digital ⏱️ 17 मिनट पढ़ें 📅 2026-10-14 07:00:00

धनतेरस पर कैश में सोना खरीदने के इनकम टैक्स नियम 2026: Section 269ST कैश लिमिट, बिना PAN कार्ड खरीदारी और नोटिस से बचने के नियम

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सीए विनीत अग्रवाल
वरिष्ठ कर एवं कॉर्पोरेट वित्त सलाहकार

व्यक्तिगत कराधान, आयकर अधिनियम की धारा 269ST, वित्तीय लेनदेन विवरण (SFT) और वेल्थ कम्प्लायंस पर 14 वर्षों का व्यावहारिक अनुभव।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

आयकर अधिनियम की धारा 269ST के तहत किसी भी ज्वेलरी शॉप पर एक दिन में, एक बिल पर या एक ही अवसर के लिए ₹2,00,000 या उससे अधिक कैश देना या लेना गैर-कानूनी है। आप कानूनी रूप से अधिकतम ₹1,99,999 तक ही नकद भुगतान कर सकते हैं। ₹2 लाख या उससे ऊपर की किसी भी खरीदारी के लिए बैंकिंग माध्यम (UPI, कार्ड, चेक) अनिवार्य है और नियम 114B के तहत PAN कार्ड देना अनिवार्य है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • ₹1,99,999 की नकद सीमा: ₹2 लाख या उससे अधिक नकद देने पर ज्वेलर पर धारा 271DA के तहत 100% की भारी पेनाल्टी लगती है
  • PAN कार्ड की अनिवार्यता: ₹2 लाख से अधिक के किसी भी सोने के बिल पर PAN या Form 60 देना कानूनन जरूरी है, चाहे भुगतान ऑनलाइन ही क्यों न हो
  • बिल स्प्लिटिंग का जाल: एक ही दिन में या एक ही खरीदारी के दो अलग-अलग ₹1.5 लाख के बिल बनवाना धारा 269ST का उल्लंघन है
  • SFT व AIS रिपोर्टिंग: ज्वेलर द्वारा Form 61A में दर्ज हाई-वैल्यू कैश सेल सीधे आपके इनकम टैक्स Annual Information Statement में दिखती है
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धनतेरस व दिवाली खरीदारों के लिए सख्त चेतावनी: अगर आप इस त्योहारी सीजन में सोने के सिक्के या गहने खरीदने के लिए बैंक से नकद निकालकर ज्वेलरी शोरूम जा रहे हैं, तो ₹2 लाख की वह कानूनी लक्ष्मण रेखा समझ लीजिए जो आपको सीधे आयकर विभाग के रडार पर ला सकती है। कानूनन ₹1,99,999 तक कैश देना पूरी तरह वैध है, लेकिन ₹2,00,000 की रकम छूते ही ज्वेलर पर 100% की पेनाल्टी लगती है और खरीदार का डेटा सीधे इनकम टैक्स पोर्टल पर दर्ज हो जाता है।

1. Section 269ST क्या है: धनतेरस पर कानूनी रूप से कितना कैश दे सकते हैं?

भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269ST को देश में काले धन और भारी नकद लेनदेन पर अंकुश लगाने के लिए लागू किया गया था। इस धारा के अनुसार, कोई भी व्यक्ति या व्यापारी निम्नलिखित तीन स्थितियों में किसी भी व्यक्ति से ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) या उससे अधिक की नकद राशि स्वीकार नहीं कर सकता:

  • स्थिति 'A' (एकल दिन सीमा): किसी एक व्यक्ति से एक पूरे दिन में कुल मिलाकर ₹2 लाख या उससे अधिक का कैश लेना।
  • स्थिति 'B' (एकल लेनदेन सीमा): किसी एक एकल बिल या इनवॉइस के बदले ₹2 लाख या उससे अधिक का नकद भुगतान लेना।
  • स्थिति 'C' (एकल अवसर या इवेंट सीमा): किसी एक अवसर, समारोह (जैसे शादी, त्योहार या गृह प्रवेश) से जुड़े लेनदेन के संबंध में किस्तों में भी ₹2 लाख या अधिक कैश लेना।

पेनाल्टी किसके सिर पड़ती है? ध्यान दें कि धारा 271DA के तहत इस नियम के उल्लंघन की सीधी वैधानिक पेनाल्टी राशि लेने वाले (यानी ज्वेलर) पर लगाई जाती है। यह पेनाल्टी प्राप्त की गई नकद राशि के 100% के बराबर होती है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी ज्वेलर ने आपसे ₹2,50,000 कैश ले लिया, तो आयकर विभाग उस ज्वेलर पर पूरे ₹2,50,000 का अतिरिक्त जुर्माना ठोक देगा। यही मुख्य कारण है कि कोई भी प्रतिष्ठित या ब्रांडेड ज्वेलर ₹2 लाख या उससे अधिक का नकद भुगतान लेने से साफ इनकार कर देता है।

2. बिना PAN कार्ड के कितनी ज्वेलरी खरीद सकते हैं (Rule 114B)?

आयकर नियम, 1962 का नियम 114B (Rule 114B) यह निर्धारित करता है कि किन-किन वित्तीय लेनदेन पर ग्राहक को अपना स्थायी खाता संख्या (PAN Card) उद्धृत करना कानूनी रूप से अनिवार्य है:

  • ₹2,00,000 से कम की खरीद: यदि आपके बिल की कुल कीमत ₹2 लाख से कम (जैसे ₹1,85,000) है, तो आयकर नियमों के अनुसार पैन कार्ड देना अनिवार्य नहीं है। आप चाहें तो नकद या डिजिटल किसी भी माध्यम से भुगतान कर सकते हैं।
  • ₹2,00,000 से अधिक की खरीद: यदि बिल ₹2,00,000 से अधिक का है, तो पैन कार्ड (या आधार कार्ड) देना 100% अनिवार्य है। यह नियम भुगतान के हर माध्यम पर लागू होता है—चाहे आप पूरा पैसा RTGS, क्रेडिट कार्ड, चेक या नेट बैंकिंग से ही क्यों न दे रहे हों।

बाजार का सबसे बड़ा भ्रम: कई खरीदार यह सोचते हैं कि "अगर मैं अपना पैन कार्ड दे दूँ, तो क्या मैं ₹3 लाख कैश में दे सकता हूँ?" इसका जवाब है: बिल्कुल नहीं! पैन कार्ड देने से धारा 269ST का नकद प्रतिबंध समाप्त नहीं होता। पैन कार्ड सिर्फ आपकी पहचान दर्ज करता है, जबकि धारा 269ST ₹2 लाख से ऊपर नकद लेने पर पूर्ण रोक लगाती है। इसलिए ₹2 लाख से अधिक के बिल पर पैन कार्ड भी अनिवार्य होगा और भुगतान भी बैंक चैनल से ही करना होगा।

3. 5-कॉलम मास्टर तालिका: सोने की खरीद सीमा, पेमेंट मोड, PAN व टैक्स जांच

लेनदेन का कुल दायरा कानूनी भुगतान माध्यम PAN कार्ड / KYC स्थिति इनकम टैक्स विभाग को रिपोर्टिंग खरीदार व ज्वेलर के लिए काम की टिप
₹1 से ₹1,99,999 तक कैश, UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, चेक अनिवार्य नहीं (ऐच्छिक) सामान्य व्यावसायिक सेल (कोई अलग रिपोर्टिंग नहीं) 100% पक्का जीएसटी बिल और 6-अंकीय HUID हॉलमार्क कोड अवश्य लें।
₹2,00,000 या अधिक (पूर्ण कैश) ❌ कानूनन सख्त प्रतिबंधित लागू नहीं (लेनदेन ही अवैध) धारा 271DA के तहत ज्वेलर पर 100% पेनाल्टी ज्वेलर को कैश का दबाव न दें; यह टैक्स विभाग से नोटिस का सीधा बुलावा है।
₹2,00,000 या अधिक (बैंक/डिजिटल) ✅ NEFT, RTGS, UPI, कार्ड, चेक ✅ PAN कार्ड 100% अनिवार्य बैंक डेटा व AIS में पारदर्शी विजिबिलिटी जिस बैंक खाते से भुगतान कर रहे हैं, उसमें घोषित आय का पक्का स्रोत होना चाहिए।
आंशिक कैश (₹1.5L कैश + ₹1L UPI) ✅ वैध (कैश ₹2L से कम है) ✅ PAN कार्ड अनिवार्य (क्योंकि बिल ₹2.5L है) बैंक विजिबिलिटी + बिल पर पैन दर्ज कैश वाला हिस्सा ₹1,99,999 से नीचे रखकर आप वैध तरीके से खरीदारी कर सकते हैं।
बिल स्प्लिटिंग (₹1.2L + ₹1.2L) ❌ अवैध (Single Day/Occasion) दोनों बिलों पर पैन की जांच संभव सॉफ्टवेयर ऑडिट में पकड़े जाने पर टैक्स नोटिस एक ही दिन में परिवार के अलग सदस्यों के नाम बिल कटवाने की चालाकी न करें।

4. बिल स्प्लिटिंग का खतरनाक जाल: एक ही दिन में दो अलग बिल बनवाने की भूल

अक्सर धनतेरस की भीड़ में कुछ खरीदार और छोटे सुनार एक खतरनाक तरकीब निकालते हैं—वे ₹3 लाख के जेवर को ₹1.5 लाख और ₹1.5 लाख के दो अलग-अलग बिलों में तोड़ देते हैं, ताकि दोनों बिल ₹2 लाख की सीमा से नीचे दिखें। लेकिन कानून की नजर में यह एक गंभीर भूल है:

धारा 269ST के क्लॉज (a) में स्पष्ट लिखा है: "in aggregate from a person in a day" यानी एक व्यक्ति से पूरे 24 घंटे में कुल मिलाकर लिया गया कैश जोड़ा जाएगा। अगर एक ही ग्राहक के नाम 2 घंटे के अंतराल पर दो बिल बने हैं और दोनों का नकद जोड़ ₹2 लाख से ऊपर निकलता है, तो कानूनन यह सीधा उल्लंघन है।

इसके अलावा क्लॉज (c) "in respect of transactions relating to one event or occasion" को कवर करता है। इसका मतलब है कि अगर कोई शादी या त्योहार के नाम पर 3 अलग-अलग दिनों में भी एक ही सेट या खरीदारी के लिए कैश टुकड़ों में देता है, तो टैक्स ऑडिटर उसे एक ही अवसर का लेनदेन मानकर ज्वेलर पर पेनाल्टी और ग्राहक पर सोर्स ऑफ इनकम की जांच बैठा सकता है। आज सभी आधुनिक शोरूम के ERP सॉफ्टवेयर सीधे जीएसटीएन और बैंक खातों से जुड़े होते हैं, जहां यह टाइमस्टैम्प आसानी से पकड़ा जाता है।

5. SFT रिपोर्टिंग व AIS ट्रैकिंग: इनकम टैक्स को कैसे पता चलता है?

कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर हमने किसी लोकल ज्वेलर को नकद दे दिया, तो इनकम टैक्स विभाग को कैसे खबर होगी? आयकर प्रणाली अब पूरी तरह ऑटोमेटेड डेटा एनालिटिक्स पर चलती है:

  • Form 61A (Statement of Financial Transactions - SFT): आयकर नियमों के तहत जिन ज्वैलर्स का सालाना टर्नओवर टैक्स ऑडिट के दायरे में आता है, उन्हें वित्तीय वर्ष के अंत में Form 61A दाखिल करना होता है। इसमें वे उन सभी ग्राहकों का डेटा दर्ज करते हैं जिन्होंने ₹2 लाख से अधिक की खरीदारी की है।
  • Annual Information Statement (AIS) और TIS: यह डेटा सीधे आपके पैन कार्ड से लिंक होकर आपके आयकर पोर्टल के AIS में 'High Value Jewellery Purchase' के रूप में रिफ्लेक्ट होने लगता है।
  • आय और खर्च का बेमेल होना (Mismatch Notice): मान लीजिए आपके ITR में सालाना आय ₹4,00,000 दिखाई गई है और आपके AIS में ₹5,00,000 के आभूषणों की खरीद दर्ज हो जाती है, तो सीबीडीटी का कंप्यूटर सिस्टम अपने आप धारा 69A (Unexplained Money / Investment) के तहत नोटिस जनरेट कर देता है। ऐसी अघोषित आय पर धारा 115BBE के तहत 60% टैक्स + 25% सरचार्ज + 4% सेस यानी कुल 78% से अधिक की टैक्स देनदारी बन सकती है।

6. घर में कितना सोना रखना पूरी तरह वैध है (CBDT सर्च दिशानिर्देश)?

सोना खरीदने के बाद दूसरा सबसे बड़ा डर यह रहता है कि घर में कितना सोना रखा जा सकता है। भारतीय कानून में किसी भी नागरिक द्वारा सोना रखने की कोई ऊपरी कानूनी सीमा नहीं है—बशर्ते आपके पास उस सोने को खरीदने का वैध आय स्रोत, पक्का खरीद बिल या पुश्तैनी वसीयत का रिकॉर्ड मौजूद हो।

यदि किसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में आयकर विभाग का तलाशी अभियान (Search & Seizure) होता है, तो सीबीडीटी (CBDT Instruction No. 1916) के अनुसार निम्नलिखित सीमाओं तक का सोना बिना किसी खरीद बिल के भी जब्त नहीं किया जाता:

  • विवाहित महिला (Married Woman): 500 ग्राम तक के सोने के जेवर।
  • अविवाहित महिला (Unmarried Female): 250 ग्राम तक के सोने के जेवर।
  • पुरुष सदस्य (Male Member): 100 ग्राम तक के सोने के आभूषण या सिक्के।

इस निर्धारित सीमा के भीतर पाए गए स्त्रीधन और पारंपरिक आभूषणों को टैक्स अधिकारी जब्त नहीं करते, हालांकि अत्यधिक मात्रा होने पर पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक स्तर की सामान्य जांच की जा सकती है।

7. धनतेरस पर पक्का बिल बनवाते समय 5 चीजें जरूर जांचें

  1. 6-अंकीय HUID हॉलमार्क कोड: हर सोने के आभूषण पर बीआईएस का त्रिकोणीय मुहर, सोने की शुद्धता (जैसे 22K916 या 18K750) और 6 अक्षरों का अल्फ़ान्यूमेरिक HUID कोड होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। 'BIS Care' मोबाइल ऐप खोलकर कोड दर्ज करें; स्क्रीन पर ज्वेलर का नाम, वजन और हॉलमार्किंग केंद्र तुरंत दिख जाएगा।
  2. कच्चे पर्चे (Kaccha Bill) का झांसा पूरी तरह ठुकराएं: कुछ सुनार 3% जीएसटी बचाने के नाम पर सादे कागज पर हाथ से लिखकर रसीद दे देते हैं। अगर कल को उस सोने में मिलावट निकली या गहना टूट गया, तो बिना टैक्स इनवॉइस के कोई भी उपभोक्ता अदालत या पुलिस आपकी मदद नहीं कर पाएगी।
  3. जीएसटी का सही ब्रेकअप: पक्के बिल में सोने की धातु पर 3% GST और मेकिंग चार्ज पर 5% या 18% GST का अलग-अलग कॉलम होना चाहिए।
  4. क्रेडिट कार्ड पर अवैध 2% सरचार्ज न दें: कई दुकानदार कार्ड से स्वाइप करने पर ग्राहक से 1.5% से 2% अतिरिक्त चार्ज मांगते हैं, जो आरबीआई के नियमों के अनुसार पूरी तरह अनुचित है। ऐसे में RuPay क्रेडिट कार्ड से UPI क्यूआर कोड स्कैन करके सीधे 0% अतिरिक्त चार्ज पर भुगतान करें।
  5. नेट वजन और ग्रॉस वजन का मिलान: बिल पर आभूषण का कुल वजन (Gross Weight) और पत्थरों/नगों को हटाकर केवल शुद्ध सोने का वजन (Net Weight) स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए।

8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. अगर मैं ₹2.5 लाख के गहने लेता हूँ, तो क्या मैं ₹1.5 लाख कैश और ₹1 लाख ऑनलाइन दे सकता हूँ?

जवाब: हाँ, यह पूरी तरह कानूनी और वैध है। यहाँ कुल नकद भुगतान ₹1,50,000 है जो धारा 269ST की ₹2,00,000 की नकद सीमा से कम है। चूँकि कुल बिल ₹2.5 लाख है, इसलिए आपको बिल पर अपना PAN कार्ड देना होगा, लेकिन कोई पेनाल्टी नहीं लगेगी।

Q2. क्या पुराना सोना देकर नया सोना लेने पर ₹2 लाख की कैश लिमिट लागू होती है?

जवाब: पुराने सोने के मूल्य को कुल बिल में से घटा दिया जाता है। इसके बाद जो शुद्ध अंतर राशि (Net Payable Amount) बचती है, यदि आप उसका भुगतान नकद में कर रहे हैं, तो केवल उस नकद हिस्से पर ₹1,99,999 की सीमा लागू होगी। पुराने सोने के एक्सचेंज मूल्य को नकद नहीं माना जाता।

Q3. क्या धनतेरस पर ₹50,000 का सिक्का खरीदने पर भी ज्वेलर PAN कार्ड मांग सकता है?

जवाब: आयकर नियमों के अनुसार ₹2 लाख से कम की खरीदारी पर पैन कार्ड देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, कुछ बड़े कॉर्पोरेट ज्वेलरी शोरूम अपनी आंतरिक आंतरिक सुरक्षा नीति (Internal Store Policy) के तहत पहचान पत्र मांग सकते हैं, लेकिन कानूनन आप इसके लिए बाध्य नहीं हैं।

Q4. क्या मुझे इस साल खरीदे गए सोने की जानकारी अपने ITR में देनी होगी?

जवाब: यदि आपकी कुल वार्षिक करयोग्य आय ₹50 लाख से कम है, तो सामान्य ITR-1 या ITR-2 फॉर्म में संपत्ति (Assets & Liabilities) का अलग विवरण नहीं देना होता। लेकिन यदि आपकी आय ₹50 लाख से अधिक है, तो ITR के 'Schedule AL' में वर्ष के दौरान खरीदे गए सोने और आभूषणों का मूल्य दर्ज करना अनिवार्य होता है।

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