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राशन डीलर (कोटेदार) की नई दुकान का लाइसेंस कैसे लें 2026: पात्रता नियम, ग्राम सभा प्रस्ताव, सिक्योरिटी डिपॉजिट व ई-पॉस आवंटन प्रक्रिया

SS
सुनीता शर्मा
e-Governance & नागरिक सेवा विशेषज्ञ

विगत 9 वर्षों से भारत सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), डिजिटल पहचान पत्रों, राशन कार्ड सुधारों और नागरिक कल्याण योजनाओं पर निरंतर शोध एवं तथ्यात्मक लेखन।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

राशन डीलर बनने के लिए आयु 21-45 वर्ष, न्यूनतम 10वीं पास और स्वच्छ छवि अनिवार्य है। ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ की उपस्थिति में ग्राम सभा की खुली बैठक में प्रस्ताव पास होता है, जहां महिला स्वयं सहायता समूहों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलती है। अनुमोदन के बाद एसडीएम द्वारा लाइसेंस व ई-पॉस मशीन आवंटित की जाती है।

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मानदंड ग्रामीण उचित दर दुकान (Gram Panchayat) शहरी उचित दर दुकान (Nagar Palika/Nigam) न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता अंतिम अनुमोदन प्राधिकारी
चयन प्रक्रिया ग्राम सभा की खुली बैठक, खुली वोटिंग व वीडियोग्राफी ऑनलाइन ई-टेंडर, विभागीय स्क्रूटनी व कंप्यूटराइज्ड लॉटरी 10वीं / 12वीं + बेसिक कंप्यूटर उपजिलाधिकारी (SDM / SDO)
सिक्योरिटी डिपॉजिट ₹5,000 से ₹10,000 (FD / NSC) ₹15,000 से ₹25,000 (बैंक गारंटी / FD) न्यूनतम 10वीं उत्तीर्ण जिला पूर्ति अधिकारी (DSO)
सर्वोच्च प्राथमिकता महिला स्वयं सहायता समूह (NRLM SHG) महिला स्वयं सहायता समूह / पूर्व सैनिक / शिक्षित युवा 12वीं उत्तीर्ण (SHG सचिव) जिलाधिकारी (DM / Collector)
कार्डधारकों की संख्या औसतन 300 से 800 राशन कार्ड औसतन 800 से 1,500 राशन कार्ड कंप्यूटर दक्षता अनिवार्य सहायक आयुक्त (खाद्य)

📌 मुख्य बातें (Quick Key Takeaways)

  • उचित दर दुकान (FPS) लाइसेंस: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सरकारी राशन बांटने के लिए खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा 'कोटेदार' या FPS डीलर का लाइसेंस जारी किया जाता है।
  • ग्राम सभा की खुली बैठक अनिवार्य (ग्रामीण क्षेत्र): ग्रामीण क्षेत्रों में कोटेदार का चयन ग्राम प्रधान द्वारा व्यक्तिगत रूप से नहीं होता, बल्कि खंड विकास अधिकारी (BDO) व ADO पंचायत की उपस्थिति में ग्राम सभा की खुली बैठक में बहुमत या हाथ उठाकर प्रस्ताव पास होता है।
  • शहरी क्षेत्र में ई-लॉटरी व ई-टेंडर: नगर निगम एवं नगर पालिका क्षेत्रों में जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) द्वारा समाचार पत्रों और आधिकारिक पोर्टल पर विज्ञापन जारी कर ऑनलाइन आवेदन व लॉटरी के जरिए आवंटन किया जाता है।
  • आरक्षण व प्राथमिकता श्रेणियां: महिला स्वयं सहायता समूह (Women SHGs), भूतपूर्व सैनिक, अर्धसैनिक बलों के आश्रित, दिव्यांग और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को चयन में शीर्ष कानूनी प्राथमिकता मिलती है।
  • e-POS मशीन व आधुनिक वेइंग स्केल: नए चयनित डीलर को सरकार द्वारा 4G e-POS बायोमेट्रिक मशीन और इलेक्ट्रॉनिक कांटा आवंटित किया जाता है, जो सीधे राज्य सर्वर से लिंक रहते हैं।
🌐 आधिकारिक पोर्टल: राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग (e-PDS Portal) | केंद्रीय पोर्टल: nfsa.gov.in | विधिक नियंत्रण: आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 व PDS कंट्रोल ऑर्डर 2015

🎯 लक्षित पाठक वर्ग: यह संपूर्ण मार्गदर्शिका विशेष रूप से ग्रामीण व शहरी शिक्षित युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG), सीएससी संचालकों और पूर्व सैनिकों के लिए तैयार की गई है, जो अपने क्षेत्र में सरकारी राशन दुकान (कोटेदार) का वैध लाइसेंस प्राप्त कर आजीविका शुरू करना चाहते हैं।

1. राशन डीलर लाइसेंस कैसे लें? (Direct Answer)

सीधा उत्तर (AEO Direct Answer): राशन डीलर (कोटेदार) बनने के लिए उम्मीदवार की आयु 21 से 45 वर्ष, न्यूनतम 10वीं/12वीं कक्षा उत्तीर्ण, बुनियादी कंप्यूटर व ई-पॉस संचालन का ज्ञान, और स्वच्छ आपराधिक छवि (पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र) होना अनिवार्य है। ग्रामीण क्षेत्र में जब कोई दुकान रिक्त होती है, तो BDO और ग्राम विकास अधिकारी की उपस्थिति में ग्राम सभा की खुली बैठक में प्रस्ताव पारित कराया जाता है, जिसमें महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय शिक्षित बेरोजगारों को प्राथमिकता मिलती है। इसके बाद उपजिलाधिकारी (SDM/SDO) की अध्यक्षता वाली तहसील स्तरीय चयन समिति सिक्योरिटी डिपॉजिट (₹5,000–₹10,000) जमा करवाकर अंतिम आवंटन आदेश व e-POS मशीन जारी करती है।

राशन कार्ड और खाद्यान्न वितरण के पूरे कानूनी तंत्र को समझने के लिए हमारी व्यापक मार्गदर्शिका राशन कार्ड संपूर्ण गाइड व नियम 2026 पढ़ें। इसके अलावा अनाज के सटीक आवंटन फॉर्मूले को जानने के लिए राशन कोटा व यूनिट कैलकुलेटर का संदर्भ लें।

2. कोटेदार चयन हेतु आवश्यक पात्रता मानदंड व अयोग्यता शर्तें 2026

सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश (PDS Control Order) के तहत राशन डीलर बनने के लिए निम्नलिखित विधिक योग्यताएं पूरी होनी आवश्यक हैं:

  • आयु सीमा: आवेदन की तिथि पर उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 45 वर्ष होनी चाहिए (भूतपूर्व सैनिकों के लिए राज्य नियमानुसार छूट)।
  • शैक्षणिक योग्यता: आवेदक मान्यता प्राप्त बोर्ड से न्यूनतम हाईस्कूल (10वीं) या इंटरमीडिएट (12वीं) उत्तीर्ण होना चाहिए। कंप्यूटर पर हिंदी/अंग्रेजी टाइपिंग और डिजिटल मशीन संचालन का ज्ञान आवश्यक है।
  • स्थानीय निवासी: आवेदक उसी ग्राम पंचायत या शहरी वार्ड का मूल निवासी होना चाहिए जहां की उचित दर दुकान रिक्त घोषित हुई है।
  • अपराधिक पृष्ठभूमि न होना: आवेदक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) या आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 (Essential Commodities Act) की धारा 3/7 के अंतर्गत कोई आपराधिक मामला दर्ज या विचाराधीन नहीं होना चाहिए।
  • पारिवारिक प्रतिबंध (अत्यंत महत्वपूर्ण): आवेदक के परिवार का कोई भी सदस्य (पति/पत्नी, माता-पिता, सगा भाई, बेटा/बेटी) वर्तमान में ग्राम प्रधान, उप-प्रधान, पंचायत सचिव या खाद्य विभाग का कर्मचारी नहीं होना चाहिए। यह नियम निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।
  • दुकान का सुरक्षित स्थान: आवेदक के पास अनाज के सुरक्षित भंडारण हेतु कम से कम 150 से 200 वर्ग फुट का पक्का कमरा, अग्निशामक व्यवस्था और वजन तौलने हेतु पर्याप्त स्थान उपलब्ध होना चाहिए।

3. कानूनी वरीयता क्रम: किसे मिलता है पहला अधिकार?

यदि एक ही रिक्त राशन दुकान के लिए एक से अधिक आवेदक आते हैं, तो चयन समिति निम्नलिखित प्राथमिकताओं के आधार पर निर्णय लेती है:

  1. प्रथम प्राथमिकता: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत पंजीकृत सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूह (Women Self Help Group - SHG)।
  2. द्वितीय प्राथमिकता: भूतपूर्व सैनिक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित या युद्ध में वीरगति प्राप्त सैनिकों की वीरांगनाएं।
  3. तृतीय प्राथमिकता: पंजीकृत प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) या सहकारी विपणन समितियां।
  4. चतुर्थ प्राथमिकता: स्थानीय दिव्यांग नागरिक (शारीरिक अक्षमता के बावजूद दुकान संचालन में सक्षम)।
  5. पंचम प्राथमिकता: स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवा (उच्चतर शैक्षणिक योग्यता वाले को वरीयता)।

4. ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम सभा की खुली बैठक व आवंटन प्रक्रिया

ग्रामीण क्षेत्रों में कोटेदार चयन की प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी और जनता की उपस्थिति में होती है:

स्टेप-बाय-स्टेप ग्राम सभा प्रस्ताव:

1. रिक्तता की सार्वजनिक घोषणा: जब किसी गांव में पुराना कोटा निरस्त होता है या नया कोटा सृजित होता है, तो खंड विकास अधिकारी (BDO) और सहायक विकास अधिकारी (ADO पंचायत) द्वारा गांव में डुगडुगी पिटवाकर या सार्वजनिक नोटिस चस्पा करवाकर खुली बैठक की तिथि (कम से कम 7 दिन पहले) घोषित की जाती है।

2. पर्यवेक्षक अधिकारी की उपस्थिति: बैठक में बीडीओ द्वारा नामित राजपत्रित पर्यवेक्षक अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और कानूनगो/लेखपाल उपस्थित रहते हैं।

3. खुली बैठक और वीडियोग्राफी: ग्राम सभा के पंजीकृत मतदाताओं की उपस्थिति में खुली चर्चा होती है। प्रत्येक उम्मीदवार के पक्ष में उपस्थित ग्रामीण हाथ उठाकर अपना समर्थन दर्ज कराते हैं। पूरी प्रक्रिया की निर्बाध वीडियोग्राफी कराई जाती है ताकि पक्षपात का आरोप न लगे।

4. प्रस्ताव रजिस्टर पर हस्ताक्षर: सर्वाधिक समर्थन प्राप्त पात्र उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव ग्राम सभा रजिस्टर में दर्ज किया जाता है और उपस्थित ग्रामीणों व अधिकारियों के हस्ताक्षर कराए जाते हैं।

5. तहसील स्तरीय अनुमोदन: प्रस्ताव की फाइल उपजिलाधिकारी (SDM) की अध्यक्षता वाली समिति को भेजी जाती है। पुलिस सत्यापन और दस्तावेज जांच के बाद अंतिम लाइसेंस (प्रपत्र-क) जारी कर दिया जाता है।

5. शहरी क्षेत्र में उचित दर दुकान आवंटन: ई-टेंडर व ई-लॉटरी नियम

नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों में खुली बैठक संभव नहीं होती, इसलिए वहां की प्रक्रिया अधिक तकनीकी होती है:

  • विज्ञप्ति का प्रकाशन: जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) द्वारा प्रमुख राज्य स्तरीय समाचार पत्रों और जिले की आधिकारिक एनआईसी वेबसाइट पर रिक्त वार्डों की सूची प्रकाशित की जाती है।
  • ऑनलाइन आवेदन: इच्छुक नागरिक राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के ई-टेंडर / राशन डीलर पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन भरते हैं।
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट व प्रोसेसिंग फीस: शहरी क्षेत्र में ₹10,000 से ₹25,000 तक की बैंक गारंटी (FD या NSC) चालान के माध्यम से जमा करनी होती है।
  • दस्तावेज सत्यापन व स्थल निरीक्षण: क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी (ARO) और पूर्ति निरीक्षक (Supply Inspector) आवेदक की प्रस्तावित दुकान का भौतिक निरीक्षण करते हैं कि दुकान मुख्य सड़क पर है या नहीं, ट्रक पहुंचने का रास्ता है या नहीं।
  • ई-लॉटरी द्वारा चयन: सभी पात्र आवेदकों की स्क्रूटनी के बाद कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी (DM) या अपर जिलाधिकारी (ADM नागरिक आपूर्ति) की निगरानी में कंप्यूटराइज्ड लॉटरी निकाली जाती है।

6. आवश्यक दस्तावेजों की संपूर्ण चेकलिस्ट (Document Checklist)

राशन डीलर लाइसेंस के आवेदन के समय निम्नलिखित दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित प्रतियां तैयार रखें:

  • पहचान एवं निवास प्रमाण: आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र (Voter ID), और परिवार रजिस्टर की नकल / मूल निवास प्रमाण पत्र।
  • शैक्षणिक प्रमाण पत्र: हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) की अंकतालिका व सनद।
  • कंप्यूटर साक्षरता प्रमाण पत्र: CCC, PGDCA या किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से न्यूनतम 3 महीने का बुनियादी कंप्यूटर डिप्लोमा।
  • पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र: पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय द्वारा जारी वैध डिजिटल कैरेक्टर सर्टिफिकेट (6 महीने से पुराना न हो)।
  • बैंक सॉल्वेंसी व हैसियत प्रमाण पत्र: बैंक खाते का पिछले 6 महीने का स्टेटमेंट और कम से कम ₹40,000 से ₹50,000 की वित्तीय सक्षमता का प्रमाण पत्र।
  • दुकान का मालिकाना हक या किरायानामा: प्रस्तावित दुकान का रजिस्ट्री पत्र अथवा न्यूनतम 3 से 5 वर्ष का नोटरी प्रमाणित रेंट एग्रीमेंट (किरायानामा)।
  • शपथ पत्र (Affidavit): ₹100 के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर शपथ पत्र कि आवेदक के परिवार का कोई सदस्य ग्राम प्रधान/सरकारी सेवक नहीं है और कोई आपराधिक मुकदमा लंबित नहीं है।

विधिक पहचान नियमों को विस्तार से समझने के लिए हमारा विश्लेषण राशन कार्ड पहचान प्रमाण कानून व आधिकारिक दस्तावेज नियम अवश्य पढ़ें।

7. e-POS मशीन, इलेक्ट्रॉनिक तराजू और तकनीकी सेटअप

लाइसेंस स्वीकृत होने के उपरांत खाद्य विभाग डीलर को आधुनिक वितरण हार्डवेयर प्रदान करता है:

  • 4G बायोमेट्रिक ई-पॉस मशीन: एंड्रॉइड आधारित टचस्क्रीन टर्मिनल जिसमें फिंगरप्रिंट स्कैनर और आधार Face RD कैमरा इनबिल्ट होता है। इस मशीन में सरकारी मल्टी-ऑपरेटर 4G सिम कार्ड लगा होता है।
  • ब्लूटूथ/केबल कनेक्टेड वेइंग स्केल (इलेक्ट्रॉनिक कांटा): मशीन सीधे इलेक्ट्रॉनिक कांटे से जुड़ी होती है। जब तक बोरी या थैले का वजन सटीक नहीं होता, मशीन से खाद्यान्न वितरण पर्ची प्रिंट नहीं होती। इससे घटतौली पर 100% अंकुश लगता है।
  • आइरिस स्कैनर (Iris Scanner): बुजुर्ग और मेहनत-मजदूरी करने वाले नागरिकों के लिए आइरिस स्कैनर भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे फिंगरप्रिंट न आने पर भी वितरण संभव हो सके। अधिक जानकारी के लिए बायोमेट्रिक मिसमैच व फिंगरप्रिंट समाधान देखें।
  • ई-वे बिल व डिजिटल चालान: एफसीआई गोदाम से दुकान तक राशन पहुंचने की रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग होती है और डीलर को e-POS में डिजिटल इनवर्ड चालान स्वीकार करना होता है।

8. राशन डीलर का कमीशन, मार्जिन और आय मॉडल 2026

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में खाद्यान्न का वितरण बिल्कुल मुफ्त (₹0) होने के बावजूद राशन डीलर को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा आकर्षक कमीशन और हैंडलिंग चार्ज दिया जाता है:

  • प्रति क्विंटल डीलर मार्जिन: केंद्र सरकार NFSA नियमों के तहत ₹90 प्रति क्विंटल तक का मूल कमीशन देती है, जिसमें राज्य सरकारें अपनी ओर से ₹50 से ₹150 प्रति क्विंटल तक टॉप-अप कमीशन जोड़ती हैं। कुल कमीशन ₹140 से ₹250 प्रति क्विंटल तक होता है।
  • जूट बोरी (Gunny Bags) की बिक्री: गेहूं और चावल की खाली बोरियों (बारदाना) को बेचकर डीलर प्रति बोरी ₹20 से ₹35 तक अतिरिक्त शुद्ध आय प्राप्त करता है।
  • सीएससी व अन्य सेवाएं (FPS as CSC): केंद्र सरकार की नई नीति के तहत राशन दुकानों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में बदला जा रहा है। कोटेदार बिजली बिल भुगतान, आय-जाति प्रमाण पत्र आवेदन, मोबाइल रिचार्ज और मिनी एटीएम (AEPS) बैंकिंग सेवाएं देकर अतिरिक्त ₹10,000 से ₹25,000 प्रतिमाह कमा सकते हैं।

मुफ्त राशन योजनाओं के राष्ट्रीय बजटीय प्रावधानों को समझने के लिए हमारा विश्लेषण PMGKAY मुफ्त राशन योजना 2028 कैबिनेट नियम देखें।

9. कोटेदार के कर्तव्य, स्टॉक रजिस्टर और सतर्कता ऑडिट से बचाव

लाइसेंस प्राप्त करने के बाद कोटेदार को सख्त विधिक नियमों का पालन करना अनिवार्य है, अन्यथा लाइसेंस निलंबित हो सकता है:

  • दुकान खोलने का समय: सुबह 8:00 से 12:00 और शाम 4:00 से 8:00 बजे तक (ऋतु अनुसार निर्धारित सरकारी घंटों में) दुकान खोलना अनिवार्य है।
  • सूचना पट्ट (Notice Board): दुकान के बाहर बड़ा बोर्ड लगाना जरूरी है जिसमें दुकान खुलने का समय, कुल आवंटित खाद्यान्न, स्टॉक बैलेंस, खाद्यान्न की दर (₹0 मुफ्त), और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर (1967) स्पष्ट लिखा हो।
  • नियमित स्टॉक मिलान: गोदाम से आए माल और ई-पॉस में वितरित खाद्यान्न का अंतर शून्य होना चाहिए। किसी भी समय पूर्ति निरीक्षक (Supply Inspector) द्वारा औचक निरीक्षण किया जा सकता है।
  • नागरिक सतर्कता समिति के प्रति जवाबदेही: ग्राम सभा सतर्कता समिति को हर महीने स्टॉक रजिस्टर का निरीक्षण कराने का विधिक अधिकार है। इस बारे में हमारा गाइड राशन कार्ड सोशल ऑडिट व सतर्कता समिति नियम पढ़ें।
  • कम राशन देने पर कानूनी कार्रवाई: यदि डीलर किसी भी कार्डधारक को निर्धारित कोटे से कम अनाज देता है, तो उस पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत जेल और लाइसेंस जब्ती की कार्रवाई होती है। देखें कोटेदार की शिकायत व कानूनी अधिकार।

10. ग्रामीण बनाम शहरी राशन डीलर लाइसेंस तुलना 2026

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के चयन नियमों की मुख्य तुलना नीचे दी गई है:

मानदंड ग्रामीण उचित दर दुकान (Gram Panchayat) शहरी उचित दर दुकान (Nagar Palika/Nigam) न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता अंतिम अनुमोदन प्राधिकारी
चयन प्रक्रिया ग्राम सभा की खुली बैठक, खुली वोटिंग व वीडियोग्राफी ऑनलाइन ई-टेंडर, विभागीय स्क्रूटनी व कंप्यूटराइज्ड लॉटरी 10वीं / 12वीं + बेसिक कंप्यूटर उपजिलाधिकारी (SDM / SDO)
सिक्योरिटी डिपॉजिट ₹5,000 से ₹10,000 (FD / NSC) ₹15,000 से ₹25,000 (बैंक गारंटी / FD) न्यूनतम 10वीं उत्तीर्ण जिला पूर्ति अधिकारी (DSO)
सर्वोच्च प्राथमिकता महिला स्वयं सहायता समूह (NRLM SHG) महिला स्वयं सहायता समूह / पूर्व सैनिक / शिक्षित युवा 12वीं उत्तीर्ण (SHG सचिव) जिलाधिकारी (DM / Collector)
कार्डधारकों की संख्या औसतन 300 से 800 राशन कार्ड औसतन 800 से 1,500 राशन कार्ड कंप्यूटर दक्षता अनिवार्य सहायक आयुक्त (खाद्य)

11. राशन डीलर लाइसेंस से जुड़े 5 बड़े सवाल (FAQs)

Q1. क्या ग्राम प्रधान का सगा भाई या बेटा राशन डीलर बन सकता है?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के स्पष्ट नियमों के अनुसार ग्राम प्रधान, उप-प्रधान, पंचायत सचिव या उनके सगे पारिवारिक सदस्यों (पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, सहोदर भाई) को उसी ग्राम पंचायत में राशन दुकान का लाइसेंस आवंटित नहीं किया जा सकता। यह हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने के लिए कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।

Q2. क्या राशन डीलर बनने के बाद दुकान पर सीएससी (CSC) सेंटर चला सकते हैं?

उत्तर: हां, केंद्र सरकार के खाद्य मंत्रालय द्वारा सभी उचित दर दुकानों को 'FPS-cum-CSC' के रूप में उन्नत करने की योजना को मंजूरी दी गई है। राशन डीलर अपनी दुकान पर वैध सीएससी आईडी लेकर पैन कार्ड, पासपोर्ट, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरने की सेवा देकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

Q3. राशन डीलर को e-POS मशीन और इंटरनेट का खर्च कौन वहन करता है?

उत्तर: ई-पॉस मशीन, वजन कांटा और उसमें लगने वाला 4G डाटा सिम खाद्य विभाग द्वारा अधिकृत तकनीकी एजेंसी (जैसे Linkwell, Visiontek, OASYS) के माध्यम से मुफ्त प्रदान किया जाता है। मशीन का मेंटेनेंस और 4G डेटा बिल भी सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

Q4. क्या दूसरे राज्य के प्रवासी लाभार्थियों को राशन देना डीलर के लिए अनिवार्य है?

उत्तर: हां, 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (ONORC) नियमों के तहत कोई भी राशन डीलर किसी भी प्रवासी कार्डधारक को अनाज देने से मना नहीं कर सकता। यदि कोई डीलर मना करता है तो कार्डधारक टोल-फ्री 14445 पर शिकायत दर्ज कर सकता है, जिस पर डीलर के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है। देखें ONORC राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी नियम।

Q5. यदि राशन डीलर की मृत्यु हो जाए तो क्या दुकान परिवार को विरासत में मिलती है?

उत्तर: यदि वर्तमान राशन डीलर की मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रित (पत्नी, पुत्र या अविवाहित पुत्री) को 'अनुकंपा के आधार पर' (Compassionate Grounds) दुकान का लाइसेंस स्थानांतरित करने का प्रावधान अधिकांश राज्यों में है, बशर्ते आश्रित न्यूनतम शैक्षणिक और आयु पात्रता पूरी करता हो। इसके लिए मृत्यु के 6 महीने के भीतर उपजिलाधिकारी (SDM) कार्यालय में आवेदन करना होता है।

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