भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा 1 अक्टूबर को जारी अंतिम संकलित बुलेटिन के अनुसार 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाला 2026 का चार महीने का दक्षिण-पश्चिम मानसून आधिकारिक तौर पर 12.6% के घाटे (Deficit) के साथ समाप्त हो गया है। इस वर्ष देश भर में कुल 759.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि 50 वर्षों का दीर्घकालिक औसत (LPA) 868.6 मिमी है। उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों से मॉनसून की वापसी की रेखा तेजी से आगे बढ़ रही है और अक्टूबर का महीना अधिकांश भागों में शुष्क व अपेक्षाकृत गर्म रहने का पूर्वानुमान है।
कौन-से राज्य सबसे सूखे रहे और कहां हुई अच्छी बारिश?
- घाटे वाले क्षेत्र: पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्से तथा उत्तर-पश्चिम भारत के चुनिंदा कृषि बेल्ट में वर्षा सामान्य से 15% से 20% तक कम दर्ज की गई। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगस्त माह के दौरान सूखे जैसे हालात रहे।
- संतोषजनक वर्षा: मध्य भारत और तटीय प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में सितंबर के पहले पखवाड़े में बने कम दबाव के क्षेत्रों के कारण जलाशयों में जलस्तर संतोषजनक स्थिति में पहुंच गया।
उत्तर-पश्चिम भारत से मॉनसून की विदाई का ताज़ा स्टेटस
एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी हवाओं के स्थापित होने से पश्चिमी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर से बादलों का पूरी तरह सफाया हो चुका है। वातावरण में आर्द्रता (Humidity) 85% से घटकर 40-45% पर आ गई है, जो मॉनसून की औपचारिक विदाई का स्पष्ट संकेत है।
अक्टूबर 2026 का मौसम: क्या ठंड समय से पहले आएगी?
आईएमडी के महानिदेशक द्वारा जारी मासिक आउटलुक के अनुसार:
- दिन का तापमान: अक्टूबर के पहले 20 दिनों में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 1 से 2 डिग्री सेल्सियस ऊपर रहने की संभावना है। इसे आम बोलचाल में 'अक्टूबर हीट' (October Heat) कहा जाता है।
- रात का मौसम: आसमान साफ रहने के कारण रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी और भोर के समय हल्की गुलाबी ठंडक का अहसास होगा। तेज सर्दी के लिए नवंबर तक इंतजार करना होगा।
रबी फसलों की बुवाई पर इसका क्या असर पड़ेगा?
मानसून में 12% की कमी के कारण गैर-सिंचित क्षेत्रों में मिट्टी की ऊपरी सतह तेजी से सूख रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे तोरिया और अगेती सरसों की बुवाई के लिए पलेवा (Pre-sowing irrigation) अवश्य करें। जिन क्षेत्रों में नलकूप या नहरों का पानी उपलब्ध है, वहां रबी की मुख्य फसलों (गेहूं, चना) के लिए जल प्रबंधन योजना समय पूर्व तैयार कर लेनी चाहिए।