काम की बात (Quick Summary): जब भी आप कोई फ्लैट, मकान या प्लॉट ₹50 लाख या उससे अधिक कीमत पर खरीदते हैं, तो आयकर विभाग की नज़र में आप केवल एक खरीदार नहीं, बल्कि सरकार के 'टैक्स कलेक्टर' बन जाते हैं। धारा 194-IA के तहत यह कानूनन खरीदार की ज़िम्मेदारी है कि वह विक्रेता को पूरी रकम न देकर 1% टीडीएस काटकर सीधे सरकारी खजाने में जमा करे। यदि खरीदार ऐसा नहीं करता, तो उसे 1% प्रति माह ब्याज और धारा 234E के तहत **₹200 प्रतिदिन की लेट फीस** भरनी पड़ती है। जानिए Form 26QB ऑनलाइन भरने का आसान तरीका।
🏛️ आधिकारिक TDS व चालान भुगतान पोर्टल्स
- Income Tax e-Filing Form 26QB: eportal.incometax.gov.in (ई-पे टैक्स मेन्यू में Form 26QB चालान)
- TDS TRACES Official Portal: tdscpc.gov.in (विक्रेता के लिए Form 16B डाउनलोड लिंक)
बजट 2024 का नया संशोधन: कई खरीदार होने पर ₹50 लाख का नया नियम (AEO Direct Answer)
पहले लोग यह लूपहोल निकालते थे कि अगर ₹80 लाख का मकान है, तो दो भाई ₹40-40 लाख में खरीदकर कहते थे कि हमारा व्यक्तिगत हिस्सा ₹50 लाख से कम है, इसलिए टीडीएस नहीं कटेगा। बजट 2024 में धारा 194-IA(2) में संशोधन करके 1 अक्टूबर 2024 से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि ₹50 लाख की सीमा कुल **'कुल एग्रीगेट प्रॉपर्टी वैल्यू'** पर देखी जाएगी। यदि पूरी प्रॉपर्टी ₹50 लाख या उससे अधिक की है, तो चाहे 4 खरीदार हों या 4 विक्रेता, हर किसी के भुगतान पर 1% टीडीएस कटेगा ही कटेगा।
क्या खरीदार को टैन नंबर (TAN) की जरूरत होती है?
बिल्कुल नहीं! आम नागरिकों की सुविधा के लिए आयकर विभाग ने धारा 194-IA को 'पैन-आधारित' (PAN-based TDS) बनाया है। इसके लिए खरीदार को किसी टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर (TAN) की ज़रूरत नहीं होती। खरीदार अपने सामान्य पैन कार्ड नंबर और विक्रेता के पैन कार्ड नंबर का इस्तेमाल करके ही Form 26QB भर सकता है।
5-कॉलम तुलना तालिका: Section 194-IA के मुख्य नियम व समय-सीमाएं (2026)
| मापदंड | कानूनी नियम | समय-सीमा (Deadline) | पेनाल्टी / जुर्माना | सिटिजन टिप |
|---|---|---|---|---|
| लागू होने की सीमा | कुल प्रॉपर्टी मूल्य या सर्कल रेट ₹50 लाख+ | बयाना व हर किस्त पर | यदि न काटा तो 1% प्रति माह ब्याज | दोनों में से जो ज़्यादा हो (सेल प्राइस या सर्कल रेट) उस पर टीडीएस कटेगा। |
| TDS जमा करने का माध्यम | Form 26QB (ऑनलाइन ई-पे टैक्स) | जिस महीने टीडीएस काटा, उसके अगले महीने की 30 तारीख | धारा 234E: ₹200 प्रतिदिन लेट फीस | रजिस्ट्री के तुरंत बाद चालान भर दें, देरी न करें। |
| TDS सर्टिफिकेट (Form 16B) | TRACES पोर्टल से डाउनलोड | चालान भरने के 15 दिनों के भीतर | विक्रेता अपना 26AS/AIS क्लेम नहीं कर पाएगा | विक्रेता को Form 16B की कॉपी जरूर सौंपें। |
| विक्रेता का पैन न होने पर | TDS की दर 20% हो जाएगी | Section 206AA | 1% की जगह 20% का भारी नुकसान | सौदा पक्का करने से पहले विक्रेता का पैन कार्ड वेरिफाइड लें। |
| ग्रामीण कृषि भूमि पर | 0% TDS (पूरी छूट) | लागू नहीं | कोई टीडीएस नहीं कटता | खेती की जमीन पर गलती से भी TDS न काटें। |
स्टेप-बाय-स्टेप: आयकर पोर्टल पर Form 26QB कैसे भरें और चालान कैसे बनाएं?
बिना किसी सीए या वकील को पैसे दिए घर बैठे Form 26QB भरने के 5 आसान चरण:
- आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें: आधिकारिक वेबसाइट (eportal.incometax.gov.in) पर खरीदार के पैन कार्ड से लॉगिन करें। 'e-File' मेन्यू में जाकर 'e-Pay Tax' पर क्लिक करें।
- 'New Payment' में Form 26QB (TDS on Property) चुनें: स्क्रीन पर कई चालान दिखेंगे। वहां 'TDS on Sale of Property (Form 26QB)' वाले बॉक्स पर 'Proceed' पर क्लिक करें।
- खरीदार और विक्रेता का विवरण दर्ज करें: खरीदार का नाम, पैन, पता और मोबाइल नंबर भरें। इसके बाद विक्रेता (Seller) का सही पैन कार्ड नंबर डालें (सिस्टम अपने आप विक्रेता का नाम स्क्रीन पर दिखाएगा जिससे पुष्टि हो जाएगी)। यदि एक से अधिक खरीदार या विक्रेता हैं, तो 'Co-owners' विकल्प चुनें।
- प्रॉपर्टी और भुगतान का विवरण भरें: प्रॉपर्टी का पूरा पता, एग्रीमेंट की तारीख, कुल बिक्री मूल्य, स्टैंप ड्यूटी मूल्य और इस किस्त में दी जा रही रकम भरें। सिस्टम अपने आप 1% टीडीएस की रकम (जैसे ₹60 लाख पर ₹60,000) कैलकुलेट कर देगा।
- नेटबैंकिंग या यूपीआई से भुगतान करें और चालान रसीद लें: 'Continue' दबाकर अपने बैंक की नेटबैंकिंग, डेबिट कार्ड या यूपीआई से 1% टीडीएस का ऑनलाइन भुगतान करें। तुरंत एक 'Challan Receipt' (CRN नंबर सहित) जनरेट होगी। इसे सेव कर लें और 4 दिन बाद TRACES पोर्टल (tdscpc.gov.in) पर जाकर विक्रेता के लिए **Form 16B** डाउनलोड कर लें।
⚠️ एनआरआई (NRI) से प्रॉपर्टी खरीदते समय 1% TDS नहीं लगता!
यह बहुत गंभीर कानूनी गलती है जो अक्सर लोग करते हैं। धारा 194-IA का 1% TDS केवल तभी लागू होता है जब विक्रेता 'निवासी भारतीय' (Resident Indian) हो। यदि आप किसी एनआरआई (NRI) से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो धारा 194-IA लागू नहीं होती बल्कि **धारा 195** लागू होती है, जिसके तहत खरीदार को TAN नंबर लेना पड़ता है और 1% नहीं बल्कि लगभग 20% से 12.5% + सरचार्ज की दर से भारी टीडीएस काटना होता है। यदि एनआरआई पर आपने 1% टीडीएस काटा, तो खरीदार को लाखों रुपये की पेनल्टी भरनी पड़ सकती है।