त्योहारी सीजन में रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) मिलने के बाद अब केंद्र सरकार के बाकी मंत्रालयों और विभागों के कर्मचारियों की नजरें वित्त मंत्रालय के नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (Non-PLB Ad-hoc Bonus) पर टिकी हैं। केंद्रीय सचिवालय (CSS), डाक विभाग, रक्षा असैन्य कर्मचारी, दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों (CRPF, BSF, CISF आदि) के लाखों कर्मचारियों को हर साल दिवाली से ठीक पहले 30 दिनों का एड-हॉक बोनस दिया जाता है। इस गाइड में जानिए कि बोनस की गणना कैसे होती है, खाते में अधिकतम कितना पैसा आएगा और किन कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलता।
काम की बात: ₹7,000 की सीलिंग का सच समझें
सातवें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 हो चुका है, लेकिन बोनस भुगतान अधिनियम के तहत नॉन-PLB बोनस की गणना आज भी ₹7,000 प्रति माह की काल्पनिक सीमा (Notional Ceiling) पर ही की जाती है। इसलिए चाहे आपका मूल वेतन ₹25,000 हो या ₹45,000, 30 दिन के बोनस का अधिकतम भुगतान ₹6,908 ही होगा।
1. नॉन-PLB (एड-हॉक) बोनस क्या है: रेलवे के PLB से यह कैसे अलग है?
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दो तरह के बोनस दिए जाते हैं:
- Productivity Linked Bonus (PLB): यह उन वाणिज्यिक विभागों के कर्मचारियों को मिलता है जहां काम के उत्पादन (Productivity) को मापा जा सकता है, जैसे भारतीय रेल (78 दिन का बोनस) और ऑर्डिनेंस/डिफेंस प्रोडक्शन यूनिट्स।
- Non-PLB (Ad-hoc Bonus): यह उन सामान्य प्रशासनिक मंत्रालयों, सचिवालयों और सुरक्षा बलों को मिलता है जिनका काम सीधे राजस्व से नहीं जुड़ा होता। इसमें सभी ग्रुप 'C' और गैर-राजपत्रित ग्रुप 'B' कर्मचारियों को 30 दिनों के परिलब्धियों के बराबर तदर्थ (Ad-hoc) बोनस दिया जाता है।
2. किसे मिलेगा यह बोनस: पात्रता की 3 जरूरी शर्तें
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) के अनुसार बोनस पाने के लिए इन 3 शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है:
- 31 मार्च 2026 तक सेवा में होना: कर्मचारी 31 मार्च 2026 को सरकारी सेवा में सक्रिय होना चाहिए और वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कम से कम छह महीने लगातार सेवा पूरी कर चुका हो।
- अनुपातिक भुगतान (Pro-rata Basis): अगर किसी कर्मचारी ने पूरे साल (12 महीने) काम नहीं किया है, लेकिन 6 महीने से अधिक सेवा दी है, तो उसे काम किए गए महीनों के अनुपात में बोनस मिलेगा।
- ग्रुप और पद: केवल ग्रुप 'C' कर्मचारी और वे सभी ग्रुप 'B' कर्मचारी जो किसी राजपत्रित (Non-Gazetted) पद पर तैनात नहीं हैं, वे ही इसके पात्र हैं। क्लास-1 और क्लास-2 राजपत्रित अधिकारियों को यह बोनस नहीं मिलता।
3. 5-कॉलम मास्टर तालिका: 30 दिन के बोनस की आधिकारिक गणना और फॉर्मूला
वित्त मंत्रालय द्वारा तय किए गए आधिकारिक फॉर्मूले से समझें कि बोनस का पैसा कैसे तय होता है:
| मापदंड | आधिकारिक फॉर्मूला | अधिकतम मान | नतीजा / राशि | काम की टिप |
|---|---|---|---|---|
| गणना सीमा (Calculation Ceiling) | न्यूनतम बेसिक या ₹7,000 (जो भी कम हो) | ₹7,000 प्रति माह | ₹7,000 आधार माना जाएगा | वास्तविक बेसिक पे चाहे ₹35,000 हो, आधार ₹7,000 ही रहेगा |
| औसत मासिक दिन | साल के 365 दिन ÷ 12 महीने | 30.416 दिन (30.4) | 30.4 दिन का भाजक | सरकारी लेखा नियमों में महीने के 30.4 दिन गिने जाते हैं |
| 30 दिन का बोनस फॉर्मूला | (₹7,000 × 30 दिन) ÷ 30.4 | ₹2,10,000 ÷ 30.4 | ₹6,907.89 (राउंड ऑफ ₹6,908) | पूर्ण 12 महीने सेवा देने वाले को ठीक ₹6,908 मिलेंगे |
| 6 महीने सेवा पर बोनस | ₹6,908 × (6 ÷ 12) | 50% राशि | ₹3,454 | न्यूनतम पात्रता अवधि वाले नए कर्मचारियों के लिए |
| भुगतान का तरीका | PFMS / बैंक सैलरी अकाउंट | अक्टूबर 2026 वेतन से पहले | सीधे खाते में क्रेडिट | सैलरी स्लिप में 'Adhoc Bonus' हेड के तहत दिखेगा |
4. अर्धसैनिक बलों, डाक विभाग और कैजुअल श्रमिकों के लिए क्या नियम हैं?
अलग-अलग कैडर के लिए नियम इस प्रकार हैं:
- केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF): CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB और असम राइफल्स के सभी नॉन-गजेटेड जवानों, हवलदारों और सब-इंस्पेक्टर्स को पूर्ण ₹6,908 का बोनस मिलता है।
- कैजुअल लेबर (Casual Labourers): ऐसे आकस्मिक श्रमिक जिन्होंने 6 दिन के कार्य सप्ताह वाले कार्यालयों में साल में कम से कम 240 दिन (या 5 दिन वाले दफ्तर में 206 दिन) काम किया है, उन्हें ₹1,200 प्रति माह के आधार पर लगभग ₹1,184 का एड-हॉक बोनस मिलता है।
- प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर तैनात कर्मचारी: यदि कोई कर्मचारी किसी ऐसे पीएसयू या स्वायत्त संस्था में प्रतिनियुक्ति पर है जहां अलग बोनस नियम हैं, तो वह या तो मूल विभाग का एड-हॉक बोनस चुन सकता है या उस संस्था का नियम, लेकिन दोनों जगह से नहीं ले सकता।
5. DA बढ़ोतरी (DA Hike) और बोनस का एक साथ क्या प्रभाव पड़ेगा?
दिवाली से ठीक पहले केंद्रीय कर्मचारियों को दोहरी खुशखबरी मिलती है। एक तरफ अक्टूबर के वेतन में 30 दिन का यह बोनस (₹6,908) जुड़ता है, वहीं दूसरी तरफ जुलाई 2026 से प्रभावी होने वाले 3% से 4% महंगाई भत्ते (DA) का तीन महीने का एरियर (जुलाई, अगस्त, सितंबर) भी इसी महीने के वेतन में जुड़कर आता है। इससे ग्रुप 'C' स्तर के सामान्य कर्मचारी के खाते में भी दिवाली से पहले वेतन के अलावा ₹15,000 से ₹25,000 तक की अतिरिक्त एकमुश्त राशि पहुंच जाती है।
6. अगर दिवाली से पहले खाते में बोनस न आए तो क्या करें?
आमतौर पर वित्त मंत्रालय का आदेश जारी होते ही सभी विभागों के आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) बिल बनाकर पे एंड एकाउंट्स ऑफिस (PAO) को भेज देते हैं। यदि दिवाली से 3 दिन पहले तक आपके खाते में राशि नहीं आती है, तो अपने स्थापना अनुभाग (Establishment Section) या DDO से संपर्क करें और अपना सेवा सत्यापन (Service Verification) रिकॉर्ड चेक करवाएं।
7. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या ग्रुप 'A' या गजेटेड ग्रुप 'B' अधिकारियों को भी दिवाली बोनस मिलता है?
नहीं, केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) को उत्पादकता या तदर्थ दिवाली बोनस नहीं दिया जाता। यह केवल ग्रुप C और गैर-राजपत्रित ग्रुप B कर्मचारियों के लिए है।
Q2. क्या सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को यह बोनस मिलेगा?
यदि कोई कर्मचारी 31 मार्च 2026 को या उससे पहले सामान्य सेवानिवृत्ति (Superannuation) पर गया है और उसने उस वित्तीय वर्ष में कम से कम 6 महीने की सेवा पूरी कर ली थी, तो वह अनुपातिक बोनस का हकदार है। लेकिन स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने या बर्खास्त होने पर यह नहीं मिलता।
Q3. क्या बोनस की राशि पर इनकम टैक्स कटता है?
जी हां, बोनस की राशि पूरी तरह कर योग्य (Taxable) होती है और यह कर्मचारी की वार्षिक वेतन आय में जुड़ती है। टीडीएस (TDS) कटौती कर्मचारी के चुने गए टैक्स स्लैब के अनुसार ही की जाती है।