documents ⏱️ 18 मिनट पढ़ें 📅 25 सितंबर 2026

DILRMP 3.0 Paperless Property Registration: संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए बने 'रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र', जानें नए नियम

SS
सुनीता शर्मा
ई-गवर्नेंस एवं नागरिक दस्तावेज़ सलाहकार

आधार प्रमाणीकरण, राशन कार्ड व्यवस्था, डिजिटल लॉकर और सार्वजनिक सेवा वितरण (Public Service Delivery) के क्षेत्र में 9 वर्षों का संपादकीय अनुभव।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

DILRMP 3.0 के तहत संपत्ति पंजीकरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाया गया है। इसके अंतर्गत देश के 75 सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों को आधुनिक 'रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र' (RSK) में बदला गया है, जहाँ ऑनलाइन ई-स्टाम्पिंग, डीड अपलोडिंग, 14-अंकीय भू-आधार (ULPIN) लिंकिंग और आधार बायोमेट्रिक e-KYC के माध्यम से मात्र 15 से 20 मिनट में सुरक्षित रजिस्ट्री संपन्न होती है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • 75 आधुनिक 'रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र' (RSKs): पायलट प्रोजेक्ट के तहत 75 उप-पंजीयक कार्यालयों के आधुनिकीकरण हेतु ₹37.5 करोड़ (प्रति केंद्र ₹50 लाख) की मंजूरी।
  • एंड-टू-एंड 100% पेपरलेस पंजीकरण: घर बैठे सेल डीड ड्राफ्टिंग, ऑनलाइन ई-स्टाम्प भुगतान और बिना कागजी फाइलों के डिजिटल रजिस्ट्री।
  • अनिवार्य ULPIN (भू-आधार) लिंकिंग: जमीन की रजिस्ट्री कराते समय 14-अंकों का भू-आधार कोड जुड़ने से दोहरी या फर्जी रजिस्ट्री की संभावना शून्य।
  • बायोमेट्रिक e-KYC और एंटी-स्पूफिंग: खरीदार, विक्रेता और गवाहों का मौके पर यूआईडीएआई फेशियल व थंब ऑथेंटिकेशन, जिससे बहरूपियों द्वारा धोखेबाजी पर पूर्ण रोक।
  • डिजिटल रजिस्ट्री रिपॉजिटरी: रजिस्ट्री होते ही मूल दस्तावेज सुरक्षित सरकारी क्लाउड में सुरक्षित और डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी सीधे डिजिलॉकर में उपलब्ध।
सुविधा / चरण (Process Stage) पुरानी रजिस्ट्री व्यवस्था (Legacy System) नया रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र मॉडल (DILRMP 3.0 RSK)
डॉक्यूमेंट ड्राफ्टिंग व स्क्रूटनी कागजी स्टांप पेपर, मुंशी-वकीलों पर निर्भरता और कई दिनों का समय पोर्टल पर मानकीकृत ऑनलाइन डीड टेम्पलेट्स और प्री-वेरिफिकेशन
स्टांप ड्यूटी एवं निबंधन शुल्क फिजिकल स्टांप पेपर, बैंक चालान और ब्लैक मार्केटिंग का खतरा 100% ऑनलाइन ई-स्टाम्पिंग, यूपीआई व नेटबैंकिंग से तुरंत भुगतान
दफ्तर में लगने वाला समय सुबह से शाम तक कतारें, धक्का-मुक्की और बाबू-दलाल कल्चर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट स्लॉट के साथ केवल 15 से 20 मिनट में कार्य पूर्ण
पहचान सत्यापन (Identity Verification) साधारण कागजी फोटोकॉपी, फर्जी गवाह खड़े करने की आशंका UIDAI लाइव आधार बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन e-KYC
जमीन की भौतिक स्थिति जांच कागजी खसरे पर निर्भर, सीमा या कोर्ट स्टे की जानकारी न होना 14-अंकीय ULPIN (भू-आधार) और RCCMS अदालती पोर्टल से लाइव लिंक
मूल दस्तावेज की प्राप्ति रजिस्ट्री के 15-30 दिन बाद दफ्तर के चक्कर लगाने पर मूल कॉपी रजिस्ट्री के 2 घंटे के भीतर डिजिटल हस्ताक्षरित डीड डिजिलॉकर में उपलब्ध

डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स आधुनिकीकरण (DILRMP 3.0) के तहत प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में बदलाव

सीधा उत्तर (Direct Answer): DILRMP 3.0 के अंतर्गत संपत्ति रजिस्ट्री व्यवस्था को पूरी तरह पेपरलेस कर दिया गया है। 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को ₹37.5 करोड़ की लागत से 'रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र' (RSK) बनाया जा रहा है, जहाँ 14-अंकीय भू-आधार (ULPIN), ऑनलाइन ई-स्टाम्पिंग और आधार बायोमेट्रिक e-KYC से महज 15-20 मिनट में सुरक्षित रजिस्ट्री संपन्न होती है।

भारत में घर, दुकान, फ्लैट या खेत की खरीद-बिक्री के बाद सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री कराना हमेशा से आम नागरिकों के लिए सबसे तनावपूर्ण अनुभवों में से एक रहा है। पुराने दफ्तरों में फाइलों के अंबार, स्टांप वेंडरों की मनमानी वसूली, वकीलों के मुंशियों द्वारा मांगे जाने वाले अघोषित 'सुविधा शुल्क', और अपनी ही जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए घंटों उमस भरी कतारों में खड़े रहना एक आम बात थी। इसके अलावा, सबसे बड़ा डर यह बना रहता था कि कहीं जिस संपत्ति को खरीदा जा रहा है, वह पहले से किसी बैंक में बंधक तो नहीं है या उसके कागजात फर्जी तो नहीं हैं।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (Department of Land Resources - DoLR) ने इन सभी ऐतिहासिक विसंगतियों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए DILRMP 3.0 के तहत संपत्ति पंजीकरण प्रणाली का पूर्ण कायाकल्प कर दिया है। अब भारत की रजिस्ट्री व्यवस्था पारंपरिक कागजी लालफीताशाही से निकलकर आधुनिक डिजिटल ई-गवर्नेंस के युग में प्रवेश कर चुकी है।

इस नई व्यवस्था का मुख्य ध्येय 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' (Minimum Government, Maximum Governance) को चरितार्थ करते हुए नागरिकों को ऐसा पारदर्शी प्लेटफॉर्म देना है, जहाँ न तो किसी बिचौलिए की जरूरत हो और न ही रजिस्ट्री के नाम पर एक भी अतिरिक्त रुपया खर्च करना पड़े।

75 सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों को 'रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र' में बदलने की योजना (₹37.5 करोड़ बजट)

जिस प्रकार विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट बनवाने की कष्टकारी प्रक्रिया को समाप्त करने के लिए देश भर में चमचमाते 'पासपोर्ट सेवा केंद्र' (PSK) स्थापित किए थे, ठीक उसी सफल मॉडल पर केंद्र सरकार ने सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों को 'रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र' (Registration Seva Kendra - RSK) के रूप में पुनर्गठित करने का निर्णय लिया है।

पायलट चरण में देश के विभिन्न राज्यों के उच्च-लेनदेन वाले 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों का चयन किया गया है। इन 75 केंद्रों के पूर्ण भौतिक और डिजिटल आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार ने ₹37.5 करोड़ (प्रति केंद्र ₹50 लाख) की धनराशि स्वीकृत की है।

रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्रों में नागरिकों को मिलने वाली सुविधाएं:

  • कॉर्पोरेट-ग्रेड वातानुकूलित लाउंज: पुराने धूल-धूसरित दफ्तरों की जगह टोकन आधारित डिजिटल वेटिंग लाउंज, जहाँ वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए विशेष बैठने की व्यवस्था होगी।
  • सिंगल-विंडो सर्विस काउंटर: दस्तावेज सत्यापन, बायोमेट्रिक स्कैनिंग और ई-साइनिंग का सारा कार्य एक ही काउंटर पर प्रशिक्षित रजिस्ट्री अधिकारियों द्वारा संपन्न किया जाएगा।
  • कियोस्क आधारित सेल्फ-हेल्प डेस्क: जिन नागरिकों के पास ऑनलाइन फॉर्म भरने का साधन नहीं है, वे केंद्र में मौजूद डिजिटल कियोस्क पर ऑपरेटर की सहायता से मुफ्त में दस्तावेज अपलोड करा सकते हैं।
  • सीसीटीवी व ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षा: पारदर्शिता सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रत्येक काउंटर पर 360-डिग्री लाइव सीसीटीवी कैमरे और ऑडियो रिकॉर्डर स्थापित किए गए हैं।

एंड-टू-एंड ऑनलाइन पेपरलेस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और 'Registration Repository' कैसे काम करेगी?

DILRMP 3.0 की सबसे क्रांतिकारी तकनीकी उपलब्धि है—'राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन रिपॉजिटरी' (National Registration Repository Architecture)। अब तक रजिस्ट्री के बाद मूल दस्तावेज की एक मोटी फाइल बाइंडिंग करके दफ्तर के रिकॉर्ड रूम में रख दी जाती थी, जहाँ दीमक लगने, सीलन आने, रिकॉर्ड गुम हो जाने या आग लगने से ऐतिहासिक दस्तावेज नष्ट होने का भारी जोखिम रहता था।

नई प्रणाली के तहत एंड-टू-एंड ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह क्लाउड-नेटिव और स्वचालित है। इसके मुख्य घटकों को समझना प्रत्येक नागरिक और निवेशक के लिए अत्यंत आवश्यक है:

डिजिटल रजिस्ट्री का सम्पूर्ण लाइफसाइकिल:

  1. डीड की डिजिटल ड्राफ्टिंग एवं मानकीकृत क्लॉज (Standardized Drafting): नागरिक राज्य के ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल (जैसे उत्तर प्रदेश का IGRSUP, बिहार का e-Nibandhan, महाराष्ट्र का IGR, कर्नाटक का Kaveri 2.0 आदि) पर लॉगिन करके विधिक रूप से मान्य मानक टेम्पलेट्स (सेल डीड, गिफ्ट डीड, लीज डीड, मॉर्गेज डीड) में संपत्ति का ब्योरा भरते हैं। इससे वकीलों की जटिल और भ्रामक कानूनी शब्दावली में होने वाली गलतियों से मुक्ति मिलती है।
  2. ऑटोमैटिक वैल्यूएशन एवं स्टांप ड्यूटी गणना: पोर्टल उस क्षेत्र के आधिकारिक सर्किल रेट (Circle Rate / Ready Reckoner Rate) और संपत्ति के कारपेट एरिया, सुपर बिल्ट-अप एरिया या कृषि क्षेत्रफल के आधार पर तुरंत देय स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस की गणना कर देता है। मानवीय हस्तक्षेप न होने से कम स्टांप चोरी की गुंजाइश खत्म हो जाती है और राजस्व विभाग को पूरा टैक्स पारदर्शी रूप से मिलता है।
  3. सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज (Government Cloud Repository): रजिस्ट्री की डिजिटल कॉपी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा प्रमाणित मेघराज (MeghRaj) क्लाउड सर्वर पर 256-बिट बैंक-ग्रेड एन्क्रिप्शन के साथ स्थायी रूप से सुरक्षित हो जाती है। यह रिकॉर्ड कभी भी नष्ट नहीं हो सकता।
  4. डिजिलॉकर में ई-डीड की तात्कालिक डिलीवरी: रजिस्ट्री पूरी होते ही सब-रजिस्ट्रार के डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature Certificate - DSC) वाली अधिकृत पीडीएफ कॉपी खरीदार के आधार से जुड़े DigiLocker खाते में स्वतः ट्रांसफर हो जाती है। इसके साथ ही एक क्यूआर कोड (QR Code) जनरेट होता है, जिसे स्कैन करके कोई भी तीसरा पक्ष दस्तावेज की प्रामाणिकता तुरंत सत्यापित कर सकता है।

नागरिकों के मन में प्रायः यह संशय रहता है कि क्या कंप्यूटर से निकली डिजिटल रजिस्ट्री भविष्य में अदालत में उतनी ही मजबूत मानी जाएगी जितनी हाथ से मुहर लगी पुरानी रजिस्ट्री होती थी। इस संबंध में भारत सरकार ने स्पष्ट विधिक प्रावधान किए हैं:

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (IT Act 2000) की धारा 4 व 5: किसी भी दस्तावेज को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वह इलेक्ट्रॉनिक रूप में है। सब-रजिस्ट्रार का डिजिटल सिग्नेचर भौतिक मुहर के समान कानूनी वैधता रखता है।
  • भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam): इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को प्राथमिक साक्ष्य (Primary Evidence) के रूप में पूर्ण मान्यता दी गई है। डिजिटल रजिस्ट्री की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी को अदालत में साबित करने के लिए अलग से मूल कागजी फाइल लाने की आवश्यकता नहीं होती।
  • पंजीकरण अधिनियम 1908 (Registration Act 1908) के संशोधन: राज्यों द्वारा रजिस्ट्रेशन नियमों में किए गए संशोधनों के तहत ऑनलाइन डीड प्रस्तुतीकरण, रिमोट ई-साइन और इलेक्ट्रॉनिक इंडेक्सिंग को पूर्ण वैधानिक दर्जा दिया गया है।

प्रमुख राज्यों में डिजिटल प्रॉपर्टी रजिस्ट्री की तुलनात्मक स्थिति

राज्य (State) आधिकारिक ई-पंजीकरण पोर्टल डिजिटल सुविधाएं व नवाचार औसत रजिस्ट्री समय
उत्तर प्रदेश IGRSUP (igrsup.gov.in) भूलेख व खतौनी ऑटो-लिंक, ऑनलाइन ई-स्टाम्पिंग, बायोमेट्रिक स्लॉट बुकिंग 15 - 20 मिनट
महाराष्ट्र IGR Maharashtra (igrmaharashtra.gov.in) ई-स्टेप (e-Step), फ्लैट्स की होम-बेस्ड ई-रजिस्ट्री, SARITA 5.0 सॉफ्टवेयर 10 - 15 मिनट
कर्नाटक Kaveri 2.0 (kaveri.karnataka.gov.in) भूमि (Bhoomi) डेटाबेस से लाइव म्यूटेशन, फेस ऑथेंटिकेशन, पेपरलेस डिलीवरी 15 मिनट
मध्य प्रदेश MPCG Sampada 2.0 (mpigr.gov.in) जीआईएस आधारित प्रॉपर्टी वैल्यूएशन, वीडियो केवाईसी, ई-साइन डीड 20 मिनट
बिहार e-Nibandhan (biharregistration.gov.in) दाखिल-खारिज (Mutation) का रजिस्ट्री के साथ स्वतः आरंभ, लैंड रिकॉर्ड लिंक 20 - 25 मिनट

प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराते समय ULPIN (भू-आधार) लिंक करने के चरण

DILRMP 3.0 का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है—संपत्ति का 14-अंकीय भू-आधार (ULPIN)। अब किसी भी कृषि भूमि, गैर-कृषि प्लॉट या स्वतंत्र मकान की रजिस्ट्री कराते समय ULPIN नंबर को डीड में दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि खरीदी जा रही जमीन का धरातल पर वास्तविक भौतिक अस्तित्व है और उसके निर्देशांक सरकारी सेटेलाइट मैप पर दर्ज हैं।

भू-आधार लिंक करने की सरल 5-चरणीय प्रक्रिया:

  • स्टेप 1: ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर 'Property Details' (संपत्ति विवरण) भरते समय 'ULPIN / Bhu-Aadhaar' का विकल्प चुनें।
  • स्टेप 2: विक्रेता द्वारा प्राप्त 14 अंकों का भू-आधार नंबर प्रविष्ट करें। यदि ULPIN याद नहीं है, तो जिला, तहसील, गांव और खसरा नंबर दर्ज करके 'Search ULPIN' पर क्लिक करें।
  • स्टेप 3: सिस्टम तुरंत राज्य के डिजिटल कैडस्ट्रल नक्शे (Bhu-Naksha) से कनेक्ट होकर स्क्रीन पर उस जमीन का सैटेलाइट नक्शा, चारों दिशाओं की सीमाएं (North, South, East, West boundaries) और वास्तविक क्षेत्रफल प्रदर्शित कर देगा।
  • स्टेप 4: यदि नक्शा और क्षेत्रफल विक्रेता के दावे से 100% मेल खाता है, तो सिस्टम 'Geo-Verification Passed' का ग्रीन सिग्नल देगा। यदि जमीन पर कोई विवाद या रकबा कम पाया जाता है, तो स्क्रीन पर तत्काल चेतावनी आ जाएगी।
  • स्टेप 5: रजिस्ट्री संपन्न होते ही पोर्टल बैकएंड पर लैंड रिकॉर्ड (खतौनी) में नया म्यूटेशन आर्डर (दाखिल-खारिज) स्वतः इनीशिएट कर देगा, जिससे खरीददार को अलग से तहसील में अर्जी नहीं लगानी पड़ती।

रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र (RSK) जाने से पहले आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट

नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने निर्धारित समय पर केंद्र पहुँचते समय निम्नलिखित 6 आवश्यक दस्तावेज अपने साथ रखें ताकि कार्य में एक मिनट का भी विलंब न हो:

  1. ऑनलाइन अपॉइंटमेंट स्लिप: पोर्टल द्वारा जनरेट की गई पावती जिसमें आपका टोकन नंबर, निर्धारित तिथि और समय दर्ज हो।
  2. मूल आधार कार्ड एवं पैन कार्ड: खरीदार, विक्रेता और दोनों गवाहों के मूल पहचान पत्र (बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण हेतु)।
  3. डिजिटल ई-स्टाम्प प्रमाणपत्र एवं फीस रसीद: ऑनलाइन पोर्टल से भुगतान के उपरांत डाउनलोड किया गया क्यूआर-कोडेड स्टांप सर्टिफिकेट।
  4. ड्राफ्ट डीड (Draft Deed Summary): ऑनलाइन सबमिट किए गए बिक्री पत्र या अनुबंध की प्रिंटेड सारांश प्रति।
  5. भू-आधार (ULPIN) एवं अद्यतन खतौनी/होल्डिंग रसीद: जमीन का 14-अंकीय कोड और अद्यतन राजस्व लगान भुगतान रसीद।
  6. एनओसी (यदि लागू हो): विकास प्राधिकरण (Development Authority) से स्वीकृत लेआउट प्लान या कृषि भूमि के रूपांतरण की अनुमति।

धोखाधड़ी और फर्जी रजिस्ट्री रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन और बायोमेट्रिक e-KYC नियम

भारतीय संपत्ति विवादों में एक आम अपराध यह रहा है कि किसी मृत व्यक्ति या विदेश में रहने वाले व्यक्ति की जगह किसी अन्य बहरूपिए को खड़ा करके और नकली पहचान पत्र दिखाकर जमीन बेच दी जाती थी। DILRMP 3.0 ने इस तरह के अपराधों पर पूरी तरह ताला लगा दिया है।

फर्जी रजिस्ट्री रोकने के 4 कड़े सुरक्षा नियम:

  1. यूआईडीएआई लाइव बायोमेट्रिक सत्यापन: खरीदार, विक्रेता और दो गवाहों की पहचान केवल फोटोकॉपी देखकर नहीं, बल्कि मौके पर फिंगरप्रिंट या आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैन से आधार सर्वर द्वारा ऑनलाइन जांची जाती है।
  2. लाइवनेस डिटेक्शन फेशियल रिकॉग्निशन (AI Face Scan): आधुनिक वेबकैम व्यक्ति के चेहरे की सूक्ष्म हरकतों (जैसे पलकें झपकाना) का विश्लेषण करके यह सुनिश्चित करते हैं कि सामने बैठा व्यक्ति जीवित है और कोई मास्क या फोटो नहीं दिखा रहा है।
  3. पैन-कार्ड और आईटी विभाग लिंकेज: उच्च-मूल्य की संपत्तियों (₹50 लाख से अधिक) के सौदों में खरीदार और विक्रेता के पैन कार्ड का सत्यापन आयकर विभाग के सर्वर से सीधे होता है, जिससे बेनामी संपत्ति के लेन-देन पकड़े जाते हैं।
  4. न्यायालयीन विवाद का ऑटो-डिटेक्शन: यदि उस संपत्ति पर किसी दीवानी अदालत या राजस्व न्यायालय का स्टे आदेश लागू है, तो सॉफ्टवेयर स्क्रीन को ब्लॉक कर देगा और सब-रजिस्ट्रार चाहकर भी डीड रजिस्टर नहीं कर सकेगा।

घर बैठे संपत्ति की ई-स्टाम्पिंग और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करने का तरीका

नागरिकों को दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने से बचाने के लिए अपॉइंटमेंट बुकिंग और ई-स्टाम्प प्रक्रिया को 100% ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है।

घर बैठे प्रक्रिया पूरी करने के 5 स्टेप्स:

  • पोर्टल पर खाता बनाएं: राज्य के स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के पोर्टल पर जाएं और अपने मोबाइल नंबर व आधार से सिटीजन अकाउंट बनाएं।
  • डीड विवरण भरें व सर्किल रेट जांचें: संपत्ति की लोकेशन, गाटा संख्या/प्लॉट नंबर दर्ज करके सर्किल रेट के अनुसार शुल्क देखें।
  • ई-स्टाम्प का ऑनलाइन भुगतान: स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) या राज्य के ई-ग्रास (e-GRAS) पेमेंट गेटवे के जरिए नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या यूपीआई से स्टांप ड्यूटी का भुगतान करें और ई-स्टाम्प सर्टिफिकेट तुरंत डाउनलोड करें।
  • तारीख और टाइम स्लॉट का चयन: 'Book Appointment' विकल्प में जाकर अपनी सुविधा के अनुसार उपलब्ध तारीख और पसंदीदा समय (जैसे प्रातः 11:30 से 11:50) का चयन करें।
  • केंद्र पर उपस्थिति: निर्धारित समय पर मूल पहचान पत्रों के साथ सीधे 'रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र' पहुंचें, टोकन प्राप्त करें और 15 मिनट के भीतर अपनी रजिस्ट्री कराकर फ्री हो जाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र. क्या रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र (RSK) जाने से पहले ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेना अनिवार्य है?

उत्तर: हाँ, भीड़ प्रबंधन और बिना किसी प्रतीक्षा के 15 मिनट में सेवा देने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग अनिवार्य की गई है, ताकि नागरिक को लाइन में न खड़ा होना पड़े।

प्र. यदि किसी संपत्ति का 14 अंकों का भू-आधार (ULPIN) अभी जारी नहीं हुआ है, तो क्या रजिस्ट्री हो पाएगी?

उत्तर: ऐसे मामलों में उप-पंजीयक कार्यालय का पोर्टल खसरा नंबर के आधार पर बैकएंड से अस्थाई भू-स्थानिक आईडी जनरेट करता है, ताकि नागरिक का कार्य न रुके और बाद में स्थायी ULPIN मैप हो जाए।

प्र. रजिस्ट्री की डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी कानूनी रूप से कितनी वैध होती है?

उत्तर: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act 2000) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत सब-रजिस्ट्रार द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर युक्त ई-डीड भौतिक कागजी दस्तावेज के समान 100% कानूनी रूप से मान्य है।

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  • Primary Source: PIB Delhi / Department of Land Resources (DoLR), Ministry of Rural Development.

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र (RSK) जाने से पहले ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेना अनिवार्य है?

A. हाँ, भीड़ प्रबंधन और बिना किसी प्रतीक्षा के 15 मिनट में सेवा देने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग अनिवार्य की गई है, ताकि नागरिक को लाइन में न खड़ा होना पड़े।

Q. यदि किसी संपत्ति का 14 अंकों का भू-आधार (ULPIN) अभी जारी नहीं हुआ है, तो क्या रजिस्ट्री हो पाएगी?

A. ऐसे मामलों में उप-पंजीयक कार्यालय का पोर्टल खसरा नंबर के आधार पर बैकएंड से अस्थाई भू-स्थानिक आईडी जनरेट करता है, ताकि नागरिक का कार्य न रुके और बाद में स्थायी ULPIN मैप हो जाए।

Q. रजिस्ट्री की डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी कानूनी रूप से कितनी वैध होती है?

A. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act 2000) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत सब-रजिस्ट्रार द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर युक्त ई-डीड भौतिक कागजी दस्तावेज के समान 100% कानूनी रूप से मान्य है।

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