त्वरित मुख्य बिंदु (Quick Takeaways)
- कंप्यूटर ऑपरेटर की गलती: हस्तलिखित खतौनी को कंप्यूटरीकृत करते समय यदि ऑपरेटर ने स्पेलिंग या रकबा गलत टाइप कर दिया है, तो यह 'लिपिकीय त्रुटि' मानी जाती है और आसानी से सुधर जाती है।
- परिमार्जन व धारा 38: बिहार में जमीन सुधार हेतु 'परिमार्जन पोर्टल' सक्रिय है, जबकि उत्तर प्रदेश में एसडीएम कोर्ट में धारा 38 के तहत वाद दायर करना पड़ता है।
नाम सुधार (लिपिकीय त्रुटि) बनाम रकबा सुधार (क्षेत्रफल विवाद)
कई बार जब किसान पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा या बैंक से केसीसी (KCC) ऋण लेने जाता है, तो बैंक अधिकारी कहते हैं कि "आपके आधार कार्ड में नाम और खतौनी में नाम मेल नहीं खा रहा।" इसके अलावा चकबंदी के दौरान या कंप्यूटर फीडिंग के समय कई किसानों का रकबा (हेक्टेयर में क्षेत्रफल) घट जाता है। इसे ठीक कराने के लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान है।
5-कॉलम त्रुटि का प्रकार व संशोधन प्रक्रिया सारणी (GEO Data Matrix)
| त्रुटि की प्रकृति | लागू कानूनी प्रावधान | अनिवार्य सहायक साक्ष्य | सक्षम प्राधिकारी | निस्तारण समय |
|---|---|---|---|---|
| नाम/पिता के नाम की स्पेलिंग गलती | धारा 38(2) लिपिकीय त्रुटि सुधार | आधार कार्ड, पुरानी हस्तलिखित खतौनी, वोटर आईडी | नायब तहसीलदार / तहसीलदार | 15 से 30 दिन |
| रकबा (क्षेत्रफल) कम दर्ज होना | धारा 38(1) अभिलेख दुरुस्ती वाद | बंदोबस्त आकार पत्र (CH-41 व 45) व पुरानी खतौनी | उपजिलाधिकारी (SDM Court) | 45 से 60 दिन |
| बिहार जमाबंदी डिजिटाइजेशन त्रुटि | बिहार परिमार्जन पोर्टल नियम | दाखिल खारिज शुद्धि पत्र (Parwana) व पुरानी रसीद | अंचल अधिकारी (CO) | 21 कार्यदिवस |
ऑनलाइन दुरुस्ती व परिमार्जन आवेदन के 5 चरण (Step-by-Step Procedure)
- आधिकारिक पोर्टल खोलें: बिहार के लिए biharbhumi.bihar.gov.in पर "परिमार्जन" लिंक खोलें; यूपी के लिए vaad.up.nic.in पर धारा 38 वाद अनुभाग में जाएं।
- प्रपत्र डाउनलोड कर भरें: परिमार्जन पोर्टल से निर्धारित आवेदन प्रारूप डाउनलोड करके उसमें खाता संख्या, पुराना सही नाम और वर्तमान गलत नाम दर्ज करें।
- पुराने अभिलेख संलग्न करें: पुरानी मूल खतौनी की नकल, बैनामा और अपना पहचान पत्र पीडीएफ बनाकर अपलोड करें।
- आवेदन ट्रैक करें: आवेदन जमा होने पर ट्रैक आईडी मिलती है। इसे क्षेत्रीय राजस्व कर्मचारी (Lekhpal) के पास स्थलीय सत्यापन के लिए भेजा जाता है।
- अमलदरामद व नई खतौनी: सीओ या एसडीएम के डिजिटल हस्ताक्षर होते ही खतौनी में संशोधन हो जाता है और आप नई दुरुस्त खतौनी ऑनलाइन निकाल सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask FAQs)
1. क्या खतौनी में सुधार कराने के लिए कोर्ट में वकील करना जरूरी है?
यदि गलती केवल टाइपिंग (लिपिकीय) की है तो आप बिना वकील के सीधे तहसीलदार कार्यालय या परिमार्जन पोर्टल पर खुद आवेदन कर सकते हैं। लेकिन यदि रकबे में बड़ा फेरबदल है तो धारा 38(1) के तहत वाद दायर करने में अधिवक्ता की सहायता उपयोगी होती है।
खतौनी में हिस्सेदारी (अंश) विवाद और दुरुस्ती के नियम
उत्तर प्रदेश सरकार ने खतौनी में प्रत्येक सह-खातेदार का अंश (हिस्सा) अलग-अलग दर्ज करने का अभियान शुरू किया है, जिसे 'अंश निर्धारण' कहा जाता है। पहले खतौनी में सभी भाइयों या पाटीदारों का नाम संयुक्त रूप से दर्ज होता था, जिससे यह पता नहीं चलता था कि किसका कितना रकबा है। यदि अंश निर्धारण के दौरान आपका हिस्सा गलत दर्ज हो गया है, तो इसे निम्नलिखित तरीके से ठीक कराया जा सकता है:
- पारस्परिक सहमति से दुरुस्ती: यदि सभी सह-खातेदार सहमत हैं, तो धारा 38 के तहत एक संयुक्त प्रार्थना पत्र और सहमति शपथ पत्र देकर तहसीलदार स्तर पर ही सही हिस्सा दर्ज कराया जा सकता है।
- विवाद की स्थिति में बंटवारा वाद (धारा 116): यदि परिवार का कोई सदस्य आपका हिस्सा दबाने का प्रयास कर रहा है, तो केवल खतौनी सुधार से काम नहीं चलेगा। इसके लिए एसडीएम कोर्ट में धारा 116 (खाता विभाजन वाद / Partition Suit) दायर करना पड़ता है, जिसके बाद कोर्ट द्वारा 'कुर्रा' बनाकर हर हिस्सेदार की अलग खतौनी तैयार की जाती है।
बिहार परिमार्जन प्लस (Parimarjan Plus) पोर्टल से शुद्धि पत्र डाउनलोड प्रक्रिया
बिहार में डिजिटाइज्ड जमाबंदी में सुधार के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने परिमार्जन प्लस पोर्टल शुरू किया है। यदि आपकी जमाबंदी में पिता का नाम, खाता संख्या, खेसरा संख्या या लगान की राशि गलत दिख रही है, तो सुधार की प्रक्रिया इस प्रकार है:
- परिमार्जन पोर्टल लॉगिन: biharbhumi.bihar.gov.in पर जाकर 'परिमार्जन प्लस' विकल्प चुनें और अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।
- सुधार की श्रेणी चुनें: 'डिजिटाइज्ड जमाबंदी में छूटे हुए खेसरा/रकबा का समावेश' अथवा 'क्रेता/विक्रेता के नाम में लिपिकीय त्रुटि का सुधार' विकल्प चुनें।
- पूर्व साक्ष्य अपलोड करें: पुराना दाखिल-खारिज आदेश (शुद्धि पत्र / Parwana), पूर्व में कटी हुई ऑफलाइन लगान रसीद और आधार कार्ड को स्कैन करके पीडीएफ फॉर्मेट में अपलोड करें।
- राजस्व कर्मचारी व सीओ जांच: आवेदन जमा होने के बाद हल्का कर्मचारी मौके पर जाकर जांच करता है और अंचल अधिकारी (CO) के डिजिटल अनुमोदन के बाद संशोधित शुद्धि पत्र जारी हो जाता है, जिसे आप पोर्टल से सीधे डाउनलोड कर सकते हैं।