त्वरित समाधान (Quick Answer): यदि आपकी पुरानी हाउस टैक्स रसीद खो गई है और आपको अपना उपभोक्ता संख्या या असेसमेंट नंबर याद नहीं है, तो नगर निगम पोर्टल पर 'Search Property' में जाकर अपना जोन और वार्ड चुनकर मालिक के नाम या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 1 मिनट में अपनी 10 या 15 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी (UPID) निकाल सकते हैं। इसके अलावा घर के बाहर लगे म्यूनिसिपल क्यूआर कोड प्लेट को स्कैन करके भी आईडी तुरंत मिल जाती है।
यूनिक प्रॉपर्टी आईडी (UPID / UPIC) क्या है?
जैसे प्रत्येक नागरिक की पहचान के लिए 12 अंकों का आधार कार्ड होता है और प्रत्येक करदाता के लिए पैन कार्ड होता है, ठीक उसी तरह शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक भूखंड, मकान, दुकान और फ्लैट की डिजिटल पहचान के लिए नगर निगम द्वारा जारी किए जाने वाले विशिष्ट कोड को यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन कोड (UPID / UPIC / PIN) कहा जाता है।
इस कोड में संपत्ति का राज्य कोड, नगर निगम कोड, जोन संख्या, वार्ड संख्या, मोहल्ला कोड और व्यक्तिगत भवन संख्या समाहित होती है। डिजिटल इंडिया मिशन के तहत अब देश के सभी नगर निगम पुराने बही-खाता नंबरों को समाप्त कर एकल UPID प्रणाली पर आ चुके हैं।
बिना खाता नंबर या रसीद के प्रॉपर्टी सर्च करने की 3 आसान विधियां
यदि आपके पास पुराना बिल या असेसमेंट नंबर नहीं है, तो आप नीचे दी गई तीन आधिकारिक विधियों में से किसी एक का उपयोग करके अपनी प्रॉपर्टी आईडी प्राप्त कर सकते हैं:
विधि 1: मालिक के नाम और मोबाइल नंबर से ऑनलाइन सर्च
- स्टेप 1: अपने नगर निगम के आधिकारिक पोर्टल (जैसे e-nagarsewaup.gov.in, mcdonline.nic.in, mpenagarpalika.gov.in) पर जाएं।
- स्टेप 2: होमपेज पर "Pay House Tax" या "Property Search" विकल्प पर क्लिक करें।
- स्टेप 3: सर्च विकल्पों में से "Search by Owner Name / Mobile" का चयन करें।
- स्टेप 4: ड्रॉप-डाउन मेन्यू से अपना संबंधित जोन (Zone) और वार्ड का नाम (Ward Name) चुनें।
- स्टेप 5: संपत्ति मालिक का नाम (हिंदी या अंग्रेजी में) या रजिस्टर्ड 10-अंकों का मोबाइल नंबर दर्ज करें और 'Search' बटन दबाएं।
- स्टेप 6: उस वार्ड के सभी मिलते-जुलते नामों की सूची आ जाएगी। अपने पिता/पति के नाम और मकान नंबर का मिलान कर अपनी संपत्ति के आगे दिए गए UPID को नोट कर लें।
विधि 2: वार्ड नंबर, गली और मकान नंबर से सर्च
यदि नाम की स्पेलिंग में अंतर आ रहा हो और सर्च न हो रहा हो, तो पते के आधार पर खोजें:
- सर्च फिल्टर में "Search by Address" चुनें।
- अपनी कॉलोनी / मोहल्ले का नाम टाइप करें।
- मकान संख्या (House No.) दर्ज करें।
- सिस्टम उस गली के सभी पंजीकृत मकानों का विवरण दिखा देगा, जहां से आप अपनी प्रॉपर्टी आईडी और बकाया टैक्स देख सकते हैं।
विधि 3: जीआईएस ड्रोन क्यूआर कोड प्लेट से यूपीआईडी देखना
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत देश के अधिकांश बड़े शहरों (जैसे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, इंदौर, भोपाल, दिल्ली) में नगर निगमों ने घर-घर जाकर मुख्य दरवाजे पर नीले या पीले रंग की धातु की क्यूआर कोड नंबर प्लेट (Digital Door Number Plate) लगाई है।
उस प्लेट पर बड़े अक्षरों में आपकी 10-अंकों की प्रॉपर्टी आईडी मुद्रित होती है। यदि आप अपने स्मार्टफोन के कैमरे या किसी भी क्यूआर स्कैनर ऐप से उस कोड को स्कैन करेंगे, तो स्क्रीन पर सीधे आपके घर का हाउस टैक्स पेज, मालिक का नाम और देय राशि खुल जाएगी।
यदि पोर्टल पर प्रॉपर्टी 'Not Found' आए तो क्या करें?
यदि तीनों तरीकों के बाद भी आपकी संपत्ति ऑनलाइन नहीं दिख रही है, तो इसके दो मुख्य कारण हो सकते हैं:
- अनाधिकृत या नई कॉलोनी: यदि मकान किसी ऐसी नई कॉलोनी में बना है जिसका नगर निगम ने अभी तक सर्वे नहीं किया है, तो संपत्ति अभी तक टैक्स नेट में दर्ज नहीं हुई है।
- समाधान: आपको पोर्टल पर जाकर "Apply for New Assessment (नया कर निर्धारण)" का विकल्प चुनना होगा। अपनी रजिस्ट्री की प्रति, बिजली बिल (बिजली बिल गाइड) और भवन का नक्शा अपलोड करें। नगर निगम का इंस्पेक्टर 15 दिनों में स्थल निरीक्षण कर आपकी नई UPID जारी कर देगा।
प्रॉपर्टी आईडी को आधार और मोबाइल से लिंक करने के लाभ
एक बार प्रॉपर्टी आईडी मिल जाने के बाद पोर्टल पर अपना मोबाइल नंबर अवश्य अपडेट कराएं। इसके निम्नलिखित बड़े फायदे होते हैं:
- हर साल टैक्स बिल जनरेट होते ही और अर्ली बर्ड छूट की अंतिम तारीख से पहले सीधे एसएमएस अलर्ट मिलता है।
- यदि कोई व्यक्ति आपकी संपत्ति पर फर्जी म्यूटेशन या नाम बदलने की कोशिश करेगा, तो आपके मोबाइल पर तत्काल ओटीपी और चेतावनी संदेश आ जाएगा।
- ऑनलाइन पेमेंट की रसीद सीधे व्हाट्सएप या एसएमएस पर डाउनलोड लिंक के रूप में प्राप्त हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या एक ही मकान में दो अलग-अलग फ्लोर के अलग UPID हो सकते हैं?
हाँ, यदि किसी बहुमंजिला मकान में अलग-अलग फ्लोर अलग-अलग व्यक्तियों के नाम रजिस्टर्ड हैं (जैसे ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर की अलग रजिस्ट्री है), तो दोनों फ्लोर की अलग-अलग प्रॉपर्टी आईडी और अलग हाउस टैक्स बिल बनते हैं।
2. क्या मुझे अपना वार्ड नंबर जानने के लिए नगर निगम जाना पड़ेगा?
नहीं, आप अपने वोटर आईडी कार्ड पर या नगर निगम पोर्टल के 'Ward Map' सेक्शन में जाकर अपनी कॉलोनी का नाम देखकर आसानी से अपना वार्ड नंबर पता कर सकते हैं।
भूखंड एकीकरण और विभाजन (Amalgamation & Bifurcation of UPID)
शहरी संपत्तियों में समय के साथ स्थिति बदलती रहती है। इसके अनुसार प्रॉपर्टी आईडी में संशोधन के नियम इस प्रकार हैं:
- प्लॉट विभाजन (Bifurcation): यदि एक बड़े मकान का बंटवारा दो भाइयों के बीच हो जाता है या एक प्लॉट को दो अलग-अलग लोगों को बेच दिया जाता है, तो नगर निगम पोर्टल पर 'Bifurcation of UPID' का आवेदन करना होता है। पुराने एक नंबर के स्थान पर दो नए स्वतंत्र UPID जारी किए जाते हैं ताकि दोनों का अलग-अलग हाउस टैक्स बिल आ सके।
- प्लॉट एकीकरण (Amalgamation): यदि किसी व्यक्ति ने पास-पास के दो प्लॉट या दो फ्लैट खरीदकर एक बड़ा मकान बना लिया है, तो दोनों पुरानी आईडी को मर्ज करके एक सिंगल UPID में तब्दील कराया जा सकता है।
जीआईएस ड्रोन सर्वे में गलत नाप आने पर पोर्टल पर सुधार की प्रक्रिया
ड्रोन कैमरों से कई बार छाया, पेड़ की शाखाओं या पड़ोसी की खुली छत को भी आपके मकान का कवर्ड एरिया मान लिया जाता है, जिससे टैक्स आईडी पर क्षेत्रफल गलत चढ़ जाता है। इसे ठीक कराने के लिए नगर निगम के 'GIS Error Rectification' पोर्टल पर जाएं, अपने घर की वास्तविक नाप का आर्किटेक्ट द्वारा प्रमाणित नक्शा अपलोड करें और सुधार का अनुरोध दर्ज करें।