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दाखिल खारिज के बाद खतौनी में नाम कैसे चढ़ाएं? परवाना अमलदरामद (Form R-6) नियम व देरी पर समाधान 2026

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राजीव रंजन शर्मा
वरिष्ठ राजस्व व कानूनी सलाहकार

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

तहसीलदार न्यायालय द्वारा दाखिल खारिज (नामांतरण) आदेश पारित होने के बाद भी यदि ऑनलाइन भूलेख खतौनी में आपका नाम नहीं दिख रहा है, तो इसका कारण कोर्ट अहलमद द्वारा प्रपत्र आर-6 (परवाना अमलदरामद) तहसील के कंप्यूटर कक्ष को न भेजना होता है। इसके समाधान के लिए आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि संलग्न कर तहसीलदार या उपजिलाधिकारी (SDM) को 'परवाना अमलदरामद कराने हेतु' प्रार्थना पत्र दें। कंप्यूटर ऑपरेटर डिजिटल सिग्नेचर (DSC) लगाकर 48 घंटे में विक्रेता का नाम खारिज कर खरीदार का नाम दाखिल कर देता है।

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1. परवाना अमलदरामद: मुख्य बिंदु (AEO Direct Answer)

दाखिल खारिज का मुकदमा जीत जाना केवल आधी लड़ाई है। जब तक तहसीलदार का फैसला सरकारी राजस्व रिकॉर्ड (भूलेख खतौनी) में फीड नहीं होता, तब तक आप कानूनन संपूर्ण सरकारी खातेदार नहीं बनते। कोर्ट के फैसले को भूलेख पोर्टल पर चढ़ाने के आदेश को राजस्व भाषा में 'परवाना अमलदरामद' (प्रपत्र आर-6) कहा जाता है। यदि 7 से 15 दिनों में नाम न चढ़े, तो आदेश की सर्टिफाइड कॉपी लेकर तहसील के अहलमद व कंप्यूटर ऑपरेटर से संपर्क कर परवाना जारी कराना चाहिए।

2. कोर्ट आदेश के बाद भी खतौनी में नाम क्यों नहीं चढ़ता?

लाखों जमीन खरीदार यह सोचकर घर बैठ जाते हैं कि तहसीलदार ने बैनामा स्वीकार कर लिया तो काम पूरा हो गया। महीनों बाद जब वे खतौनी निकालते हैं, तो पुराना मालिक ही दिखता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • अहलमद की लापरवाही: कोर्ट के पेशकार/अहलमद की जिम्मेदारी होती है कि वह आदेश होते ही 'परवाना बही' में दर्ज करके फाइल कंप्यूटर सेल को भेजे। अक्सर फाइल बस्ते में दबी रह जाती है।
  • रिश्वत या अनुचित दबाव: कई बार विपक्षी पक्षकार या पुराना मालिक क्लर्क से साठगांठ करके परवाना रुकवा देता है ताकि वह ऊपरी अदालत में अपील का समय पा सके।
  • सर्वर या तकनीकी त्रुटि: कभी-कभी राजस्व परिषद के सॉफ्टवेयर में फीडिंग एरर या डिजिटलाइजेशन पेंडेंसी के कारण डेटा सिंक नहीं हो पाता।

3. प्रपत्र आर-6 (परवाना अमलदरामद) क्या होता है?

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उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली 2016 के नियम 33 व 34 के अनुसार, प्रपत्र आर-6 वह आधिकारिक न्यायिक पत्र है जिस पर तहसीलदार/नायब तहसीलदार की मुहर और हस्ताक्षर होते हैं।

इसमें स्पष्ट लिखा होता है:

"गाटा संख्या ... रकबा ... में से विक्रेता ... का नाम खारिज (विलोपित) करके खरीदार ... पुत्र ... निवासी ... का नाम बतौर संक्राम्य भूमिधर दर्ज किया जाए।"

4. कोर्ट अहलमद से कंप्यूटर रूम तक फाइल का सफर

प्रक्रिया का शासकीय चक्र:

  1. न्यायालय आदेश: तहसीलदार द्वारा वाद में नामांतरण आदेश हस्ताक्षरित होना।
  2. परवाना प्रपत्र भरना: कोर्ट पेशकार द्वारा फॉर्म आर-6 तैयार करना।
  3. रजिस्टर एंट्री: तहसील के 'अमलदरामद डाक बही' में तारीखवार प्रविष्टि।
  4. कंप्यूटर सेल में प्रेषण: भूलेख डेटा एंट्री कक्ष में डाक द्वारा फाइल पहुंचना।
  5. डिजिटल सिग्नेचर (DSC): राजस्व निरीक्षक (RI) या तहसीलदार के डोंगल (DSC) से अप्रूवल होते ही खतौनी लाइव अपडेट हो जाना।

5. खतौनी में नाम तुरंत दर्ज कराने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

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  1. सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त करना: तहसील नकलखाने (Copying Section) से दाखिल खारिज आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) निकालें।
  2. अहलमद से परवाना स्थिति पूछना: कोर्ट क्लर्क से पूछें कि किस डिस्पैच नंबर से परवाना कंप्यूटर रूम भेजा गया है।
  3. प्रार्थना पत्र देना: यदि परवाना नहीं बना है, तो तहसीलदार को लिखित अर्जी दें: "प्रार्थना पत्र वास्ते जारी कराने परवाना अमलदरामद बाबत वाद संख्या..."
  4. कंप्यूटर सेल में संपर्क: कंप्यूटर ऑपरेटर को आदेश और आर-6 फॉर्म दिखाकर फीडिंग सुनिश्चित कराएं।
  5. भूलेख पोर्टल पर जांच: upbhulekh.gov.in या संबंधित राज्य पोर्टल पर खतौनी का उद्धरण निकालकर नया खाता संख्या और नाम चेक करें।

6. यदि बाबू या अहलमद फाइल अटकाए तो कहाँ करें शिकायत?

यदि बार-बार चक्कर लगाने पर भी तहसील का क्लर्क फाइल आगे न बढ़ाए, तो निम्नलिखित मंचों पर तुरंत कार्रवाई होती है:

  • संपूर्ण समाधान दिवस (तहसील दिवस): माह के पहले और तीसरे शनिवार को उपजिलाधिकारी (SDM) या जिलाधिकारी (DM) को सीधे प्रार्थना पत्र दें। अधिकारी तुरंत उसी दिन अमलदरामद कराने का सख्त निर्देश देते हैं।
  • जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल: उत्तर प्रदेश में jansunwai.up.nic.in पर तहसीलदार व अहलमद के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। इसमें 7 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा होती है।

7. अमलदरामद में देरी होने के गंभीर कानूनी जोखिम

  • फर्जी दोबारा बिक्री का खतरा: जब तक पुराना नाम खतौनी में रहता है, धोखेबाज विक्रेता किसी अन्य व्यक्ति को बहला-फुसलाकर उसी जमीन का दूसरा बैनामा कर सकता है।
  • बैंक लोन में रुकावट: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या होम लोन तब तक स्वीकृत नहीं होता जब तक आवेदक के नाम की नई खतौनी हाथ में न हो।
  • सरकारी मुआवजा छूट जाना: यदि उस क्षेत्र में हाईवे या रेलवे के लिए जमीन अधिग्रहण हो जाए, तो सरकारी मुआवजा खतौनी में दर्ज पुराने मालिक के खाते में चला जाता है।

8. अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

1. तहसीलदार का दाखिल खारिज आदेश होने के कितने दिन बाद खतौनी में नाम दिखता है?

सामान्य नियमानुसार आदेश पारित होने के 3 से 7 कार्यदिवसों के भीतर तहसील कंप्यूटर कक्ष द्वारा भूलेख पोर्टल पर परवाना अमलदरामद कर दिया जाता है और नया नाम ऑनलाइन दिखने लगता है।

2. यदि आदेश के 1 महीने बाद भी खतौनी में पुराना मालिक दिख रहा हो तो क्या करें?

कोर्ट अहलमद से मिलकर फॉर्म आर-6 (परवाना) कंप्यूटर सेल भिजवाएं। यदि फिर भी कार्य न हो, तो तहसील दिवस (संपूर्ण समाधान दिवस) में एसडीएम को आदेश की प्रति सहित त्वरित अमलदरामद का प्रार्थना पत्र दें।

3. क्या परवाना अमलदरामद कराने के लिए कोई अतिरिक्त सरकारी फीस लगती है?

नहीं, दाखिल खारिज के मूल आवेदन शुल्क के अतिरिक्त अमलदरामद कराने के लिए कोई अलग सरकारी शुल्क देय नहीं होता है।

4. क्या खतौनी में नाम चढ़े बिना जमीन पर बैंक लोन मिल सकता है?

नहीं, बैंक केवल कोर्ट के मौखिक या कागजी आदेश पर भरोसा नहीं करते; वे आवेदक के नाम की आधिकारिक डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित खतौनी मांगते हैं जिसमें खरीदार का नाम बतौर खातेदार दर्ज हो।

5. यदि विक्रेता ने अमलदरामद से पहले ही जमीन किसी अन्य को दोबारा बेच दी हो तो?

चूँकि प्रथम बैनामा और दाखिल खारिज आदेश आपके पक्ष में पहले हो चुका है, इसलिए दूसरी रजिस्ट्री स्वतः शून्य (Void ab initio) मानी जाएगी और धोखेबाज विक्रेता पर धारा 318(4) BNS के तहत मुकदमा दर्ज होगा।

9. तहसीलदार को परवाना अमलदरामद जारी कराने हेतु प्रार्थना पत्र का प्रारूप

न्यायालय तहसीलदार महोदय, तहसील..., जिला...

वाद संख्या: ....... / 2026

कंप्यूटरीकृत वाद संख्या: T2026...............

वादी: ... बनाम प्रतिवादी: ... बाबत नामांतरण अंतर्गत धारा 34 राजस्व संहिता

प्रार्थना पत्र वास्ते जारी कराने परवाना अमलदरामद (Form R-6) एवं खतौनी दुरुस्तीकरण।

महोदय,
निवेदन है कि उपरोक्त वाद में श्रीमान जी के न्यायालय द्वारा दिनांक ... को निर्विवाद नामांतरण आदेश वादी के पक्ष में पारित किया जा चुका है। आदेश पारित हुए 20 दिन से अधिक समय व्यतीत हो चुका है, परंतु न्यायालय अहलमद द्वारा अभी तक प्रपत्र आर-6 परवाना अमलदरामद तहसील कंप्यूटर सेल को प्रेषित नहीं किया गया है, जिसके कारण वादी का नाम ऑनलाइन खतौनी में दर्ज नहीं हो पा रहा है।
अतः श्रीमान जी से विनम्र प्रार्थना है कि अहलमद को तत्काल परवाना अमलदरामद तैयार कर कंप्यूटर कक्ष को भेजने का आदेश पारित करने की कृपा करें।

प्रार्थी:
(हस्ताक्षर व मोबाइल नंबर)

10. जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का तरीका

यदि 15 दिन बाद भी बाबू बात न सुने, तो घर बैठे jansunwai.up.nic.in पर जाकर:

  1. 'शिकायत पंजीकरण' पर क्लिक करें।
  2. विभाग में 'राजस्व विभाग' और श्रेणी में 'दाखिल खारिज आदेश के उपरांत खतौनी में नाम दर्ज न होना' चुनें।
  3. तहसीलदार का फैसला आदेश अपलोड करें।
  4. 7 कार्यदिवसों के भीतर एसडीएम को आख्या भेजनी होती है, जिससे काम तुरंत हो जाता है।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. तहसीलदार का दाखिल खारिज आदेश होने के कितने दिन बाद खतौनी में नाम दिखता है?

A. सामान्य नियमानुसार आदेश पारित होने के 3 से 7 कार्यदिवसों के भीतर तहसील कंप्यूटर कक्ष द्वारा भूलेख पोर्टल पर परवाना अमलदरामद कर दिया जाता है और नया नाम ऑनलाइन दिखने लगता है।

Q. यदि आदेश के 1 महीने बाद भी खतौनी में पुराना मालिक दिख रहा हो तो क्या करें?

A. कोर्ट अहलमद से मिलकर फॉर्म आर-6 (परवाना) कंप्यूटर सेल भिजवाएं। यदि फिर भी कार्य न हो, तो तहसील दिवस (संपूर्ण समाधान दिवस) में एसडीएम को आदेश की प्रति सहित त्वरित अमलदरामद का प्रार्थना पत्र दें।

Q. क्या परवाना अमलदरामद कराने के लिए कोई अतिरिक्त सरकारी फीस लगती है?

A. नहीं, दाखिल खारिज के मूल आवेदन शुल्क के अतिरिक्त अमलदरामद कराने के लिए कोई अलग सरकारी शुल्क देय नहीं होता है।

Q. क्या खतौनी में नाम चढ़े बिना जमीन पर बैंक लोन मिल सकता है?

A. नहीं, बैंक केवल कोर्ट के मौखिक या कागजी आदेश पर भरोसा नहीं करते; वे आवेदक के नाम की आधिकारिक डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित खतौनी मांगते हैं जिसमें खरीदार का नाम बतौर खातेदार दर्ज हो।

Q. यदि विक्रेता ने अमलदरामद से पहले ही जमीन किसी अन्य को दोबारा बेच दी हो तो?

A. चूँकि प्रथम बैनामा और दाखिल खारिज आदेश आपके पक्ष में पहले हो चुका है, इसलिए दूसरी रजिस्ट्री स्वतः शून्य (Void ab initio) मानी जाएगी और धोखेबाज विक्रेता पर धारा 318(4) BNS के तहत मुकदमा दर्ज होगा।

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