1. पीएम फसल बीमा योजना: किन आपदाओं में मिलता है 100% मुआवजा?
भारतीय कृषि मौसम की अनिश्चितताओं पर अत्यधिक निर्भर है। कभी बेमौसम मूसलाधार बारिश, कभी सूखा, तो कभी ओलावृष्टि या टिड्डी दल का आक्रमण किसान की महीनों की मेहनत और पूंजी को कुछ ही घंटों में मिट्टी में मिला देता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) देश के करोड़ों किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच का कार्य करती है।
इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित चार प्रमुख चरणों में फसल नुकसान की भरपाई की जाती है:
- बुवाई/रोपाई में बाधा (Prevented Sowing): यदि प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों (जैसे गंभीर सूखा या अत्यधिक बाढ़) के कारण किसान अपने बीमित क्षेत्र में बुवाई नहीं कर पाता, तो बीमित राशि का 25% तक क्षतिपूर्ति अग्रिम दी जाती है।
- खड़ी फसल का नुकसान (Standing Crop Loss): सूखे, बाढ़, व्यापक कीट प्रकोप या प्राकृतिक आग से खेत में खड़ी फसल नष्ट होने पर व्यापक उपज सूचकांक के आधार पर शत-प्रतिशत भरपाई की जाती है।
- स्थानीयकृत आपदाएं (Localized Calamities): ओलावृष्टि (Hailstorm), भूस्खलन, बादल फटने या खेत में अचानक जलभराव (Inundation) से हुए व्यक्तिगत नुकसान का खेत-वार सर्वे किया जाता है।
- कटाई उपरांत नुकसान (Post-Harvest Losses): फसल कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी कटी हुई फसल को चक्रवात, बेमौसम बारिश या तूफान से क्षति पहुंचने पर 14 दिनों तक सुरक्षा मिलती है।
2. 72 घंटे का स्वर्णिम नियम: समय पर सूचना न देने पर क्लेम क्यों निरस्त होता है?
फसल बीमा में अधिकांश किसानों के क्लेम निरस्त होने का सबसे मुख्य कारण निर्धारित समय-सीमा का उल्लंघन है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार:
72 घंटे की अनिवार्य अधिसूचना नियम:
यदि आपके खेत में ओलावृष्टि, बादल फटने या जलभराव से नुकसान हुआ है, तो आपदा समाप्त होने के ठीक 72 घंटे (3 दिन) के भीतर बीमा कंपनी, बैंक, कृषि अधिकारी या मोबाइल ऐप के माध्यम से विधिवत शिकायत दर्ज होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। 72 घंटे की अवधि बीत जाने के बाद बीमा कंपनियों को कानूनी रूप से दावा अस्वीकार करने का अधिकार मिल जाता है।
3. Crop Insurance App से घर बैठे नुकसान दर्ज करने की ऑनलाइन प्रक्रिया
किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए भारत सरकार ने Crop Insurance Mobile App प्रारंभ किया है। इसके माध्यम से 5 मिनट में क्लेम इंटिमेशन दर्ज किया जा सकता है:
- गूगल प्ले स्टोर से आधिकारिक Crop Insurance App डाउनलोड करें और अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर ओटीपी से लॉगिन करें।
- डैशबोर्ड पर 'Crop Loss Intimation' (फसल हानि सूचना) विकल्प पर क्लिक करें।
- अपनी बीमा पॉलिसी संख्या अथवा बैंक खाता संख्या दर्ज करें जिससे आपकी बीमित फसल का विवरण स्वतः लोड हो जाएगा।
- आपदा का प्रकार (जैसे ओलावृष्टि, जलभराव या सूखा) चुनें और घटना की सटीक तारीख व समय दर्ज करें।
- ऐप के माध्यम से अपने क्षतिग्रस्त खेत की 2 लाइव जियो-टैग्ड तस्वीरें (फोटो) खींचकर अपलोड करें।
- आवेदन सबमिट करते ही 10 अंकों का Docket ID (शिकायत संदर्भ संख्या) प्राप्त होगा जिसे भविष्य के स्टेटस ट्रैकिंग के लिए सुरक्षित रखें।
4. गैर-ऋणी और ऋणी किसानों के लिए बीमा प्रीमियम व बैंक खाता सीडिंग
वर्ष 2020 के बाद से सभी किसानों (चाहे उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड लोन लिया हो या नहीं) के लिए फसल बीमा कराना पूर्णतः ऐच्छिक (Voluntary) है। यदि कोई केसीसी धारक किसान बीमा नहीं कराना चाहता, तो उसे संबंधित बैंक शाखा में कट-ऑफ तारीख से 7 दिन पूर्व 'ऑप्ट-आउट' (Opt-Out) फॉर्म जमा करना होता है।
गैर-ऋणी किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (PACS) या सीधे pmfby.gov.in पोर्टल पर जाकर आधार कार्ड, खतौनी, बैंक पासबुक और बुवाई प्रमाण पत्र अपलोड करके निर्धारित प्रीमियम का ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।