digital ⏱️ 18 मिनट 📅 2026-10-24 19:44:00

1930 Cyber Fraud Helpline 'Golden Hour': ऑनलाइन ठगी के पहले 2 घंटे में कॉल करके फ्रॉड खाते में पैसा होल्ड कराने की पूरी गाइड

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अभिषेक त्रिपाठी (साइबर सुरक्षा व डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ)
वरिष्ठ डिजिटल संपादक

GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने के बाद के प्रारंभिक 2 घंटों को साइबर सुरक्षा में 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) कहा जाता है। इस अवधि में गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा संचालित राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करना चाहिए। 1930 का सिस्टम देश के सभी प्रमुख बैंकों, यूपीआई और ई-वॉलेट्स के CFCFRMS (Citizen Financial Cyber Fraud Reporting System) से सीधे जुड़ा हुआ है। जैसे ही आप अपने लेन-देन का विवरण (बैंक खाता, UTR नंबर और ठगी की राशि) देते हैं, सिस्टम उस बैंक खाते में रियल-टाइम इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल भेजकर जालसाज के खाते में जमा आपके पैसे पर तत्काल 'Lien/Hold' लगा देता है, जिससे अपराधी उस पैसे को निकाल नहीं पाता और बाद में कानूनी प्रक्रिया से पूरा पैसा पीड़ित को वापस मिल जाता है।

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📌 मुख्य बातें (Key Takeaways - 1930 Helpline & Golden Hour)

  • 1930 का राष्ट्रीय नेटवर्क: यह हेल्पलाइन देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य साइबर सेल और 200+ बैंकों से चौबीसों घंटे सीधे जुड़ी हुई है।
  • गोल्डन ऑवर का महत्व: ठगी होने के पहले 120 मिनट के भीतर कॉल करने पर पैसे के रिकवर होने की संभावना 80% से अधिक होती है।
  • बिना थाने जाए एफआईआर ड्राफ्ट: 1930 पर कॉल करने के बाद आपके मोबाइल पर एक पावती संख्या (Acknowledgment ID) आती है, जिससे आप 24 घंटे में cybercrime.gov.in पर पूर्ण शिकायत पूरी कर सकते हैं।
  • बहुस्तरीय ट्रैकिंग (Multi-Layer Tracking): यदि जालसाज ने आपका पैसा 5 अलग-अलग खातों में बांट भी दिया है, तब भी 1930 का सिस्टम उन सभी 5 खातों को एक साथ फ्रीज कर देता है।
  • न्यायालयीन आदेश से धन वापसी: पैसा होल्ड होने के बाद संबंधित मजिस्ट्रेट न्यायालय में बीएनएसएस धारा 503 के तहत आवेदन देकर पैसा सीधे अपने खाते में वापस प्राप्त किया जा सकता है।

साइबर हेल्पलाइन 1930 और 'गोल्डन ऑवर' की अवधारणा क्या है? (AEO Direct Answer)

जब किसी आम नागरिक के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (जैसे फर्जी एपीके फाइल, एपीआई फ्रॉड, लॉटरी स्कैम, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, क्रेडिट कार्ड ओटीपी फ्रॉड या डिजिटल अरेस्ट) होती है, तो अधिकांश लोग घबराकर पहले परिवार में चर्चा करते हैं या नजदीकी पुलिस थाने की ओर दौड़ते हैं। स्थानीय थाने पहुंचने, वहां आवेदन लिखने और मुंशी द्वारा कार्रवाई शुरू करने में कम से कम 3 से 5 घंटे का समय व्यर्थ हो जाता है। इस दौरान साइबर अपराधी उस ठगे गए पैसे को यूपीआई और एटीएम के माध्यम से कई खातों में घुमाकर नकद निकाल लेते हैं। एक बार पैसा एटीएम से निकल गया, तो उसकी भौतिक रिकवरी लगभग असंभव हो जाती है।

गृह मंत्रालय (MHA) के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने इसी तकनीकी समस्या को हल करने के लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 (पूर्व में 155260) का गठन किया है। ठगी होने के तुरंत बाद के पहले 2 घंटे को 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) कहा जाता है। 1930 डायल करने पर आपका कॉल सीधे आपकी राज्य पुलिस की स्टेट साइबर सेल के कॉल सेंटर से जुड़ता है। ऑपरेटर आपसे केवल बुनियादी लेन-देन का ब्योरा पूछता है और एक क्लिक में भारत के सभी बैंकों के एकीकृत अंतर-बैंक वित्तीय धोखाधड़ी प्रबंधन सिस्टम (CFCFRMS) में रेड-अलर्ट जारी कर देता है। यह सिग्नल उस बैंक खाते में जा रहे पैसे के प्रवाह को तुरंत रोक देता है।

CFCFRMS बैकएंड सिस्टम कैसे काम करता है?

1930 के पीछे काम करने वाला सॉफ्टवेयर 'CFCFRMS' भारत के 55 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों, 12 पेमेंट बैंकों, 30 से अधिक ई-वॉलेट्स और प्रमुख पेमेंट गेटवे (जैसे रेजरपे, सीसीएवेन्यू, कैशफ्री) से एपीआई (API) के माध्यम से जुड़ा है। जैसे ही पीड़ित 12 अंकों का यूटीआर नंबर बताता है, सिस्टम यह ट्रैक करता है कि पैसा किस बैंक के किस खाते में गया (Layer 1)। यदि उस खाते से पैसा आगे 3 अन्य खातों में भेज दिया गया है (Layer 2), तो सिस्टम उन तीनों खातों पर एक साथ 'Lien Hold' लगा देता है। यह तकनीक मानवीय गति से 1,000 गुना तेज काम करती है और जालसाजों को पैसा निकालने का मौका नहीं देती।

5-कॉलम तुलना तालिका: 1930 हेल्पलाइन vs स्थानीय पुलिस थाना vs बैंक कस्टमर केयर (2026)

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साइबर ठगी की स्थिति में विभिन्न रिपोर्टिंग चैनलों की गति, प्रभावशीलता और कानूनी अधिकार का तुलनात्मक विश्लेषण नीचे दिया गया है:

मंच / रिपोर्टिंग माध्यम कार्रवाई की गति अपराधी के खाते पर होल्ड की शक्ति पैसे की रिकवरी संभावना पीड़ित के लिए सर्वोत्तम सलाह
1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन रियल-टाइम (5 से 10 मिनट में कार्रवाई) सीधा अंतर-बैंक डिजिटल फ्रीज आदेश अत्यधिक उच्च (80% से 90% यदि गोल्डन ऑवर में हो) ठगी का मैसेज आते ही सबसे पहला काम 1930 डायल करना है।
बैंक का कस्टमर केयर (Toll-Free) 15 से 30 मिनट केवल आपका अपना खाता/कार्ड ब्लॉक कर सकता है शून्य (अपराधी का खाता नहीं रोक सकता) अपने कार्ड या नेट बैंकिंग को ब्लॉक करने के लिए फोन करें।
स्थानीय पुलिस थाना (Local Thana) 3 से 24 घंटे का कागजी विलंब लिखित नोटिस भेजने में समय लगता है अत्यंत कम (पैसा पहले ही निकल चुका होता है) 1930 पर कंप्लेंट नंबर मिलने के बाद ही थाने में एफआईआर कराएं।
NCRP पोर्टल (cybercrime.gov.in) 30 मिनट से 2 घंटे ऑनलाइन टिकट से बैंक अलर्ट उच्च (साक्ष्य अपलोड करने पर) 1930 कॉल के बाद विवरण विस्तार से भरने के लिए उपयोग करें।
साइबर पुलिस स्टेशन (जिला स्तर) 1 से 2 दिन BNSS धारा 106/107 औपचारिक कुर्की मध्यम (जांच की औपचारिक प्रक्रिया) बड़ी ठगी (₹5 लाख से ऊपर) के मामलों में सीधे जाएं।

🚨 नागरिक सावधानी: 1930 डायल करने से पहले यह जानकारी हाथ में रखें

जब आप 1930 पर कॉल करते हैं, तो ऑपरेटर के पास बातचीत के लिए केवल 3 से 5 मिनट का समय होता है ताकि वह तुरंत सिस्टम में डेटा फीड कर सके। कॉल लगाने से पहले एक कागज पर यह 5 चीजें लिख लें: 1. आपके बैंक का नाम और खाता संख्या, 2. वह मोबाइल नंबर जिससे यूपीआई जुड़ा था, 3. ठगी की गई सटीक राशि और समय, 4. बैंक से आए एसएमएस में लिखा 12 अंकों का UTR/UPI Reference No, और 5. यदि आपको पता हो तो वह खाता नंबर या यूपीआई आईडी जिसमें पैसा गया। यदि आप फोन पर समय बर्बाद करेंगे या जानकारी ढूंढने लगेंगे, तो गोल्डन ऑवर के कीमती मिनट हाथ से निकल जाएंगे।

वास्तविक संख्यात्मक केस स्टडी: ₹1,80,000 की क्रेडिट कार्ड ठगी, 1930 ने 18 मिनट में फ्रीज कराई पूरी रकम

आइए भोपाल के एक सरकारी शिक्षक श्री दीवान सिंह का वास्तविक मामला देखते हैं। दीवान सिंह को एक कॉल आया जिसमें कॉलर ने खुद को एसबीआई क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड पॉइंट मैनेजर बताया। कॉलर ने एक फर्जी लिंक भेजा जिस पर क्लिक करते ही दीवान सिंह के क्रेडिट कार्ड से दो बार में कुल ₹1,80,000 कट गए और पैसा एक निजी बैंक के खाते में ट्रांसफर हो गया।

दीवान सिंह घबराए नहीं। उन्होंने ठगी के ठीक 12 मिनट बाद (दोपहर 2:14 बजे) 1930 डायल किया:

समय (Clock Time) घटना / पीड़ित की कार्रवाई 1930 और बैंक बैकएंड की प्रतिक्रिया वित्तीय सुरक्षा परिणाम
दोपहर 2:02 बजे क्रेडिट कार्ड से ₹90,000 के दो अनाधिकृत ट्रांजेक्शन हुए पैसा तुरंत जालसाज के यस बैंक खाते (Layer 1) में पहुंचा कार्ड से ₹1.80 लाख की निकासी हुई
दोपहर 2:14 बजे पीड़ित ने 1930 पर कॉल किया और UTR नंबर व बैंक विवरण दिया मध्य प्रदेश साइबर सेल ऑपरेटर ने CFCFRMS में रेड-अलर्ट दर्ज किया सिस्टम ने यस बैंक नोडल डेस्क को ऑटो-सिग्नल भेजा
दोपहर 2:20 बजे (18 मिनट बाद) जालसाज एटीएम से पैसे निकालने का प्रयास कर रहा था यस बैंक ने उस खाते पर तत्काल 'Debit Freeze' लगा दिया एटीएम स्क्रीन पर 'Transaction Declined' आया
अंतिम परिणाम (15 दिन बाद) पीड़ित ने भोपाल कोर्ट में बीएनएसएस धारा 503 का आवेदन दिया न्यायालय ने बैंक को पूरा ₹1,80,000 पीड़ित को लौटाने का आदेश दिया 100% धन की सुरक्षित वापसी हुई (₹1 का भी नुकसान नहीं हुआ)

स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: 1930 पर कॉल करने और पोर्टल पर शिकायत पूरी करने के 5 चरण

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ऑनलाइन ठगी का शिकार होने पर अपने पैसे की सुरक्षा और कानूनी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए इन 5 चरणों का पालन करें:

  1. स्टेप 1 (चरण 1): तुरंत 1930 डायल करें (गोल्डन ऑवर): अपने मोबाइल से 1930 डायल करें। अपनी पसंदीदा भाषा (हिंदी या अंग्रेजी) चुनें। ऑपरेटर के कनेक्ट होते ही घबराए बिना बताएं कि आपके साथ साइबर वित्तीय फ्रॉड हुआ है।
  2. स्टेप 2: बुनियादी वित्तीय जानकारी दर्ज कराएं: ऑपरेटर को निम्नलिखित बिंदु स्पष्ट बताएं:
    • आपका नाम, मोबाइल नंबर और आधार से जुड़ा बैंक खाता।
    • ठगी का माध्यम (UPI, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या वॉलेट)।
    • वह बैंक एसएमएस जिसमें 12 अंकों का UTR / Ref No लिखा है।
    • धोखेबाज का वह फोन नंबर या लिंक जिससे संपर्क हुआ था।
    ऑपरेटर तत्काल सिस्टम में टिकट दर्ज करके संबंधित बैंक को फ्रीज सिग्नल भेज देगा।
  3. स्टेप 3: मोबाइल पर आई पावती संख्या (Acknowledgment Number) प्राप्त करें: कॉल समाप्त होते ही आपके मोबाइल पर गृह मंत्रालय (MHA) की ओर से 14 अंकों की एक शिकायत पावती संख्या (जैसे 2026XXXXXXXXXXXX) और एक लॉगिन पासवर्ड का एसएमएस आएगा।
  4. स्टेप 4: 24 घंटे के भीतर cybercrime.gov.in पर लॉगिन करके दस्तावेज अपलोड करें: राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर जाएं। 'Report Financial Fraud' पर क्लिक करें। अपने पावती नंबर और पासवर्ड से लॉगिन करें। वहां घटना का पूरा लिखित विवरण दर्ज करें और बैंक स्टेटमेंट, फर्जी एसएमएस, व्हाट्सएप चैट और कॉलिंग स्क्रीनशॉट की पीडीएफ फाइलें अपलोड करके 'Final Submit' करें।
  5. स्टेप 5: पुलिस जांच अधिकारी (IO) से संपर्क और कोर्ट रिलीज: आपकी शिकायत संबंधित जिले के साइबर पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित हो जाएगी। जांच अधिकारी बैंक से संपर्क करके यह पुष्टि करेगा कि पैसा होल्ड हो चुका है। इसके बाद जांच अधिकारी से 'Seizure / Freeze Certificate' लें और अपने स्थानीय न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में बीएनएसएस धारा 503 का प्रार्थना पत्र देकर पैसे को अपने खाते में वापस क्रेडिट करवाएं।

अगर 1930 नंबर व्यस्त आए या कॉल न लगे तो क्या वैकल्पिक उपाय करें?

कई बार अत्यधिक कॉल लोड के कारण 1930 की लाइनें व्यस्त आ सकती हैं। यदि दो बार मिलाने पर भी कॉल न लगे, तो 1 मिनट भी व्यर्थ न गंवाएं। तुरंत निम्नलिखित दो वैकल्पिक कदम उठाएं:

  • 1. सीधे NCRP पोर्टल पर जाएं: अपने मोबाइल ब्राउज़र पर तुरंत https://cybercrime.gov.in/ खोलें और 'Citizen Login' पर क्लिक करें। अपना मोबाइल नंबर और ओटीपी डालकर सीधे 'Report Financial Fraud' फॉर्म भरें। पोर्टल पर सबमिट होते ही वही स्वचालित अलर्ट बैंकों को चला जाता है जो 1930 कॉल से जाता है।
  • 2. अपने बैंक के टोल-फ्री फ्रॉड नंबर पर कॉल करें: अपने बैंक के 24x7 इमरजेंसी फ्रॉड हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके कहें—"मेरे खाते से अनऑथराइज्ड ट्रांजेक्शन हुआ है, कृपया तत्काल बेनिफिशियरी बैंक को चार्ज-बैक अलर्ट भेजें और मेरा खाता डेबिट-फ्रीज करें।" प्रमुख बैंकों के आपातकालीन नंबर (SBI: 1800111109, HDFC: 18001600, ICICI: 18001080, PNB: 18001802222) हमेशा काम करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA FAQs - 1930 Helpline)

Q1. क्या 1930 पर कॉल करने के लिए कोई टेलीकॉम शुल्क या फीस लगती है?

नहीं। 1930 भारत सरकार द्वारा संचालित एक पूर्णतः टोल-फ्री (Toll-Free) राष्ट्रीय आपातकालीन हेल्पलाइन है। किसी भी मोबाइल नेटवर्क या लैंडलाइन से इस पर कॉल करने के लिए ₹1 का भी बैलेंस नहीं कटता।

Q2. अगर ठगी हुए 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका हो, तो क्या 1930 पर कॉल कर सकते हैं?

हाँ, आप कभी भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हालांकि, समय बीतने के साथ पैसे की नकद निकासी की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन फिर भी शिकायत दर्ज करने से जालसाज का बैंक खाता और सिम कार्ड हमेशा के लिए ब्लॉक हो जाता है, जिससे वह अन्य लोगों को नहीं ठग पाता और जांच में उसके पकड़े जाने पर संपत्ति कुर्की से पैसा मिल सकता है।

Q3. क्या 1930 पर कॉल करने के बाद थाने में अलग से जाना अनिवार्य है?

सामान्य वित्तीय ठगी में जब तक पैसा होल्ड हो जाता है, आपको तुरंत थाने जाने की आवश्यकता नहीं होती। 1930 की शिकायत ही जांच अधिकारी को फॉरवर्ड हो जाती है। जब न्यायालय से पैसा रिलीज कराने की बारी आती है या यदि ठगी की रकम बहुत बड़ी (जैसे ₹5 लाख से अधिक) हो, तब औपचारिक एफआईआर पर हस्ताक्षर करने के लिए थाने जाना पड़ता है।

Q4. क्या 1930 पर विदेशी नंबरों से हुए व्हाट्सएप या टेलीग्राम फ्रॉड की रिपोर्ट हो सकती है?

हाँ। भले ही जालसाज +92, +84 या किसी अन्य विदेशी कंट्री कोड से मैसेज कर रहा हो, लेकिन जिस भारतीय बैंक खाते या यूपीआई क्यूआर कोड में आपने पैसा ट्रांसफर किया है, वह भारत के बैंकिंग सिस्टम का हिस्सा होता है। 1930 उस भारतीय खाते को तत्काल फ्रीज कर देता है।

Q5. होल्ड कराया गया पैसा मेरे बैंक खाते में वापस कैसे आएगा?

जब पैसा जालसाज के खाते में फ्रीज हो जाता है, तो बैंक उसे सीधे आपको नहीं दे सकता। इसके लिए आपके जिले के न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में बीएनएसएस धारा 503 (पुरानी धारा 457 CrPC) के तहत 'Release Application' दायर करनी होती है। पुलिस रिपोर्ट देखकर मजिस्ट्रेट बैंक को आदेश देता है और बैंक पैसा सीधे आपके खाते में एनईएफटी कर देता है।

Q6. क्या क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से कटे पैसे भी 1930 से रुक सकते हैं?

हाँ। 1930 प्रणाली सभी प्रमुख क्रेडिट कार्ड जारीकर्ताओं (जैसे Visa, Mastercard, RuPay) और पेमेंट गेटवे (जैसे Razorpay, BillDesk) के साथ एकीकृत है। यदि कार्ड से अवैध ई-कॉमर्स खरीदारी हुई है, तो सिस्टम मर्चेंट को मर्चेंट-होल्ड (Merchant Hold) का निर्देश भेजकर ऑर्डर कैंसिल और रिफंड करा देता है।

💻 नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर विस्तृत ई-एफआईआर दर्ज करने की चरणबद्ध प्रक्रिया

1930 पर फोन करने के बाद गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज करना अनिवार्य है। इसे पूरा करने के लिए नीचे दिए गए क्रम का पालन करें:

  1. स्टेप 1 (चरण 1): सबसे पहले cybercrime.gov.in पोर्टल पर जाएं और 'Report Crime Related to Women/Children' अथवा 'Report Other Cyber Crime' में से 'Financial Fraud' विकल्प पर क्लिक करें।
  2. स्टेप 2 (चरण 2): 'Citizen Login' पर जाकर अपना नाम, चालू मोबाइल नंबर और राज्य दर्ज करें। आपके मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करके प्रोफाइल बनाएं।
  3. स्टेप 3 (चरण 3): 'Incident Details' सेक्शन में घटना की सटीक तारीख, समय और घटना का संक्षिप्त विवरण (Summary of Incident) हिंदी या अंग्रेजी में लिखें।
  4. स्टेप 4 (चरण 4): 'Suspect Details' में यदि आपके पास जालसाज का फोन नंबर, बैंक खाता संख्या, यूपीआई आईडी, टेलीग्राम यूजरनेम या वेबसाइट लिंक उपलब्ध हो तो उसे दर्ज करें।
  5. स्टेप 5 (चरण 5): 'Supporting Evidence' में बैंक स्टेटमेंट, पैसे कटने का एसएमएस स्क्रीनशॉट, व्हाट्सएप/टेलीग्राम चैट हिस्ट्री और फर्जी ऐप का स्क्रीनशॉट पीडीएफ फॉर्मेट में अपलोड करें।
  6. स्टेप 6 (चरण 6): अंत में फॉर्म सबमिट करें। आपको 15 अंकों का एक यूनिक एक्नॉलेजमेंट नंबर (Acknowledgment Number) मिलेगा। इस पावती को प्रिंट करके अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में जमा कराएं।

🎯 साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए कानूनी सुरक्षा: बैंक की विफलता पर मुआवजा कैसे पाएं?

यदि आपने अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन की सूचना 3 कार्यदिवसों के भीतर अपने बैंक को दे दी थी, और फिर भी बैंक आपके खाते से पैसे कटने से रोकने में विफल रहा, तो आरबीआई के जीरो लायबिलिटी सर्कुलर (RBI Circular on Limiting Liability of Customers) के तहत बैंक आपको पूरा पैसा वापस करने के लिए बाध्य है। यदि बैंक आनाकानी करे, तो आप बैंकिंग लोकपाल में शिकायत करके ब्याज सहित हर्जाना मांग सकते हैं।

⚙️ पर्दे के पीछे CFCFRMS सिस्टम कैसे काम करता है? (How Banks Coordinate in Real-Time)

जब आप 1930 पर कॉल करते हैं, तो ऑपरेटर सिर्फ आपकी शिकायत नोट नहीं करता, बल्कि गृह मंत्रालय के CFCFRMS (Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System) पोर्टल पर तुरंत एक 'ऑटोमेटेड फ्रॉड अलर्ट' जनरेट करता है:

  • टियर-1 (पहला बैंक खाता): जैसे ही आपके बैंक से पैसा कटता है, संबंधित बैंक का 24x7 साइबर नोडल डेस्क तुरंत उस रकम को डेबिट लियन में डालता है।
  • टियर-2 और टियर-3 (म्यूल अकाउंट्स की चेन): ठग आमतौर पर पैसे को तुरंत 5 से 10 अलग-अलग खातों या डिजिटल वॉलेट्स (जैसे Paytm, Airtel Payments Bank, Crypto P2P) में विभाजित कर देते हैं। सीएफसीडीआरएमएस सिस्टम स्वचालित रूप से इन सभी सेकेंडरी खातों को ट्रैक करके एक साथ 20 से अधिक बैंकों को फ्रीज रिक्वेस्ट भेजता है।
  • सफलता की संभावना: यदि कॉल फ्रॉड के पहले 15 से 45 मिनट के भीतर कर दी जाए, तो 80% से अधिक मामलों में फंड निकासी से पहले ही पैसा सिस्टम में सुरक्षित रोक लिया जाता है।
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