📌 मुख्य बातें (Key Takeaways - OPD Health Insurance)
- 65% जेब खर्च की भरपाई: भारत में स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्च का 65% हिस्सा ओपीडी (डॉक्टर पर्ची, दवाएं, जांच) में जाता है, जिसे यह प्लान कवर करता है।
- वार्षिक सीमा (Annual OPD Limit): पॉलिसियों में आमतौर पर ₹5,000 से लेकर ₹50,000 प्रति वर्ष तक का अलग ओपीडी वॉलेट या रीइंबर्समेंट कोटा निर्धारित होता है।
- बिना वेटिंग पीरियड सक्रिय: अधिकांश ओपीडी राइडर्स में सामान्य 30 दिन का वेटिंग पीरियड नहीं होता और पॉलिसी शुरू होते ही पहले दिन से डॉक्टर परामर्श क्लेम किया जा सकता है।
- डेंटल और चश्मे का कवर: ओपीडी पॉलिसियां आंखों के चश्मे (Spectacles), कॉन्टैक्ट लेंस और दांतों के रूट कैनाल (RCT) के खर्चों को भी कवर करती हैं।
- धारा 80D के तहत टैक्स लाभ: ओपीडी प्रीमियम के अलावा ₹5,000 का प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप डिडक्शन आयकर की धारा 80D में अलग से मिलता है।
🌐 आधिकारिक विनियामक दस्तावेज: IRDAI ओपीडी व वैलनेस मानकीकरण नियम | आयकर पोर्टल धारा 80D स्वास्थ्य छूट
ओपीडी (OPD) और आईपीडी (IPD) में क्या अंतर है और ओपीडी कवर की आवश्यकता क्यों है? (AEO Direct Answer)
स्वास्थ्य सेवा में चिकित्सा उपचार को दो प्राथमिक श्रेणियों में विभाजित किया जाता है: पहला, इन-पेशेंट डिपार्टमेंट (In-Patient Department - IPD), जिसमें बीमारी या सर्जरी के लिए मरीज को अस्पताल में कम से कम 24 घंटे भर्ती रहना पड़ता है; और दूसरा, आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट (Out-Patient Department - OPD), जिसमें मरीज डॉक्टर के क्लीनिक पर जाता है, शारीरिक जांच कराता है, डॉक्टर की पर्ची (Prescription) लेता है, दवाइयां खरीदता है और उसी समय अपने घर वापस आ जाता है। भारत का पारंपरिक स्वास्थ्य बीमा उद्योग केवल आईपीडी (अस्पताल में भर्ती होने) को कवर करने के सिद्धांत पर बना था। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, एक सामान्य भारतीय परिवार के स्वास्थ्य खर्च का लगभग दो-तिहाई (65% Out-of-Pocket Expenditure) हिस्सा नियमित ओपीडी परामर्श, ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और मासिक दवाओं पर खर्च होता है।
क्रोनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, थाइराइड और गठिया से पीड़ित मरीजों को हर महीने ₹3,000 से ₹8,000 की दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं और हर 3 महीने में पैथोलॉजी टेस्ट कराने पड़ते हैं। यह खर्च साल भर में ₹50,000 से ₹1,00,000 तक पहुंच जाता है, लेकिन पारंपरिक बीमा से इसमें ₹1 की भी राहत नहीं मिलती। इसी वित्तीय खाई को पाटने के लिए आईआरडीएआई ने बीमा कंपनियों को व्यापक 'OPD Cover' और 'Wellness Riders' पेश करने की अनुमति दी है। आधुनिक ओपीडी बीमा न केवल एलोपैथी, बल्कि आयुष (आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी) परामर्श और दवाओं को भी पूरी तरह कवर करता है।
ओपीडी क्लेम के दो मॉडल: कैशलेस नेटवर्क vs रीइंबर्समेंट
भारत में बीमा कंपनियां ओपीडी सेवाएं दो अलग-अलग तरीकों से प्रदान करती हैं:
- 1. डिजिटल कैशलेस नेटवर्क मॉडल: इसमें बीमा कंपनियां प्रैक्टो (Practo), अपोलो 24/7, टाटा 1mg या फार्मईज़ी जैसे डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म्स से टाई-अप करती हैं। पॉलिसीधारक को अपने बीमा ऐप में एक डिजिटल वॉलेट बैलेंस (जैसे ₹15,000) दिखता है। जब वह डॉक्टर से ऑनलाइन या ऑफलाइन कंसल्टेशन बुक करता है या दवाएं ऑर्डर करता है, तो पैसा सीधे वॉलेट से कट जाता है और मरीज को ₹0 का भुगतान करना पड़ता है।
- 2. रीइंबर्समेंट मॉडल (Pay & Claim): इसमें मरीज भारत के किसी भी पंजीकृत डॉक्टर (MBBS/MD/BAMS) के पास जाता है, परामर्श फीस और दवाओं का भुगतान अपनी जेब से करता है, और बाद में डॉक्टर के पर्चे और जीएसटी बिल को बीमा कंपनी के ऐप पर अपलोड कर देता है। 3 से 5 कार्य दिवसों में पूरी राशि सीधे मरीज के बैंक खाते में एनईएफटी द्वारा जमा हो जाती है।
5-कॉलम तुलना तालिका: स्टैंडर्ड हेल्थ इंश्योरेंस vs कॉम्प्रिहेंसिव OPD हेल्थ प्लान (2026)
नीचे दी गई तालिका में पारंपरिक अस्पताल बीमा और ओपीडी बीमा के बीच के संपूर्ण तुलनात्मक अंतर को दर्शाया गया है:
| चिकित्सा सेवा की मद | पारंपरिक बेस पॉलिसी (Only IPD) | OPD राइडर / डेडिकेटेड OPD प्लान | वार्षिक कवरेज सीमा | पॉलिसीधारक के लिए सर्वोत्तम रणनीति |
|---|---|---|---|---|
| डॉक्टर कंसल्टेशन फीस | शून्य (यदि भर्ती न हुए हों) | 100% कवर्ड (असीमित या वॉलेट अनुसार) | ₹5,000 से ₹25,000 / वर्ष | पर्चे पर डॉक्टर का मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन नंबर अनिवार्य हो। |
| पैथोलॉजी व डायग्नोस्टिक टेस्ट | केवल भर्ती से 60 दिन पहले के कवर्ड | सामान्य रूटीन ब्लड टेस्ट व स्कैन कवर्ड | ओपीडी वॉलेट सीमा तक | एनबीएल (NABL) प्रमाणित लैब से ही जांच करवाएं। |
| फार्मेसी दवाइयों का बिल | केवल अस्पताल के दौरान की दवाएं | डॉक्टर द्वारा लिखी सभी वैध दवाएं कवर्ड | ओपीडी वॉलेट सीमा तक | फार्मेसी से हमेशा कम्प्यूटरीकृत जीएसटी इनवॉइस लें। |
| डेंटल (दांत) व विजन (आंखें) | 100% बाहर (अस्पताल एक्सीडेंट छोड़कर) | रूट कैनाल, चश्मे के लेंस कवर्ड | ₹5,000 से ₹15,000 उप-सीमा | कॉस्मेटिक ब्लीचिंग बाहर रहती है, चिकित्सकीय दांत इलाज कवर्ड। |
| प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप | आमतौर पर 1 या 2 साल बाद कूपन | हर साल पहले दिन से मुफ्त पैकेज | ₹2,500 से ₹5,000 पैकेज | धारा 80D में अलग से ₹5,000 की टैक्स छूट क्लेम करें। |
🚨 नागरिक सावधानी: ओपीडी क्लेम फाइल करते समय इन 3 गलतियों से क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा
ओपीडी क्लेम में बीमा कंपनियां दावों को बहुत बारीकी से जांचती हैं। सबसे पहली गलती—बिना डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के सीधे मेडिकल स्टोर का बिल अपलोड करना। जब तक किसी पंजीकृत डॉक्टर के पर्चे पर उस दवा या जांच का स्पष्ट उल्लेख नहीं होगा, बीमा कंपनी ₹1 का भी भुगतान नहीं करेगी। दूसरी गलती—हस्तलिखित कच्ची रसीद (Kaccha Bill) देना जिस पर फार्मेसी का जीएसटी नंबर (GSTIN) या ड्रग लाइसेंस नंबर (DL No) दर्ज न हो। तीसरी गलती—विटामिन सप्लीमेंट्स, प्रोटीन पाउडर या कॉस्मेटिक स्किन क्रीम का बिल लगाना, जिन्हें आईआरडीएआई नियमों के अनुसार 'दवा' नहीं माना जाता। हमेशा डॉक्टर की मुहर वाली मूल पर्ची और जीएसटी पक्का बिल ही जमा करें।
वास्तविक संख्यात्मक केस स्टडी: एक 4 सदस्यीय परिवार का ₹32,000 का वार्षिक ओपीडी खर्च और बचत
आइए बेंगलुरु के श्री विकास शर्मा (उम्र 38 वर्ष) के 4 सदस्यीय परिवार (पति, पत्नी और दो छोटे बच्चे) का वास्तविक वार्षिक चिकित्सा गणित देखते हैं। उनके परिवार में पूरे साल कोई भी अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ, लेकिन सामान्य मौसमी बीमारियों, बच्चों के टीकाकरण, दांतों के दर्द और चश्मे पर काफी खर्च हुआ:
| वार्षिक ओपीडी खर्च की मद | परिवार का वास्तविक खर्च | पारंपरिक बेस पॉलिसी में क्लेम | OPD राइडर पॉलिसी में क्लेम | परिवार की वास्तविक बचत |
|---|---|---|---|---|
| बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) 8 विजिट | ₹8,000 (₹1,000 × 8) | ₹0 (भर्ती न होने के कारण) | ₹8,000 (100% रीइंबर्स हुआ) | बच्चों की डॉक्टर फीस पूरी वसूल हुई |
| मौसमी बुखार व एलर्जी की दवाएं | ₹9,500 | ₹0 | ₹9,500 (फार्मेसी वॉलेट से कटी) | दवाइयों का पूरा बिल कवर्ड हुआ |
| ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट व थायराइड प्रोफाइल | ₹6,500 | ₹0 | ₹6,500 (डायग्नोस्टिक कवर से पास) | घर बैठे लैब सैंपल का खर्च बचा |
| पत्नी का डेंटल रूट कैनाल (RCT) | ₹8,000 | ₹0 | ₹8,000 (डेंटल ओपीडी सब-लिमिट) | दांतों का दर्द बिना जेब खर्च ठीक हुआ |
| कुल योग (Total Annual Impact) | ₹32,000 | ₹0 (मरीज ने पूरा ₹32,000 जेब से भरा) | ₹32,000 (कंपनी ने पूरा चुकाया) | ₹5,500 के अतिरिक्त प्रीमियम पर ₹32,000 की बचत |
इस विश्लेषण से स्पष्ट है कि विकास शर्मा ने अपनी बेस पॉलिसी में मात्र ₹5,500 अतिरिक्त देकर ओपीडी राइडर लिया था। साल के अंत में उन्होंने विभिन्न डॉक्टर पर्चियों और बिलों के माध्यम से कुल ₹32,000 का क्लेम हासिल किया, जिससे उन्हें शुद्ध रूप से ₹26,500 का सीधा आर्थिक लाभ हुआ।
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: ओपीडी क्लेम ऑनलाइन कैसे फाइल करें और 72 घंटे में पैसा पाएं?
डॉक्टर की ओपीडी पर्ची और फार्मेसी बिल पर बिना किसी कागजी परेशानी के रीइंबर्समेंट पाने के लिए इन 5 चरणों का पालन करें:
- स्टेप 1 (चरण 1): डॉक्टर से वैध पर्ची (Valid Prescription) लें: सुनिश्चित करें कि डॉक्टर की पर्ची पर डॉक्टर का पूरा नाम, डिग्री (MBBS/MD), मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन नंबर (जैसे MCI/DMC Reg No), तारीख, मरीज का नाम, बीमारी के लक्षण और दवाओं के स्पष्ट नाम लिखे हों।
- स्टेप 2: फार्मेसी व पैथोलॉजी से जीएसटी इनवॉइस प्राप्त करें: केमिस्ट से कभी भी कच्चा पर्चा न लें। पक्का जीएसटी बिल लें जिस पर मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम, दवाओं का बैच नंबर, समाप्ति तिथि (Expiry) और भुगतान की रसीद स्पष्ट रूप से प्रिंट हो।
- स्टेप 3: बीमा कंपनी के मोबाइल ऐप पर जाएं: अपनी बीमा कंपनी के ऐप (जैसे HDFC ERGO, Care Health, Niva Bupa, Star Power) में लॉगिन करें। 'Claims' सेक्शन में जाकर 'File OPD Claim' चुनें।
- स्टेप 4: दस्तावेजों की स्पष्ट फोटो अपलोड करें:
- डॉक्टर की मूल पर्ची की स्पष्ट स्कैन कॉपी।
- फार्मेसी के भुगतान किए गए जीएसटी बिल।
- पैथोलॉजी जांचों की अंतिम रिपोर्ट (जैसे सीबीसी, लिपिड प्रोफाइल आदि)।
- बैंक खाता विवरण (यदि पहले से ई-मैन्डेट न हो)।
- स्टेप 5: 48 से 72 घंटे में बैंक खाते में सीधा भुगतान: बीमा कंपनी की ऑटोमेटेड ओपीडी क्लेम टीम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ओसीआर (OCR) के जरिए बिलों का सत्यापन करेगी। सत्यापन होते ही क्लेम राशि सीधे आपके बैंक खाते में एनईएफटी द्वारा जमा हो जाएगी और आपके मोबाइल पर एसएमएस प्राप्त होगा।
आयकर अधिनियम की धारा 80D के तहत ओपीडी और प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप का दोहरा टैक्स लाभ
स्वास्थ्य बीमा केवल आपातकालीन सुरक्षा ही नहीं, बल्कि कर नियोजन (Tax Planning) का भी एक उत्कृष्ट साधन है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80D के तहत निम्नलिखित कटौतियां उपलब्ध हैं:
- प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप (Preventive Health Check-up): धारा 80D के तहत सरकार प्रत्येक करदाता को अपने, अपने जीवनसाथी और बच्चों के नियमित वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण के लिए ₹5,000 तक की विशेष नकद कटौती (Cash Deduction) देती है। इसके लिए किसी बीमा पॉलिसी की भी आवश्यकता नहीं होती, डॉक्टर की ओपीडी जांच की रसीद दिखाकर यह छूट ली जा सकती है।
- ओपीडी प्रीमियम पर कटौती: यदि आप अपनी बेस स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के साथ ओपीडी राइडर खरीदते हैं, तो ओपीडी राइडर के लिए चुकाया गया अतिरिक्त प्रीमियम भी धारा 80D की समग्र सीमा (स्वयं व परिवार के लिए ₹25,000 और वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के लिए ₹50,000) के तहत 100% कर-मुक्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs - OPD Health Insurance)
Q1. क्या ओपीडी क्लेम करने से बेस पॉलिसी का नो-क्लेम बोनस (NCB) कम होता है?
नहीं। यह ओपीडी बीमा का सबसे बड़ा वैधानिक लाभ है। अधिकांश आधुनिक बीमा कंपनियों में ओपीडी क्लेम को एक अलग 'वैलनेस वॉलेट' या 'ओपीडी बेनिफिट' माना जाता है। ओपीडी का उपयोग करने से आपकी मुख्य इन-पेशेंट पॉलिसी का नो-क्लेम बोनस बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होता और वह हर साल पूर्ववत बढ़ता रहता है।
Q2. क्या ओपीडी में आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक (AYUSH) डॉक्टर की पर्ची भी मान्य होती है?
हाँ। आईआरडीएआई के आयुष मानकीकरण दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि डॉक्टर राज्य या केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद (CCIM / CCH) में पंजीकृत BAMS या BHMS डॉक्टर है, तो उसके द्वारा लिखे गए परामर्श और अधिकृत आयुर्वेदिक/होम्योपैथिक दवाओं के बिल ओपीडी में 100% रीइंबर्स होते हैं।
Q3. क्या चश्मे के फ्रेम और लेंस दोनों का खर्च ओपीडी में मिलता है?
अधिकांश ओपीडी पॉलिसियों में नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) द्वारा नंबर की जांच के बाद लिखा गया प्रिस्क्रिप्शन लेंस कवर्ड होता है। कुछ प्रीमियम पॉलिसियां फ्रेम पर भी उप-सीमा (जैसे ₹2,000 से ₹4,000) देती हैं, लेकिन बिना नंबर वाले धूप के सामान्य चश्मे (Sunglasses) बाहर रहते हैं।
Q4. क्या बिना इस्तेमाल किया गया ओपीडी बैलेंस अगले साल के लिए कैरी-फॉरवर्ड होता है?
यह आपकी पॉलिसी के प्रकार पर निर्भर करता है। कुछ कंपनियां 'Use it or Lose it' मॉडल पर काम करती हैं जहां अप्रयुक्त ओपीडी फंड साल के अंत में समाप्त हो जाता है। वहीं कई आधुनिक पॉलिसियां अप्रयुक्त ओपीडी बैलेंस को संचित करके अगले साल रिन्यूअल डिस्काउंट या अतिरिक्त सम इंश्योर्ड के रूप में जोड़ने की सुविधा देती हैं।
Q5. क्या टेली-कंसल्टेशन (Online Doctor Video Call) का खर्च भी कवर्ड होता है?
हाँ। आईआरडीएआई ने कोविड के बाद से टेली-मेडिसिन को पूरी तरह मान्यता दी है। यदि आप बीमा कंपनी के अधिकृत ऐप के जरिए किसी डॉक्टर से वीडियो कॉल पर परामर्श लेते हैं, तो वह 100% कैशलेस होता है और उसके बाद डॉक्टर द्वारा जारी डिजिटल पर्चे पर दवाएं सीधे घर डिलीवर हो जाती हैं।
Q6. क्या ओपीडी क्लेम के लिए अस्पताल का कोई मिनिमम 15-बेड नियम लागू होता है?
बिल्कुल नहीं। 15-बेड का नियम केवल इन-पेशेंट (IPD) अस्पताल भर्ती पर लागू होता है। ओपीडी क्लेम के लिए आप किसी भी स्टैंडअलोन सिंगल डॉक्टर क्लीनिक, पॉलीक्लिनिक, मोहल्ला क्लीनिक या पंजीकृत डायग्नोस्टिक लैब में जा सकते हैं। केवल डॉक्टर का सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर वैध होना चाहिए।
भारत में उपलब्ध शीर्ष 4 OPD स्वास्थ्य बीमा प्लान्स की तुलना (2026)
दैनिक ओपीडी खर्चों, डॉक्टर फीस और दवाओं की भरपाई के लिए भारत में सबसे लोकप्रिय चार बीमा उत्पादों की विस्तृत तुलना नीचे दी गई है:
| ओपीडी प्लान व कंपनी | वार्षिक ओपीडी सीमा | फार्मेसी व डायग्नोस्टिक लाभ | डेंटल व विजन (चश्मा) कवर | अतिरिक्त प्रीमियम सीमा |
|---|---|---|---|---|
| Care OPD (Care Health) | ₹5,000 से ₹25,000 तक | डॉक्टर पर्ची पर सभी एलोपैथी/आयुष दवाएं | डेंटल ओपीडी व चश्मे का लेंस कवर्ड | ₹3,500 – ₹7,000 प्रति वर्ष |
| HDFC ERGO my:Health Medisure | सम इंश्योर्ड अनुसार अलग कोटा | NABL प्रमाणित लैब से टेस्ट व ई-फार्मेसी | नियमित डेंटल जांच व आंख परीक्षण | ₹4,200 – ₹8,500 प्रति वर्ष |
| Star Health Comprehensive OPD | ₹3,000 से ₹15,000 प्रति ब्लॉक | डॉक्टर फीस रसीद पर 100% रीइंबर्समेंट | दांतों का इलाज व कॉन्टैक्ट लेंस | पॉलिसी में इनबिल्ट शामिल |
| Niva Bupa ReAssure 2.0 (Smart Health+) | अनलिमिटेड टेली-कंसल्ट + ₹10,000 वॉलेट | डिजिटल वॉलेट से सीधे 1mg/अपोलो पर भुगतान | सालाना प्रिवेंटिव डेंटल प्रोसीजर | ₹3,800 – ₹6,500 प्रति वर्ष |
क्रोनिक बीमारियों (डायबिटीज व बीपी) के मरीजों के लिए ओपीडी बीमा की महत्ता
भारत को विश्व की 'डायबिटीज राजधानी' कहा जाता है। एक मधुमेह (टाइप-2 डायबिटीज) या उच्च रक्तचाप के मरीज को हर 3 महीने में HbA1c, लिपिड प्रोफाइल, सीरम क्रिएटिनिन, किडनी फंक्शन टेस्ट और आंखों का फंडस परीक्षण कराना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही इंसुलिन, मेटफॉर्मिन, टेल्मिसार्टन और स्टेटिन्स जैसी जीवन रक्षक दवाओं का मासिक खर्च ₹2,500 से ₹5,000 के बीच रहता है।
यदि मरीज के पास केवल पारंपरिक इन-पेशेंट बीमा है, तो उसे यह सारा खर्च अपनी जेब से वहन करना पड़ता है। ओपीडी राइडर होने पर मरीज इन सभी त्रैमासिक पैथोलॉजी जांचों और मासिक दवाओं के बिलों को साल भर में 100% रीइंबर्स करा लेता है। इससे न केवल परिवार की वार्षिक बचत में भारी इजाफा होता है, बल्कि मरीज समय पर अपनी जांचें कराने के लिए प्रेरित रहता है, जिससे भविष्य में किडनी फेलियर या हार्ट अटैक जैसे बड़े आपातकालीन संकटों का जोखिम 70% तक घट जाता है।
ओपीडी रीइंबर्समेंट में डिजिटल फ्रॉड से बचाव और क्लेम सुरक्षा चेकलिस्ट
ओपीडी क्लेम दाखिल करते समय यह सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा अपलोड किए गए सभी मेडिकल बिलों और डॉक्टर की पर्चियों पर स्पष्ट क्यूआर कोड (QR Code) या कम्प्यूटरीकृत इनवॉइस नंबर अंकित हो। कभी भी सोशल मीडिया या असत्यापित वेबसाइटों से फर्जी पर्चे बनवाकर क्लेम दाखिल करने का प्रयास न करें। बीमा कंपनियों के पास अब केंद्रीय आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX) के जरिए डॉक्टरों के डिजिटल मेडिकल रजिस्ट्रेशन का सीधा सत्यापन करने की सुविधा उपलब्ध है। वास्तविक डॉक्टर की पर्ची और वैध फार्मेसी बिल ही सुरक्षित और त्वरित क्लेम की गारंटी प्रदान करते हैं।
📱 आधुनिक डिजिटल ओपीडी ऐप्स (Health Apps) के जरिए कैशलेस कंसल्टेशन
आजकल अधिकांश प्रमुख बीमा कंपनियां अपने मोबाइल ऐप के जरिए 100% पेपरलेस और कैशलेस ओपीडी परामर्श प्रदान कर रही हैं:
- ऑनलाइन डॉक्टर कंसल्टेशन: बीमा कंपनी के ऐप (उदा. Care Health, Star Power, HDFC Ergo Here) के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों से वीडियो कॉल पर परामर्श लें। दवाइयों का पर्चा सीधे ऐप पर डाउनलोड होता है।
- दवाइयों की होम डिलीवरी: ऐप से ही फार्मेसी पार्टनर के जरिए दवाइयां ऑर्डर करें, जिसका भुगतान सीधे आपके ओपीडी बीमा बैलेंस से कट जाता है और आपको कोई रीइंबर्समेंट फॉर्म नहीं भरना पड़ता।