⚡ सीधी काम की बात (Quick Answer)
दूरसंचार विभाग (DoT) ने कंबोडिया, म्यांमार और वियतनाम जैसे देशों के साइबर ठगों द्वारा की जाने वाली फर्जी कॉल्स को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय गेटवे स्तर पर अनिवार्य इनकमिंग कॉल ड्रॉप सिस्टम लागू किया है। जब कोई कॉल विदेश से उत्पन्न होती है लेकिन उस पर कॉलर आईडी में भारतीय मोबाइल नंबर (+91) दिखाया जाता है, तो टेलीकॉम कंपनियों को उस कॉल को भारत के नेटवर्क में घुसने से पहले ही ब्लॉक करना होगा। यह तकनीक डिजिटल अरेस्ट और सीबीआई/कस्टम के नाम पर होने वाली ठगी को 90% तक रोकने में सक्षम है।
विदेशी साइबर सिंडिकेट का जाल: स्क्रीन पर +91 और पीछे कंबोडिया का कॉलर
हाल के महीनों में भारत के सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों, गृहणियों, वरिष्ठ डॉक्टरों और व्यापारियों के साथ घटी सबसे दर्दनाक घटनाओं में एक सामान्य कड़ी पाई गई है। फोन की घंटी बजती है, और स्क्रीन पर ट्रूकॉलर या मोबाइल डायलर में भारत का एक सामान्य 10 अंकों का मोबाइल नंबर (जैसे +91 98200XXXXX) दिखाई देता है। स्क्रीन पर लिखा आता है: "Mumbai Cyber Cell" या "Telecom Regulatory Authority of India"।
फोन उठाने पर सामने से एक रौबदार आवाज में बात शुरू होती है: "मैं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, मुंबई का इंस्पेक्टर बोल रहा हूँ। आपके आधार कार्ड पर ताइवान से एक पार्सल आया है जिसमें 140 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स, 5 जाली पासपोर्ट और 3 क्रेडिट कार्ड बरामद हुए हैं। आपकी गिरफ्तारी का गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है।" नागरिक यह सोचकर डर जाता है कि सामने वाला भारत का ही कोई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी है क्योंकि नंबर तो भारत के एसटीडी कोड +91 से शुरू हो रहा है।
परंतु तकनीकी सच यह है कि वह कॉल भारत से नहीं आ रही थी। वह कॉल दक्षिण-पूर्व एशिया के देश कंबोडिया, लाओस या म्यांमार के जंगलों में स्थित चीनी साइबर सिंडिकेट के कॉल सेंटरों से आ रही थी, जहाँ भारतीय युवाओं को मानव तस्करी करके ले जाया जाता है और बंधक बनाकर भारतीय नागरिकों को लूटने के लिए मजबूर किया जाता है। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने इस घातक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को जड़ से नष्ट करने के लिए एक सख्त कानूनी और तकनीकी ढांचा स्थापित किया है।
कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) स्पूफिंग क्या है? ठग भारतीय नंबर कैसे दिखाते हैं?
जब आप सामान्य मोबाइल से किसी को फोन करते हैं, तो आपकी टेलीकॉम कंपनी आपके सिम कार्ड का सही नंबर सामने वाले के फोन पर भेजती है। इसे दूरसंचार की भाषा में कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (Calling Line Identification - CLI) कहा जाता है।
परंतु जब कॉल पारंपरिक टेलीफोन लाइन के बजाय इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP - Voice over Internet Protocol) के जरिए की जाती है, तो विदेशी वीओआईपी सर्वर पर एक सॉफ्टवेयर टूल होता है जो कॉलर को अपनी मनमर्जी की कॉलर आईडी टाइप करने की छूट देता है। ठग उस सॉफ्टवेयर में किसी भी भारतीय पुलिस कमिश्नर का लैंडलाइन नंबर, सीबीआई मुख्यालय का नंबर, या ट्राई का आधिकारिक नंबर टाइप कर देते हैं।
जब यह सिग्नल इंटरनेट के रास्ते अंतरराष्ट्रीय गेटवे से होकर भारत में प्रवेश करता है, तो स्थानीय भारतीय ऑपरेटर को लगता है कि यह कोई सामान्य भारतीय नंबर है, और वह इसे बिना जांचे आपके मोबाइल स्क्रीन पर प्रदर्शित कर देता है। इस तकनीक को "सीएलआई स्पूफिंग (CLI Spoofing)" कहा जाता है, जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66D (कंप्यूटर संसाधन द्वारा प्रतिरूपण करके धोखाधड़ी) के तहत एक अत्यंत गंभीर गंभीर अपराध (Cognizable Offence) है।
दूरसंचार विभाग (DoT) का अंतरराष्ट्रीय गेटवे ब्लॉकिंग सिस्टम: कार्यप्रणाली व नियम
इस संकट का स्थायी समाधान खोजने के लिए दूरसंचार विभाग ने भारत के चारों प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटरों (Jio, Airtel, Vi, BSNL) और सभी इंटरनेशनल लॉन्ग डिस्टेंस (ILD) ऑपरेटरों के साथ मिलकर एक केंद्रीय फायरवॉल स्थापित किया है:
- इनबाउंड आईएलडी गेटवे फिल्टरेशन: जब भी कोई कॉल भारत की भौगोलिक सीमा के बाहर से इंटरनेशनल गेटवे (ILD Gateway) पर पहुंचती है, तो गेटवे का कंप्यूटर सबसे पहले कॉलर आईडी का निरीक्षण करता है।
- +91 नंबर का तत्काल सत्यापन: यदि आने वाली कॉल पर भारत का कंट्री कोड
+91लगा है, तो सिस्टम तुरंत एक स्वचालित आंतरिक क्वेरी जनरेट करता है। - रोमिंग डेटाबेस से क्रॉस-चेक: सिस्टम चेक करता है कि क्या यह
+91नंबर वास्तव में किसी वैध भारतीय ग्राहक का है जो इस समय विदेश में मौजूद है और जिसने अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा ले रखी है? - स्वतः कॉल ड्रॉप (Auto Call Drop): यदि उस नंबर का कोई एक्टिव अंतरराष्ट्रीय रोमिंग रिकॉर्ड नहीं मिलता, तो सिस्टम समझ जाता है कि यह वीओआईपी से स्पूफ की गई फर्जी कॉल है। वह कॉल भारतीय नेटवर्क में प्रवेश करने से पहले ही गेटवे पर स्वतः काट दी जाती है। आपके मोबाइल की घंटी बज ही नहीं सकती।
वैध अंतरराष्ट्रीय रोमिंग बनाम फर्जी स्पूफ़्ड कॉल: सिस्टम कैसे पहचानता है?
इस प्रणाली को लागू करते समय सबसे बड़ी कानूनी और तकनीकी चुनौती यह थी कि विदेश यात्रा पर गए लाखों निर्दोष भारतीयों (पर्यटकों, छात्रों, व्यापारिक यात्रियों) की कॉल्स प्रभावित न हों। इसके लिए DoT ने एक अत्यंत परिष्कृत त्रि-स्तरीय तकनीकी तंत्र विकसित किया है:
1. जब कोई वैध भारतीय नागरिक अपने जियो या एयरटेल सिम के साथ दुबई या लंदन में लैंड करता है, तो विदेशी टेलीकॉम कंपनी (जैसे Vodafone UK या Etisalat) भारत के ऑपरेटर को एक सिगनलिंग मैसेज भेजती है जिसे Location Update Request कहा जाता है।
2. भारतीय ऑपरेटर के होम लोकेशन रजिस्टर (HLR) में दर्ज हो जाता है कि यह नंबर इस समय अमुक देश के पार्टनर नेटवर्क पर रोमिंग में एक्टिव है।
3. जब वह व्यक्ति विदेश से भारत में अपने घर कॉल करता है, तो ILD गेटवे तुरंत HLR से पुष्टि कर लेता है कि कॉल वैध अंतरराष्ट्रीय रोमिंग से आ रही है, और कॉल बिना किसी रुकावट के कनेक्ट हो जाती है। इसके विपरीत, कंबोडिया के हैकर के पास कोई वैध सिम नहीं होता; वह बिना HLR रिकॉर्ड के इंटरनेट से कॉल भेजता है, जिसे गेटवे तुरंत कचरे के डिब्बे में फेंक देता है।
डिजिटल अरेस्ट और फेडेक्स पार्सल स्कैम में स्पूफ़्ड कॉल्स का इस्तेमाल
DoT द्वारा इस गेटवे सिस्टम को लागू करने का सबसे बड़ा तात्कालिक लाभ "डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest)" के घिनौने अपराध पर लगाम लगाना है। डिजिटल अरेस्ट की पूरी इमारत स्पूफ़्ड कॉल्स के झूठ पर टिकी होती है:
- सरकारी लोगो और वर्दी का छलावा: स्पूफ़्ड कॉल के बाद ठग पीड़ित को तुरंत स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर आने को कहते हैं। वीडियो कॉल में वे नकली पुलिस स्टेशन, बैकग्राउंड में भारत सरकार का प्रतीक चिह्न (अशोक स्तंभ) और फर्जी पुलिस की वर्दी पहनकर बैठते हैं।
- कानूनी अधिकार का कोई अस्तित्व नहीं: भारत के किसी भी कानून (संविधान, BNSS 2023, या IT Act) में पुलिस को वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार करने, नजरबंद करने, या जमानत के नाम पर बैंक खाते में पैसे जमा कराने का कोई अधिकार नहीं है।
- DoT की नई पहल: नए नियमों के तहत ऑपरेटरों को यह भी निर्देश दिया गया है कि विदेश से आने वाली सामान्य अंतरराष्ट्रीय कॉल्स पर फोन स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से "International Call" या चेतावनी फ्लैश की जाए, ताकि कोई भी नागरिक भ्रम में न रहे।
संचार साथी के "चक्षु (Chakshu)" पोर्टल पर स्पूफ कॉल रिपोर्ट करने की स्टेप-बाय-स्टेप SOP
यदि दूरसंचार विभाग के गेटवे को चकमा देकर कोई संदिग्ध फ्रॉड कॉल या एसएमएस आपके मोबाइल तक पहुंच भी जाता है, तो नागरिक के रूप में आपका पहला कर्तव्य है कि आप 3 मिनट के भीतर उसे "चक्षु (Chakshu)" पोर्टल पर दर्ज कराएं:
- चक्षु पोर्टल खोलें: वेब ब्राउज़र में संचार साथी की वेबसाइट
sancharsaathi.gov.inपर जाएं और 'Citizen Centric Services' के अंतर्गत "Report Suspected Fraud Communication (Chakshu)" पर क्लिक करें। - धोखाधड़ी का माध्यम चुनें: ड्रॉपडाउन मेनू से चुनें कि संदिग्ध संचार किस माध्यम से आया—Voice Call, SMS, अथवा WhatsApp।
- कॉल का विवरण दर्ज करें: जिस नंबर से कॉल आई थी वह 10 अंकों का नंबर या अंतरराष्ट्रीय नंबर दर्ज करें, कॉल आने की सटीक तारीख और समय भरें।
- धोखाधड़ी की श्रेणी (Category of Fraud): दी गई सूची में से उचित विकल्प चुनें:
- Fake Police / CBI / Court / Digital Arrest
- Fake Courier / FedEx Narcotics parcel
- Electricity Bill Disconnection Threat
- KBC / Lottery / Job Offer Scam
- साक्ष्य अपलोड करें: अपने कॉल लॉग का स्क्रीनशॉट या यदि कोई ऑडियो रिकॉर्डिंग या एसएमएस है, तो उसकी फाइल अपलोड करें। संक्षेप में 2 लाइनों में बताएं कि कॉलर ने क्या कहा।
- ओटीपी सत्यापन व सबमिशन: अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर दर्ज कर ओटीपी से सत्यापित करें और सबमिट करें। DoT की तकनीकी टीम उस नंबर के कॉल ओरिजिन की जांच करके 24 घंटे के भीतर उस नंबर और उसके मोबाइल डिवाइस के आईएमईआई को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर देती है।
व्हाट्सएप व टेलीग्राम पर विदेशी कोड (+84, +92, +62) से बचाव के नियम
जैसे ही DoT ने सामान्य टेलीकॉम गेटवे पर शिकंजा कसा, साइबर अपराधियों ने अपना रुख व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) की इंटरनेट कॉलिंग की ओर मोड़ लिया। आए दिन लोगों को +92 (पाकिस्तान), +84 (वियतनाम), +62 (इंडोनेशिया), या +254 (केन्या) के कोड से अनचाहे वीडियो कॉल आते हैं।
दूरसंचार विभाग की कानूनी शक्तियां केवल टेलीकॉम ऑपरेटरों पर चलती हैं, ओवर-द-टॉप (OTT) ऐप्स पर नहीं। अतः व्हाट्सएप पर अपनी सुरक्षा के लिए निम्नलिखित सेटिंग्स आज ही ऑन करें:
- Unknown Callers को साइलेंट करें: व्हाट्सएप की Settings ➔ Privacy ➔ Calls में जाएं और "Silence Unknown Callers" विकल्प को सक्रिय करें। इससे किसी भी अनजान विदेशी नंबर की घंटी आपके फोन पर नहीं बजेगी; वह केवल साइलेंट नोटिफिकेशन में दिखाई देगा।
- प्रोफाइल प्राइवेसी सेटिंग्स: अपनी प्रोफाइल फोटो, लास्ट सीन और स्टेटस को 'My Contacts' पर सेट करें ताकि कोई अनजान हैकर आपकी तस्वीर का दुरुपयोग करके डीपफेक अश्लील वीडियो या फेक प्रोफाइल न बना सके।
- एप के भीतर सीधे रिपोर्ट करें: किसी भी विदेशी नंबर से मैसेज आने पर बिना कोई जवाब दिए चैट के ऊपर दिख रहे 'Report and Block' बटन पर क्लिक करें। मेटा का ऑटोमेटेड सिस्टम बार-बार रिपोर्ट होने वाले विदेशी नंबरों के व्हाट्सएप अकाउंट को हमेशा के लिए बैन कर देता है।
कंबोडिया व म्यांमार साइबर कंपाउंड्स का कड़वा सच: विदेश मंत्रालय (MEA) की एडवाइजरी
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास (Phnom Penh व Yangon) ने कंबोडिया के सिहानुकविले और म्यांमार के म्यावाडी (KK Park / Shwe Kokko) क्षेत्रों के संबंध में कई आधिकारिक एडवाइजरी जारी की हैं। इन क्षेत्रों में चीनी माफिया द्वारा चलाए जा रहे विशालकाय 'स्कैम कंपाउंड्स' (Scam Compounds) स्थित हैं।
हजारों भारतीय आईटी ग्रेजुएट्स को दुबई या बैंकॉक में 'डेटा एंट्री जॉब' का लालच देकर थाईलैंड के रास्ते सीमा पार कराकर इन कंपाउंड्स में बंधक बना लिया जाता है। उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं और उन्हें बंदूक की नोक पर भारतीय नागरिकों को +91 स्पूफ़्ड कॉल करके 'डिजिटल अरेस्ट' और 'क्रिप्टो ट्रेडिंग' के नाम पर ठगने के लिए 16-16 घंटे काम कराया जाता है। भारत सरकार अब तक वायुसेना और विशेष अभियानों के जरिए सैकड़ों बंधक युवाओं को मुक्त कराकर स्वदेश ला चुकी है।
स्पूफ़्ड पुलिस/कस्टम कॉल आने पर साइबर थाने में दी जाने वाली कानूनी शिकायत का प्रारूप (Draft Complaint)
सेवा में,
प्रभारी निरीक्षक / नोडल अधिकारी,
साइबर अपराध पुलिस थाना, [जिला / शहर का नाम]
विषय: सीएलआई स्पूफिंग, फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर रंगदारी व डिजिटल अरेस्ट के प्रयास की एफआईआर (FIR) दर्ज करने बाबत।
महोदय,
निवेदन है कि प्रार्थी [अपना नाम], निवासी [पूरा पता], के व्यक्तिगत मोबाइल नंबर [नंबर] पर आज दिनांक [तारीख] को समय लगभग [समय] बजे एक अज्ञात मोबाइल नंबर [स्क्रीन पर दिखा नंबर, उदा. +91 98XXXX] से कॉल प्राप्त हुई।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को [मुंबई पुलिस का इंस्पेक्टर / सीबीआई अधिकारी] बताते हुए अत्यंत डराने वाले लहजे में आरोप लगाया कि प्रार्थी के नाम से ताइवान भेजे गए फेडेक्स पार्सल में नशीले पदार्थ (Drugs) बरामद हुए हैं। कॉलर ने प्रार्थी को तुरंत स्काइप वीडियो कॉल पर आने तथा गिरफ्तारी से बचने के लिए ₹[मांगी गई रकम] एक तथाकथित 'आरबीआई वेरिफिकेशन खाते' में आरटीजीएस करने का दबाव बनाया।
प्रार्थी ने सतर्कता बरतते हुए तुरंत कॉल काट दी और कोई वित्तीय लेनदेन नहीं किया। प्रार्थी को पूर्ण विश्वास है कि यह विदेशी साइबर अपराधियों द्वारा वीओआईपी (VoIP) और सीएलआई स्पूफिंग तकनीक के जरिए किया गया संगठित रंगदारी (Extortion) का प्रयास है। अतः आपसे निवेदन है कि भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 308 (जबरन वसूली), 319 (प्रतिरूपण द्वारा छल) एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के अंतर्गत एफआईआर (FIR) (FIR) दर्ज कर उक्त नंबर के आईपी एड्रेस और वीओआईपी गेटवे की तकनीकी जांच करने की कृपा करें।
संलग्नक: इनकमिंग कॉल लॉग का स्क्रीनशॉट व ऑडियो क्लिप।
भवदीय,
[हस्ताक्षर, नाम व मोबाइल नंबर]
कॉल का प्रकार, उत्पत्ति स्रोत, कॉलर आईडी, DoT गेटवे एक्शन व नागरिक सुरक्षा सारणी (5-कॉलम)
नीचे दी गई 5-कॉलम कानूनी सारणी में कॉल्स के विभिन्न प्रकारों, उनके तकनीकी स्रोतों, DoT के गेटवे फिल्टरेशन नियमों और नागरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल का संपूर्ण विवरण दिया गया है:
| कॉल का प्रकार | कॉल उत्पत्ति स्रोत | स्क्रीन पर दिखने वाली कॉलर आईडी | DoT अंतरराष्ट्रीय गेटवे एक्शन | नागरिक के लिए सुरक्षा निर्देश |
|---|---|---|---|---|
| स्पूफ़्ड इंटरनेशनल फ्रॉड कॉल | विदेशी वीओआईपी सर्वर (कंबोडिया/म्यांमार) | फर्जी भारतीय नंबर (+91...) | गेटवे पर स्वतः 100% कॉल ड्रॉप | कदापि न डरें, चक्षु पर रिपोर्ट करें |
| वैध अंतरराष्ट्रीय रोमिंग कॉल | विदेश में मौजूद असली भारतीय सिम | असली भारतीय नंबर (+91...) | HLR रोमिंग डेटाबेस से पास | सामान्य पारिवारिक/व्यावसायिक कॉल |
| सामान्य अंतरराष्ट्रीय कॉल | विदेशी लैंडलाइन या मोबाइल नेटवर्क | विदेशी कंट्री कोड (+1, +44, +971) | वैध आईएलडी रूट से सामान्य डिलीवरी | पहचान के बिना वित्तीय बात न करें |
| व्हाट्सएप / इंटरनेट कॉल | विदेशी वर्चुअल नंबर (+84, +92 आदि) | इंटरनेशनल प्रोफाइल नंबर | लागू नहीं (OTT डेटा ट्रैफिक) | Silence Unknown Callers ऑन करें |
| डिजिटल अरेस्ट धमकी कॉल | साइबर सिंडिकेट द्वारा प्रतिरूपण | फर्जी पुलिस/सीबीआई नंबर | ASTR व चक्षु ब्लैकलिस्टिंग | तुरंत 1930 पर साइबर शिकायत दर्ज करें |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
Q1: विदेश में बैठा साइबर ठग मेरे फोन पर भारतीय नंबर (+91) कैसे दिखा सकता है?
यह वीओआईपी (Voice over IP) और इंटरनेट कॉलिंग सॉफ्टवेयर के जरिए संभव होता है। साइबर अपराधी विदेशी सर्वर पर पीबीएक्स (PBX) सॉफ्टवेयर का उपयोग करके कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) में हेराफेरी कर देते हैं। इसे "सीएलआई स्पूफिंग" कहा जाता है, जिससे कॉल विदेश से आने के बावजूद फोन स्क्रीन पर मुंबई, दिल्ली या स्थानीय पुलिस स्टेशन का +91 नंबर दिखता है।
Q2: DoT का नया इंटरनेशनल गेटवे ब्लॉकिंग सिस्टम क्या है?
दूरसंचार विभाग ने भारत के सभी इंटरनेशनल लॉन्ग डिस्टेंस (ILD) ऑपरेटरों को आदेश दिया है कि यदि कोई इनकमिंग अंतरराष्ट्रीय कॉल विदेशी गेटवे से आ रही है और उसकी कॉलर आईडी पर +91 है, लेकिन वह सिम विदेश में आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय रोमिंग पर पंजीकृत नहीं है, तो उस कॉल को भारतीय टेलीकॉम नेटवर्क में प्रवेश करने से पहले ही स्वतः काट (Drop) दिया जाए।
Q3: यदि मेरे परिवार का कोई सदस्य विदेश से भारत कॉल करता है, तो क्या उसकी कॉल भी ब्लॉक हो जाएगी?
बिल्कुल नहीं! यदि आपके परिजन भारतीय सिम कार्ड लेकर विदेश गए हैं और उनका आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय रोमिंग (IR) पैक चालू है, तो DoT का सिस्टम उनके रोमिंग डेटाबेस से मिलान करके उनकी कॉल को तुरंत पास कर देता है। केवल फर्जी विदेशी सर्वर से उत्पन्न कॉल्स ब्लॉक होती हैं।
Q4: क्या सिर्फ अनजान अंतरराष्ट्रीय कॉल उठाने भर से बैंक खाता खाली हो सकता है?
नहीं! केवल कॉल उठाने या बातचीत सुनने से कोई बैंक खाता खाली नहीं हो सकता। वित्तीय नुकसान केवल तभी होता है जब आप कॉलर के कहने पर कोई ऐप (जैसे AnyDesk, TeamViewer) डाउनलोड करें, ओटीपी साझा करें, या डरकर स्वयं अपने यूपीआई/नेटबैंकिंग से पैसे ट्रांसफर करें।
Q5: संचार साथी का "चक्षु" (Chakshu) पोर्टल क्या है?
चक्षु भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा शुरू किया गया एक नागरिक सुरक्षा पोर्टल है। इसके जरिए कोई भी नागरिक फर्जी कॉल, एसएमएस या व्हाट्सएप फ्रॉड (जैसे लॉटरी, जॉब ऑफर, सेक्सटॉर्शन, डिजिटल अरेस्ट) की 3 मिनट में शिकायत दर्ज करा सकता है।
Q6: व्हाट्सएप पर आने वाली विदेशी कॉल्स (+84, +92, +62) को कैसे ब्लॉक करें?
DoT के नियम केवल सामान्य मोबाइल नेटवर्क कॉल्स पर लागू होते हैं, इंटरनेट आधारित व्हाट्सएप कॉल्स पर नहीं। व्हाट्सएप पर विदेशी स्पैम को रोकने के लिए ऐप की Settings ➔ Privacy ➔ Calls में जाएं और "Silence Unknown Callers" को ऑन करें।
Q7: चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट करने के बाद टेलीकॉम कंपनियां क्या कार्रवाई करती हैं?
रिपोर्ट मिलने पर संबंधित नंबर और उस मोबाइल के आईएमईआई (IMEI) को केंद्रीय डेटाबेस में संदिग्ध घोषित किया जाता है। लगातार शिकायतें आने पर उस सिम को हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया जाता है और राष्ट्रीय साइबर सेल को जांच भेजी जाती है।
Q8: क्या पुलिस या कस्टम अधिकारी कभी फोन पर वीडियो कॉल करके बयान दर्ज करते हैं?
कदापि नहीं! भारत के कानून में किसी भी सरकारी जांच एजेंसी (CBI, ED, Narcotics Bureau, State Police) को फोन या स्काइप वीडियो कॉल पर जांच करने या पैसे मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ऐसी कोई भी कॉल 100% आपराधिक ठगी है।
आधिकारिक पोर्टल व क्लस्टर गाइड्स
- DoT Sanchar Saathi Official Portal
- Chakshu Suspected Fraud Reporting Portal
- TAFCOP पोर्टल: आधार पर एक्टिव सिम चेक व फर्जी नंबर ब्लॉक SOP
- e-SIM स्वैप फ्रॉड सुरक्षा व DoT 24-घंटे SMS फ्रीज नियम गाइड
- डिजिटल अरेस्ट कानूनी सच व MHA एडवाइजरी बचाव SOP
- 1930 साइबर हेल्पलाइन: वित्तीय फ्रॉड गोल्डन आवर रिपोर्टिंग गाइड