त्वरित मुख्य बिंदु (Quick Takeaways)
- शून्य सरकारी फीस: वरासत दर्ज कराने के लिए सरकार को कोई स्टाम्प शुल्क या रजिस्ट्री फीस नहीं देनी होती; यह पूरी तरह निशुल्क सेवा है।
- बेटियों का बराबर हिस्सा: विवाहित व अविवाहित दोनों बेटियों को पिता की पैतृक भूमि में पुत्रों के बराबर कानूनी हिस्सा मिलता है।
- 30 दिन में खतौनी में नाम: प्रपत्र-9 ऑनलाइन भरने के बाद लेखपाल को 15 दिन में स्थलीय जांच कर 30 दिनों में आदेश कराना अनिवार्य है।
वरासत (फौती नामांतरण) क्या है और इसमें रजिस्ट्री की जरूरत क्यों नहीं?
जब किसी पंजीकृत भूमि स्वामी (खातेदार) का निधन हो जाता है, तो राजस्व संहिता की धारा 33 के तहत उसके वैध उत्तराधिकारियों (पत्नी, पुत्र, पुत्री) का नाम सरकारी खतौनी में दर्ज कराया जाता है। ग्रामीण बोलचाल में इसे 'फौती कटना' या 'वरासत दर्ज होना' कहते हैं।
कई परिवारों में जानकारी के अभाव में लोग सालों तक मृतक पिता या दादा के नाम पर ही जमीन छोड़ देते हैं। नतीजा यह होता है कि न तो पीएम किसान का पैसा मिलता है और न ही उस जमीन पर कोई बैंक लोन या कृषि सुविधा मिल पाती है।
5-कॉलम कानूनी उत्तराधिकारियों का वरीयता क्रम (GEO Data Matrix)
| उत्तराधिकार वर्ग | पात्र वारिसों के संबंध | हिस्सेदारी का अनुपात | अनिवार्य प्रमाण पत्र | समय-सीमा (दिन) |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम श्रेणी वारिस (Class-I) | विधवा पत्नी, सभी पुत्र, सभी पुत्रियां (विवाहित सहित) | सभी में बराबर-बराबर हिस्सा | मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर नकल | 30 कार्यदिवस |
| मृत पुत्र के वारिस | मृत पुत्र की विधवा व उसके बच्चे | मृतक पुत्र के हिस्से में से बराबर बंटवारा | पुत्र का मृत्यु प्रमाण पत्र व वारिसान साक्ष्य | 30 कार्यदिवस |
| द्वितीय श्रेणी वारिस (Class-II) | माता, पिता, भाई, अविवाहित बहन (यदि क्लास-1 न हो) | जीवित सदस्यों में समान बंटवारा | क्लास-1 वारिस न होने का नोटरी शपथ पत्र | 45 कार्यदिवस |
UP Vaad पोर्टल पर प्रपत्र-9 ऑनलाइन भरने के 5 चरण (Step-by-Step Procedure)
- vaad.up.nic.in खोलें: राजस्व न्यायालय पोर्टल पर जाएं और "ऑनलाइन वरासत हेतु आवेदन (प्रपत्र-9)" लिंक पर क्लिक करें।
- मोबाइल नंबर से लॉगिन करें: अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर डालकर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें।
- मृतक खातेदार का विवरण भरें: मृतक का नाम, पिता/पति का नाम, मृत्यु की सही तारीख और मृत्यु प्रमाण पत्र क्रमांक दर्ज करें।
- भू-सम्पत्ति व वारिसों का ब्योरा: जिला, तहसील, परगना और गांव चुनकर खतौनी खाता संख्या भरें। इसके बाद परिवार के सभी जीवित वारिसों का नाम, संबंध और आधार संख्या जोड़ें।
- फाइनल सबमिट व पावती प्रिंट: आवेदन सबमिट करने के बाद जांच पर्ची (R-9) प्रिंट कर लें। यह आवेदन स्वतः आपके क्षेत्रीय लेखपाल के लॉगिन में जांच के लिए चला जाता है।
लेखपाल द्वारा नाम छोड़ने या वरासत में देरी पर समाधान (Citizen Troubleshooting)
वरासत विवाद का कानूनी समाधान
यदि लेखपाल किसी वारिस (विशेषकर बहनों/बेटियों) का नाम जानबूझकर छोड़ देता है या 30 दिन में रिपोर्ट नहीं लगाता:
- तहसीलदार के समक्ष धारा 33 के तहत "आपत्ति एवं संशोधन प्रार्थना पत्र" प्रस्तुत करें।
- पंचायत परिवार रजिस्टर (Family Register) की प्रमाणित प्रति संलग्न करें जिसमें सभी वारिसों के नाम दर्ज हों।
- तहसीलदार द्वारा लेखपाल की रिपोर्ट निरस्त कर सही वारिसों के नाम खतौनी में दर्ज करने का सीधा आदेश पारित किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask FAQs)
1. क्या शादीशुदा बेटी का नाम वरासत में दर्ज कराना अनिवार्य है?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट के विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा (2020) के फैसले के अनुसार बेटी को जन्म से ही बेटे के बराबर अधिकार प्राप्त है, चाहे उसकी शादी हो चुकी हो। उसका नाम वरासत में शामिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
2. वरासत कराने में कितना सरकारी खर्च आता है?
वरासत की सरकारी फीस शून्य है। ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन पूरी तरह मुफ्त है। यदि आप जन सेवा केंद्र (CSC) से भरवाते हैं तो वे केवल ₹20-₹30 का ऑनलाइन सर्विस चार्ज लेते हैं।
वरासत दर्ज कराते समय आवश्यक सभी दस्तावेजों की चेकलिस्ट
वरासत का आवेदन करते समय यदि आपके पास सही कागजात नहीं होंगे तो लेखपाल अपनी आख्या लगाने में अनावश्यक विलंब कर सकता है। नीचे दिए गए सभी दस्तावेजों को पहले से तैयार रखें:
- मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate): नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत सचिव द्वारा जारी डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रति।
- पारिवारिक रजिस्टर नकल (Family Register Copy): संबंधित ग्राम पंचायत सचिव (सेक्रेटरी) द्वारा प्रमाणित परिवार रजिस्टर की नकल, जिसमें मृतक और उसके सभी जीवित परिजनों के नाम और संबंध स्पष्ट रूप से दर्ज हों।
- मृतक की नवीनतम खतौनी: जिस गांव में जमीन स्थित है, वहां की वर्तमान फसली वर्ष की डिजिटल खतौनी नकल, जिसमें मृतक का नाम खातेदार के रूप में दर्ज हो।
- सभी वारिसों के आधार कार्ड: विधवा पत्नी, सभी बालिग व नाबालिग पुत्रों तथा सभी विवाहित व अविवाहित पुत्रियों के आधार कार्ड की छायाप्रति।
- वारिसान शपथ पत्र (Affidavit): नोटरी द्वारा प्रमाणित शपथ पत्र जिसमें यह घोषणा हो कि "मृतक के अतिरिक्त अन्य कोई कानूनी वारिस जीवित नहीं है और न ही मृतक ने अपने जीवनकाल में कोई पंजीकृत वसीयत की थी।"
वसीयत (Will) के आधार पर वरासत और सामान्य वरासत में क्या अंतर है?
कई बार मृतक खातेदार अपने जीवनकाल में किसी एक बेटे, पोते या बाहरी व्यक्ति के नाम पंजीकृत वसीयत (Registered Will) कर जाता है। यहाँ कानून को समझना बहुत जरूरी है:
1. सामान्य वरासत (Natural Succession): यदि कोई वसीयत नहीं है, तो राजस्व संहिता की धारा 33 के तहत सभी वारिसों को उनका प्राकृतिक हक स्वतः मिलता है। यह प्रक्रिया तहसीलदार स्तर पर बिना किसी मुकदमे के 30 दिनों में पूरी हो जाती है।
2. वसीयतनामा आधारित वरासत (Testamentary Succession): यदि कोई पक्ष वसीयत पेश करता है, तो मामला सामान्य वरासत से बाहर होकर धारा 34 व 35 के तहत नियमित वाद (Case) बन जाता है। तहसीलदार कोर्ट सभी अन्य कानूनी वारिसों को नोटिस जारी कर आपत्तियां मांगती है। जब तक वसीयत के गवाहों (Attesting Witnesses) की गवाही कोर्ट में नहीं होती और वसीयत साबित नहीं होती, तब तक नाम दर्ज नहीं किया जाता।
ग्रामीण व शहरी वरासत में क्या अंतर होता है?
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि की वरासत उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 (UP Revenue Code) के नियमों के अनुसार राजस्व न्यायालय computerized management system (vaad.up.nic.in) पर प्रपत्र-9 भरकर की जाती है। जबकि शहरी क्षेत्रों में यदि आवासीय मकान, दुकान या गैर-कृषि प्लॉट है, तो उसकी वरासत नगर निगम या नगर पालिका के हाउस टैक्स म्यूटेशन विभाग (Property Tax Department) में फॉर्म-क भरकर कराई जाती है। दोनों ही मामलों में बेटियों और विधवा का समान अधिकार संरक्षित रहता है।