yojana ⏱️ 13 मिनट पढ़ें 📅 21 सितंबर 2026

पीएम विकसित भारत रोजगार योजना 2026: नए कर्मचारियों को ₹15,000 पहली सैलरी सब्सिडी, EPFO इंसेंटिव व आवेदन नियम

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संजय कुमार सक्सेना
श्रम एवं रोजगार नीति विश्लेषक

विगत 11 वर्षों से श्रम मंत्रालय, ईपीएफओ नियमों एवं औद्योगिक रोजगार संवर्धन योजनाओं पर विश्लेषणात्मक लेखन।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

पीएम विकसित भारत रोजगार योजना संगठित क्षेत्र में औपचारिक रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया रोजगार प्रोत्साहन पैकेज है। इसके तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में पहली बार पंजीकृत होने वाले युवाओं को एक माह का वेतन (अधिकतम 15,000 रुपये) तीन किश्तों में सीधे बैंक खाते में दिया जाता है। साथ ही विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की कंपनियों को नए कर्मचारियों की भर्ती पर ईपीएफओ अंशदान की प्रतिपूर्ति दी जाती है। इसका लाभ ₹1 लाख तक वेतन पाने वाले नए कर्मचारी ले सकते हैं।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • पहली बार फॉर्मल सेक्टर में नौकरी पाने वाले युवाओं को अधिकतम ₹15,000 की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता DBT के जरिए सीधे बैंक खाते में।
  • विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सेक्टर में नए रोजगार पैदा करने पर नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को लगातार 4 वर्षों तक ईपीएफओ प्रोत्साहन।
  • सभी संगठित क्षेत्रों में 50 से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती पर नियोक्ता को प्रति कर्मचारी ₹3,000 प्रति माह तक की ईपीएफ प्रतिपूर्ति।
  • योजना का पूर्ण संचालन EPFO Unified Portal और UAN आधारित प्रत्यक्ष सत्यापन प्रणाली के जरिए पूरी पारदर्शिता के साथ।
मापदंड / विवरणआधिकारिक प्रावधान (Official Rules)सत्यापन माध्यम / पोर्टल
योजना का शीर्षकपीएम विकसित भारत रोजगार योजना (ELI Scheme 2026)श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
नोडल क्रियान्वयन एजेंसीकर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)epfindia.gov.in
लक्षित लाभार्थीसंगठित क्षेत्र के नए कर्मचारी एवं अतिरिक्त रोजगार देने वाली कंपनियांEPFO सदस्य पोर्टल
योजना भाग A (स्कीम A)पहली बार नौकरी पाने वालों को ₹15,000 (3 किश्तों में)DBT बैंक खाता
योजना भाग B (स्कीम B)मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अतिरिक्त रोजगार पर 4 साल का EPFO इंसेंटिवECR चालान समायोजन
योजना भाग C (स्कीम C)सभी क्षेत्रों में नियोक्ताओं को ₹3,000/माह प्रति कर्मचारी 2 साल तकपेरोल सत्यापन
अधिकतम वेतन सीमासकल वेतन ₹1,00,000 प्रति माह से कम होना चाहिएवेतन पर्ची / ईपीएफ रिटर्न
भुगतान माध्यमआधार सीडेड बैंक खाते में सीधे DBT (Direct Benefit Transfer)PFMS पोर्टल

1. पीएम विकसित भारत रोजगार योजना क्या है? उद्देश्य एवं बजट 2026 विजन

भारत की अर्थव्यवस्था जब दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है, तब युवाओं को अनौपचारिक (Informal) क्षेत्र से निकालकर औपचारिक (Formal) संगठित क्षेत्र में लाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुका है। इसी विजन को साकार करने के लिए केंद्रीय बजट में रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (Employment-Linked Incentive - ELI) के तहत "पीएम विकसित भारत रोजगार योजना" को लागू किया गया है। इस ऐतिहासिक योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जिसका सीधा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में देश के 4.1 करोड़ से अधिक युवाओं को रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।

भारत में लाखों युवा स्नातक या डिप्लोमा पूरा करके निजी कंपनियों, कारखानों और आईटी फर्मों में काम शुरू तो करते हैं, लेकिन शुरुआती महीनों में कम वेतन और अनिश्चितता के कारण वे आर्थिक दबाव में आ जाते हैं। दूसरी तरफ, छोटी और मध्यम कंपनियां (MSME) ईपीएफओ के 12% अंशदान के वित्तीय बोझ के डर से कर्मचारियों को औपचारिक पेरोल पर दर्ज करने से कतराती हैं। पीएम विकसित भारत रोजगार योजना इन दोनों समस्याओं का एक साथ स्थायी समाधान करती है। यह योजना नए कर्मचारियों को शुरुआत में अतिरिक्त वित्तीय संबल देती है और साथ ही नियोक्ताओं के लिए ईपीएफओ का भारी खर्च खुद सरकार उठाकर उन्हें ज्यादा से ज्यादा नौकरियां देने के लिए प्रोत्साहित करती है।

यह योजना केवल एक अस्थायी राहत नहीं है, बल्कि भारत के कार्यबल के औपचारिकरण (Formalization of Workforce) की दिशा में एक बुनियादी ढांचागत बदलाव है। जब कोई युवा ईपीएफओ का सदस्य बनता है, तो उसे भविष्य निधि (PF), पेंशन (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा (EDLI) जैसी दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा कवच अपने आप मिल जाते हैं। इसके माध्यम से निजी क्षेत्र में रोजगार की स्थिरता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो रहा है।

सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा (Services) दोनों क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा हों। जो कंपनियां अपनी मौजूदा क्षमता से अधिक नए युवाओं को रोजगार देंगी, उन्हें वित्तीय प्रोत्साहन देकर सरकार देश के औद्योगिक उत्पादन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रही है।

2. योजना के तीन प्रमुख स्तंभ: स्कीम A, स्कीम B और स्कीम C का पूरा विश्लेषण

रोजगार बाजार की अलग-अलग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस विशाल योजना को तीन विशेष भागों या योजनाओं में विभाजित किया है:

  1. स्कीम A (पहली बार काम करने वालों के लिए - First Timers): यह घटक उन सभी भारतीय नागरिकों के लिए है जो अपने जीवन में पहली बार किसी संगठित क्षेत्र के प्रतिष्ठान में औपचारिक कर्मचारी के रूप में पंजीकृत हो रहे हैं और जिनका मासिक वेतन 1 लाख रुपये से कम है। इसके तहत कर्मचारी को उसके एक महीने के वेतन के बराबर (अधिकतम 15,000 रुपये) सीधी आर्थिक सहायता तीन किश्तों में दी जाती है।
  2. स्कीम B (विनिर्माण क्षेत्र में अतिरिक्त रोजगार - Manufacturing Sector): मेक इन इंडिया को नई गति देने के लिए यह घटक केवल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें उन कंपनियों को प्रोत्साहन मिलता है जो अपने पिछले तीन साल के औसत पेरोल की तुलना में कम से कम 50 अतिरिक्त या 25% अधिक गैर-ईपीएफ कर्मचारियों को नियमित भर्ती करती हैं। इसमें पहले चार वर्षों तक कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के ईपीएफ योगदान का एक निश्चित अनुपात सरकार सीधे वहन करती है।
  3. स्कीम C (सभी क्षेत्रों में नियोक्ताओं को समर्थन - Support to Employers): यह घटक सेवा क्षेत्र (IT, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी आदि) सहित अर्थव्यवस्था के सभी संगठित क्षेत्रों पर लागू होता है। इसमें नियोक्ताओं को प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी की भर्ती पर दो साल तक प्रति माह ₹3,000 तक की ईपीएफओ प्रतिपूर्ति सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है।

3. पहली बार नौकरी पाने वालों को ₹15,000 कैसे मिलेंगे? किश्तों का गणित

स्कीम A के तहत ₹15,000 की वित्तीय सहायता को प्राप्त करने के नियम अत्यंत स्पष्ट और पारदर्शी हैं। यह पैसा किसी एकमुश्त चेक के रूप में नहीं मिलता, बल्कि कर्मचारी की नौकरी की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए इसे तीन अलग-अलग चरणों में बांटा गया है:

किश्तों का विस्तृत वितरण:

  • पहली किश्त (₹5,000 या 1 महीने के वेतन का एक-तिहाई): कर्मचारी के ईपीएफओ में सफलतापूर्वक पंजीकृत होने और कंपनी द्वारा लगातार दूसरे महीने का ईपीएफ अंशदान जमा करने के बाद जारी की जाती है।
  • दूसरी किश्त (₹5,000): कर्मचारी द्वारा लगातार पांच महीने की संतोषजनक सेवा पूरी करने और कंपनी द्वारा नियमित ईपीएफ रिटर्न दाखिल करने पर दी जाती है।
  • तीसरी किश्त (₹5,000): लगातार नौ महीने का रोजगार पूरा करने और कर्मचारी द्वारा अनिवार्य वित्तीय साक्षरता ऑनलाइन मॉड्यूल पूरा करने के बाद उसके खाते में भेजी जाती है।

एक बहुत ही समझदारी भरा नियम यह भी जोड़ा गया है कि इस 15,000 रुपये में से एक निश्चित हिस्सा (लगभग 2,000 रुपये) कर्मचारी के बचत खाते के बजाय सीधे उसके ईपीएफ खाते में जमा किया जाता है, ताकि उसमें शुरुआत से ही बचत और पेंशन की आदत विकसित हो सके। यदि कर्मचारी का वेतन 15,000 रुपये से कम, मान लीजिए 12,000 रुपये प्रति माह है, तो उसे अधिकतम 12,000 रुपये ही मिलेंगे, जो ₹4,000 की तीन बराबर किश्तों में दिए जाएंगे।

यह राशि पूरी तरह से गैर-करयोग्य (Tax-free) होती है और इसे कर्मचारी की सीटीसी (Cost to Company) में से नहीं काटा जा सकता। यदि किसी कंपनी का एचआर विभाग इस प्रोत्साहन राशि के बदले कर्मचारी का फिक्स्ड वेतन कम करता है, तो कर्मचारी ईपीएफओ के ग्रीवेंस पोर्टल पर सीधी शिकायत दर्ज करा सकता है।

4. कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए EPFO सब्सिडी और रीइंबर्समेंट के नियम

कंपनियों के लिए स्कीम B और स्कीम C के तहत मिलने वाली छूट उनके ऑपरेटिंग खर्च को बहुत कम कर देती है। विनिर्माण क्षेत्र (Scheme B) में सरकार पहले और दूसरे वर्ष में कर्मचारी के ईपीएफ वेतन का 24% (12% कर्मचारी का + 12% नियोक्ता का) तक का बड़ा हिस्सा इंसेंटिव के रूप में वहन करती है। तीसरे वर्ष में यह सहायता 16% और चौथे वर्ष में 8% रहती है।

वहीं स्कीम C के तहत, सेवा क्षेत्र और अन्य गैर-विनिर्माण कंपनियों को नए अतिरिक्त कर्मचारियों के लिए सरकार 3,000 रुपये प्रति माह तक का ईपीएफ रिफंड 24 महीनों (2 वर्षों) तक सीधे प्रदान करती है। इसका दावा करने के लिए कंपनी को हर महीने अपना इलेक्ट्रॉनिक चालान कम रिटर्न (ECR) समय पर भरना होता है। ईपीएफओ सॉफ्टवेयर स्वतः ही यह जांच लेता है कि कंपनी में पिछले महीने की तुलना में कितने नए UAN जुड़े हैं और उसी आधार पर चालान में छूट दे दी जाती है या रिफंड खाते में क्रेडिट कर दिया जाता है।

यह मॉडल छोटे उद्योगों (MSMEs) के लिए विशेष रूप से वरदान साबित हो रहा है। पहले जहां 20 कर्मचारियों वाली कोई फैक्ट्री अतिरिक्त लेबर रखने से हिचकती थी, अब सरकारी सब्सिडी के चलते वे खुलकर नए अप्रेंटिस और टेक्नीशियन रख पा रहे हैं।

5. पात्रता की शर्तें: वेतन सीमा, UAN जनरेशन और अनिवार्य नियम

योजना का लाभ लेने के लिए कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को निम्नलिखित शर्तों पर खरा उतरना होगा:

कर्मचारी के लिए पात्रता शर्तें:

  • कर्मचारी का यह पहला सार्वभौमिक खाता संख्या (UAN - Universal Account Number) होना चाहिए। पूर्व में किसी भी कंपनी में उसका ईपीएफ अंशदान नहीं कटा होना चाहिए।
  • कर्मचारी का सकल मासिक वेतन (Gross Monthly Salary) ₹1,00,000 से अधिक नहीं होना चाहिए। हालांकि अधिकतम सब्सिडी 15,000 रुपये के वेतन आधार पर ही सीमित रहेगी।
  • कर्मचारी का आधार कार्ड उसके UAN से 100% सत्यापित होना चाहिए और बैंक खाते में नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH) या NPCI मैपिंग सक्रिय होनी चाहिए।
  • कर्मचारी की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

कंपनी (नियोक्ता) के लिए पात्रता शर्तें:

  • कंपनी कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 के तहत विधिवत पंजीकृत होनी चाहिए।
  • कंपनी में कम से कम 6 महीने से कोई वैधानिक ईपीएफ डिफॉल्ट या कानूनी कार्यवाही लंबित न हो।
  • स्कीम C का लाभ लेने के लिए 50 से कम कर्मचारियों वाली फर्म को कम से कम 2 नए कर्मचारी, और 50 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनी को कम से कम 5 नए कर्मचारी जोड़ने होंगे।

6. EPFO पोर्टल पर क्लेम और वेरिफिकेशन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

इस योजना में किसी भी कर्मचारी को अलग से कोई भौतिक आवेदन पत्र भरकर सरकारी दफ्तर में जमा नहीं करना है। पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और नियोक्ता के माध्यम से संचालित होती है:

चरण 1: कंपनी द्वारा नए UAN का सृजन: जब कोई नया कर्मचारी कंपनी ज्वाइन करता है, तो कंपनी का एचआर विभाग ईपीएफओ के एकीकृत नियोक्ता पोर्टल (Unified Portal for Employers) पर जाकर कर्मचारी के आधार विवरण से नया UAN जेनरेट करता है।

चरण 2: फर्स्ट-टाइमर फ्लैग का चयन: पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करते समय सिस्टम स्वचालित रूप से आधार नंबर को पूर्व रिकॉर्ड में सर्च करता है। यदि कोई पुराना पीएफ इतिहास नहीं मिलता, तो सिस्टम उसे "Eligible for Scheme A" मार्क कर देता है।

चरण 3: कर्मचारी द्वारा सदस्य पोर्टल पर लॉगिन व ई-केवाईसी: कर्मचारी को ईपीएफओ मेंबर पोर्टल (unifiedportal-mem.epfindia.gov.in) पर जाकर अपने UAN को सक्रिय करना होता है और वहां अपनी बैंक पासबुक और आधार सीडिंग की पुष्टि करनी होती है।

चरण 4: मासिक रिटर्न (ECR) का दाखिला: कंपनी हर महीने की 15 तारीख से पहले कर्मचारियों के वेतन का ईसीआर चालान भरती है। जैसे ही लगातार दो महीने का वेतन रिटर्न ईपीएफओ के पास दर्ज होता है, वित्तीय सब्सिडी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

चरण 5: आधार लिंक खाते में DBT का अंतरण: लोक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से जांच पूरी होने के बाद वित्त मंत्रालय सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में सब्सिडी की राशि आरटीजीएस/एनईएफटी द्वारा जमा कर देता है।

7. सामान्य गलतियां: बैंक सीडिंग, UAN मिसमैच और उनके समाधान

योजना के क्रियान्वयन के दौरान कई नए कर्मचारियों को सब्सिडी मिलने में देरी का सामना करना पड़ता है। इसके प्रमुख कारण और उनके समाधान नीचे दिए गए हैं:

सामान्य समस्या / त्रुटि प्रमुख कारण निवारण एवं आधिकारिक समाधान
आधार और UAN नाम में अंतर (Name Mismatch) 10वीं की मार्कशीट और आधार कार्ड में स्पेलिंग अलग होना ईपीएफओ पोर्टल पर 'Joint Declaration Form' ऑनलाइन भरकर आधार के अनुसार नाम सही करवाएं।
DBT विफलता (Aadhaar Not Seeded to Bank) बैंक खाते में एनपीसीआई मैपिंग या डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर एक्टिव न होना अपनी बैंक शाखा में जाकर 'Aadhaar Mandate Form' भरें और NPCI पोर्टल पर मैपिंग स्टेटस चेक करें।
पुराना UAN सक्रिय होना (Duplicate UAN) कॉलेज के समय किसी अस्थायी इंटर्नशिप में पूर्व पीएफ कटना यदि पूर्व में पीएफ कट चुका है, तो आप फर्स्ट-टाइमर श्रेणी में नहीं आएंगे; हालांकि कंपनी स्कीम C का लाभ ले सकती है।
कंपनी द्वारा ईसीआर दाखिल न करना कंपनी द्वारा ईपीएफ अंशदान जमा करने में विलंब कंपनी के एचआर विभाग से संपर्क करें, क्योंकि सब्सिडी का ट्रिगर चालान जमा होने के बाद ही जनरेट होता है।

8. सामान्य प्रश्न (FAQs) और आधिकारिक समाधान

प्र. 1: क्या यह ₹15,000 की राशि मेरे मासिक वेतन से काटी जाएगी?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। यह केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन (Direct Subsidy) है। कंपनी आपके मूल वेतन में से इसकी कोई कटौती नहीं कर सकती।

प्र. 2: अगर मैं 6 महीने बाद नौकरी बदल लेता हूं तो क्या मुझे बाकी किश्तें मिलेंगी?
उत्तर: हां, बशर्ते आपकी अगली कंपनी भी ईपीएफओ के तहत पंजीकृत हो और आपका वही पुराना UAN वहां ट्रांसफर किया जाए। यदि आपके रोजगार में 60 दिन से अधिक का अंतराल नहीं आता है, तो आपकी पात्रता बरकरार रहेगी।

प्र. 3: क्या यह योजना संविदा (Contract) और थर्ड पार्टी पेरोल वाले कर्मचारियों पर भी लागू है?
उत्तर: हां, यदि ठेकेदार या एजेंसी ईपीएफओ में पंजीकृत है और अपने कर्मचारियों के लिए नियमित ईसीआर दाखिल करती है, तो संविदा पर रखे गए सभी योग्य नए कर्मचारियों को भी यह लाभ मिलेगा।

प्र. 4: क्या इंटर्नशिप करने वाले छात्र भी इस योजना के तहत ₹15,000 ले सकते हैं?
उत्तर: नहीं, यह योजना केवल औपचारिक रोजगार के लिए है जहां कर्मचारी और नियोक्ता के बीच ईपीएफ का संबंध बनता है। इंटर्नशिप के लिए भारत सरकार की अलग 'प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना' संचालित है।

प्र. 5: योजना का स्टेटस ट्रैक करने के लिए कौन सा पोर्टल देखना होगा?
उत्तर: कर्मचारी उमंग (UMANG) ऐप या EPFO के आधिकारिक मेंबर पोर्टल पर जाकर अपने UAN क्रेडेंशियल से लॉगिन करके 'ELI Scheme Status' टैब में जाकर अपनी सब्सिडी का स्टेटस देख सकते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या यह ₹15,000 की राशि मेरे मासिक वेतन से काटी जाएगी?

A. बिल्कुल नहीं। यह केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन (Direct Subsidy) है। कंपनी आपके मूल वेतन में से इसकी कोई कटौती नहीं कर सकती।

Q. अगर मैं 6 महीने बाद नौकरी बदल लेता हूं तो क्या मुझे बाकी किश्तें मिलेंगी?

A. हां, बशर्ते आपकी अगली कंपनी भी ईपीएफओ के तहत पंजीकृत हो और आपका वही पुराना UAN वहां ट्रांसफर किया जाए। यदि आपके रोजगार में 60 दिन से अधिक का अंतराल नहीं आता है, तो आपकी पात्रता बरकरार रहेगी।

Q. क्या यह योजना संविदा (Contract) और थर्ड पार्टी पेरोल वाले कर्मचारियों पर भी लागू है?

A. हां, यदि ठेकेदार या एजेंसी ईपीएफओ में पंजीकृत है और अपने कर्मचारियों के लिए नियमित ईसीआर दाखिल करती है, तो संविदा पर रखे गए सभी योग्य नए कर्मचारियों को भी यह लाभ मिलेगा।

Q. क्या इंटर्नशिप करने वाले छात्र भी इस योजना के तहत ₹15,000 ले सकते हैं?

A. नहीं, यह योजना केवल औपचारिक रोजगार के लिए है जहां कर्मचारी और नियोक्ता के बीच ईपीएफ का संबंध बनता है। इंटर्नशिप के लिए भारत सरकार की अलग प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना संचालित है।

Q. योजना का स्टेटस ट्रैक करने के लिए कौन सा पोर्टल देखना होगा?

A. कर्मचारी उमंग (UMANG) ऐप या EPFO के आधिकारिक मेंबर पोर्टल पर जाकर अपने UAN क्रेडेंशियल से लॉगिन करके ELI Scheme Status टैब में जाकर अपनी सब्सिडी का स्टेटस देख सकते हैं।

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