cyber-fraud ⏱️ 15 मिनट पढ़ें 📅 2026-10-24 20:32:00

अवैध इंस्टेंट लोन ऐप्स का ब्लैकमेल और उत्पीड़न कैसे रोकें? RBI सचेत पोर्टल पर शिकायत और कानूनी अधिकार

सु
सुरक्षा एवं विधिक डेस्क
वरिष्ठ डिजिटल संपादक

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

अवैध चीनी 7-डेज लोन ऐप्स (Chinese Loan Apps) किसी भी आरबीआई-पंजीकृत एनबीएफसी (NBFC) से संबद्ध नहीं होते हैं। ये ऐप इंस्टॉल करते समय आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स और फोटो गैलरी की चोरी कर लेते हैं और 6वें दिन से ही अश्लील तस्वीरें बनाकर ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं। आरबीआई के डिजिटल लेंडिंग नियमों के अनुसार गैर-पंजीकृत संस्थाओं द्वारा दिया गया ऐसा कोई भी तथाकथित कर्ज कानूनी रूप से अप्रवर्तनीय (Legally Unenforceable) है। ठगों को एक भी रुपया न दें, व्हाट्सएप पर मैसेज फॉरवर्ड करके अपने रिश्तेदारों को सचेत करें और RBI Sachet व 1930 पर एफआईआर दर्ज कराएं।

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अवैध 7-डेज इंस्टेंट लोन ऐप्स का जाल क्या है और ये कैसे ब्लैकमेल करते हैं?

त्वरित उत्तर: 7-डेज इंस्टेंट लोन ऐप एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट द्वारा संचालित संगठित जबरन वसूली (Extortion Racket) है। ये ऐप्स सोशल मीडिया (Facebook, Instagram, YouTube) पर 'बिना सिबिल, बिना कागजात मात्र 2 मिनट में ₹50,000 का लोन' का झूठा विज्ञापन देकर लोगों को लुभाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति ऐप इंस्टॉल करता है, ऐप बिना किसी जरूरत के पूरे फोन के Contacts, Gallery, Location और SMS का परमिशन ले लेता है।

इसके बाद पीड़ित के खाते में बिना मांगे मात्र ₹2,500 से ₹3,000 ट्रांसफर कर दिए जाते हैं और केवल 6 दिनों के भीतर ₹6,000 से ₹8,000 की अवास्तविक मांग की जाती है। यदि पीड़ित भुगतान नहीं करता या कर भी देता है, तो रिकवरी एजेंट पीड़ित की फोटो को अश्लील और नग्न तस्वीरों (Pornographic Morphed Photos) के साथ जोड़कर उसके रिश्तेदारों, सहकर्मियों और माता-पिता के व्हाट्सएप नंबरों पर भेजने की धमकी देकर लाखों रुपये वसूलने लगते हैं।

🚨 पहला सुनहरा नियम: ब्लैकमेलरों को एक भी रुपया न दें!

सबसे बड़ी भूल यह सोचना है कि 'मैं 5,000 रुपये देकर इस झंझट से पीछा छुड़ा लूंगा'। याद रखें, यह कोई वैध बैंक नहीं बल्कि ब्लैकमेलर्स का गिरोह है। जैसे ही आप एक बार पैसा देंगे, वे आपको आसान शिकार समझकर 2 दिन बाद दोबारा ₹10,000 की मांग करेंगे। इस दुष्चक्र को केवल कानूनी प्रतिरोध और मानसिक दृढ़ता से ही तोड़ा जा सकता है, पैसे देकर कभी नहीं!

वैध एनबीएफसी बैंक लोन बनाम अवैध चीनी 7-डेज ऐप: तुलना

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नीचे दी गई तालिका से समझें कि वैध डिजिटल लेंडिंग और फर्जी एक्सटॉर्शन ऐप्स में क्या कानूनी फर्क है:

मापदंड / नियम आरबीआई-पंजीकृत वैध एनबीएफसी / बैंक अवैध 7-डेज इंस्टेंट लोन ऐप्स आरबीआई डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस 2022
आरबीआई पंजीकरण (Registration) वैध एनबीएफसी लाइसेंस व आधिकारिक वेबसाइट शून्य पंजीकरण (शेल कंपनियां / फर्जी पते) केवल विनियमित संस्थाएं (RE) ही लोन दे सकती हैं
फोन गैलरी व कॉन्टैक्ट एक्सेस सख्त प्रतिबंधित (केवल कैमरा व माइक्रोफोन सीमित) पूरी फोनबुक और प्राइवेट फोटो की चोरी कॉन्टैक्ट्स व मीडिया एक्सेस पर पूर्ण कानूनी रोक
ऋण की न्यूनतम अवधि (Tenure) न्यूनतम 60 से 90 दिन या ईएमआई मात्र 6 से 7 दिन (अत्यधिक गैर-कानूनी) अल्पकालिक शोषणकारी लोन पर प्रतिबंध
वसूली का तरीका (Recovery Practice) सभ्य नोटिस, कार्यसमय में कॉल (सुबह 8 से शाम 7) गाली-गलौज, मॉर्फ्ड फोटो, रिश्तेदारों को धमकी थर्ड-पार्टी उत्पीड़न पर बैंक का लाइसेंस रद्द हो सकता है
सिबिल (CIBIL) रिपोर्टिंग समय पर भुगतान से सिबिल सुधरता है सिबिल से कोई संबंध नहीं (शून्य प्रभाव) अवैध ऐप्स सिबिल को कोई डेटा नहीं भेज सकते

लोन ऐप के उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग से निपटने की 5-चरणीय अचूक SOP

यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इस जाल में फंस गया है, तो बिना घबराए नीचे दिए गए क्रम का पालन करें:

  1. स्टेप 1 (चरण 1) - तुरंत ऐप अनइंस्टॉल करें और सभी परमिशन रद्द करें: सबसे पहले अपने मोबाइल की सेटिंग्स में जाएं (Settings > Apps > Loan App)। वहां 'Permissions' में जाकर Contacts, Storage, Camera और SMS को 'Don't Allow' करें। इसके बाद उस ऐप का 'Clear Data' करके उसे तुरंत फोन से अनइंस्टॉल कर दें।
  2. स्टेप 2 (चरण 2) - व्हाट्सएप पर सभी रिश्तेदारों को 'अलर्ट मैसेज' भेजें: ब्लैकमेलर का सबसे बड़ा हथियार यह डर होता है कि आपके रिश्तेदार क्या सोचेंगे। इस डर को पहले ही खत्म कर दें। अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर और सभी ग्रुप्स में नीचे दिया गया संदेश पोस्ट करें: 'दोस्तों, मेरा फोन हैक हो गया है और कुछ अज्ञात हैकर्स मेरी एडिटेड/मॉर्फ्ड तस्वीरें बनाकर मेरे संपर्कों को पैसे मांगने के लिए भेज रहे हैं। यदि आपको मेरे नाम से कोई मैसेज या कॉल आए, तो उस नंबर को तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करें।' जैसे ही रिश्तेदार यह जान लेते हैं, ब्लैकमेलर का वार खाली चला जाता है।
  3. स्टेप 3 (चरण 3) - अज्ञात कॉल और व्हाट्सएप चैट को म्यूट/ब्लॉक करें: अपने फोन में Truecaller या 'Block Unknown Callers' की सेटिंग चालू करें। विदेशी नंबरों (+92, +880, +234 आदि) या अज्ञात वीओआईपी कॉल्स को सीधे ऑटो-रिजेक्ट पर डाल दें। 3 से 4 दिनों तक जब उन्हें कोई जवाब नहीं मिलता, तो वे हार मानकर किसी दूसरे शिकार की तलाश में चले जाते हैं।
  4. स्टेप 4 (चरण 4) - आरबीआई सचेत पोर्टल (sachet.rbi.org.in) पर शिकायत दर्ज करें: भारतीय रिजर्व बैंक के सचेत पोर्टल पर जाएं और 'File a Complaint against Unregistered Entities' विकल्प चुनें। उस ऐप का नाम, एपीके लिंक और पैसे मांगने वाले यूपीआई क्यूआर कोड का ब्यौरा दर्ज करें।
  5. स्टेप 5 (चरण 5) - राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर एफआईआर दर्ज कराएं: 1930 पर कॉल करें और साइबर पोर्टल पर धारा 67/67A IT Act (अश्लील सामग्री का प्रसारण) और भारतीय न्याय संहिता की जबरन वसूली (Extortion) की धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराएं।

⚖️ कानूनी स्थिति: क्या आपको यह तथाकथित लोन चुकाना पड़ेगा?

भारतीय अनुबंध अधिनियम (Indian Contract Act, 1872) और आरबीआई के डिजिटल लेंडिंग दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी अवैध और गैर-पंजीकृत संस्था के साथ किया गया कोई भी लेन-देन कानूनी रूप से 'शून्य और अप्रवर्तनीय' (Void Ab Initio) होता है। कानून की नजर में यह कोई वैध ऋण नहीं बल्कि जबरन वसूली है। कोई भी अदालत या पुलिस आपको इन ठगों को पैसे लौटाने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs - PAA)

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1. क्या लोन न चुकाने पर रिकवरी एजेंट मेरे घर पर पुलिस लेकर आ सकते हैं?

बिल्कुल नहीं। यह शत-प्रतिशत असंभव है। ये लोन ऐप्स पूरी तरह गैर-कानूनी हैं और इनके पास भारत में लोन बांटने का कोई लाइसेंस नहीं होता। ये खुद अपराधी हैं और पुलिस से छुपते फिरते हैं। वे कभी भी किसी पुलिस थाने नहीं जा सकते और न ही किसी के घर आ सकते हैं। वे केवल व्हाट्सएप कॉल्स पर बैठकर खाली धमकियां देते हैं।

2. क्या 7-डेज लोन ऐप का पैसा न देने से मेरा सिबिल (CIBIL) स्कोर खराब होगा?

नहीं, आपका सिबिल स्कोर 1% भी प्रभावित नहीं होगा। भारत में सिबिल, एक्सपेरियन या सीआरआईएफ को डेटा भेजने का अधिकार केवल उन्हीं बैंकों और एनबीएफसी को होता है जो आरबीआई से विधिवत पंजीकृत हैं। चूंकि ये 7-डेज ऐप्स पंजीकृत ही नहीं हैं, इसलिए इनका सिबिल के केंद्रीय डेटाबेस से कोई संबंध नहीं होता।

3. अगर उन्होंने सचमुच मेरी मॉर्फ्ड फोटो मेरे किसी रिश्तेदार को भेज दी है तो क्या करें?

यदि ठगों ने ऐसा घिनौना कृत्य किया है, तो उस स्क्रीनशॉट को सुरक्षित रखें। यह आईटी एक्ट की धारा 67 और 67A (जिसमें 5 साल तक की जेल का प्रावधान है) तथा BNS की मानहानि व आपराधिक धमकी का प्रत्यक्ष साक्ष्य है। तुरंत cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं और स्थानीय साइबर सेल को लिखित आवेदन दें। पुलिस ऐसे मामलों में बैंक खातों को फ्रीज करती है और टेलीग्राम/व्हाट्सएप से संबंधित ग्रुप्स को बैन करवाती है।

4. क्या मुझे अपना सिम कार्ड या व्हाट्सएप नंबर हमेशा के लिए बदल देना चाहिए?

सिम बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है। केवल 4 से 5 दिनों के लिए अज्ञात नंबरों से आने वाली इनकमिंग कॉल्स को ब्लॉक कर दें या अपना व्हाट्सएप कुछ दिनों के लिए बंद कर दें। जब जालसाजों को यह समझ आ जाता है कि पीड़ित डर नहीं रहा है और उसने कोई पैसा नहीं दिया, तो वे समय बर्बाद करना बंद करके आपका डेटा अपनी सक्रिय लिस्ट से हटा देते हैं।

5. गूगल प्ले स्टोर इन खतरनाक ऐप्स को डाउनलोड क्यों करने देता है?

गूगल ने भारत सरकार के निर्देश पर अपनी नीतियों को बेहद सख्त किया है और हजारों अवैध लोन ऐप्स को प्ले स्टोर से हटाया है। हालांकि, ठग अक्सर 'कैलकुलेटर ऐप' या 'यूटिलिटी टूल' के नाम पर ऐप अप्रूव करा लेते हैं और बाद में बैकएंड से लोन का कोड एक्टिवेट कर देते हैं। इसके अलावा अधिकांश शिकार व्हाट्सएप लिंक या एपीके (APK) फाइलों के जरिए बनाए जाते हैं। कभी भी किसी थर्ड-पार्टी वेबसाइट से एपीके फाइल इंस्टॉल न करें।

6. अगर मैंने डरकर पहले ही दो बार पैसे दे दिए हैं, तो क्या अब मुझे और पैसे देने चाहिए?

तुरंत पैसे देना बंद करें। भले ही आपने पहले पैसे दे दिए हों, अब एक नया पैसा भी न दें। उन्हें स्पष्ट संदेश भेजें: 'मैंने साइबर सेल में एफआईआर दर्ज करा दी है और गृह मंत्रालय को आपके सारे बैंक खाते सौंप दिए हैं।' इसके बाद उन्हें तुरंत ब्लॉक कर दें। पैसे की मांग तुरंत रुक जाएगी।

📜 RBI डिजिटल लेंडिंग मास्टर डायरेक्शंस 2022: ग्राहकों को मिले 5 अचूक कानूनी अधिकार

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2 सितंबर 2022 को डिजिटल ऋण देने के लिए अत्यंत कठोर दिशा-निर्देश जारी किए थे। यदि कोई संस्था इन नियमों का उल्लंघन करती है तो वह तुरंत गैर-कानूनी घोषित हो जाती है:

  • 1. फोन डेटा एक्सेस पर पूर्ण प्रतिबंध: लोन देने वाला कोई भी ऐप ग्राहक के मोबाइल के कॉन्टैक्ट्स (Phonebook), मीडिया फाइल्स (Photo Gallery), कॉल लॉग्स या एसएमएस को एक्सेस नहीं कर सकता। केवल केवाईसी और कैमरे का सीमित वन-टाइम एक्सेस ही अनुमत है।
  • 2. की फैक्ट स्टेटमेंट (Key Fact Statement - KFS) अनिवार्य: लोन वितरित होने से पहले ग्राहक को एक पेज का स्पष्ट KFS देना अनिवार्य है जिसमें कुल ब्याज दर, वार्षिक प्रतिशत दर (APR), प्रोसेसिंग फीस और पेनल्टी का पूरा ब्यौरा पारदर्शी रूप से लिखा हो।
  • 3. सीधे बैंक खाते में संवितरण (Disbursement directly to Account): लोन का पैसा और पुनर्भुगतान केवल बैंक खाते से बैंक खाते में होना चाहिए। किसी भी निजी यूपीआई आईडी या थर्ड-पार्टी वॉलेट में भुगतान मांगना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
  • 4. कूलिंग-ऑफ / लुक-अप पीरियड (Cooling-off Period): ग्राहक को लोन लेने के बाद कम से कम 3 से 7 दिनों का समय मिलता है कि यदि वह चाहे तो बिना किसी पूर्व-भुगतान पेनल्टी के मूल राशि लौटाकर लोन रद्द कर सकता है।
  • 5. रिकवरी एजेंट्स के लिए आचार संहिता: कोई भी बैंक या एनबीएफसी शाम 7 बजे के बाद और सुबह 8 बजे से पहले कॉल नहीं कर सकती। किसी भी रिश्तेदार, मित्र या कार्यस्थल के सहकर्मी को कॉल करना या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कानूनी अपराध है।

⚖️ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT Act के तहत ब्लैकमेलरों पर लगने वाली गंभीर धाराएं

लोन ऐप रिकवरी एजेंट जो हरकतें करते हैं, वे भारतीय कानूनों के तहत गंभीर गैर-जमानती अपराध हैं:

  1. धारा 308 BNS (जबरन वसूली - Extortion): भय दिखाकर या प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की धमकी देकर संपत्ति या पैसे की मांग करना। इसमें 3 से 7 वर्ष तक के कठोर कारावास का प्रावधान है।
  2. धारा 351 BNS (आपराधिक धमकी - Criminal Intimidation): गाली-गलौज करना और जान से मारने या बदनाम करने की धमकी देना।
  3. धारा 67 एवं 67A सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम: किसी भी व्यक्ति की अश्लील, अभद्र या मॉर्फ्ड तस्वीरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रसारित करना। इसमें 5 वर्ष तक की जेल और ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
  4. संविधान का अनुच्छेद 21 एवं पुट्टास्वामी फैसला: सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संवैधानिक पीठ ने (K.S. Puttaswamy vs Union of India) निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया है। अनधिकृत डेटा चोरी और उत्पीड़न इस मौलिक अधिकार का खुला उल्लंघन है।

📝 पुलिस थाने में दी जाने वाली लिखित एफआईआर का कानूनी प्रारूप

सेवा में,
प्रभारी निरीक्षक,
साइबर अपराध पुलिस थाना, [शहर का नाम]

विषय: अवैध चीनी 7-डेज लोन ऐप द्वारा ब्लैकमेलिंग, मॉर्फ्ड अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी एवं जबरन वसूली की बाबत प्राथमिकी (FIR)।

महोदय,
प्रार्थी [आपका पूरा नाम], पुत्र [पिता का नाम], निवासी [स्थानीय पता] निवेदन करता है कि:

1. मैंने दिनांक [तारीख] को फेसबुक विज्ञापन देखकर [लोन ऐप का नाम] नामक ऐप इंस्टॉल किया था। ऐप द्वारा बिना मेरी पूर्ण सहमति के मेरे मोबाइल के कॉन्टैक्ट्स और फोटो गैलरी का अवैध एक्सेस ले लिया गया।
2. मेरे बैंक खाते में मात्र ₹[प्राप्त रकम] ट्रांसफर किए गए और मात्र 6 दिनों बाद अज्ञात विदेशी व भारतीय व्हाट्सएप नंबरों [+XX XXXXXXXXXX] से फोन करके ₹[मांगी जा रही रकम] की अवैध वसूली की जाने लगी।
3. जब मैंने अवैध ब्याज देने से मना किया, तो कॉलर द्वारा मेरी फोटो को अश्लील तस्वीरों के साथ मॉर्फ करके मेरे परिवार, रिश्तेदारों और सहकर्मियों को भेजने की धमकियां दी जा रही हैं और गाली-गलौज की जा रही है।
4. यह संस्था भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से पंजीकृत नहीं है और इसका यह कृत्य BNS की धारा 308, 351 एवं IT Act की धारा 66E, 67, 67A के अंतर्गत गंभीर संज्ञेय अपराध है।

प्रार्थना है कि उक्त दोषियों के बैंक खातों और व्हाट्सएप नंबरों को तुरंत फ्रीज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

संलग्नक:
- व्हाट्सएप धमकी की चैट व कॉल रिकॉर्डिंग
- बैंक स्टेटमेंट
- आरबीआई सचेत शिकायत पावती

भवदीय,
[हस्ताक्षर]
[नाम एवं मोबाइल]
  

🚫 भारत सरकार (MeitY) और गूगल द्वारा प्रतिबंधित किए गए लोन ऐप्स का इतिहास

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और गूगल ने गृह मंत्रालय की सिफारिश पर अब तक 2,500 से अधिक खतरनाक लोन ऐप्स को भारत में ब्लॉक किया है:

  • प्रतिबंधित ऐप्स के छद्म नाम: ये ऐप्स अक्सर Speedy Rupee, Flash Loan, Minute Cash, Small Loan, Pocket Bank, Quick Credit जैसे आकर्षक नामों से इंटरनेट पर घूमते रहते हैं। जब एक ऐप बैन होता है, तो सिंडिकेट उसी कोड को नए नाम से एपीके वेबसाइटों पर अपलोड कर देता है।
  • डेटा सर्वर का चीन और हॉन्गकॉन्ग में कनेक्शन: साइबर फॉरेंसिक विश्लेषण में पाया गया कि इन ऐप्स द्वारा चुराया गया भारतीय नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा (कांटेक्ट बुक्स, पारिवारिक फोटो, निजी मैसेज) अलीबाबा क्लाउड और टेनसेंट क्लाउड के सर्वरों पर सीधे भेजा जाता था, जिसका उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध भी किया जा सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक दिशा-निर्देश: देश की शीर्ष अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि किसी भी वित्तीय संस्था द्वारा कर्ज वसूली के लिए ग्राहक की गरिमा, निजता और मानसिक शांति का हनन करना गैर-कानूनी है। यदि रिकवरी एजेंट के उत्पीड़न के कारण कोई नागरिक आत्महत्या का कदम उठाता है, तो लेंडिंग कंपनी के निदेशकों पर BNS धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना - Abetment to Suicide) के तहत गैर-जमानती हत्या जैसा मुकदमा चलेगा।

⚠️ माता-पिता और युवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन

लोन ऐप के ब्लैकमेल के कारण कभी भी अवसाद में न आएं और कोई आत्मघाती कदम न उठाएं। याद रखें कि आप पीड़ित हैं, अपराधी नहीं! भारत सरकार की राष्ट्रीय टेली-मानस मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (Tele-MANAS: 14416) पर कॉल करके 24 घंटे मुफ्त मनोवैज्ञानिक परामर्श प्राप्त किया जा सकता है।

📱 गूगल प्ले स्टोर पर सुरक्षित रहने और मैलवेयर ऐप्स की पहचान की चेकलिस्ट

भविष्य में किसी भी वित्तीय ऐप को अपने मोबाइल में डाउनलोड करने से पहले इन 4 महत्वपूर्ण बातों की जांच अवश्य करें:

  • डेवलपर का नाम और आधिकारिक ईमेल: ऐप के 'About This App' सेक्शन में जाएं। यदि डेवलपर की ईमेल आईडी जीमेल (e.g. xyzloan123@gmail.com) या याहू पर है, तो वह 100% फर्जी ऐप है। वास्तविक बैंकों और एनबीएफसी की ईमेल आईडी हमेशा उनकी आधिकारिक वेबसाइट के डोमेन (जैसे @hdfcbank.com या @bajajfinserv.in) पर होती है।
  • ऐप परमिशन लिस्ट की जांच: इंस्टॉल करने से पहले ऐप द्वारा मांगी जाने वाली अनुमतियों (Permissions) को देखें। यदि कोई लोन ऐप आपसे 'Read Contacts', 'Read Storage / Photos' या 'Read Call Logs' मांगती है, तो उसे एक सेकंड में खारिज कर दें। आरबीआई के सख्त नियमों के अनुसार वैध लोन ऐप्स को इन चीजों की कोई जरूरत नहीं होती।
  • रिव्यूज में '1-Star' रेटिंग्स पढ़ें: ऐप के कुल 4.5 स्टार देखकर भ्रमित न हों क्योंकि ठग हजारों फर्जी बॉट रिव्यूज खरीद लेते हैं। हमेशा '1-Star' और 'Critical Reviews' वाले टैब को पढ़ें। वहां असली पीड़ितों ने अपने कटु अनुभव और ब्लैकमेलिंग की सच्चाई लिखी होती है।

⚖️ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का राज्यों को कड़ा निर्देश

लोन ऐप माफियाओं द्वारा की जा रही प्रताड़ना और आत्महत्याओं के मामलों पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को आदेश दिया है कि लोन ऐप ब्लैकमेलिंग की शिकायतों को केवल सामान्य साइबर फ्रॉड न माना जाए, बल्कि इन्हें मानव अधिकारों और जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन मानते हुए 24 घंटे के भीतर विशेष साइबर टास्क फोर्स गठित करके आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।

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