केंद्र सरकार का स्पेशल कैंपेन 6.0 (Special Campaign 6.0) क्या है?
भारतीय सरकारी दफ्तरों की पारंपरिक छवि अक्सर धूल भरी अलमारियों, छतों तक लदे पीले कागजी बस्तों, गलियारों में पड़े जंग लगे लोहे के कबाड़, खराब पड़े कंप्यूटर मॉनिटर्स और फाइलों के ढेर में दबे बाबुओं की रही है। इस पुरानी कार्यप्रणाली के कारण न केवल कार्यस्थल का वातावरण दमघोंटू और नकारात्मक बन जाता था, बल्कि करोड़ों रुपये मूल्य की बहुमूल्य सरकारी जमीन और कमरे अनुपयोगी कचरे के गोदाम बनकर रह जाते थे। इसके साथ ही, आम नागरिकों की पेंशन, ग्रेच्युटी या पासपोर्ट से जुड़ी फाइलें महीनों तक फाइलों के अंबार में गुम हो जाती थीं।
इस कार्य-संस्कृति में 360-डिग्री का संस्थागत बदलाव लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय के तहत प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public Grievances - DARPG) ने 'स्पेशल कैंपेन 6.0' (Special Campaign 6.0) की औपचारिक घोषणा की है। यह अभियान हर वर्ष की भांति 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से 31 अक्टूबर (राष्ट्रीय एकता दिवस) 2026 तक देश के सभी 84 केंद्रीय मंत्रालयों, स्वायत्त संस्थाओं, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, रक्षा प्रतिष्ठानों, रेलवे स्टेशनों और डाकघरों में युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है।
यह अभियान केवल एक औपचारिक झाड़ू लगाने का उपक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत के पूरे प्रशासनिक तंत्र को 'मिनिमलिस्ट, पेपरलेस और सिटिजन-सेंट्रिक' बनाने का एक सुपरिभाषित संगठनात्मक सुधार आंदोलन है।
सरकारी दफ्तरों में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (e-Waste) का वैज्ञानिक निस्तारण और स्क्रैप से आय (Waste to Wealth)
डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ ही पिछले एक दशक में सरकारी कार्यालयों में बड़े पैमाने पर डेस्कटॉप, लैपटॉप, सीआरटी मॉनिटर्स, लेजर प्रिंटर्स, फैक्स मशीनें, यूपीएस बैटरियां और सर्वर खरीदे गए थे। समय बीतने के साथ इनमें से लाखों उपकरण तकनीकी रूप से अप्रचलित (Obsolete) या पूरी तरह खराब हो गए। यदि इन उपकरणों को सामान्य कबाड़ में फेंक दिया जाए, तो इनमें मौजूद सीसा (Lead), पारा (Mercury) और कैडमियम जैसे जहरीले भारी तत्व भूजल और पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित कर सकते हैं।
स्पेशल कैंपेन 6.0 के अंतर्गत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित e-Waste (Management) Rules 2022 का कड़ाई से पालन करते हुए सभी अप्रचलित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण किया जा रहा है।
ई-कचरे का तकनीकी वर्गीकरण एवं सुरक्षित प्रबंधन:
- शेड्यूल I आईटी एवं दूरसंचार उपकरण (ITEW): मेनफ्रेम कंप्यूटर, मिनी कंप्यूटर, पर्सनल कंप्यूटर, लैपटॉप, नोटपैड, प्रिंटर, कॉपियर मशीन और ई-टेलीफोन। इन उपकरणों से मेमोरी चिप्स और सीपीयू को अलग करके उनके प्लास्टिक और कीमती धातुओं (सोना, चांदी, तांबा) को निकालने के लिए अधिकृत रिफाइनरीज को भेजा जाता है।
- पावर बैकअप एवं यूपीएस बैटरियां: लेड-एसिड (Lead-Acid) और लिथियम-आयन बैटरियों को 'बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2022' के तहत केवल पंजीकृत बैटरी रीसाइक्लर्स को ही सौंपा जाता है ताकि तेजाब और सीसे का रिसाव मृदा में न हो सके।
- डेटा वाइपिंग और साइबर सुरक्षा (DoD 5220.22-M Standard): हार्ड डिस्क और मेमोरी स्टोरेज में मौजूद संवेदनशील सरकारी फाइलों को अमेरिकी रक्षा-मानक और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के विनिर्देशों के अनुसार बहु-स्तरीय ओवरराइटिंग (Cryptographic Wipe or Degaussing) द्वारा स्थायी रूप से नष्ट किया जाता है ताकि कोई भी गोपनीय डेटा लीक न हो सके।
कोयला एवं खान मंत्रालय का मॉडल: खदानों के कचरे से हरित पर्यटन स्थल (Eco-Parks)
स्पेशल कैंपेन के तहत केवल फाइलों की सफाई ही नहीं की जा रही है, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा भारी औद्योगिक स्क्रैप के निस्तारण में भी कीर्तिमान स्थापित किए जा रहे हैं। कोयला मंत्रालय (Ministry of Coal) और इसके अधीन कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), एनएलसी इंडिया (NLCIL) और डब्ल्यूसीएल (WCL) ने इस दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है:
- भारी खनन मशीनों (Heavy Earth Moving Machinery - HEMM) का स्क्रैपिंग: खदानों में दशकों से बंद पड़े पुराने डंपर्स, बुलडोजर्स, ड्रैगलाइन और रेल पटरियों के लोहे के कबाड़ को पारदर्शी तरीके से नीलाम करके अकेले कोयला क्षेत्र ने ₹250 करोड़ से अधिक का राजस्व कमाया है।
- कबाड़ से बने ईको-पार्क (Scrap to Sculpture): अनुपयोगी लोहे की चेन, गियर्स और पाइपों को रिसाइकिल करके सुंदर मूर्तियां, बच्चों के झूले और फव्वारे बनाए गए हैं। बंद पड़ी खदानों की ओवरबर्डन (मिट्टी और चट्टानों) को समतल करके 35 से अधिक खूबसूरत 'ईको-पार्क' और पर्यटन स्थल विकसित किए गए हैं।
- खदान के पानी का शोधन (Mine Water Utilization): खदानों से निकलने वाले भारी जल को आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स से शुद्ध करके आसपास के सैकड़ों गांवों में सिंचाई और स्वच्छ पेयजल के रूप में मुफ्त वितरित किया जा रहा है।
स्पेशल कैंपेन 1.0 से 6.0 तक की ऐतिहासिक प्रगति यात्रा
| अभियान का चरण (Campaign Edition) | आयोजन वर्ष | अर्जित राजस्व (Scrap Revenue) | खाली कराया गया ऑफिस स्पेस | निस्तारित भौतिक फाइलें |
|---|---|---|---|---|
| स्पेशल कैंपेन 1.0 | अक्टूबर 2021 | ₹62.54 करोड़ | 12 लाख वर्ग फुट | 13.7 लाख फाइलें |
| स्पेशल कैंपेन 2.0 | अक्टूबर 2022 | ₹371.40 करोड़ | 89.8 लाख वर्ग फुट | 37.3 लाख फाइलें |
| स्पेशल कैंपेन 3.0 | अक्टूबर 2023 | ₹557.00 करोड़ | 1.54 करोड़ वर्ग फुट | 50.2 लाख फाइलें |
| स्पेशल कैंपेन 4.0 & 5.0 | 2024 - 2025 | ₹1,163 करोड़ (संचयी) | 2.24 करोड़ वर्ग फुट | 68.5 लाख फाइलें |
| स्पेशल कैंपेन 6.0 (वर्तमान) | अक्टूबर 2026 (लक्ष्य) | ₹1,500+ करोड़ अनुमानित | 3.0 करोड़ वर्ग फुट संचयी | 100% ई-ऑफिस 7.0 संतृप्ति |
पुरानी फाइलों व रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण और ऑफिस स्पेस मॉडर्नाइजेशन अभियान
दफ्तरों में फाइलों का प्रबंधन सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी है। स्पेशल कैंपेन 6.0 में राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India - NAI) और DARPG के 'पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट 1993' के दिशानिर्देशों के तहत भौतिक फाइलों की त्रि-स्तरीय समीक्षा (Three-tier Record Review) की जा रही है:
| फाइलों की श्रेणी (Category of Records) | निर्धारित कार्यप्रणाली एवं नियम | परिणाम एवं प्रभाव |
|---|---|---|
| श्रेणी 'क' (Category A - स्थायी महत्व) | ऐतिहासिक, संवैधानिक और राष्ट्रीय नीति से जुड़े दस्तावेज | हाई-रेजोल्यूशन डिजिटल स्कैनिंग के बाद मूल फाइल राष्ट्रीय अभिलेखागार को सुपुर्द |
| श्रेणी 'ख' (Category B - 10-25 वर्ष संरक्षण) | कर्मचारी सेवा पुस्तिकाएं, पेंशन अभिलेख, वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट्स | ई-ऑफिस (e-Office 7.0) प्रणाली में पूर्ण डिजिटलीकरण और सुरक्षित क्लाउड बैकअप |
| श्रेणी 'ग' (Category C - अल्पकालिक महत्व) | दैनिक डायरियां, सामान्य परिपत्र, 3 से 5 वर्ष पुराने रूटीन पत्राचार | विभागीय अनुमति के उपरांत श्रेडर मशीन द्वारा पर्यावरण-अनुकूल पल्पिंग (Weeding-out) |
लाखों वर्ग फुट प्राइम स्पेस का आधुनिकीकरण
फाइलों और कबाड़ के हटने से नई दिल्ली के शास्त्री भवन, कृषि भवन, संचार भवन और देश भर के मंडल कार्यालयों में अब तक 2.24 करोड़ वर्ग फुट से अधिक प्राइम ऑफिस स्पेस खाली कराया जा चुका है।
इस खाली कराई गई जगह पर सरकारी बाबुओं के पुराने धूल भरे कमरों की जगह निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं:
- कर्मचारी वेलनेस लाउंज और कैफे: महिला एवं पुरुष कर्मचारियों के लिए स्वच्छ विश्राम कक्ष, आधुनिक कैफेटेरिया और शुद्ध पेयजल कियोस्क।
- शिशु देखभाल केंद्र (Creche Facilities): कामकाजी माताओं के छोटे बच्चों के लिए आधुनिक खिलौनों और सुरक्षित वातावरण से युक्त डे-केयर क्रेच।
- डिजिटल कॉन्फ्रेंस रूम एवं ट्रेनिंग लैब्स: हाई-स्पीड वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस आधुनिक बैठक कक्ष।
- नागरिक सुविधा केंद्र (Public Reception Centers): बाहर से आने वाले आगंतुकों और वृद्ध नागरिकों के बैठने के लिए वातानुकूलित स्वागत कक्ष।
आम नागरिकों की शिकायतों (CPGRAMS) का त्वरित निवारण और 'डाक चौपाल' पहल
स्पेशल कैंपेन 6.0 का सबसे संवेदनशील और मानवीय पहलू है—सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS 7.0) पर आम नागरिकों की शिकायतों का मिशन मोड में समाधान।
अक्सर पेंशनभोगियों की पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी भुगतान, भविष्य निधि (PF) क्लेम, आयकर रिफंड या डाक पार्सल गुम होने की शिकायतें विभागीय लापरवाही के कारण महीनों तक एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूमती रहती थीं। इस अभियान के दौरान सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि 30 दिनों से अधिक समय से लंबित सभी शिकायतों को 'शून्य पेंडेंसी' (Zero Pendency) लक्ष्य के तहत प्राथमिकता से सुलझाया जाए।
डाक विभाग की अभिनव 'डाक चौपाल' पहल
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार और जनता के बीच की खाई को पाटने के लिए डाक विभाग (Department of Posts) ने देश के 1.5 लाख से अधिक ग्रामीण डाकघरों के माध्यम से 'डाक चौपाल' (Dak Chaupal) की शुरुआत की है।
- गाँव-गाँव में चौपाल का आयोजन: डाक अधीक्षक और पोस्टमास्टर स्वयं गाँव के पंचायत भवन में बैठकर किसानों और ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हैं।
- ऑन-द-स्पॉट वित्तीय सेवाएं: इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के माइक्रो-एटीएम से तुरंत नकद निकासी, आधार से मोबाइल नंबर लिंक करना, और बच्चों के बाल आधार कार्ड मौके पर ही बनाए जाते हैं।
- बेटियों के लिए सुकन्या समृद्धि योजना: डाक चौपाल के दौरान गाँव की 10 वर्ष से कम उम्र की सभी बालिकाओं के सुकन्या समृद्धि खाते खोले जाते हैं, जिससे उन्हें भविष्य की उच्च शिक्षा और विवाह के लिए ब्याज सहायता मिल सके।
- किसान विकास पत्र और पीपीएफ खाता सुविधा: डाक चौपाल में ग्रामीणों को सुरक्षित सरकारी बचत योजनाओं की जानकारी देकर बिचौलियों के चिटफंड फ्रॉड से बचाया जाता है।
सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित सेवाओं में सुधार का प्रभाव
स्पेशल कैंपेन 6.0 ने भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही की एक नई संस्कृति को जन्म दिया है। जब दफ्तर स्वच्छ और डिजिटल होते हैं, तो फाइलों की ट्रैकिंग सेकंडों में होती है और कोई भी भ्रष्ट अधिकारी किसी नागरिक की फाइल को दबाकर रिश्वत की मांग नहीं कर सकता।
प्रशासनिक सुधार के 4 प्रत्यक्ष परिणाम:
- फाइल निस्तारण समय में 70% की कमी: ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के एक विभाग से दूसरे विभाग जाने का औसत समय 18 दिनों से घटकर मात्र 4 दिन रह गया है।
- कागज और पेड़ों की विशाल बचत: करोड़ों पन्नों के डिजिटल होने से सरकार के स्टेशनरी खर्च में 65% की कमी आई है और लाखों पेड़ों को कटने से बचाया गया है।
- सिटिजन चार्टर का सख्त अनुपालन: प्रत्येक मंत्रालय के सिटिजन चार्टर में निर्धारित समय-सीमा (जैसे पासपोर्ट सत्यापन 7 दिन, ड्राइविंग लाइसेंस 3 दिन) का ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा सीधा रियल-टाइम अनुवीक्षण किया जा रहा है।
- कर्मचारियों की कार्यक्षमता और मनोबल में वृद्धि: स्वच्छ, व्यवस्थित और सुंदर कार्यालय वातावरण से सरकारी कर्मचारियों के तनाव में कमी आई है और उनकी उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आम नागरिक और पेंशनभोगी अपने लंबित मामलों के समाधान के लिए इस अभियान का लाभ कैसे उठाएं?
यदि आपका भी कोई सरकारी कार्य—चाहे वह केंद्रीय पेंशन हो, रक्षा पेंशन (SPARSH), भविष्य निधि (EPFO) क्लेम, डाकघर की बचत योजना, आयकर रिफंड या किसी केंद्रीय विभाग से संबंधित अनुकंपा नियुक्ति का मामला हो—लंबे समय से लालफीताशाही में अटका हुआ है, तो 2 से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस स्पेशल कैंपेन 6.0 का लाभ अवश्य उठाएं:
- CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: तुरंत pgportal.gov.in पर जाएं या उमंग (UMANG) मोबाइल ऐप खोलें।
- 'Lodge Public Grievance' चुनें: संबंधित मंत्रालय (जैसे कार्मिक व पेंशन मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, डाक विभाग, वित्त मंत्रालय) का चयन करें।
- शिकायत के साथ 'Special Campaign 6.0 Reference' लिखें: अपनी शिकायत के शीर्षक में स्पष्ट लिखें कि यह मामला लंबे समय से लंबित है और विशेष अभियान 6.0 के तहत प्राथमिकता से निस्तारण योग्य है।
- दस्तावेज संलग्न करें: अपने पुराने आवेदन की रसीद, पीपीओ नंबर, पावती पत्र या ईमेल पत्राचार की स्पष्ट पीडीएफ अपलोड करें।
- ट्रैकिंग एवं अपील: आपको एसएमएस के माध्यम से शिकायत पंजीकरण संख्या (Registration Number) प्राप्त होगी। 7 से 15 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी द्वारा फोन या ईमेल पर संपर्क करके आपकी समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
- आरटीआई (RTI) आवेदनों में स्वतः कमी: जब विभागों द्वारा सक्रिय रूप से 'सुओ-मोटो डिस्क्लोजर' (Suo-motu disclosure under RTI Act Section 4) किया जाता है, तो नागरिकों को छोटी-छोटी जानकारियों के लिए आरटीआई नहीं लगानी पड़ती। अभियान के दौरान सभी विभागों को अपनी वेबसाइटों पर नागरिक चार्टर और सेवा वितरण समय-सीमा को प्रमुखता से प्रदर्शित करने के आदेश दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्र. स्पेशल कैंपेन 6.0 के दौरान क्या आम नागरिक अपनी पुरानी सरकारी शिकायतों का दोबारा रिव्यू करा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यदि CPGRAMS पर आपकी कोई पुरानी शिकायत असंतोषजनक रूप से बंद कर दी गई थी, तो आप अभियान के दौरान 'अपील' (Appeal) दर्ज करा सकते हैं, जिसकी समीक्षा संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा की जाती है।
प्र. सरकारी दफ्तरों से निकलने वाले पुराने कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स को कैसे नीलाम किया जाता है?
उत्तर: सभी अनुपयोगी आईटी हार्डवेयर को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) और MSTC के पारदर्शी ई-ऑक्शन पोर्टल पर लिस्ट किया जाता है, जहाँ केवल सीपीसीबी-प्रमाणित रीसाइक्लर्स ही बोली लगा सकते हैं।
प्र. क्या डाक चौपाल में ग्रामीण नागरिक मौके पर ही आधार अपडेशन और सुकन्या समृद्धि खाता खुलवा सकते हैं?
उत्तर: बिल्कुल, स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत डाक विभाग द्वारा आयोजित डाक चौपालों में मोबाइल आधार कियोस्क और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की टीम ऑन-द-स्पॉट सेवाएं प्रदान करती है।