Transport & Legal ⏱️ 5 मिनट 📅 2026-10-31T09:48:00+05:30

राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक चालान कैसे माफ या कम कराएं? ऑनलाइन टोकन बुकिंग, कोर्ट स्लिप व नए नियम 2026

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राजीव रंजन शर्मा
वरिष्ठ राजस्व व कानूनी सलाहकार

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

यदि आपकी कार या बाइक पर भारी ट्रैफिक चालान पेंडिंग हैं, तो उन्हें भरने के बजाय **राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA)** द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में भारी छूट पर निपटाया जा सकता है। लोक अदालत से 3-4 दिन पहले संबंधित राज्य पुलिस/कोर्ट पोर्टल पर वाहन नंबर दर्ज करके 'ऑनलाइन टोकन' डाउनलोड करें। नियत तारीख पर कोर्ट बेंच के सामने पेश होकर शमनीय अपराधों (Compoundable Offences) पर जज के समक्ष प्रार्थना करें, जहाँ चालान शून्य या नाममात्र जुर्माने पर 'Disposed' हो जाता है।

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1. लोक अदालत चालान: काम की मुख्य बात (AEO Direct Answer)

यदि आपकी गाड़ी पर हजारों रुपये के ट्रैफिक पुलिस या कैमरे वाले ई-चालान कट चुके हैं, तो उन्हें सीधे ऑनलाइन पोर्टल पर पूरा भरने के बजाय राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) का इंतजार करें। लोक अदालत साल में 4 बार लगती है। इसमें ट्रैफिक चालानों के शमन (Compounding) पर विशेष बेंच बैठती हैं, जहाँ जज दोनों पक्षों की सहमति से चालान राशि को 70% से 90% तक कम कर देते हैं या खारिज कर देते हैं।

2. राष्ट्रीय लोक अदालत क्या है और यह कब-कब लगती है?

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत NALSA द्वारा पूरे देश की सभी जिला अदालतों, उच्च न्यायालयों और तालुका कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाती है।

  • यह वर्ष में सामान्यतः 4 बार (फरवरी/मार्च, मई/जून, सितंबर, और दिसंबर) आयोजित होती है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य मुकदमों के बोझ को कम करना और नागरिकों को बिना किसी कोर्ट फीस या वकील के त्वरित न्याय दिलाना है।

3. कौन-से चालान निपट सकते हैं और कौन-से नहीं?

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श्रेणी चालान का प्रकार लोक अदालत में स्थिति
शमनीय (Compoundable) हेलमेट न लगाना, सीट बेल्ट, ओवर स्पीडिंग, रेड लाइट जंप, जेब्रा क्रॉसिंग, पॉल्यूशन न होना। 100% स्वीकार्य (भारी छूट या शून्य शुल्क पर निस्तारण)।
गैर-शमनीय (Non-Compoundable) शराब पीकर वाहन चलाना (Drunken Driving), खतरनाक स्टंट रेसिंग, एक्सीडेंट के मामले। अस्वीकार्य (केवल नियमित आपराधिक कोर्ट में ट्रायल होगा)।

4. ऑनलाइन टोकन बुकिंग क्यों अनिवार्य है?

पहले लोग बिना सूचना के सीधे कोर्ट पहुंच जाते थे जिससे भगदड़ मच जाती थी। अब ट्रैफिक पुलिस (जैसे दिल्ली, यूपी, राजस्थान ट्रैफिक पुलिस) अनिवार्य ऑनलाइन टोकन सिस्टम चलाती है:

  • लोक अदालत की तारीख से 3-4 दिन पहले पोर्टल पर लिंक लाइव होता है।
  • वाहन नंबर और चेसिस नंबर डालने पर पेंडिंग चालान की लिस्ट खुलती है।
  • आप अपनी नजदीकी जिला अदालत (जैसे तीस हजारी, साकेत, कड़कड़डूमा या संबंधित जिला कोर्ट) और टाइम स्लॉट (जैसे 10:00 से 12:00 बजे) का चुनाव करते हैं।
  • टोकन स्लिप पर कोर्ट नंबर, रूम नंबर और जज की बेंच का नाम लिखा होता है।

5. टोकन से लेकर कोर्ट डिस्पोजल स्लिप तक की स्टेप-बाय-स्टेप SOP

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  1. टोकन डाउनलोड व प्रिंट: ऑनलाइन टोकन और चालान की प्रति का प्रिंट निकालें।
  2. दस्तावेज साथ रखें: मूल आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस और टोकन स्लिप।
  3. कोर्ट रूम में उपस्थिति: निर्धारित समय पर कोर्ट रूम के बाहर अपनी फाइल जमा करें।
  4. जज के समक्ष पेशी: जब आपका नाम पुकारा जाए, तो जज के सामने खड़े होकर विनम्रतापूर्वक गलती स्वीकार करें और वित्तीय तंगी का हवाला देते हुए चालान माफ करने की प्रार्थना करें।
  5. जुर्माना तय होना: जज चालान की प्रकृति देखकर जुर्माना तय करते हैं (उदा. ₹5,000 के चालान पर ₹500 या शून्य)।
  6. नकद भुगतान व डिस्पोजल स्लिप: कोर्ट कैशियर के पास जुर्माना जमा करके 'Disposal Slip' प्राप्त करें। 48 घंटे में ट्रैफिक पुलिस पोर्टल से चालान डिलीट हो जाता है।

6. लोक अदालत आदेश के खिलाफ अपील न होने का नियम (धारा 21 NALSA)

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 21 के अनुसार लोक अदालत का फैसला एक 'सिविल कोर्ट डिक्री' माना जाता है। चूंकि यह फैसला दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी से होता है, इसलिए इसके खिलाफ देश की किसी भी अदालत में कोई अपील दायर नहीं की जा सकती। यह अंतिम और बाध्यकारी होता है।

7. अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

1. क्या लोक अदालत में ट्रैफिक चालान पूरी तरह 100% माफ हो सकता है?

कोर्ट की परिस्थिति और जज के स्वविवेक पर निर्भर करता है। कई बार तकनीकी त्रुटि या अत्यंत पुराने मामलों में चालान शून्य (माफ) कर दिया जाता है, अथवा भारी चालान में 70% से 90% तक की भारी छूट देकर नाममात्र शुल्क लिया जाता है।

2. लोक अदालत में जाने के लिए ऑनलाइन टोकन बुक करना क्यों अनिवार्य है?

कोर्ट परिसरों में भारी भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए पुलिस प्रशासन ऑनलाइन टोकन व्यवस्था लागू करता है। बिना निर्धारित समय और कोर्ट नंबर वाले टोकन के आपका चालान बेंच के सामने नहीं रखा जा सकता।

3. क्या शराब पीकर गाड़ी चलाने (Drunk & Drive) का चालान लोक अदालत में निपट सकता है?

नहीं, धारा 185 (शराब पीकर गाड़ी चलाना) एक गंभीर गैर-शमन योग्य (Non-Compoundable) अपराध है, जिसमें कोर्ट जेल या लाइसेंस सस्पेंशन का फैसला नियमित ट्रायल में ही करती है।

4. क्या लोक अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील हो सकती है?

नहीं, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 21 के तहत लोक अदालत का फैसला आपसी सहमति से होता है, इसलिए इसके विरुद्ध किसी भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं की जा सकती।

5. क्या लोक अदालत में चालान का निस्तारण कराने के लिए वकील करना पड़ता है?

बिल्कुल नहीं। लोक अदालत का उद्देश्य ही आम नागरिक को बिना वकील के सीधा, सरल और निशुल्क न्याय प्रदान करना है। आप स्वयं अपने टोकन और गाड़ी के कागजात के साथ जज के सामने खड़े हो सकते हैं।

8. राष्ट्रीय लोक अदालत टोकन बुकिंग का सीधा पोर्टल लिंक व समय सारिणी

राज्य / केंद्रशासित प्रदेश टोकन बुकिंग आधिकारिक वेबसाइट टोकन खुलने का समय
दिल्ली (Delhi) traffic.delhipolice.gov.in/notice/lokadalat लोक अदालत से 3 दिन पहले सुबह 10:00 बजे।
उत्तर प्रदेश (UP) upslsa.up.nic.in व वर्चुअल कोर्ट पोर्टल निर्धारित तिथि से 4 दिन पूर्व।
महाराष्ट्र व अन्य राज्य legalservices.maharashtra.gov.in जिला न्यायालय नोटिस बोर्ड व ऑनलाइन।

9. कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु आवेदन पत्र का प्रारूप

समक्ष माननीय पीठासीन अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत, जिला...

चालान संख्या: ....... / वाहन रजिस्ट्रेशन संख्या: .......

प्रार्थना पत्र वास्ते शमन / निस्तारण ई-चालान।

महोदय,
निवेदन है कि प्रार्थी उक्त वाहन का रजिस्टर्ड स्वामी है। प्रार्थी के वाहन पर अनजाने में गति सीमा व लाल बत्ती उल्लंघन का चालान कट गया था। प्रार्थी एक मध्यमवर्गीय नागरिक है और वर्तमान में पारिवारिक व आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। प्रार्थी अपनी भूल स्वीकार करता है और भविष्य में यातायात नियमों का पूर्ण पालन करने का वचन देता है।
अतः श्रीमान जी से विनम्र प्रार्थना है कि मानवीय आधार पर उक्त चालान को न्यूनतम नाममात्र जुर्माने पर निस्तारित (Dispose off) करने की कृपा करें।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या लोक अदालत में ट्रैफिक चालान पूरी तरह 100% माफ हो सकता है?

A. कोर्ट की परिस्थिति और जज के स्वविवेक पर निर्भर करता है। कई बार तकनीकी त्रुटि या अत्यंत पुराने मामलों में चालान शून्य (माफ) कर दिया जाता है, अथवा भारी चालान में 70% से 90% तक की भारी छूट देकर नाममात्र शुल्क लिया जाता है।

Q. लोक अदालत में जाने के लिए ऑनलाइन टोकन बुक करना क्यों अनिवार्य है?

A. कोर्ट परिसरों में भारी भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए पुलिस प्रशासन ऑनलाइन टोकन व्यवस्था लागू करता है। बिना निर्धारित समय और कोर्ट नंबर वाले टोकन के आपका चालान बेंच के सामने नहीं रखा जा सकता।

Q. क्या शराब पीकर गाड़ी चलाने (Drunk & Drive) का चालान लोक अदालत में निपट सकता है?

A. नहीं, धारा 185 (शराब पीकर गाड़ी चलाना) एक गंभीर गैर-शमन योग्य (Non-Compoundable) अपराध है, जिसमें कोर्ट जेल या लाइसेंस सस्पेंशन का फैसला नियमित ट्रायल में ही करती है।

Q. क्या लोक अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील हो सकती है?

A. नहीं, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 21 के तहत लोक अदालत का फैसला आपसी सहमति से होता है, इसलिए इसके विरुद्ध किसी भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं की जा सकती।

Q. क्या लोक अदालत में चालान का निस्तारण कराने के लिए वकील करना पड़ता है?

A. बिल्कुल नहीं। लोक अदालत का उद्देश्य ही आम नागरिक को बिना वकील के सीधा, सरल और निशुल्क न्याय प्रदान करना है। आप स्वयं अपने टोकन और गाड़ी के कागजात के साथ जज के सामने खड़े हो सकते हैं।

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