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जमीन की सरकारी पैमाइश व सीमांकन (धारा 24 राजस्व संहिता): ₹1000 चालान, ऑनलाइन आवेदन व पत्थरगड़ी के नियम

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राजीव रंजन शर्मा
वरिष्ठ राजस्व व कानूनी सलाहकार

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

यदि पड़ोसी काश्तकार ने आपके खेत की मेड़ तोड़कर जमीन दबा ली है, तो लेखपाल से मिन्नतें करने के बजाय उत्तर प्रदेश/बिहार राजस्व संहिता की **धारा 24** के तहत एसडीएम कोर्ट में सीमांकन वाद (Demarcation Suit) दायर करें। इसके लिए राजकोष पोर्टल पर प्रति गाटा ₹1,000 का सरकारी ई-चालान जमा होता है। इसके बाद राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) सरकारी नक्शे व मुस्तकिल मुकाम से जरीब डालकर नाप करता है और एसडीएम के आदेश से पुलिस मौजूदगी में पक्की पत्थरगड़ी होती है।

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1. जमीन पैमाइश: काम की मुख्य बात (AEO Direct Answer)

ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में मेड़ का विवाद सुलझाने का एकमात्र कानूनी रास्ता उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 (सीमांकन वाद) है। किसी भी लेखपाल को जेब से पैसे देकर मौखिक नापजोख कराने का कोई कानूनी मूल्य नहीं होता। जब आप राजकोष पोर्टल पर ₹1,000 प्रति गाटा का सरकारी चालान भरकर एसडीएम कोर्ट में ऑनलाइन केस दायर करते हैं, तो राजस्व निरीक्षक व लेखपाल को सरकारी नक्शे से नापकर फील्ड बुक पेश करनी होती है। एसडीएम द्वारा आदेश होने पर मौके पर पक्के सीमेंटेड खंभे (पत्थरगड़ी) गड़वाए जाते हैं।

2. मौखिक पैमाइश क्यों व्यर्थ है और धारा 24 क्यों जरूरी है?

अधिकांश किसान लेखपाल को बुलाकर खेत नपवाते हैं, लेकिन पड़ोसी अगले ही दिन फिर मेड़ काट लेता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि:

  • कानूनी बाध्यता का अभाव: अनौपचारिक या मौखिक नाप की कोई कोर्ट वैल्यू नहीं होती। न कोई सरकारी आदेश होता है और न ही पुलिस मौके पर आती है।
  • धारा 24 की न्यायिक ताकत: धारा 24 के तहत सीमांकन एक विधिवत न्यायिक प्रक्रिया है। इसमें चारों तरफ के पड़ोसियों को लिखित नोटिस जाता है, उनकी मौजूदगी में नाप होती है, और एसडीएम के हस्ताक्षर से पत्थरगड़ी का पक्का आदेश पारित होता है। इसके बाद मेड़ काटना संज्ञेय अपराध बन जाता है।

3. ₹1,000 का सरकारी चालान (Head 0029) कैसे जमा करें?

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पैमाइश की फीस कभी भी नकद नहीं दी जाती। इसे राज्य के ट्रेजरी पोर्टल (जैसे यूपी में rajkosh.up.nic.in) पर जमा किया जाता है:

  • विभाग: Revenue Department (राजस्व विभाग)।
  • लेखा शीर्षक (Head of Account): 0029-00-800-04-00 (भू-राजस्व व सीमांकन शुल्क)।
  • फीस दर: यदि आपका खेत एक गाटा संख्या का है तो ₹1,000। यदि दो गाटों की संयुक्त पैमाइश है तो ₹2,000।
  • चालान रसीद (e-Challan Receipt): भुगतान के बाद 9 अंकों का चालान नंबर और बैंक संदर्भ संख्या वाली रसीद का प्रिंट निकालें।

4. मुस्तकिल मुकाम (Fixed Point) व सिहद्दा से नापजोख का वैज्ञानिक तरीका

राजस्व पैमाइश खेत के बीच से कभी शुरू नहीं होती। कानूनगो नापजोख के लिए गांव के सरकारी नक्शे पर दर्ज 'मुस्तकिल मुकाम' ढूंढता है:

  1. सिहद्दा (Tri-junction Pillar): वह पक्का सरकारी पत्थर जहाँ तीन गांवों की सीमाएं आपस में मिलती हैं। यह कभी नहीं बदलता।
  2. दोहद्दा (Bi-junction): जहाँ दो गांवों की सीमाएं मिलती हैं।
  3. सरकारी कुआं, पक्का चकमार्ग या पुलिया: नक्शे में दर्ज स्थायी चिन्ह।

वहां से लोहे की जरीब (Gunter's Chain) या आधुनिक Total Station Machine (TSM) द्वारा कड़ियां नापते हुए आपके खेत के चारों कोनों का सही रकबा तय किया जाता है।

5. धारा 24 पैमाइश कराने की स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन प्रक्रिया

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  1. दस्तावेज तैयार करना: अद्यतन प्रमाणित खतौनी, प्रमाणित शजरा नक्शा (Certified Village Map), और ₹1,000 की चालान रसीद।
  2. राजस्व न्यायालय पोर्टल पर केस फाइलिंग: vaad.up.nic.in पर 'धारा 24 - सीमांकन वाद' श्रेणी चुनकर अधिवक्ता के जरिए ऑनलाइन वाद दर्ज कराना।
  3. एसडीएम कोर्ट से आदेश: एसडीएम पत्रावली देखकर राजस्व निरीक्षक (RI / कानूनगो) को 30 दिन में पैमाइश करने का आदेश जारी करते हैं।
  4. चौहद्दीदारों को पूर्व नोटिस: कानूनगो द्वारा आपके खेत से सटे चारों तरफ के काश्तकारों को पैमाइश की निश्चित तारीख व समय का लिखित समन तामील कराया जाता है।
  5. मौके पर स्थलीय नापजोख: निर्धारित तारीख पर राजस्व टीम मुस्तकिल मुकाम से नाप करके कच्ची निशानदेही करती है।
  6. फील्ड बुक व आख्या: कानूनगो नाप के आधार पर नक्शा और फील्ड बुक बनाकर एसडीएम कोर्ट में दाखिल करता है।
  7. एसडीएम द्वारा पत्थरगड़ी आदेश: 30 दिन में कोई आपत्ति न आने पर कोर्ट अंतिम आदेश पारित करती है।

6. पत्थरगड़ी (Boundary Pillar Fixing) व पुलिस प्रोटेक्शन

अंतिम आदेश होने के बाद वादी को तहसील में पत्थरगड़ी का प्रार्थना पत्र देना होता है। यदि पड़ोसी मौके पर लड़ाई-झगड़ा करने की धमकी देता है, तो धारा 24(2) के तहत एसडीएम संबंधित थाने को पर्याप्त पुलिस बल (Police Aid) मौके पर भेजने का लिखित निर्देश देते हैं। पुलिस की निगरानी में राजस्व अमीन चारों कोनों पर सीमेंटेड खंभे गाड़कर पक्की बाउंड्री तय करता है।

7. पैमाइश के बाद दोबारा मेड़ काटने पर सजा व जुर्माना

यदि कोई दबंग व्यक्ति सरकारी पत्थरगड़ी के बाद फिर से मेड़ तोड़ता है या पिलर उखाड़ फेंकता है, तो कानून में उसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है:

  • राजस्व संहिता की धारा 24(3): एसडीएम कोर्ट दोषी पर भारी जुर्माना लगाती है और पुनः पत्थरगड़ी का पूरा खर्च उसी अतिक्रमणकारी से भू-राजस्व की भांति वसूल करती है।
  • बीएनएस (BNS) की धारा 324 व 326: सार्वजनिक या न्यायिक सीमा चिन्ह नष्ट करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में सीधे गैर-जमानती एफआईआर दर्ज हो सकती है।

8. अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

1. जमीन की पैमाइश के लिए सरकारी फीस कितनी लगती है?

उत्तर प्रदेश में प्रति गाटा (खसरा संख्या) ₹1,000 की सरकारी ट्रेजरी फीस चालान के माध्यम से जमा होती है। लेखपाल या अमीन को अलग से कोई व्यक्तिगत नकद फीस देने का कानूनी प्रावधान नहीं है।

2. यदि पड़ोसी पैमाइश के दिन मौके पर विरोध करे या न आने दे तो क्या करें?

राजस्व निरीक्षक मौके की प्रतिकूल रिपोर्ट एसडीएम को सौंपता है, जिसके बाद एसडीएम न्यायालय द्वारा धारा 24(2) के तहत पर्याप्त पुलिस बल (Police Protection) के साथ पैमाइश कराने का लिखित आदेश जारी किया जाता है।

3. पैमाइश के कितने दिनों बाद एसडीएम कोर्ट से सीमांकन आदेश पारित होता है?

कानून के अनुसार रिपोर्ट आने के 30 दिनों के भीतर यदि कोई आपत्ति नहीं आती, तो एसडीएम पैमाइश आख्या स्वीकार करते हुए स्थायी पत्थरगड़ी (Boundary Marking) का आदेश पारित कर देते हैं।

4. क्या आबादी या मकान की जमीन की पैमाइश धारा 24 में हो सकती है?

नहीं, धारा 24 केवल कृषि भूमि (Agricultural Revenue Land) के सीमांकन के लिए है। आबादी, प्लॉट या आवासीय मकान के विवाद में पैमाइश केवल सक्षम सिविल कोर्ट के कोर्ट कमिश्नर द्वारा कराई जा सकती है।

5. पैमाइश के बाद यदि पड़ोसी दोबारा मेड़ काट दे तो क्या सजा है?

पत्थरगड़ी आदेश के बाद सीमा चिन्ह तोड़ना राजस्व संहिता और भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। पीड़ित व्यक्ति धारा 24(3) के तहत पुनः पत्थरगड़ी और विपक्षी पर जुर्माना व एफआईआर दर्ज करा सकता है।

9. राजकोष ट्रेजरी चालान जनरेट करने की कम्पलीट चेकलिस्ट

चालान भरते समय होने वाली छोटी सी गलती से फाइल महीनों लटक सकती है। चालान भरते समय इन बिंदुओं का ध्यान रखें:

फील्ड का नाम क्या दर्ज करें? महत्वपूर्ण सावधानी
Department Revenue Department (राजस्व विभाग) गलती से ज्यूडिशियल या रजिस्ट्रेशन विभाग न चुनें।
Head (लेखा शीर्षक) 0029-00-800-04-00 यह सीमांकन व पैमाइश मद का आधिकारिक कोड है।
Amount ₹1,000 प्रति गाटा यदि 3 गाटों की पैमाइश है तो ₹3,000 भरें।
DDO Code संबंधित उपजिलाधिकारी (SDM) का कोड तहसील ट्रेजरी से डीडीओ कोड पहले पूछ लें।

10. आधुनिक ईटीएस (ETS Machine) vs पुरानी लोहे की जरीब नाप

पारंपरिक रूप से कानूनगो लोहे की कड़ियों वाली जरीब (Gunter Chain) से नापते थे जिसमें खिंचाव या टेढ़े होने से 1-2 फीट का अंतर आ जाता था। अब राजस्व परिषद ने Electronic Total Station (ETS) और DGPS मशीनों को मान्यता दी है। ये उपग्रह (Satellite) और लेजर बीम के माध्यम से सेंटीमीटर स्तर की 100% अचूक पैमाइश करती हैं, जिस पर कोर्ट में कोई आपत्ति नहीं टिक पाती।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. जमीन की पैमाइश के लिए सरकारी फीस कितनी लगती है?

A. उत्तर प्रदेश में प्रति गाटा (खसरा संख्या) ₹1,000 की सरकारी ट्रेजरी फीस चालान के माध्यम से जमा होती है। लेखपाल या अमीन को अलग से कोई व्यक्तिगत नकद फीस देने का कानूनी प्रावधान नहीं है।

Q. यदि पड़ोसी पैमाइश के दिन मौके पर विरोध करे या न आने दे तो क्या करें?

A. राजस्व निरीक्षक मौके की प्रतिकूल रिपोर्ट एसडीएम को सौंपता है, जिसके बाद एसडीएम न्यायालय द्वारा धारा 24(2) के तहत पर्याप्त पुलिस बल (Police Protection) के साथ पैमाइश कराने का लिखित आदेश जारी किया जाता है।

Q. पैमाइश के कितने दिनों बाद एसडीएम कोर्ट से सीमांकन आदेश पारित होता है?

A. कानून के अनुसार रिपोर्ट आने के 30 दिनों के भीतर यदि कोई आपत्ति नहीं आती, तो एसडीएम पैमाइश आख्या स्वीकार करते हुए स्थायी पत्थरगड़ी (Boundary Marking) का आदेश पारित कर देते हैं।

Q. क्या आबादी या मकान की जमीन की पैमाइश धारा 24 में हो सकती है?

A. नहीं, धारा 24 केवल कृषि भूमि (Agricultural Revenue Land) के सीमांकन के लिए है। आबादी, प्लॉट या आवासीय मकान के विवाद में पैमाइश केवल सक्षम सिविल कोर्ट के कोर्ट कमिश्नर द्वारा कराई जा सकती है।

Q. पैमाइश के बाद यदि पड़ोसी दोबारा मेड़ काट दे तो क्या सजा है?

A. पत्थरगड़ी आदेश के बाद सीमा चिन्ह तोड़ना राजस्व संहिता और भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। पीड़ित व्यक्ति धारा 24(3) के तहत पुनः पत्थरगड़ी और विपक्षी पर जुर्माना व एफआईआर दर्ज करा सकता है।

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