त्वरित उत्तर (Quick Summary): लखपति दीदी योजना भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसके तहत स्वयं सहायता समूह (Self Help Group - SHG) से जुड़ी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए ₹1 लाख से ₹5 लाख तक का बिना गारंटी और बिना ब्याज (0% प्रभावी ब्याज) का व्यापारिक ऋण प्रदान किया जाता है। योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक लाभार्थी महिला परिवार की वार्षिक आमदनी कम से कम ₹1 लाख (प्रति माह लगभग ₹8,500 से ₹10,000) हो सके। योजना में ब्यूटी पार्लर, सिलाई केंद्र, मशरूम की खेती, डेयरी, मसाला पिसाई से लेकर नमो ड्रोन दीदी तक की आधुनिक ट्रेनिंग और उपकरण सहायता दी जाती है।
लखपति दीदी योजना क्या है: ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आजादी की राह
भारत के गांवों और कस्बों में रहने वाली महिलाओं के भीतर हुनर और मेहनत करने की ताकत कभी कम नहीं रही। वे घर-परिवार संभालने के साथ-साथ खेतों में काम करती हैं, पशुओं की देखभाल करती हैं और स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे हस्तशिल्प और खाद्य उत्पाद तैयार करती हैं। लेकिन सही मार्गदर्शन, तकनीकी ट्रेनिंग और सबसे महत्वपूर्ण—शुरुआती पूंजी (पैसे) की कमी के चलते उनकी मेहनत का सही मोल उन्हें नहीं मिल पाता था। वे केवल दैनिक मजदूरी या घर-खर्च तक ही सीमित रह जाती थीं।
इसी जमीनी हकीकत को बदलने के लिए केंद्र सरकार ने 'लखपति दीदी योजना' की शुरुआत की है। सरकार का लक्ष्य देश के विभिन्न राज्यों में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3 करोड़ ग्रामीण दीदियों को 'लखपति' बनाना है। यहाँ 'लखपति' का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते में एक साथ ₹1 लाख डाल दिए जाएंगे, बल्कि इसका सीधा मतलब यह है कि उन्हें ऐसी व्यावसायिक ट्रेनिंग, सरकारी लोन और बाजार की सुविधा दी जाएगी जिससे उनकी खुद की स्थायी कमाई हर साल ₹1,00,000 से अधिक हो सके। यानी महीने के कम से कम ₹8,000 से ₹10,000 की पक्की आय उनके अपने हाथ में आए, ताकि उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
ऋण और वित्तीय सहायता: ₹1 लाख से ₹5 लाख तक का लोन कैसे मिलता है?
किसी भी महिला के मन में नया काम शुरू करते समय सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि 'सामान खरीदने और दुकान या मशीन लगाने का पैसा कहाँ से आएगा?' लखपति दीदी योजना में वित्तीय सहायता का एक बहुत ही पारदर्शी और सुरक्षित ढांचा तैयार किया गया है:
1. सामुदायिक निवेश कोष (Community Investment Fund - CIF)
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत सबसे पहले स्वयं सहायता समूह के ग्राम संगठन को सामुदायिक कोष से कम ब्याज दर पर पूंजी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे महिलाएं अपने छोटे-मोटे घरेलू उद्योग शुरू कर सकें।
2. बैंकों से सीधे ₹1 लाख से ₹5 लाख का क्रेडिट लिंकेज
जब महिला का स्वयं सहायता समूह कम से कम छह महीने या एक साल पुराना हो जाता है और समूह के सभी सदस्य समय पर बचत और आंतरिक ऋण चुकाते हैं, तो बैंक सीधे समूह को या व्यक्तिगत महिला को ₹1 लाख से ₹5 लाख तक का आसान बिजनेस लोन स्वीकृत करते हैं।
3. ब्याज अनुदान (Interest Subvention - 0% इफेक्टिव ब्याज)
सामान्य तौर पर अगर कोई व्यक्ति बैंक से बिजनेस लोन लेता है, तो उसे 11% से 14% तक का भारी ब्याज चुकाना पड़ता है। लेकिन लखपति दीदी योजना के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकारें महिलाओं को भारी ब्याज सब्सिडी देती हैं। समय पर किस्त चुकाने वाली महिलाओं को 7% से लेकर शून्य प्रतिशत (0%) तक के बेहद कम या बिल्कुल मुफ्त ब्याज पर पूंजी मिल जाती है।
काम की बात (Pro-Tip): इस योजना में किसी भी महिला को अपने घर के जेवर, जमीन के कागज या कोई संपत्ति बैंक में गिरवी (Collateral) नहीं रखनी पड़ती है। यह पूरी तरह 'बिना गारंटी' (Collateral-Free Loan) मिलने वाला ऋण होता है, जिसकी गारंटी स्वयं सहायता समूह की सामाजिक साख और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा दी जाती है।
पात्रता और शर्तें: कौन सी महिलाएं इस योजना के लिए पात्र हैं?
लखपति दीदी योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ बुनियादी और सरल पात्रता शर्तें तय की हैं:
- भारतीय नागरिकता व ग्रामीण निवास: महिला भारत की मूल निवासी होनी चाहिए और उसका परिवार संबंधित ग्राम पंचायत या नगर निकाय क्षेत्र में स्थायी रूप से रहता हो।
- स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्यता: सबसे अनिवार्य शर्त यह है कि महिला किसी मान्यता प्राप्त स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) की सक्रिय सदस्य होनी चाहिए। अगर आप अभी तक किसी समूह से नहीं जुड़ी हैं, तो अपनी ग्राम पंचायत में जाकर नया समूह बना सकती हैं या पुराने समूह में शामिल हो सकती हैं।
- पंचसूत्र का पालन: महिला का समूह नियमित साप्ताहिक बैठकें करता हो, नियमित बचत करता हो, आंतरिक लेन-देन करता हो, समय पर ऋण की वापसी करता हो और अपनी बही-खाता (रजिस्टर) सही रखता हो।
- उम्र सीमा: आवेदक महिला की उम्र सामान्यतः 18 वर्ष से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- काम करने की इच्छा: महिला किसी न किसी उत्पादक आजीविका गतिविधि (खेती, पशुपालन, सिलाई, खाद्य निर्माण या डिजिटल सेवा) को सीखने और करने के लिए तैयार हो।
टॉप 6 बिजनेस आइडिया: लखपति दीदी बनकर महिलाएं क्या काम कर सकती हैं?
अक्सर महिलाओं को यह समझ नहीं आता कि लोन लेकर वे कौन सा काम शुरू करें जिसमें घाटा न हो और पक्की कमाई हो। लखपति दीदी योजना के तहत ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा निम्नलिखित 6 क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण और मशीनरी दी जा रही है:
1. कृषि और उन्नत बागवानी (Mushroom Farming & Organic Vegetables)
कम जगह में झोपड़ी या कमरे के भीतर बटन और ढींगरी मशरूम की खेती करना, वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) तैयार करना और पॉलीहाउस में बेमौसमी हरी सब्जियां उगाना। इसमें ₹30,000 से ₹50,000 की पूंजी से महीने के ₹12,000 से ₹18,000 की शुद्ध कमाई आसानी से हो जाती है।
2. पशुपालन और उन्नत डेयरी (Goat Farming & Cow/Buffalo Milk)
उन्नत नस्ल की 5 से 10 बकरियां पालना या दो अच्छी दुधारू गाय/भैंस रखकर दूध और घी की स्थानीय स्तर पर आपूर्ति करना। सरकारी दुग्ध समितियों में दूध बेचकर हर 10 दिन में सीधे खाते में भुगतान मिल जाता है।
3. सिलाई, बुनाई और स्कूल यूनिफॉर्म निर्माण केंद्र
गांव या कस्बे की 4-5 महिलाएं मिलकर 5 इलेक्ट्रिक सिलाई मशीनें लगाती हैं और सरकारी स्कूलों के बच्चों की यूनिफॉर्म, आंगनवाड़ी के पर्दे और स्थानीय बाजार के लिए रेडीमेड कपड़े सिलती हैं। सरकारी स्कूलों की ड्रेस का कॉन्ट्रैक्ट स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता से दिया जाता है।
4. खाद्य प्रसंस्करण (मसाला पिसाई, पापड़, आचार व सत्तू पैकिंग)
हल्दी, धनिया, मिर्च की शुद्ध पिसाई करने वाली छोटी चक्की लगाना, पारंपरिक आम व नींबू का अचार बनाना और स्थानीय बाजरा/चना सत्तू तैयार करके सुंदर पैकिंग में बेचना। शुद्धता के कारण गांव और शहरों में इसकी भारी मांग है।
5. बैंक सखी व डिजिटल सेवा केंद्र (BC Sakhi & DigiPay)
पढ़ी-लिखी महिलाएं 'बैंक सखी' या 'डिजीपे सखी' बनकर गांव के बुजुर्गों और मजदूरों को उनके घर पर या पंचायत भवन में अंगूठा लगाकर पेंशन और पीएम किसान का पैसा निकाल कर देती हैं। हर ट्रांजेक्शन पर बैंक से उन्हें आकर्षक कमीशन मिलता है।
6. सौंदर्य और वेलनेस (गांव में ब्यूटी पार्लर व कॉस्मेटिक शॉप)
शादी-ब्याह के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में भी ब्यूटी पार्लर और सिलाई-श्रृंगार की जबरदस्त मांग है। आजीविका मिशन द्वारा ब्यूटीशियन का फ्री डिप्लोमा करवाकर किट उपलब्ध कराई जाती है।
नमो ड्रोन दीदी और अन्य तकनीकी प्रशिक्षण सुविधाएं
लखपति दीदी योजना का सबसे आधुनिक और चर्चित रूप है—'नमो ड्रोन दीदी'। केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कृषि ड्रोन पायलट बनाने का जिम्मा उठाया है।
इसमें चयनित महिलाओं को 15 दिन की आवासीय ट्रेनिंग (जिसमें 5 दिन ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण और 10 दिन खेती में कीटनाशक व नैनो यूरिया छिड़काव का व्यावहारिक अभ्यास) बिल्कुल मुफ्त दी जाती है। सरकार की तरफ से समूह को लगभग ₹8 लाख मूल्य का अत्याधुनिक ड्रोन, चार्जर, बैटरी और जनरेटर 80 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी पर दिया जाता है। एक ड्रोन दीदी रोजाना 20 से 30 एकड़ खेत में आधे घंटे में नैनो यूरिया का छिड़काव करके प्रतिदिन ₹1,500 से ₹2,500 की सीधी कमाई कर रही हैं।
सावधानी (Warning Alert): सोशल मीडिया पर कई फर्जी वेबसाइटें और व्हाट्सएप ग्रुप्स 'लखपति दीदी योजना में घर बैठे ₹5 लाख का चेक पाएं' के नाम पर ₹500 या ₹1,000 की रजिस्ट्रेशन फीस मांगते हैं। सावधान रहें! लखपति दीदी योजना का कोई भी डायरेक्ट प्राइवेट ऑनलाइन फॉर्म नहीं है और न ही सरकार कोई रजिस्ट्रेशन फीस लेती है। यह योजना पूरी तरह आपके स्थानीय स्वयं सहायता समूह और ब्लॉक कार्यालय के जरिए ही चलती है।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेजों की पूरी चेकलिस्ट
लखपति दीदी योजना में अपना आवेदन जमा करने से पहले निम्नलिखित दस्तावेजों की फोटोकॉपी तैयार रखें:
- आधार कार्ड: आवेदक महिला का वैध आधार कार्ड (जिसमें जन्मतिथि और नाम सही हो)।
- निवास प्रमाण पत्र: राशन कार्ड, वोटर आईडी या ग्राम प्रधान/सरपंच द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र।
- बैंक पासबुक की कॉपी: महिला का स्वयं का बैंक खाता (जो आधार और एनपीसीआई से लिंक हो)। साथ ही स्वयं सहायता समूह के बैंक खाते की पासबुक की प्रति।
- स्वयं सहायता समूह का सदस्यता प्रमाण: समूह के रजिस्टर में महिला का नाम और समूह की मोहर युक्त प्रस्ताव पत्र।
- पासपोर्ट साइज फोटो: 4 हालिया रंगीन पासपोर्ट साइज तस्वीरें।
- बिजनेस प्लान या कार्य योजना प्रपत्र: महिला क्या काम करना चाहती है और उसमें कितनी लागत आएगी, इसका एक सामान्य फॉर्म (जिसे ब्लॉक कोऑर्डिनेटर भरवाता है)।
केस स्टडी: गांव की अनीता देवी ने सिलाई केंद्र से कैसे हासिल की ₹15,000 की मासिक आय?
लखपति दीदी योजना की जमीनी सफलता को समझने के लिए मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के एक छोटे से गांव की अनीता बाई का उदाहरण सबसे सटीक है।
अनीता बाई के पति खेती में बटाईदार के रूप में काम करते थे और परिवार की मासिक कमाई मुश्किल से ₹6,000 हो पाती थी। दो बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना एक निरंतर संघर्ष था। साल 2024 में अनीता जी ने अपने गांव के 'मां शारदा स्वयं सहायता समूह' की सदस्यता ली। उन्होंने हर हफ्ते ₹30 की बचत जमा की और समूह से ₹15,000 का पहला छोटा लोन लेकर एक पुरानी सिलाई मशीन खरीदी।
जब उन्होंने 6 महीने तक समय पर पूरी किस्त चुका दी, तो ब्लॉक आजीविका मिशन के कोऑर्डिनेटर ने उनकी मेहनत को देखते हुए लखपति दीदी योजना के तहत बैंक से ₹1.5 लाख का बिजनेस लोन स्वीकृत कराया। इस पैसे से अनीता जी ने तीन आधुनिक मोटर चालित सिलाई मशीनें और एक पिको-फॉल मशीन खरीदी। उन्होंने अपने समूह की दो अन्य महिलाओं को भी अपने साथ काम पर रखा। आज अनीता जी स्थानीय कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय और तीन निजी स्कूलों की यूनिफॉर्म सिलने का अनुबंध पूरा करती हैं। सारे खर्चे काटकर अनीता जी को हर महीने औसतन ₹14,000 से ₹16,000 की शुद्ध बचत होती है। आज उनका परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है।
ऋण वापसी (EMI Repayment) के नियम और समय-सीमा:
बैंक से मिलने वाले ₹1 लाख से ₹5 लाख के बिजनेस लोन की वापसी के लिए महिलाओं को 24 महीने से लेकर 48 महीने (2 से 4 साल) का लचीला समय दिया जाता है। काम शुरू करने के शुरुआती तीन महीने में केवल ब्याज या सांकेतिक किस्त देनी होती है (जिन्हें मोरटोरियम अवधि कहा जाता है), ताकि जब तक बिजनेस से कमाई शुरू न हो, महिला पर किस्त का कोई मानसिक दबाव न बने।
लखपति दीदी योजना के विभिन्न घटकों का 5-कॉलम चार्ट
नीचे दी गई तालिका में लखपति दीदी योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता, पात्रता और संबंधित विभागों का पूरा ब्यौरा दिया गया है:
| योजना का घटक | उपलब्ध वित्तीय सहायता / लोन | पात्रता व मुख्य शर्तें | प्रशिक्षण व सहायता संस्था | आवेदन का सही स्थान / माध्यम |
|---|---|---|---|---|
| आरंभिक सामुदायिक पूंजी (CIF) | ₹20,000 से ₹50,000 तक लघु ऋण | स्वयं सहायता समूह की नियमित सदस्य, न्यूनतम 3 माह पुरानी बचत | ग्राम संगठन (Village Organization) | समूह की साप्ताहिक बैठक में प्रस्ताव पारित कराएं। |
| बैंक क्रेडिट लिंकेज (बिजनेस लोन) | ₹1,00,000 से ₹5,00,000 (बिना गारंटी) | समूह की संतोषजनक ग्रेडिंग, नियमित पंचसूत्र पालन | राष्ट्रीयकृत बैंक व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) | बैंक शाखा व ब्लॉक मिशन प्रबंधन इकाई (BMMU)। |
| नमो ड्रोन दीदी पहल | ₹8 लाख का ड्रोन (80% सरकारी ग्रांट) | 18 से 40 वर्ष की कम से कम 10वीं पास महिला, SHG सदस्य | इफको (IFFCO) व नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) | जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) व कृषि विज्ञान केंद्र। |
| बैंक सखी व डिजीपे | माइक्रो-एटीएम डिवाइस व प्रति निकासी कमीशन | 10वीं पास, स्मार्टफ़ोन चलाने में सक्षम महिला | इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) व प्रमुख बैंक | ब्लॉक आजीविका मिशन कोऑर्डिनेटर। |
| कृषि व पशुपालन उद्यम | ₹50,000 से ₹2 लाख तक यूनिट सहायता | पशु शेड निर्माण व चारा प्रबंधन में रुचि | नाबार्ड (NABARD) व पशुपालन विभाग | पशु चिकित्सा अधिकारी व ब्लॉक NRLM टीम। |
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: लखपति दीदी फॉर्म भरकर लोन कैसे प्राप्त करें?
यदि आप या आपके परिवार की कोई महिला लखपति दीदी योजना के तहत लाभ उठाना चाहती है, तो नीचे दिए गए पांच आसान चरणों का पालन करें:
- स्टेप 1 (चरण 1): स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ें या नया समूह बनाएं: सबसे पहले अपने गांव में चल रहे स्वयं सहायता समूह की बैठक में जाएं और उसकी सदस्य बनें। यदि गांव में समूह नहीं है, तो अपने पड़ोस की 10 से 12 महिलाओं को एकत्र करके ग्राम प्रधान या ब्लॉक के आजीविका मिशन कार्यालय (BMMU) में जाकर नया समूह पंजीकृत कराएं।
- स्टेप 2 (चरण 2): साप्ताहिक बचत और आंतरिक लेन-देन शुरू करें: समूह के खाते में हर हफ्ते ₹20 से ₹50 की नियमित बचत जमा करें। कम से कम छह महीने तक समूह के नियमों का ईमानदारी से पालन करें ताकि आपके समूह की अच्छी 'क्रेडिट रेटिंग' बन सके।
- स्टेप 3 (चरण 3): आजीविका कार्य योजना (Livelihood Plan) चुनें: तय करें कि आप कौन सा बिजनेस करना चाहती हैं—जैसे सिलाई केंद्र, परचून दुकान, बकरी पालन या मसाला पिसाई। ब्लॉक कोऑर्डिनेटर की मदद से अपना बिजनेस प्रपोजल तैयार करें।
- स्टेप 4 (चरण 4): ग्राम संगठन और ब्लॉक में ऋण आवेदन जमा करें: समूह की मासिक बैठक में अपना लोन प्रस्ताव रखें। समूह की सहमति के बाद ब्लॉक मिशन मैनेजर (BMM) आपके फॉर्म को सत्यापित करके संबंधित बैंक शाखा को अग्रेषित करेगा।
- स्टेप 5 (चरण 5): ट्रेनिंग लें और बैंक खाते में लोन प्राप्त करें: ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) में जाकर 7 से 15 दिन की निशुल्क तकनीकी ट्रेनिंग पूरी करें। इसके बाद बैंक सीधे आपके स्वयं सहायता समूह के खाते में लोन की राशि ट्रांसफर कर देगा और आप अपनी मशीनें व कच्चा माल खरीद कर काम शुरू कर सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs)
1. क्या लखपति दीदी योजना में सरकार सीधे बैंक खाते में ₹1 लाख मुफ्त देती है?
नहीं, यह बिल्कुल गलत धारणा है। सरकार कोई मुफ्त नकद खैरात नहीं बांटती है। सरकार महिलाओं को अपना खुद का काम शुरू करने के लिए सस्ती और बिना ब्याज वाली पूंजी (लोन), मुफ्त ट्रेनिंग और मशीनरी उपलब्ध कराती है, ताकि महिलाएं अपने दम पर काम करके हर साल ₹1 लाख से अधिक की स्थायी कमाई कर सकें।
2. अगर कोई महिला पहले से किसी स्वयं सहायता समूह में नहीं है, तो क्या वह आवेदन कर सकती है?
सीधे व्यक्तिगत तौर पर आवेदन करने का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन वह महिला तुरंत अपने गांव के किसी भी सक्रिय स्वयं सहायता समूह में शामिल हो सकती है, या 10 महिलाओं को जोड़कर नया समूह पंजीकृत करवा सकती है। समूह से जुड़ते ही वह इस योजना के सभी लाभों की हकदार हो जाती है।
3. क्या लखपति दीदी योजना का कोई ऑनलाइन फॉर्म वेबसाइट पर उपलब्ध है?
नहीं, आम जनता के लिए कोई डायरेक्ट ऑनलाइन फॉर्म भरने का पोर्टल नहीं है। इसका रजिस्ट्रेशन पूरी तरह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के विभागीय सॉफ्टवेयर पर केवल ब्लॉक मिशन प्रबंधकों (BMM) और ग्राम संगठन के माध्यम से ही दर्ज किया जाता है। किसी भी फर्जी ऑनलाइन वेबसाइट के चक्कर में न पड़ें।
4. इस योजना में मिलने वाले लोन पर कितना ब्याज देना होता है?
सरकार की ब्याज अनुदान (Interest Subvention Scheme) के कारण समय पर मासिक किस्त चुकाने वाली महिलाओं को यह लोन 7% या कई राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान) में राज्य सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी के कारण 0% (शून्य प्रतिशत) प्रभावी ब्याज पर मिल जाता है।
5. नमो ड्रोन दीदी बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
नमो ड्रोन दीदी बनने के लिए महिला का किसी स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य होना, उसकी उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होना और कम से कम 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है, ताकि वह ड्रोन के रिमोट कंट्रोल और जीपीएस नेविगेशन को आसानी से समझ सके।
6. अगर लोन लेने के बाद बिजनेस में घाटा हो जाए तो क्या होगा?
ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को केवल लोन देकर नहीं छोड़ता, बल्कि उनके उत्पादों की बिक्री के लिए 'सरस मेले', सरकारी कैंटीन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (जैसे GeM पोर्टल) से जोड़ता है। साथ ही पशुपालन जैसी गतिविधियों में पशु का सरकारी बीमा भी कराया जाता है ताकि किसी अनहोनी पर आर्थिक सुरक्षा मिल सके।