देश के 1.4 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड जीएसटी करदाता, छोटे-मझोले कारोबारी (MSMEs), चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs), टैक्स कंसल्टेंट्स और कॉरपोरेट डायरेक्टर्स।
विशेष अनुमति याचिका (क्रिमिनल) - जीएसटी गिरफ्तारी शक्तियां व धारा 69 की संवैधानिक वैधता पर ऐतिहासिक निर्णय।
1. सुप्रीम कोर्ट का फैसला: जीएसटी अधिकारियों की धारा 69 और 132 के तहत गिरफ्तारी शक्तियों पर अंकुश
जीएसटी लागू होने के बाद से ही व्यापारियों की सबसे बड़ी पीड़ा यह रही थी कि विभाग के कुछ अधिकारी मामूली तकनीकी गलतियों या सप्लायर द्वारा टैक्स न भरने के मामलों में भी सीधे जेल भेजने की धमकी देते थे। सर्च और सर्वे के दौरान रात के 2-2 बजे तक दफ्तर में बैठाकर व्यापारियों से ब्लैंक चेक या दबाव में DRC-03 के जरिए करोड़ों रुपये जमा करवा लिए जाते थे।
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश ने कर विभाग के इस 'इंस्पेक्टर राज' की कमर तोड़ दी है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया कि भारत एक कानून के शासन वाला लोकतंत्र है, जहाँ जब तक किसी अपराध की ठोस जांच और निर्धारण न हो, तब तक किसी भी व्यापारी को जेल में नहीं ठूंसा जा सकता।
2. जब तक असेसमेंट पूरा न हो और ₹5 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी साबित न हो, तब तक गिरफ्तारी नहीं
यदि कोई व्यापारी विभाग के नोटिस से असहमत है, तो कानून उसे अपीलीय प्राधिकारी (Commissioner Appeals) और जीएसटी अपीलीय अधिकरण (GSTAT) में जाने का अधिकार देता है। असेसमेंट की इस पूरी प्रक्रिया को दरकिनार करके सीधे एफआईआर दर्ज करना या जेल भेजना अब पूरी तरह गैरकानूनी और कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) माना जाएगा।
3. 'कारण दर्ज करने' (Reasons to Believe) की लिखित अनिवार्यता और मजिस्ट्रेट के सामने पेशी
4. फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (Fake ITC) और बोगस बिलिंग के मामलों में क्या नियम रहेंगे?
5. व्यापारियों के लिए आत्मरक्षा: यदि जीएसटी अधिकारी धमकाएं तो क्या कानूनी अधिकार हैं?
6. रेड (Search & Seizure) के दौरान जबरन टैक्स वसूली पर सीबीआईसी (CBIC) की नई रोक
7. टैक्सपेयर सहायता: बैंक खाता फ्रीज होना और इनपुट टैक्स क्रेडिट ब्लॉक होने पर क्या करें?
समाधान: धारा 83 के तहत बैंक खाता अटैचमेंट केवल 1 साल तक ही वैध रह सकता है और इसके लिए कमिश्नर की लिखित राय जरूरी है। तुरंत फॉर्म DRC-22A के तहत 7 दिन में आपत्ति दर्ज करें या हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करें; सुप्रीम कोर्ट ने 'राधा कृष्णन इंडस्ट्रीज' केस में माना है कि रनिंग बिजनेस का खाता फ्रीज करना असंवैधानिक है।
समाधान: नियम 86A के तहत आईटीसी ब्लॉक करने से पहले अधिकारी को ठोस आधार बताना होगा। खरीदार यदि बैंक पेमेंट का प्रमाण, ई-वे बिल और लॉरी रसीद (Bilty) पेश कर दे, तो विभाग को सप्लायर के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी, न कि खरीदार का इनपुट रोकना होगा।
समाधान: जीएसटी पोर्टल पर अपना मोबाइल नंबर और ईमेल हमेशा अपडेट रखें। यदि समन का पता न चलने पर अधिकारी अरेस्ट की धमकी दें, तो तुरंत उपस्थित होकर कारण बताएं कि पूर्व समन की तामील नहीं हुई थी; जानबूझकर गैर-हाजिरी न होने पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती।
समाधान: बिल्कुल! सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यदि किसी व्यापारी को दुर्भावनापूर्ण या गैरकानूनी गिरफ्तारी की आशंका है, तो वह सत्र न्यायालय (Sessions Court) या उच्च न्यायालय (High Court) में सीआरपीसी की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकता है।
8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. जीएसटी में कौन से अपराध गैर-जमानती (Non-Bailable) होते हैं?
सीजीएसटी अधिनियम की धारा 132(5) के अनुसार केवल वही अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होते हैं जिनमें: (1) बिना माल सप्लाई किए फर्जी इनवॉइस जारी करना, (2) फर्जी बिलों पर अवैध आईटीसी का लाभ लेना, और (3) ग्राहकों से वसूला गया टैक्स सरकार को न जमा कराना - और इन सभी मामलों में कर चोरी की राशि ₹5 करोड़ से अधिक होनी चाहिए।
Q2. क्या ₹5 करोड़ से कम के टैक्स विवाद में पुलिस या जीएसटी अधिकारी गिरफ्तार कर सकते हैं?
नहीं। ₹5 करोड़ से कम की राशि के सभी मामले कानूनन जमानती (Bailable) और गैर-संज्ञेय होते हैं। यदि अधिकारी हिरासत में भी लेते हैं, तो उन्हें बिना किसी मजिस्ट्रेट के मौके पर ही निजी मुचलके (Bail Bond) पर रिहा करना वैधानिक रूप से बाध्यकारी है।
Q3. क्या जीएसटी अधिकारी के पास किसी भी समय बिना वारंट के गिरफ्तार करने की शक्ति है?
नहीं। धारा 69 के तहत केवल प्रधान आयुक्त या आयुक्त स्तर के वरिष्ठ अधिकारी के लिखित अनुमोदन (Sanction Order) और कारणों को रिकॉर्ड पर दर्ज करने के बाद ही अधिकृत अधिकारी गिरफ्तारी कर सकता है। कोई भी सब-इंस्पेक्टर या सुपरिंटेंडेंट अपनी मर्जी से किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकता।
Q4. पूछताछ के दौरान यदि अधिकारी गाली-गलौज या मारपीट करें तो कहाँ शिकायत करें?
यह कानून का गंभीर उल्लंघन है। आप तुरंत स्थानीय मजिस्ट्रेट, संबंधित मुख्य आयुक्त (Chief Commissioner), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के समक्ष शपथ पत्र के साथ औपचारिक आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं।