएगी।
2. क्या धनतेरस के दिन झाड़ू की पूजा भी की जाती है?
हाँ, धनतेरस पर नई झाड़ू लाने के बाद उस पर सफेद धागा या मौली (कलावा) बांधा जाता है और रोली-अक्षत से उसका पूजन किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा स्थायी रूप से घर में वास करती है। इस झाड़ू का उपयोग दिवाली के अगले दिन से सफाई में करना चाहिए।
3. यम दीपदान में चार बत्तियां क्यों लगाई जाती हैं?
यमराज का दीपक चारों दिशाओं में दृष्टि और सुरक्षा का प्रतीक होता है। चौमुखा दीपक यह दर्शाता है कि हमारे घर के किसी भी सदस्य पर चारों दिशाओं में से किसी भी दिशा से अकाल मृत्यु, दुर्घटना या संकट न आए।
4. अगर सोना या चांदी खरीदने का बजट न हो तो क्या खरीदें?
यदि सोना या चांदी खरीदना संभव न हो, तो केवल ₹10 का साबुत धनिया, एक नई झाड़ू या रसोई के लिए पीतल का छोटा सा चम्मच या कटोरी खरीदना भी शास्त्रों में सोने की खरीद के समान ही पुण्यकारी माना गया है। भाव और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है।