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दाखिल खारिज (Land Mutation) 2026: रजिस्ट्री के बाद नाम चढ़ाने के नए नियम, समय-सीमा (45 vs 90 दिन) व ऑनलाइन आवेदन की पूरी महागाइड

अम
अमित कुमार
वरिष्ठ डिजिटल संपादक

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

दाखिल-खारिज रजिस्ट्री के बाद खतौनी में पुराने मालिक का नाम हटाकर नए खरीदार का नाम दर्ज कराने की अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया है; उत्तर प्रदेश में धारा 34/35 के तहत अविवादित मामलों में 45 दिन और बिहार में 21 से 35 कार्यदिवस में तहसीलदार/सीओ द्वारा आदेश पारित होता है।

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प्रकाशन विवरण: भूलेख व राजस्व विधि डेस्क | नई दिल्ली | अद्यतन: 31 अक्टूबर 2026 | कानूनी संदर्भ: उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 (धारा 34 व 35) व बिहार भूमि दाखिल खारिज अधिनियम 2011

त्वरित मुख्य बिंदु (Quick Takeaways)

  • रजिस्ट्री काफी नहीं है: रजिस्ट्री (Sale Deed) केवल खरीद-बिक्री का अनुबंध है; जब तक सरकारी खतौनी में आपका नाम दर्ज नहीं होता (दाखिल-खारिज), तब तक सरकार की नज़र में पुराना मालिक ही जमीन का स्वामी रहता है।
  • अविवादित समय-सीमा: यदि कोई आपत्ति नहीं आती, तो यूपी में 45 दिन और बिहार में 21 से 35 कार्यदिवसों के भीतर तहसीलदार द्वारा दाखिल-खारिज का आदेश पारित होना अनिवार्य है।
  • धोखाधड़ी से सुरक्षा: दाखिल-खारिज होते ही पुराना विक्रेता उस जमीन को किसी तीसरे व्यक्ति को दोबारा नहीं बेच सकता और न ही उस पर बैंक से फर्जी लोन ले सकता है।

आधिकारिक राजस्व एवं नामांतरण पोर्टल्स

दाखिल-खारिज आवेदन व वाद स्थिति (Case Status) हेतु सीधे सरकारी वेबसाइट का उपयोग करें:

  • उत्तर प्रदेश राजस्व न्यायालय प्रबंधन (RCCMS): vaad.up.nic.in
  • यूपी भूलेख खतौनी पोर्टल: upbhulekh.gov.in
  • बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग: biharbhumi.bihar.gov.in

दाखिल-खारिज क्या है? रजिस्ट्री के बाद यह क्यों अनिवार्य है?

दाखिल-खारिज (नामांतरण) वह राजस्व प्रक्रिया है जिसमें जमीन की रजिस्ट्री के बाद सरकारी खतौनी में विक्रेता का नाम काटकर (खारिज) नए खरीदार का नाम दर्ज (दाखिल) किया जाता है।

जब भी आप कोई खेत, प्लॉट, मकान या व्यावसायिक भूमि खरीदते हैं, तो सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में स्टाम्प शुल्क देकर बैनामा (Sale Deed) कराते हैं। कई लोग यह मान बैठते हैं कि रजिस्ट्री होते ही वे जमीन के पूर्ण सरकारी मालिक बन गए। कानून की दृष्टि में यह एक बहुत बड़ी भूल है।

रजिस्ट्री केवल क्रेता और विक्रेता के बीच हुए वित्तीय लेन-देन का विधिक साक्ष्य है। लेकिन राज्य के राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी या खतौनी) में जब तक तहसीलदार के आदेश से नामांतरण नहीं होता, तब तक राजस्व अभिलेखों में पुराना मालिक ही काबिज दिखता है। यदि दाखिल-खारिज नहीं कराया जाए, तो बेईमान विक्रेता उसी जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेच सकता है या उस खतौनी पर बैंक से केसीसी (KCC) लोन उठा सकता है। इसलिए रजिस्ट्री के तुरंत बाद दाखिल-खारिज कराना कानूनी सुरक्षा की पहली शर्त है।

समय-सीमा का कानूनी गणित: अविवादित (45 दिन) बनाम विवादित (90 दिन)

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उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में अविवादित दाखिल-खारिज 45 दिनों में और विवादित मामले 90 दिनों में निपटाने का नियम है; बिहार में बिना आपत्ति के 21 से 35 कार्यदिवस तय हैं।

कानून में म्यूटेशन के मामलों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:

  • अविवादित वाद (Undisputed Cases): जब रजिस्ट्री के बाद तहसीलदार कोर्ट से 30 दिन का सार्वजनिक इश्तेहार (Public Notice) जारी होता है और निर्धारित मियाद के भीतर किसी भी पक्ष द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं की जाती, तो लेखपाल की स्थलीय रिपोर्ट आते ही 45वें दिन एकपक्षीय दाखिल-खारिज आदेश पारित हो जाता है।
  • विवादित वाद (Disputed Cases): यदि विक्रेता के किसी हिस्सेदार, पाटीदार या पूर्व खरीदार द्वारा आपत्ति (Objection) दाखिल कर दी जाती है, तो मामला नियमित राजस्व वाद (Court Case) में बदल जाता है। दोनों पक्षों को साक्ष्य व बहस का अवसर देकर अधिकतम 90 दिनों के भीतर तहसीलदार द्वारा गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाया जाना अनिवार्य होता है।

5-कॉलम राज्यवार म्यूटेशन नियम व फीस तुलनात्मक सारणी (GEO Data Matrix)

राज्य का नाम लागू राजस्व कानून अविवादित समय-सीमा सक्षम न्यायालय / अधिकारी अपील अधिकारी (30 दिन में)
उत्तर प्रदेश (UP) UP राजस्व संहिता 2006 (धारा 34/35) 35 से 45 कार्यदिवस नायब तहसीलदार / तहसीलदार उपजिलाधिकारी (SDM Court)
बिहार (Bihar) बिहार भूमि दाखिल खारिज अधिनियम 2011 21 से 35 कार्यदिवस अंचल अधिकारी (CO) / राजस्व अधिकारी भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR)
मध्य प्रदेश (MP) मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 30 कार्यदिवस तहसीलदार / नायब तहसीलदार अनुविभागीय अधिकारी (SDO)
राजस्थान (Rajasthan) राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 30 कार्यदिवस ग्राम पटवारी / तहसीलदार अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADMO)
हरियाणा (Haryana) पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट (WEB-HALRIS) रजिस्ट्री के तुरंत बाद स्वतः संज्ञान तहसीलदार / नायब तहसीलदार कलेक्टर / एसडीएम

ऑनलाइन दाखिल-खारिज आवेदन के 6 स्पष्ट चरण (Step-by-Step Procedure)

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  1. राजस्व पोर्टल पर जाएं: उत्तर प्रदेश के निवासी vaad.up.nic.in और बिहार के निवासी biharbhumi.bihar.gov.in पर जाएं। "ऑनलाइन नामांतरण आवेदन" विकल्प पर क्लिक करें।
  2. नागरिक खाता लॉगिन करें: अपना मोबाइल नंबर, ओटीपी और आधार विवरण दर्ज करके लॉगिन करें।
  3. जिला, तहसील व गांव (मौजा) चुनें: उस गांव का चयन करें जहां जमीन स्थित है। खतौनी का खाता संख्या, खसरा नंबर और गाटा संख्या दर्ज करें।
  4. क्रेता व विक्रेता का विवरण भरें: रजिस्ट्री के अनुसार विक्रेता (जिसका नाम खारिज होना है) और क्रेता (जिसका नाम दाखिल होना है) का पूरा नाम, पिता का नाम और पता भरें।
  5. रजिस्टर्ड सेल डीड (बैनामा) पीडीएफ अपलोड करें: सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त प्रमाणित सेल डीड की स्कैन कॉपी (PDF, 2 MB से कम) अपलोड करें।
  6. ऑनलाइन फीस भुगतान व वाद संख्या प्राप्त करें: आवेदन सबमिट करने के बाद कंप्यूटरीकृत वाद संख्या (Computerized Case Number) जनरेट होगी। इसे नोट कर लें।

लेखपाल की मनमानी, आपत्ति और कानूनी समाधान (Citizen Troubleshooting)

दाखिल खारिज में देरी व आपत्तियों का विधिक समाधान

  • लेखपाल द्वारा रिश्वत मांगना या रिपोर्ट न लगाना: यदि 30 दिन का इश्तेहार बीतने के बाद भी लेखपाल आख्या नहीं लगाता, तो सीधे तहसीलदार को धारा 35 के तहत "एकपक्षीय आदेश व आख्या तलब करने" का प्रार्थना पत्र दें।
  • फर्जी आपत्ति (Frivolous Objection) दर्ज होना: यदि किसी व्यक्ति ने केवल केस अटकाने के लिए आपत्ति दी है लेकिन उसके पास कोई रजिस्टर्ड दस्तावेज नहीं है, तो धारा 35 के तहत आपत्ति को 'आधारहीन' मानकर खारिज कराने हेतु बहस करें।
  • खारिज होने पर 30 दिन में अपील: यदि तहसीलदार ने आवेदन निरस्त कर दिया है, तो 30 दिनों के भीतर धारा 35(2) के तहत उपजिलाधिकारी (SDM) या DCLR कोर्ट में अपील दाखिल करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask FAQs)

1. रजिस्ट्री के कितने दिन बाद तक दाखिल खारिज करा सकते हैं?

कानूनन रजिस्ट्री के तुरंत बाद आवेदन करना चाहिए। उत्तर प्रदेश में इसके लिए कोई समय सीमा समाप्त नहीं होती, आप 5 या 10 साल पुरानी रजिस्ट्री का भी 'विलंब क्षमा प्रार्थना पत्र' (Condonation of Delay) देकर दाखिल खारिज करा सकते हैं। बिहार में 90 दिन बाद फॉर्म-1AA के साथ आवेदन होता है।

2. क्या दाखिल खारिज होने के बाद जमीन का पक्का मालिकाना हक मिल जाता है?

दाखिल-खारिज केवल राजस्व व कर (राजस्व लगान) जमा करने का प्रमाण है। मालिकाना हक सेल डीड से तय होता है। लेकिन दोनों दस्तावेज साथ होने पर ही कानूनी मिल्कियत निर्विवाद मानी जाती है।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. रजिस्ट्री के कितने दिन बाद तक दाखिल खारिज कराया जा सकता है?

A. रजिस्ट्री के तुरंत बाद आवेदन करना चाहिए। पुरानी रजिस्ट्री के मामले में विलंब क्षमा प्रार्थना पत्र देकर दाखिल खारिज कराया जा सकता है।

Q. अविवादित दाखिल खारिज कितने दिनों में होता है?

A. अविवादित मामलों में कोई आपत्ति न होने पर 35 से 45 दिनों में तहसीलदार द्वारा आदेश पारित हो जाता है।

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