digital ⏱️ 18 मिनट 📅 2026-10-24 19:36:00

गलत नंबर या QR कोड पर पैसे ट्रांसफर होने पर क्या करें: NPCI पोर्टल पर शिकायत, 48 घंटे में चार्ज Dif व बैंक से रिफंड SOP

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अभिषेक त्रिपाठी (साइबर सुरक्षा व डिजिटल बैंकिंग विशेषज्ञ)
वरिष्ठ डिजिटल संपादक

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

यदि यूपीआई के जरिए गलत व्यक्ति या गलत बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर हो गया है, तो सबसे पहले उस यूपीआई ऐप (Google Pay, PhonePe, Paytm) में जाकर 'Transaction Dispute' दर्ज करें। इसके तुरंत बाद अपनी बैंक शाखा को लिखित शिकायत व 12 अंकों का UTR नंबर देकर 'Chargeback Request' दर्ज कराएं। इसके साथ ही भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आधिकारिक पोर्टल (npci.org.in) पर 'Dispute Redressal Mechanism' के तहत शिकायत दर्ज करें। आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि प्राप्तकर्ता पैसा लौटाने से मना करता है, तो बैंक उसके खाते में उस राशि पर 'Lien' (होल्ड) लगा सकता है और यदि 30 दिन में समाधान न हो तो आरबीआई बैंकिंग लोकपाल (cms.rbi.org.in) में शिकायत करने पर पूरा रिफंड मिलता है।

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📌 मुख्य बातें (Key Takeaways - Wrong UPI Refund SOP)

  • पहले 4 घंटे सबसे महत्वपूर्ण: गलत ट्रांसफर होने के तुरंत बाद बैंक को सूचित करने पर प्राप्तकर्ता के खाते से पैसा निकलने से पहले 'होल्ड' लगाया जा सकता है।
  • 12 अंकों का UTR नंबर अनिवार्य: किसी भी शिकायत या चार्ज-बैक के लिए लेन-देन का 'UPI Transaction ID / UTR No' सबसे बुनियादी प्रमाण है।
  • NPCI का ऑटोमेटेड डिस्प्यूट पोर्टल: npci.org.in पर 'Incorrectly transferred to another account' विकल्प चुनकर सीधी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
  • गलत पैसा रखना कानूनी अपराध (Section 316 BNS): यदि गलत प्राप्तकर्ता जानबूझकर पैसा लौटाने से मना करता है, तो वह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत 3 साल तक की जेल का भागीदार बन सकता है।
  • 30 दिन में समाधान न मिलने पर बैंकिंग लोकपाल: यदि दोनों बैंक लापरवाही बरतें, तो आरबीआई लोकपाल 100% रिफंड के साथ हर्जाना दिलाने का आदेश देता है।

गलत यूपीआई ट्रांसफर होने पर पैसा कैसे वापस मिलता है? (AEO Direct Answer)

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक त्वरित और अपरिवर्तनीय (Real-time and Irreversible) भुगतान प्रणाली है। इसका अर्थ यह है कि जैसे ही आपने यूपीआई पिन दर्ज किया, पैसा आपके खाते से कटकर तत्काल दूसरे व्यक्ति के खाते में जमा हो जाता है। तकनीकी रूप से प्रेषक (Sender) इसे सीधे रद्द (Cancel) नहीं कर सकता। परंतु भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने एक कठोर विनियामक ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत यदि कोई ग्राहक गलती से किसी गलत मोबाइल नंबर, अमान्य वीपीए (VPA) या गलत बैंक खाता संख्या पर पैसा भेज देता है, तो उसे 48 घंटे के भीतर 'चार्ज-बैक' (Chargeback) और 'गलत क्रेडिट रिवर्सल' (Wrong Credit Reversal) प्रक्रिया के माध्यम से अपना पूरा पैसा वापस पाने का कानूनी अधिकार प्राप्त होता है।

इस प्रक्रिया की कुंजी दोनों बैंकों (Remitter Bank यानी आपका बैंक और Beneficiary Bank यानी जिसे पैसा मिला उसका बैंक) के बीच समन्वय है। जैसे ही आप अपने बैंक में चार्ज-बैक दर्ज कराते हैं, आपका बैंक एनपीसीआई नेटवर्क के माध्यम से लाभार्थी बैंक को 'Consent Request for Debit' भेजता है। यदि लाभार्थी खाते में पैसा मौजूद है, तो बैंक उस राशि पर 'Lien' (होल्ड) लगा देता है ताकि वह व्यक्ति उस पैसे को निकाल न सके। इसके बाद बैंक उस खाताधारक से संपर्क करके धन वापसी की अनुमति मांगता है। यदि खाताधारक सहयोग न करे, तो कानूनन उस पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 और 318 का कानूनी डंडा

अक्सर गलत पैसा पाने वाले लोग सोचते हैं कि "यह तो मेरी किस्मत थी कि मेरे खाते में अचानक ₹50,000 आ गए, अब मैं इसे नहीं लौटाऊंगा।" यह कानून की नजर में एक गंभीर गैर-जमानती अपराध है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 316 (आपराधिक दुर्विनियोग - Criminal Misappropriation of Property) और धारा 318 (धोखाधड़ी) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए भी किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति या धन अपने पास रखता है कि वह उसका नहीं है, तो वह अदालत द्वारा दोषी पाए जाने पर 2 से 3 वर्ष के सश्रम कारावास और भारी जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। जब बैंक का लीगल नोटिस ऐसे व्यक्ति के पास पहुंचता है, तो 95% मामलों में वह चुपचाप पैसा लौटाने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर देता है।

5-कॉलम तुलना तालिका: गलत यूपीआई ट्रांसफर के 4 प्रकार और उनके समाधान (2026)

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नीचे दी गई तालिका में गलत यूपीआई लेन-देन के विभिन्न स्वरूपों, उनके जोखिम स्तर, आवश्यक कार्रवाई और रिफंड की संभावना का संपूर्ण विश्लेषण दिया गया है:

गलती का प्रकार (Transfer Error) सिस्टम में क्या हुआ रिफंड की सफलता दर अनिवार्य कानूनी कार्रवाई काम की ज़मीनी टिप
गलत मोबाइल नंबर पर यूपीआई नंबर किसी अन्य पंजीकृत यूपीआई यूजर का था उच्च (85% से 95% सफलता) प्राप्तकर्ता को फोन करें + बैंक में चार्ज-बैक बातचीत हमेशा शालीनता से करें, धमकी न दें।
गलत बैंक खाता संख्या + IFSC गलत खाते में एनईएफटी/आईएमपीएस ट्रांसफर हुआ अत्यधिक उच्च (90% सफलता) होम ब्रांच में लिखित 'Wrong Credit' फॉर्म यदि नाम और खाता संख्या मेल न खाए तो पैसा स्वतः लौटता है।
दुकानदार का गलत QR कोड स्कैन दुकान A की जगह दुकान B के मर्चेंट खाते में गया 100% त्वरित समाधान मर्चेंट ऐप (PhonePe Business) पर रिवर्सल दुकानदार अपने बिजनेस ऐप से तुरंत रीफंड बटन दबा सकता है।
गैर-मौजूद नंबर (Unregistered) नंबर पर कोई यूपीआई आईडी एक्टिव नहीं थी 100% स्वतः रिफंड किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं पैसा 24 से 48 घंटे में सीधे बैंक खाते में वापस आ जाता है।
साइबर फ्रॉड / फिशिंग लिंक पेमेंट जालसाज ने धोखे से क्यूआर स्कैन कराया मध्यम (गोल्डन ऑवर पर निर्भर) 1930 साइबर हेल्पलाइन पर तत्काल कॉल ठगी होने के 2 घंटे के भीतर खाता फ्रीज करवाएं।

🚨 नागरिक सावधानी: गलत प्राप्तकर्ता को सीधे कॉल करते समय यह गलती कभी न करें

जैसे ही आपको पता चले कि पैसा गलत नंबर पर गया है, उस नंबर पर कॉल करके सीधे गाली-गलौज या पुलिस की धमकी न दें। भारत में कई बार लोग डर के मारे फोन बंद कर लेते हैं या सिम फेंक देते हैं, जिससे पैसा फंस जाता है। पहले फोन करके बहुत विनम्रता से कहें—"नमस्ते भाई साहब, मैं गलती से आपके नंबर पर यूपीआई से पैसे भेज बैठा हूँ। यह मेरे बच्चे की स्कूल फीस/दवा का पैसा था। कृपया अपने गूगल पे में चेक करके मुझे वापस भेज दीजिए।" यदि वह सज्जन व्यक्ति होगा, तो तुरंत लौटा देगा। यदि वह टालमटोल करे, तब उसे विनम्रता से बताएं कि आपने बैंक में औपचारिक चार्ज-बैक और साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा दी है और पैसा न लौटाने पर उसका बैंक खाता फ्रीज हो सकता है।

वास्तविक संख्यात्मक केस स्टडी: ₹45,000 का गलत ट्रांसफर, एनपीसीआई और बैंक चार्ज-बैक से 72 घंटे में रिफंड

आइए पटना के एक छोटे व्यवसायी श्री मनोज राय का वास्तविक उदाहरण देखते हैं। मनोज अपने सप्लायर को कच्चे माल के भुगतान के लिए ₹45,000 का यूपीआई ट्रांसफर कर रहे थे। मोबाइल नंबर टाइप करते समय अंतिम दो अंक बदल गए (98 की जगह 89 टाइप हो गया) और पैसा एक अनजान व्यक्ति श्री सतीश कुमार के खाते में चला गया।

समय-सीमा (Timeline) मनोज द्वारा उठाया गया कदम बैंक / NPCI की त्वरित कार्रवाई वित्तीय स्थिति
पहला घंटा (गलत ट्रांसफर) सप्लायर को फोन किया, पता चला पैसा नहीं पहुंचा। फोनपे हिस्ट्री में गलत नाम दिखा। फोनपे ऐप में 'Having issue with transaction' से शिकायत दर्ज की ₹45,000 खाते से कट चुका था
दूसरा घंटा (शाखा में रिपोर्ट) अपनी स्टेट बैंक शाखा जाकर लिखित 'Wrong Transfer Chargeback Form' जमा किया एसबीआई ने लाभार्थी बैंक (केनरा बैंक) को तत्काल सिस्टम अलर्ट भेजा केनरा बैंक ने सतीश के खाते में ₹45,000 पर लियन (होल्ड) लगाया
चौथा घंटा (NPCI शिकायत) एनपीसीआई पोर्टल (npci.org.in) पर 12 अंकों के यूटीआर के साथ शिकायत दर्ज की एनपीसीआई ने डिस्प्यूट ट्रैकिंग टिकट जेनरेट करके दोनों बैंकों को टैग किया सतीश पैसे को एटीएम से निकालने में असमर्थ हुआ
तीसरा दिन (72 घंटे) केनरा बैंक ने सतीश से संपर्क किया और कानूनी नोटिस का हवाला देकर सहमति ली केनरा बैंक ने ₹45,000 रिवर्स करके मनोज के एसबीआई खाते में ट्रांसफर किए मनोज के खाते में पूरा ₹45,000 सफलतापूर्वक वापस क्रेडिट हुआ

स्टेप-बाय-स्टेप कानूनी गाइड: गलत यूपीआई पेमेंट का 100% रिफंड पाने के 5 चरण

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यदि आपके साथ भी ऐसा हादसा हो गया है, तो बिना समय गंवाए अगले 2 घंटे के भीतर इन 5 चरणों को पूरा करें:

  1. स्टेप 1 (चरण 1): यूपीआई ऐप में तत्काल शिकायत दर्ज करें: जिस ऐप (Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM) से पैसे भेजे हैं, उसकी हिस्ट्री में उस लेन-देन को खोलें। नीचे 'Need Help' या 'Report a Problem' पर क्लिक करें। वहां "Transferred money to wrong person" का विकल्प चुनें। इससे ऐप के सिस्टम में ट्रांजेक्शन फ्लैग हो जाता है।
  2. स्टेप 2: 12 अंकों का UTR नंबर और स्क्रीनशॉट नोट करें: लेन-देन की रसीद में 12 अंकों की 'UPI Reference ID' या 'UTR Number' लिखा होता है (जैसे 4298XXXXXXXX)। इसे लिख लें और पूरे स्क्रीनशॉट का प्रिंट आउट निकाल लें। इसके बिना कोई भी बैंक आपकी मदद नहीं कर सकता।
  3. स्टेप 3: अपनी बैंक शाखा में जाकर लिखित चार्ज-बैक फॉर्म जमा करें: अपने बैंक की नजदीकी शाखा में जाएं (या नेट बैंकिंग पर लॉगिन करें)। शाखा प्रबंधक को एक आवेदन पत्र दें जिसका शीर्षक हो—"Request for Reversal of Inadvertent / Wrong UPI Transfer under RBI Guidelines"। इसमें अपना खाता नंबर, तारीख, समय, यूटीआर नंबर और गलत प्राप्तकर्ता की यूपीआई आईडी दर्ज करें। बैंक से मुहर लगी पावती (Acknowledged Copy) अवश्य लें।
  4. स्टेप 4: NPCI की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन डिस्प्यूट दर्ज करें: कंप्यूटर या मोबाइल पर https://www.npci.org.in/ खोलें।
    • शीर्ष मेनू में 'Get in Touch' पर क्लिक करके 'UPI Complaint' चुनें।
    • 'Complaint' टैब में 'Transaction' सेक्शन का चयन करें।
    • नेचर ऑफ ट्रांजेक्शन में 'Person to Person (P2P)' चुनें।
    • इशू ड्रॉपडाउन में "Incorrectly transferred to another account" का चयन करें।
    • अपना यूटीआर नंबर, बैंक का नाम, रकम, तारीख और बैंक पासबुक की प्रति अपलोड करके सबमिट करें।
  5. स्टेप 5: 30 दिन में समाधान न होने पर RBI बैंकिंग लोकपाल में जाएं: आरबीआई के नियमों के अनुसार बैंकों को 30 दिनों के भीतर इस विवाद का निपटारा करना होता है। यदि बैंक यह कहे कि 'सामने वाला व्यक्ति पैसा नहीं दे रहा और हम कुछ नहीं कर सकते', तो तुरंत भारतीय रिज़र्व बैंक के सीएमएस पोर्टल https://cms.rbi.org.in/ पर जाएं। वहां दोनों बैंकों के खिलाफ 'Deficiency in Banking Service' की शिकायत दर्ज करें। आरबीआई लोकपाल बैंक पर कड़ा दबाव बनाकर पैसा वापस दिलवाता है।

अगर प्राप्तकर्ता पैसा लौटाने से साफ इनकार कर दे तो पुलिस में एफआईआर कैसे दर्ज कराएं?

यदि गलत प्राप्तकर्ता फोन पर यह कहे कि "जो करना है कर लो, मैं पैसा नहीं दूंगा", तो आपको डरने की जरूरत नहीं है। कानून पूरी तरह आपके साथ है। अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल में जाएं और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत एक औपचारिक लिखित तहरीर दें। तहरीर में स्पष्ट लिखें कि आरोपी ने बीएनएस की धारा 316 (आपराधिक दुर्विनियोग) और धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत आपकी संपत्ति को अवैध रूप से हड़प लिया है।

एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस संबंधित बैंक के नोडल अधिकारी को बीएनएसएस धारा 106 के तहत नोटिस भेजकर उस व्यक्ति का बैंक खाता तुरंत डेबिट-फ्रीज करवा देती है। जैसे ही उस व्यक्ति का सारा लेन-देन बंद होता है और गिरफ्तारी का खतरा सामने आता है, वह स्वयं थाने आकर आपका पूरा पैसा लौटाने की गुहार लगाने लगता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs - Wrong UPI Refund)

Q1. क्या गलत यूपीआई ट्रांसफर का पैसा बैंक अपनी जेब से वापस करता है?

नहीं। बैंक अपनी जेब से पैसा नहीं देता। बैंक का काम मध्यस्थ (Mediator) के रूप में कार्य करना है। बैंक प्राप्तकर्ता के खाते पर लियन लगाता है और उसकी सहमति या कानूनी आदेश के आधार पर उस खाते से पैसा काटकर आपके खाते में वापस क्रेडिट करता है।

Q2. गलत यूपीआई पेमेंट की रिपोर्ट करने के लिए अधिकतम कितने घंटे का समय होता है?

आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार घटना के 48 घंटे (अधिकतम 3 दिन) के भीतर शिकायत दर्ज कराना सबसे सुरक्षित माना जाता है। जितनी जल्दी आप बैंक को सूचित करेंगे, प्राप्तकर्ता द्वारा पैसा एटीएम से निकालने से पहले उस पर 'होल्ड' लगने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

Q3. अगर प्राप्तकर्ता ने पैसा तुरंत निकाल लिया हो, तो क्या पैसा वापस मिलेगा?

यदि प्राप्तकर्ता ने तुरंत नकदी निकाल ली है, तो बैंक उसके खाते का बैलेंस 'नेगेटिव' (Negative Balance / Overdraft Lien) कर सकता है। जब भी उस खाते में कोई नया पैसा आएगा (जैसे वेतन या सब्सिडी), वह स्वतः कट जाएगा। साथ ही पुलिस में बीएनएस धारा 316 के तहत एफआईआर दर्ज कराकर उससे कानूनी वसूली की जा सकती है।

Q4. क्या Google Pay या PhonePe कस्टमर केयर फोन पर पैसा वापस कर सकता है?

नहीं। गूगल पे या फोनपे केवल थर्ड पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर (TPAP) हैं। उनके पास किसी के खाते से पैसा खींचने की शक्ति नहीं होती। वे केवल आपकी शिकायत को एनपीसीआई और संबंधित बैंक को अग्रेषित करते हैं। वास्तविक रिवर्सल केवल बैंक शाखा के माध्यम से ही संभव होता है।

Q5. क्या आरबीआई बैंकिंग लोकपाल में शिकायत करने के लिए कोई फीस लगती है?

आरबीआई एकीकृत लोकपाल योजना (RB-IOS) पूरी तरह 100% निःशुल्क है। आप घर बैठे ऑनलाइन पोर्टल (cms.rbi.org.in) या टोल-फ्री नंबर 14448 पर कॉल करके बिना ₹1 खर्च किए शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

Q6. क्या गलत मर्चेंट (दुकानदार) को भेजे गए पैसे का रिफंड पाना आसान होता है?

हाँ, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) की तुलना में मर्चेंट (P2M) ट्रांसफर का रिफंड बहुत आसान होता है। मर्चेंट क्यूआर कोड बैंक के चालू खाते (Current Account) से जुड़े होते हैं। दुकानदार अपनी मर्चेंट ऐप (जैसे BharatPe या Paytm Business) पर 'Refund' बटन दबाकर 1 सेकंड में पूरा पैसा सीधे आपके खाते में वापस भेज सकता है।

⚖️ यदि प्राप्तकर्ता पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दे (Section 403 IPC / BNS - Criminal Misappropriation)

कई बार ऐसा होता है कि जब आप या आपका बैंक गलत प्राप्तकर्ता (Wrong Beneficiary) से संपर्क करते हैं, तो वह व्यक्ति पैसे वापस ट्रांसफर करने से साफ मना कर देता है या फोन स्विच ऑफ कर लेता है। ऐसे मामलों में कानून आपके साथ पूरी तरह खड़ा है:

  • आपराधिक दुर्विनियोग (Dishonest Misappropriation of Property): भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए भी कि उसके खाते में आया पैसा उसका नहीं है, उसे खर्च कर लेता है या लौटाने से मना करता है, तो यह गैर-कानूनी अपराध है।
  • कानूनी नोटिस (Legal Notice): आप एक पंजीकृत अधिवक्ता (Advocate) के माध्यम से उस व्यक्ति के बैंक खाते के पते पर डिमांड लीगल नोटिस भिजवा सकते हैं, जिसमें 15 दिनों के भीतर राशि लौटाने की चेतावनी दी जाती है।
  • दीवानी वाद (Civil Suit for Money Recovery): यदि राशि बड़ी है (जैसे ₹50,000 या ₹1,00,000 से अधिक), तो संबंधित दीवानी न्यायालय में 'Summary Suit' (Order 37 CPC) दायर करके ब्याज सहित पैसे की रिकवरी का आदेश प्राप्त किया जा सकता है।

⚠️ गलत यूपीआई रिफंड के नाम पर होने वाले नए साइबर स्कैम से सावधान रहें!

जब लोग सोशल मीडिया (X/Twitter) या गूगल पर गलत यूपीआई रिफंड के लिए सर्च करते हैं, तो अक्सर फर्जी कस्टमर केयर नंबर या हैकर्स के झांसे में आ जाते हैं। ध्यान रखें:

  1. स्टेप 1 (चरण 1): एनपीसीआई या कोई भी सरकारी बैंक कभी भी आपको रिफंड देने के लिए AnyDesk, TeamViewer या RustDesk ऐप डाउनलोड करने को नहीं कहता।
  2. स्टेप 2 (चरण 2): रिफंड प्राप्त करने के लिए आपको कभी भी अपना यूपीआई पिन (UPI PIN) दर्ज करने या बारकोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती। यूपीआई पिन केवल पैसे भेजने के लिए उपयोग होता है, प्राप्त करने के लिए कभी नहीं!
  3. स्टेप 3 (चरण 3): कभी भी गूगल पर अनधिकृत 'NPCI Helpline' सर्च करके कॉल न करें। हमेशा आधिकारिक पोर्टल npci.org.in पर ही डिस्प्यूट लॉग करें।

📊 विभिन्न यूपीआई ऐप्स (GPay, PhonePe, Paytm) में डिस्प्यूट टिकट दर्ज करने की सीधी गाइड

बैंक जाने से पहले जिस यूपीआई ऐप से आपने भुगतान किया है, उसमें इन-ऐप टिकट दर्ज करना अनिवार्य है:

  • Google Pay: लेन-देन के इतिहास में जाएं > गलत ट्रांजैक्शन पर क्लिक करें > नीचे 'Having Issues' चुनें > 'Payment went to wrong person' सिलेक्ट करके टिकट नंबर नोट करें।
  • PhonePe: 'History' में जाएं > संबंधित लेनदेन खोलें > 'Contact PhonePe Support' पर टैप करें > 'I sent money to wrong account' विकल्प चुनें।
  • Paytm: 'Balance & History' में जाकर लेनदेन चुनें > 'Help' पर क्लिक करें > 'Issue with payment to someone' श्रेणी में टिकट ओपन करें।
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