1. सक्सेशन सर्टिफिकेट: मुख्य कानूनी सार (AEO Direct Answer)
जब किसी व्यक्ति का असामयिक निधन हो जाए और उनके बैंक खातों, म्यूचुअल फंड, पोस्ट ऑफिस आरडी या कंपनी शेयरों में नॉमिनी का नाम न हो, तो बैंक या कंपनियां उस खाते को फ्रीज कर देती हैं। इसे रिलीज कराने का एकमात्र पूर्ण कानूनी दस्तावेज भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 372 के तहत सिविल जज/जिला अदालत द्वारा जारी सक्सेशन सर्टिफिकेट है। यह अदालत द्वारा दिया गया वह अधिकार पत्र है जो धारक को मृतक के पैसों को प्राप्त करने और बैंक को वैध रसीद देने का विधिक अधिकार देता है।
2. वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir) vs सक्सेशन सर्टिफिकेट में क्या अंतर है?
अधिकांश लोग तहसील से बनने वाले वारिस प्रमाण पत्र और कोर्ट के सक्सेशन सर्टिफिकेट को एक ही समझ लेते हैं:
| तुलना का बिंदु | वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) | सक्सेशन सर्टिफिकेट (Succession Certificate) |
|---|---|---|
| जारीकर्ता अधिकारी | तहसीलदार / उपजिलाधिकारी (SDM / Revenue Authority). | वरिष्ठ सिविल जज / जिला न्यायालय (Civil Court). |
| कानूनी अधिकार क्षेत्र | केवल परिवार के सदस्यों की पहचान प्रमाणित करना। | मृतक की चल संपत्ति, बैंक जमा व शेयर वसूलने का पूर्ण अधिकार। |
| बैंकों में स्वीकार्यता | केवल छोटी रकम (₹50,000–₹1 लाख तक) या पेंशन दावों में। | बड़ी रकम, करोड़ों के शेयर, डीमैट और विवादित खातों में 100% अनिवार्य। |
| समय व फीस | 15 से 30 दिन, सरकारी फीस ₹50-₹100। | 4 से 6 महीने, संपत्ति का 2% से 3% कोर्ट फीस स्टांप। |
3. बैंक और वित्तीय संस्थान किस स्थिति में सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगते हैं?
- जब बैंक खाते या सावधि जमा (FD) में कोई नॉमिनेशन (Nomination) दर्ज न हो।
- जब नॉमिनी की मृत्यु मूल खाताधारक से पहले या साथ हो चुकी हो।
- जब परिवार के कई वारिसों में बैंक खाते के पैसों को लेकर विवाद हो और बैंक को कानूनी नोटिस मिल चुका हो।
- जब डीमैट खाते में लिस्टेड कंपनियों के शेयर या म्यूचुअल फंड यूनिट्स की कीमत लाखों या करोड़ों में हो।
4. धारा 372 के तहत किन संपत्तियों के लिए सर्टिफिकेट जारी होता है?
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 370 स्पष्ट करती है कि सक्सेशन सर्टिफिकेट केवल चल संपत्ति (कर्ज और प्रतिभूतियां / Debts & Securities) के लिए जारी होता है:
- बैंक बचत खाता, चालू खाता, और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD/RD)।
- स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों के शेयर्स और डीमैट होल्डिंग्स।
- म्यूचुअल फंड फोलियो और सरकारी बचत पत्र (NSC / KVP)।
- भविष्य निधि (PF) और बीमा पॉलिसियों के बकाया क्लेम।
नोट: जमीन, मकान या फ्लैट जैसी अचल संपत्ति के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं होता; उसके लिए वरासत या लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन लगता है।
5. सिविल कोर्ट से सक्सेशन सर्टिफिकेट बनवाने की चरणबद्ध प्रक्रिया
- परिसंपत्तियों की सूची (Schedule of Debts) तैयार करना: सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट, एफडी रसीद और डीमैट होल्डिंग स्टेटमेंट एकत्र करना।
- धारा 372 के तहत याचिका: संबंधित जिले के सिविल जज कोर्ट में याचिका पेश करना जिसमें मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र और सभी कानूनी वारिसों के नाम-पते लिखे हों।
- अनापत्ति शपथ पत्र (NOC / Relinquishment): यदि अन्य भाई-बहन या माताजी किसी एक वारिस के पक्ष में अपना दावा छोड़ना चाहते हैं, तो उनका नोटरीकृत एनओसी शपथ पत्र दाखिल करना।
- अखबार में सार्वजनिक इश्तेहार (Public Notice): कोर्ट के आदेश पर स्थानीय प्रमुख समाचार पत्र में 45 दिन का इश्तेहार छपवाना कि यदि किसी अन्य व्यक्ति को आपत्ति हो तो वह कोर्ट में पेश हो।
- साक्ष्य व बयानात: मियाद पूरी होने पर मुख्य आवेदक का कोर्ट में बयान दर्ज होना।
- कोर्ट फीस जमा व सर्टिफिकेट जारी होना: दावा की गई रकम के अनुपात में न्यायिक स्टांप पेपर कोर्ट में जमा करने पर जज के हस्ताक्षर और सील वाला मूल सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी होना।
6. कोर्ट फीस का आकलन और अखबार इश्तेहार नियम
कोर्ट फीस अधिनियम (Court Fees Act) के अनुसार, सक्सेशन सर्टिफिकेट पर एड-वैलोरम (मूल्यानुसार) कोर्ट फीस लगती है:
- आमतौर पर कुल फंसी हुई रकम का 2% से 3% अदालती स्टांप के रूप में जमा करना होता है। कई राज्यों में अधिकतम कोर्ट फीस की एक सीमा (जैसे ₹50,000 या ₹1 लाख) तय होती है।
- अखबार में इश्तेहार का खर्च लगभग ₹2,000 से ₹4,000 आता है, जिसे आवेदक को सीधे अखबार एजेंसी या कोर्ट नाज़िर के माध्यम से जमा करना होता है।
7. सर्टिफिकेट मिलने के बाद बैंक खाते से पैसा निकालने की SOP
- कोर्ट द्वारा जारी मूल सक्सेशन सर्टिफिकेट की प्रमाणित प्रति (Certified True Copy) प्राप्त करें।
- बैंक की गृह शाखा (Home Branch) में शाखा प्रबंधक को संबोधित आवेदन पत्र लिखें: 'सक्सेशन सर्टिफिकेट के आधार पर मृतक खाता संख्या... से राशि रिलीज करने बाबत।'
- बैंक का लीगल डिपार्टमेंट सर्टिफिकेट को कोर्ट के ऑनलाइन ई-कोर्ट्स (ecourts.gov.in) पोर्टल से सत्यापित करता है।
- सत्यापन होते ही बैंक खाता अनफ्रीज करके पूरा पैसा आवेदक के बचत खाते में आरटीजीएस/एनईएफटी या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से ट्रांसफर कर देता है।
8. अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
1. वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir) और सक्सेशन सर्टिफिकेट में क्या मुख्य अंतर है?
वारिस प्रमाण पत्र तहसीलदार या एसडीएम द्वारा केवल पारिवारिक सदस्यों की पहचान हेतु जारी होता है। जबकि सक्सेशन सर्टिफिकेट केवल सक्षम सिविल कोर्ट (धारा 372) द्वारा मृतक के बैंक खाते, शेयर, एफडी और वित्तीय दावों को हासिल करने के लिए जारी किया जाता है।
2. बैंक किस स्थिति में सक्सेशन सर्टिफिकेट की मांग अनिवार्य करता है?
यदि मृतक के खाते या लॉकर में कोई नॉमिनी (Nominee) दर्ज न हो, विवाद हो, या खाते में बड़ी रकम (आमतौर पर ₹5 लाख से अधिक) जमा हो, तो बैंक कानूनी जोखिम से बचने के लिए कोर्ट का सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगते हैं।
3. सक्सेशन सर्टिफिकेट बनवाने में कोर्ट फीस कितनी लगती है?
कोर्ट फीस राज्यवार अलग-अलग होती है, जो दावा की गई कुल चल संपत्ति का लगभग 2% से 3% (अदालती स्टांप के रूप में) होती है, जिसकी अधिकतम सीमा कई राज्यों में निर्धारित है।
4. कोर्ट से सक्सेशन सर्टिफिकेट मिलने में कितना समय लगता है?
समाचार पत्र में इश्तेहार प्रकाशन की 30 से 45 दिन की अनिवार्य आपत्ति अवधि और अदालती प्रक्रिया को मिलाकर सामान्यतः 4 से 6 महीने का समय लगता है।
5. क्या जमीन या मकान के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी हो सकता है?
नहीं, धारा 370 के अनुसार सक्सेशन सर्टिफिकेट केवल चल संपत्ति (कर्ज और प्रतिभूतियां जैसे बैंक बैलेंस, शेयर) के लिए होता है। जमीन या मकान के लिए वरासत (Mutation) या प्रोबेट/लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन लिया जाता है।
9. धारा 372 याचिका का विधिक कोर्ट प्रारूप (Petition Format)
न्यायालय वरिष्ठ सिविल जज / जिला न्यायाधीश महोदय, जिला...
सक्सेशन वाद संख्या: ....... / 2026
याचिकाकर्ता: श्रीमती अनीता देवी पत्नी स्व. राजेश कुमार, निवासी...
बनाम
1. आम जनता (General Public)
2. भारतीय स्टेट बैंक, शाखा... द्वारा शाखा प्रबंधक।
याचिका अंतर्गत धारा 372 भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 वास्ते जारी करने उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate)।
महोदय,
1. यह कि मृतक श्री राजेश कुमार का आकस्मिक देहावसान दिनांक ... को हो गया।
2. यह कि याचिकाकर्ता मृतक की धर्मपत्नी हैं और उनके अतिरिक्त कोई अन्य प्रथम श्रेणी विधिक उत्तराधिकारी नहीं है।
3. यह कि मृतक ने भारतीय स्टेट बैंक में बचत खाता सं... और 3 फिक्स्ड डिपॉजिट में कुल ₹18,50,000 की धनराशि छोड़ी है जिसमें कोई नॉमिनेशन दर्ज नहीं था।
4. यह कि मृतक ने अपने जीवनकाल में कोई वसीयत निष्पादित नहीं की थी।
अतः प्रार्थना है कि उक्त ₹18,50,000 की राशि प्राप्त करने हेतु याचिकाकर्ता के पक्ष में सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी करने की कृपा करें।
10. अखबार में प्रकाशित होने वाले सार्वजनिक इश्तेहार का प्रारूप
कोर्ट फीस जमा होने से पूर्व कोर्ट नाज़िर द्वारा स्थानीय दैनिक समाचार पत्र में निम्नलिखित प्रारूप में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कराई जाती है:
"सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि श्रीमती अनीता देवी ने स्व. राजेश कुमार के बैंक खातों की धनराशि ₹18,50,000 हेतु सक्सेशन वाद सं... दायर किया है। यदि किसी व्यक्ति या संस्था को इसमें कोई आपत्ति हो तो वह दिनांक ... को प्रातः 10 बजे न्यायालय में व्यक्तिगत अथवा अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होकर अपनी आपत्ति दर्ज कराए। नियत तिथि के बाद कोई आपत्ति स्वीकार नहीं होगी और प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।"