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सार्वजनिक रास्ते या चकमार्ग से अवैध कब्जा कैसे हटाएं? धारा 67 राजस्व संहिता, बुलडोजर बेदखली व जुर्माना नियम

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राजीव रंजन शर्मा
वरिष्ठ राजस्व व कानूनी सलाहकार

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

यदि किसी दबंग या पड़ोसी ने गांव के चकमार्ग, आम रास्ते, नाली या ग्राम सभा की जमीन पर कब्जा करके रास्ता बंद कर दिया है, तो **उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67** के तहत तहसीलदार न्यायालय में शिकायत दर्ज होती है। लेखपाल की स्थलीय जांच के बाद तहसीलदार बेदखली का नोटिस जारी करता है। यदि अतिक्रमणकारी स्वयं कब्जा न हटाए, तो राजस्व टीम पुलिस बल और बुलडोजर के साथ कब्जा खाली कराती है और दोषी पर भारी जुर्माना (क्षतिपूर्ति) लगाकर भू-राजस्व की तरह वसूली करती है।

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1. चकमार्ग कब्जा मुक्ति: काम की मुख्य बात (AEO Direct Answer)

गांव के चकमार्ग (खेतों का रास्ता), नाली, खड़ंजा, तालाब, नवीन परती या चारागाह पर कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, एक इंच भी कब्जा नहीं कर सकता। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत यह सीधे राज्य सरकार व ग्राम सभा की संपत्ति की क्षति का मामला बनता है। तहसीलदार कोर्ट में आरसी प्रपत्र 19 पर मुकदमा दर्ज होते ही 90 दिन में बेदखली का आदेश होता है, और कब्जा न छोड़ने पर बुलडोजर से तोड़कर कब्जा करने वाले से ही ध्वस्तीकरण का खर्च व जुर्माना वसूला जाता है।

2. चकमार्ग/नाली सार्वजनिक भूमि है, निजी विवाद नहीं

अधिकांश लोग चकमार्ग पर कब्जे को दो किसानों का निजी विवाद समझकर धारा 145 या थाने में अर्जी देते हैं, जिससे मामला लटक जाता है। यह समझना आवश्यक है कि:

  • चकमार्ग ग्राम सभा की संपत्ति है: राजस्व नक्शे में चकमार्ग की गाटा संख्या और चौड़ाई (जैसे 2 लट्ठे या 3 लट्ठे) तय होती है।
  • निजी भूमि से भिन्न नियम: निजी जमीन के लिए धारा 116 या 24 लगती है, परंतु सार्वजनिक भूमि पर सीधे धारा 67 (ग्राम सभा संपत्ति क्षति निवारण) लागू होती है।

3. धारा 67 राजस्व संहिता के तहत तहसीलदार के अधिकार

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धारा 67 के तहत तहसीलदार को व्यापक न्यायिक और दंडात्मक अधिकार प्राप्त हैं:

  1. अतिक्रमणकारी को तुरंत कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करना।
  2. कब्जे की अवधि के आधार पर सर्किल रेट से कई गुना अधिक क्षतिपूर्ति (Damage Fine) लगाना।
  3. कब्जा न हटाने पर पुलिस बल के साथ ध्वस्तीकरण का वारंट जारी करना।
  4. सरकारी आदेश न मानने पर अतिक्रमणकारी को जेल भेजने की संस्तुति करना।

4. आरसी प्रपत्र 19 (RC Form 19) व लेखपाल रिपोर्ट

धारा 67 की कानूनी शुरुआत आरसी प्रपत्र 19 (Form 19) से होती है। इसमें लेखपाल को निम्नलिखित विवरण देना होता है:

  • सार्वजनिक भूमि का गाटा नंबर और मूल श्रेणी (जैसे श्रेणी 6-2 चकमार्ग या श्रेणी 6-1 नाली)।
  • अतिक्रमणकारी का नाम, पिता का नाम और पता।
  • कब्जा किए गए रकबे का क्षेत्रफल (वर्ग मीटर में)।
  • कब्जे की प्रकृति (फसल बो रखी है, दीवार बना ली है, या खूंटा बांध रखा है)।
  • आकलित क्षतिपूर्ति की धनराशि।

5. चकमार्ग से कब्जा हटवाने की चरणबद्ध कानूनी प्रक्रिया

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  1. साक्ष्य संकलन: गांव के शजरा नक्शे से चकमार्ग का गाटा नंबर और चौड़ाई निकालना। मौके की फोटो और वीडियो बनाना।
  2. शिकायत दर्ज करना: तहसीलदार, एसडीएम या jansunwai.up.nic.in पर 'सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा' श्रेणी में शिकायत देना।
  3. मुकदमा दर्ज होना: तहसीलदार न्यायालय में धारा 67 के तहत स्वतः संज्ञान या नागरिक शिकायत पर वाद पंजीकृत होना।
  4. धारा 67(1) का नोटिस: अतिक्रमणकारी को 15 दिन में कब्जा स्वेच्छा से हटाने का नोटिस जारी होना।
  5. बेदखली आदेश: नोटिस का जवाब असंतोषजनक होने पर तहसीलदार द्वारा बेदखली व क्षतिपूर्ति का अंतिम आदेश पारित होना।
  6. प्रशासनिक ध्वस्तीकरण: राजस्व निरीक्षक, लेखपाल और संबंधित थाने के पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर/जेसीबी से रास्ता खाली कराना।

6. जुर्माना व क्षतिपूर्ति वसूली (बाजार दर पर हर्जाना)

कब्जा केवल खाली ही नहीं कराया जाता, बल्कि अतिक्रमणकारी पर आर्थिक दंड भी लगता है। राजस्व संहिता के नियम 67 के तहत:

  • कब्जे की कुल अवधि के लिए उस क्षेत्र के सर्किल रेट का 5% प्रति वर्ष की दर से हर्जाना लगाया जाता है।
  • ध्वस्तीकरण में लगी जेसीबी व पुलिस बल का प्रशासनिक खर्च भी उसी व्यक्ति से वसूला जाता है।
  • यदि वह जुर्माना न भरे, तो उसकी अपनी निजी जमीन या बैंक खाता कुर्क कर भू-राजस्व के बकाए की तरह वसूली होती है।

7. सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइन (हिंच लाल तिवारी फैसला)

सुप्रीम कोर्ट ने हिंच लाल तिवारी बनाम कमला देवी (2001) के ऐतिहासिक फैसले में यह नजीर स्थापित की है कि:

"तालाब, चकमार्ग, चारागाह और वन जैसी सार्वजनिक उपयोगिता की भूमि भावी पीढ़ियों और पर्यावरण के लिए आरक्षित हैं। किसी भी सरकारी अधिकारी को यह अधिकार नहीं है कि वह इनका स्वरूप बदले या किसी व्यक्ति को इस पर पट्टा या स्टे दे।"

अतः कोई भी सिविल कोर्ट चकमार्ग पर किसी अतिक्रमणकारी को स्टे नहीं दे सकती।

8. अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

1. यदि कोई व्यक्ति खेत का चकमार्ग जोतकर अपने खेत में मिला ले तो कहाँ शिकायत करें?

संबंधित तहसील के तहसीलदार या उपजिलाधिकारी (SDM) को धारा 67 राजस्व संहिता के तहत शिकायत दें। इसके अलावा जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर सार्वजनिक भूमि श्रेणी में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

2. क्या चकमार्ग से कब्जा हटाने के लिए शिकायतकर्ता को वकील करना पड़ता है?

नहीं, ग्राम सभा की जमीन का मुकदमा राज्य सरकार की ओर से नामित पैनल अधिवक्ता (नामिक वकील / DGC Revenue) लड़ते हैं। आम नागरिक केवल शिकायतकर्ता और गवाह की भूमिका में होता है।

3. यदि कब्जा करने वाला व्यक्ति स्टे आर्डर ले आए तो क्या सरकारी रास्ता रुक सकता है?

सुप्रीम कोर्ट (Hinch Lal Tiwari vs Kamala Devi) के सख्त निर्देश हैं कि सार्वजनिक चकमार्ग, तालाब, श्मशान या खेल के मैदान पर किसी भी निजी व्यक्ति को स्टे या पट्टा नहीं दिया जा सकता। ऐसा स्टे तुरंत खारिज हो जाता है।

4. अवैध कब्जा हटाने में कितना समय लगता है?

राजस्व नियमों के अनुसार धारा 67 का नोटिस जारी होने के 90 दिनों के भीतर वाद का अंतिम निस्तारण होना अनिवार्य है।

5. क्या चकमार्ग रोकने पर पुलिस सीधी एफआईआर दर्ज कर सकती है?

हाँ, यदि कोई व्यक्ति बलपूर्वक सार्वजनिक रास्ता रोककर शांति भंग करता है, तो बीएनएस (BNS) की धारा 285 व 286 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत सीधी एफआईआर दर्ज हो सकती है।

9. उपजिलाधिकारी (SDM) को दी जाने वाली कानूनी दरख्वास्त का प्रारूप

सेवा में, उपजिलाधिकारी महोदय, तहसील..., जिला...

विषय: ग्राम सभा के सार्वजनिक चकमार्ग संख्या... से अवैध कब्जा हटवाकर रास्ता खुलवाने बाबत अंतर्गत धारा 67 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006।

महोदय,
1. यह कि मौजा... स्थित गाटा संख्या 205 राजस्व शजरा नक्शे में सार्वजनिक चकमार्ग (रास्ता) के रूप में दर्ज है जिसकी चौड़ाई 15 फीट है।
2. यह कि गांव के दबंग व्यक्ति... पुत्र... ने उक्त चकमार्ग को जोतकर गेहूं की फसल बो दी है और पक्की ईंटों की बाउंड्री बनाकर पूरे गांव के किसानों का ट्रैक्टर व आवागमन रोक दिया है।
3. यह कि मना करने पर उक्त व्यक्ति जान से मारने और फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देता है।
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि राजस्व टीम व पुलिस बल भेजकर चकमार्ग की पैमाइश कराएं, अवैध कब्जा ध्वस्त कराएं और दोषी के विरुद्ध धारा 67 के तहत जुर्माना वसूल करने की कृपा करें।

संलग्नक: शजरा नक्शा, खतौनी व मौके के छायाचित्र।

10. बुलडोजर ध्वस्तीकरण में पुलिस बल व वीडियोग्राफी नियम

सार्वजनिक रास्ते से कब्जा हटाते समय अक्सर कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है। राजस्व नियमों के अनुसार:

  • कार्रवाई के दौरान कम से कम एक उपनिरीक्षक (SI) और चार पुलिस कांस्टेबल (महिला पुलिस सहित) मौके पर मौजूद रहते हैं।
  • तहसीलदार स्तर से पूरे ध्वस्तीकरण की ड्रोन या वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाती है ताकि कोई बाद में पुलिस पर झूठा आरोप न लगा सके।
  • कब्जा हटाने में खर्च हुए प्रति घंटे के हिसाब से जेसीबी का किराया सीधे अतिक्रमणकारी के नाम बकाया निकाला जाता है।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. यदि कोई व्यक्ति खेत का चकमार्ग जोतकर अपने खेत में मिला ले तो कहाँ शिकायत करें?

A. संबंधित तहसील के तहसीलदार या उपजिलाधिकारी (SDM) को धारा 67 राजस्व संहिता के तहत शिकायत दें। इसके अलावा जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर सार्वजनिक भूमि श्रेणी में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

Q. क्या चकमार्ग से कब्जा हटाने के लिए शिकायतकर्ता को वकील करना पड़ता है?

A. नहीं, ग्राम सभा की जमीन का मुकदमा राज्य सरकार की ओर से नामित पैनल अधिवक्ता (नामिक वकील / DGC Revenue) लड़ते हैं। आम नागरिक केवल शिकायतकर्ता और गवाह की भूमिका में होता है।

Q. यदि कब्जा करने वाला व्यक्ति स्टे आर्डर ले आए तो क्या सरकारी रास्ता रुक सकता है?

A. सुप्रीम कोर्ट (Hinch Lal Tiwari vs Kamala Devi) के सख्त निर्देश हैं कि सार्वजनिक चकमार्ग, तालाब, श्मशान या खेल के मैदान पर किसी भी निजी व्यक्ति को स्टे या पट्टा नहीं दिया जा सकता। ऐसा स्टे तुरंत खारिज हो जाता है।

Q. अवैध कब्जा हटाने में कितना समय लगता है?

A. राजस्व नियमों के अनुसार धारा 67 का नोटिस जारी होने के 90 दिनों के भीतर वाद का अंतिम निस्तारण होना अनिवार्य है।

Q. क्या चकमार्ग रोकने पर पुलिस सीधी एफआईआर दर्ज कर सकती है?

A. हाँ, यदि कोई व्यक्ति बलपूर्वक सार्वजनिक रास्ता रोककर शांति भंग करता है, तो बीएनएस (BNS) की धारा 285 व 286 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत सीधी एफआईआर दर्ज हो सकती है।

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