तुलसी विवाह 2026 शुभ मुहूर्त: 21 नवंबर देवउठनी एकादशी शालिग्राम विवाह विधि, सामग्री चेकलिस्ट व 7 फेरे के नियम
तुलसी विवाह 2026 में 21 नवंबर (शनिवार) को देवउठनी एकादशी के दिन मनाया जाएगा। गोधूलि काल का सर्वश्रेष्ठ विवाह मुहूर्त सायं 05:24 बजे से 07:05 बजे तक रहेगा। चार गन्नों के मंडप में तुलसी जी को दुल्हन सजाकर शालिग्राम जी के साथ 7 फेरे कराएं, तिल अर्पित करें और कन्यादान का संकल्प लें।
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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु
- तुलसी विवाह 2026 मुख्य तिथि: शनिवार, 21 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी महापर्व।
- सर्वश्रेष्ठ विवाह मुहूर्त: गोधूलि काल सायं 05:24 से 07:05 बजे तक (अमृत चौघड़िया संयोग)।
- 8 प्रमुख शहरों की 5-कॉलम समय तालिका व देवउठनी एकादशी पारण समय (22 नवंबर)।
- गन्ने का मंडप, शालिग्राम वर पूजा, कन्यादान संकल्प व 7 फेरे की 7-चरणीय SOP।
- शालिग्राम को तिल अर्पण नियम, देव जगाने का लोक गीत, 7 Schema FAQs व 5 गलतियों से बचाव।
📑 विषय सूची (Table of Contents)
- तुलसी विवाह की पौराणिक कथा व भगवान शालिग्राम का रहस्य
- प्रमुख शहरों में तुलसी विवाह गोधूलि मुहूर्त (5-कॉलम तालिका)
- तुलसी विवाह पूजन सामग्री की संपूर्ण चेकलिस्ट (Pooja Checklist)
- तुलसी-शालिग्राम विवाह की 7-चरणीय संपूर्ण वैदिक विधि (Step-by-Step SOP)
- देवउठनी एकादशी के दिन देव जगाने की पारंपरिक लोक विधि
- तुलसी विवाह के पारंपरिक मंगलाष्टक श्लोक व विवाह मंगल गीत
- तुलसी विवाह में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां (Common Mistakes to Avoid)
- तुलसी विवाह पर अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q. तुलसी विवाह 2026 में किस दिन है - 20 नवंबर या 21 नवंबर?
A. तुलसी विवाह 21 नवंबर 2026 (शनिवार) को देवउठनी एकादशी की उदयातिथि में गोधूलि काल में मनाया जाएगा।
Q. तुलसी विवाह कराने का सबसे उत्तम समय क्या है?
A. 21 नवंबर को सायं 05:24 बजे से सायं 07:05 बजे तक का गोधूलि काल तुलसी विवाह के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त है।
Q. यदि घर में शालिग्राम शिला न हो तो विवाह कैसे करें?
A. शालिग्राम न होने पर भगवान विष्णु की प्रतिमा, लड्डू गोपाल या श्रीकृष्ण जी की प्रतिमा को वर मानकर तुलसी विवाह कराया जा सकता है।
Q. तुलसी विवाह में कन्यादान करने से क्या फल मिलता है?
A. तुलसी जी का कन्यादान सहस्र कन्यादान और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य देता है, जिससे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
Q. क्या शालिग्राम जी को अक्षत (चावल) चढ़ाना चाहिए?
A. नहीं, भगवान शालिग्राम को अक्षत चढ़ाना वर्जित है। अक्षत के स्थान पर हमेशा सफेद या काले तिल अर्पित किए जाते हैं।
Q. तुलसी जी की कितनी परिक्रमा की जाती है?
A. विवाह के समय शालिग्राम जी को हाथ में लेकर तुलसी जी की 7 बार परिक्रमा (सप्तपदी) की जाती है।
Q. देवउठनी एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?
A. पारण 22 नवंबर (रविवार) को प्रातः 06:49 से 08:56 बजे के मध्य चरणामृत ग्रहण कर सात्विक अन्न से करना चाहिए।
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