yojana ⏱️ 11 मिनट पढ़ें 📅 16 सितंबर 2026

PM Fasal Bima Yojana 2026: खरीफ व रबी फसल नुकसान पर 72 घंटे में क्लेम, नई प्रीमियम दरें व Crop Insurance App गाइड

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विक्रमादित्य वर्मा
वरिष्ठ नीति विश्लेषक एवं ग्रामीण विकास विशेषज्ञ

विगत 9 वर्षों से भारत सरकार के पंचायती राज, कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालयों की नीतियों और डीबीटी योजनाओं पर शोधपरक लेखन।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत प्रतिकूल मौसम, ओलावृष्टि, जलभराव या कीट प्रकोप से फसल नष्ट होने पर किसान को घटना के 72 घंटे के भीतर आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप (Crop Insurance App) या टोल-फ्री नंबर 14447 पर सूचना दर्ज कराना अनिवार्य है। खरीफ फसलों के लिए किसान को मात्र 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% का न्यूनतम प्रीमियम देना होता है, जबकि शेष भारी सब्सिडी केंद्र व राज्य सरकारें वहन करती हैं। डिजिटल सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे के बाद स्वीकृत क्लेम राशि सीधे किसान के आधार लिंक बैंक खाते में डीबीटी द्वारा भेजी जाती है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • फसल क्षति होने के अधिकतम 72 घंटे के भीतर स्थानीय स्तर पर नुकसान की डिजिटल सूचना देना कानूनी रूप से अनिवार्य।
  • न्यूनतम प्रीमियम दरें: खरीफ फसलों पर मात्र 2%, रबी फसलों पर 1.5% तथा वार्षिक बागवानी फसलों पर 5%।
  • क्रॉप इंश्योरेंस मोबाइल ऐप (Crop Insurance App) से खेत की जियो-टैग्ड फोटो अपलोड कर तुरंत पावती संख्या प्राप्त करें।
  • क्लेम असेसमेंट में पारदर्शिता हेतु सीआरओपीआईसी (CROPIC) सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग तकनीक का व्यापक प्रयोग।
फसल का प्रकार / मौसमकिसान द्वारा देय प्रीमियमसरकारी सब्सिडी (केंद्र + राज्य)क्लेम सूचना की अधिकतम सीमा
सभी खरीफ खाद्य व तिलहन फसलें2.0%शेष प्रीमियम का 100% सरकार वहन करती हैआपदा के 72 घंटे के भीतर
सभी रबी खाद्य व तिलहन फसलें1.5%शेष प्रीमियम का 100% सरकार वहन करती हैआपदा के 72 घंटे के भीतर
वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलें5.0%शेष प्रीमियम सरकार द्वारा वहनआपदा के 72 घंटे के भीतर
फसल कटाई उपरांत नुकसान (Post-Harvest)बीमित राशि अनुसारखलिहान/खेत में सुखाने के दौरान 14 दिन तक सुरक्षास्थानीय सर्वे उपरांत
आधिकारिक क्लेम हेल्पलाइनpmfby.gov.inराष्ट्रीय किसान हेल्पलाइन: 1444724x7 निःशुल्क सेवा

1. पीएम फसल बीमा योजना: किन आपदाओं में मिलता है 100% मुआवजा?

PM Fasal Bima Yojana 2026: भारतीय किसान फसल बीमा दावा
चित्र: भारतीय अन्नदाता पीएमएफबीवाई के तहत प्राकृतिक आपदाओं से अपनी मेहनत और पूंजी को सुरक्षित रख सकते हैं।

भारतीय कृषि मौसम की अनिश्चितताओं पर अत्यधिक निर्भर है। कभी बेमौसम मूसलाधार बारिश, कभी सूखा, तो कभी ओलावृष्टि या टिड्डी दल का आक्रमण किसान की महीनों की मेहनत और पूंजी को कुछ ही घंटों में मिट्टी में मिला देता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) देश के करोड़ों किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच का कार्य करती है।

इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित चार प्रमुख चरणों में फसल नुकसान की भरपाई की जाती है:

  • बुवाई/रोपाई में बाधा (Prevented Sowing): यदि प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों (जैसे गंभीर सूखा या अत्यधिक बाढ़) के कारण किसान अपने बीमित क्षेत्र में बुवाई नहीं कर पाता, तो बीमित राशि का 25% तक क्षतिपूर्ति अग्रिम दी जाती है।
  • खड़ी फसल का नुकसान (Standing Crop Loss): सूखे, बाढ़, व्यापक कीट प्रकोप या प्राकृतिक आग से खेत में खड़ी फसल नष्ट होने पर व्यापक उपज सूचकांक के आधार पर शत-प्रतिशत भरपाई की जाती है।
  • स्थानीयकृत आपदाएं (Localized Calamities): ओलावृष्टि (Hailstorm), भूस्खलन, बादल फटने या खेत में अचानक जलभराव (Inundation) से हुए व्यक्तिगत नुकसान का खेत-वार सर्वे किया जाता है।
  • कटाई उपरांत नुकसान (Post-Harvest Losses): फसल कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी कटी हुई फसल को चक्रवात, बेमौसम बारिश या तूफान से क्षति पहुंचने पर 14 दिनों तक सुरक्षा मिलती है।

2. 72 घंटे का स्वर्णिम नियम: समय पर सूचना न देने पर क्लेम क्यों निरस्त होता है?

फसल बीमा में अधिकांश किसानों के क्लेम निरस्त होने का सबसे मुख्य कारण निर्धारित समय-सीमा का उल्लंघन है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार:

72 घंटे की अनिवार्य अधिसूचना नियम:

यदि आपके खेत में ओलावृष्टि, बादल फटने या जलभराव से नुकसान हुआ है, तो आपदा समाप्त होने के ठीक 72 घंटे (3 दिन) के भीतर बीमा कंपनी, बैंक, कृषि अधिकारी या मोबाइल ऐप के माध्यम से विधिवत शिकायत दर्ज होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। 72 घंटे की अवधि बीत जाने के बाद बीमा कंपनियों को कानूनी रूप से दावा अस्वीकार करने का अधिकार मिल जाता है।

3. Crop Insurance App से घर बैठे नुकसान दर्ज करने की ऑनलाइन प्रक्रिया

किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए भारत सरकार ने Crop Insurance Mobile App प्रारंभ किया है। इसके माध्यम से 5 मिनट में क्लेम इंटिमेशन दर्ज किया जा सकता है:

  1. गूगल प्ले स्टोर से आधिकारिक Crop Insurance App डाउनलोड करें और अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर ओटीपी से लॉगिन करें।
  2. डैशबोर्ड पर 'Crop Loss Intimation' (फसल हानि सूचना) विकल्प पर क्लिक करें।
  3. अपनी बीमा पॉलिसी संख्या अथवा बैंक खाता संख्या दर्ज करें जिससे आपकी बीमित फसल का विवरण स्वतः लोड हो जाएगा।
  4. आपदा का प्रकार (जैसे ओलावृष्टि, जलभराव या सूखा) चुनें और घटना की सटीक तारीख व समय दर्ज करें।
  5. ऐप के माध्यम से अपने क्षतिग्रस्त खेत की 2 लाइव जियो-टैग्ड तस्वीरें (फोटो) खींचकर अपलोड करें।
  6. आवेदन सबमिट करते ही 10 अंकों का Docket ID (शिकायत संदर्भ संख्या) प्राप्त होगा जिसे भविष्य के स्टेटस ट्रैकिंग के लिए सुरक्षित रखें।

वर्ष 2020 के बाद से सभी किसानों (चाहे उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड लोन लिया हो या नहीं) के लिए फसल बीमा कराना पूर्णतः ऐच्छिक (Voluntary) है। यदि कोई केसीसी धारक किसान बीमा नहीं कराना चाहता, तो उसे संबंधित बैंक शाखा में कट-ऑफ तारीख से 7 दिन पूर्व 'ऑप्ट-आउट' (Opt-Out) फॉर्म जमा करना होता है।

गैर-ऋणी किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (PACS) या सीधे pmfby.gov.in पोर्टल पर जाकर आधार कार्ड, खतौनी, बैंक पासबुक और बुवाई प्रमाण पत्र अपलोड करके निर्धारित प्रीमियम का ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।

5. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. यदि खेत में पानी भर जाए तो क्लेम का सर्वे कितने दिनों में होता है?

A. 72 घंटे के भीतर सूचना मिलने पर बीमा कंपनी और स्थानीय कृषि विभाग के संयुक्त सर्वेयरों द्वारा आगामी 48 से 72 घंटे के भीतर खेत का भौतिक मुआयना किया जाता है और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाती है।

Q. क्या बटाईदार (किराए पर खेती करने वाले) किसान भी फसल बीमा करा सकते हैं?

A. हाँ, बटाईदार या काश्तकार किसान भी संबंधित भूमि स्वामी के साथ हुए लिखित सहमति पत्र अथवा स्थानीय पटवारी द्वारा जारी बोवाई प्रमाण पत्र के आधार पर सीएससी केंद्र से फसल बीमा करा सकते हैं।

Q. पीएम फसल बीमा योजना की राष्ट्रीय हेल्पलाइन का नंबर क्या है?

A. किसान किसी भी समय केंद्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14447 पर कॉल करके सीधे कृषि मंत्रालय के कॉल सेंटर से सहायता और अपनी क्लेम स्थिति की जानकारी ले सकते हैं।

Q. मुआवजे का पैसा बैंक खाते में कैसे ट्रांसफर किया जाता है?

A. सर्वे और उपज नुकसान का आकलन पूर्ण होते ही बीमा कंपनी द्वारा स्वीकृत क्लेम राशि सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए जमा की जाती है।

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