यदि आप किसी अनिवासी भारतीय (Non-Resident Indian - NRI) से भारत में कोई फ्लैट, मकान, प्लॉट या व्यावसायिक संपत्ति खरीद रहे हैं, तो 1 अक्टूबर 2026 से आयकर विभाग ने आपके लिए टैक्स प्रक्रिया को बेहद आसान कर दिया है। अब व्यक्तिगत खरीदार को टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर (TAN) के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की नई अधिसूचना के अनुसार, अब निवासी खरीदार सीधे अपने परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) के आधार पर फॉर्म 26QB (Form 26QB) भरकर TDS काट और जमा कर सकते हैं। यह बदलाव उन आम होम बायर्स के लिए बहुत बड़ी राहत है जो एनआरआई से संपत्ति लेते समय जटिल कॉर्पोरेट टैक्स नियमों के कारण अनजाने में डिफॉल्टर बन जाते थे।
पुराने नियम में क्या परेशानी थी और 1 अक्टूबर से क्या बदला?
- पुराना नियम: आयकर अधिनियम की धारा 195 के तहत जब कोई भारतीय नागरिक किसी एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदता था, तो खरीदार के लिए TAN लेना अनिवार्य होता था। इसके बाद फॉर्म 27Q में तिमाही टीडीएस रिटर्न फाइल करना पड़ता था। TAN न लेने या लेट चालान पर रोजाना ₹200 की लेट फीस और भारी ब्याज लग जाता था।
- 1 अक्टूबर से नया नियम: अब व्यक्तिगत खरीदार के लिए TAN की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। जिस तरह दो भारतीय नागरिकों के बीच 50 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी खरीद पर फॉर्म 26QB भरा जाता था, उसी तर्ज पर अब एनआरआई से खरीद पर भी PAN-बेस्ड चालान फॉर्म 26QB के जरिए ही टैक्स की रिपोर्टिंग और पेमेंट स्वीकार किया जाएगा।
Form 26QB और PAN आधारित रिपोर्टिंग की नई व्यवस्था
नए सिस्टम में खरीदार और विक्रेता दोनों के पैन कार्ड का इस्तेमाल होगा:
- खरीदार का PAN: टैक्स काटने वाले (Deductor) के रूप में।
- NRI विक्रेता का PAN: जिस व्यक्ति की संपत्ति से टैक्स काटा गया है (Deductee) के रूप में।
- प्रॉपर्टी का विवरण: संपत्ति का पूरा पता, बिक्री समझौता मूल्य (Agreement Value) और स्टैंप ड्यूटी वैल्यू।
चालान जमा होते ही सिस्टम द्वारा ऑटो-जनरेटेड फॉर्म 16B जारी हो जाएगा, जिसे खरीदार सीधे डाउनलोड करके एनआरआई विक्रेता को सौंप सकता है।
किस दर पर कटेगा TDS (Lower TDS Certificate का महत्व)?
एनआरआई से संपत्ति खरीदते समय टैक्स की दर निवासी भारतीयों (1%) से भिन्न होती है:
- कैपिटल गेन के आधार पर: सामान्यतः एनआरआई विक्रेता पर लागू लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के तहत 12.5% या पूर्व नियमों अनुसार 20% (प्लस सरचार्ज और सेस) की दर से टीडीएस काटा जाता है।
- धारा 197 के तहत लोअर टीडीएस सर्टिफिकेट: यदि एनआरआई विक्रेता ने आयकर अधिकारी से धारा 197 के तहत 'लोअर या निल डिडक्शन सर्टिफिकेट' प्राप्त कर लिया है, तो खरीदार को केवल उसी सर्टिफिकेट में उल्लेखित कम दर पर ही टैक्स काटना होगा। फॉर्म 26QB भरते समय इस सर्टिफिकेट का विशिष्ट नंबर दर्ज करना होता है।
नए नियम के तहत TDS जमा करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल (
incometax.gov.in) पर अपने पैन से लॉगिन करें। - e-File मेन्यू में जाकर 'e-Pay Tax' विकल्प चुनें और 'New Payment' पर क्लिक करें।
- वहां दिए गए Form 26QB (TDS on Property) मॉड्यूल का चयन करें।
- रेसिडेंशियल स्टेटस में विक्रेता के लिए 'Non-Resident' का चयन करें।
- खरीदार व विक्रेता का पैन, प्रॉपर्टी का पूरा विवरण और कुल भुगतान राशि दर्ज करें।
- यदि लोअर टीडीएस सर्टिफिकेट है, तो उसका सर्टिफिकेट नंबर डालें; अन्यथा मानक दर के अनुसार टैक्स की गणना पोर्टल द्वारा स्वतः कर दी जाएगी।
- नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या यूपीआई के जरिए तुरंत पेमेंट करें और चालान रसीद डाउनलोड करें।
30 दिन की समय-सीमा और लेट फीस से बचने की सलाह
जिस महीने में विक्रेता को पेमेंट किया गया है या उसके पक्ष में क्रेडिट दिया गया है, उस महीने के समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर फॉर्म 26QB भरकर टैक्स जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। उदाहरण के लिए, यदि आपने 5 अक्टूबर 2026 को पेमेंट किया है, तो 30 नवंबर 2026 तक टीडीएस चालान अवश्य भर दें। देरी होने पर धारा 234E के तहत प्रति दिन ₹200 का विलंब शुल्क देय होता है।